<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mamata-banerjee/tag-4217" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Mamata Banerjee - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/4217/rss</link>
                <description>Mamata Banerjee RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, TMC के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा उपचुनाव से पहले भाजपा ने सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक को बनाया उम्मीदवार, टीएमसी में बढ़ी राजनीतिक हलचल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tmc-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। भाजपा ने पार्टी में शामिल होते ही तीनों नेताओं को राज्यसभा की रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस राजनीतिक बदलाव को पश्चिम बंगाल की बदलती सियासी तस्वीर और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। राज्यसभा उपचुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। तीनों नेताओं ने कुछ सप्ताह पहले ही राज्यसभा सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर मनमाने तरीके से फैसले लेने और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए थे। अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा ने इन तीनों नेताओं को जिस तेजी से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया है, उससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि पार्टी बंगाल में अपने संगठन को और मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं पर भरोसा जता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है। राज्यसभा की इन तीन रिक्त सीटों के लिए 24 जुलाई को मतदान और मतगणना होगी। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 14 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जबकि 15 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक बंगाल की राजनीति पूरी तरह इन उपचुनावों और दल-बदल की चर्चाओं के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा में शामिल होने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह भी सार्वजनिक रूप से बताई। उन्होंने कहा कि आरजी कर अस्पताल रेप और हत्या मामले में उन्होंने सबूतों से कथित छेड़छाड़ और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्यों के अपहरण की धमकी भी दी गई। सुखेंदु के अनुसार उन्होंने पुलिस आयुक्त और अस्पताल प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन उनकी बात पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्हें पुलिस मुख्यालय बुलाया गया, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुष्मिता देव ने भी भाजपा में शामिल होने के बाद अपने बयान से राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भाजपा की लगातार बढ़ती ताकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता के विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने असम में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनने को इसकी बड़ी मिसाल बताया। साथ ही उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अन्य राजनीतिक दल उन्हें अपने साथ नहीं लेना चाहते, इसलिए वे अब भी टीएमसी में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन इस्तीफों और भाजपा में शामिल होने की घटना को ज्यादा महत्व देने से इनकार किया है। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि तीनों नेता पहले से ही भाजपा के संपर्क में थे। उनके अनुसार अब भाजपा ने केवल अपनी राजनीतिक जरूरत के कारण उन्हें उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने दावा किया कि इससे तृणमूल कांग्रेस को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होगा और भाजपा को भी कोई बड़ा लाभ मिलने वाला नहीं है। सौगत रॉय का कहना है कि दल बदलने वाले नेताओं का राजनीतिक प्रभाव सीमित होता है और जनता ऐसे नेताओं को अधिक महत्व नहीं देती।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर लगातार असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने पार्टी छोड़ दी या अलग गुट बना लिया। उपलब्ध राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या में भी कमी आई है। राज्यसभा में भी कई सांसदों के इस्तीफे के बाद पार्टी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में भी पार्टी के सामने चुनौती बढ़ी है। चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद कई विधायक अलग गुट का हिस्सा बन चुके हैं। इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार दावा कर रहा है कि संगठन पूरी तरह मजबूत है और कुछ नेताओं के जाने से उसके जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पश्चिम बंगाल में दल-बदल की राजनीति नई नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी रफ्तार काफी बढ़ी है। भाजपा और टीएमसी दोनों एक-दूसरे के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इससे राज्य की राजनीति लगातार अधिक प्रतिस्पर्धी होती जा रही है। राज्यसभा उपचुनाव के नतीजे भले ही सीमित सीटों तक हों, लेकिन उनका राजनीतिक संदेश आने वाले चुनावों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाएगा। भाजपा बंगाल में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दे रही है जिनका प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक पहचान मजबूत हो। वहीं टीएमसी अपने संगठन को मजबूत रखने और असंतुष्ट नेताओं को रोकने की कोशिश में जुटी हुई है। आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:41:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/tmc-%281%29.jpg"                         length="204728"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोलकाता रैली में ममता बनर्जी का थप्पड़ विवाद: हंगामे के बीच वायरल वीडियो से गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[बारुईपुर घटना के विरोध मार्च के दौरान कथित वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने साधा निशाना, तृणमूल ने आरोपों को बताया भ्रामक; पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में दावा किया गया कि भीड़ के बीच ममता बनर्जी ने पीली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने बारुईपुर की घटना के विरोध में बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन मार्च के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कथित तौर पर अंडे भी फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए। इससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी पहले हाथ जोड़कर भीड़ को शांत करने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह आगे बढ़ती हैं और सामने खड़े एक युवक को थप्पड़ मारती हुई नजर आती हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार करती हैं, तो इससे उनके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही थीं। टीएमसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।बताया जा रहा है कि जुलूस बालीगंज से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंचा। इसी दौरान अलग-अलग स्थानों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">रैली के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रैली में व्यवधान पैदा किया और तनाव फैलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई समर्थक इसे भीड़ को नियंत्रित करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/mamata-banerjee-%281%29.jpg"                         length="201475"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल में TMC नेताओं पर बढ़े विरोध के स्वर, सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके गए</title>
                                    <description><![CDATA[धनुरहाट की सरपंच मंदिरा गेन का माफी मांगते वीडियो वायरल, कुछ ही दिनों में तृणमूल नेताओं को निशाना बनाने की कई घटनाएं सामने आईं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घटनाएं लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले तृणमूल युवा नेता सौमित्र बनर्जी पर अंडे फेंके जाने और कथित मारपीट की घटना ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले कुछ सप्ताह के दौरान राज्य के कई हिस्सों में टीएमसी नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा है। वहीं दूसरी ओर धनुरहाट ग्राम पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह लोगों के बीच हाथ जोड़कर माफी मांगती और भावुक नजर आ रही हैं। सौमित्र बनर्जी को पुलिस सुरक्षा के बीच रानीगंज कोर्ट ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उनका विरोध शुरू कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक भीड़ ने उन पर अंडे फेंके और धक्का-मुक्की भी की। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने तत्काल हस्तक्षेप किया और उन्हें सुरक्षित तरीके से अदालत तक पहुंचाया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित हुआ, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। सौमित्र बनर्जी की गिरफ्तारी बीजेपी नेता रवि केशरी की शिकायत के आधार पर हुई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बनर्जी ने भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला किया था। इसी मामले में उन्हें अदालत में पेश किया जाना था। हालांकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है, जबकि विपक्षी दल इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, दक्षिण 24 परगना जिले के धनुरहाट ग्राम पंचायत क्षेत्र से भी एक अलग लेकिन चर्चित घटना सामने आई है। पंचायत की सरपंच मंदिरा गेन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह अपने घर के बाहर जमा लोगों के सामने हाथ जोड़कर खड़ी दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वह कान पकड़कर माफी मांगती और भावुक होकर रोती नजर आती हैं। कुछ दृश्य ऐसे भी हैं जिनमें वह घुटनों के बल बैठी हुई दिखाई देती हैं। बताया जा रहा है कि पंचायत से जुड़े किसी स्थानीय विवाद के बाद बड़ी संख्या में लोग उनके घर के बाहर पहुंच गए थे और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। हालांकि इस मामले को लेकर आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन वीडियो ने राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्षी दलों ने इसे जनता के बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा है, जबकि टीएमसी नेताओं का कहना है कि कई घटनाओं को राजनीतिक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सोमवार को टीएमसी विधायक और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष भी विरोध का सामना कर चुके हैं। कालीघाट स्थित मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आवास के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान किसी व्यक्ति ने उन पर अंडा फेंक दिया था। घटना के बाद कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि हमलावर भाजपा समर्थक थे। उन्होंने दावा किया कि अंडा उनकी आंख के बेहद करीब से गुजरा और यदि वह समय रहते बचाव नहीं करते तो गंभीर चोट लग सकती थी। उनकी शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार भी किया है। राज्य में हाल के दिनों में टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने की घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ी है। 28 मई को पार्टी सांसद सौगत रॉय पर उत्तर 24 परगना में विरोध प्रदर्शन के दौरान अंडे फेंके गए थे। इसके दो दिन बाद पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के दौरे के दौरान भी विरोध प्रदर्शन हुआ, जहां उन पर अंडे और पत्थर फेंके जाने की खबर सामने आई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद जून के पहले सप्ताह से लेकर अब तक कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ इसी तरह की घटनाएं दर्ज की गई हैं। पूर्व विधायक सनत डे, विधायक मदन मित्रा, पार्षद बप्पादित्य दासगुप्ता, नेता मोहम्मद जसीमुद्दीन और सुजय हाजरा जैसे कई नेताओं को सार्वजनिक विरोध का सामना करना पड़ा। कुछ मामलों में अंडों के साथ टमाटर और अन्य वस्तुएं भी फेंकी गईं। लगातार हो रही ऐसी घटनाएं राज्य की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण और जनता की नाराजगी को दर्शाती हैं। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि चुनावी माहौल और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण विरोध प्रदर्शनों को अधिक आक्रामक रूप मिल रहा है। दूसरी ओर कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर नेताओं की सुरक्षा के बावजूद ऐसी घटनाएं बार-बार कैसे हो रही हैं। टीएमसी का आरोप है कि विपक्षी दल सुनियोजित तरीके से पार्टी नेताओं को बदनाम करने और माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि जनता अपनी नाराजगी लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त कर रही है और इसके लिए सत्तारूढ़ दल को आत्ममंथन करना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/voice-of-protest-against-tmc-leaders-increased-in-west-bengal/article-56123</guid>
                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 17:45:30 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-news.jpg"                         length="130735"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी में बड़ी टूट, 20 सांसदों ने NCPI में विलय कर NDA को समर्थन दिया</title>
                                    <description><![CDATA[ममता बनर्जी को बड़ा झटका, बागी सांसदों ने नई राजनीतिक राह चुनी; चर्चा में आई छोटी पार्टी NCPI]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-break-in-tmc-20-mps-merged-with-ncpi-and/article-55992"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-mps-split.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति का ध्यान भी अपनी ओर खींच लिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का ऐलान कर दिया है। इसके साथ ही इन सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ काम करने की इच्छा भी जताई है। इस घटनाक्रम को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों का एक साथ अलग होना पार्टी की ताकत को सीधे प्रभावित करता है। सांसदों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सदस्यता बचाने की थी। यदि वे सीधे किसी अन्य दल में शामिल होते या एनडीए का समर्थन करने का ऐलान करते, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी लोकसभा सदस्यता खतरे में पड़ सकती थी। इसी वजह से उन्होंने एक अलग रणनीति अपनाई और सामूहिक रूप से एनसीपीआई में विलय का रास्ता चुना। चूंकि सांसदों की संख्या दो-तिहाई से अधिक बताई जा रही है, इसलिए दल-बदल कानून के प्रावधानों के तहत उन्हें राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिस पार्टी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया है, वह है नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई। राजनीतिक हलकों में यह नाम अब तक बहुत कम लोगों ने सुना था, लेकिन टीएमसी सांसदों के विलय के बाद यह पार्टी अचानक राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि जिस पार्टी का अब तक न कोई सांसद था और न कोई विधायक, वह एक झटके में लोकसभा में 20 सांसदों वाली पार्टी बनने का दावा कर रही है। एनसीपीआई का गठन 20 जनवरी 2023 को किया गया था। यह एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है। पार्टी का पंजीकरण पश्चिम बंगाल में हुआ था, लेकिन इसकी सक्रियता मुख्य रूप से त्रिपुरा में देखने को मिली। गठन के समय पार्टी ने खुद को सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की आवाज बताने का प्रयास किया था। इसके चुनावी संदेशों में दलबदल की राजनीति का विरोध भी प्रमुख रूप से शामिल था। यही वजह है कि अब टीएमसी से आए सांसदों के इस पार्टी में शामिल होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के बानीपुर क्षेत्र में बताया जाता है। पार्टी के अध्यक्ष शेली कुंडू हैं, जबकि संगठनात्मक गतिविधियों में उनके सहयोगियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, पार्टी को अब तक बहुत सीमित आर्थिक सहयोग मिला है और इसके संसाधन भी अपेक्षाकृत छोटे स्तर के रहे हैं। एनसीपीआई ने अपना पहला चुनाव त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में लड़ा था। उस चुनाव में पार्टी ने सात सीटों पर उम्मीदवार उतारने की कोशिश की थी, लेकिन कई उम्मीदवारों के नामांकन खारिज हो गए थे। अंततः पार्टी सीमित सीटों पर ही चुनाव लड़ पाई और उसे कोई सफलता नहीं मिली। इसके बावजूद पार्टी ने खुद को राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने का प्रयास जारी रखा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">टीएमसी सांसदों के इस कदम के पीछे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को भी एक कारण माना जा रहा है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों और चुनावी नतीजों के बाद संगठन के भीतर मतभेदों की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग राय दिखाई दे रही थी। अब सांसदों के इस बड़े समूह के अलग होने के बाद यह असंतोष खुलकर सामने आ गया है। सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस राजनीतिक बदलाव की घोषणा करते हुए कहा कि उनका समूह भविष्य में एनडीए के साथ मिलकर काम करेगा। इसके बाद बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से भी मुलाकात कर अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है। यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। इस घटनाक्रम का असर केवल संसद तक सीमित नहीं रहेगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-break-in-tmc-20-mps-merged-with-ncpi-and/article-55992</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-break-in-tmc-20-mps-merged-with-ncpi-and/article-55992</guid>
                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:05:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-mps-split.jpg"                         length="151423"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी में बगावत तेज, ममता के करीबी सुदीप बंदोपाध्याय भी बागी खेमे में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल, बागी सांसदों ने लोकसभा में ‘असली टीएमसी’ होने का दावा ठोकने की तैयारी की, स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात संभव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rebellion-in-tmc-intensifies-mamatas-close-friend-sudeep-bandopadhyay-also/article-55921"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-rebellion.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है और पार्टी की शीर्ष नेतृत्व के लिए यह स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण होती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी और पार्टी के वरिष्ठ सांसद सुदीप बंदोपाध्याय के बागी खेमे के साथ खड़े होने की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि यह घटनाक्रम टीएमसी के अंदर चल रहे शक्ति संघर्ष को और तेज कर सकता है। विधानसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद संगठन के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा था। अब यह असंतोष खुली बगावत का रूप लेता दिखाई दे रहा है। बताया जा रहा है कि सुदीप बंदोपाध्याय ने बागी सांसदों के साथ बैठकें की हैं और आगे की रणनीति पर चर्चा भी की है। इस घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सुदीप लंबे समय से ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बागी गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकता है। इस मुलाकात के दौरान बागी सांसद अपने पक्ष को विस्तार से रखने और संसदीय स्तर पर मान्यता की मांग कर सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो यह टीएमसी के लिए एक बड़ा संस्थागत संकट साबित हो सकता है। लोकसभा में पार्टी की स्थिति और नेतृत्व को लेकर नए सवाल खड़े हो सकते हैं। बागी खेमे की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि लोकसभा में उनके समूह का नेतृत्व सुदीप बंदोपाध्याय करें। विद्रोही नेताओं का मानना है कि उनके अनुभव और राजनीतिक पकड़ को देखते हुए वे इस भूमिका के लिए सबसे उपयुक्त चेहरा हो सकते हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस विषय पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के साथ सुदीप बंदोपाध्याय की मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दे दी है। रिपोर्टों के अनुसार इस मुलाकात में टीएमसी सांसद शताब्दी रॉय भी मौजूद थीं। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की खबरों ने भी राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। विपक्षी दल और राजनीतिक पर्यवेक्षक इन बैठकों को बंगाल की राजनीति में संभावित नए समीकरणों के संकेत के रूप में देख रहे हैं। टीएमसी के भीतर असंतोष केवल संसदीय स्तर तक सीमित नहीं है। विधानसभा में भी स्थिति पार्टी नेतृत्व के लिए चिंताजनक बताई जा रही है। खबरों के मुताबिक बड़ी संख्या में विधायक पहले ही हाईकमान के फैसलों पर सवाल उठा चुके हैं। बागी विधायकों ने निष्कासित विधायक रितब्रत बनर्जी को नेता के रूप में समर्थन देने का संकेत दिया है। इससे साफ है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर गंभीर मतभेद उभरकर सामने आए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मंत्री मानस भूनिया का हाल ही में पार्टी से इस्तीफा देना भी इसी क्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। उनके इस्तीफे के बाद यह संदेश गया कि असंतोष केवल कुछ नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन के विभिन्न स्तरों पर इसकी गूंज सुनाई दे रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि पार्टी नेतृत्व जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाता तो आने वाले समय में और भी नेता खुलकर विरोध का रास्ता अपना सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बागी सांसद जगदीश चंद्र बसूनिया ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप दिया है और वे जल्द ही अपने समूह की ओर से औपचारिक दावा पेश करेंगे। उनका कहना है कि उनका गुट ही वास्तविक तृणमूल कांग्रेस का प्रतिनिधित्व करता है और इसी आधार पर वे संसदीय मान्यता की मांग करेंगे। इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर टीएमसी समर्थकों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व अभी भी मजबूत स्थिति में है और बागी नेताओं की गतिविधियां संगठन को स्थायी नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगी। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यह असंतोष अस्थायी है और समय के साथ स्थिति सामान्य हो जाएगी। हालांकि मौजूदा हालात को देखते हुए यह कहना आसान नहीं है कि विवाद किस दिशा में जाएगा। पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से नाटकीय घटनाक्रमों और तीखे राजनीतिक संघर्षों के लिए जानी जाती रही है। मौजूदा संकट भी उसी परंपरा का हिस्सा माना जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rebellion-in-tmc-intensifies-mamatas-close-friend-sudeep-bandopadhyay-also/article-55921</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rebellion-in-tmc-intensifies-mamatas-close-friend-sudeep-bandopadhyay-also/article-55921</guid>
                <pubDate>Sun, 14 Jun 2026 17:25:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-rebellion.jpg"                         length="121032"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ममता के साथ खड़ी हुईं महुआ, बोलीं- वही असली तृणमूल</title>
                                    <description><![CDATA[पार्टी की वैधता, पहचान और जनाधार ममता बनर्जी से जुड़ा; अभिषेक बनर्जी का भी किया बचाव, बीजेपी पर साधा निशाना]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahua-stood-with-mamata-and-said-she-is-the/article-55667"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahua-moitra.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी उथल-पुथल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान के बीच कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा ने पार्टी नेतृत्व के पक्ष में खुलकर अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ कहा कि तृणमूल कांग्रेस की असली पहचान, वैधता और राजनीतिक ताकत उसकी संस्थापक ममता बनर्जी से जुड़ी हुई है और कोई भी बागी या अलग गुट खुद को “असली तृणमूल” नहीं कह सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">एक साक्षात्कार के दौरान महुआ मोइत्रा ने पार्टी में चल रहे असंतोष और कुछ नेताओं द्वारा अलग राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिशों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब तक ममता बनर्जी सक्रिय राजनीति में हैं, तब तक तृणमूल कांग्रेस की असली पहचान उन्हीं के साथ रहेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना ममता बनर्जी ने की थी और जनता का जनादेश भी उसी नेतृत्व को मिला है। ऐसे में किसी भी बागी गुट का दावा राजनीतिक रूप से स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ मोइत्रा का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों के कारण तृणमूल कांग्रेस लगातार चुनौतियों का सामना कर रही है। हाल के दिनों में पार्टी के कुछ सांसदों और नेताओं के इस्तीफों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। विपक्षी दल इन घटनाओं को तृणमूल के कमजोर पड़ते जनाधार से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे अस्थायी राजनीतिक परिस्थितियों का हिस्सा बता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की पहचान दो प्रमुख आधारों पर टिकी होती है—उसके संस्थापक नेता और चुनाव चिह्न। उनके अनुसार, बागी नेताओं के पास न तो पार्टी का मूल नेतृत्व है और न ही आधिकारिक चुनाव चिह्न, इसलिए वे तृणमूल कांग्रेस की वास्तविक विरासत का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पार्टी का आकार छोटा या बड़ा होना अलग बात है, लेकिन इससे उसकी वैधता समाप्त नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने उन दावों को भी खारिज किया जिनमें कुछ नेताओं द्वारा अलग संसदीय समूह बनाने या बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन का दावा किया जा रहा है। महुआ ने संकेत दिया कि ऐसी गतिविधियां राजनीतिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश हो सकती हैं, लेकिन इससे पार्टी की मूल पहचान प्रभावित नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">साक्षात्कार के दौरान महुआ मोइत्रा ने तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का भी बचाव किया। हाल के समय में पार्टी की चुनौतियों और चुनावी झटकों के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराने वाली आलोचनाओं पर उन्होंने कहा कि यह एकतरफा दृष्टिकोण है। उनके मुताबिक अभिषेक ने संगठन को मजबूत करने के लिए कई संरचनात्मक बदलाव किए हैं और पार्टी के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल में कठिन समय आने पर नेतृत्व को निशाना बनाना आसान होता है, लेकिन वास्तविकता कहीं अधिक जटिल होती है। उन्होंने दावा किया कि अभिषेक बनर्जी ने संगठनात्मक स्तर पर जो ढांचा तैयार किया है, उसने पार्टी को मजबूत बनाने में योगदान दिया है। इसलिए उन्हें केवल नकारात्मक दृष्टि से देखना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी की बढ़ती सक्रियता पर भी टिप्पणी की। महुआ ने आरोप लगाया कि राज्य की राजनीति में कुछ नेताओं का मुख्य उद्देश्य अभिषेक बनर्जी को राजनीतिक रूप से कमजोर करना है। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ चल रहे राजनीतिक अभियानों के पीछे व्यक्तिगत और राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं भी काम कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"> उन्होंने स्पष्ट किया कि विचारधारात्मक स्तर पर वह बीजेपी को अपना प्रमुख राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानती हैं और भविष्य में भी उनकी राजनीति का केंद्र यही रहेगा। उनके अनुसार देश में लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुलतावादी सोच की रक्षा के लिए मजबूत विपक्ष की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में चाहे जितनी भी चुनौतियां हों, फिर भी यह बीजेपी के खिलाफ संघर्ष का सबसे मजबूत मंच है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में बने रहने का उनका उद्देश्य केवल सत्ता नहीं बल्कि वैचारिक संघर्ष है। इसलिए वे पार्टी छोड़ने या राजनीतिक जीवन से दूर होने की किसी संभावना को नहीं देखतीं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक वापसी को लेकर भी महुआ ने विश्वास जताया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी एक बार फिर मजबूती हासिल कर सकती है और बंगाल की राजनीति में अपना प्रभाव कायम रख सकती है। उनके मुताबिक पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">महुआ मोइत्रा का यह बयान केवल व्यक्तिगत निष्ठा का प्रदर्शन नहीं बल्कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक स्पष्ट संदेश भी है। ऐसे समय में जब पार्टी को अंदरूनी असंतोष और बाहरी राजनीतिक दबाव दोनों का सामना करना पड़ रहा है, वरिष्ठ नेताओं की सार्वजनिक एकजुटता संगठन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। महुआ मोइत्रा के बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक बड़ा वर्ग अब भी ममता बनर्जी के नेतृत्व को ही पार्टी की असली पहचान और भविष्य का आधार मानता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahua-stood-with-mamata-and-said-she-is-the/article-55667</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mahua-stood-with-mamata-and-said-she-is-the/article-55667</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 17:52:46 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/mahua-moitra.jpg"                         length="152051"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी को एक और झटका, राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[एक हफ्ते में तीसरे सांसद ने छोड़ी पार्टी, बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल; ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठने लगे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a2a563257bd5/article-55605"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/prakash-chik-baraik.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पिछले एक सप्ताह के भीतर टीएमसी छोड़ने वाले वे तीसरे राज्यसभा सांसद बन गए हैं। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के इस्तीफे ने भी पार्टी को असहज स्थिति में ला दिया था। लगातार हो रहे इन इस्तीफों को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक प्रकाश चिक बराइक ने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को सौंप दिया है। अपने संक्षिप्त इस्तीफा पत्र में उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए सभापति और राज्यसभा सचिवालय का आभार भी व्यक्त किया। हालांकि इस्तीफे के पीछे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में बदले राजनीतिक समीकरणों का असर अब टीएमसी के संगठन और संसदीय दल पर भी दिखाई देने लगा है। राज्यसभा में पार्टी की ताकत लगातार घट रही है। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद उच्च सदन में टीएमसी सांसदों की संख्या और कम हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd"> बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने सार्वजनिक रूप से संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर नाराजगी जताई थी। अब सांसदों के इस्तीफे उस असंतोष को और स्पष्ट रूप से सामने ला रहे हैं। बताया जा रहा है कि राज्य में कई विधायक भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं। इसी बीच कुछ नेताओं के दूसरे राजनीतिक समूहों के संपर्क में होने की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। टीएमसी के लिए चिंता की बात केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं है। बंगाल विधानसभा में भी पार्टी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं मानी जा रही। राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच विपक्ष लगातार दावा कर रहा है कि टीएमसी के कई विधायक और नेता पार्टी नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने ऐसे समय में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, जब राज्य में विपक्षी दल लगातार टीएमसी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में और सांसद या विधायक पार्टी छोड़ते हैं तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी की भूमिका पर भी पड़ सकता है। टीएमसी लंबे समय से खुद को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विपक्षी शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश करती रही है। लेकिन लगातार सामने आ रही अंदरूनी चुनौतियां उस रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने अब संगठन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर, विपक्षी दल इन इस्तीफों को टीएमसी के कमजोर होते जनाधार और संगठनात्मक संकट से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति अब खुलकर सामने आने लगी है। हालांकि टीएमसी के नेताओं का दावा है कि पार्टी अभी भी मजबूत स्थिति में है और कुछ नेताओं के जाने से संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। आने वाले सप्ताह टीएमसी के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफल रहता है तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन यदि इस्तीफों का सिलसिला जारी रहा तो बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल अभी थमने वाली नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a2a563257bd5/article-55605</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a2a563257bd5/article-55605</guid>
                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 12:36:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/prakash-chik-baraik.jpg"                         length="104408"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बढ़ी सियासी हलचल, एक और राज्यसभा सांसद ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[सुष्मिता देव के इस्तीफे से तृणमूल कांग्रेस को नया झटका, सांसदों और विधायकों की बगावत के बीच ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी सक्रिय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-increases-in-tmc-another-rajya-sabha-mp-resigns/article-55548"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sushmita-dev-resignation.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलों का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। पार्टी में लगातार जारी टूट के बीच बुधवार को राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने पार्टी और संसद दोनों से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है। पिछले तीन दिनों में यह दूसरा मौका है जब तृणमूल कांग्रेस के किसी राज्यसभा सांसद ने पार्टी से किनारा किया है। इससे पहले 8 जून को सुखेंदु शेखर ने भी पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा देकर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुष्मिता देव के इस्तीफे ने ऐसे समय में तृणमूल कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है जब पार्टी पहले से ही सांसदों और विधायकों की बगावत का सामना कर रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष की ओर भी संकेत करता है। हालांकि सुष्मिता देव ने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत और राजनीतिक कारणों से जुड़ा फैसला बताया है, लेकिन उनके इस कदम के दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में सुष्मिता देव ने कहा कि राज्यसभा की सीट उन्हें पार्टी की ओर से मिली थी, इसलिए पार्टी छोड़ने के साथ उन्होंने संसद की सदस्यता छोड़ना भी उचित समझा। उन्होंने साफ किया कि फिलहाल वह किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल होने को लेकर कोई निर्णय नहीं ले रही हैं। भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर उन्होंने कहा कि अभी वह कुछ समय आराम करना चाहती हैं और अपने परिवार के साथ समय बिताएंगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी असंतोष लगातार बड़ा रूप लेता दिखाई दे रहा है। पार्टी के लोकसभा सांसदों और विधायकों के एक बड़े वर्ग ने अलग रुख अपनाया है। हाल के दिनों में बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ी हलचल तब देखने को मिली जब बड़ी संख्या में विधायकों ने अलग गुट बनाकर अपना नेता चुन लिया। बागी खेमे का दावा है कि उनके साथ और भी विधायक जुड़ सकते हैं। इससे पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ गई हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">लोकसभा में भी पार्टी की स्थिति चुनौतीपूर्ण होती दिखाई दे रही है। हाल के घटनाक्रमों के बाद तृणमूल कांग्रेस के कई सांसदों ने अलग रुख अपनाया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में कुछ और नेता भी अपना फैसला बदल सकते हैं। हालांकि पार्टी नेतृत्व सार्वजनिक रूप से स्थिति को नियंत्रण में बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगातार हो रहे इस्तीफे और बगावत के संकेत अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">इन घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी लगातार सक्रिय नजर आ रहे हैं। दिल्ली में अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच विपक्षी एकजुटता और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर चर्चा हुई। इससे एक दिन पहले ममता बनर्जी ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं की बैठक करीब एक घंटे तक चली थी।</p>
<p class="isSelectedEnd"> तृणमूल कांग्रेस फिलहाल दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक ओर पार्टी को अपने संगठन के भीतर बढ़ते असंतोष को संभालना है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका भी मजबूत बनाए रखनी है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व से लगातार हो रही मुलाकातों को विपक्षी राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। पार्टी में टूट के बाद कई राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई है। सबसे पहले कानूनी और संवैधानिक लड़ाई की संभावना जताई जा रही है। बागी गुट और मूल नेतृत्व दोनों अपने-अपने दावों को मजबूत करने की कोशिश करेंगे। विधानसभा, चुनाव आयोग और न्यायालयों में इस मामले को लेकर विवाद बढ़ सकता है। साथ ही दल-बदल कानून को लेकर भी कई सवाल खड़े हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">यदि बागी नेताओं का प्रभाव बढ़ता है तो राज्य की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। स्थानीय निकाय चुनावों और भविष्य के विधानसभा चुनावों पर भी इसका असर पड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि यदि मतभेद और गहरे हुए तो अलग राजनीतिक संगठन या स्थायी गुट के रूप में नई ताकत उभर सकती है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि तृणमूल कांग्रेस का भविष्य किस दिशा में जाएगा। पार्टी के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती है, जबकि बागी गुट अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश में जुटा हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-increases-in-tmc-another-rajya-sabha-mp-resigns/article-55548</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-increases-in-tmc-another-rajya-sabha-mp-resigns/article-55548</guid>
                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:29:26 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/sushmita-dev-resignation.jpg"                         length="137288"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बड़ी टूट के बीच ममता ने कल्याण बनर्जी को बनाया चीफ व्हिप</title>
                                    <description><![CDATA[20 बागी सांसदों के NDA समर्थन के दावे के बाद ममता बनर्जी का बड़ा कदम, लोकसभा स्पीकर को भेजा पत्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-made-kalyan-banerjee-the-chief-whip-amid-major-rift/article-55444"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-crisis-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी और सांसदों की बगावत के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी को पार्टी का नया चीफ व्हिप नियुक्त कर दिया है। मंगलवार को इस संबंध में लोकसभा स्पीकर को पत्र भेजा गया और अनुरोध किया गया कि इस नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ चुका है और कई सांसद नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">तृणमूल कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चिंता लोकसभा में उसके सांसदों की एकजुटता को लेकर है। पार्टी के कुल 28 सांसदों में से 20 सांसदों के अलग रुख अपनाने का दावा किया गया है। बागी सांसदों का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी NDA को समर्थन देने का फैसला किया है। इस दावे के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से स्थिति को संभालने की कोशिशें लगातार जारी हैं। इसी रणनीति के तहत कल्याण बनर्जी को नई जिम्मेदारी सौंपे जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एक दिन पहले बागी सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार को अपना चीफ व्हिप चुने जाने का दावा किया था। इसके बाद उन्होंने लोकसभा स्पीकर को एक पत्र भी भेजा था। बताया गया कि इस पत्र में बागी सांसदों के हस्ताक्षर मौजूद थे और उन्होंने अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में बैठने की अनुमति मांगी थी। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि संसदीय राजनीति में चीफ व्हिप की भूमिका काफी अहम होती है। पार्टी लाइन को लागू करवाना, सांसदों के बीच समन्वय बनाए रखना और महत्वपूर्ण मुद्दों पर एकजुटता सुनिश्चित करना इसी पद की जिम्मेदारी होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काकोली घोष पहले ही पार्टी छोड़ चुकी हैं, लेकिन उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि वह अब भी खुद को लोकसभा में मुख्य सचेतक मानती हैं। उनके बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और हवा दी। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह दशकों से पार्टी के साथ जुड़ी रही हैं और संघर्ष के रास्ते से आगे बढ़ी हैं। उनके इस बयान को पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी के रूप में भी देखा गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेताओं ने बागी सांसदों पर तीखे हमले किए हैं। राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बिना नाम लिए कहा कि कुछ लोगों की वफादारी केवल सत्ता तक सीमित रहती है और राजनीतिक दबाव के सामने उनके सिद्धांत कमजोर पड़ जाते हैं। वहीं कल्याण बनर्जी ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक ताकतों के सामने उनकी सबसे बड़ी ताकत जनता और पार्टी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी अभी भी बंगाल में मजबूत स्थिति में है और कार्यकर्ताओं का समर्थन नेतृत्व के साथ बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजनीतिक संकट केवल सांसदों तक सीमित नहीं है। इससे पहले राज्य की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला था, जब बड़ी संख्या में विधायकों के अलग गुट बनाने की खबर सामने आई। पार्टी के भीतर लगातार बढ़ते असंतोष ने नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा और विधानसभा दोनों स्तरों पर इस तरह की घटनाएं पार्टी की संगठनात्मक स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिल्ली में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गतिविधियां तेज रहीं। बागी सांसदों की कई बैठकें हुईं।  कुछ बैठकें गोपनीय स्थानों पर आयोजित की गईं, जहां आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। इसी दौरान कुछ सांसदों की वरिष्ठ भाजपा नेताओं से मुलाकात की खबरें भी सामने आईं। इन मुलाकातों ने राजनीतिक अटकलों को और मजबूत किया। हालांकि आधिकारिक तौर पर इन बैठकों को लेकर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी भी इसी बीच दिल्ली पहुंचे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनका दौरा केवल विपक्षी गठबंधन की बैठकों तक सीमित नहीं था, बल्कि पार्टी के भीतर उभर रहे संकट का आकलन करना भी इसका हिस्सा था। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी नेतृत्व बागी सांसदों को मनाने में कितना सफल होता है या फिर यह असंतोष और बड़ा रूप लेता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-made-kalyan-banerjee-the-chief-whip-amid-major-rift/article-55444</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-made-kalyan-banerjee-the-chief-whip-amid-major-rift/article-55444</guid>
                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-crisis-%282%29.jpg"                         length="165955"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दो साल बाद जुटे INDIA ब्लॉक के नेता, एकजुटता पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में विपक्षी गठबंधन की सातवीं बैठक में राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत 23 दलों के नेता शामिल; शरद पवार ने कहा- सभी दलों को साथ रखना जरूरी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/leaders-of-india-block-gathered-after-two-years-emphasis-on/article-55313"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-bloc-meeting-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>दिल्ली में सोमवार को विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक की सातवीं बैठक आयोजित की गई, जिसमें देश की राजनीति के कई बड़े चेहरे एक मंच पर दिखाई दिए। करीब दो साल बाद आयोजित इस बैठक को विपक्षी एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजधानी में हुई इस बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी और एनसीपी-एससीपी की सांसद सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख नेता शामिल हुए। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे स्वास्थ्य और अन्य कारणों से ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े।</p>
<p>बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई दिनों से चर्चा चल रही थी। लोकसभा चुनाव के बाद विपक्षी गठबंधन की यह पहली बड़ी बैठक मानी जा रही है, जिसमें विभिन्न राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों, संसद के आगामी सत्र और विपक्षी रणनीति पर चर्चा होने की संभावना जताई गई। कांग्रेस ने दावा किया कि बैठक में 23 विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक शुरू होने से पहले नेताओं के बीच गर्मजोशी भी देखने को मिली। सोनिया गांधी और ममता बनर्जी एक-दूसरे से मिलते हुए गले लगीं, जबकि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे आपसी बातचीत के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में नजर आए। इन तस्वीरों ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया।</p>
<p>INDIA ब्लॉक की पिछली बड़ी बैठक जून 2024 में हुई थी। इसके बाद लंबे समय तक गठबंधन के शीर्ष नेता एक साथ किसी बड़े मंच पर दिखाई नहीं दिए थे। ऐसे में दो साल बाद हुई इस बैठक को विपक्षी दलों के लिए संगठनात्मक मजबूती और आपसी समन्वय बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में गठबंधन को कई झटके भी लगे हैं। गठबंधन से कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रीय दल अलग हुए और कई राज्यों में विपक्षी दलों के बीच स्थानीय स्तर पर मतभेद भी सामने आए। इसके बावजूद नेताओं का मानना है कि राष्ट्रीय राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए विपक्षी एकजुटता आवश्यक है।</p>
<p>बैठक के बीच महाराष्ट्र से एनसीपी-एससीपी प्रमुख शरद पवार का बयान भी चर्चा में रहा। बारामती में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में INDIA ब्लॉक के सभी दलों को एकजुट रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। उनके इस बयान को विपक्षी गठबंधन के भीतर एकता बनाए रखने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी चुनावों और संसद के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति के लिए विपक्षी दलों का साथ रहना जरूरी होगा।</p>
<p>इधर बैठक के दिन राजधानी दिल्ली में एक और घटनाक्रम ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया। अकबर रोड क्षेत्र में कांग्रेस और राहुल गांधी के खिलाफ कुछ पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों में राहुल गांधी की तस्वीर के साथ आलोचनात्मक टिप्पणियां लिखी गई थीं। कुछ पोस्टरों में शरद पवार की तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने की कोशिश भी की गई थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि पोस्टर किस संगठन या व्यक्ति द्वारा लगाए गए थे।</p>
<p>दोपहर होते-होते यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और इन पोस्टरों को हटा दिया। कार्यकर्ताओं ने पोस्टरों को फाड़ते हुए विरोध जताया और कहा कि विपक्षी एकता को कमजोर करने के लिए इस तरह की कोशिशें की जा रही हैं। इस दौरान कुछ देर के लिए वहां राजनीतिक नारेबाजी भी देखने को मिली। हालांकि स्थिति शांतिपूर्ण रही और किसी तरह की अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।</p>
<p>INDIA ब्लॉक की यह बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि विपक्षी राजनीति के भविष्य को लेकर भी महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। संसद के आगामी सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे, संघीय ढांचे और विभिन्न राज्यों से जुड़े राजनीतिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भी दलों के बीच समन्वय पर विचार हो सकता है।</p>
<p>बैठक में शामिल नेताओं की संख्या और प्रमुख चेहरों की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया है कि विपक्षी दल अभी भी राष्ट्रीय स्तर पर साझा मंच बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि गठबंधन के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। कई राज्यों में दलों के बीच प्रतिस्पर्धा और सीट बंटवारे जैसे मुद्दे भविष्य में परीक्षा बन सकते हैं। इसके बावजूद सोमवार की बैठक ने यह संदेश देने की कोशिश की कि विपक्ष अभी भी एकजुट होकर राजनीतिक लड़ाई लड़ने का दावा कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/leaders-of-india-block-gathered-after-two-years-emphasis-on/article-55313</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/leaders-of-india-block-gathered-after-two-years-emphasis-on/article-55313</guid>
                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 18:03:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/india-bloc-meeting-%281%29.jpg"                         length="165907"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>TMC में बड़ी बगावत: 58 विधायकों ने बनाया अलग गुट, ऋतब्रत बनर्जी बने विधायक दल के नेता</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल, ममता बनर्जी की पार्टी में सबसे बड़ा आंतरिक संकट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-rebellion-in-tmc-58-mlas-formed-a-separate-group/article-54881"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tmc-split.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अभूतपूर्व बगावत देखने को मिली है। पार्टी से हाल ही में निष्कासित किए गए विधायक ऋतब्रत बनर्जी को 58 बागी विधायकों ने अपना नेता चुन लिया है। इस कदम ने न केवल TMC के भीतर गहरे मतभेदों को उजागर किया है, बल्कि राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की संभावना भी पैदा कर दी है। बुधवार को बागी विधायकों के समूह ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस से मुलाकात कर समर्थन पत्र सौंपा। इस पत्र में ऋतब्रत बनर्जी को विधायक दल का नेता घोषित किया गया है। इसके अलावा जावेद खान, संदीपन साहा और सिउली साहा को उपनेता तथा अखरुज्जमान को चीफ व्हिप नियुक्त किया गया है। हालांकि बागी गुट ने अभी भी ममता बनर्जी को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष माना है, लेकिन उन्होंने पार्टी के भीतर अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व और उनके फैसलों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। यही मुद्दा इस पूरे राजनीतिक संकट का मुख्य कारण माना जा रहा है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>फर्जी हस्ताक्षर विवाद से शुरू हुआ संकट</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">इस राजनीतिक बगावत की शुरुआत उस समय हुई जब विधायक संदीपन साहा और ऋतब्रत बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि नेता प्रतिपक्ष के चयन संबंधी प्रस्ताव में उनके हस्ताक्षर फर्जी तरीके से लगाए गए हैं।अभिषेक बनर्जी के लेटरहेड पर विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए एक प्रस्ताव में शोभनदेव को नेता विपक्ष बनाने की सिफारिश की गई थी। दोनों विधायकों का आरोप था कि इस प्रस्ताव में उनकी सहमति के बिना उनके हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया गया। शिकायत के बाद पार्टी नेतृत्व ने दोनों विधायकों को अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए TMC से निष्कासित कर दिया। इसके बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा और धीरे-धीरे कई विधायक उनके समर्थन में आ गए।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>58 विधायकों का समर्थन, बढ़ी TMC की मुश्किलें</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">58 विधायकों का एक साथ अलग गुट बनाना TMC के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह केवल कुछ नेताओं की नाराजगी नहीं, बल्कि पार्टी के अंदर लंबे समय से चल रहे असंतोष का परिणाम है। बागी विधायकों का दावा है कि पार्टी में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी की जा रही है और महत्वपूर्ण निर्णय कुछ चुनिंदा नेताओं तक सीमित हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायकों की राय को महत्व नहीं दिया जा रहा और संगठनात्मक ढांचे में पारदर्शिता की कमी है। यही वजह है कि उन्होंने विधायक दल के भीतर अलग पहचान बनाने का निर्णय लिया है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>ममता बनर्जी ने सभी कमेटियां भंग कीं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बढ़ते राजनीतिक संकट के बीच मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने बड़ा कदम उठाते हुए राज्य की सभी पार्टी कमेटियों और फ्रंटल संगठनों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि संगठन के व्यापक पुनर्गठन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। हालांकि राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह फैसला बागी गुट की ताकत को सीमित करने और संगठन पर नियंत्रण बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। कमेटियों के भंग होने से संगठनात्मक स्तर पर शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है और नए नेतृत्व को सामने लाने का रास्ता खुल सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>क्या बागी विधायक TMC पर दावा कर सकते हैं?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बागी विधायक विधायक दल के भीतर अलग गुट बनाकर नेता और चीफ व्हिप जैसे पद हासिल कर सकते हैं, लेकिन पार्टी संगठन और चुनाव चिह्न पर उनका सीधा दावा अभी आसान नहीं होगा। भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची यानी दलबदल विरोधी कानून और चुनाव आयोग के नियम इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। 91वें संविधान संशोधन के अनुसार यदि किसी दल के कम से कम दो-तिहाई विधायक अलग होने का फैसला करते हैं, तो उन्हें अयोग्यता से राहत मिल सकती है। इसके बाद यह प्रश्न उठता है कि पार्टी का वास्तविक नियंत्रण किसके पास है। चुनाव आयोग इस स्थिति में कई पहलुओं की जांच करता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव आयोग किन आधारों पर फैसला करता है?</strong></h5>
<ol style="text-align:justify;">
<li>पार्टी संगठन का समर्थन किसके पास है।</li>
<li>राष्ट्रीय और राज्य कार्यकारिणी किस गुट के साथ है।</li>
<li>पार्टी संविधान क्या कहता है।</li>
<li>चुने हुए जनप्रतिनिधियों का बहुमत किसके पक्ष में है।</li>
</ol>
<p style="text-align:justify;">इन्हीं मानकों के आधार पर चुनाव आयोग तय करता है कि पार्टी और उसके चुनाव चिह्न पर किसका अधिकार होगा।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक घटनाक्रम?</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक विश्लेषक इस पूरे घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र की राजनीति से कर रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) दोनों बड़े विभाजन का सामना कर चुकी हैं। 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना का बड़ा गुट अलग हुआ था। इसके बाद 2023 में अजित पवार के नेतृत्व में NCP का विभाजन हुआ। दोनों मामलों में अलग हुए गुटों ने पार्टी और चुनाव चिह्न पर दावा किया था। पश्चिम बंगाल में भी वैसी ही स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है, हालांकि TMC का संगठनात्मक ढांचा और नेतृत्व शैली महाराष्ट्र की पार्टियों से अलग मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-rebellion-in-tmc-58-mlas-formed-a-separate-group/article-54881</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-rebellion-in-tmc-58-mlas-formed-a-separate-group/article-54881</guid>
                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:00:33 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tmc-split.jpg"                         length="155874"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में 8 जून को INDIA ब्लॉक की बैठक संभव, विपक्षी रणनीति पर मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव समेत कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना, भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति पर हो सकती है चर्चा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-block-meeting-possible-on-june-8-in-delhi-brainstorming/article-54765"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-bloc-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">राष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर विपक्षी एकजुटता की चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के वरिष्ठ नेताओं की 8 जून को नई दिल्ली में बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे सहित करीब 15 विपक्षी दलों के नेता शामिल हो सकते हैं। माना जा रहा है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करना और विपक्षी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करना होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में कई राज्यों में बदलते राजनीतिक समीकरणों और आगामी चुनावी चुनौतियों को देखते हुए विपक्षी दल एक बार फिर साझा मंच को सक्रिय करने की कोशिश में जुटे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों की आवाज कई बार एकजुट दिखाई दी, लेकिन कई मामलों में मतभेद भी सामने आए। ऐसे में यह बैठक INDIA ब्लॉक के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि प्रमुख विपक्षी दल एक साथ बैठकर भविष्य की रणनीति तय करते हैं तो इसका असर आने वाले चुनावों और संसद के भीतर विपक्ष की भूमिका पर भी पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैठक में देश के मौजूदा राजनीतिक हालात, संसद के आगामी सत्र, राज्यों में संगठनात्मक मजबूती और जनता से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दल बेरोजगारी, महंगाई, किसानों से जुड़े मुद्दों और संघीय ढांचे से संबंधित विषयों को लेकर साझा अभियान की रूपरेखा तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में भाजपा के खिलाफ प्रभावी चुनावी रणनीति बनाने पर भी विचार किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि इस प्रस्तावित बैठक को लेकर कुछ दलों की भागीदारी को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के इस बैठक में शामिल होने की संभावना कम बताई जा रही है। इसके पीछे तमिलनाडु की राजनीति और कांग्रेस द्वारा तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) को समर्थन दिए जाने को कारण माना जा रहा है। हालांकि गठबंधन के कुछ नेता टीवीके को भी बैठक में शामिल कराने के प्रयास कर रहे हैं ताकि विपक्षी एकता का दायरा और व्यापक हो सके।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं आम आदमी पार्टी पहले ही सार्वजनिक तौर पर INDIA गठबंधन से दूरी बना चुकी है। ऐसे में पार्टी के इस बैठक में शामिल होने की संभावना लगभग नहीं के बराबर मानी जा रही है। दिल्ली और पंजाब की राजनीति को लेकर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच बढ़ी दूरी भी इसकी एक बड़ी वजह मानी जा रही है। इसके बावजूद विपक्षी खेमे की कोशिश है कि अधिक से अधिक दल साझा मंच पर बने रहें।</p>
<p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री रह चुकीं ममता बनर्जी इस बैठक में अपने राज्य से जुड़े कुछ राजनीतिक मुद्दे उठा सकती हैं। बताया जा रहा है कि तृणमूल कांग्रेस पश्चिम बंगाल में अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हुए कथित हमलों का मामला बैठक में रख सकती है और इस पर अन्य विपक्षी दलों का समर्थन मांग सकती है। यदि ऐसा होता है तो बैठक में क्षेत्रीय दलों की चिंताओं और राज्य-स्तरीय राजनीतिक मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">INDIA गठबंधन की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। इसकी पहली बैठक 23 जून 2023 को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित की गई थी। उस समय बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बैठक की मेजबानी की थी। इस बैठक में देश के प्रमुख विपक्षी दल शामिल हुए थे और 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ संयुक्त रूप से मुकाबला करने की रणनीति बनाई गई थी। बाद में बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली समेत कई शहरों में गठबंधन की बैठकों का आयोजन किया गया, जहां सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति पर चर्चा हुई।</p>
<p class="isSelectedEnd">लोकसभा चुनाव 2024 में INDIA गठबंधन को कुल 234 सीटें मिली थीं। इनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। हालांकि गठबंधन बहुमत के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया, लेकिन उसने भाजपा के सामने मजबूत चुनौती पेश की थी। इसके बाद विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में गठबंधन को मिले-जुले परिणाम देखने को मिले। महाराष्ट्र में महाविकास अघाड़ी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, जबकि कुछ अन्य राज्यों में विपक्षी दलों का प्रदर्शन बेहतर रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सितंबर 2025 में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने सरकारी आवास पर INDIA ब्लॉक के नेताओं के लिए डिनर मीटिंग आयोजित की थी। उस बैठक को विपक्षी एकजुटता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया था। कांग्रेस नेताओं ने तब दावा किया था कि बैठक सकारात्मक रही और सभी दलों ने मिलकर आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। अब जून में प्रस्तावित बैठक को उसी प्रक्रिया का अगला चरण माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-block-meeting-possible-on-june-8-in-delhi-brainstorming/article-54765</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/india-block-meeting-possible-on-june-8-in-delhi-brainstorming/article-54765</guid>
                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:58:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/india-bloc-meeting.jpg"                         length="180470"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        