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                <title>Religious News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Religious News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दैनिक पंचांग 11 जुलाई 2026: शनिवार को आषाढ़ कृष्ण द्वादशी, जानें आज का शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चौघड़िया</title>
                                    <description><![CDATA[कृत्तिका नक्षत्र और गण्ड योग के विशेष संयोग में करें शनिदेव की पूजा, जानिए आज समय की सटीक गणना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/daily-panchang-11th-july-2026-saturday-ashadh-krishna-dwadashi-know/article-58443"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/daily-panchang-11-july-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><span class="citation-371 citation-end-371">भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा में दैनिक पंचांग का विशेष महत्व है।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-370 citation-end-370">पंचांग के माध्यम से हम तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण जैसे पांच प्रमुख अंगों की सटीक जानकारी प्राप्त करते हैं, जिससे हमारे दैनिक कार्यों को सही दिशा और ऊर्जा मिलती है।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-369 citation-end-369">11 जुलाई 2026, दिन शनिवार को आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि है।<sup class="superscript"></sup></span> शनिवार का दिन न्याय के अधिपति शनिदेव और संकटमोचन हनुमान जी की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। <span class="citation-368 citation-end-368">आज के दिन एकादशी व्रत का पारण भी किया जाएगा, जिससे इस तिथि का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-367 citation-end-367">आज के पंचांग में चंद्रमा पूरे दिन वृषभ राशि में संचरण करेंगे, जो कि शुक्र देव की राशि है और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से इसे बेहद सौम्य माना जाता है।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आज के पंचांग के मुख्य घटक (5 Elements of Panchang)</strong></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><strong>तिथि (Tithi):</strong> <span class="citation-365 citation-end-365">कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रात्रि 26:02 (अगली सुबह 02:02 बजे तक) रहेगी, इसके बाद त्रयोदशी तिथि का आरंभ होगा।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>नक्षत्र (Nakshatra):</strong> <span class="citation-364 citation-end-364">कृत्तिका नक्षत्र सुबह 11:00 बजे तक रहेगा, तदोपरांत रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत होगी।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-363 citation-end-363">कृत्तिका नक्षत्र के स्वामी सूर्य देव और देवता अग्नि हैं।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>वार (Vaar):</strong> <span class="citation-362 citation-end-362">शनिवार (शनि ग्रह द्वारा संचालित दिन)।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>योग (Yoga):</strong> <span class="citation-361 citation-end-361">गण्ड योग रात्रि 24:00 (मध्यरात्रि 12:00 बजे तक) रहेगा, इसके बाद वृद्धि योग लगेगा।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>करण (Karana):</strong> <span class="citation-360 citation-end-360">प्रथम करण कौलव दोपहर 15:42 (03:42 बजे) तक रहेगा और द्वितीय करण तैतिल रात्रि 26:02 बजे तक सक्रिय रहेगा।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सूर्य और चंद्र गणना (Sun and Moon Timings)</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><span class="citation-359 citation-end-359">पंचांग में सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर ही दिन के मुख्य काल निर्धारित किए जाते हैं।<sup class="superscript"></sup></span> 11 जुलाई 2026 को सूर्योदय और सूर्यास्त का समय इस प्रकार रहेगा: </p>
<table>
<thead>
<tr>
<td><strong>खगोलीय घटना</strong></td>
<td><strong>समय (24 घंटे के प्रारूप में)</strong></td>
</tr>
</thead>
<tbody>
<tr>
<td><span><strong>सूर्योदय (Sunrise)</strong></span></td>
<td><span>सुबह 05:34 बजे</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span><strong>सूर्यास्त (Sunset)</strong></span></td>
<td><span>शाम 19:17 बजे</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span><strong>चन्द्रोदय (Moonrise)</strong></span></td>
<td><span>मध्यरात्रि 01:48 बजे (12 जुलाई की भोर)</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span><strong>चन्द्रास्त (Moonset)</strong></span></td>
<td><span>दोपहर 16:24 बजे</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span><strong>सूर्य राशि (Sun Sign)</strong></span></td>
<td><span>मिथुन राशि में</span></td>
</tr>
<tr>
<td><span><strong>चंद्र राशि (Moon Sign)</strong></span></td>
<td><span>वृषभ राशि में</span></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आज का शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><span class="citation-358 citation-end-358">यदि आप आज के दिन कोई नया काम शुरू करना चाहते हैं, वाहन या संपत्ति की खरीदारी करना चाहते हैं या कोई महत्वपूर्ण यात्रा करना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त का ध्यान अवश्य रखें।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><strong>अभिजीत मुहूर्त (Abhijit Muhurat):</strong> <span class="citation-357 citation-end-357">दोपहर 11:58 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक।<sup class="superscript"></sup></span> ज्योतिष शास्त्र में इसे दिन का सबसे शक्तिशाली और सकारात्मक मुहूर्त माना जाता है, जिसमें किए गए कार्यों में सफलता की संभावना सर्वाधिक होती है। </p>
</li>
<li>
<p><strong>अमृत काल (Amrit Kaal):</strong> <span class="citation-356 citation-end-356">शाम 05:16 से शाम 06:52 तक।<sup class="superscript"></sup></span> यह समय भी धार्मिक अनुष्ठान और साधना के लिए उत्तम है। </p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आज का अशुभ समय और राहुकाल (Inauspicious Timings)</strong></h5>
<p style="text-align:justify;"><span class="citation-355 citation-end-355">सनातन परंपरा में अशुभ समय के दौरान कोई भी मांगलिक कार्य या नया व्यावसायिक सौदा शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><strong>राहुकाल (Rahu Kaal):</strong> <span class="citation-354 citation-end-354">सुबह 10:43 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक।<sup class="superscript"></sup></span> <span class="citation-353 citation-end-353">इस कालखंड में राहु का प्रभाव अत्यधिक रहता है, इसलिए शुभ कार्यों को इस समय टाल देना चाहिए।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>गुलिक काल (Gulika Kaal):</strong> <span class="citation-352 citation-end-352">सुबह 05:34 बजे से सुबह 07:17 बजे तक।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>यमगण्ड (Yamaganda):</strong> <span class="citation-351 citation-end-351">दोपहर 14:08 बजे से दोपहर 15:51 बजे तक।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>11 जुलाई 2026 का दिन का चौघड़िया (Day Choghadiya)</strong></h5>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><strong>शुभ चौघड़िया:</strong> <span class="citation-350 citation-end-350">सुबह 07:16 से सुबह 08:59 तक (सभी कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ)<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>चर चौघड़िया:</strong> <span class="citation-349 citation-end-349">दोपहर 12:25 से दोपहर 14:07 तक (यात्रा और गतिशीलता के कार्यों के लिए उपयुक्त)<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>लाभ चौघड़िया:</strong> <span class="citation-348 citation-end-348">दोपहर 14:07 से दोपहर 15:50 तक (व्यापारिक लेन-देन और धन लाभ के लिए शुभ)<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><strong>अमृत चौघड़िया:</strong> <span class="citation-347 citation-end-347">दोपहर 15:50 से शाम 17:33 तक (स्थायी कार्यों और पूजा के लिए उत्तम)<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
</ul>
<blockquote>
<p style="text-align:justify;"><strong>शनिवार का विशेष महत्व और उपाय:</strong> आज शनिवार के दिन शनिदेव के मंत्र <em>"ॐ शं शनैश्चराय नमः"</em> का 108 बार जाप करें। शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्टों से मुक्ति मिलती है। <span class="citation-346 citation-end-346">साथ ही, आज एकादशी व्रत का पारण करने वाले जातक सुबह विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ कर सात्विक भोजन से व्रत खोलें।<sup class="superscript"></sup></span></p>
</blockquote>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/daily-panchang-11th-july-2026-saturday-ashadh-krishna-dwadashi-know/article-58443</link>
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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:03:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चित्रकूट पहुंचे सीएम योगी, कामदगिरि परिक्रमा कर बरहा हनुमान मंदिर में की पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान कामतानाथ के दर्शन के बाद करीब पांच किलोमीटर की पदयात्रा परिक्रमा की, श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-yogi-reached-chitrakoot-circumambulated-kamadgiri-and-worshiped-at-barha/article-58273"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/yogi-adityanath-(3)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार सुबह धार्मिक नगरी चित्रकूट पहुंचकर भगवान कामतानाथ के दर्शन किए और कामदगिरि की पवित्र परिक्रमा कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री का यह दौरा पूरी तरह धार्मिक कार्यक्रमों पर केंद्रित रहा। सुबह से ही चित्रकूट में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक सुरक्षा बल तैनात रहे और पूरे कार्यक्रम की लगातार निगरानी की जाती रही। मुख्यमंत्री के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु सड़क किनारे और मंदिर परिसर में पहले से मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सुबह करीब 7:10 बजे चित्रकूट के प्रसिद्ध बरहा हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान हनुमान का आशीर्वाद लिया। मंदिर में पूजा के दौरान उन्होंने प्रदेश की खुशहाली, शांति और जनकल्याण की कामना की। मंदिर परिसर में मौजूद पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा संपन्न कराई। दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर में कुछ समय बिताया और वहां मौजूद संतों से भी मुलाकात की।</p>
<p style="text-align:justify;">बरहा हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद मुख्यमंत्री ने कामदगिरि की लगभग पांच किलोमीटर लंबी पवित्र परिक्रमा शुरू की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कामदगिरि पर्वत को भगवान श्रीराम का स्वरूप माना जाता है और इसकी परिक्रमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान चित्रकूट में लंबा समय बिताया था। इसी कारण देशभर से लाखों श्रद्धालु वर्षभर यहां दर्शन और परिक्रमा के लिए पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री ने भी पारंपरिक तरीके से पैदल चलते हुए परिक्रमा पूरी की।</p>
<p style="text-align:justify;">परिक्रमा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ साधु-संत, प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षा कर्मी भी मौजूद रहे। रास्ते में उन्होंने कई स्थानों पर श्रद्धालुओं का अभिवादन स्वीकार किया। परिक्रमा मार्ग पर मौजूद लोगों में मुख्यमंत्री को करीब से देखने का खास उत्साह दिखाई दिया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उन पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। पूरे मार्ग में 'जय श्रीराम' और 'जय कामतानाथ' के जयघोष लगातार सुनाई देते रहे, जिससे धार्मिक माहौल और भी भक्तिमय हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के इस दौरे की एक और तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी। परिक्रमा के दौरान उन्होंने रास्ते में मौजूद बंदरों को चना भी खिलाया। चित्रकूट में बड़ी संख्या में बंदर रहते हैं और श्रद्धालु उन्हें प्रसाद या चना खिलाना शुभ मानते हैं। मुख्यमंत्री ने भी कुछ समय रुककर बंदरों को चना खिलाया। वहां मौजूद लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल फोन में कैद किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से साझा किए जाने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री के चित्रकूट दौरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। परिक्रमा मार्ग के हर प्रमुख स्थान पर पुलिस बल तैनात रहा। सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यातायात व्यवस्था में भी आवश्यक बदलाव किए गए थे। प्रशासन का कहना था कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पहले से पूरी कर ली गई थीं।चित्रकूट धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश का अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से जुड़ी अनेक मान्यताएं इस स्थान से जुड़ी हुई हैं। कामदगिरि परिक्रमा, रामघाट, बरहा हनुमान मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों पर हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। विशेष पर्वों और धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक बढ़ जाती है। मुख्यमंत्री का यह दौरा भी धार्मिक आस्था से जुड़ा माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री के आगमन का स्वागत किया और इसे चित्रकूट के लिए गौरव का विषय बताया। व्यापारियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि मुख्यमंत्री के दौरे से धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। कई लोगों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में चित्रकूट में तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए नई योजनाओं पर भी काम होगा। कामदगिरि परिक्रमा पूरी करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बांदा के लिए रवाना होने का कार्यक्रम निर्धारित था। वहां भी उनके कई सरकारी कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। हालांकि चित्रकूट में उनका यह दौरा पूरी तरह धार्मिक गतिविधियों पर केंद्रित रहा। पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए पूजा-अर्चना एवं परिक्रमा संपन्न की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cm-yogi-reached-chitrakoot-circumambulated-kamadgiri-and-worshiped-at-barha/article-58273</link>
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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:14:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बुधवार को भगवान गणेश की पूजा कैसे करें? जानें शुभ विधि, मंत्र, भोग और विशेष उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[बुधवार भगवान गणेश को समर्पित माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और विशेष उपाय करने से बुद्धि, सुख, समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति मिलने की मान्यता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/puja-recitation/6a43c349ca70e/article-57466"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/wednesday-ganesh-puja.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता को समर्पित माना गया है। बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं, बुद्धि और विवेक की प्राप्ति होती है तथा परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता और मंगलकर्ता कहा जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत उनसे ही की जाती है। यदि आप चाहते हैं कि आपके कार्य बिना बाधा के पूरे हों, करियर और व्यापार में सफलता मिले तथा घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे, तो बुधवार के दिन भगवान गणेश की विशेष पूजा अवश्य करनी चाहिए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को ऐसे करें भगवान गणेश की पूजा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार की सुबह ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के बाद स्नान करके स्वच्छ और हल्के हरे या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर के मंदिर की साफ-सफाई करें और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ जल से पोंछकर लाल या पीले वस्त्र पर स्थापित करें।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजा के दौरान सबसे पहले दीपक और धूप जलाएं। इसके बाद भगवान गणेश को गंगाजल अर्पित करें। फिर रोली, अक्षत, सिंदूर, दूर्वा घास, लाल फूल और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। गणेश जी को विशेष रूप से दूर्वा घास अत्यंत प्रिय मानी जाती है। मान्यता है कि 21 दूर्वा अर्पित करने से भगवान शीघ्र प्रसन्न होते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गणेश मंत्रों का करें जाप</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पूजा के समय भगवान गणेश के मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार निम्न मंत्रों का जाप कर सकते हैं—</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>ॐ गं गणपतये नमः।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">या</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।<br />निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥</strong></p>
<p style="text-align:justify;">यदि समय हो तो गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश चालीसा या संकटनाशन गणेश स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है। इनका नियमित पाठ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करने वाला माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>भगवान गणेश को क्या भोग लगाएं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भगवान गणेश को मोदक सबसे प्रिय माना गया है। यदि मोदक उपलब्ध न हों तो बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, गुड़, नारियल, केले या अन्य मिठाइयों का भोग भी लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटना शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति और सौहार्द बना रहता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार को करें ये विशेष उपाय</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हैं या आर्थिक परेशानियां बनी हुई हैं, तो बुधवार को कुछ सरल उपाय भी किए जा सकते हैं।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>भगवान गणेश को 21 दूर्वा अर्पित करें।</li>
<li>हरे मूंग का दान किसी जरूरतमंद को करें।</li>
<li>गाय को हरा चारा खिलाएं।</li>
<li>विद्यार्थी भगवान गणेश को कलम और पुस्तक अर्पित कर सफलता की प्रार्थना करें।</li>
<li>व्यापार में उन्नति के लिए दुकान या कार्यालय में गणेश जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।</li>
<li>गरीब या जरूरतमंद बच्चों को फल, मिठाई या स्टेशनरी का दान करें।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों से शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या करें और क्या न करें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार के दिन पूजा करते समय मन को शांत रखें और किसी के प्रति क्रोध या कटु वचन बोलने से बचें। पूजा में बासी फूल या खराब भोग का उपयोग नहीं करना चाहिए। भगवान गणेश को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता, इसलिए पूजा में इसका प्रयोग न करें।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिन झूठ बोलने, किसी का अपमान करने और अनावश्यक विवाद से बचने की भी सलाह दी जाती है। धार्मिक दृष्टि से संयम, सदाचार और सेवा भाव भगवान गणेश को प्रिय माने गए हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए विशेष महत्व</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बुधवार का दिन विशेष रूप से विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों और नौकरीपेशा लोगों के लिए शुभ माना जाता है। भगवान गणेश बुद्धि और ज्ञान के देवता हैं। इसलिए इस दिन उनकी पूजा करने से एकाग्रता बढ़ने और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होने की मान्यता है।</p>
<p style="text-align:justify;">व्यापारियों के लिए भी बुधवार का दिन लाभकारी माना जाता है। नए कार्य की शुरुआत, नए सौदे या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले गणेश जी का स्मरण करना शुभ माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बुधवार का आध्यात्मिक संदेश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">भगवान गणेश केवल धन और सफलता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि विवेक, धैर्य और सकारात्मक सोच का भी संदेश देते हैं। उनकी बड़ी सूंड, विशाल कान और छोटा मुख हमें अधिक सुनने, कम बोलने और सोच-समझकर निर्णय लेने की प्रेरणा देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बुधवार को भगवान गणेश की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने, मानसिक शांति प्राप्त करने और सुख-समृद्धि बढ़ाने की मान्यता है। नियमित पूजा, मंत्र जाप, दान और अच्छे कर्मों के साथ यदि भगवान गणेश का स्मरण किया जाए, तो व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता और आत्मविश्वास का संचार होता है। हालांकि, धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं और उनका पालन प्रत्येक व्यक्ति अपनी श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/puja-recitation/6a43c349ca70e/article-57466</link>
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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन</title>
                                    <description><![CDATA[पंचामृत पूजन के बाद भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की मालाओं से हुआ बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-flood-of-devotion-in-the-bhasma-aarti/article-56785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि की गूंज सुनाई देने लगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के रात्रिकालीन श्रृंगार को उतारा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का जलाभिषेक किया गया। परंपरानुसार दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन संपन्न हुआ। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परंपरा के अनुसार नंदी पूजन के बाद ही मुख्य आरती और पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल को पंचामृत अर्पित किया गया और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की निगाहें गर्भगृह की ओर टिकी रहीं, जहां हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और सुगंधित द्रव्यों से सजाया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। विभिन्न रंगों के ताजे पुष्पों से तैयार मालाओं से भगवान का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दे रहा था। गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर चंदन का लेप और भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य नजर आया। आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती की विशेषता यह है कि यह देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते हर दिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। सुबह होने से पहले ही श्रद्धालु कतारों में लग गए थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भस्म आरती का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और भगवान शिव को भस्म अति प्रिय मानी जाती है। इसी कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में भी देखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता देशभर में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी भस्म आरती का आकर्षण कम नहीं होता। बुधवार को संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। भोर की पहली किरणों के साथ जब भस्म आरती संपन्न हुई तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो चुका था। श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, लेकिन उनके मन में भस्म आरती का दिव्य और अलौकिक दृश्य लंबे समय तक बना रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>24 जून 2026 का पंचांग: आज भद्रा का प्रभाव, शुभ कार्यों से पहले जानें मुहूर्त</title>
                                    <description><![CDATA[बुधवार के दिन तिथि, नक्षत्र और शुभ-अशुभ समय पर रहेगी लोगों की नजर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/panchang-of-june-24-2026-effect-of-bhadra-today-know/article-56752"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/panchang-24-june-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आइए विस्तार से जानते हैं आज 24 जून 2026 के विस्तृत पंचांग, मुख्य ग्रह गोचर, चौघड़िया, शुभ समय और राहुकाल की सटीक समय-सारणी के बारे में, ताकि आपके सभी कार्य बिना किसी बाधा के संपन्न हो सकें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>24 जून 2026 के पंचांग के मुख्य घटक</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">वैदिक पंचांग के पांच मुख्य अंग तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार होते हैं। आज के पंचांग की मुख्य स्थितियां इस प्रकार हैं:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><span class="citation-90">विक्रम संवत:</span><span class="citation-90 citation-end-90"> 2083 (सिद्धार्थी)<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-89">शक संवत:</span><span class="citation-89 citation-end-89"> 1948 (पराभव)<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-88">मास व पक्ष:</span><span class="citation-88 citation-end-88"> ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-87">आज की तिथि:</span><span class="citation-87 citation-end-87"> दशमी तिथि (शाम को 06 बजकर 12 मिनट तक, इसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ होगा)।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-86">आज का नक्षत्र:</span><span class="citation-86 citation-end-86"> चित्रा नक्षत्र (दुपहर 01 बजकर 59 मिनट तक, इसके बाद स्वाती नक्षत्र लगेगा)।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-85">आज का योग:</span><span class="citation-85 citation-end-85"> परिघ योग (सुबह 10 बजकर 23 मिनट तक, इसके बाद शिव योग की शुरुआत होगी)।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-84">आज का करण:</span><span class="citation-84 citation-end-84"> गरज (शाम 06 बजकर 12 मिनट तक), तदुपरांत वणिज करण जो पूरी रात रहेगा।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-83">आज का दिन:</span><span class="citation-83 citation-end-83"> बुधवार<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>सूर्य और चंद्रमा के उदय व अस्त का समय</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">पंचांग के अनुसार सूर्य और चंद्र देव की स्थिति हमारे दिन के वातावरण को प्रभावित करती है। आज समय-सारणी इस प्रकार रहेगी:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><span class="citation-82">सूर्योदय:</span><span class="citation-82 citation-end-82"> सुबह 05 बजकर 25 मिनट पर<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-81">सूर्यास्त:</span><span class="citation-81 citation-end-81"> शाम को 07 बजकर 23 मिनट पर<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-80">चंद्रोदय:</span><span class="citation-80 citation-end-80"> दोपहर 02 बजकर 42 मिनट पर<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-79">चंद्रास्त:</span><span class="citation-79 citation-end-79"> मध्यरात्रि के बाद 01 बजकर 35 मिनट पर (25 जून)<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-78">सूर्य राशि:</span><span class="citation-78 citation-end-78"> सूर्य देव इस समय मिथुन राशि में विराजमान हैं।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-77">चंद्र राशि:</span><span class="citation-77 citation-end-77"> चंद्र देव आज तुला राशि में संचार करेंगे।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आज के शुभ मुहूर्त: कार्यों की सफलता के लिए सर्वश्रेष्ठ समय</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">यदि आप आज कोई नया व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, गृह प्रवेश की रूपरेखा बना रहे हैं, या कोई बड़ा वित्तीय लेनदेन करने जा रहे हैं, तो इन शुभ समयों का उपयोग करें:</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><span class="citation-76">अमृत काल:</span><span class="citation-76 citation-end-76"> सुबह 07 बजकर 01 मिनट से सुबह 08 बजकर 46 मिनट तक।<sup class="superscript"></sup></span> यह समय किसी भी प्रकार के आध्यात्मिक और मांगलिक कार्यों के लिए बहुत उत्तम है। </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-75">ब्रह्म मुहूर्त:</span><span class="citation-75 citation-end-75"> सुबह 03 बजकर 53 मिनट से सुबह 04 बजकर 39 मिनट तक।<sup class="superscript"></sup></span> योग, ध्यान और अध्ययन के लिए यह समय सर्वोत्तम माना गया है। </p>
</li>
<li>
<p>दिन का चौघड़िया मुहूर्त:</p>
<ul>
<li>
<p><span class="citation-74">लाभ (उन्नति):</span><span class="citation-74 citation-end-74"> सुबह 05:25 से सुबह 07:10 तक<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p>अमृत (सर्वोत्तम): सुबह 07:10 से सुबह 08:55 तक</p>
</li>
<li>
<p>शुभ (उत्तम): सुबह 10:39 से दोपहर 12:24 तक</p>
</li>
</ul>
</li>
</ul>
<blockquote>
<p>विशेष नोट: आज 24 जून 2026 को दोपहर में कोई विशिष्ट 'अभिजित मुहूर्त' उपलब्ध नहीं है, इसलिए ऊपर दिए गए अमृत काल अथवा शुभ चौघड़िया में मांगलिक कार्य संपन्न किए जा सकते हैं।</p>
</blockquote>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>अशुभ समय और राहुकाल: इस दौरान वर्जित हैं शुभ कार्य</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">शास्त्रों के अनुसार, राहुकाल और कुछ अन्य विशिष्ट समयों में कोई भी नया या मांगलिक कार्य शुरू नहीं करना चाहिए, क्योंकि इस दौरान किए गए कार्यों में विघ्न आने की आशंका रहती है।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li>
<p><span class="citation-73">राहुकाल:</span><span class="citation-73 citation-end-73"> दोपहर 12 बजकर 00 मिनट से दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।<sup class="superscript"></sup></span> इस डेढ़ घंटे की अवधि में किसी भी नए अनुबंध, खरीद-बिक्री या यात्रा की शुरुआत करने से बचें। </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-72">गुलिक काल:</span><span class="citation-72 citation-end-72"> सुबह 10 बजकर 30 मिनट से दोपहर 12 बजकर 00 मिनट तक।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p><span class="citation-71">यमगण्ड:</span><span class="citation-71 citation-end-71"> सुबह 07 बजकर 30 मिनट से सुबह 09 बजकर 00 मिनट तक।<sup class="superscript"></sup></span> </p>
</li>
<li>
<p>दिशाशूल: बुधवार के दिन उत्तर दिशा में दिशाशूल रहता है। यदि इस दिशा में यात्रा करना बहुत आवश्यक हो, तो सुबह घर से निकलने से पहले धनिया या तिल खाकर निकलें।</p>
</li>
</ul>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आज का धार्मिक महत्व और विशेष उपाय</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">24 जून 2026 को ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि होने के कारण यह दिन धार्मिक दृष्टि से बहुत पवित्र है। <span class="citation-70 citation-end-70">शाम 06:12 के बाद एकादशी तिथि शुरू हो जाएगी, जो कि अगले दिन 'निर्जला एकादशी' के रूप में मनाई जाएगी।<sup class="superscript"></sup></span> जो श्रद्धालु निर्जला एकादशी का कठिन व्रत रखते हैं, वे आज दशमी तिथि की शाम से ही चावल और तामसिक भोजन का त्याग कर देते हैं। </p>
<p style="text-align:justify;">आज का महाउपाय: चूंकि आज बुधवार है और परिघ के साथ शिव योग का सुंदर तालमेल बन रहा है, इसलिए सुबह के समय भगवान गणेश को 21 दूर्वा (दूब घास) अर्पित करें और मोदक का भोग लगाएं। ऐसा करने से कुंडली में बुध ग्रह मजबूत होता है, व्यापार में उन्नति होती है और धन से जुड़ी सभी परेशानियां समाप्त होती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/panchang-of-june-24-2026-effect-of-bhadra-today-know/article-56752</link>
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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 10:42:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत पूजन के बाद दिए राजा स्वरूप दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38cce6c593f/article-56623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद जलाभिषेक संपन्न कराया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। सनातन परंपरा में पंचामृत पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक विधि से आराधना करते हुए भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित कर विशेष पूजा की गई। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। यह श्रृंगार भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और महाकाल मंदिर की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है। श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में भगवान महाकाल को रजत आभूषणों से अलंकृत किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाओं से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा। भगवान महाकाल का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह परंपरा केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने और इसमें शामिल होने की श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए। कई श्रद्धालु इस पल को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सोमवार और विशेष पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। सोमवार की भस्म आरती में भी यही आस्था और भक्ति देखने को मिली। पंचामृत पूजन, रजत आभूषणों से सुसज्जित राजसी श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालु महाकाल के जयघोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जून 2026 का पंचांग: जानिए आज का शुभ समय, तिथि और ग्रह-नक्षत्र स्थिति</title>
                                    <description><![CDATA[शनिवार, 20 जून 2026 का दिन धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण, पंचांग के अनुसार शुभ-अशुभ मुहूर्त और ग्रह स्थिति का प्रभाव रहेगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/panchang-of-june-2026-know-todays-auspicious-time-date-and/article-56435"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/panchang-20-june-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">20 जून 2026, शनिवार का दिन हिंदू पंचांग के अनुसार धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से खास माना जा रहा है। आज के दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का प्रभाव लोगों के दैनिक जीवन, कार्यों और निर्णयों पर दिखाई दे सकता है। सुबह से ही वातावरण में एक अलग प्रकार की ऊर्जा महसूस की जा रही है, जो धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक कार्यों की ओर लोगों को आकर्षित कर सकती है। पंचांग के अनुसार आज का दिन कुछ कार्यों के लिए शुभ संकेत दे रहा है, जबकि कुछ मामलों में सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। पंचांग के अनुसार तिथि, वार, नक्षत्र और योग का विशेष महत्व होता है। ये सभी मिलकर दिन की ऊर्जा और घटनाओं की दिशा तय करते हैं। 20 जून 2026 को शनिवार होने के कारण शनि देव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन शनि देव की आराधना करने से जीवन की बाधाएं कम होती हैं और कर्मों में स्थिरता आती है। आज के दिन दान-पुण्य और सेवा कार्यों का भी विशेष महत्व बताया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आज के नक्षत्र की स्थिति कुछ लोगों के लिए सकारात्मक परिणाम लेकर आ सकती है। कार्यक्षेत्र में रुके हुए काम आगे बढ़ सकते हैं और नई योजनाओं की शुरुआत के संकेत भी मिल सकते हैं। हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुछ स्थितियों में जल्दबाजी से बचने की आवश्यकता होगी, क्योंकि ग्रहों की चाल निर्णयों को प्रभावित कर सकती है। दिन की शुरुआत में लिया गया सही निर्णय पूरे दिन की दिशा बदल सकता है। शुभ मुहूर्त की बात करें तो आज का दिन नए कार्यों की शुरुआत के लिए मध्यम रूप से अनुकूल माना जा रहा है। सुबह के समय किए गए कार्य अधिक फलदायी हो सकते हैं। वहीं दोपहर के समय कुछ स्थितियों में रुकावटें महसूस हो सकती हैं, इसलिए महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर लेना बेहतर रहेगा। राहुकाल के समय किसी भी शुभ कार्य से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इस अवधि में किए गए कार्यों के परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं मिलते। पारिवारिक जीवन की दृष्टि से आज का दिन संतुलन बनाए रखने का संकेत दे रहा है। घर में किसी छोटी बात को लेकर मतभेद की स्थिति बन सकती है, लेकिन समझदारी और बातचीत से उसे हल किया जा सकता है। रिश्तों में धैर्य और संयम बनाए रखना आज विशेष रूप से लाभकारी रहेगा। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक शांति प्राप्त हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आर्थिक मामलों में आज का दिन मिश्रित परिणाम देने वाला हो सकता है। कुछ लोगों को आय में सुधार के संकेत मिल सकते हैं, जबकि कुछ को अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना होगा। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए दिन सामान्य लेकिन स्थिर प्रगति का संकेत दे रहा है। किसी भी नए निवेश या बड़े सौदे से पहले पूरी जांच-पड़ताल करना आवश्यक होगा, अन्यथा नुकसान की संभावना बन सकती है। कार्यस्थल पर आज का दिन मेहनत और धैर्य की परीक्षा ले सकता है। नौकरीपेशा लोगों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जिससे व्यस्तता बढ़ेगी। हालांकि मेहनत का परिणाम धीरे-धीरे सकारात्मक रूप में सामने आएगा। टीमवर्क और सहयोग से कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहेगी। सहकर्मियों के साथ तालमेल बनाए रखना आज की सबसे बड़ी जरूरत होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर दर्शन, पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान जैसी गतिविधियां मानसिक शांति प्रदान कर सकती हैं। शनि देव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। इस दिन गरीबों को दान देना और सेवा कार्य करना भी शुभ माना गया है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।20 जून 2026 का पंचांग यह संकेत देता है कि आज का दिन संतुलन, धैर्य और समझदारी के साथ आगे बढ़ने का है। जो लोग अपने कार्यों में अनुशासन बनाए रखेंगे और जल्दबाजी से बचेंगे, उनके लिए यह दिन सकारात्मक परिणाम दे सकता है। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति यह दर्शाती है कि आज किए गए छोटे-छोटे अच्छे कर्म भविष्य में बड़े लाभ का कारण बन सकते हैं। इसलिए दिनभर संयम और सकारात्मक सोच बनाए रखना ही सबसे उत्तम मार्ग रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:22:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>19 जून 2026 का पंचांग: जानें तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त और राहुकाल</title>
                                    <description><![CDATA[शुक्रवार के दिन धार्मिक कार्यों, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए कैसा रहेगा दिन, पंचांग के अनुसार जानिए ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/panchang-of-june-19-2026-know-date-constellation-auspicious-time/article-56350"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/panchang-19-june-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">19 जून 2026, शुक्रवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार किसी भी दिन की शुरुआत तिथि, नक्षत्र, योग और करण के आधार पर आंकी जाती है, इसलिए लाखों लोग अपने दैनिक कार्यों की योजना पंचांग देखकर ही बनाते हैं। विशेष रूप से विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद, व्यापार की शुरुआत, निवेश और धार्मिक अनुष्ठानों जैसे कार्यों के लिए पंचांग की भूमिका अहम मानी जाती है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी को समर्पित माना जाता है और इस दिन धन, समृद्धि तथा सुख-शांति की कामना से विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। 19 जून का दिन कई शुभ संयोगों के साथ शुरू हो रहा है, जिससे धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक कार्यों में लोगों की रुचि बढ़ी हुई है। सुबह से ही मंदिरों में भक्तों की भीड़ देखने को मिल सकती है, वहीं घरों में भी लोग पूजा-पाठ और व्रत संबंधी तैयारियों में जुटे रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग के अनुसार दिनभर ग्रहों और नक्षत्रों की स्थिति का प्रभाव विभिन्न कार्यों पर पड़ता है। यही वजह है कि शुभ और अशुभ समय की जानकारी को महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी नए कार्य की शुरुआत शुभ मुहूर्त में की जाए तो उसके सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना अधिक रहती है। दूसरी ओर राहुकाल और अन्य अशुभ समय में महत्वपूर्ण कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। शुक्रवार को माता लक्ष्मी की पूजा के साथ भगवान विष्णु की आराधना भी शुभ मानी जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और विशेष पूजा के माध्यम से परिवार की आर्थिक उन्नति तथा सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। मंदिरों में सुबह और शाम विशेष आरती का आयोजन किया जाता है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग केवल आस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह भारतीय खगोल विज्ञान और समय गणना की प्राचीन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा भी है। हजारों वर्षों से भारतीय समाज में पंचांग का उपयोग पर्व-त्योहारों की तिथियां निर्धारित करने, कृषि कार्यों की योजना बनाने और सामाजिक आयोजनों के समय तय करने के लिए किया जाता रहा है। आधुनिक समय में भले ही जीवनशैली बदल गई हो, लेकिन पंचांग की उपयोगिता आज भी बनी हुई है। अब लोग मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी पंचांग की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं। इसके बावजूद पारंपरिक पंचांगों का महत्व कम नहीं हुआ है और बड़ी संख्या में लोग आज भी दैनिक पंचांग पढ़कर दिन की शुरुआत करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">19 जून 2026 को पड़ने वाला शुक्रवार विशेष रूप से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन घर और कार्यस्थल की साफ-सफाई करने, दीप प्रज्वलित करने और माता लक्ष्मी का विधि-विधान से पूजन करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। कई लोग इस दिन सफेद वस्त्र धारण करते हैं और देवी को सफेद पुष्प, खीर, मिश्री तथा सुगंधित सामग्री अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। कुछ स्थानों पर महिलाएं शुक्रवार व्रत रखती हैं और परिवार की खुशहाली के लिए विशेष प्रार्थना करती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रहों की चाल और नक्षत्रों की स्थिति व्यक्ति के जीवन पर सूक्ष्म प्रभाव डालती है। हालांकि इसे लेकर अलग-अलग मत भी हैं, लेकिन भारतीय परंपरा में पंचांग को मार्गदर्शक के रूप में देखा जाता है। व्यापार से जुड़े लोग अक्सर नए सौदों और निवेश से पहले शुभ मुहूर्त की जानकारी लेते हैं। इसी तरह विवाह और मांगलिक कार्यक्रमों के लिए भी पंचांग के आधार पर तिथियां तय की जाती हैं। शुक्रवार को बनने वाले कुछ शुभ योगों को लेकर धार्मिक समुदाय में उत्साह देखा जा रहा है। कई श्रद्धालु इस दिन विशेष दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान करने की योजना बना रहे हैं। धार्मिक ग्रंथों में शुक्रवार को सेवा, दान और सद्भावना के कार्यों को भी विशेष महत्व दिया गया है। जरूरतमंदों की सहायता करना, भोजन दान देना और गौसेवा जैसे कार्य इस दिन पुण्यदायी माने जाते हैं। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि पूजा-पाठ के साथ अच्छे कर्म भी जीवन में सकारात्मक परिणाम लाते हैं। इसलिए केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदार व्यवहार भी इस दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। कई श्रद्धालु मंदिरों में प्रसाद वितरण और सामाजिक सेवा के कार्यक्रमों में भाग लेते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग का महत्व केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है। यह लोगों को समय के प्रति जागरूक रहने और अपने कार्यों को व्यवस्थित ढंग से करने की प्रेरणा भी देता है। भारतीय संस्कृति में समय को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है और पंचांग उसी समय व्यवस्था का पारंपरिक स्वरूप है। 19 जून 2026 का दिन भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाला माना जा रहा है। श्रद्धालु दिनभर पूजा-पाठ, व्रत, दान और धार्मिक आयोजनों में भाग लेंगे, वहीं कई लोग अपने नए कार्यों की शुरुआत भी शुभ समय देखकर करेंगे। 19 जून 2026 का पंचांग धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। माता लक्ष्मी की पूजा, शुभ मुहूर्तों का पालन, राहुकाल से बचाव और सकारात्मक कार्यों की शुरुआत इस दिन को खास बनाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए कार्य जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं। यही कारण है कि पंचांग आज भी करोड़ों लोगों के दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है और हर नए दिन की शुरुआत के साथ इसकी प्रासंगिकता बनी रहती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 05:02:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>18 जून 2026 का पंचांग: गुरुवार को शुभ योगों का संयोग, पूजा-पाठ और मांगलिक कार्यों के लिए अनुकूल दिन</title>
                                    <description><![CDATA[आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि, धार्मिक कार्यों और आध्यात्मिक साधना के लिए दिन रहेगा विशेष]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/horoscope/almanac-of-june-18-2026-coincidence-of-auspicious-yogas-on/article-56237"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/18-june-2026-panchang.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">18 जून 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह दिन आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि के अंतर्गत आता है। गुरुवार होने के कारण यह दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है। आज का दिन आध्यात्मिक साधना, पूजा-पाठ, दान-पुण्य और पारिवारिक मंगल कार्यों के लिए अनुकूल रह सकता है। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है और कई लोग व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग ले सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग के अनुसार दिन की शुरुआत शुभ ऊर्जा के साथ मानी जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक गुरुवार के दिन पीले वस्त्र धारण करना, भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करना और जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान करना शुभ फलदायी माना जाता है। कई परिवार इस दिन विशेष पूजा का आयोजन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरों तक गुरुवार को धार्मिक गतिविधियों का अलग महत्व देखा जाता है। मंदिरों में विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भगवद्गीता पाठ और भजन-कीर्तन जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। माना जाता है कि इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा जीवन में सकारात्मकता और स्थिरता लेकर आती है। आज कुछ शुभ योग भी बन रहे हैं, जिनका प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है। धार्मिक कार्यों के अलावा शिक्षा, ज्ञान और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़े प्रयासों के लिए भी यह समय अनुकूल माना जा रहा है। कई लोग नए कार्यों की योजना बनाने या महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले पंचांग और शुभ मुहूर्त का सहारा लेते हैं। इसी कारण पंचांग का महत्व आज भी भारतीय समाज में बना हुआ है। विवाह, गृह प्रवेश, भूमि पूजन और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए शुभ समय की जानकारी लेने वालों की संख्या ऐसे दिनों में बढ़ जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग केवल तिथि और नक्षत्र की जानकारी भर नहीं देता, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपरा का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। आज के दिन चंद्रमा की स्थिति और ग्रहों की चाल को ध्यान में रखते हुए कई धार्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में पंचांग की गणना में कुछ अंतर देखने को मिलता है, लेकिन इसके मूल सिद्धांत समान रहते हैं। यही वजह है कि देश के विभिन्न हिस्सों में लोग स्थानीय पंचांग के आधार पर अपने दैनिक और धार्मिक कार्यों की योजना बनाते हैं। गुरुवार को देवगुरु बृहस्पति का दिन माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति से जुड़े कार्यों में सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। छात्र और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा भी इस दिन विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। कई लोग अपने गुरुजनों का सम्मान करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक ग्रंथों में भी गुरुवार को सदाचार, संयम और सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आज के पंचांग के अनुसार दिनभर कई शुभ समय ऐसे रहेंगे जिनमें पूजा, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जा सकते हैं। सुबह का समय विशेष रूप से शुभ माना जा रहा है। हालांकि राहुकाल और अन्य अशुभ कालखंडों का ध्यान रखने की भी सलाह दी जाती है। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार शुभ मुहूर्त में किए गए कार्यों के सफल होने की संभावना अधिक मानी जाती है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में लोग पंचांग देखकर अपने महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करते हैं। पंचांग का उद्देश्य केवल भविष्य बताना नहीं बल्कि व्यक्ति को समय के महत्व और प्रकृति के साथ तालमेल का संदेश देना भी है। 18 जून 2026 का यह दिन श्रद्धा, विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संदेश देता है। जो लोग आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि रखते हैं, उनके लिए यह दिन विशेष महत्व रख सकता है। धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और दान-पुण्य के माध्यम से लोग अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 00:00:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चंद्र दर्शन 2026 आज: अमावस्या के बाद चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व, श्रद्धालु करेंगे व्रत और पूजा</title>
                                    <description><![CDATA[16 जून को मनाया जाएगा चंद्र दर्शन पर्व, चंद्र देव की आराधना से सुख, समृद्धि और सौभाग्य प्राप्त होने की मान्यता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/chandra-darshan-2026-today-after-amavasya-there-is-special-importance/article-56034"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chandra-darshan-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चंद्र दर्शन का पर्व 16 जून 2026, मंगलवार को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार अमावस्या के बाद पहली बार चंद्रमा के दर्शन करने की परंपरा को चंद्र दर्शन कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस दिन का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि अमावस्या के अंधकार के बाद चंद्रमा के प्रथम दर्शन जीवन में नई ऊर्जा, सकारात्मकता और शुभ फल लेकर आते हैं। यही कारण है कि देश के विभिन्न हिस्सों में श्रद्धालु इस अवसर पर व्रत रखते हैं और चंद्र देव की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। चंद्रमा को मन, बुद्धि, भावनाओं और शांति का कारक माना गया है। नवग्रहों में भी चंद्रदेव का महत्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा मजबूत स्थिति में होता है, उन्हें जीवन में सुख, सम्मान और समृद्धि प्राप्त होती है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु चंद्र दर्शन के दिन उपवास रखकर चंद्रदेव से कृपा और आशीर्वाद की कामना करते हैं। बताया जाता है कि यह पर्व विशेष रूप से मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और आर्थिक उन्नति से जुड़ा हुआ माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 15 जून की सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 16 जून की सुबह 4 बजकर 31 मिनट तक रहेगी। वहीं 16 जून को चंद्रमा का उदय सुबह 6 बजकर 35 मिनट पर और अस्त रात 8 बजकर 50 मिनट पर होगा। हालांकि चंद्र दर्शन के लिए सबसे शुभ समय सूर्यास्त के बाद माना जाता है, जब श्रद्धालु आकाश में नवचंद्र के दर्शन कर पूजा संपन्न करते हैं। कई स्थानों पर परिवार के सदस्य एक साथ चंद्रमा को अर्घ्य देकर मंगलकामना करते हैं। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करते हैं। शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद पूजा कर व्रत खोला जाता है। पूजा में चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प, दूध और मिठाई का विशेष महत्व बताया गया है। कई श्रद्धालु चंद्रदेव के मंत्रों का जाप भी करते हैं। माना जाता है कि इससे मन की अशांति दूर होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्र दर्शन के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को चावल, चीनी, सफेद वस्त्र और अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से शुभ फल प्राप्त होता है। कई लोग ब्राह्मणों को भोजन कराकर आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फलदायी होता है और व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं कम होती हैं। पौराणिक कथाओं में चंद्रदेव को अत्यंत पूजनीय माना गया है। उन्हें राजा दक्ष की 27 पुत्रियों का पति बताया गया है, जिन्हें 27 नक्षत्रों के रूप में जाना जाता है। वहीं बुध ग्रह को चंद्रदेव का पुत्र माना जाता है। चंद्रमा का संबंध प्रकृति, वनस्पति और जीव-जंतुओं के पोषण से भी जोड़ा जाता है। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में चंद्रमा केवल एक खगोलीय पिंड नहीं बल्कि आध्यात्मिक और धार्मिक आस्था का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।</p>
<p style="text-align:justify;">चंद्र दर्शन का पर्व उन लोगों के लिए विशेष लाभकारी माना जाता है, जो मानसिक तनाव, निर्णय लेने में कठिनाई या पारिवारिक समस्याओं का सामना कर रहे हैं। चंद्रदेव की आराधना से मन को स्थिरता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। कई लोग इस दिन चंद्रमा को दूध मिश्रित जल अर्पित कर विशेष पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। देशभर के मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भी चंद्र दर्शन को लेकर विशेष आयोजन किए जाते हैं। श्रद्धालु शाम के समय मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और नवचंद्र के दर्शन कर अपने जीवन में सुख, शांति और सफलता की प्रार्थना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के बाद चंद्रमा के प्रथम दर्शन जीवन में नए अवसरों और सकारात्मक बदलावों का संकेत माने जाते हैं। इस वर्ष चंद्र दर्शन का पर्व ऐसे समय में आ रहा है जब लोग आध्यात्मिकता और धार्मिक परंपराओं की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे में चंद्र दर्शन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक बन गया है। श्रद्धालुओं को विश्वास है कि चंद्रदेव की कृपा से उनके जीवन में सुख, समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>पूजा पाठ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 00:00:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रविवार भस्म आरती में राजा स्वरूप सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान पंचामृत अभिषेक, भांग, चंदन और बिल्वपत्र अर्पित कर किया गया विशेष श्रृंगार, बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/devotees-had-divine-darshan-of-baba-mahakal-dressed-as-king/article-55874"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य और भव्य श्रृंगार किया गया। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के पट खुलते ही धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत हुई। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न कराया गया। तड़के से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलीं और भस्म आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रारंभिक धार्मिक विधियों के बाद भगवान महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू से अलंकृत किया गया। परंपरा के अनुसार उन्हें भांग अर्पित की गई तथा चंदन और बिल्वपत्र से विशेष पूजन किया गया। गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु बाबा महाकाल के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन कर भावविभोर दिखाई दिए। ऐसा कहा जाता है कि भस्म आरती के समय बाबा महाकाल के दर्शन का विशेष धार्मिक महत्व होता है और दूर-दूर से श्रद्धालु इस अलौकिक अनुष्ठान को देखने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">अभिषेक और श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को हरि ओम का जल अर्पित किया गया तथा कपूर आरती उतारी गई। आरती के दौरान मंदिर परिसर जय महाकाल के जयघोष से गूंज उठा। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। यह भस्म आरती मंदिर की सबसे प्राचीन और विशिष्ट परंपराओं में शामिल है, जिसे देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रविवार होने के कारण भक्तों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही।</p>
<p class="isSelectedEnd">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल का एक और दिव्य स्वरूप भक्तों के सामने प्रकट हुआ। उन्हें रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाओं से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच आध्यात्मिक वातावरण का विशेष अनुभव हुआ। श्रृंगार के बाद भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया तथा मंदिर परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना का क्रम आगे बढ़ाया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे थे। कई श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर के बाहर कतार में खड़े दिखाई दिए। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि दर्शन व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी विशेष पहचान रखती है। इस अनूठी परंपरा को देखने और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p>रविवार की भस्म आरती में भी श्रद्धा, आस्था और भक्ति का ऐसा ही संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में सुबह से ही धार्मिक वातावरण बना रहा और बाबा महाकाल के जयघोष लगातार गूंजते रहे। दिव्य श्रृंगार, विशेष पूजा-अर्चना और भस्म आरती के दर्शन कर श्रद्धालु स्वयं को धन्य महसूस करते नजर आए। धार्मिक नगरी उज्जैन में एक बार फिर बाबा महाकाल की भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर श्रद्धालु को आध्यात्मिक अनुभूति से भर दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 12:12:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोहर्रम और उर्स आयोजनों को लेकर वक्फ बोर्ड सख्त, डीजे-बैंड पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड ने धार्मिक आयोजनों में गैर-शरई गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया, उल्लंघन करने वाली समितियों पर 50 हजार रुपये तक जुर्माने और मान्यता रद्द करने की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a2bc048b19ba/article-55722"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-waqf-board.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में आगामी मोहर्रम, उर्स और अन्य धार्मिक आयोजनों को लेकर राज्य वक्फ बोर्ड ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने प्रदेशभर की ताजिया कमेटियों, दरगाह कमेटियों, उर्स कमेटियों, मुतवल्लियान और इंतेजामिया कमेटियों से अपील की है कि सभी धार्मिक कार्यक्रम पूरी तरह शरीअत, कुरआन और हदीस के अनुसार आयोजित किए जाएं। इसके साथ ही बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान डीजे, बैंड-बाजा, धुमाल, नाच-गाना, आतिशबाजी और अन्य गैर-शरई गतिविधियों की अनुमति नहीं होगी। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज द्वारा जारी इस अपील को धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बोर्ड का कहना है कि मोहर्रम और उर्स जैसे आयोजन इस्लामी परंपराओं, त्याग, बलिदान और आध्यात्मिक संदेशों से जुड़े होते हैं। ऐसे आयोजनों में उन गतिविधियों से बचना आवश्यक है जो धार्मिक मूल्यों और परंपराओं के अनुरूप नहीं हैं। बोर्ड की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि आयोजन समितियां यह सुनिश्चित करें कि जुलूस, मजलिस, उर्स और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में केवल वही गतिविधियां हों जो धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप हों। किसी भी प्रकार के मनोरंजन आधारित कार्यक्रम, तेज ध्वनि वाले उपकरण या ऐसी गतिविधियां जो धार्मिक आयोजन की गरिमा को प्रभावित करती हों, उन्हें पूरी तरह प्रतिबंधित रखा जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मोहर्रम इस्लामी इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना कर्बला की याद में मनाया जाता है। इस अवसर पर हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की कुर्बानियों को याद किया जाता है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार यह समय शोक, सब्र, इबादत और आत्मचिंतन का होता है। इसी वजह से कई मुस्लिम संगठनों और धार्मिक संस्थाओं द्वारा हमेशा सादगीपूर्ण तरीके से मोहर्रम मनाने की अपील की जाती रही है। वक्फ बोर्ड ने भी अपने संदेश में इसी भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि यदि किसी जुलूस, उर्स या धार्मिक आयोजन में प्रतिबंधित गतिविधियां पाई जाती हैं तो संबंधित समिति और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड ने साफ किया है कि आवश्यक होने पर समिति की मान्यता तक समाप्त की जा सकती है। इस चेतावनी को आयोजकों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि नियमों के पालन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। वक्फ बोर्ड ने आर्थिक दंड का भी प्रावधान रखा है। जारी निर्देश के अनुसार यदि किसी समिति द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उस पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बोर्ड का मानना है कि इस तरह की कार्रवाई से धार्मिक आयोजनों में अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलेगी और समितियां निर्धारित दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन करेंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बोर्ड ने केवल समितियों को ही नहीं बल्कि प्रदेश के मुस्लिम समाज को भी विशेष संदेश दिया है। अपील में कहा गया है कि मोहर्रम को हजरत इमाम हुसैन और शहीद-ए-कर्बला की कुर्बानियों की याद में सादगी, इबादत, सब्र और अच्छे आचरण के साथ मनाया जाए। धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य सामाजिक सौहार्द, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करना होना चाहिए। इस संबंध में प्रदेश की मस्जिदों के इमाम साहबान, मुतवल्लियान और इंतेजामिया कमेटियों को भी निर्देश दिए गए हैं। बोर्ड ने कहा है कि यह संदेश जुमे की नमाज से पहले लोगों को पढ़कर सुनाया जाए ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच सके। इसके अलावा मस्जिदों के नोटिस बोर्ड पर भी इस घोषणा को चस्पा करने के निर्देश दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इससे समाज के सभी वर्गों तक बोर्ड की अपील प्रभावी तरीके से पहुंच पाएगी। हाल के वर्षों में कई स्थानों पर धार्मिक आयोजनों के दौरान आधुनिक मनोरंजन साधनों के इस्तेमाल को लेकर बहस होती रही है। कुछ धार्मिक संगठनों का मानना है कि ऐसे आयोजन अपनी मूल भावना और उद्देश्य से भटक रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में वक्फ बोर्ड की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रदेश में मोहर्रम और उर्स के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों और जुलूसों में शामिल होते हैं। प्रशासन भी इन आयोजनों के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम करता है। ऐसे में बोर्ड की यह अपील न केवल धार्मिक अनुशासन बल्कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के प्रयास के रूप में भी देखी जा रही है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:19:59 +0530</pubDate>
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