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                <title>Political News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Political News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दतिया में धारा-163 लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक; प्रशासन अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[टिकट विवाद के बाद हुए बवाल और हाईवे जाम की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे दतिया अनुभाग में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। बिना अनुमति प्रदर्शन, रैली और पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/section-163-imposed-in-datia-ban-on-meetings-and-processions/article-58471"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-163.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पूरे दतिया अनुभाग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा-163 लागू कर दी है। यह आदेश 10 जुलाई की रात 9 बजे से प्रभावी हो गया है और अगले आदेश तक लागू रहेगा। प्रशासन का कहना है कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे चक्का जाम और हिंसक घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार उपचुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। आदेश लागू होने के बाद अब बिना प्रशासन की अनुमति कोई भी सभा, जुलूस, रैली, धरना या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुविभागीय दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाठी, तलवार, भाला, फरसा, चाकू या अन्य घातक हथियार लेकर चलने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्र या अन्य सार्वजनिक प्रसारण उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर, नारे, भाषण या अन्य माध्यमों से ऐसी किसी भी सामग्री के प्रचार-प्रसार पर भी रोक रहेगी, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के पालन के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं से भी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपेक्षा जताई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने अपने आदेश में हाल ही में झांसी-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए चक्का जाम का भी उल्लेख किया है। अधिकारियों के अनुसार 10 जुलाई की रात हुए प्रदर्शन के दौरान लगभग 15 से 20 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ स्थानों पर पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए एहतियात के तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। आदेश के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994, मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों को भी प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। हालांकि यह आदेश पुलिस, होमगार्ड, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, सीआरपीएफ और अन्य प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारियों पर उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन के दौरान लागू नहीं होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। धारा-163 लागू होने के बाद जिले में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का बवाल, NH-44 जाम; पुलिस पर पथराव, एसपी-एएसपी समेत 6 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा की ओर से विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। एनएच-44 पर लंबा जाम लगा और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/narottam-mishra-supporters-create-ruckus-in-datia-stone-pelting-at/article-58468"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया में आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद शुक्रवार शाम से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देर रात और शनिवार तड़के हिंसक रूप ले बैठा। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 पर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात उस समय और बिगड़ गए जब पुलिस ने हाईवे खाली कराने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि पुलिस ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और अतिरिक्त बल तैनात किया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार शाम करीब छह बजे से बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र होने लगे थे। प्रशासन का कहना है कि तीन हजार से अधिक लोगों की भीड़ ने पहले बाजार बंद कराने का प्रयास किया और फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे दतिया के साथ-साथ आसपास के जिलों की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने कई बार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम समाप्त करने की अपील की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों के मुताबिक तड़के करीब चार बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई और पुलिस टीम पर पत्थर फेंके जाने लगे। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन पथराव जारी रहने पर अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध प्रदर्शन की वजह भारतीय जनता पार्टी द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया जाना बताया जा रहा है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी एक बार फिर उन्हें टिकट देगी। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन की तैयारी भी शुरू कर दी थी। जैसे ही पार्टी ने आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा की, समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई और वे सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान कुछ समर्थकों ने सड़क पर लेटकर विरोध जताया और पार्टी नेतृत्व से फैसला बदलने की मांग की। दूसरी ओर भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने दावा किया कि कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे और पूरी रात रामधुन गाकर पार्टी नेतृत्व से टिकट पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहे थे। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने सख्ती दिखाई, जिससे हालात बिगड़ गए। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और भीड़ द्वारा पहले हिंसक व्यवहार किया गया। इस बीच भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके वरिष्ठ नेता और अभिभावक हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और डॉ. मिश्रा का मार्गदर्शन उन्हें मिलता रहेगा। हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य कराया जा रहा है, जबकि पुलिस संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:32 +0530</pubDate>
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                <title>दिल्ली एमसीडी में भाजपा और मजबूत, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का आज होगा विलय</title>
                                    <description><![CDATA[AAP से अलग होकर बनी IVP के 16 पार्षद भाजपा में होंगे शामिल, वार्ड कमेटियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन प्रत्याशियों का भी होगा ऐलान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bjp-and-strong-indraprastha-vikas-party-will-merge-in-delhi/article-58415"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/delhi-mcd.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की राजनीति में शुक्रवार का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर बनी इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक विलय होने जा रहा है। इस विलय के साथ IVP के सभी 16 पार्षद भाजपा का दामन थामेंगे। इस घटनाक्रम के बाद एमसीडी में भाजपा की संख्या बढ़कर 139 हो जाएगी, जिससे निगम में पार्टी की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में दिल्ली भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस विलय की औपचारिक घोषणा की जाएगी। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के भी मौजूद रहने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आगामी नगर निगम चुनावों और निगम की आंतरिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का गठन मई 2025 में उस समय हुआ था, जब आम आदमी पार्टी के 16 पार्षदों ने संगठन से अलग होकर नया राजनीतिक दल बनाया था। उस समय इन पार्षदों ने संगठनात्मक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर के मुद्दों को लेकर अलग राह अपनाई थी। हालांकि, अब करीब एक वर्ष बाद यही सभी पार्षद भाजपा में शामिल होकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के लिए यह विलय संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एमसीडी में पहले से भाजपा के पास मजबूत संख्या थी, लेकिन IVP के 16 पार्षदों के शामिल होने के बाद पार्टी की ताकत और बढ़ जाएगी। निगम के कुल 250 वार्डों में भाजपा के पार्षदों की संख्या अब 139 तक पहुंच जाएगी, जिससे कई समितियों और प्रशासनिक निर्णयों में पार्टी की स्थिति और प्रभावी होगी। विलय के बाद भाजपा नगर निगम की विभिन्न वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी करेगी। शुक्रवार को नामांकन की अंतिम तिथि होने के कारण पार्टी इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करना चाहती है। माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में वरिष्ठता, अनुभव और संगठनात्मक योगदान को प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के प्रमुख मुकेश गोयल को नगर निगम की किसी तदर्थ अथवा विशेष समिति का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं, पार्टी के सह-प्रमुख हेमचंद्र गोयल को सेंट्रल जोन से स्थायी समिति का सदस्य बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। भाजपा संगठन वार्ड समितियों में नई जिम्मेदारियां तय करते समय पहली, दूसरी और तीसरी बार निर्वाचित होकर आए पार्षदों की वरिष्ठता और अनुभव का भी ध्यान रख सकता है। पार्टी का उद्देश्य संगठन और निगम प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">एमसीडी के गठन के बाद वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव में भाजपा को 104 सीटों पर जीत मिली थी। समय के साथ विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्षदों के दल परिवर्तन के कारण पार्टी की संख्या लगातार बढ़ती रही। अब इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के विलय के बाद भाजपा नगर निगम में पहले से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगी। दूसरी ओर, नगर निगम की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरण भी बना सकता है। वार्ड समितियों के गठन, स्थायी समिति में प्रतिनिधित्व और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर सभी दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार को होने वाला यह विलय एमसीडी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा नेतृत्व का कहना है कि संगठन लगातार विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है और अनुभवी जनप्रतिनिधियों का पार्टी में स्वागत किया जा रहा है। वहीं राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों पर किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलती है और इसका नगर निगम के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कोलकाता रैली में ममता बनर्जी का थप्पड़ विवाद: हंगामे के बीच वायरल वीडियो से गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[बारुईपुर घटना के विरोध मार्च के दौरान कथित वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने साधा निशाना, तृणमूल ने आरोपों को बताया भ्रामक; पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में दावा किया गया कि भीड़ के बीच ममता बनर्जी ने पीली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने बारुईपुर की घटना के विरोध में बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन मार्च के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कथित तौर पर अंडे भी फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए। इससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी पहले हाथ जोड़कर भीड़ को शांत करने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह आगे बढ़ती हैं और सामने खड़े एक युवक को थप्पड़ मारती हुई नजर आती हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार करती हैं, तो इससे उनके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही थीं। टीएमसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।बताया जा रहा है कि जुलूस बालीगंज से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंचा। इसी दौरान अलग-अलग स्थानों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">रैली के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रैली में व्यवधान पैदा किया और तनाव फैलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई समर्थक इसे भीड़ को नियंत्रित करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच तेज, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के बेटे से EOW की लंबी पूछताछ</title>
                                    <description><![CDATA[शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच का दायरा बढ़ा, वैभव अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ; एजेंसी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/investigation-into-chhattisgarh-liquor-scam-intensifies-eows-long-interrogation-of/article-58201"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-liquor-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने उनसे रामगोपाल अग्रवाल के पिछले कुछ वर्षों के ठिकानों, आर्थिक गतिविधियों और संपर्कों को लेकर कई सवाल किए। हालांकि पूछताछ के बाद न तो किसी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है और न ही एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि यह मामला पहले से ही कई बड़े नामों और आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि वैभव अग्रवाल से सुबह शुरू हुई पूछताछ देर शाम तक चली। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने केवल पारिवारिक जानकारी ही नहीं बल्कि कथित आर्थिक नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और उन लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाने की कोशिश की, जो पिछले कुछ वर्षों में रामगोपाल अग्रवाल के संपर्क में रहे। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अवैध धन का प्रवाह किन-किन माध्यमों से हुआ। फिलहाल एजेंसी ने पूछताछ के विषय और उसमें सामने आई जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियां उनकी वास्तविक लोकेशन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। EOW के सूत्रों के अनुसार हाल ही में उन्हें प्रदेश में होने की सूचना मिली थी। इसी इनपुट के बाद जांच में तेजी लाई गई और उनके बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। एजेंसी की ओर से अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के तीन बड़े कथित आर्थिक मामलों में सामने आया है। इनमें करीब 3,200 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले, कोल लेवी वसूली और कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि इन सभी मामलों में आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के साथ-साथ अदालती प्रक्रिया भी जारी है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कथित शराब घोटाले की बात करें तो जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में एक संगठित नेटवर्क के जरिए अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क से हजारों करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन की आशंका है। इस मामले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। हालांकि संबंधित पक्षों ने समय-समय पर आरोपों से इनकार किया है और कई मामलों में कानूनी लड़ाई जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कोल लेवी मामले में भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW का आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़ा मामला भी जांच एजेंसियों के लिए अहम बना हुआ है। EOW का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में नियमों का उल्लंघन किया गया और कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नर्मदा जल विवाद पर तीन दशक बाद समझौता, मप्र का 7,669 करोड़ का दावा खारिज; अब गुजरात को देगा 550 करोड़</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में चार राज्यों के बीच वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर, सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वित्तीय विवाद का हुआ समाधान; केंद्र की मौजूदगी में बनी सहमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/agreement-on-narmada-water-dispute-after-three-decades-mps-claim/article-58146"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmada-water-dispute-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">करीब तीन दशक से सरदार सरोवर परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच चला आ रहा वित्तीय विवाद आखिरकार समाप्त हो गया। मंगलवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार की मध्यस्थता में चारों राज्यों के बीच वन टाइम सेटलमेंट पर सहमति बन गई। इस समझौते के साथ ही मध्यप्रदेश का गुजरात पर किया गया 7,669 करोड़ रुपये का दावा भी समाप्त हो गया। इसके उलट अब मध्यप्रदेश गुजरात को 550 करोड़ रुपये का भुगतान करेगा। इसी तरह महाराष्ट्र और राजस्थान भी गुजरात को 550-550 करोड़ रुपये देंगे। इस तरह गुजरात को तीनों भागीदार राज्यों से कुल 1,650 करोड़ रुपये मिलेंगे। लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान को नर्मदा परियोजना से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">समझौते पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए। बैठक में परियोजना से जुड़े वित्तीय दावों और लागत के बंटवारे पर विस्तृत चर्चा के बाद सभी राज्यों ने सहमति जताई। केंद्र सरकार का कहना है कि इस समझौते से वर्षों से लंबित वित्तीय विवाद का स्थायी समाधान निकल गया है और भविष्य में परियोजना से जुड़े मामलों में समन्वय बेहतर होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरदार सरोवर बांध नर्मदा नदी पर बनी देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देशीय परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना का निर्माण गुजरात में हुआ और इसका संचालन भी गुजरात सरकार के नियंत्रण में है। हालांकि बांध बनने से सबसे अधिक भूमि मध्यप्रदेश की जलमग्न हुई। परियोजना के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि, वन क्षेत्र, सरकारी संपत्तियां और बड़ी संख्या में गांव प्रभावित हुए। मध्यप्रदेश का लगातार कहना था कि उसकी सबसे अधिक जमीन डूब क्षेत्र में आने के कारण उसे उचित मुआवजा मिलना चाहिए। इसी आधार पर राज्य सरकार ने गुजरात पर 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था। इसमें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, वन भूमि, सरकारी परिसंपत्तियों और अन्य मदों का खर्च शामिल किया गया था।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरी ओर गुजरात का तर्क था कि सरदार सरोवर परियोजना की लागत समय के साथ काफी बढ़ गई थी और निर्माण में आए अतिरिक्त खर्च में भागीदार राज्यों को भी हिस्सा देना चाहिए। गुजरात ने मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान पर कुल 7,974.86 करोड़ रुपये की वसूली का दावा किया था। इसमें सबसे अधिक 5,516.50 करोड़ रुपये का दावा मध्यप्रदेश पर किया गया था। महाराष्ट्र पर 1,883.84 करोड़ और राजस्थान पर 574.52 करोड़ रुपये का दावा किया गया था। इसी मुद्दे पर दोनों राज्यों के बीच वर्षों तक सहमति नहीं बन सकी और मामला लगातार लंबित रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मध्यप्रदेश का कहना था कि सरदार सरोवर परियोजना के कारण राज्य की लगभग 55.5 प्रतिशत भूमि जलमग्न हुई। डूब क्षेत्र में बड़ी संख्या में वन, खेती की जमीन और कुल 178 गांव शामिल थे। बाद में वर्ष 2014 में बांध की ऊंचाई बढ़ाए जाने के निर्णय के बाद अतिरिक्त पांच हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि भी जलमग्न हो गई। इससे प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 192 तक पहुंच गई। राज्य सरकार ने वर्ष 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून और उस समय के बाजार मूल्य के आधार पर मुआवजे की राशि का संशोधित आकलन तैयार किया और गुजरात पर 7,669 करोड़ रुपये का दावा प्रस्तुत किया। दूसरी ओर गुजरात पुरानी दरों के आधार पर केवल 281 करोड़ रुपये देने की बात कहता रहा। इसी अंतर के कारण विवाद लगातार गहराता गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">महाराष्ट्र ने भी अपने नंदुरबार जिले में डूबी वन भूमि, सरकारी परिसंपत्तियों और अन्य मदों के आधार पर गुजरात से लगभग 3,000 करोड़ रुपये की मांग की थी। वहीं राजस्थान का कहना था कि उसने परियोजना में 556 करोड़ रुपये की लागत साझेदारी की थी और वह पूरे खर्च के ऑडिट तथा वित्तीय समायोजन की मांग कर रहा था। चारों राज्यों के अलग-अलग दावों के कारण वर्षों तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। कई दौर की बैठकों और तकनीकी चर्चाओं के बावजूद विवाद बना रहा। अब केंद्र सरकार की पहल पर सभी पक्षों ने वन टाइम सेटलमेंट को स्वीकार कर लिया है। समझौते के अनुसार पुराने सभी दावे और प्रतिदावे समाप्त माने जाएंगे। इसके बदले मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550-550 करोड़ रुपये का भुगतान करेंगे। माना जा रहा है कि इससे भविष्य में परियोजना के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और राज्यों के बीच समन्वय में आसानी होगी। सरकार का कहना है कि लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाप्त होने से प्रशासनिक और कानूनी जटिलताएं भी कम होंगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:16:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ओरछा में 18-19 जुलाई को भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक, चुनावी रणनीति पर होगा मंथन</title>
                                    <description><![CDATA[नई प्रदेश टीम पहली बार एक मंच पर आएगी, केंद्रीय नेतृत्व को भी भेजा गया आमंत्रण; संगठन विस्तार, बूथ सशक्तिकरण और निकाय-पंचायत चुनाव रहेंगे बैठक के प्रमुख एजेंडे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/the-first-meeting-of-bjp-state-working-committee-will-be/article-58145"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mp-bjp.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक 18 और 19 जुलाई को निवाड़ी जिले के धार्मिक और पर्यटन नगर ओरछा में आयोजित की जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में होने वाली यह पहली बड़ी संगठनात्मक बैठक मानी जा रही है। दो दिवसीय बैठक का आयोजन राजमहल होटल में होगा, जहां प्रदेशभर से पार्टी पदाधिकारी, कार्यसमिति सदस्य, सांसद, विधायक, जिला अध्यक्ष और विशेष आमंत्रित प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक को आगामी नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों की तैयारियों के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। संगठन ने कार्यक्रम की तैयारियां तेज कर दी हैं और स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्रीय नेतृत्व के कई वरिष्ठ नेताओं को आमंत्रण भेजा गया है। हालांकि अंतिम कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन यदि राष्ट्रीय अध्यक्ष का दौरा तय होता है तो अध्यक्ष बनने के बाद मध्य प्रदेश में यह उनका पहला बड़ा संगठनात्मक कार्यक्रम होगा। केंद्रीय नेतृत्व की मौजूदगी में प्रदेश संगठन को आगामी राजनीतिक रणनीति और चुनावी तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश मिलने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इस बैठक को संगठन के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव मान रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान प्रदेश संगठन की नई कार्यसमिति पहली बार एक मंच पर दिखाई देगी। हेमंत खंडेलवाल के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हाल ही में नई कार्यसमिति का गठन किया गया था। ऐसे में यह आयोजन नई टीम के औपचारिक परिचय और जिम्मेदारियों के स्पष्ट बंटवारे का अवसर भी माना जा रहा है। प्रदेशभर से आए पदाधिकारियों के बीच संगठन की आगामी कार्ययोजना साझा की जाएगी और विभिन्न विभागों तथा प्रकोष्ठों की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा के सामने आने वाले महीनों में नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव जैसी महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौतियां हैं। ऐसे में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में चुनावी रणनीति सबसे अहम मुद्दा रहने की उम्मीद है। बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने, नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने, सदस्यता अभियान को गति देने और विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने को लेकर भी मंथन किया जाएगा। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करना चाहता है कि संगठनात्मक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं, ताकि चुनावी मैदान में कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ उतर सकें।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव भी पेश किए जाएंगे। प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालात, सरकार की उपलब्धियों और विपक्ष के मुद्दों पर संगठन की रणनीति तय की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश चुनाव समिति और अनुशासन समिति के गठन को अंतिम रूप दिए जाने की भी संभावना है। पार्टी के भीतर संगठनात्मक अनुशासन, चुनावी प्रबंधन और भविष्य की गतिविधियों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों और मोर्चों की कार्यप्रणाली की समीक्षा भी एजेंडे में शामिल रहने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस बड़े आयोजन को देखते हुए ओरछा में ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं की तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं। प्रदेशभर से आने वाले नेताओं और पदाधिकारियों के लिए शहर के तीन प्रमुख होटलों में 300 से अधिक कमरे आरक्षित किए जा रहे हैं। इनमें राजमहल होटल, ओरछा पैलेस और ओरछा क्लब एंड रिजॉर्ट प्रमुख हैं। स्थानीय संगठन के कार्यकर्ता आवास, परिवहन, भोजन और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। बैठक में बड़ी संख्या में प्रतिनिधियों की मौजूदगी को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह बैठक केवल संगठनात्मक औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि आगामी चुनावी दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच भी साबित हो सकती है। प्रदेश में भाजपा लगातार संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दे रही है। पिछले कुछ महीनों में सदस्यता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम और विभिन्न सामाजिक अभियानों के जरिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखने की कोशिश की गई है। अब कार्यसमिति की बैठक में इन अभियानों की समीक्षा के साथ नई रणनीति तैयार की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में प्रदेश सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को आम जनता तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय बना रहे, ताकि विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं का राजनीतिक लाभ भी संगठन को मिल सके। इसी के साथ विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों का जवाब देने और जनसंपर्क अभियान को मजबूत करने की रणनीति भी तैयार की जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ओरछा का चयन भी संगठन की विशेष रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखने वाला यह शहर प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। भाजपा इससे पहले भी राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यसमिति और प्रशिक्षण शिविर आयोजित कर क्षेत्रीय संतुलन बनाने की कोशिश करती रही है। इस बार ओरछा में होने वाला आयोजन संगठन को नई ऊर्जा देने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय बढ़ाने का भी अवसर माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 11:15:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा दावा, TVK विधायकों को करोड़ों की रिश्वत का ऑफर; सरकार गिराने की कथित साजिश की जांच तेज</title>
                                    <description><![CDATA[TVK विधायक ने ₹35 करोड़ की पेशकश और धमकी मिलने का आरोप लगाया, शिकायत के बाद तीन लोग गिरफ्तार; राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच मामले की जांच जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-claim-in-tamil-nadu-politics-tvk-mlas-offered-bribe/article-57556"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tamil-nadu-politics-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। अभिनेता और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के संस्थापक विजय की अगुवाई वाली सरकार को कथित रूप से अस्थिर करने की साजिश का दावा किया गया है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया है कि उसके विधायकों को करोड़ों रुपये की रिश्वत देकर सरकार गिराने की कोशिश की गई। इस मामले में एक विधायक की शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">मामले ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। एक ओर TVK इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश बता रही है, वहीं दूसरी ओर डीएमके ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक नैरेटिव करार दिया है। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;">विधायक ने लगाया 35 करोड़ रुपये की रिश्वत का आरोप</h5>
<p style="text-align:justify;">TVK के ऊथंगुरै विधानसभा क्षेत्र से विधायक डॉ. एन. इलैयाराजा ने चेन्नई पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर आरोप लगाया कि उन्हें फोन के माध्यम से संपर्क कर विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ आने वाले एक प्रस्ताव में विशेष तरीके से मतदान करने के लिए कहा गया। इसके बदले उन्हें 35 करोड़ रुपये देने की पेशकश की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">शिकायत के अनुसार, फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को इंडियन पॉलिटिकल डेमोक्रेटिक स्ट्रैटेजीज (IPDS) नामक संगठन का प्रतिनिधि बताया। विधायक का दावा है कि उन्होंने इस प्रस्ताव को तुरंत ठुकरा दिया और दोबारा संपर्क न करने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद उन्हें और उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;">15 विधायकों के इस्तीफे की कथित योजना</h5>
<p style="text-align:justify;">यह केवल एक विधायक तक सीमित मामला नहीं था। कथित योजना के तहत TVK के 15 विधायकों से एक साथ इस्तीफा दिलाकर सरकार के बहुमत को प्रभावित करने की रणनीति बनाई गई थी। हालांकि इस दावे की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK नेताओं का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले का खुलासा नहीं होता तो राज्य की राजनीतिक स्थिति प्रभावित हो सकती थी। पार्टी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">शिकायत के बाद तीन लोगों की गिरफ्तारी</h5>
<p style="text-align:justify;">विधायक की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। जांच के दौरान चेन्नई स्थित एक कंसल्टेंसी फर्म से जुड़े तीन लोगों—तिरुनावुक्करासु, नरेश और त्यागराजन—को गिरफ्तार किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में इन लोगों के कुछ राजनीतिक संपर्कों की भी जानकारी सामने आने की बात कही जा रही है। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी भी राजनीतिक दल या नेता की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;">TVK ने लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप</h5>
<p style="text-align:justify;">TVK नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी के कई विधायकों से संपर्क कर उन्हें दल बदलने या सरकार के खिलाफ मतदान करने के लिए करोड़ों रुपये की पेशकश की गई। पार्टी का कहना है कि यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK का दावा है कि कई विधायकों को 20 करोड़ से 50 करोड़ रुपये तक की पेशकश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">डीएमके ने आरोपों को बताया निराधार</h5>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर डीएमके ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी के प्रवक्ता ए. सरवनन ने कहा कि TVK बिना तथ्यों के राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि यदि किसी के पास ठोस सबूत हैं तो उन्हें जांच एजेंसियों के सामने प्रस्तुत किया जाना चाहिए। डीएमके का कहना है कि मामले की जांच कानून के अनुसार होनी चाहिए और बिना जांच पूरी हुए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">TVK और डीएमके के बीच पिछले कुछ समय से राजनीतिक बयानबाजी तेज रही है। चुनावी सभाओं और विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान दोनों दलों के नेताओं के बीच कई बार तीखी टिप्पणियां देखने को मिली हैं। हाल के महीनों में भी विभिन्न राजनीतिक मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी रहा है। मौजूदा मामला उसी राजनीतिक माहौल के बीच सामने आया है, जिससे इसकी संवेदनशीलता और बढ़ गई है।</p>
<h5 style="text-align:justify;">पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच</h5>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ जारी है और आवश्यकता पड़ने पर अन्य लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी। इस घटनाक्रम के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों इस मुद्दे पर अपनी-अपनी दलीलें रख रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में रिश्वत या सरकार गिराने की किसी संगठित साजिश के प्रमाण मिलते हैं तो यह राज्य की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण मामला साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:46:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-पाक की 117 हस्तियों ने पीएम मोदी और शहबाज शरीफ को लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[दोनों देशों के प्रमुख लोगों ने संवाद, शांति और आपसी रिश्तों को मजबूत करने की अपील की, युवाओं के भविष्य और क्षेत्रीय विकास पर दिया जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/117-celebrities-from-india-and-pakistan-wrote-letters-to-pm/article-57509"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-pakistan-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों ने एक संयुक्त पहल करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को पत्र लिखा है। इस पत्र में दोनों नेताओं से आपसी संवाद को आगे बढ़ाने, बातचीत का रास्ता अपनाने और दोनों देशों के रिश्तों को बेहतर बनाने की अपील की गई है। पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों का कहना है कि दक्षिण एशिया में स्थायी शांति और विकास तभी संभव है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच संवाद की प्रक्रिया आगे बढ़े और दोनों देश आपसी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने का प्रयास करें। इस संयुक्त पत्र में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव का असर केवल सरकारों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सबसे अधिक प्रभाव आम नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं के भविष्य पर पड़ता है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि लंबे समय से जारी तनाव के कारण विकास, व्यापार, शिक्षा, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय सहयोग जैसी कई संभावनाएं प्रभावित हुई हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने दोनों प्रधानमंत्रियों से आग्रह किया है कि वे भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे कदम उठाएं, जिनसे विश्वास का माहौल बने और दोनों देशों के बीच संवाद की नई शुरुआत हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संयुक्त पहल में भारत और पाकिस्तान के कुल 117 प्रमुख लोगों ने भाग लिया है। इनमें पूर्व नौकरशाह, पूर्व राजनयिक, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, राजनीतिक हस्तियां और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े वरिष्ठ लोग शामिल हैं। भारत की ओर से 61 लोगों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती, मीरवाइज उमर फारूक और राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं। वहीं पाकिस्तान की ओर से 56 लोगों ने इस पहल का समर्थन किया है, जिनमें पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी समेत कई पूर्व अधिकारी और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोग शामिल हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान दोनों ही परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और ऐसे में किसी भी प्रकार का तनाव पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि संवाद और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती का हिस्सा होता है। उनका कहना है कि बातचीत का उद्देश्य मतभेदों को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का रास्ता तैयार करना होता है। पत्र में दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों, शैक्षणिक सहयोग, खेल प्रतियोगिताओं और नागरिक स्तर पर संवाद को बढ़ावा देने की बात कही गई है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि जब आम लोगों के बीच संपर्क बढ़ेगा तो आपसी विश्वास भी मजबूत होगा और लंबे समय से चली आ रही दूरियां कम करने में मदद मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इस पत्र पर अभी तक भारत या पाकिस्तान की सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। दोनों देशों के संबंध पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न मुद्दों को लेकर चुनौतीपूर्ण रहे हैं। इसके बावजूद समय-समय पर अलग-अलग मंचों से शांति और संवाद की पहल की मांग उठती रही है। इस बार भी दोनों देशों की प्रमुख हस्तियों ने साझा रूप से यह संदेश देने की कोशिश की है कि क्षेत्र में स्थिरता और विकास के लिए संवाद का रास्ता खुला रहना जरूरी है। इस तरह की नागरिक पहलें सरकारों के बीच औपचारिक बातचीत का विकल्प नहीं होतीं, लेकिन वे सकारात्मक माहौल बनाने में अपनी भूमिका निभा सकती हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:43:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एंडी बर्नहैम पीएम पद की दौड़ में आगे, ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ की बढ़ी दावेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[ब्रिटेन की राजनीति में इन दिनों एंडी बर्नहैम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। प्रधानमंत्री पद को लेकर चल रही राजनीतिक हलचल के बीच उनका नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आया है। ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर से लेकर राष्ट्रीय राजनीति के प्रभावशाली नेता तक का उनका सफर उन्हें ब्रिटिश राजनीति के सबसे चर्चित चेहरों में शामिल करता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/andy-burnham-increases-claim-of-king-of-the-north-in/article-56734"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/burnham.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ब्रिटेन की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच लेबर पार्टी के वरिष्ठ नेता एंडी बर्नहैम प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में गिने जा रहे हैं। हाल ही में संसद में वापसी और पार्टी के भीतर बढ़ते समर्थन ने उनकी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत किया है। समर्थकों का मानना है कि बर्नहैम पार्टी को नई दिशा देने और आम मतदाताओं से बेहतर संवाद स्थापित करने की क्षमता रखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">एंडी बर्नहैम का जन्म 1970 में इंग्लैंड के लिवरपूल में हुआ था। हालांकि उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। मध्यमवर्गीय परिवार से आने वाले बर्नहैम के माता-पिता लेबर पार्टी के समर्थक थे, जिसने शुरुआती दौर में उनकी राजनीतिक सोच को प्रभावित किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">दिलचस्प बात यह है कि राजनीति में आने का उनका निर्णय किसी राजनीतिक भाषण से नहीं, बल्कि एक टेलीविजन ड्रामा से प्रभावित था। किशोरावस्था में बीबीसी के चर्चित कार्यक्रम ‘बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ’ को देखने के बाद उन्होंने सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में रुचि विकसित की। यह धारावाहिक बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझते श्रमिक वर्ग की कहानी पर आधारित था।</p>
<h3>पत्रकारिता से राजनीति तक</h3>
<p class="isSelectedEnd">कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई पूरी करने के बाद बर्नहैम ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से की। उन्होंने कई पेशेवर पत्रिकाओं में काम किया और बाद में लेबर पार्टी के नेताओं के साथ राजनीतिक सलाहकार के रूप में जुड़ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd">साल 2001 में वह पहली बार संसद पहुंचे और सांसद चुने गए। इसके बाद उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों में जिम्मेदारियां संभालीं। स्वास्थ्य, संस्कृति और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों में काम करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।</p>
<h3>‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ की पहचान</h3>
<p class="isSelectedEnd">दो बार लेबर पार्टी का नेतृत्व हासिल करने की कोशिश में असफल रहने के बाद बर्नहैम ने 2017 में ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले प्रत्यक्ष निर्वाचित मेयर का चुनाव जीता। यहीं से उनकी नई राजनीतिक पहचान बनी।</p>
<p class="isSelectedEnd">कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने उत्तरी इंग्लैंड के हितों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई। क्षेत्रीय असमानताओं और आर्थिक सहायता के मुद्दे पर उनकी मुखर भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय सुर्खियों में ला दिया। इसी दौर में मीडिया और समर्थकों ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत आम लोगों से सीधे संवाद की क्षमता मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बर्नहैम जटिल नीतिगत मुद्दों को भी सरल भाषा में समझाने की क्षमता रखते हैं, जिससे वे आम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं।</p>
<h3>पार्टी के भीतर बढ़ता प्रभाव</h3>
<p class="isSelectedEnd">हाल के वर्षों में लेबर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन और नेतृत्व को लेकर उठे सवालों के बीच बर्नहैम का कद लगातार बढ़ा है। मेकरफील्ड उपचुनाव में जीत के बाद उनकी संसद में वापसी को पार्टी नेतृत्व की दौड़ में महत्वपूर्ण कदम माना गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि पार्टी नेतृत्व में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो एंडी बर्नहैम सबसे मजबूत दावेदारों में शामिल रहेंगे। उनकी प्रशासनिक पृष्ठभूमि, क्षेत्रीय लोकप्रियता और संगठन के भीतर प्रभाव उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाता है।</p>
<p>फिलहाल ब्रिटेन की राजनीति में नजरें आने वाले दिनों के घटनाक्रम पर टिकी हैं। हालांकि इतना स्पष्ट है कि एंडी बर्नहैम अब केवल क्षेत्रीय नेता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता के शीर्ष पद के गंभीर दावेदार बन चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 14:27:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[दैनिक जागरण]]></dc:creator>
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                <title>केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा, राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने के बाद फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और भाजपा द्वारा दोबारा उम्मीदवार न बनाए जाने के बाद यह फैसला सामने आया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/resignation-of-union-minister-george-kurien-decision-after-the-end/article-56698"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/george-korean.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे जॉर्ज कुरियन ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति भवन की ओर से मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हालांकि इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। 65 वर्षीय कुरियन मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून 2026 को समाप्त हो गया था और भाजपा ने हालिया राज्यसभा चुनाव में उन्हें दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाया।</p>
<p class="isSelectedEnd">जॉर्ज कुरियन अगस्त 2024 से मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य थे। भाजपा संगठन में उनकी पहचान लंबे समय से दक्षिण भारत, विशेषकर केरल में पार्टी के प्रमुख चेहरों में रही है। राजनीतिक हलकों में उनके इस्तीफे को आगामी संगठनात्मक और मंत्रिमंडलीय बदलावों से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में संपन्न केरल विधानसभा चुनावों में भाजपा के अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाने को भी इस घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में 140 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा को केवल तीन सीटों पर जीत मिली थी, जबकि पार्टी ने राज्य में अपनी उपस्थिति बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाया था।</p>
<h3>केरल में भाजपा का चेहरा</h3>
<p class="isSelectedEnd">जॉर्ज कुरियन केरल के प्रमुख ईसाई संप्रदाय सीरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े रहे हैं। वे वर्षों तक टीवी डिबेट्स और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाजपा का पक्ष रखने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केरल दौरों के दौरान कुरियन अक्सर उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते दिखाई देते थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 में उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना केरल के ईसाई समुदाय के बीच भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा था।</p>
<h3>राज्यसभा चुनाव से संकेत</h3>
<p class="isSelectedEnd">18 जून को 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इनमें अधिकांश सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। भाजपा ने 4 जून को अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, जिसमें जॉर्ज कुरियन और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका नहीं दिया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd">रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों नेताओं के टिकट कटने के बाद से ही केंद्र सरकार में संभावित फेरबदल की अटकलें तेज हो गई थीं। अब कुरियन के इस्तीफे ने इन चर्चाओं को और बल दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि भाजपा आने वाले महीनों में संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर नई रणनीति के तहत बदलाव कर सकती है। दक्षिण भारत में पार्टी के प्रदर्शन और विस्तार को लेकर भी नेतृत्व नए सिरे से समीक्षा कर सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इससे पहले तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई के इस्तीफे ने भी दक्षिण भारत की राजनीति में हलचल पैदा की थी। ऐसे में जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा भाजपा की दक्षिण भारत रणनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>फिलहाल भाजपा नेतृत्व की ओर से कुरियन की भविष्य की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जारी है कि पार्टी उन्हें संगठन में नई जिम्मेदारी दे सकती है। केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन का इस्तीफा अब राष्ट्रीय राजनीति और भारत समाचार अपडेट में प्रमुख चर्चा का विषय बन गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Jun 2026 13:04:04 +0530</pubDate>
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                <title>TMC नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार, फालता थाने पर हमले का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश का आरोप, हिंसक प्रदर्शन मामले में पुलिस की कार्रवाई तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tmc-leader-jahangir-khans-wife-arrested-for-attack-on-falta/article-56486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sarina-bibi-arrested.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान से जुड़े मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी पत्नी सरीना बीबी को गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार सुबह हुई इस गिरफ्तारी के बाद इलाके में एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पुलिस का आरोप है कि सरीना बीबी ने फालता पुलिस स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में समर्थकों को इकट्ठा कर विरोध प्रदर्शन कराया था और इसी दौरान पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों पर हमला करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और कानून व्यवस्था बिगाड़ने में उनकी भूमिका सामने आई है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें डायमंड हार्बर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरा मामला 16 जून को फालता थाने के बाहर हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। पुलिस के अनुसार जहांगीर खान की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक बड़ी संख्या में थाने के बाहर जमा हो गए थे। इसी दौरान प्रदर्शन उग्र हो गया और भीड़ ने सुरक्षाबलों पर पथराव शुरू कर दिया। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने न केवल कानून व्यवस्था बाधित की बल्कि पुलिस हिरासत में मौजूद जहांगीर खान को छुड़ाने की भी कोशिश की। घटना के बाद पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य वीडियो फुटेज की जांच शुरू की थी। इन्हीं फुटेज के आधार पर कई लोगों की पहचान की गई और अब तक 27 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जहांगीर खान का नाम पिछले कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। वह दक्षिण 24 परगना जिले के फालता क्षेत्र में टीएमसी के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में उन्हें टीएमसी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता है। विधानसभा चुनाव के दौरान भी उनका नाम कई बार चर्चा में आया था। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की तरह पेश किया था और सार्वजनिक सभाओं में कई बार फिल्म का चर्चित संवाद दोहराया था। इसी वजह से वह स्थानीय स्तर पर काफी चर्चित हो गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि चुनाव के बाद हालात तेजी से बदले। फालता विधानसभा सीट पर मतदान के दौरान गड़बड़ियों के आरोप सामने आए थे। चुनाव आयोग को मतदान रद्द कर दोबारा वोटिंग करानी पड़ी थी। दोबारा मतदान से ठीक पहले जहांगीर खान ने चुनावी मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा ने इस सीट पर बड़ी जीत दर्ज की और उसी समय से जहांगीर खान सार्वजनिक रूप से कम दिखाई देने लगे। इस बीच उनके खिलाफ कई गंभीर आरोप भी सामने आए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार फालता थाने में उनके खिलाफ सात अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। इन मामलों में अवैध वसूली, धमकी देने, लोगों को डराने और महिलाओं को गैंगरेप की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे। आरोप लगने के बाद वह लंबे समय तक पुलिस की पकड़ से दूर रहे। पुलिस का कहना है कि वह लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे और गिरफ्तारी से बचने की कोशिश कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">आखिरकार 8 जून को पश्चिम बंगाल पुलिस ने उन्हें नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के मुताबिक वह देश छोड़ने की कोशिश कर रहे थे। गिरफ्तारी के बाद उन्हें राज्य में लाया गया और पूछताछ शुरू की गई। इसके बाद पुलिस ने उन्हें फालता क्षेत्र में कई जगहों पर ले जाकर घटनास्थलों की पहचान कराई। इसी दौरान उनकी सार्वजनिक परेड भी कराई गई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इन वीडियो में जहांगीर खान लोगों के सामने कान पकड़कर और हाथ जोड़कर माफी मांगते दिखाई दिए। एक वीडियो में वह हथकड़ी लगाए नजर आए, जबकि दूसरे वीडियो में उनकी कमर में रस्सी बंधी हुई थी। इन तस्वीरों को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई। विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रशासन का कहना था कि यह जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">फालता थाने पर हुए हमले के बाद राज्य सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि हिंसा में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए। इसके बाद पुलिस ने वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान का अभियान शुरू किया। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं क्योंकि जांच अभी जारी है। हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल में कई टीएमसी नेताओं के खिलाफ जनता का विरोध खुलकर सामने आया है। कहीं नेताओं का घेराव किया गया तो कहीं उन पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगे। ऐसे माहौल में जहांगीर खान और उनकी पत्नी से जुड़ा यह मामला राज्य की राजनीति में नया मोड़ लेकर आया है। सरीना बीबी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फालता थाने पर हुए हमले और हिंसा में शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 14:55:41 +0530</pubDate>
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