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                <title>Election Commission - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Election Commission RSS Feed</description>
                
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                <title>दतिया में धारा-163 लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक; प्रशासन अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[टिकट विवाद के बाद हुए बवाल और हाईवे जाम की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे दतिया अनुभाग में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। बिना अनुमति प्रदर्शन, रैली और पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/section-163-imposed-in-datia-ban-on-meetings-and-processions/article-58471"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-163.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पूरे दतिया अनुभाग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा-163 लागू कर दी है। यह आदेश 10 जुलाई की रात 9 बजे से प्रभावी हो गया है और अगले आदेश तक लागू रहेगा। प्रशासन का कहना है कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे चक्का जाम और हिंसक घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार उपचुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। आदेश लागू होने के बाद अब बिना प्रशासन की अनुमति कोई भी सभा, जुलूस, रैली, धरना या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुविभागीय दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाठी, तलवार, भाला, फरसा, चाकू या अन्य घातक हथियार लेकर चलने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्र या अन्य सार्वजनिक प्रसारण उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर, नारे, भाषण या अन्य माध्यमों से ऐसी किसी भी सामग्री के प्रचार-प्रसार पर भी रोक रहेगी, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के पालन के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं से भी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपेक्षा जताई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने अपने आदेश में हाल ही में झांसी-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए चक्का जाम का भी उल्लेख किया है। अधिकारियों के अनुसार 10 जुलाई की रात हुए प्रदर्शन के दौरान लगभग 15 से 20 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ स्थानों पर पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए एहतियात के तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। आदेश के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994, मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों को भी प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। हालांकि यह आदेश पुलिस, होमगार्ड, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, सीआरपीएफ और अन्य प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारियों पर उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन के दौरान लागू नहीं होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। धारा-163 लागू होने के बाद जिले में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव प्रक्रिया शुरू, नामांकन दाखिल होना प्रारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[निर्वाचन आयोग ने तीन राज्यों की रिक्त विधानसभा सीटों के लिए अधिसूचना जारी की। 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश और शराबबंदी के निर्देश भी जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/by-election-process-begins-on-three-assembly-seats-of-madhya-pradesh/article-58095"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/election-commission-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार में विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने तीनों राज्यों की रिक्त विधानसभा सीटों के लिए अधिसूचना जारी कर नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इन उपचुनावों के परिणाम संबंधित राज्यों की राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ स्थानीय समीकरणों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार मध्य प्रदेश की 22-दतिया विधानसभा सीट, गुजरात की 145-मंजलपुर विधानसभा सीट और बिहार की 182-बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए जाएंगे। इन तीनों सीटों के लिए 6 जुलाई 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवार 13 जुलाई 2026 तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद 14 जुलाई को सभी नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव मैदान से हटना चाहता है तो वह 16 जुलाई तक अपना नाम वापस ले सकता है। नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद चुनाव मैदान में अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी और इसके बाद चुनाव प्रचार पूरी तरह गति पकड़ लेगा। निर्वाचन आयोग ने बताया है कि यदि आवश्यक हुआ तो इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में 30 जुलाई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान संपन्न होने के बाद सभी मतों की गणना 3 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। आयोग का लक्ष्य है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 4 अगस्त 2026 तक हर हाल में पूरी कर ली जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावी हो गई है। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने चुनाव वाले क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने और मतदाताओं को सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष निर्देश भी जारी किए हैं। आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों को कहा है कि मतदान के दिन सभी पात्र कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश दिया जाए ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। यह व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के तहत लागू होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यवसाय, औद्योगिक इकाई, व्यापारिक प्रतिष्ठान या अन्य संस्थान में कार्यरत ऐसे कर्मचारी, जो संबंधित विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं, उन्हें मतदान के दिन वेतन सहित अवकाश दिया जाएगा। यदि कोई नियोक्ता इस प्रावधान का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। यह सुविधा केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि दैनिक वेतनभोगी और आकस्मिक श्रमिक भी इसके दायरे में आएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था का उल्लेख किया है जो अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर किसी अन्य शहर या जिले में कार्यरत हैं। यदि उनका नाम संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है तो वे भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश पाने के अधिकारी होंगे, जिससे वे अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र में जाकर मतदान कर सकें। आयोग का मानना है कि इससे अधिक से अधिक मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए आयोग ने शराबबंदी को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135सी के तहत मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में शराब की बिक्री, वितरण और सेवन पर प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में होटल, बार, रेस्तरां, शराब की दुकानों और अन्य सार्वजनिक या निजी स्थानों पर मादक पेय पदार्थों की बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी। आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि मतदान से पहले निर्धारित अवधि के लिए 'ड्राई डे' घोषित किया जाए। इसके अलावा मतगणना वाले दिन यानी 3 अगस्त 2026 को भी संबंधित क्षेत्रों में शराबबंदी लागू रहेगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:47:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राज्यसभा उम्मीदवारी पर सुप्रीम कोर्ट से मीनााक्षी नटराजन को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से किया इनकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2bcf22157b3/article-55735"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत न्यायालय का हस्तक्षेप सीमित है और ऐसे मामलों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान दखल नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब किसी उम्मीदवार का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा खारिज कर दिया जाता है, तब संविधान के प्रावधानों को देखते हुए अदालत सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि पहले भी कई मामलों में चुनाव प्रक्रिया के बीच अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत अदालतों का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए न्यायालयों ने हस्तक्षेप से परहेज किया है। सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि नामांकन पत्र खारिज करने में स्पष्ट और गंभीर त्रुटि हुई है। उनके अनुसार यह ऐसा मामला था जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी था। सिंघवी ने यह भी सवाल उठाया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में था, तब भी चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने अदालत में कहा कि उनकी मुवक्किल केवल चुनाव लड़ने का अवसर चाहती थीं। उनका तर्क था कि किसी उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतरने का मौका मिलना चाहिए और अंतिम फैसला मतदाताओं या निर्वाचन प्रक्रिया पर छोड़ दिया जाना चाहिए। सिंघवी ने यह भी कहा कि कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष की गई शिकायत पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था, इसके बावजूद परिणाम घोषित कर दिए गए। हालांकि अदालत ने इस दलील पर सहमति नहीं जताई। पीठ ने पूछा कि क्या ऐसा कोई उदाहरण मौजूद है जिसमें नामांकन खारिज होने के बाद चुनाव प्रक्रिया के बीच सर्वोच्च अदालत ने हस्तक्षेप किया हो। अदालत ने कहा कि चाहे रिटर्निंग अधिकारी का निर्णय गलत ही क्यों न हो, लेकिन कानून ने इसके लिए अलग उपचार का प्रावधान किया है और चुनाव प्रक्रिया के दौरान सीधे न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान भाजपा उम्मीदवारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी भी उपस्थित रहे। उन्होंने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं बल्कि एक वैधानिक अधिकार है। इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत के कई पुराने फैसलों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि चुनाव लड़ने का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की श्रेणी में नहीं आता। मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों में से एक के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया था, लेकिन भाजपा नेताओं ने उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले का पूरा विवरण नहीं दिया। आपत्तियों पर विचार करने के बाद रिटर्निंग अधिकारी और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि उनके द्वारा दाखिल किया गया फॉर्म-26 अधूरा था और उसमें एक न्यायिक नोटिस का उल्लेख नहीं किया गया था। रिटर्निंग अधिकारी ने इसे महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने की श्रेणी में माना।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस निर्णय के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चुनौती दी। पार्टी का कहना था कि मीनाक्षी नटराजन किसी आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं। कांग्रेस के अनुसार जिस मामले का हवाला दिया गया, उसमें उनका नाम केवल एक अलग निजी शिकायत में आया था और उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। पार्टी ने यह भी तर्क दिया कि प्रारंभिक नोटिस को लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, इसलिए उसका खुलासा करना आवश्यक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि इन दलीलों के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। अदालत ने साफ किया कि उसके आदेश का असर भविष्य में दायर की जाने वाली किसी चुनाव याचिका पर नहीं पड़ेगा। यानी यदि मीनाक्षी नटराजन या कांग्रेस इस मामले को आगे चुनाव याचिका के रूप में संबंधित उच्च न्यायालय में ले जाना चाहें तो उनके लिए रास्ता खुला रहेगा। उधर, राज्यसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनावी मुकाबले की संभावना लगभग समाप्त हो गई थी और भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:38 +0530</pubDate>
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                <title>मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर फैसला बाकी, कांग्रेस का उपवास जारी</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से मुलाकात की, भोपाल में कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। आयोग की औपचारिक प्रतिक्रिया का इंतजार जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/congress-fast-continues-pending-decision-on-meenakshi-natarajans-nomination/article-55549"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहा घटनाक्रम बुधवार को भी चर्चा का केंद्र बना रहा। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द होने के बाद पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में निर्वाचन आयोग पहुंचा और पूरे मामले में अपना पक्ष रखा। आयोग के साथ हुई बैठक के बाद कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उन्होंने नामांकन निरस्त किए जाने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। हालांकि देर शाम तक निर्वाचन आयोग की ओर से कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया था। ऐसे में राजनीतिक हलकों में पूरे दिन इस मुद्दे को लेकर चर्चाएं जारी रहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली में आयोग से मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता शामिल थे। बैठक के बाद नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नामांकन रद्द किए जाने के पीछे जिन तथ्यों का उल्लेख किया गया है, उन पर आयोग से विस्तृत चर्चा की गई है। पार्टी का कहना है कि कानूनी प्रक्रिया और चुनावी नियमों की व्याख्या को लेकर उनका अलग दृष्टिकोण है, जिसे आयोग के सामने रखा गया है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग पूरे मामले से जुड़े दस्तावेजों और नियमों का अध्ययन कर रहा है। आयोग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच भोपाल में भी राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय पहुंचे और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। कई कार्यकर्ताओं ने सामूहिक उपवास भी रखा। प्रदेश कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख रहे हैं और आयोग के निर्णय का सम्मान करेंगे। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद रही। पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक दलों और आम लोगों की नजर बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">नामांकन रद्द होने का मामला हलफनामे में दी गई जानकारी से जुड़ा हुआ है। जांच के दौरान चुनाव अधिकारियों ने कुछ तथ्यों को लेकर आपत्ति दर्ज की थी, जिसके बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया। चुनाव प्रक्रिया में रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है और उनके निर्णय चुनावी नियमों के आधार पर लिए जाते हैं। यही कारण है कि मामला अब निर्वाचन आयोग के समक्ष पहुंचा है, जहां सभी पक्षों के तर्कों और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेताओं का कहना है कि संबंधित कानूनी मामले की स्थिति को लेकर उनकी अलग व्याख्या है। उनका तर्क है कि जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है, वह अभी प्रारंभिक स्तर पर था और उसे लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हुई थीं। इसी आधार पर पार्टी ने आयोग से फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया है। वहीं  ऐसे मामलों में आयोग सभी दस्तावेजों और नियमों का गहराई से अध्ययन करने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकालता है। राज्यसभा चुनावों में नामांकन पत्रों की जांच एक बेहद महत्वपूर्ण चरण होता है। कई बार तकनीकी या कानूनी पहलुओं को लेकर विवाद उत्पन्न हो जाते हैं और ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय संबंधित चुनावी प्राधिकरणों द्वारा ही लिया जाता है। वर्तमान मामले में भी सभी पक्ष आयोग के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। फिलहाल किसी भी तरह की अटकलों से बचते हुए सभी की नजर चुनाव आयोग की अगली घोषणा पर टिकी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर राज्यसभा चुनाव से जुड़े अन्य राज्यों के घटनाक्रम भी चर्चा में हैं। झारखंड में एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को वैध माना गया है। वहां भी जांच प्रक्रिया के दौरान कुछ तकनीकी सवाल उठे थे, लेकिन बाद में संबंधित अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद नामांकन को स्वीकार कर लिया। इससे यह स्पष्ट होता है कि चुनावी प्रक्रिया में प्रत्येक दस्तावेज और कानूनी बिंदु की सावधानीपूर्वक जांच की जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में भी राजनीतिक दल अब आयोग के अंतिम निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सक्रियता बढ़ गई है और सभी दल अपने-अपने स्तर पर तैयारियों में जुटे हुए हैं। निर्वाचन आयोग के सामने प्रस्तुत तथ्यों और नियमों के आधार पर जो भी निर्णय आएगा, वह आगे की प्रक्रिया को तय करेगा। फिलहाल पूरे मामले में कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है और सभी पक्ष आयोग के निष्पक्ष निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में आयोग का निर्णय केवल एक उम्मीदवार या एक दल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भविष्य में समान परिस्थितियों के लिए भी एक संदर्भ बनता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 17:29:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने SIR को माना वैध, कहा- EC अपने अधिकार क्षेत्र में काम कर रहा</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार समेत कई राज्यों में वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, विपक्षी दलों की याचिकाओं पर फैसला]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/supreme-court-accepted-sir-as-legitimate-and-said-ec-is/article-54283"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/supreme-court-sir-verdict.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) की ओर से कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि इसे सिर्फ इसलिए गैरकानूनी नहीं माना जा सकता क्योंकि यह सामान्य प्रक्रिया से अलग है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया ऐसा नहीं कहा जा सकता कि चुनाव आयोग ने अपने संवैधानिक और कानूनी अधिकारों से बाहर जाकर यह प्रक्रिया शुरू की है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी बिहार सहित कई राज्यों में चल रही SIR प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सामने आई। इस मामले में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR), पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) समेत कई संगठनों और विपक्षी नेताओं ने याचिकाएं दायर की थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं में आरजेडी सांसद मनोज झा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल, सांसद पप्पू यादव और आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह समेत कई नेता शामिल हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को चुनौती देते हुए आरोप लगाया था कि SIR के जरिए बड़ी संख्या में लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले भी बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हालांकि कोर्ट ने यह जरूर कहा था कि वह बाद में यह तय करेगा कि चुनाव आयोग को इस तरह का विशेष पुनरीक्षण अभियान चलाने का अधिकार है या नहीं। अब कोर्ट ने साफ संकेत दिए हैं कि आयोग के अधिकार क्षेत्र को लेकर तत्काल कोई असंवैधानिकता नहीं दिखती। कोर्ट के फैसला सुरक्षित रखने के बाद बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल में यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। वहीं उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों में यह अभी जारी है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>चुनाव आयोग का पक्ष</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग ने अदालत में SIR का बचाव करते हुए कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना उसका संवैधानिक दायित्व है। आयोग के अनुसार मतदाता सूची को अपडेट रखना और फर्जी या दोहराए गए नाम हटाना जरूरी प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग की ओर से पेश वकीलों ने दलील दी कि SIR के दौरान केवल चुनावी उद्देश्यों के लिए मतदाताओं का सत्यापन किया जा रहा है। यह प्रक्रिया किसी की कानूनी नागरिकता तय करने के लिए नहीं है। आयोग ने कहा कि मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नामों को हटाना जरूरी था ताकि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बिहार में क्या हुआ</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बिहार में SIR प्रक्रिया 24 जून 2025 को शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य फर्जी, दोहराए गए और स्थानांतरित मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को अपडेट करना था। निर्वाचन आयोग ने 1 अक्टूबर 2025 को बिहार की फाइनल वोटर लिस्ट जारी की थी। इसके बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या लगभग 6 प्रतिशत घटकर 7.42 करोड़ रह गई। अंतिम सूची से 69.29 लाख नाम हटाए गए, जबकि 21.53 लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 22.34 लाख मतदाता मृत पाए गए। करीब 36.44 लाख लोग दूसरे स्थानों पर शिफ्ट हो चुके थे, जबकि 6.85 लाख लोगों के नाम दो जगह दर्ज मिले। फाइनल सूची में पटना जिले में मतदाताओं की संख्या बढ़ी, जबकि सारण जिले में बड़ी संख्या में नाम हटे। इससे SIR प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आधार को लेकर भी निर्देश</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आधार कार्ड को लेकर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। कोर्ट ने कहा था कि आधार पहचान का दस्तावेज है, नागरिकता का नहीं। इसके बाद आयोग को निर्देश दिया गया कि आधार को भी मतदाता सत्यापन के लिए मान्य दस्तावेजों की सूची में शामिल किया जाए। पहले बिहार SIR में 11 दस्तावेज मान्य थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद आधार को 12वें दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 May 2026 11:52:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फलता सीट पर बड़ा उलटफेर, TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने लिया नाम वापस</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की फलता सीट पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव से नाम वापस लिया। 21 मई को दोबारा मतदान की तैयारी, राजनीतिक हलचल तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upset-on-phalta-seat-tmc-candidate-jahangir-khan-withdrew/article-53781"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-falta-seat-tmc-jahangir-khan-elections-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर से हलचल मच गई है। खास खबर ये है कि दक्षिण </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">24<span lang="hi" xml:lang="hi"> परगना जिले की फलता विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (</span>TMC) <span lang="hi" xml:lang="hi">के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया है। इस कदम के बाद इलाके में राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है। कहा जा रहा है कि जहांगीर ने अपने समर्थकों से कहा कि वह फलता के लोगों के हित और क्षेत्र की शांति के लिए ऐसा कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थानीय स्तर पर इस मामले ने और भी तूल पकड़ा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उन्होंने ये कहा कि वह नहीं चाहते कि इलाके में कोई तनाव या टकराव बढ़े। उनके बयान पर प्रतिक्रिया भी आ रही है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत फैसला बता रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कुछ इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देख रहे हैं। फलता सीट को लेकर पहले से ही जो विवाद चल रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब इस नए घटनाक्रम ने उसे और संवेदनशील बना दिया है। सूत्र बताते हैं कि नाम वापसी की प्रक्रिया और इसके पीछे की स्थितियों को लेकर अब तक पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चुनावी प्रक्रिया भी लगातार बदल रही है। शिकायतों के बाद इस सीट पर मतदान से जुड़ी अनियमितताओं का मुद्दा चुनाव आयोग तक पहुंचा था। कुछ जगहों पर आरोप था कि मतदाताओं पर दबाव डाला गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद मामले की जांच हुई। इसी बीच </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को दोबारा मतदान की योजना बनाई जा रही है और </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को नतीजे आने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त कदम उठाए जाने की चर्चा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि कोई गड़बड़ी न हो।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब उम्मीदवार के हटने के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की बातें हो रही हैं। स्थानीय लोग इस घटनाक्रम से हैरान हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि चुनावी माहौल पहले से ही कड़ा था और सभी पार्टियाँ अपनी पूरी ताकत लगा रही थीं। अचानक नाम वापसी ने मुकाबले की दिशा को प्रभावित किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आधिकारिक तौर पर स्थिति अभी साफ नहीं है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में पश्चिम बंगाल की मौजूदा सत्ता और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं हो रही हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर विभिन्न पक्षों से बयान आ रहे हैं और माहौल पूरी तरह चुनावी चर्चाओं में डूबा हुआ है। स्थानीय लोग अब देख रहे हैं कि आगे इस सीट पर मुकाबला किस दिशा में जाएगा और क्या दोबारा मतदान के बाद हालात सामान्य हो पाएंगे।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:31:35 +0530</pubDate>
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                <title>फलता री-पोलिंग से पहले TMC उम्मीदवार जहांगीर खान को HC से बड़ी राहत, 25 मई तक गिरफ्तारी पर रोक</title>
                                    <description><![CDATA[फलता री-पोलिंग से पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को कलकत्ता हाई कोर्ट से राहत मिली। 25 मई तक गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-relief-to-tmc-candidate-jahangir-khan-from-hc-before/article-53708"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/falta-seat-re-polling-tmc-jahangir-khan-calcutta-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर री-पोलिंग से पहले सियासी हलचल और बढ़ गई है। तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान को कलकत्ता हाई कोर्ट से काफी राहत मिली है। अदालत ने ये साफ कर दिया है कि </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">25</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मई तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। लेकिन कोर्ट ने ये भी बताया कि उन्हें जांच में पूरी मदद करनी होगी और चुनाव आयोग के सभी निर्देशों का पालन करना जरूरी रहेगा। फलता री-पोलिंग को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और अब हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद यहां चर्चा और तेज हो गई है। सोमवार दोपहर ये मामला सुर्खियों में आया</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब टीएमसी उम्मीदवार ने तत्काल सुनवाई की मांग की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहांगीर खान ने अदालत में कहा कि उन पर लगातार राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है और उनके खिलाफ कई झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बात ये है कि फलता सीट पर चुनाव प्रचार अब अपने अंतिम दौर में है। इसी बीच</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गिरफ्तारी की आशंका को लेकर जहांगीर खान ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनकी ओर से वरिष्ठ वकील किशोर दत्ता ने न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य के सामने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर कोई बहुत गंभीर मामला सामने आता है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तो जांच एजेंसियां अदालत को इसकी जानकारी दे सकती हैं। लेकिन फिलहाल</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, 25</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"> मई तक गिरफ्तारी से राहत रहेगी।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि री-पोलिंग से ठीक पहले उम्मीदवार को राहत मिलना चुनावी समीकरणों पर असर डाल सकता है। दूसरी तरफ</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विपक्ष लगातार टीएमसी पर हमले कर रहा है</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि सत्ताधारी दल इसे राजनीतिक प्रताड़ना बता रहा है। सूत्रों के अनुसार</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहांगीर खान ने अपनी याचिका में कहा कि गिरफ्तारी का डर उनके चुनाव प्रचार और राजनीतिक गतिविधियों को प्रभावित कर रहा था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फलता विधानसभा सीट पर </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">21 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मई को दोबारा मतदान कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने पहले ही दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान कई बूथों पर ईवीएम गड़बड़ी और मतदान प्रक्रिया को लेकर मिली शिकायतों के बाद री-पोलिंग का आदेश दिया था। आयोग के निर्देश के मुताबिक</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">क्षेत्र के सभी </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">285 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मतदान केंद्रों पर सुबह सात से शाम पांच बजे तक मतदान होगा। सहायक बूथ भी इसमें शामिल रहेंगे। प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए कहा गया है। ऐसा बताया जा रहा है कि इस बार हर बूथ पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी ताकि कोई विवाद न हो। मतगणना </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">24 </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मई को होगी। वहीं</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जहांगीर खान पहले भी चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक आईपीएस अजय पाल शर्मा को लेकर दिए गए अपने बयानों की वजह से विवादों में रह चुके हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 17:18:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली-महाराष्ट्र समेत 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू होगा SIR, जानिए पूरी तारीखें</title>
                                    <description><![CDATA[चुनाव आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान शुरू करने की घोषणा की। जानिए सत्यापन और वोटर लिस्ट की पूरी तारीखें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/it-will-start-in-19-states-and-union-territories-including/article-53354"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t154538.096.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देशभर में मतदाता सूची को अपडेट करने और उसे और भी सटीक बनाने की प्रक्रिया अब तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>SIR <span lang="hi" xml:lang="hi">के तीसरे चरण की घोषणा कर दी है। इस बार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। आयोग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लगभग 36.73 करोड़ मतदाता इस प्रक्रिया में शामिल होंगे। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची में मौजूद गड़बड़ियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डुप्लीकेट नामों और फर्जी प्रविष्टियों को हटाने पर खास ध्यान दिया जाएगा। राज्यों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं और यह कार्य मई से सितंबर 2026 तक विभिन्न चरणों में पूरा किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चुनाव आयोग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस चरण में ओडिशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिजोरम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्किम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मणिपुर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अरुणाचल प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हरियाणा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेलंगाना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पंजाब</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेघालय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">महाराष्ट्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झारखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नागालैंड और त्रिपुरा शामिल हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस बार इस कार्यक्रम को जनगणना के हाउस लिस्टिंग अभियान के साथ जोड़ा गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि दोनों कार्यों में कोई टकराव न हो। प्रारंभिक चरण में ओडिशा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मिजोरम</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिक्किम और मणिपुर में 30 मई से 28 जून तक घर-घर सत्यापन होगा। इसके बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 6 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी जाएगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया गया है कि महाराष्ट्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्नाटक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">झारखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मेघालय और दिल्ली जैसे बड़े राज्यों में यह प्रक्रिया जून के अंत से शुरू होकर अक्टूबर तक चलेगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि तीसरे चरण खत्म होने के बाद हिमाचल प्रदेश</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरे देश में </span>SIR <span lang="hi" xml:lang="hi">का काम पूरा हो जाएगा। इन क्षेत्रों में मौसम और जनगणना के दूसरे चरण को देखते हुए अलग से कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। चुनाव आयोग के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस बार बूथ स्तर पर निगरानी और फील्ड वेरिफिकेशन को और मजबूत किया गया है। लगभग 3.94 लाख बूथ लेवल ऑफिसर यानी </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">घर-घर जाकर जानकारी जुटाएंगे। उनके साथ राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट भी मौजूद रहेंगे। आयोग ने सभी दलों से कहा है कि हर बूथ पर अपने एजेंट तैनात करें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस चरण में महाराष्ट्र सबसे बड़ा राज्य होगा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां लगभग 9.86 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। यहां करीब 98 हजार </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">और लगभग 97 हजार </span>BLA <span lang="hi" xml:lang="hi">तैनात किए जाएंगे। कर्नाटक में 5.55 करोड़</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आंध्र प्रदेश में 4.16 करोड़ और तेलंगाना में 3.39 करोड़ मतदाता इस अभियान में भाग लेंगे। दिल्ली में भी करीब 1.48 करोड़ वोटरों का सत्यापन होगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">आयोग का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी योग्य नागरिक का नाम छूट न जाए और फर्जी या डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकें। पिछले दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं के लिए यह अभियान चलाया गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें लाखों </span>BLO <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>BLA <span lang="hi" xml:lang="hi">ने भाग लिया था। अब तीसरे चरण की तैयारियां भी राज्यों में शुरू हो गई हैं और स्थानीय प्रशासन को जरूरी निर्देश भेजे जा चुके हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 16:40:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>बंगाल चुनाव 2026: ममता बनर्जी ने 74 विधायकों के टिकट काटे, भबानीपुर में सुवेंदु से सीधा मुकाबला</title>
                                    <description><![CDATA[TMC ने 291 सीटों पर उम्मीदवार उतारे; महिलाओं, युवाओं और जमीनी नेताओं पर फोकस, कई राज्यों में चुनावी सरगर्मी तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bengal-elections-2026-mamata-banerjee-cuts-tickets-of-74-mlas/article-48368"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/international-(29).jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Mamata Banerjee</span></span> ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उम्मीदवारों की सूची जारी की। पार्टी ने कुल 294 में से 291 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं, जबकि 3 सीटें सहयोगी दल को दी गई हैं।</p>
<p>सबसे अहम फैसला 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काटने का रहा, जो कुल का लगभग एक-तिहाई है। इसके अलावा 15 विधायकों की सीटें बदली गई हैं। इस कदम को पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर बदलाव और एंटी-इनकम्बेंसी को साधने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>भबानीपुर बना हाई-प्रोफाइल मुकाबला</strong></h5>
<p>मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस बार भबानीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगी, जहां उनका मुकाबला भाजपा नेता <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Suvendu Adhikari</span></span> से होगा। सुवेंदु अधिकारी वही नेता हैं जिन्होंने 2021 के चुनाव में नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को हराया था। ऐसे में यह सीट इस बार सबसे चर्चित मुकाबलों में शामिल हो गई है।</p>
<p>ममता बनर्जी ने भाजपा पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी को “मैदान में आकर मुकाबला करना चाहिए” और कृत्रिम संकट पैदा करने से बचना चाहिए।</p>
<h5><strong>उम्मीदवारों में संतुलन की रणनीति</strong></h5>
<p>TMC की सूची में इस बार सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। पार्टी ने 52 महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि 47 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। 40 वर्ष से कम उम्र के 42 उम्मीदवारों को मौका देकर युवा चेहरों को आगे लाने की कोशिश की गई है।</p>
<p>इसके अलावा 95 उम्मीदवार अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से हैं। खास बात यह है कि पार्टी ने इस बार सेलिब्रिटी उम्मीदवारों से दूरी बनाई है और जमीनी कार्यकर्ताओं पर भरोसा जताया है।</p>
<h5><strong>अन्य राज्यों में भी चुनावी हलचल</strong></h5>
<p>देश के अन्य राज्यों में भी चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। केरल में कांग्रेस ने 55 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने 25 उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। तमिलनाडु में सहयोगी दलों ने अपने-अपने घोषणापत्र जारी कर दिए हैं।</p>
<p>असम में चुनाव से पहले कांग्रेस सांसद के इस्तीफे और आयकर विभाग द्वारा 24x7 कंट्रोल रूम बनाए जाने जैसी घटनाएं चुनावी माहौल को और संवेदनशील बना रही हैं।</p>
<h5><strong>चुनाव आयोग की सख्ती</strong></h5>
<p>चुनाव आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं। पश्चिम बंगाल में 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला किया गया है और देशभर में 1,100 से अधिक पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में मुकाबला मुख्य रूप से TMC और भाजपा के बीच रहेगा। ममता बनर्जी अगर इस बार जीत दर्ज करती हैं तो वह लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बना सकती हैं।</p>
<p>वहीं, भाजपा राज्य में सत्ता परिवर्तन की कोशिश में पूरी ताकत झोंक रही है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में चुनावी बयानबाजी और रणनीति दोनों और तेज होने की संभावना है।</p>
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                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 10:10:20 +0530</pubDate>
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