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                <title>Raipur News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Raipur News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच तेज, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के बेटे से EOW की लंबी पूछताछ</title>
                                    <description><![CDATA[शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच का दायरा बढ़ा, वैभव अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ; एजेंसी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/investigation-into-chhattisgarh-liquor-scam-intensifies-eows-long-interrogation-of/article-58201"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-liquor-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने उनसे रामगोपाल अग्रवाल के पिछले कुछ वर्षों के ठिकानों, आर्थिक गतिविधियों और संपर्कों को लेकर कई सवाल किए। हालांकि पूछताछ के बाद न तो किसी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है और न ही एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि यह मामला पहले से ही कई बड़े नामों और आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि वैभव अग्रवाल से सुबह शुरू हुई पूछताछ देर शाम तक चली। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने केवल पारिवारिक जानकारी ही नहीं बल्कि कथित आर्थिक नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और उन लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाने की कोशिश की, जो पिछले कुछ वर्षों में रामगोपाल अग्रवाल के संपर्क में रहे। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अवैध धन का प्रवाह किन-किन माध्यमों से हुआ। फिलहाल एजेंसी ने पूछताछ के विषय और उसमें सामने आई जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियां उनकी वास्तविक लोकेशन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। EOW के सूत्रों के अनुसार हाल ही में उन्हें प्रदेश में होने की सूचना मिली थी। इसी इनपुट के बाद जांच में तेजी लाई गई और उनके बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। एजेंसी की ओर से अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के तीन बड़े कथित आर्थिक मामलों में सामने आया है। इनमें करीब 3,200 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले, कोल लेवी वसूली और कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि इन सभी मामलों में आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के साथ-साथ अदालती प्रक्रिया भी जारी है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कथित शराब घोटाले की बात करें तो जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में एक संगठित नेटवर्क के जरिए अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क से हजारों करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन की आशंका है। इस मामले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। हालांकि संबंधित पक्षों ने समय-समय पर आरोपों से इनकार किया है और कई मामलों में कानूनी लड़ाई जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कोल लेवी मामले में भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW का आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़ा मामला भी जांच एजेंसियों के लिए अहम बना हुआ है। EOW का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में नियमों का उल्लंघन किया गया और कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए 80 घरों पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों का हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह से तैनात रही भारी पुलिस फोर्स, महिलाओं की पुलिस से धक्का-मुक्की, प्रशासन बोला- प्रभावित परिवारों को नया रायपुर में मिलेगा आवास]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ruckus-by-villagers-over-bulldozer-on-80-houses-for-mla/article-57300"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nakti-village-demolition.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर के माना इलाके स्थित नकटी गांव में सोमवार सुबह उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने करीब 80 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे। जैसे ही जेसीबी मशीनें गांव में पहुंचीं, ग्रामीण अपने घरों के सामने जमा हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और पुलिस व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रशासन के अनुसार जिन मकानों को हटाया गया, उनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने 32 मकान भी शामिल हैं। कार्रवाई को देखते हुए रविवार देर रात से ही गांव और आसपास के इलाके में एक हजार से अधिक पुलिस जवान तैनात कर दिए गए थे। सुबह प्रशासनिक टीम ने सुरक्षा घेरे के बीच कार्रवाई शुरू की। कई लोगों ने जेसीबी मशीनों के सामने खड़े होकर विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर अभियान जारी रखा।<img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd"> </p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के दौरान गांव का माहौल बेहद भावुक नजर आया। कई परिवार अपने घरों का सामान बाहर निकालते दिखाई दिए। महिलाएं रोती-बिलखती रहीं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे मलबे के बीच खड़े होकर अपने टूटते घरों को देखते रहे। इस बीच एक छोटी बच्ची ने रोते हुए कहा कि उसने सुबह से कुछ नहीं खाया, क्योंकि घर में खाना बनाने का मौका ही नहीं मिला। बच्ची की यह बात सुनकर मौके पर मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि फिलहाल उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे। उनका आरोप है कि दो दिन पहले ही क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान भरोसा दिलाया था कि बारिश के मौसम में किसी का घर नहीं हटाया जाएगा। इसी आश्वासन के कारण लोगों ने तत्काल किसी वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी भी नहीं की थी। ऐसे में सोमवार सुबह अचानक हुई कार्रवाई से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। कार्रवाई के दौरान कई जगह महिलाओं ने पुलिस के सामने बैठकर विरोध करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने जेसीबी मशीनों को रोकने का भी प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की और सुरक्षा घेरे में कार्रवाई जारी रखी। हालांकि पूरे अभियान के दौरान कई बार तनावपूर्ण माहौल बना रहा और ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पहले से तय योजना के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक विधायक कॉलोनी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने दावा किया कि सभी पात्र परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवंटन की कार्रवाई भी जारी है और लोगों को नियमानुसार नए मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले मकान तोड़ना उचित नहीं था। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अब भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें नया मकान कब मिलेगा और वहां तक पहुंचने की व्यवस्था कैसे होगी। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बेघर होने से उनके सामने रहने, खाने और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नकटी गांव में कई परिवार वर्षों से रह रहे थे और उन्होंने अपने घरों को धीरे-धीरे बनाकर तैयार किया था। अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका सामान खुले में आ गया है। कई लोग अपने घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कुछ परिवार मलबे के बीच ही बैठे रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव में माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है और इलाके में पुलिस बल की तैनाती जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:28:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रायपुर में अवैध नल कनेक्शन नियमित कराने का शुल्क बढ़ा, कांग्रेस ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की नई योजना के तहत घरेलू कनेक्शन वैध कराने के लिए 20,882 रुपये जमा करने होंगे, विपक्ष ने आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/congress-raised-questions-on-increase-in-fee-for-regularizing-illegal/article-57127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-water-connection.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर नगर निगम ने शहर में वर्षों से चल रहे अवैध नल कनेक्शनों को नियमित करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। निगम का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य जलकर राजस्व बढ़ाना और सभी जल उपभोक्ताओं को आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल करना है। हालांकि योजना की घोषणा के साथ ही इसे लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। घरेलू अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए 20 हजार रुपये से अधिक की राशि तय किए जाने पर कांग्रेस ने निगम प्रशासन और राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि पहले इसी प्रक्रिया के लिए केवल 600 रुपये शुल्क लिया जाता था, जबकि अब आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार रायपुर शहर में लगभग 3.50 लाख संपत्तियां हैं, लेकिन इनमें से केवल 2.21 लाख संपत्तियों के नल कनेक्शन ही निगम के रिकॉर्ड में वैध रूप से दर्ज हैं। इसका मतलब यह है कि करीब 90 हजार संपत्तियों में ऐसे जल कनेक्शन हैं जो वर्षों से पानी की आपूर्ति ले रहे हैं, लेकिन उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। निगम प्रशासन का मानना है कि ऐसे कनेक्शनों की वजह से जलकर के रूप में मिलने वाला राजस्व प्रभावित हो रहा है और इससे नगर निगम को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी जोन कार्यालय अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध जल कनेक्शनों की पहचान करें और उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया तेज करें। इसी उद्देश्य से 'एकमुश्त जलकर निपटान योजना' लागू की गई है। इस योजना के तहत 15 जुलाई से 15 अक्टूबर 2026 तक नागरिकों को अपने अवैध नल कनेक्शन नियमित कराने का अवसर मिलेगा। निगम ने इसे अंतिम मौका बताया है और स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योजना के अनुसार आधा इंच के घरेलू नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए 5 हजार रुपये नियमितीकरण शुल्क और 15,882 रुपये वैध कनेक्शन शुल्क देना होगा। इस तरह कुल 20,882 रुपये एकमुश्त जमा करने होंगे। वहीं व्यावसायिक उपयोग के लिए आधा इंच के कनेक्शन पर 15 हजार रुपये नियमितीकरण शुल्क और 15,882 रुपये कनेक्शन शुल्क मिलाकर कुल 30,882 रुपये का भुगतान करना होगा। निगम ने यह भी साफ किया है कि पूरी राशि एक बार में जमा करनी होगी। इसके अलावा संबंधित संपत्ति की यूनिक आईडी से कनेक्शन को लिंक करना और निर्धारित प्रारूप में अनुबंध करना भी अनिवार्य रहेगा। नगर निगम का कहना है कि इस अभियान के पूरा होने के बाद अवैध कनेक्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन नहीं करता है तो उसका जल कनेक्शन काटा जा सकता है। इसके साथ ही नियमितीकरण शुल्क की तीन गुना तक जुर्माना राशि भी वसूली जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य सभी उपभोक्ताओं को नियमों के दायरे में लाना और जल वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर कांग्रेस ने इस योजना को आम लोगों के हितों के खिलाफ बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए केवल 600 रुपये का शुल्क लिया जाता था। अब उसी प्रक्रिया के लिए 20 हजार रुपये से अधिक की राशि तय कर दी गई है, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार जो वर्षों से पानी का उपयोग कर रहे हैं, उनके लिए इतनी बड़ी राशि एक साथ जमा करना आसान नहीं होगा। नगर निगम का पक्ष है कि जल वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए यह अभियान जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि वैध कनेक्शन होने से भविष्य में उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही जल आपूर्ति से जुड़ी योजनाओं का लाभ भी केवल पंजीकृत उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:14 +0530</pubDate>
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                <title>रायपुर के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा खामियां उजागर, सुधार के निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[निगम की संयुक्त टीम की जांच में फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और लिफ्ट सुरक्षा में मिली कई कमियां, एक सप्ताह में सुधार के आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-56796"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-coaching-center-inspection.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में शहर के कई प्रमुख कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी गंभीर कमियां पाई गई हैं। यह जांच अभियान जिला प्रशासन के निर्देश पर चलाया गया, जिसमें फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और लिफ्ट सुरक्षा मानकों की विस्तृत समीक्षा की गई। निरीक्षण के बाद प्रशासन ने सभी संबंधित संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर कमियां दूर करने के सख्त निर्देश दिए हैं।  निगम की टीम ने शहर के प्रमुख कोचिंग संस्थानों एलन, अनअकादमी, विद्यापीठ, आरसीसी और अकादजा का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर छात्रों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक पाई गई, जिससे कक्षाओं में भीड़भाड़ की स्थिति बनी हुई थी। एलन, अनअकादमी और विद्यापीठ के कुछ क्लासरूम में छात्रों की संख्या तय मानक से अधिक मिली, जिस पर अधिकारियों ने आपत्ति जताई। इसके अलावा कई संस्थानों में वेंटिलेशन की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं पाई गई, जिससे छात्रों के लिए असुविधा की स्थिति बन रही थी। जांच के दौरान आरसीसी और अकादजा कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की स्थिति और भी गंभीर पाई गई। यहां फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी, आपातकालीन निकासी मार्गों की अनुपयुक्त व्यवस्था और वेंटिलेशन सिस्टम की खराब स्थिति सामने आई। अधिकारियों ने मौके पर ही संबंधित प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी तरह की लापरवाही छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम की टीम ने यह भी पाया कि कई संस्थानों में लिफ्ट सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। कुछ जगहों पर फायर एक्सटिंग्विशर की नियमित जांच नहीं हुई थी, जबकि आपात स्थिति में निकासी के लिए पर्याप्त संकेतक भी नहीं लगे थे। अधिकारियों ने इन सभी खामियों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निगम ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में सुधार नहीं किया गया तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण अभियान के दौरान प्रशासनिक टीम ने कोचिंग सेंटरों के प्रबंधन को सुरक्षा नियमों के महत्व के बारे में भी अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन करते हैं, ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। किसी भी आपात स्थिति में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सभी संस्थानों को निर्धारित गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर और नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में यह विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था। निरीक्षण टीम में नगर निगम के अभियंता, अग्निशमन विभाग के अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारी शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए सभी संस्थानों को नियमित रूप से नियमों का पालन करना होगा। इस कार्रवाई के बाद शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों में भी हलचल देखी जा रही है। कई संस्थानों ने अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू कर दी है और सुधार कार्यों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी ताकि छात्रों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। रायपुर के कोचिंग सेंटरों में सामने आई यह स्थिति एक गंभीर संकेत है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लेकर और अधिक सतर्कता की आवश्यकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:30:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में 10वीं छात्र की चाकू मारकर हत्या, मामूली विवाद बना खौफनाक वारदात</title>
                                    <description><![CDATA[तिल्दा के सासाहोली गांव में “मोटा कहने” की बात पर बढ़ा विवाद, स्कूल के बाद झगड़ा इतना बढ़ा कि एक छात्र की मौत, दूसरा गंभीर घायल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/the-stabbing-death-of-a-10th-class-student-in-raipur/article-56481"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-student-murder-case.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे तिल्दा क्षेत्र के सासाहोली गांव में शुक्रवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 10वीं कक्षा के छात्र की चाकू मारकर हत्या कर दी गई। मामूली कहासुनी और पुराने विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया और एक छात्र की जान चली गई, जबकि दूसरा छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया है और अस्पताल में भर्ती है।  मृतक छात्र अमन यदु (16) और आरोपी छात्र दोनों ही एक ही गांव सासाहोली के रहने वाले थे और पहले अच्छे दोस्त भी बताए जा रहे हैं। दोनों के घरों की दूरी भी बहुत कम थी, करीब 400 मीटर। दोनों ने सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में पढ़ाई की थी और 10वीं कक्षा साथ ही पास की थी। लेकिन कुछ समय पहले बोर्ड परीक्षा के दौरान आरोपी छात्र द्वारा अमन को “मोटा” कहने की बात से दोनों के बीच तनाव शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि यह बात अमन को काफी बुरी लगी थी और तभी से दोनों के बीच बातचीत लगभग बंद हो गई थी। धीरे-धीरे यह मनमुटाव गुस्से और नाराजगी में बदल गया। शुक्रवार को स्कूल की छुट्टी के बाद जब दोनों घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में फिर से दोनों आमने-सामने आ गए। यहीं से विवाद ने खतरनाक मोड़ ले लिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले दोनों के बीच बहस हुई जो कुछ ही मिनटों में हाथापाई में बदल गई। इसी दौरान अमन ने गुस्से में आकर सब्जी काटने वाला चाकू निकाल लिया और आरोपी छात्र पर हमला कर दिया। इस हमले में आरोपी छात्र घायल हो गया, लेकिन उसने किसी तरह चाकू छीन लिया और फिर अमन पर ही ताबड़तोड़ वार कर दिए। हमले में अमन के सीने और गर्दन पर गंभीर चोटें आईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। तिल्दा नेवरा थाना पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। घायल आरोपी छात्र को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल के आसपास मौजूद लोगों और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि चाकू कैसे लाया गया और विवाद की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई। इस घटना के बाद मृतक छात्र के घर में मातम छा गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न बने। स्थानीय लोगों का कहना है कि मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद अगर समय रहते सुलझा लिया जाता तो यह दर्दनाक घटना टाली जा सकती थी। स्कूल और प्रशासन स्तर पर भी किशोरों में बढ़ती आक्रामकता और छोटे विवादों के हिंसक रूप लेने को लेकर चिंता जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:58:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में RTO ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी, कर्मचारी से ₹2.63 लाख उड़ाए</title>
                                    <description><![CDATA[एपीके फाइल डाउनलोड करते ही बैंक खाते से साफ हुई रकम, पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/cyber-fraud-in-the-name-of-rto-e-challan-in-raipur/article-56475"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायपुर में साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आरटीओ ई-चालान के नाम पर एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाकर 2.63 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। घटना आजाद चौक थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां साइबर अपराधियों ने एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में घुसपैठ कर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। पीड़ित की पहचान प्रेम नगर, मोवा निवासी 35 वर्षीय आशीष वर्मा के रूप में हुई है, जो हिंदूजा फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं और उनका कार्यालय आजाद चौक क्षेत्र में स्थित है। जानकारी के मुताबिक 6 जून की दोपहर करीब 12:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया, जिसमें आरटीओ ई-चालान का हवाला दिया गया था। संदेश के साथ एक एपीके फाइल भी भेजी गई थी, जिसे देखकर पीड़ित ने इसे आधिकारिक नोटिस समझ लिया। बिना किसी शक के उन्होंने उस फाइल को डाउनलोड कर ओपन कर लिया, और यहीं से साइबर ठगों ने अपने जाल को सक्रिय कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">फाइल खुलते ही मोबाइल में एक मालवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस तक पहुंच मिल गई। कुछ ही समय में पीड़ित के एक्सिस बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 2 लाख 63 हजार 673 रुपये निकाल लिए गए। शुरुआत में आशीष वर्मा को किसी तरह की जानकारी नहीं हुई, लेकिन जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो बड़ी रकम गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल आजाद चौक थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड हो सकता है, जिसमें फर्जी लिंक और एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल को टारगेट किया जाता है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है, जिससे रकम ट्रांसफर की गई थी। साथ ही साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में ठग आमतौर पर सरकारी विभागों जैसे आरटीओ, बैंक या ट्रैफिक चालान का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति बिना जांच के लिंक या फाइल ओपन करता है, उसका फोन रिमोट एक्सेस में चला जाता है और बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान संदेश, लिंक या एपीके फाइल को बिना सत्यापन के डाउनलोड न करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कई बार लोग जल्दबाजी में आधिकारिक दिखने वाले संदेशों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में सुरक्षा जितनी आसान लगती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:58:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सीएम हाउस हाई लेवल बैठक पर साय का बयान, अटकलों पर जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[रात 10 बजे से डेढ़ बजे तक चली बैठक, मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चा पर सीएम साय ने दी सफाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a36398f862d5/article-56466"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-sai-statement.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में सीएम हाउस रायपुर में हुई सीएम हाउस हाई लेवल बैठक एक बार फिर सियासी हलकों में चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है। गुरुवार देर रात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने वरिष्ठ मंत्रियों और संगठन के शीर्ष नेताओं के साथ लंबी बैठक की, जो रात करीब 10 बजे शुरू होकर 1:40 बजे तक चली। इस बैठक के बाद जहां राजनीतिक अटकलों का दौर तेज हो गया, वहीं मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि यह कोई आपात बैठक नहीं थी और न ही इसे किसी तात्कालिक संकट के तौर पर देखा जाना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार लगातार अपने कामकाज की समीक्षा कर रही है और यह बैठक भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा थी। उन्होंने बताया कि केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा की गई है। “12 साल विश्वास के, विकास के और 12 साल बेमिसाल” जैसे अभियानों के तहत सभी मंत्रियों और विधायकों को जिम्मेदारियां दी गई हैं, जिनकी प्रगति पर चर्चा हुई है। इसी क्रम में विभागीय कामकाज का फीडबैक भी लिया गया। सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि बैठक को लेकर जो भी अटकलें लगाई जा रही हैं, उनका कोई ठोस आधार नहीं है और यह पूरी तरह सामान्य समीक्षा प्रक्रिया का हिस्सा था।</p>
<p style="text-align:justify;">रात करीब साढ़े पांच घंटे चली इस सीएम हाउस हाई लेवल बैठक में उपमुख्यमंत्री, वरिष्ठ मंत्री और संगठन के कई बड़े नेता मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में सरकार के अब तक के ढाई साल के कार्यकाल की समीक्षा की गई और आने वाले समय की रणनीति पर भी चर्चा हुई। विभागों के प्रदर्शन, योजनाओं की प्रगति और जमीनी स्तर पर कामकाज की स्थिति पर मंत्रियों से सीधा फीडबैक लिया गया। इस दौरान कई अहम योजनाओं की गति और क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठे और सुधार की जरूरत पर जोर दिया गया। इधर बैठक के समय और देर रात तक चलने को लेकर राजनीतिक गलियारों में मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलें तेज हो गई थीं। कई स्तरों पर यह चर्चा रही कि सरकार अपने मंत्रिमंडल में बदलाव या विस्तार को लेकर कोई बड़ा फैसला ले सकती है, हालांकि मुख्यमंत्री के बयान के बाद फिलहाल इन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की गई है। बैठक में मौजूद नेताओं ने भी इसे नियमित समीक्षा बैठक बताया, लेकिन अंदरखाने चर्चाएं अभी भी शांत नहीं हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएम साय ने यह भी जानकारी दी कि महाराष्ट्र के कुछ विधायकों का एक दल छत्तीसगढ़ दौरे पर आया था और उन्होंने सीएम हाउस में मुलाकात की। यह दल यहां धान खरीदी की प्रक्रिया और राज्य की कृषि व्यवस्था को समझने के लिए आया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे राज्यों के प्रतिनिधियों का इस तरह अध्ययन के लिए आना सकारात्मक संकेत है और इससे छत्तीसगढ़ की नीतियों की पहचान बढ़ती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में यूसीसी लागू करने की दिशा में काम चल रहा है और इसके लिए कमेटी का गठन किया गया है, लेकिन इसे इस मानसून सत्र में लाना संभव नहीं होगा। उन्होंने संकेत दिया कि यह एक लंबी प्रक्रिया है और सभी पहलुओं पर विचार के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा। रायपुर स्थित सीएम हाउस में हुई यह देर रात की बैठक भले ही सरकार की नियमित समीक्षा प्रक्रिया बताई जा रही हो, लेकिन इसके राजनीतिक मायने लगातार निकाले जा रहे हैं। खासकर जिस तरह से वरिष्ठ मंत्रियों और संगठन के नेताओं की मौजूदगी रही और देर रात तक मंथन चला, उसने सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:47:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>री-NEET परीक्षा में शामिल होगा जेल में बंद छात्र, हाईकोर्ट का आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस सुरक्षा में परीक्षा दिलाने के दिए निर्देश, छात्रों की सुविधा के लिए रेलवे 10 ट्रेनों में लगाएगा 40 अतिरिक्त कोच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/jailed-students-will-appear-in-re-neet-exam-order-of-high/article-56389"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/re-neet-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">री-NEET 2026 परीक्षा से पहले छत्तीसगढ़ में एक अनोखा मामला सामने आया है। रायपुर सेंट्रल जेल में बंद एक छात्र को हाईकोर्ट ने परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने मामले की तत्काल सुनवाई करते हुए पुलिस और जेल प्रशासन को निर्देश दिया है कि छात्र को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा केंद्र तक पहुंचाया जाए और परीक्षा पूरी होने के बाद वापस जेल लाया जाए। कोर्ट के इस फैसले की शिक्षा और कानूनी क्षेत्र में व्यापक चर्चा हो रही है। छात्र रायपुर के खमतराई थाना क्षेत्र में दर्ज एक आपराधिक मामले के कारण वर्तमान में रायपुर सेंट्रल जेल में बंद है। छात्र ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अंतरिम जमानत या परीक्षा में शामिल होने की विशेष अनुमति मांगी थी। याचिका में कहा गया था कि वह NEET परीक्षा की तैयारी लंबे समय से कर रहा है और उसका भविष्य इस परीक्षा पर निर्भर है। इसके साथ छात्र का एडमिट कार्ड भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान छात्र के वकील ने यह भी आग्रह किया कि जेल में अध्ययन के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाए, ताकि परीक्षा की तैयारी प्रभावित न हो। इस पर कोर्ट ने जेल प्रशासन को नियमों के तहत आवश्यक किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार महत्वपूर्ण है और कानूनी प्रक्रिया के बीच भी छात्र को परीक्षा देने का अवसर मिलना चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के आदेश के बाद रायपुर पुलिस और जेल प्रशासन परीक्षा के दिन विशेष सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी में जुट गया है। छात्र को पुलिस अभिरक्षा में परीक्षा केंद्र तक ले जाया जाएगा। परीक्षा समाप्त होते ही उसे वापस जेल पहुंचाया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। इधर, 21 जून को होने वाली री-NEET परीक्षा को लेकर प्रदेशभर में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बिलासपुर जिले में 19 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह ने विभिन्न परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों ने सुरक्षा, यातायात, बिजली, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की समीक्षा की है। पिछले वर्षों में परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक की घटनाओं को देखते हुए इस बार सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी, अतिरिक्त पुलिस बल और प्रवेश प्रक्रिया को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया जाएगा।छात्रों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बिलासपुर स्थित सिम्स मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने 24 घंटे की मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन शुरू की है। इस हेल्पलाइन के माध्यम से परीक्षा को लेकर तनाव, चिंता या घबराहट महसूस करने वाले छात्र विशेषज्ञों से सलाह ले सकेंगे। अधिकारियों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान मानसिक दबाव काफी बढ़ जाता है, इसलिए यह पहल छात्रों के लिए मददगार साबित होगी। री-NEET परीक्षा के मद्देनजर रेलवे ने भी विशेष तैयारियां की हैं। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने परीक्षा देने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए 10 ट्रेनों में 40 अतिरिक्त जनरल कोच लगाने का फैसला किया है। इसके अलावा कुछ रूटों पर विशेष मेमू ट्रेनों का संचालन भी किया जाएगा ताकि विद्यार्थियों को समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में परेशानी न हो। रेलवे प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे यात्रा की योजना पहले से बनाएं और ट्रेन की समय-सारिणी की जानकारी पहले ही प्राप्त कर लें। रेलवे का कहना है कि परीक्षा के दौरान यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 14:39:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिक्षकों की कमी पर भड़के छात्र, विरोध के बाद तीन घंटे में समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[रायपुर के माधवराव सप्रे स्कूल में 12वीं के 46 छात्रों को TC लेने की सलाह, प्रदर्शन के बाद DMF फंड से शिक्षकों की व्यवस्था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/solution-in-three-hours-after-student-protest-over-shortage-of/article-56295"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/madhavrao-sapre-school.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के प्रतिष्ठित माधवराव सप्रे उत्कृष्ट हिंदी मीडियम स्कूल में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत छात्रों के लिए परेशानी लेकर आई। 12वीं कक्षा में कॉमर्स और आर्ट्स विषय के छात्रों को यह कहकर झटका दिया गया कि स्कूल में संबंधित विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए वे ट्रांसफर सर्टिफिकेट (TC) लेकर किसी दूसरे स्कूल में प्रवेश ले लें। स्कूल प्रबंधन की इस सलाह से छात्र और उनके अभिभावक परेशान हो गए। मामला तेजी से बढ़ा और बुधवार को बड़ी संख्या में छात्र कलेक्ट्रेट पहुंच गए, जहां उन्होंने प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। छात्रों के विरोध के बाद प्रशासन हरकत में आया और कुछ ही घंटों के भीतर शिक्षकों की व्यवस्था करने का फैसला कर लिया गया। माधवराव सप्रे उत्कृष्ट हिंदी मीडियम स्कूल में पिछले शैक्षणिक सत्र के दौरान 12वीं कक्षा में कॉमर्स और आर्ट्स विषय के छात्रों को प्रवेश दिया गया था। उस समय जिला खनिज न्यास यानी डीएमएफ फंड के माध्यम से शिक्षकों की व्यवस्था की गई थी। पूरे साल पढ़ाई सामान्य रूप से चलती रही और छात्रों को उम्मीद थी कि इस बार भी उनकी कक्षाएं पहले की तरह संचालित होंगी। लेकिन 16 जून से नए सत्र की शुरुआत होते ही स्थिति बदल गई। स्कूल में संबंधित विषयों के शिक्षक मौजूद नहीं थे और पढ़ाई शुरू होने से पहले ही छात्रों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बन गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि शिक्षकों की अनुपलब्धता के कारण स्कूल प्रबंधन ने छात्रों को दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेने की सलाह दी। यह बात जैसे ही छात्रों तक पहुंची, उनमें नाराजगी फैल गई। कई छात्रों का कहना था कि उन्होंने पिछले वर्ष इसी स्कूल में पढ़ाई की है और अब अंतिम वर्ष में उन्हें दूसरे स्कूल में जाने के लिए कहना उचित नहीं है। छात्रों का यह भी कहना था कि यदि पहले से पद स्वीकृत नहीं थे या शिक्षकों की व्यवस्था नहीं थी तो फिर प्रवेश क्यों दिया गया। इसी सवाल को लेकर छात्रों ने विरोध शुरू कर दिया। बुधवार को छात्र कलेक्ट्रेट पहुंचे और प्रदर्शन किया। उनके साथ एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी मौजूद थे। छात्र नेता हेमंत पाल के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मांग की कि तत्काल शिक्षकों की नियुक्ति की जाए ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा का साल होने के कारण पढ़ाई में थोड़ी भी देरी उनके भविष्य पर असर डाल सकती है। प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी सक्रिय हुए और मामले की समीक्षा शुरू की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> प्रदर्शन शुरू होने के कुछ समय बाद ही जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्राचार्य से चर्चा की और पिछले सत्र में कार्यरत शिक्षकों को दोबारा नियुक्त करने के निर्देश दिए। इसके बाद स्थिति सामान्य होने लगी और छात्रों को आश्वासन दिया गया कि उनकी कक्षाएं नियमित रूप से संचालित होंगी। छात्रों ने भी प्रशासन के फैसले का स्वागत किया, हालांकि उन्होंने यह सवाल जरूर उठाया कि यदि छह महीने से समस्या की जानकारी अधिकारियों को थी तो समाधान पहले क्यों नहीं किया गया। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि शिक्षकों की कमी कोई नई समस्या नहीं थी। प्रबंधन के अनुसार पिछले छह महीनों के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर को तीन अलग-अलग पत्र भेजे गए थे। इन पत्रों में शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की गई थी ताकि नए सत्र में किसी तरह की परेशानी न आए। लेकिन समय रहते कोई निर्णय नहीं लिया गया। नतीजा यह हुआ कि सत्र शुरू होते ही समस्या सामने आ गई और छात्रों को सड़क पर उतरना पड़ा। कई अभिभावकों का भी कहना है कि यदि पहले से तैयारी की जाती तो बच्चों को इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्कूल की प्रिंसिपल अनुपमा श्रीवास्तव ने बताया कि कॉमर्स विषय का पद स्वीकृत नहीं होने के बावजूद छात्रों की मांग को देखते हुए प्रवेश दिया गया था। पिछले वर्ष डीएमएफ फंड के जरिए शिक्षक उपलब्ध कराए गए थे और पढ़ाई जारी रही थी। इस बार भी उसी व्यवस्था को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर पूर्व में कार्यरत शिक्षक को बनाए रखने का फैसला लिया गया है और अब छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होगी। यह पूरा घटनाक्रम शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों और योजना निर्माण की चुनौतियों को भी सामने लाता है। एक ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर स्कूल उपलब्ध कराने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर शिक्षक जैसी बुनियादी जरूरतों की कमी छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। छात्रों के विरोध के बाद समस्या का समाधान हो गया है, लेकिन यह मामला यह भी दिखाता है कि कई बार प्रशासनिक स्तर पर लंबित मुद्दों का समाधान तब होता है जब छात्र और अभिभावक खुलकर आवाज उठाते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:05:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर समेत पांच शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत, हडको ने जारी किए टेंडर</title>
                                    <description><![CDATA[250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं से बदलेगी शहरी तस्वीर, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर सरकार का जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/hudco-has-started-redevelopment-projects-in-five-cities-including-raipur/article-56216"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-redevelopment-projects.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के विभिन्न शहरों में लंबे समय से अनुपयोगी या कम उपयोग में आने वाली शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की ओर से इन परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) के माध्यम से परियोजनाओं के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल शहरों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि शासकीय भूमि और परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रस्तावित रिडेवलपमेंट परियोजनाएं रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में विकसित की जाएंगी। इन सभी परियोजनाओं को राज्य की रिडेवलपमेंट नीति के तहत क्रियान्वित किया जाएगा। इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया भी तय की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार के अनुसार इन पांच परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है। वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के आधार पर इनकी अनुमानित कीमत करीब 250.30 करोड़ रुपये आंकी गई है। जिन स्थानों पर रिडेवलपमेंट किया जाना है उनमें रायपुर का बी.टी.आई. रोड शंकर नगर क्षेत्र, महासमुंद का क्लब पारा, राजनांदगांव का कैलाश नगर, कोरबा का कटघोरा और जगदलपुर का चांदनी चौक फेज-2 शामिल हैं। इन क्षेत्रों को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरपूर माना जाता है। इन परियोजनाओं में रायपुर की योजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। राजधानी के शंकर नगर क्षेत्र में बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने और सिंधु भवन के समीप प्रस्तावित परियोजना शहर के सबसे विकसित और व्यस्त इलाकों में से एक में स्थित है। यह क्षेत्र शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक गतिविधियों और आवासीय कॉलोनियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां आधुनिक अधोसंरचना विकसित होने से पूरे क्षेत्र की उपयोगिता और आकर्षण दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिडेवलपमेंट मॉडल के माध्यम से शहरों के भीतर मौजूद पुरानी और कम उपयोग वाली परिसंपत्तियों को नई उपयोगिता दी जा सकती है। इससे सरकार को नई भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और पहले से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा। यही वजह है कि देश के कई बड़े शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शहरी विकास का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। अब छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इन परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी सहभागिता यानी पीपीपी मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का लाभ मिलेगा, वहीं सरकारी निगरानी के कारण परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहेगी। निजी डेवलपर्स के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें शहरों की प्राइम लोकेशन पर विकास कार्य करने का मौका मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के लिए लगातार काम कर रही है। रिडेवलपमेंट नीति के जरिए जर्जर और अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसरों में बदला जाएगा। इससे शहरों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि यह पहल केवल भवन निर्माण परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों का समग्र कायाकल्प करना है। उन्होंने विशेष रूप से रायपुर की प्रस्तावित परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजधानी के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल बन सकती है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होगी। इन परियोजनाओं के लागू होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं परियोजनाएं पूरी होने के बाद व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन होता है तो यह राज्य के शहरी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इन परियोजनाओं को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>DMF घोटाले में ED का बड़ा एक्शन, छापों में एक करोड़ से ज्यादा नकदी बरामद</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के पांच जिलों में कार्रवाई, कारोबारियों और कांग्रेस नेता से जुड़े ठिकानों की जांच; दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी मिले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/eds-big-action-in-dmf-scam-more-than-rs-1/article-56211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-dmf-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जिला खनिज न्यास (DMF) घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। कथित 575 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत एजेंसी ने राज्य के पांच जिलों में एक साथ छापेमारी की, जिसमें एक करोड़ रुपये से अधिक नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी ने रायपुर, धमतरी, दुर्ग, कोरबा और अंबिकापुर में कई ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज, बैंकिंग रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं, जिनकी अब विस्तार से जांच की जा रही है। ईडी की टीमों ने कुल नौ स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। इनमें चार आवासीय परिसरों के साथ पांच व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल थे। जांच के दौरान सबसे अधिक नकदी कोरबा और धमतरी जिले से बरामद होने की बात कही जा रही है। हालांकि एजेंसी की ओर से अब तक जब्त राशि का आधिकारिक विवरण जारी नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि सभी दस्तावेजों और जब्त सामग्री के सत्यापन के बाद ईडी इस संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छापेमारी जिन लोगों और संस्थानों से जुड़ी बताई जा रही है, उनमें कई कारोबारी और सप्लाई से जुड़े प्रतिष्ठान शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक कृषि और अन्य विभागों में आपूर्ति का काम करने वाले कुछ कारोबारियों के परिसरों की जांच की गई। इनमें कांग्रेस से जुड़े एक पूर्व जिला पदाधिकारी का नाम भी चर्चा में है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए जारी धनराशि का उपयोग किस तरह किया गया और कहीं उसमें वित्तीय अनियमितताएं तो नहीं हुईं। तलाशी के दौरान ईडी को कई महत्वपूर्ण बैंक लेनदेन रिकॉर्ड, अनुबंध संबंधी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक डाटा प्राप्त हुआ है। जांच अधिकारी अब इन रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इन दस्तावेजों से कथित लेनदेन, भुगतान और फंड के प्रवाह से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। एजेंसी का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के लिए आवंटित राशि किन माध्यमों से खर्च हुई और उसमें किसी तरह की गड़बड़ी तो नहीं की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच एजेंसियों को संदेह है कि जिला खनिज न्यास फंड से जारी रकम का एक हिस्सा ठेकेदारों, सप्लायरों और कथित बिचौलियों के माध्यम से डायवर्ट किया गया। आरोप यह भी हैं कि विभिन्न परियोजनाओं और सरकारी कार्यों के टेंडर आवंटन में नियमों की अनदेखी की गई और कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इसी आधार पर अब मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार कुछ मामलों में ठेकों और परियोजनाओं की मंजूरी के बदले कमीशन लिए जाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या सरकारी धन के उपयोग में ऐसी व्यवस्थाएं बनाई गई थीं जिनसे चुनिंदा लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाया जा सके। सूत्रों का कहना है कि बरामद दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद कई और लोगों से पूछताछ की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह पहला अवसर नहीं है जब DMF घोटाला चर्चा में आया हो। इससे पहले भी इस मामले में कई वरिष्ठ अधिकारियों, पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों और कथित बिचौलियों के नाम जांच में सामने आ चुके हैं। पिछले दो वर्षों में ईडी और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा ने इस मामले में कई दौर की कार्रवाई की है। विभिन्न स्थानों पर छापेमारी के साथ करोड़ों रुपये की संपत्तियां भी अटैच की जा चुकी हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन का नेटवर्क काफी व्यापक है, जिसकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। जिला खनिज न्यास फंड का गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के कल्याण के लिए किया गया था। इस फंड का उपयोग सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाता है। लेकिन जांच एजेंसियों के अनुसार कुछ जिलों में फंड के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरोप है कि कई टेंडरों में नियमों का पालन नहीं किया गया और सरकारी राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं बरती गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से पहले जारी की गई जानकारी में भी यह कहा गया था कि जांच के दौरान टेंडर प्रक्रिया और कार्य आवंटन में आर्थिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर विभिन्न धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए और बाद में मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू सामने आने पर ईडी ने जांच शुरू की। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित घोटाले से जुड़े धन का उपयोग किन-किन माध्यमों से किया गया और इसके वास्तविक लाभार्थी कौन थे। ईडी की कार्रवाई के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जांच एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच पूरी होने के बाद आगे और कार्रवाई की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:55:43 +0530</pubDate>
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                <title>छत्तीसगढ़ में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत, शाला प्रवेश उत्सव आज से</title>
                                    <description><![CDATA[27 जून तक चलेगा अभियान, विद्यार्थियों को मिलेंगी मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल; स्कूलों में तिलक लगाकर किया गया स्वागत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/school-entrance-festival-starts-from-today-in-chhattisgarh/article-56104"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-school-reopening.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत सोमवार से हो गई। गर्मी की लंबी छुट्टियों के बाद प्रदेशभर के सरकारी और निजी स्कूलों में एक बार फिर बच्चों की चहल-पहल लौट आई। स्कूलों के गेट सुबह से ही विद्यार्थियों की आवाजाही से गुलजार नजर आए। कहीं बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया तो कहीं उन्हें फूल, चॉकलेट और नई किताबें भेंट कर नए सत्र की शुभकामनाएं दी गईं। राज्य सरकार की ओर से शुरू किए गए शाला प्रवेश उत्सव के साथ इस बार शिक्षा से वंचित बच्चों को स्कूलों तक लाने और नामांकन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यह अभियान 16 जून से 27 जून तक चलेगा, जबकि 30 जून को राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में स्कूल खुलने के पहले दिन उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। सुबह-सुबह स्कूल यूनिफॉर्म पहनकर पहुंचे बच्चे अपने दोस्तों और शिक्षकों से मिलकर उत्साहित दिखाई दिए। कई स्कूलों में शिक्षकों ने प्रवेश द्वार पर ही बच्चों का स्वागत किया। पहली बार स्कूल पहुंचे छोटे बच्चों के लिए यह दिन खास रहा। नए बैग, नई किताबें और नए माहौल को लेकर उनमें उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी। कई अभिभावक भी अपने बच्चों को लेकर स्कूल पहुंचे और उनके साथ इस नई शुरुआत का हिस्सा बने। राज्य सरकार की ओर से इस सत्र में भी विद्यार्थियों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के छात्रों को नि:शुल्क पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म दी जाएंगी। वहीं पात्र विद्यार्थियों को साइकिल वितरण योजना का लाभ भी मिलेगा। शिक्षा विभाग का कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना और स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति को कम करना है। अधिकारियों के अनुसार सभी जिलों में सामग्री वितरण की तैयारी पहले ही पूरी कर ली गई थी ताकि बच्चों को सत्र की शुरुआत से ही आवश्यक संसाधन मिल सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धमतरी जिले में भी नए शिक्षा सत्र का शुभारंभ उत्साह और उल्लास के साथ हुआ। गोकुलपुर प्राथमिक शाला में सुबह राज्य गीत और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई। विद्यालय पहुंचे बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया और उन्हें चॉकलेट वितरित की गई। स्कूल परिसर में सुबह से ही उत्सव जैसा माहौल रहा। बच्चों ने अपने नए साथियों और शिक्षकों से परिचय किया और विभिन्न गतिविधियों में हिस्सा लिया। कई बच्चे लंबे अवकाश के बाद अपने दोस्तों से मिलकर बेहद खुश नजर आए। शिक्षकों का कहना है कि लगभग दो महीने की छुट्टियों के बाद बच्चों को फिर से पढ़ाई की लय में लाना आसान नहीं होता। इसी को ध्यान में रखते हुए स्कूल खुलने से पहले व्यापक तैयारियां की गई थीं। कक्षाओं की साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं को व्यवस्थित किया गया। कई स्कूलों में परिसर की रंगाई-पुताई और मरम्मत का काम भी कराया गया ताकि विद्यार्थियों को बेहतर वातावरण मिल सके। पहले दिन बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ स्कूल के नियमों और अनुशासन के बारे में भी जानकारी दी गई। शाला प्रवेश उत्सव का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को स्कूलों से जोड़ना है जो किसी कारणवश शिक्षा से दूर हैं। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीम गांव-गांव जाकर ऐसे बच्चों की पहचान कर रही है। शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों को भी इस अभियान में शामिल किया गया है। अभियान के दौरान अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से नामांकन दर बढ़ाने में मदद मिलेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में भी स्कूल खुलने को लेकर खास उत्साह देखा गया। कई गांवों में बच्चों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। कुछ स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। स्थानीय समुदाय और जनप्रतिनिधियों ने भी स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दीं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनाना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 30 जून को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्कूल शिक्षा मंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान शिक्षा के क्षेत्र में सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों को भी प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 16:20:36 +0530</pubDate>
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