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                <title>Chhattisgarh News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>स्कूल में नशे में धुत मिले हेडमास्टर, जमीन पर लेटकर की गाली-गलौज; वायरल वीडियो से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[सूरजपुर के प्राथमिक विद्यालय का कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल, अभिभावकों में नाराजगी; शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/headmaster-found-drunk-in-school-lying-on-the-ground-and/article-58381"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surajpur-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो ने पूरे जिले में चर्चा का विषय बना दिया है। वीडियो में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक कथित रूप से शराब के नशे में जमीन पर पड़े दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, वीडियो में वह अभद्र भाषा और गाली-गलौज करते भी नजर आ रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो रामानुजनगर विकासखंड के शाल्ही गांव स्थित खोरखोरीपारा प्राथमिक विद्यालय का है। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले शिक्षक की पहचान प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक हरिनंदन सिंह के रूप में की जा रही है। वीडियो में वह कथित तौर पर नशे की हालत में स्कूल परिसर के भीतर जमीन पर लेटे हुए दिखाई देते हैं। आसपास मौजूद लोग जब उनका वीडियो बनाने लगते हैं तो वह गाली-गलौज करते हुए उन्हें धमकाते भी सुनाई देते हैं। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके वायरल होने के बाद पूरे इलाके में इस घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत हुई है और स्कूलों में बच्चों की नियमित पढ़ाई शुरू हो चुकी है। ऐसे में विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर लगे आरोपों ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक समाज में सम्मानित स्थान रखते हैं और बच्चों के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होती है। यदि कोई शिक्षक सार्वजनिक रूप से इस तरह के व्यवहार का प्रदर्शन करता है, तो उसका नकारात्मक प्रभाव विद्यार्थियों और पूरे समाज पर पड़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों के अनुसार, वीडियो सामने आने के बाद गांव में नाराजगी का माहौल है। कई अभिभावकों ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि विद्यालय बच्चों के सीखने और संस्कार ग्रहण करने का स्थान होता है। ऐसे माहौल में यदि शिक्षक अनुशासनहीनता का परिचय देंगे तो शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर होगा। बताया जा रहा है कि वीडियो में कथित रूप से हेडमास्टर शराब के नशे में असंतुलित अवस्था में दिखाई दे रहे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें संभालने का प्रयास भी किया, लेकिन वह गुस्से में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते रहे। वीडियो बनाने वालों को भी उन्होंने कथित तौर पर धमकी दी। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद मामला शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच गया। मामले की जानकारी मिलते ही शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक स्तर पर रिपोर्ट तलब की है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े तथ्यों की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकारी विद्यालयों में अनुशासन और आचरण के मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 12:14:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>कोरिया ट्रिपल मर्डर केस की जांच अब CBI करेगी, छत्तीसगढ़ सरकार ने दी मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[नौगई गांव में एक ही परिवार के तीन लोगों की हत्या के मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश, अवैध रेत खनन से जुड़े विवाद के आरोपों की भी होगी पड़ताल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/now-cbi-will-investigate-korea-triple-murder-case-chhattisgarh-government/article-57524"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/koriya-triple-murder.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर में चर्चा का विषय बने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के चर्चित नौगई ट्रिपल मर्डर मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। राज्य सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की औपचारिक सिफारिश करते हुए आवश्यक अनुमति प्रदान कर दी है। गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद अब सीबीआई इस मामले से जुड़े दोनों प्रकरणों की जांच अपने हाथ में लेने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इस फैसले को मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह मामला 16 जून की रात को कोरिया जिले के सोनहत थाना क्षेत्र के नौगई गांव में हुई दर्दनाक घटना से जुड़ा है। घटना में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार दो पक्षों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद हिंसक रूप ले बैठा। आरोप है कि पीड़ितों की फॉर्च्यूनर गाड़ी को पहले एक टिपर वाहन से कई बार टक्कर मारी गई, जिससे वाहन क्षतिग्रस्त होकर रुक गया। इसके बाद वाहन में आग लगा दी गई। इस घटना में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य ने बाद में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मृतकों की पहचान भारत सिंह, नागेंद्र सिंह और वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल बन गया। पीड़ित परिवार लगातार इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग कर रहा था। परिवार का आरोप है कि हत्या के पीछे अवैध रेत खनन से जुड़ा विवाद और उससे जुड़े प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। राज्य सरकार ने अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का निर्णय लिया है। गृह विभाग द्वारा दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 के तहत आवश्यक सहमति जारी की गई है, जिससे केंद्रीय एजेंसी को इस मामले की जांच का अधिकार मिल गया है। अधिसूचना में सोनहत थाना में दर्ज दोनों एफआईआर का उल्लेख किया गया है, जिनकी जांच अब सीबीआई करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार सीबीआई पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करेगी। इसके बाद राज्य पुलिस से केस डायरी, साक्ष्य, दस्तावेज और अन्य जांच सामग्री अपने कब्जे में लेकर आगे की जांच शुरू की जाएगी। जांच एजेंसी घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण भी कर सकती है और अब तक दर्ज किए गए बयानों के अलावा नए सिरे से गवाहों से पूछताछ भी संभव है। घटना के लगभग दो सप्ताह बाद जांच सीबीआई को सौंपे जाने का निर्णय सामने आया है। इस दौरान पीड़ित परिवार लगातार निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा। इसी बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। यह मुलाकात मृतकों के तेरहवीं संस्कार के दिन हुई, जिसके बाद सरकार की ओर से सीबीआई जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी गंभीर आपराधिक मामले में जब जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी जाती है तो उसका उद्देश्य सभी पहलुओं की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करना होता है। सीबीआई तकनीकी साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट, कॉल डिटेल, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ी जोड़ने का प्रयास करेगी। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो उनके आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया था। जिस तरह वाहन को रोककर उस पर हमला किया गया और बाद में आग लगा दी गई, उसने कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए। हालांकि पुलिस ने घटना के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच शुरू की थी और कई पहलुओं पर काम किया था। अब सीबीआई के आने के बाद जांच नए चरण में प्रवेश करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में वैज्ञानिक जांच और सभी उपलब्ध साक्ष्यों का गहराई से विश्लेषण बेहद महत्वपूर्ण होता है। फॉरेंसिक जांच, घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्य, वाहन की तकनीकी जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने में अहम भूमिका निभाते हैं। सीबीआई आमतौर पर इसी प्रक्रिया के तहत जांच को आगे बढ़ाती है। इस मामले पर पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है। पीड़ित परिवार को उम्मीद है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से घटना की वास्तविक परिस्थितियां सामने आएंगी और यदि किसी स्तर पर कोई साजिश या संगठित अपराध से जुड़ा पहलू होगा तो उसकी भी जांच की जाएगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि जांच एजेंसी को हर स्तर पर पूरा सहयोग दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:14:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों को बड़ी राहत, सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों को मिली मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता का नवीनीकरण किया, अब 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता साफ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-relief-to-medical-students-of-chhattisgarh-150-mbbs-seats/article-57526"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी), नई दिल्ली ने बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नवीनीकरण कर दिया है। इस फैसले के साथ ही आगामी सत्र में 150 नए विद्यार्थियों के प्रवेश का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। यह निर्णय प्रदेश के उन हजारों छात्रों के लिए राहत लेकर आया है, जो हर वर्ष मेडिकल की पढ़ाई के लिए बेहतर संस्थानों में प्रवेश का सपना देखते हैं। एनएमसी के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी आदेश के बाद सिम्स प्रशासन ने इसे संस्थान की बड़ी उपलब्धि बताया है। मान्यता के नवीनीकरण का अर्थ है कि संस्थान ने मेडिकल शिक्षा, शिक्षकों की उपलब्धता, अस्पताल की सुविधाओं, क्लिनिकल प्रशिक्षण, प्रयोगशालाओं और अन्य आवश्यक मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके बाद अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 में नियमित रूप से 150 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जा सकेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल प्रशासनिक मंजूरी नहीं बल्कि संस्थान की गुणवत्ता, मेहनत और निरंतर सुधार की दिशा में किए गए प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर पुष्टि है। उन्होंने बताया कि संस्थान में विद्यार्थियों को आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसमें अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल शिक्षण व्यवस्था, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और अस्पताल में व्यापक क्लिनिकल प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। मेडिकल सीटों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश के विद्यार्थियों को बाहर के राज्यों पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। हर वर्ष बड़ी संख्या में छात्र राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के माध्यम से एमबीबीएस में प्रवेश का प्रयास करते हैं, लेकिन सीमित सीटों के कारण कई योग्य छात्रों को अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में सिम्स की 150 सीटों का नवीनीकरण मेडिकल शिक्षा के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बिलासपुर स्थित सिम्स लंबे समय से छत्तीसगढ़ के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल है। यहां न केवल एमबीबीएस की पढ़ाई कराई जाती है, बल्कि बड़ी संख्या में मरीजों का उपचार भी होता है। मेडिकल छात्र पढ़ाई के साथ-साथ अस्पताल में मरीजों के उपचार की वास्तविक प्रक्रिया को भी करीब से सीखते हैं। यही व्यावहारिक प्रशिक्षण भविष्य में उन्हें बेहतर चिकित्सक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग समय-समय पर सभी मेडिकल कॉलेजों का मूल्यांकन करता है। इस दौरान फैकल्टी की संख्या, अस्पताल में मरीजों की उपलब्धता, उपकरण, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, हॉस्टल, अनुसंधान सुविधाएं और शैक्षणिक व्यवस्था सहित कई बिंदुओं की समीक्षा की जाती है। निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों की मान्यता का नवीनीकरण किया जाता है। सिम्स का इस प्रक्रिया में सफल होना संस्थान की निरंतर प्रगति का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में डॉक्टरों की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए मेडिकल शिक्षा का विस्तार बेहद जरूरी है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए प्रशिक्षित डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना समय की आवश्यकता है। ऐसे में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटें बढ़ना या उनकी मान्यता का नवीनीकरण होना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी सकारात्मक माना जाता है। प्रदेश के विद्यार्थियों और अभिभावकों ने भी इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च निजी संस्थानों की तुलना में काफी कम होता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों को भी डॉक्टर बनने का अवसर मिलता है। सीटों की निरंतर उपलब्धता से प्रतिस्पर्धा के बीच योग्य छात्रों के लिए बेहतर संभावनाएं तैयार होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सिम्स प्रशासन के अनुसार आने वाले समय में संस्थान में शैक्षणिक और स्वास्थ्य सेवाओं के स्तर को और बेहतर बनाने की दिशा में कार्य जारी रहेगा। नई तकनीकों को शिक्षा में शामिल करने, अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देने, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता और विशेषज्ञ चिकित्सकों की संख्या बढ़ाने पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इससे छात्रों को राष्ट्रीय स्तर की चिकित्सा शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। ऐसे निर्णय प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को भी मजबूत बनाते हैं। अधिक संख्या में प्रशिक्षित डॉक्टर तैयार होने से भविष्य में सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की संभावना भी मजबूत होगी। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा सिम्स बिलासपुर की 150 एमबीबीएस सीटों की मान्यता का नवीनीकरण छत्तीसगढ़ के मेडिकल शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे न केवल नए विद्यार्थियों के प्रवेश का मार्ग प्रशस्त हुआ है, बल्कि प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:57 +0530</pubDate>
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                <title>12 साल की बच्ची से दुष्कर्म मामले में हाईकोर्ट सख्त, काउंसिलिंग रिपोर्ट तलब; आरोपी जीजा गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[बैकुंठपुर की घटना में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्थिति को बताया सर्वोपरि, अगली सुनवाई 2 जुलाई को]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-calls-for-strict-counseling-report-in-case-of/article-57527"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/sims-bilaspur-(1).jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
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<p style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के बैकुंठपुर से सामने आए 12 वर्षीय बच्ची से कथित दुष्कर्म और बाल संरक्षण से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी कानूनी प्रक्रिया से पहले बच्चों की सुरक्षा, मानसिक स्थिति और भविष्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों बच्चों को फिलहाल चाइल्ड वेलफेयर की निगरानी में रखने के निर्देश दिए हैं और काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफाफे में प्रस्तुत करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित की गई है। यह मामला दो अनाथ भाई-बहन से जुड़ा है। 12 वर्षीय बच्ची और उसका 9 वर्षीय भाई बैकुंठपुर में अपनी मुंहबोली बहन के घर रह रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक दोनों बच्चों को वहीं आश्रय दिया गया था, लेकिन बाद में उनके साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप सामने आए। बताया गया कि लगातार प्रताड़ना से परेशान होकर दोनों बच्चे वहां से निकलकर अपने एक परिचित के पास पहुंच गए। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) को दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों को संरक्षण में लेने के बाद उनकी काउंसिलिंग कराई गई। इसी दौरान बच्ची ने कथित रूप से बताया कि उसकी मुंहबोली बहन के पति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। शिकायत और काउंसिलिंग के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस बीच मामले ने नया मोड़ तब लिया जब बच्चों की मुंहबोली बहन ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया कि दोनों बच्चों को अवैध रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन में रखा गया है। हालांकि सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि रिकॉर्ड के अनुसार बच्ची को अंबिकापुर स्थित बालिका गृह तथा उसके भाई को बैकुंठपुर चाइल्ड वेलफेयर सेंटर में सुरक्षा के मद्देनजर रखा गया है। दोनों बच्चों को वैधानिक प्रक्रिया के तहत संरक्षण दिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया था कि दोनों बच्चों को अदालत में प्रस्तुत किया जाए। इसके बाद संबंधित जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी बच्चों को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे और अदालत के समक्ष पूरी स्थिति रखी गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि याचिका में कुछ तथ्यों को सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बच्चों का हित और उनका मानसिक स्वास्थ्य है। इसलिए किसी भी निर्णय से पहले उनकी स्वतंत्र काउंसिलिंग आवश्यक है, ताकि वास्तविक परिस्थितियों का आकलन किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हाईकोर्ट के निर्देश पर बच्चों की काउंसिलिंग न्यायालय कक्ष के बजाय राज्य न्यायिक अकादमी में कराई गई। यह प्रक्रिया वरिष्ठ अधिवक्ता और संबंधित अधिकारियों की देखरेख में पूरी हुई। अदालत ने निर्देश दिया है कि काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफाफे में प्रस्तुत की जाए, ताकि बच्चों की निजता और पहचान पूरी तरह सुरक्षित रहे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की सुनवाई में आवश्यक निर्णय लिया जाएगा।  ऐसे मामलों में पीड़ित बच्चों की पहचान और गोपनीयता की रक्षा करना अत्यंत आवश्यक होता है। इसके साथ ही मनोवैज्ञानिक सहायता, सुरक्षित वातावरण और कानूनी संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। कानून के अनुसार नाबालिग पीड़ितों से जुड़े मामलों में जांच और न्यायिक प्रक्रिया संवेदनशील तरीके से पूरी की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच विभिन्न पहलुओं से की जा रही है। मेडिकल रिपोर्ट, बच्चों के बयान, काउंसिलिंग रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग का कहना है कि दोनों बच्चों को फिलहाल सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया है और उनकी नियमित काउंसिलिंग जारी रहेगी। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का उद्देश्य किसी व्यक्ति की अवैध हिरासत की जांच करना होता है। लेकिन यदि किसी नाबालिग को कानून के अनुसार सुरक्षा और संरक्षण के लिए अधिकृत संस्था में रखा गया हो, तो अदालत उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेती है। यही कारण है कि इस मामले में हाईकोर्ट ने बच्चों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए विस्तृत रिपोर्ट और काउंसिलिंग को प्राथमिकता दी है। दोनों बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर संस्थाओं की निगरानी में रखा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक उनकी सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित की जाए। वहीं आरोपी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले की जांच भी जारी रहेगी। </p>
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</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-calls-for-strict-counseling-report-in-case-of/article-57527</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:13:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नकटी गांव में विधायक कॉलोनी के लिए 80 घरों पर चला बुलडोजर, ग्रामीणों का हंगामा</title>
                                    <description><![CDATA[सुबह से तैनात रही भारी पुलिस फोर्स, महिलाओं की पुलिस से धक्का-मुक्की, प्रशासन बोला- प्रभावित परिवारों को नया रायपुर में मिलेगा आवास]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ruckus-by-villagers-over-bulldozer-on-80-houses-for-mla/article-57300"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nakti-village-demolition.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">रायपुर के माना इलाके स्थित नकटी गांव में सोमवार सुबह उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब प्रस्तावित विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने करीब 80 मकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। सुबह से ही बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद थे। जैसे ही जेसीबी मशीनें गांव में पहुंचीं, ग्रामीण अपने घरों के सामने जमा हो गए और कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते माहौल गर्म हो गया और पुलिस व ग्रामीणों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रशासन के अनुसार जिन मकानों को हटाया गया, उनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत बने 32 मकान भी शामिल हैं। कार्रवाई को देखते हुए रविवार देर रात से ही गांव और आसपास के इलाके में एक हजार से अधिक पुलिस जवान तैनात कर दिए गए थे। सुबह प्रशासनिक टीम ने सुरक्षा घेरे के बीच कार्रवाई शुरू की। कई लोगों ने जेसीबी मशीनों के सामने खड़े होकर विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें हटाकर अभियान जारी रखा।<img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd"> </p>
<p class="isSelectedEnd">कार्रवाई के दौरान गांव का माहौल बेहद भावुक नजर आया। कई परिवार अपने घरों का सामान बाहर निकालते दिखाई दिए। महिलाएं रोती-बिलखती रहीं, जबकि बुजुर्ग और बच्चे मलबे के बीच खड़े होकर अपने टूटते घरों को देखते रहे। इस बीच एक छोटी बच्ची ने रोते हुए कहा कि उसने सुबह से कुछ नहीं खाया, क्योंकि घर में खाना बनाने का मौका ही नहीं मिला। बच्ची की यह बात सुनकर मौके पर मौजूद कई लोगों की आंखें भी नम हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें उम्मीद थी कि फिलहाल उनके मकान नहीं तोड़े जाएंगे। उनका आरोप है कि दो दिन पहले ही क्षेत्र के सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ग्रामीणों से मुलाकात के दौरान भरोसा दिलाया था कि बारिश के मौसम में किसी का घर नहीं हटाया जाएगा। इसी आश्वासन के कारण लोगों ने तत्काल किसी वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी भी नहीं की थी। ऐसे में सोमवार सुबह अचानक हुई कार्रवाई से लोगों में नाराजगी और बढ़ गई। कार्रवाई के दौरान कई जगह महिलाओं ने पुलिस के सामने बैठकर विरोध करने की कोशिश की। कुछ लोगों ने जेसीबी मशीनों को रोकने का भी प्रयास किया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की और सुरक्षा घेरे में कार्रवाई जारी रखी। हालांकि पूरे अभियान के दौरान कई बार तनावपूर्ण माहौल बना रहा और ग्रामीण प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई पहले से तय योजना के तहत की गई है। अधिकारियों के मुताबिक विधायक कॉलोनी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की पूरी व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने दावा किया कि सभी पात्र परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आवासों में बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। आवंटन की कार्रवाई भी जारी है और लोगों को नियमानुसार नए मकान उपलब्ध कराए जाएंगे। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी होने से पहले मकान तोड़ना उचित नहीं था। उनका आरोप है कि कई परिवारों को अब भी स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है कि उन्हें नया मकान कब मिलेगा और वहां तक पहुंचने की व्यवस्था कैसे होगी। लोगों का कहना है कि बारिश के मौसम में बेघर होने से उनके सामने रहने, खाने और बच्चों की पढ़ाई जैसी कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार नकटी गांव में कई परिवार वर्षों से रह रहे थे और उन्होंने अपने घरों को धीरे-धीरे बनाकर तैयार किया था। अचानक हुई इस कार्रवाई से उनका सामान खुले में आ गया है। कई लोग अपने घरेलू सामान को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कोशिश करते नजर आए, जबकि कुछ परिवार मलबे के बीच ही बैठे रहे। प्रशासन का कहना है कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है और पुनर्वास को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक सभी प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें हर जरूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाए। पूरे घटनाक्रम के बाद नकटी गांव में माहौल अब भी तनावपूर्ण बना हुआ है और इलाके में पुलिस बल की तैनाती जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:28:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की रिपोर्ट में खुलासा, 15 से ज्यादा नेताओं पर गंभीर मामले लंबित</title>
                                    <description><![CDATA[मई 2026 की स्टेटस रिपोर्ट में पूर्व और वर्तमान सांसदों-विधायकों के खिलाफ 20 से अधिक आपराधिक मामलों की जानकारी, फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही नियमित सुनवाई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-high-court-report-reveals-serious-cases-pending-against-more/article-57131"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ की राजनीति से जुड़ी एक अहम जानकारी हाईकोर्ट की मई 2026 की स्टेटस रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 15 से अधिक पूर्व और वर्तमान सांसदों, विधायकों तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के खिलाफ 20 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। इन मामलों की सुनवाई विशेष और फास्ट ट्रैक अदालतों में नियमित रूप से की जा रही है। रिपोर्ट में कई हाई-प्रोफाइल नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन पर भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग, हत्या के प्रयास, बलवा, धोखाधड़ी, चिटफंड और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे विचाराधीन हैं। अदालतों की निगरानी में इन मामलों की सुनवाई जारी है और कई मामलों में आगामी तारीखें भी निर्धारित की जा चुकी हैं। सूची में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक कवासी लखमा, विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व सांसद मधुसूदन यादव समेत कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं के नाम शामिल हैं। इन मामलों की प्रकृति अलग-अलग है और अधिकांश मामलों में अभी न्यायिक प्रक्रिया जारी है। अदालतों ने किसी भी मामले में अंतिम निर्णय नहीं दिया है। इसलिए सभी मामलों में आरोप अभी विचाराधीन हैं और संबंधित पक्षों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखने का अधिकार प्राप्त है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के खिलाफ राजधानी रायपुर की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में एक आपराधिक मामला लंबित है। रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67-ए के तहत भी आरोप शामिल हैं। इस प्रकरण की सुनवाई जून 2026 में निर्धारित की गई थी। इसी तरह विधायक कवासी लखमा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायालय में मामला विचाराधीन है। इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में भी कवासी लखमा और विधायक देवेंद्र यादव के नाम शामिल बताए गए हैं, जिनकी सुनवाई अलग-अलग अदालतों में चल रही है। बिलासपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत दर्ज मामले में आरोप तय किए जाने की प्रक्रिया प्रस्तावित है। वहीं बलौदाबाजार की अदालत में विधायक देवेंद्र यादव और किशोर नवरंगे के खिलाफ बलवा, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं के अंतर्गत मुकदमे लंबित हैं। इन मामलों में अदालत द्वारा निर्धारित तिथियों पर नियमित सुनवाई की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हाईकोर्ट की रिपोर्ट में केवल कांग्रेस से जुड़े नेताओं का ही नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों का भी उल्लेख किया गया है। राजनांदगांव की विशेष अदालत में पूर्व सांसद मधुसूदन यादव के खिलाफ जमाकर्ताओं के हितों के संरक्षण अधिनियम से जुड़े छह अलग-अलग मामले विचाराधीन हैं। इनमें से तीन मामलों में पहले हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी, जबकि शेष मामलों में अदालत ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश जारी किए हैं। गरियाबंद जिले में भाजपा के दो पूर्व विधायकों के खिलाफ रास्ता रोकने और बलवा से जुड़े मामलों की भी सुनवाई जारी है। राज्य के विभिन्न जिलों में भी कई जनप्रतिनिधियों के खिलाफ अलग-अलग मामलों में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। बलौदाबाजार में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और मारपीट से जुड़े मामले में पूर्व विधायक प्रमोद शर्मा के खिलाफ सुनवाई प्रस्तावित है। वहीं गरियाबंद की अदालत में डमरूधर पुजारी और गोवर्धन मांझी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज मामलों में भी न्यायिक कार्रवाई जारी है। अदालतों ने इन मामलों में अलग-अलग तिथियां निर्धारित की हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धोखाधड़ी और आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है। जांजगीर-चांपा जिला न्यायालय में आरोपी बालेश्वर साहू, वेदप्रकाश साहू और गौतम राठौर के खिलाफ धोखाधड़ी और मारपीट से जुड़े मामले में अभियोजन साक्ष्य की प्रक्रिया चल रही है। वहीं कवर्धा में अशोक कुमार साहू और अन्य के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले में भी अदालत द्वारा साक्ष्य दर्ज करने की कार्रवाई निर्धारित की गई थी। इन मामलों की सुनवाई न्यायालय के समक्ष विधिक प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ रही है। जनप्रतिनिधियों से जुड़े मामलों की फास्ट ट्रैक अदालतों में सुनवाई का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है। पिछले कुछ वर्षों में सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न हाईकोर्टों ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे पर विशेष जोर दिया है, ताकि गंभीर मामलों का समय पर निर्णय हो सके। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ में भी ऐसे मामलों की नियमित निगरानी की जा रही है और अदालतें निर्धारित समय पर सुनवाई कर रही हैं। यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें सत्ता और विपक्ष दोनों दलों से जुड़े नेताओं के मामलों का उल्लेख है। इससे यह स्पष्ट होता है कि विभिन्न अदालतों में कई हाई-प्रोफाइल मामलों की सुनवाई समानांतर रूप से जारी है। हालांकि किसी भी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जा सकता। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अदालतें आरोपों की पुष्टि या खंडन पर अंतिम निर्णय देंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में कोचिंग सेंटरों के बाद अब मॉल और कॉमर्शियल भवनों की होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[शासन के निर्देश के बाद फायर सेफ्टी अभियान तेज, बहुमंजिला इमारतों में सुरक्षा इंतजामों की होगी सघन जांच]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/after-coaching-centers-in-raipur-now-malls-and-commercial-buildings/article-57130"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-fire-safety.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में फायर सेफ्टी को लेकर प्रशासन ने अब सख्ती और बढ़ा दी है। पिछले तीन दिनों से शहर के कोचिंग संस्थानों की जांच कर रही संयुक्त टीम अब बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों, शॉपिंग मॉल, कॉम्प्लेक्स और सार्वजनिक उपयोग की इमारतों का भी निरीक्षण करेगी। जिला प्रशासन, नगर निगम और अग्निशमन विभाग की टीमों को शासन स्तर से स्पष्ट निर्देश मिले हैं कि जहां भी सुरक्षा मानकों में लापरवाही मिले, वहां तत्काल कार्रवाई की जाए। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में राजधानी के कई बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान इस अभियान के दायरे में आएंगे। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ शासन के 19 जून को जारी आदेश के बाद शुरू हुई है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि बहुमंजिला भवनों में फायर सेफ्टी, इमरजेंसी एग्जिट, अलार्म सिस्टम और अन्य सुरक्षा इंतजामों की गंभीरता से जांच की जाए। अधिकारियों के मुताबिक पहले चरण में ऐसे संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इसी वजह से सबसे पहले कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण शुरू किया गया था। प्रशासन का कहना है कि जांच केवल औपचारिकता नहीं होगी। जिन भवनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी मिलेगी, वहां नोटिस जारी करने के साथ-साथ जुर्माना और नियमानुसार अन्य कार्रवाई भी की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी सिस्टम पूरी तरह चालू होना चाहिए। इमरजेंसी निकासी मार्ग साफ और उपयोग योग्य होना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा अलार्म सिस्टम, अग्निशमन उपकरण, लिफ्ट सुरक्षा और बिजली व्यवस्था की भी विस्तार से जांच की जाएगी।शासन ने राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC-2016) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया है। आदेश में साफ कहा गया है कि बहुमंजिला आवासीय, व्यावसायिक और मिक्स्ड यूज भवनों में सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। भवन मालिकों और संस्थानों को नियमित रूप से फायर ऑडिट कराना होगा और सभी सुरक्षा उपकरण हमेशा कार्यशील स्थिति में रखने होंगे। इसके साथ ही लोगों को सुरक्षा नियमों के प्रति जागरूक करने की जिम्मेदारी भी स्थानीय निकायों को सौंपी गई है। पिछले तीन दिनों की कार्रवाई में कई कोचिंग संस्थानों की जांच की जा चुकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><br />पहले दिन एलन, अनअकैडमी, विद्यापीठ, आरसीसी और अकादजा कोचिंग संस्थानों का निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान कुछ संस्थानों में निर्धारित क्षमता से अधिक छात्रों के बैठने, पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होने और फायर सेफ्टी से जुड़ी कमियां सामने आई थीं। अधिकारियों ने संबंधित संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे दिन चाणक्य कोचिंग सेंटर, इम्पैक्ट कोचिंग और CLAT कोचिंग सेंटर का निरीक्षण किया गया। जांच में चाणक्य कोचिंग फायर ऑडिट प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सका। वहीं इम्पैक्ट कोचिंग में आवश्यक अग्निशमन उपकरण नहीं मिले। CLAT कोचिंग सेंटर में लिफ्ट का अलार्म सिस्टम बंद पाया गया। इन तीनों संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि निर्धारित समय में कमियां दूर नहीं होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तीसरे दिन नगर निगम की टीम जोन-4 स्थित PATH IAS अकादमी पहुंची। यहां भवन की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन निकासी मार्ग और अन्य जरूरी सुविधाओं की जांच की गई। अधिकारियों ने संचालकों को सभी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा ताकि शहर की सभी प्रमुख सार्वजनिक इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अब प्रशासन का पूरा फोकस शहर के बड़े मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, मल्टीस्टोरी कमर्शियल बिल्डिंग और अन्य सार्वजनिक उपयोग वाले भवनों पर रहेगा। इन स्थानों पर हर दिन हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में किसी भी तरह की लापरवाही गंभीर हादसे की वजह बन सकती है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने वाले भवन संचालकों को किसी भी तरह की राहत नहीं दी जाएगी। लगातार चल रही इस कार्रवाई को राजधानी में भवन सुरक्षा को लेकर बड़ा अभियान माना जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि सभी संस्थान समय रहते अपनी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर लेते हैं तो संभावित दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पति के अफेयर विवाद के बीच महिला की संदिग्ध मौत, हत्या का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर में 28 वर्षीय विवाहिता की मौत से सनसनी, मायके पक्ष ने पति और ससुरालवालों पर लगाए गंभीर आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/womans-suspicious-death-amid-husbands-affair-dispute-murder-charge/article-56925"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में एक विवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के मायके पक्ष ने पति और ससुरालवालों पर हत्या का आरोप लगाया है, जबकि पति का दावा है कि उसकी पत्नी ने आत्महत्या की थी। घटना सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र की है, जहां पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के मधुपुर की रहने वाली अदिति मौर्य की शादी 10 फरवरी 2019 को बिलासपुर के दयालबंद मधुबन रोड निवासी रविकांत मौर्य से हुई थी। दोनों की 13 महीने की एक बेटी भी है। रविकांत सब्जी मंडी तिफरा में व्यवसाय करता है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार पति-पत्नी के बीच पिछले कुछ समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। मायके पक्ष का आरोप है कि पति के किसी अन्य महिला से संबंध होने को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे। इसी विवाद ने बाद में गंभीर रूप ले लिया। घटना के बाद पुलिस को दिए गए बयान में पति रविकांत मौर्य ने दावा किया कि वह अपनी बेटी के साथ ऊपर के कमरे में सो रहा था, जबकि अदिति नीचे थी। जब वह नीचे पहुंचा तो पत्नी बेड पर पड़ी मिली। उसका कहना है कि अदिति ने सिल्क की साड़ी से फांसी लगाने का प्रयास किया था, लेकिन किसी कारण फंदा खुल गया और वह नीचे गिर गई। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। हालांकि मायके पक्ष पति के इस बयान पर सवाल उठा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मृतका के भाई अखिलेश वर्मा का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद से ही अदिति को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। उनका कहना है कि अदिति कई बार फोन पर अपने साथ हो रहे दुर्व्यवहार और मारपीट की जानकारी देती थी। परिवार के लोगों का दावा है कि वह लंबे समय से परेशान थी और कई बार उसने अपने हालात के बारे में मायके वालों को बताया था। परिजनों का यह भी कहना है कि पिछले कुछ दिनों से अदिति से उनकी सीधी बातचीत नहीं हो पा रही थी। जब भी वे संपर्क करने की कोशिश करते थे, किसी न किसी कारण से बात नहीं हो पाती थी। मामले में नया मोड़ तब आया जब मृतका के भाई अभिषेक वर्मा ने पति पर दूसरी महिला से संबंध होने का आरोप लगाया। उनके अनुसार एक सप्ताह पहले अदिति ने पति के मोबाइल फोन में मौजूद कथित चैट का वीडियो रिकॉर्ड कर अपनी बड़ी बहन को भेजा था। इसके बाद पति-पत्नी के बीच विवाद और बढ़ गया था। परिवार का आरोप है कि इसी विवाद के चलते अदिति पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मायके पक्ष के अनुसार 23 जून को भी अदिति के साथ मारपीट की घटना हुई थी। इसके बाद उन्होंने रविकांत की मां से फोन पर संपर्क किया। तब उन्हें बताया गया कि पति-पत्नी के बीच कमरे में विवाद चल रहा है। कुछ समय बाद अचानक सूचना मिली कि अदिति की तबीयत बिगड़ गई है और उसे अस्पताल ले जाया गया है। बाद में पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। यह खबर सुनते ही परिवार के सदस्य उत्तर प्रदेश से बिलासपुर के लिए रवाना हो गए।अस्पताल पहुंचने पर परिजनों ने शव को देखा तो उनके संदेह और बढ़ गए। परिवार का आरोप है कि अदिति के हाथ, गर्दन, पैर और कान के पास चोट के निशान दिखाई दे रहे थे। उनका कहना है कि शरीर पर मौजूद चोटों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिजनों का यह भी दावा है कि जिस स्थान पर फांसी लगाने की बात कही जा रही है, वहां ऐसे कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले, जिनसे आत्महत्या की पुष्टि हो सके। इसी आधार पर उन्होंने हत्या की आशंका जताई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मृतका के परिवार ने पति रविकांत मौर्य, सास, ससुर, ननद और नंदोई के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना की जानकारी उन्हें सीधे ससुराल पक्ष ने नहीं दी। बाद में अन्य लोगों से सूचना मिलने के बाद वे बिलासपुर पहुंचे। घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की टीम मौके पर पहुंची। जांच अधिकारियों ने कमरे और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया। मौके से विभिन्न साक्ष्य जुटाए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया परिजनों की मौजूदगी में पूरी की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आत्महत्या, हत्या और अन्य संभावित कारणों को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। एडिशनल एसपी सिटी पंकज पटेल ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच रिपोर्ट मिलने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इस बीच अदिति की मौत ने उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है और परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 15:14:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सरगुजा में शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण का मामला, FIR दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[लिव-इन रिलेशन में रही युवती ने लगाए गंभीर आरोप, शादी से इनकार के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/fir-registered-in-surguja-for-physical-exploitation-on-the-pretext/article-56927"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/surguja-crime-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के अंबिकापुर में शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण करने का मामला सामने आया है। एक युवती ने आरोप लगाया है कि युवक ने शादी का वादा कर उसके साथ लंबे समय तक लिव-इन रिलेशन में रहकर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी से इनकार कर दिया। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस के अनुसार पीड़िता 25 वर्षीय युवती है, जो वर्ष 2022 से अंबिकापुर के नावापारा क्षेत्र में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान उसकी पहचान एक युवक से हुई, जो सूरजपुर जिले के भटगांव क्षेत्र का रहने वाला बताया जा रहा है। शुरुआती बातचीत के बाद दोनों के बीच दोस्ती बढ़ी और धीरे-धीरे संबंध गहरे होते चले गए। शिकायत में बताया गया है कि युवक ने युवती को शादी का भरोसा दिया, जिसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में कहा है कि 26 जनवरी 2025 को युवक ने उसे घूमने के लिए बुलाया था। उस दौरान दोनों एक साथ समय बिताने के बाद किराए के मकान में पहुंचे, जहां शादी का वादा दोहराते हुए शारीरिक संबंध बनाए गए। इसके बाद युवती ने भरोसे के आधार पर युवक के साथ रहने का फैसला किया और फरवरी 2025 में अपना सामान लेकर उसके साथ रहने चली गई। इसके बाद दोनों करीब डेढ़ साल तक लिव-इन रिलेशन में रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस दौरान युवती ने आरोप लगाया है कि उसने कई बार शादी की बात की, लेकिन हर बार युवक टालता रहा। बाद में जब दबाव बढ़ा तो उसने शादी करने से साफ इनकार कर दिया। पीड़िता के अनुसार आरोपी ने यह कहते हुए शादी से मना किया कि दोनों अलग-अलग धर्म और जाति से हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विरोध करने पर युवक ने उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट की तथा जान से मारने की धमकी भी दी। घटना के बाद युवती ने हिम्मत जुटाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। गांधीनगर थाना पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। थाना प्रभारी के अनुसार मामले की जांच प्रारंभ कर दी गई है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए संभावित स्थानों पर दबिश दी जा रही है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले ने क्षेत्र में सामाजिक और कानूनी बहस को भी जन्म दिया है। लिव-इन रिलेशनशिप और सहमति से बने संबंधों में विवाद की स्थिति को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में दोनों पक्षों की जिम्मेदारी और पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की कानूनी और सामाजिक जटिलता से बचा जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत की गहन जांच की जा रही है और पीड़िता के बयान को महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। साथ ही मोबाइल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। मामले में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं, पीड़िता फिलहाल पुलिस की सुरक्षा में है और उसे आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक इंतजार करें। यह मामला फिलहाल जांच के शुरुआती चरण में है और आने वाले दिनों में इसमें और भी तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है। सरगुजा जिले में सामने आया यह मामला एक बार फिर रिश्तों में विश्वास, सामाजिक जटिलताओं और कानूनी अधिकारों पर सवाल खड़े करता है। पुलिस का कहना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी और उसी के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Jun 2026 15:14:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>अंबिकापुर बाल सुधार गृह से 11 नाबालिग फरार, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[तेज बारिश और बिजली गुल होने के दौरान खिड़की उखाड़कर भागे किशोर, हत्या और रेप जैसे मामलों में थे निरुद्ध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/11-minors-absconding-from-ambikapur-juvenile-home-questions-raised-on/article-56797"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ambikapur-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में स्थित बाल संप्रेक्षण गृह से मंगलवार देर शाम एक बड़ी सुरक्षा चूक सामने आई है। यहां से 11 नाबालिग लड़के खिड़की उखाड़कर फरार हो गए। सभी किशोर गंभीर आपराधिक मामलों जैसे हत्या, दुष्कर्म, लूट और चोरी के आरोपों में निरुद्ध थे। घटना के समय इलाके में तेज बारिश हो रही थी और बिजली गुल थी, जिसका फायदा उठाकर नाबालिगों ने वारदात को अंजाम दिया। इस घटना के बाद पूरे प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।  यह घटना मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे की है। अचानक तेज बारिश और गरज-चमक के कारण बाल संप्रेक्षण गृह की बिजली सप्लाई बाधित हो गई थी। अंधेरे और अव्यवस्था का फायदा उठाकर कुछ नाबालिगों ने एक बैरक की खिड़की का ग्रिल उखाड़ दिया। इसके बाद वे एक-एक कर बाहर निकले और परिसर की दीवार फांदकर फरार हो गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी को तुरंत इस घटना की भनक नहीं लगी और करीब एक घंटे बाद कर्मचारियों को फरार होने की सूचना मिली। घटना की जानकारी मिलते ही बाल संप्रेक्षण गृह प्रशासन ने गांधीनगर थाना पुलिस को सूचित किया। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई और पूरे इलाके में नाकाबंदी शुरू कर दी गई। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के प्रमुख मार्गों पर पुलिस टीमों को तैनात किया गया है। साथ ही आसपास के जिलों में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि फरार नाबालिगों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि फरार सभी 11 नाबालिग अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं, जिनमें सरगुजा, सूरजपुर और कोरिया जिले शामिल हैं। इन सभी पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज थे और उन्हें बाल संप्रेक्षण गृह में न्यायिक प्रक्रिया के तहत रखा गया था। अधिकारियों के अनुसार इनमें से कुछ पर हत्या, कुछ पर दुष्कर्म और लूट जैसे गंभीर आरोप थे। इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। बाल संप्रेक्षण गृह के हाउस फादर मनीष कुशवाहा ने बताया कि घटना से पहले सभी किशोर सामान्य स्थिति में थे। शाम को भोजन के बाद वे अपने-अपने बैरक में चले गए थे। कुछ बच्चे टीवी देख रहे थे, तभी अचानक मौसम बिगड़ गया और बिजली चली गई। इसी दौरान कुछ किशोरों ने खिड़की का ग्रिल उखाड़कर भागने की योजना बनाई और उसे अंजाम दे दिया। उन्होंने बताया कि घटना के समय मेन गेट पर दो सुरक्षाकर्मी तैनात थे, लेकिन उन्हें इस पूरी घटना की जानकारी नहीं मिल सकी। घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सुरक्षा उपकरणों और निगरानी प्रणाली में गंभीर खामियां सामने आने की बात कही जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि बिजली गुल होने और अंधेरे की स्थिति ने सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर कर दिया, जिसका फायदा नाबालिगों ने उठाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस ने फरार नाबालिगों की तलाश के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। उनके संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। परिजनों से भी संपर्क किया जा रहा है ताकि कोई सुराग मिल सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सभी नाबालिगों की पहचान कर ली गई है और उन्हें जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। लोग यह जानना चाहते हैं कि इतने संवेदनशील संस्थान में एक साथ 11 नाबालिगों का फरार हो जाना कैसे संभव हुआ। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के संकेत दिए हैं। पूरे इलाके में पुलिस की निगरानी बढ़ा दी गई है और तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्थिति में फरार किशोरों को जल्द से जल्द पकड़ लिया जाएगा और पूरी घटना की विस्तृत जांच की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 14:16:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रायपुर के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा खामियां उजागर, सुधार के निर्देश जारी</title>
                                    <description><![CDATA[निगम की संयुक्त टीम की जांच में फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और लिफ्ट सुरक्षा में मिली कई कमियां, एक सप्ताह में सुधार के आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BE-%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82-%E0%A4%89%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80/article-56796"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-coaching-center-inspection.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। नगर निगम की संयुक्त टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में शहर के कई प्रमुख कोचिंग सेंटरों में अग्नि सुरक्षा मानकों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी गंभीर कमियां पाई गई हैं। यह जांच अभियान जिला प्रशासन के निर्देश पर चलाया गया, जिसमें फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और लिफ्ट सुरक्षा मानकों की विस्तृत समीक्षा की गई। निरीक्षण के बाद प्रशासन ने सभी संबंधित संस्थानों को एक सप्ताह के भीतर कमियां दूर करने के सख्त निर्देश दिए हैं।  निगम की टीम ने शहर के प्रमुख कोचिंग संस्थानों एलन, अनअकादमी, विद्यापीठ, आरसीसी और अकादजा का निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई स्थानों पर छात्रों की संख्या निर्धारित क्षमता से अधिक पाई गई, जिससे कक्षाओं में भीड़भाड़ की स्थिति बनी हुई थी। एलन, अनअकादमी और विद्यापीठ के कुछ क्लासरूम में छात्रों की संख्या तय मानक से अधिक मिली, जिस पर अधिकारियों ने आपत्ति जताई। इसके अलावा कई संस्थानों में वेंटिलेशन की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं पाई गई, जिससे छात्रों के लिए असुविधा की स्थिति बन रही थी। जांच के दौरान आरसीसी और अकादजा कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा मानकों की स्थिति और भी गंभीर पाई गई। यहां फायर सेफ्टी उपकरणों की कमी, आपातकालीन निकासी मार्गों की अनुपयुक्त व्यवस्था और वेंटिलेशन सिस्टम की खराब स्थिति सामने आई। अधिकारियों ने मौके पर ही संबंधित प्रबंधन को निर्देश दिए कि सभी सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी भी तरह की लापरवाही छात्रों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगर निगम की टीम ने यह भी पाया कि कई संस्थानों में लिफ्ट सुरक्षा मानकों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। कुछ जगहों पर फायर एक्सटिंग्विशर की नियमित जांच नहीं हुई थी, जबकि आपात स्थिति में निकासी के लिए पर्याप्त संकेतक भी नहीं लगे थे। अधिकारियों ने इन सभी खामियों को गंभीरता से लेते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निगम ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा में सुधार नहीं किया गया तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इस निरीक्षण अभियान के दौरान प्रशासनिक टीम ने कोचिंग सेंटरों के प्रबंधन को सुरक्षा नियमों के महत्व के बारे में भी अवगत कराया। अधिकारियों ने बताया कि कोचिंग संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र अध्ययन करते हैं, ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है। किसी भी आपात स्थिति में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसलिए सभी संस्थानों को निर्धारित गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिला कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह के निर्देश पर और नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा के मार्गदर्शन में यह विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य शहर के शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन करना था। निरीक्षण टीम में नगर निगम के अभियंता, अग्निशमन विभाग के अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों के कर्मचारी शामिल थे। अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और आने वाले दिनों में अन्य कोचिंग संस्थानों की भी जांच की जाएगी। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि सुरक्षा मानकों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मानते हुए सभी संस्थानों को नियमित रूप से नियमों का पालन करना होगा। इस कार्रवाई के बाद शहर के अन्य कोचिंग संस्थानों में भी हलचल देखी जा रही है। कई संस्थानों ने अपने स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा शुरू कर दी है और सुधार कार्यों पर ध्यान देना शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की जांच आगे भी जारी रहेगी ताकि छात्रों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके। रायपुर के कोचिंग सेंटरों में सामने आई यह स्थिति एक गंभीर संकेत है कि शैक्षणिक संस्थानों में सुरक्षा मानकों को लेकर और अधिक सतर्कता की आवश्यकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:30:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>प्लेसमेंट के नाम पर चेन्नई गईं 3 युवतियां बंधक, वीडियो से मचा हड़कंप</title>
                                    <description><![CDATA[घर लौटने के लिए 10-10 हजार रुपये मांगने का आरोप, सीतापुर से गईं युवतियों ने जारी किया वीडियो, प्रशासन सक्रिय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/3-girls-went-to-chennai-in-the-name-of-placement/article-56646"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chennai-placement-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के सीतापुर क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्लेसमेंट के नाम पर चेन्नई गई तीन युवतियों के बंधक बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। युवतियों ने खुद वीडियो जारी कर दावा किया है कि उन्हें वहां से घर लौटने नहीं दिया जा रहा और वापसी के लिए 10-10 हजार रुपये की मांग की जा रही है। इस घटना के सामने आते ही इलाके में हड़कंप मच गया है और प्रशासन हरकत में आ गया है। सीतापुर थाना क्षेत्र के ग्राम भरतपुर बेलजोरा की रहने वाली प्रतिमा, राधा और जगेश्वरी ने कुछ समय पहले जशपुर जिले में सिलाई प्रशिक्षण लिया था। बताया जा रहा है कि तीनों युवतियों ने लगभग तीन महीने तक सिलाई का प्रशिक्षण पूरा किया था, जिसके दौरान उन्हें चेन्नई में बेहतर प्लेसमेंट और नौकरी का भरोसा दिया गया था। इसी भरोसे के आधार पर वे चेन्नई जाने के लिए तैयार हो गईं। परिजनों का कहना है कि उन्हें यह बताया गया था कि यदि काम पसंद नहीं आता तो वे कभी भी वापस लौट सकती हैं, लेकिन अब स्थिति इसके बिल्कुल उलट बताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चेन्नई पहुंचने के बाद युवतियों को एक स्थान पर काम पर लगाया गया, जहां से अब उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है। युवतियों ने वीडियो में आरोप लगाया है कि उन्हें वहां लाने वाले दो युवतियां और एक युवक अब उनसे संपर्क नहीं कर रहे हैं। फोन कॉल का जवाब नहीं दिया जा रहा और किसी भी तरह की मदद से भी दूरी बनाई जा रही है। वीडियो में तीनों युवतियां काफी परेशान नजर आ रही हैं और उन्होंने सीधे प्रशासन और अपने परिवार से मदद की गुहार लगाई है। सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब युवतियों ने घर लौटने की इच्छा जताई तो उनसे प्रति व्यक्ति 10-10 हजार रुपये की मांग की गई। बताया जा रहा है कि पहले उन्हें कुछ दिनों का इंतजार करने के लिए कहा गया, लेकिन बाद में साफ तौर पर कहा गया कि बिना पैसे दिए उन्हें घर वापस नहीं भेजा जाएगा। युवतियों का यह भी कहना है कि उन्होंने खुद ट्रेन टिकट तक बुक कर ली थी, लेकिन उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। वीडियो वायरल होने के बाद परिजन बेहद चिंतित हैं और लगातार प्रशासन से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि युवतियां नौकरी और बेहतर भविष्य के सपने के साथ गई थीं, लेकिन अब वे खुद को फंसा हुआ महसूस कर रही हैं। गांव में भी इस घटना को लेकर चिंता और आक्रोश दोनों देखा जा रहा है। मामले की जानकारी मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी पहल शुरू कर दी है। सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो ने सरगुजा पुलिस अधीक्षक से बातचीत कर तीनों युवतियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। विधायक ने कहा है कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है ताकि युवतियों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस प्रशासन की ओर से भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सरगुजा पुलिस ने प्रारंभिक जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि युवतियां किस स्थान पर हैं और वहां उनकी स्थिति क्या है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो और परिजनों से मिली जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। संबंधित लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है जिन्होंने युवतियों को चेन्नई भेजने की व्यवस्था की थी। इस बीच, परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। परिवार के लोग बार-बार एक ही बात कह रहे हैं कि उनकी बेटियां सुरक्षित घर लौट आएं, यही सबसे बड़ी प्राथमिकता है। गांव में भी लोग इस घटना पर सवाल उठा रहे हैं कि आखिर प्लेसमेंट के नाम पर इस तरह की स्थिति कैसे बन गई। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:10:26 +0530</pubDate>
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