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                <title>Public Safety - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Public Safety RSS Feed</description>
                
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                <title>बिलासपुर करंट हादसे पर हाईकोर्ट सख्त, बिजली विभाग से मांगा विस्तृत जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[तीन लोगों की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान, हाईकोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था, इलेक्ट्रिक फेंसिंग और रोकथाम नीति पर मांगा शपथपत्र।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/high-court-strict-on-bilaspur-current-accident-demands-detailed-answer/article-58077"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bilaspur-news-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की मौत के मामले ने अब न्यायपालिका का भी ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस गंभीर घटना पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मीडिया रिपोर्ट को जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के मैनेजिंग डायरेक्टर और राज्य के ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि राज्य में बिजली व्यवस्था की निगरानी, रखरखाव और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्थाएं लागू हैं तथा भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य के कई हिस्सों में खेतों, फार्महाउसों और निजी परिसरों के आसपास बिजली प्रवाहित फेंसिंग लगाने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। कई लोग अपनी फसल, पशुओं या संपत्ति की सुरक्षा के लिए अवैध रूप से बिजली युक्त तारों का उपयोग करते हैं, लेकिन इसकी चपेट में आने से अनजान लोगों की जान चली जाती है। अदालत ने माना कि यह केवल व्यक्तिगत लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए इस तरह की घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी व्यवस्था होना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने यह भी कहा कि वर्तमान में ऐसे मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर दिए जाते हैं, लेकिन केवल एफआईआर दर्ज कर देना पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता। यदि लगातार एक जैसी घटनाएं दोहराई जा रही हैं, तो इसका अर्थ है कि रोकथाम के लिए बनाई गई व्यवस्थाएं पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। अदालत ने सरकार और बिजली विभाग से पूछा है कि क्या ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कोई स्पष्ट नीति, दिशा-निर्देश या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू है। यदि नहीं, तो इसे तैयार करने और लागू करने की समय-सीमा भी बताई जाए। हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस मामले में CSPDCL के मैनेजिंग डायरेक्टर को भी औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया जाए। साथ ही ऊर्जा विभाग के सचिव और बिजली कंपनी से विस्तृत शपथपत्र मांगा गया है। अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि बिजली ढांचे का निरीक्षण कितनी नियमितता से किया जाता है, जर्जर तारों और खुले विद्युत स्रोतों की पहचान और मरम्मत की क्या व्यवस्था है तथा लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही कैसे तय की जाती है। मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जिस घटना के आधार पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया, वह बिलासपुर जिले के कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव की है। यहां करंट लगने से पूर्व सरपंच और उनके दो बेटों की दर्दनाक मौत हो गई थी। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का माहौल बन गया था। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले को जनहित से जुड़ा मानते हुए स्वतः सुनवाई शुरू की। अदालत का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि पूरे समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। पिछले दो महीनों में बिलासपुर जिले में करंट लगने की अलग-अलग घटनाओं में आठ लोगों की जान जा चुकी है। इनमें कई मामले खेतों के आसपास लगे बिजली प्रवाहित तारों या जर्जर विद्युत लाइनों से जुड़े बताए गए हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने बिजली सुरक्षा व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पुराने और ढीले बिजली तार लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अदालत ने अपने अवलोकन में यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग का खतरा केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। कई बार घरेलू पशु और वन्यजीव भी इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा देते हैं। इसलिए यह विषय मानव सुरक्षा के साथ-साथ पशु संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन से भी जुड़ा हुआ है। अदालत ने संकेत दिया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस संबंध में व्यापक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को प्रभावी रूप से रोका जा सके। पूरे मामले पर राज्य सरकार और बिजली विभाग की ओर से विस्तृत जवाब का इंतजार है। अदालत के निर्देशों के बाद अब यह स्पष्ट होगा कि बिजली सुरक्षा को लेकर वर्तमान व्यवस्था कितनी प्रभावी है और भविष्य में किन सुधारात्मक कदमों की योजना बनाई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>उज्जैन में दो गायों की मौत के बाद बस में तोड़फोड़, आग से वाहन जलकर खाक</title>
                                    <description><![CDATA[पंथ पिपलाई के पास हादसे के बाद ग्रामीणों में आक्रोश, यात्रियों को सुरक्षित उतारने के बाद बस में आग लगी, पुलिस जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/after-the-death-of-two-cows-in-ujjain-the-bus/article-58068"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ujjain-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन-इंदौर मार्ग पर सोमवार रात एक सड़क हादसे के बाद हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। पंथ पिपलाई क्षेत्र में बलराम जाट ढाबे के पास उज्जैन की ओर जा रही एक यात्री बस की टक्कर सड़क पर बैठी दो गायों से हो गई। हादसे में दोनों गायों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए और आक्रोश जताने लगे। स्थिति बिगड़ती देख सबसे पहले बस में मौजूद सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया। इसके बाद बस पर पथराव किया गया, जिससे उसके कई शीशे टूट गए। कुछ ही देर बाद बस में आग लग गई और देखते ही देखते पूरा वाहन आग की चपेट में आ गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। राहगीरों और स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस तथा फायर ब्रिगेड को सूचना दी। आग इतनी तेज थी कि कुछ ही समय में बस का बड़ा हिस्सा जलकर खाक हो गया। दमकल की टीम ने मौके पर पहुंचकर काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय बस में सवार सभी यात्री सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए थे, इसलिए किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। हालांकि बस को भारी नुकसान पहुंचा है।हादसा उस समय हुआ जब बस उज्जैन की ओर जा रही थी। सड़क पर बैठी दो गायें अचानक बस की चपेट में आ गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद क्षेत्र में मौजूद लोगों में नाराजगी फैल गई। मौके पर मौजूद लोगों ने बस को रोक लिया और घटना का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां भीड़ बढ़ गई। कुछ लोगों ने बस पर पत्थर फेंके, जिससे उसके कांच टूट गए। इसके बाद बस में आग लगने की घटना हुई। आग लगने के कारणों को लेकर फिलहाल अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया कि दो गायों की मौत के बाद बस को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आई है। वहीं, आग लगने के कारणों की भी जांच की जा रही है। शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट की भी जताई गई है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य जुटाए गए हैं और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आग लगने की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी। घटना के बाद कुछ समय के लिए उज्जैन-इंदौर मार्ग पर यातायात भी प्रभावित रहा। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और भीड़ को शांत कराया। इसके बाद क्षतिग्रस्त बस को सड़क से हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन के अनुसार सड़क पर मवेशियों की मौजूदगी कई बार दुर्घटनाओं का कारण बनती रही है। घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आ सके। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आग किन परिस्थितियों में लगी। संबंधित विभागों की रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:37:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स की पाइपलाइन में भीषण आग, 15 लोग झुलसे, रेल सेवा प्रभावित</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल के हल्दिया में नेफ्था पाइपलाइन में विस्फोट के बाद लगी आग रिहायशी इलाके तक पहुंची, कई ट्रेनें रद्द और कुछ का संचालन बदला गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/major-fire-in-haldia-petrochemicals-pipeline-15-people-burnt-rail/article-57412"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/haldia-fire.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर जिले के हल्दिया में सोमवार देर रात बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स की नेफ्था सप्लाई पाइपलाइन में हुए विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई, जिसकी चपेट में आसपास का रिहायशी इलाका भी आ गया। हादसे में कम से कम 15 लोग झुलस गए, जिनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि दूर-दूर तक धुएं का गुबार दिखाई देता रहा।  यह हादसा सोमवार देर रात करीब 2:45 बजे हुआ। आग सबसे पहले हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स की नेफ्था पाइपलाइन में दिखाई दी और कुछ ही समय में उसने आसपास के क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। पाइपलाइन के नजदीक स्थित हल्दिया नगर पालिका के वार्ड-13 के चिरंजीबपुर इलाके में कई मकानों तक आग और गर्मी का असर पहुंचा। स्थानीय लोगों ने धमाके जैसी तेज आवाज सुनने के बाद बाहर निकलकर देखा तो इलाके में आग की ऊंची लपटें उठ रही थीं। इसके बाद तुरंत पुलिस, दमकल और प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी गई। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। आग में झुलसे सभी घायलों को तत्काल हल्दिया सब-डिविजनल अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें से पांच लोगों की हालत को देखते हुए उन्हें तमलुक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल रेफर किया गया। चिकित्सकों के अनुसार दो घायलों की स्थिति गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। अन्य घायलों का भी अस्पताल में उपचार चल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><br />आग पर काबू पाने के लिए दमकल विभाग की 12 से अधिक गाड़ियों को मौके पर लगाया गया। कई घंटों की मशक्कत के बाद भी आग पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो सकी थी। दमकल कर्मियों ने आसपास के क्षेत्रों को खाली कराकर आग को और फैलने से रोकने का प्रयास किया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर आसपास के लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील भी की। हादसे का असर रेलवे संचालन पर भी पड़ा। जिस स्थान पर पाइपलाइन में आग लगी, उसके बेहद पास से हल्दिया-दुर्गाचक रेल लाइन गुजरती है। आग की वजह से रेलवे की ओवरहेड बिजली लाइन और अन्य उपकरण प्रभावित हुए, जिसके चलते रेल सेवाओं को तत्काल रोक दिया गया। दक्षिण पूर्व रेलवे ने बताया कि सुरक्षा कारणों से हल्दिया और दुर्गाचक के बीच ट्रेनों का संचालन अस्थायी रूप से बंद किया गया है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार हल्दिया-हावड़ा लोकल ट्रेन को रद्द कर दिया गया, जबकि हावड़ा-हल्दिया लोकल का संचालन केवल दुर्गाचक तक किया गया। इसके अलावा हल्दिया-पांसकुड़ा लोकल ट्रेन को हल्दिया के बजाय दुर्गाचक से शुरू किया गया। रेलवे की तकनीकी टीमें क्षतिग्रस्त ओवरहेड उपकरणों की मरम्मत में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही ट्रेनों का संचालन सामान्य किया जाएगा। घटना के कारणों को लेकर फिलहाल जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि आग किस वजह से लगी, इसका अभी स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच की जा रही है। दूसरी ओर हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स ने भी घटना पर आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने हादसे में लोगों के घायल होने पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रभावित लोगों और स्थानीय प्रशासन को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।<br /><br /><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंपनी के अनुसार प्रारंभिक जानकारी से यह संकेत मिला है कि घटना पाइपलाइन के उस हिस्से के आसपास हुई, जहां पहले भी नेफ्था चोरी की गतिविधियों की आशंका जताई जाती रही है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। कंपनी ने यह भी बताया कि नेफ्था अत्यधिक ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन होता है और इसके संपर्क में जरा सी चिंगारी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यही वजह है कि कंपनी समय-समय पर स्थानीय लोगों को पाइपलाइन के आसपास किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या अवैध गतिविधियों से दूर रहने की चेतावनी देती रही है। सुरक्षा मानकों का पालन करना ऐसे औद्योगिक क्षेत्रों में बेहद आवश्यक माना जाता है। नेफ्था कच्चे तेल के शोधन के दौरान प्राप्त होने वाला हल्का तरल हाइड्रोकार्बन मिश्रण है, जिसका उपयोग मुख्य रूप से पेट्रोकेमिकल उद्योग में कच्चे माल के रूप में किया जाता है। यह अत्यधिक ज्वलनशील होता है और पेट्रोल जैसी तेज गंध रखता है। इसी कारण इसके भंडारण और परिवहन के दौरान विशेष सुरक्षा उपाय अपनाए जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फायर सेफ्टी पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से पूछा- टेंडर नहीं, जमीन पर कब दिखेगा काम</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फायर सुरक्षा व्यवस्था पर जताई नाराजगी, सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी, जिला प्रशासन ने भी जांच अभियान तेज किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/6a3e422ac159a/article-57027"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-high-court-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">लखनऊ में हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड के बाद देशभर में फायर सेफ्टी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य की अग्निशमन व्यवस्था पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि केवल टेंडर जारी करने या योजनाओं की जानकारी देने से काम नहीं चलेगा। लोगों की सुरक्षा के लिए जमीन पर वास्तविक काम दिखाई देना चाहिए। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद से जुड़े सभी टेंडरों की मौजूदा स्थिति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत की इस टिप्पणी के बाद प्रशासनिक व्यवस्था भी सक्रिय नजर आने लगी है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि वर्षों से फायर सेफ्टी को मजबूत बनाने की बातें हो रही हैं, लेकिन कई योजनाएं अब भी कागजों तक सीमित दिखाई देती हैं। यदि टेंडर जारी हो चुके हैं तो यह भी बताया जाना चाहिए कि वर्क ऑर्डर कब जारी हुए और काम किस स्तर तक पहुंचा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जा सकती। दरअसल यह मामला तब चर्चा में आया जब हाल ही में मोपका क्षेत्र में स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और आसपास की दुकानों में आग लगने की घटना सामने आई। इस घटना के बाद मीडिया रिपोर्टों में राज्य की फायर सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को प्रमुखता से उठाया गया। इन्हीं खबरों का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। अदालत ने राज्य शासन से शपथपत्र के साथ विस्तृत जवाब भी तलब किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि राज्य में करीब 72.70 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीद प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 16 नए फायर स्टेशन स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है। हालांकि कई जिलों में अब तक फायर स्टेशन के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी है, जिसके कारण परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अदालत ने इस जवाब पर असंतोष जताते हुए कहा कि केवल योजनाओं और टेंडर की जानकारी पर्याप्त नहीं है। आम लोगों को सुरक्षा तभी मिलेगी जब ये परियोजनाएं धरातल पर दिखाई देंगी। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि वर्ष 2020 में कई नए फायर स्टेशन बनाने की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन वर्षों बाद भी कई स्थानों पर जमीन का चयन नहीं हो पाया। राज्य के कुछ जिलों में भूमि उपलब्ध करा दी गई है और वहां निर्माण के लिए धनराशि भी जारी की जा चुकी है, जबकि कई अन्य जिलों में अब तक जमीन आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। अदालत ने इस देरी पर भी चिंता जताई और शासन से स्पष्ट समयसीमा बताने को कहा है। हाईकोर्ट की सख्ती के बीच जिला प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा कदम उठाया है। प्रशासन ने शहर के सभी कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल, व्यावसायिक परिसरों और बहुमंजिला इमारतों की व्यापक जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए जिला स्तर और अनुविभाग स्तर पर अलग-अलग जांच समितियों का गठन किया गया है। प्रत्येक समिति की अध्यक्षता संबंधित एसडीएम करेंगे, जबकि पुलिस, नगर निगम, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और अन्य विभागों के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशासन ने इन समितियों को दस दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित संस्थानों में फायर एनओसी है या नहीं, आपातकालीन निकासी मार्ग मौजूद हैं या नहीं और आग लगने की स्थिति में लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं या नहीं। यदि किसी भवन में गंभीर लापरवाही पाई जाती है तो पहले सुधार के निर्देश दिए जाएंगे और निर्देशों का पालन नहीं होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में नगर निगम ने शहर के छह कोचिंग संस्थानों की जांच भी की थी। जांच में एक संस्थान में प्रवेश और निकास के लिए केवल एक ही रास्ता पाया गया, जिसके बाद उसे सील कर दिया गया। अन्य पांच संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा ताकि किसी भी संस्थान में सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो। जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि संबंधित विभागों के पास शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों, मॉल, होटल और बहुमंजिला इमारतों की पूरी और अद्यतन सूची उपलब्ध नहीं है। ऐसे में प्रशासन ने फायर विभाग के रिकॉर्ड और फायर ऑडिट को जांच का मुख्य आधार बनाने का फैसला किया है। जिन संस्थानों ने अब तक फायर एनओसी नहीं ली है या जिनका फायर ऑडिट लंबित है, वहां विशेष रूप से निरीक्षण किया जाएगा। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि अग्नि सुरक्षा से जुड़े मामलों में केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं है। आम लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को इसके लिए प्रभावी कदम उठाने होंगे। मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी, जब राज्य सरकार को फायर उपकरणों की खरीद, नए फायर स्टेशन निर्माण और अन्य लंबित कार्यों की अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 15:02:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायगढ़ में सड़क पर निर्माण सामग्री फैलाने वालों पर निगम की कार्रवाई, 11 हजार का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[विशेष अभियान में 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त, 10 से अधिक लोगों को दी गई चेतावनी और समझाइश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/corporations-action-against-those-spreading-construction-material-on-the-road/article-56397"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nagar-nigam-action.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायगढ़ शहर में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भवन निर्माण सामग्री फैलाकर यातायात बाधित करने वालों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद निगम की टीम ने विशेष अभियान चलाकर अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान सड़क पर निर्माण मलबा और अन्य सामग्री फैलाने वाले लोगों पर कुल 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया, जबकि 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त की गई। निगम की इस कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप की स्थिति देखी गई जो लंबे समय से सार्वजनिक स्थानों का उपयोग निजी निर्माण कार्यों के लिए कर रहे थे। नगर निगम की सफाई और प्रवर्तन टीम सुबह से शहर के विभिन्न इलाकों में निरीक्षण के लिए निकली थी। अभियान के दौरान जूटमिल, कबीर चौक, छातामुड़ा, विजयपुर चौक सहित कई प्रमुख मार्गों की जांच की गई। निरीक्षण के समय कई जगहों पर सड़क के किनारे और बीच हिस्सों में निर्माण सामग्री, रेत, गिट्टी और सीएंडडी वेस्ट यानी कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट फैला हुआ मिला। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा था बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी परेशानी पैदा हो रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार शहर में पिछले कुछ समय से सड़क पर निर्माण सामग्री डालने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। कई स्थानों पर लोगों ने भवन निर्माण कार्य के दौरान मलबा और सामग्री सीधे सड़क पर रख दी थी, जिससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई थी। ऐसे हालात में दुर्घटना होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निगम ने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया। कार्रवाई के दौरान जूटमिल, कबीर चौक और छातामुड़ा क्षेत्र में गुरुजी आटा चक्की के पास सड़क पर सीएंडडी वेस्ट फैला हुआ पाया गया। इस मामले में संबंधित व्यक्ति पर 1 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। वहीं सुदर्शन देवांगन द्वारा सड़क पर निर्माण सामग्री फैलाकर सार्वजनिक मार्ग को प्रभावित करने पर 3 हजार रुपए की पेनाल्टी वसूली गई। इसी तरह डीएम साव के खिलाफ सड़क पर निर्माण मलबा फैलाने के मामले में 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। विजयपुर चौक क्षेत्र में रवि सोनी द्वारा सड़क पर निर्माण सामग्री रखकर आवागमन बाधित किए जाने पर 2 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया। अभियान के दौरान निगम अधिकारियों ने केवल जुर्माना लगाने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी। संबंधित लोगों को मौके पर ही सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से मलबा हटाने के निर्देश भी दिए गए। कई स्थानों पर निगम की टीम ने स्वयं कार्रवाई करते हुए निर्माण सामग्री को हटवाया और जब्ती की कार्रवाई की। पूरे अभियान के दौरान कुल 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त की गई, जिसे निगम के कब्जे में लिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान 10 से अधिक लोगों को समझाइश भी दी गई। अधिकारियों ने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि सड़क, नाली और सार्वजनिक स्थानों पर निर्माण सामग्री डालना नियमों का उल्लंघन है। इससे आम लोगों को परेशानी होती है और शहर की स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित होती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि दोबारा ऐसी स्थिति पाई गई तो और अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम का कहना है कि शहर के कई इलाकों में भवन निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग सुविधा के लिए सड़क और सार्वजनिक जगहों का उपयोग सामग्री रखने के लिए कर लेते हैं। हालांकि यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनती है। कई बार सड़क पर फैली रेत, गिट्टी और मलबे के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। वहीं बड़े वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि शहर को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिन क्षेत्रों से शिकायतें मिलेंगी वहां नियमित निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना और जब्ती जैसी कार्रवाई लगातार की जाएगी। निगम प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सामग्री अपने निजी परिसर में रखें और सार्वजनिक स्थानों का उपयोग न करें। निगम का मानना है कि नागरिकों के सहयोग से ही शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। इसलिए लोगों को नियमों का पालन करना चाहिए और ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए जिनसे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो या दुर्घटनाओं का खतरा बढ़े। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:13:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>इंदौर में आवारा कुत्ते का आतंक</title>
                                    <description><![CDATA[बाणगंगा और सांवेर रोड क्षेत्र में एक खूंखार आवारा कुत्ते ने मचाया आतंक, अस्पताल से लेकर गांव और कॉलेज तक लोगों पर हमला, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/stray-dog-terror-in-indore/article-55078"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-dog-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर शहर में शुक्रवार को एक ऐसी घटना सामने आई जिसने लोगों को दहशत में डाल दिया। शहर के बाणगंगा क्षेत्र और सांवेर रोड इलाके में एक आवारा कुत्ते ने महज 10 घंटे के भीतर 42 लोगों को काटकर घायल कर दिया। घायलों में दो महिला डॉक्टर, नर्स, अस्पताल कर्मचारी, सुरक्षा गार्ड, छात्र और ग्रामीण शामिल बताए जा रहे हैं। घटना के बाद पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया और लोग अपने घरों से निकलने में भी सतर्कता बरतते नजर आए। सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि कुत्ते का आतंक अस्पताल परिसर से शुरू होकर गांवों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच गया। लगभग आठ किलोमीटर के दायरे में हुए हमलों ने प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह सिलसिला शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे शुरू हुआ। बताया जा रहा है कि आवारा कुत्ता सबसे पहले अरबिंदो अस्पताल परिसर में पहुंचा। यहां उसने अचानक लोगों पर हमला करना शुरू कर दिया। अस्पताल परिसर में मौजूद मरीज, उनके परिजन, नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टर और सुरक्षा कर्मी उसके निशाने पर आ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुत्ता बेहद आक्रामक व्यवहार कर रहा था और सामने आने वाले हर व्यक्ति पर झपट रहा था। कुछ ही देर में अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। लोग खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागते दिखाई दिए। कई लोग कमरों और भवनों के भीतर छिप गए जबकि कुछ ने डंडों और अन्य वस्तुओं की मदद से खुद का बचाव करने की कोशिश की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल में हमला करने के बाद कुत्ता कैंसर अस्पताल की दिशा में पहुंचा और वहां भी कई लोगों को घायल कर दिया। हमले में दो महिला डॉक्टरों के साथ नर्सें, मरीज, मेडिकल छात्र और अटेंडर्स भी शामिल बताए जा रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अस्पताल प्रशासन को तत्काल चिकित्सा सहायता की व्यवस्था बढ़ानी पड़ी। घायल लोगों को तुरंत एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए और जिन मरीजों के घाव गंभीर श्रेणी के पाए गए, उन्हें विशेष जीवन रक्षक सीरम भी दिया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार कई घायलों की स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें निगरानी में रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अस्पताल क्षेत्र से निकलने के बाद यह कुत्ता ग्राम बरदरी और रेवती रेंज की ओर पहुंच गया। यहां उसने ग्रामीणों पर हमला किया और कई लोगों को घायल कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों को आवारा कुत्तों की समस्या के बारे में सूचना दी थी, लेकिन समय रहते कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। हालात ऐसे बन गए कि लोगों को खुद ही लाठियां लेकर कुत्ते से बचाव करना पड़ा। कई जगह ग्रामीण समूह बनाकर निगरानी करते रहे ताकि बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखा जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना यहीं नहीं रुकी। बताया जा रहा है कि कुत्ता करीब आठ किलोमीटर दूर स्थित रेनेसां कॉलेज परिसर तक पहुंच गया, जहां उसने तीन अन्य लोगों को घायल कर दिया। कॉलेज परिसर में अचानक हुए हमले के बाद छात्रों के बीच भी दहशत फैल गई। कुछ समय के लिए परिसर में सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार किसी को समझ नहीं आ रहा था कि कुत्ता किस दिशा से आएगा और किस पर हमला करेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के बाद नगर निगम की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और पीड़ितों का आरोप है कि समय पर कार्रवाई होती तो इतने लोग घायल नहीं होते। देर शाम नगर निगम की डॉग स्क्वाड टीम सक्रिय हुई और अरबिंदो अस्पताल तथा आसपास के क्षेत्रों में अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार कुल 23 आवारा कुत्तों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया है ताकि आगे किसी प्रकार की घटना न हो। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमला करने वाला वही कुत्ता इनमें शामिल है या नहीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस घटना के बीच हाल ही में सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों को लेकर की गई टिप्पणी भी चर्चा में है। सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ सप्ताह पहले कहा था कि देशभर में बढ़ रही डॉग बाइट की घटनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्थानीय निकायों को नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर होम की व्यवस्था मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया था। न्यायालय ने यह भी कहा था कि रेबीज संक्रमित कुत्तों को खुले में वापस नहीं छोड़ा जाना चाहिए। बावजूद इसके कई शहरों में इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इंदौर की यह घटना एक बार फिर शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को सामने लेकर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल रेस्क्यू अभियान चलाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि दीर्घकालिक समाधान के लिए नसबंदी, टीकाकरण और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना होगा। शहर में घायल लोगों का इलाज जारी है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। वहीं स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:45:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर पुलिस का बड़ा अभियान: एक सप्ताह में 154 अपराधी जेल भेजे गए, वारंटियों और संदिग्धों पर कड़ी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य जोन पुलिस की विशेष मुहिम से अपराधियों में बढ़ा खौफ, कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए लगातार जारी रहेगा अभियान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-campaign-of-raipur-police-154-criminals-sent-to-jail/article-54865"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cgpsc-scam.jpg" alt=""></a><br /><p>रायपुर पुलिस कमिश्नरेट ने शहर में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक व्यापक विशेष अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत मध्य जोन पुलिस ने एक सप्ताह के भीतर 154 अपराधियों, वारंटियों और संदिग्ध गतिविधियों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई को राजधानी में अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>
<p>पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह अभियान पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) उमेश गुप्ता के निर्देशन में संचालित किया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य फरार वारंटियों को पकड़ना, आदतन अपराधियों की गतिविधियों पर नियंत्रण रखना तथा असामाजिक तत्वों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई करना था। अभियान के दौरान पुलिस ने विभिन्न थाना क्षेत्रों में लगातार दबिश देकर अपराधियों की पहचान की और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की।</p>
<h5><span><strong>61 वारंटियों की गिरफ्तारी</strong></span></h5>
<p>विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने लंबे समय से फरार चल रहे 61 स्थायी और गिरफ्तारी वारंटियों को गिरफ्तार किया। इन आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस का कहना है कि कई आरोपी लंबे समय से कानून की पकड़ से बाहर थे, लेकिन लगातार निगरानी और सूचना तंत्र की मदद से उन्हें गिरफ्तार करने में सफलता मिली। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि फरार वारंटियों की गिरफ्तारी से कानून के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत होता है और अपराधियों में भय का वातावरण बनता है। इसी उद्देश्य से आगे भी ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे।</p>
<h5><span><strong>93 संदिग्धों पर भी हुई कार्रवाई</strong></span></h5>
<p>अभियान के दौरान केवल वारंटियों तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रही। सार्वजनिक शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस ने 93 संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई की। इन लोगों पर विभिन्न संदिग्ध गतिविधियों में शामिल होने का संदेह था। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 170 के तहत इन व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया। पुलिस का कहना है कि यह कदम भविष्य में संभावित अपराधों को रोकने और समाज में शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।</p>
<h5><span><strong>विभिन्न थाना क्षेत्रों में चला अभियान</strong></span></h5>
<p>मध्य जोन के अंतर्गत आने वाले कई थाना क्षेत्रों में एक साथ कार्रवाई की गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार सबसे अधिक कार्रवाई गंज और तेलीबांधा थाना क्षेत्रों में देखने को मिली। थाना-वार आंकड़ों के अनुसार कोतवाली क्षेत्र में 19 लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई। गोलबाजार थाना क्षेत्र में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया। मौदहापारा में 10, गंज में 36, सिविल लाइन में 25, तेलीबांधा में 34 और देवेंद्र नगर थाना क्षेत्र में 12 लोगों के खिलाफ कार्रवाई दर्ज की गई। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पुलिस ने शहर के विभिन्न हिस्सों में समन्वित तरीके से अभियान चलाकर अपराधियों पर दबाव बनाया है।</p>
<h5><span><strong>अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल</strong></span></h5>
<p>रायपुर पुलिस का मानना है कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ लगातार कार्रवाई ही अपराध नियंत्रण का सबसे प्रभावी तरीका है। विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने न केवल अपराधियों की धरपकड़ की बल्कि स्थानीय स्तर पर निगरानी तंत्र को भी मजबूत किया। अधिकारियों के अनुसार शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए पुलिस नियमित रूप से संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। इसके अलावा अपराध रिकॉर्ड रखने वाले व्यक्तियों की गतिविधियों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है।</p>
<h5><span><strong>डीसीपी उमेश गुप्ता ने क्या कहा</strong></span></h5>
<p>पुलिस उपायुक्त उमेश गुप्ता ने बताया कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ चलाया गया यह अभियान भविष्य में भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल गिरफ्तारी करना नहीं बल्कि अपराध की संभावनाओं को कम करना और नागरिकों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले किसी भी व्यक्ति के प्रति नरमी नहीं बरती जाएगी। अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि शहर में शांति और सुरक्षा बनी रहे। डीसीपी ने यह भी कहा कि पुलिस और आम जनता के सहयोग से अपराध नियंत्रण को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। नागरिकों से भी अपील की गई है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।</p>
<h5><span><strong>शहरवासियों में बढ़ा सुरक्षा का भरोसा</strong></span></h5>
<p>पुलिस की इस कार्रवाई के बाद शहर के कई क्षेत्रों में लोगों ने राहत महसूस की है। लगातार हो रही गिरफ्तारी और निगरानी से अपराधियों के मन में भय का माहौल बनने की उम्मीद है। पुलिस का मानना है कि ऐसे अभियान न केवल अपराधियों को कानून के दायरे में लाते हैं बल्कि आम लोगों के बीच सुरक्षा की भावना को भी मजबूत करते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:59:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को मिले 60 नए SI, थानों में शुरू होगी व्यावहारिक ट्रेनिंग</title>
                                    <description><![CDATA[बेसिक प्रशिक्षण पूरा होने के बाद शहर के विभिन्न थानों में पदस्थापना, कानून और पुलिसिंग की बारीकियां सीखेंगे नए अधिकारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/raipur-police-commissionerate-gets-60-new-si-police-stations-practical/article-54735"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/_new-si-training.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर पुलिस कमिश्नरेट को पुलिस व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 60 नए उप निरीक्षक (एसआई) मिले हैं। बेसिक ट्रेनिंग पूरी करने के बाद इन सभी अधिकारियों को अब व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए शहर के विभिन्न थानों में पदस्थ किया गया है। इस संबंध में रायपुर पुलिस कमिश्नर की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। नए अधिकारियों की तैनाती ऐसे समय में की गई है जब पुलिस विभाग लगातार कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने और अपराध नियंत्रण के लिए अपने संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस मुख्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार इन नए उप निरीक्षकों को शहर के अलग-अलग थानों में भेजा गया है, जहां वे अनुभवी अधिकारियों की देखरेख में कार्य करेंगे। प्रशिक्षण अवधि के दौरान उन्हें थाना संचालन, अपराध अनुसंधान, शिकायतों के निराकरण, कानून-व्यवस्था प्रबंधन और जनता से जुड़े विभिन्न मामलों की व्यवहारिक जानकारी दी जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अकादमिक प्रशिक्षण के बाद यह चरण किसी भी नए अधिकारी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यहीं से उसे वास्तविक पुलिसिंग की समझ विकसित होती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जारी आदेश के मुताबिक शहर के कई प्रमुख थानों में तीन-तीन उप निरीक्षकों की पदस्थापना की गई है। इनमें खम्हारडीह, खमतराई, कबीर नगर, गोलबाजार, मोहदापारा, कोतवाली, सिविल लाइन, टिकरापारा, पंडरी, पुरानी बस्ती, राजेंद्र नगर, डीडी नगर, उरला, तेलीबांधा, आमानाका, आजाद चौक और गंज थाना शामिल हैं। इन थानों को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहां विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा होता है और नए अधिकारियों को व्यापक अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसके अलावा गुढ़ियारी, मुजगहन, सरस्वती नगर और देवेंद्र नगर थानों में दो-दो एसआई को प्रशिक्षण के लिए तैनात किया गया है। पुलिस विभाग का मानना है कि विभिन्न क्षेत्रों में कार्य करने से अधिकारियों को अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिलेगा। इससे भविष्य में वे किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना अधिक प्रभावी तरीके से कर सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रशिक्षण के दौरान नए उप निरीक्षकों को केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें अपराध की जांच प्रक्रिया, घटनास्थल निरीक्षण, साक्ष्य संग्रह, केस डायरी तैयार करने, न्यायालयीन प्रक्रियाओं और कानून की व्याख्या से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी जाएंगी। इसके साथ ही साइबर अपराध, महिला अपराध, सड़क सुरक्षा और सामुदायिक पुलिसिंग जैसे विषयों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। बदलते समय के साथ अपराधों का स्वरूप भी बदल रहा है, इसलिए नए अधिकारियों को आधुनिक पुलिसिंग तकनीकों की जानकारी देना आवश्यक माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह व्यावहारिक प्रशिक्षण किसी भी नए अधिकारी के करियर की मजबूत नींव तैयार करता है। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर विभिन्न मामलों पर काम करने का अवसर मिलेगा। इससे वे न केवल कानून की बारीकियां समझ सकेंगे बल्कि निर्णय लेने की क्षमता भी विकसित कर पाएंगे। जनता से सीधे संवाद और शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया को समझना भी इस प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर पुलिस कमिश्नरेट में 60 नए एसआई की तैनाती को विभाग के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से बढ़ते कार्यभार और पुलिस बल की जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त अधिकारियों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नए अधिकारियों के आने से थानों में कार्यों का बेहतर विभाजन हो सकेगा और लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए केवल संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देना भी उतना ही जरूरी है। इसी उद्देश्य से व्यावहारिक प्रशिक्षण को पुलिस सेवा का अहम हिस्सा बनाया गया है। प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी भविष्य में विभिन्न जिम्मेदार पदों पर कार्य करेंगे, इसलिए शुरुआती दौर में उन्हें व्यापक अनुभव प्रदान करना आवश्यक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शहर के नागरिकों को भी इस कदम से लाभ मिलने की उम्मीद है। नए अधिकारियों की तैनाती से थानों में उपलब्ध पुलिस बल बढ़ेगा, जिससे शिकायतों के समाधान में तेजी आ सकती है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण और जनसुनवाई जैसे कार्यों में भी सुधार की संभावना जताई जा रही है। पुलिस विभाग का लक्ष्य है कि प्रशिक्षित और सक्षम अधिकारियों के माध्यम से नागरिकों को बेहतर और प्रभावी पुलिस सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। सभी नए उप निरीक्षक अपने-अपने निर्धारित थानों में रिपोर्ट कर चुके हैं और जल्द ही उनका व्यावहारिक प्रशिक्षण शुरू होगा। आने वाले महीनों में यह प्रशिक्षण उनकी कार्यशैली और पेशेवर दक्षता को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:16:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>धार सड़क हादसा: पिकअप-स्कॉर्पियो टक्कर में 16 मजदूरों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[धार सड़क हादसा में ओवरलोड पिकअप पलटकर स्कॉर्पियो से भिड़ी, 15 घायल; केंद्र और राज्य सरकार ने मुआवजे का ऐलान किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/dhar-road-accident-16-laborers-killed-in-pickup-scorpio-collision/article-52384"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(72).jpg" alt=""></a><br /><p>एमपी के धार जिले में गुरुवार रात बड़ा दिल दहलाने वाला सड़क हादसा हो गया है  इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर मजदूरों से भरी एक पिकअप वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकराई और पलटने के बाद सामने से आ रही स्कॉर्पियो से जा भिड़ी। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों में कई की हालत गंभीर है, जिन्हें इंदौर रेफर किया गया है। सूत्रों के अनुसार, हादसा रात करीब 8:30 बजे चिकलिया स्थित एक पेट्रोल पंप के पास हुआ।</p>
<p>प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के मुताबिक, पिकअप वाहन में क्षमता से अधिक करीब 50 मजदूर सवार थे। वाहन के असंतुलित होने के बाद वह कई बार पलटा और फिर दूसरी ओर जाकर स्कॉर्पियो से टकरा गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कई मजदूर वाहन के नीचे दब गए, जिससे मौके पर ही कई लोगों की जान चली गई।</p>
<h5><strong>कैसे हुआ हादसा</strong></h5>
<p>मजदूर खेत में काम करने के बाद लौट रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग के कारण चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा।धार पुलिस के मुताबिक, पिकअप पहले डिवाइडर से टकराई, फिर पलटते हुए दूसरी लेन में पहुंची और स्कॉर्पियो से टकरा गई। हादसे के बाद हाईवे पर अफरा-तफरी मच गई और चीख-पुकार गूंजने लगी।स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया।</p>
<h5><strong>अस्पताल में हालात</strong></h5>
<p>इतनी बड़ी संख्या में घायलों के एक साथ पहुंचने से जिला अस्पताल में व्यवस्थाएं चरमरा गईं। कई घायलों को जमीन पर लिटाकर प्राथमिक उपचार देना पड़ा।गंभीर रूप से घायल 10 लोगों को इंदौर रेफर किया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। अस्पताल प्रशासन ने अतिरिक्त संसाधन जुटाकर स्थिति को संभालने की कोशिश की।</p>
<h5><strong>सरकार की प्रतिक्रिया</strong></h5>
<p>इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से 2-2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50-50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की।</p>
<p>वहीं, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी घटना को हृदयविदारक बताया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये, गंभीर घायलों को 1-1 लाख और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपये देने के निर्देश दिए हैं।सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन को घायलों के बेहतर इलाज और राहत कार्यों के लिए तत्काल निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 10:36:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंदौर में ट्रैफिक पुलिस की सख्ती, मोबाइल पर 118 चालान और 72 लाइसेंस सस्पेंड</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने मोबाइल इस्तेमाल कर ड्राइविंग करने वालों पर बड़ी कार्रवाई, चौराहों पर चेकिंग अभियान तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strictness-of-traffic-police-in-indore-118-challans-and-72/article-52360"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(71).jpg" alt=""></a><br /><p>शहर में सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने बड़ा अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर वाहन चलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की गई। पुलिस ने अलग-अलग चैराहों पर चेकिंग के दौरान 118 वाहन चालकों के चालान बनाए, जबकि 72 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिए गए। यह कार्रवाई मंगलवार को शहर के प्रमुख ट्रैफिक पॉइंट्स पर की गई।</p>
<p>ट्रैफिक पुलिस का यह अभियान उन लोगों पर केंद्रित है जो वाहन चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करते हैं या उसका उपयोग करते हैं। इसे सड़क दुर्घटनाओं का एक बड़ा कारण माना जा रहा है।</p>
<h5><strong>चैराहों पर सख्त चेकिंग</strong></h5>
<p>इंदौर के प्रमुख चैराहों पर ट्रैफिक पुलिस ने विशेष चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान दोपहिया और चारपहिया वाहनों की जांच की गई। कई वाहन चालक मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए पकड़े गए, जिन पर तत्काल चालानी कार्रवाई की गई।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान लगातार जारी रहेगा ताकि शहर में सड़क हादसों को कम किया जा सके और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।</p>
<h5><strong>लाइसेंस पर सख्त कार्रवाई</strong></h5>
<p>ट्रैफिक नियमों के गंभीर उल्लंघन को देखते हुए 72 वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई उन मामलों में की गई जहां चालक बार-बार नियम तोड़ते पाए गए या मोबाइल इस्तेमाल करते हुए गंभीर लापरवाही दिखाई गई।प्रशासन का मानना है कि इस तरह की सख्ती से लोगों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और सड़क सुरक्षा मजबूत होगी।</p>
<h5><strong>सड़क सुरक्षा पर जोर</strong></h5>
<p>डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उनके अनुसार, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न केवल चालक के लिए बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए भी खतरा पैदा करता है।उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग के प्रति जागरूक करना भी है।</p>
<h5><strong>जनता से अपील</strong></h5>
<p>ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग बिल्कुल न करें। नियमों का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। पुलिस ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में चेकिंग अभियान और तेज किया जाएगा और नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।इंदौर ट्रैफिक पुलिस की इस कार्रवाई को शहर में सड़क सुरक्षा सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strictness-of-traffic-police-in-indore-118-challans-and-72/article-52360</link>
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                <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:07:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रीवा में ट्रैफिक सुधार अभियान तेज, जयस्तम्भ चैराहे पर खुद उतरे एसपी, नियम तोड़ने वालों पर लिया एक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए एसपी शैलेन्द्र सिंह चौहान जयस्तम्भ चौराहे पर उतरे। नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई, शहर में अभियान तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/traffic-improvement-campaign-intensified-in-rewa-sp-himself-descended-on/article-52285"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-sp-traffic-action-jaistambh-chowk.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रीवा शहर में बिगड़ती यातायात व्यवस्था पर लगाम कसने के लिए पुलिस प्रशासन ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र सिंह चैहान सुबह अचानक शहर के सबसे व्यस्त जयस्तम्भ चैराहे पर पहुंचे और मौके पर ट्रैफिक व्यवस्था की कमान संभाल ली। एसपी ने चैराहे पर खड़े होकर न केवल यातायात की स्थिति का जायजा लिया, बल्कि खुद ट्रैफिक को नियंत्रित कर पुलिसकर्मियों को मौके पर निर्देश भी दिए। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">एसपी चैहान ने ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में जयस्तम्भ चैराहे पर जाम नहीं लगना चाहिए। उन्होंने कहा कि चैराहे की निगरानी केवल चालान तक सीमित न रहे, बल्कि यातायात को सुचारू बनाए रखना प्राथमिक जिम्मेदारी है। ट्रैफिक स्टाफ को वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित रखने, दबाव बढ़ने पर तुरंत डायवर्जन लागू करने और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ मौके पर कार्रवाई करने को कहा गया।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, शहर में बढ़ते जाम, गलत दिशा में वाहन संचालन और यातायात नियमों की अनदेखी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। एसपी की मौजूदगी के दौरान बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, नो-एंट्री उल्लंघन और रॉन्ग साइड चलने वाले वाहन चालकों पर निगरानी बढ़ाई गई। कई लोगों को मौके पर रोका गया, समझाइश दी गई और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई भी की गई।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">एसपी की अचानक मौजूदगी से कुछ देर के लिए चैराहे पर अफरा-तफरी की स्थिति बनी, लेकिन पुलिस की सक्रियता बढ़ते ही यातायात सामान्य होने लगा। पुलिस ने इस दौरान दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों की सघन जांच भी की। बिना हेलमेट वाहन चला रहे लोगों को रोका गया, सीट बेल्ट नहीं लगाने वालों को चेतावनी दी गई, जबकि कई मामलों में चालान भी बनाए गए। नो-एंट्री में घुसने वाले वाहनों पर विशेष निगरानी रखी गई। </span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">एसपी शैलेन्द्र सिंह चैहान ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि बेहतर रीवा ट्रैफिक व्यवस्था केवल पुलिस की सख्ती से संभव नहीं है, इसके लिए आम लोगों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने वाहन चालकों से हेलमेट, सीट बेल्ट और निर्धारित लेन का पालन करने की अपील की।</span></p><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले दिनों में शहर के अन्य प्रमुख चैराहों और बाजार क्षेत्रों में भी इसी तरह का विशेष ट्रैफिक अभियान चलाया जाएगा। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई एक दिन की औपचारिकता नहीं होगी, बल्कि लगातार निगरानी और प्रवर्तन के जरिए शहर में यातायात अनुशासन लागू कराया जाएगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 17:35:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>रीवा के गोविंदगढ़ जंगलों में आग, मानवीय लापरवाही की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[रीवा जंगल आग पर काबू, वन विभाग और फायर ब्रिगेड की संयुक्त कार्रवाई जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-action-on-cattle-smuggling-in-durg-4-accused-arrested/article-52084"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rewa-news-(9)-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य प्रदेश के रीवा जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र में स्थित छुहिया घाटी और विंध्य पर्वत श्रृंखला के जंगलों में आग लगने की घटना सामने आई है। रीवा जंगल आग की इस घटना ने वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी, जहां आग को बुझाने में टीमों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। जानकारी के मुताबिक, एक दिन पहले आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन बाद में यह दोबारा भड़क उठी। अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक जांच में मानवीय लापरवाही की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल वन विभाग, नगर परिषद की फायर ब्रिगेड और स्थानीय लोगों के सहयोग से आग पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है और स्थिति सामान्य बताई जा रही है।</p>
<p>घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और राहत कार्य शुरू किया गया। स्थानीय समाजसेवियों की मदद से आग को फैलने से रोकने के प्रयास किए गए। प्रशासन ने बताया कि फिलहाल प्रभावित क्षेत्र में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि आग दोबारा न भड़के।</p>
<h5><strong>राहत कार्य में चुनौती</strong></h5>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, जंगल का दुर्गम भूगोल और तेज हवा राहत कार्यों में बड़ी बाधा बनी। आग धीरे-धीरे पहाड़ी इलाकों में फैल रही थी, जिससे उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा था।</p>
<p>गोविंदगढ़ नगर परिषद की फायर ब्रिगेड टीम और स्थानीय स्वयंसेवकों ने लगातार प्रयास कर शिकारघा पहाड़ी के पास के हिस्से को सुरक्षित कर लिया। इसके बाद अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी आग को काबू करने का काम तेज किया गया।</p>
<h5><strong>धुएं का असर</strong></h5>
<p>वनाग्नि के चलते लंबे समय तक जंगल से धुआं उठता रहा, जिससे आसपास के क्षेत्रों की वायु गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका जताई गई। हालांकि अधिकारियों के अनुसार किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है।प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्थिति नियंत्रण में है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें सतर्क हैं।</p>
<h5><strong>जांच जारी</strong></h5>
<p>इस मामले में डीएफओ लवकेश निरापुरे ने बताया कि पहले आग बुझा दी गई थी, लेकिन बाद में उसी क्षेत्र में दोबारा आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया।</p>
<p>अधिकारियों के मुताबिक, प्रारंभिक तौर पर मानवीय लापरवाही की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मामले की जांच की जा रही है और कारणों का पता लगाने का प्रयास जारी है।</p>
<h5><strong>बढ़ती वनाग्नि चिंता</strong></h5>
<p>गर्मियों के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सूखी घास, तेज तापमान और मानवीय गतिविधियां ऐसे मामलों की प्रमुख वजह बनती हैं।</p>
<p>रीवा जंगल आग जैसी घटनाएं पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं, हालांकि इस बार समय रहते नियंत्रण पा लेने से बड़े नुकसान से बचाव हो गया।</p>
<p>वन विभाग ने प्रभावित क्षेत्र में लगातार गश्त बढ़ा दी है और निगरानी तेज कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।रीवा जंगल आग की इस घटना के बाद प्रशासन सतर्क है और यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि दोबारा ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>विंध्य/रीवा</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-action-on-cattle-smuggling-in-durg-4-accused-arrested/article-52084</link>
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                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 12:43:30 +0530</pubDate>
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