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                <title>Devotional News - दैनिक जागरण</title>
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                <title>महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन</title>
                                    <description><![CDATA[पंचामृत पूजन के बाद भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की मालाओं से हुआ बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-flood-of-devotion-in-the-bhasma-aarti/article-56785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि की गूंज सुनाई देने लगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के रात्रिकालीन श्रृंगार को उतारा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का जलाभिषेक किया गया। परंपरानुसार दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन संपन्न हुआ। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परंपरा के अनुसार नंदी पूजन के बाद ही मुख्य आरती और पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल को पंचामृत अर्पित किया गया और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की निगाहें गर्भगृह की ओर टिकी रहीं, जहां हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और सुगंधित द्रव्यों से सजाया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। विभिन्न रंगों के ताजे पुष्पों से तैयार मालाओं से भगवान का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दे रहा था। गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर चंदन का लेप और भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य नजर आया। आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती की विशेषता यह है कि यह देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते हर दिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। सुबह होने से पहले ही श्रद्धालु कतारों में लग गए थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भस्म आरती का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और भगवान शिव को भस्म अति प्रिय मानी जाती है। इसी कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में भी देखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता देशभर में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी भस्म आरती का आकर्षण कम नहीं होता। बुधवार को संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। भोर की पहली किरणों के साथ जब भस्म आरती संपन्न हुई तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो चुका था। श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, लेकिन उनके मन में भस्म आरती का दिव्य और अलौकिक दृश्य लंबे समय तक बना रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>संकष्टी चतुर्थी 2026: 4 जून को रखा जाएगा गणेश जी का पावन व्रत</title>
                                    <description><![CDATA[भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए श्रद्धालु 4 जून 2026 को संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/sankashti-chaturthi-2026-the-holy-fast-of-lord-ganesha-will/article-54815"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sankashti-chaturthi-2026-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और प्रत्येक माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। जून 2026 की संकष्टी चतुर्थी 4 जून, गुरुवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने और भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि देशभर में लाखों श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर विघ्नहर्ता गणेश की आराधना करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पंचांग के अनुसार चतुर्थी तिथि का आरंभ 3 जून 2026 को रात 9 बजकर 21 मिनट पर होगा और इसका समापन 4 जून 2026 को रात 11 बजकर 30 मिनट पर होगा। चूंकि उदया तिथि के आधार पर व्रत और पर्व निर्धारित किए जाते हैं, इसलिए संकष्टी चतुर्थी का व्रत 4 जून को रखा जाएगा। इस दिन भक्त पूरे दिन उपवास रखकर शाम को भगवान गणेश की पूजा करते हैं और चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संकष्टी चतुर्थी को कई स्थानों पर संकटहारा चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। संस्कृत भाषा में "संकष्टी" का अर्थ होता है संकटों से मुक्ति और "चतुर्थी" का अर्थ चौथा दिन। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली परेशानियां, बाधाएं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। भक्तों का विश्वास है कि गणपति बप्पा की कृपा से कठिन से कठिन कार्य भी सफल हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना सहित देश के कई राज्यों में इस व्रत को विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। महाराष्ट्र में संकष्टी चतुर्थी का उत्साह अधिक देखने को मिलता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। कई गणेश मंदिरों में भजन, कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">व्रत के दिन श्रद्धालु प्रातःकाल स्नान करके भगवान गणेश का स्मरण करते हैं और व्रत का संकल्प लेते हैं। पूरे दिन उपवास रखा जाता है। कुछ लोग निर्जला व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार का सेवन करते हैं। व्रत के दौरान सामान्य भोजन का त्याग किया जाता है। फल, दूध, साबूदाना, मूंगफली, आलू और अन्य व्रत में उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थ ग्रहण किए जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म की पवित्रता बनाए रखना भी आवश्यक माना गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शाम के समय भगवान गणेश की विशेष पूजा की जाती है। गणपति की प्रतिमा को दूर्वा घास, लाल फूल और चंदन अर्पित किया जाता है। दीपक जलाकर धूप और अगरबत्ती से पूजा की जाती है। इसके बाद गणेश मंत्रों और स्तोत्रों का पाठ किया जाता है। कई श्रद्धालु गणेश अथर्वशीर्ष, संकटनाशन स्तोत्र और वक्रतुंड महाकाय मंत्र का जाप भी करते हैं। पूजा के दौरान भगवान गणेश को मोदक, लड्डू और अन्य प्रिय भोग अर्पित किए जाते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संकष्टी चतुर्थी की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में चंद्र दर्शन का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यता है कि भगवान गणेश की पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन करके उन्हें अर्घ्य अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात ही व्रत का पारण किया जाता है। चंद्रमा की पूजा के दौरान जल, अक्षत, चंदन और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इससे व्रत पूर्ण माना जाता है और पूजा का संपूर्ण फल प्राप्त होता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक ग्रंथों में संकष्टी चतुर्थी व्रत को अत्यंत फलदायी बताया गया है। मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करते हैं, उन्हें भगवान गणेश की विशेष कृपा प्राप्त होती है। जीवन में आ रही आर्थिक, पारिवारिक और मानसिक परेशानियां दूर होने लगती हैं। कई दंपति संतान प्राप्ति की कामना से भी यह व्रत रखते हैं। भक्तों का विश्वास है कि गणेश जी सभी प्रकार के विघ्नों का नाश करते हैं और जीवन में शुभता का संचार करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विशेष बात यह है कि प्रत्येक माह आने वाली संकष्टी चतुर्थी का अपना अलग महत्व और व्रत कथा होती है। वर्ष भर में कुल 12 संकष्टी चतुर्थी आती हैं, जबकि अधिक मास होने पर इनकी संख्या 13 हो सकती है। हर माह भगवान गणेश के अलग स्वरूप और विशेष महिमा का वर्णन किया जाता है। यही कारण है कि यह व्रत पूरे वर्ष श्रद्धापूर्वक किया जाता है। 4 जून 2026 की संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की आराधना का एक महत्वपूर्ण अवसर है। श्रद्धालु इस दिन उपवास, पूजा और चंद्र दर्शन के माध्यम से गणपति बप्पा का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत जीवन के संकटों को दूर करने और सुख-समृद्धि प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:14:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोमवार उपाय: भगवान शिव की पूजा से मिलेगा सुख-समृद्धि का आशीर्वाद</title>
                                    <description><![CDATA[सोमवार के दिन शिव पूजा और विशेष उपाय करने से धन, स्वास्थ्य और मानसिक शांति प्राप्त होने की मान्यता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/monday-remedy-worshiping-lord-shiva-will-bless-you-with-happiness/article-52174"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/somvaar-ke-upay2.jpg" alt=""></a><br /><p>सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने और कुछ विशेष उपाय अपनाने से जीवन में सुख-समृद्धि, धन लाभ और मानसिक शांति प्राप्त होती है। शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत अर्पित करना बेहद शुभ फलदायी माना गया है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर और मंत्र जाप करके अपनी मनोकामनाएं पूरी करने की कामना करते हैं।</p>
<h5><span><strong>शिव पूजा का महत्व</strong></span></h5>
<p>धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सोमवार को भगवान शिव को प्रसन्न करना अपेक्षाकृत सरल माना जाता है। शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल अर्पित करने से जीवन की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सफेद चंदन, अक्षत और धतूरा चढ़ाना भी शुभ माना गया है।सुबह के समय ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और आत्मबल में वृद्धि होती है।</p>
<h5><span><strong>मुख्य उपाय </strong></span></h5>
<p><strong>स्वास्थ्य सुधार</strong><br />सोमवार को शिवलिंग पर जल, दूध, काले तिल और चावल अर्पित करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में राहत मिलने की मान्यता है।</p>
<p><strong>धन वृद्धि</strong><br />कच्चे दूध और गंगाजल मिश्रित जल अर्पित करना आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में सहायक माना जाता है। सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी और दूध का दान करना भी शुभ फल देता है।</p>
<p><strong>कर्ज से मुक्ति</strong><br />शिवलिंग पर जल में अक्षत मिलाकर अर्पित करने से कर्ज संबंधी परेशानियों से राहत मिल सकती है, ऐसा धार्मिक मान्यताओं में कहा गया है।</p>
<p><strong>सुख-समृद्धि</strong><br />शाम के समय शिवलिंग पर सफेद चंदन, अक्षत और धतूरा अर्पित कर घी का दीपक जलाना घर में सुख और शांति लाने वाला माना जाता है।</p>
<p><strong>शत्रु बाधा से राहत</strong><br />भोलेनाथ के समक्ष ‘ॐ शं शं शिवाय शं शं कुरु कुरु ॐ’ मंत्र का 11 बार जाप करने से विरोधियों से सुरक्षा मिलने की मान्यता है।</p>
<h5><span><strong>क्या न करें</strong></span></h5>
<p>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। शिवलिंग पर हल्दी अर्पित नहीं करनी चाहिए। जल चढ़ाते समय नारियल पानी का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा सोमवार को काले या नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचने की सलाह दी जाती है।सही विधि और मन से की गई पूजा ही सकारात्मक परिणाम देती है।</p>
<p>यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी उपाय धार्मिक आस्था पर आधारित हैं और व्यक्ति अपनी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार इन्हें अपनाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 09:59:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विशेष महत्व, रवि योग में साधना से बढ़ेगा आत्मबल</title>
                                    <description><![CDATA[भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए श्रद्धालु कर रहे पूजा-अर्चना; जानें सही विधि, मंत्र और शुभ समय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/worship-of-maa-chandraghanta-has-special-importance-on-the-third/article-48640"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/navratri-(7).jpg" alt=""></a><br /><p>चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार को मां चंद्रघंटा की पूजा पूरे देश में श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन साहस, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए विशेष माना जाता है। इस बार तीसरे नवरात्रि पर रवि योग का शुभ संयोग बनने से पूजा का महत्व और अधिक बढ़ गया है।</p>
<p>ज्योतिषीय गणना के अनुसार रवि योग देर रात 12:37 बजे से शुरू होकर अगले दिन सुबह 6:23 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में की गई पूजा को अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। मंदिरों और घरों में श्रद्धालु मां चंद्रघंटा की प्रतिमा स्थापित कर विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं।</p>
<p>धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत तेजस्वी और शक्तिशाली है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटी के आकार का होता है, जिससे उनका नाम पड़ा। सिंह पर विराजमान मां का यह रूप साहस, निर्भीकता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि उनकी पूजा से भय, चिंता और नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं।</p>
<p>पूजा विधि के तहत श्रद्धालु सुबह स्नान के बाद स्वच्छ स्थान पर पीला वस्त्र बिछाकर मां की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इसके बाद कलश स्थापना कर चंदन, रोली, हल्दी और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। मां को दूध से बनी मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है और अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।</p>
<p>मंत्र जाप को भी इस दिन विशेष महत्व दिया गया है। “ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” और “ऊं चंद्रघंटायै नमः” मंत्रों का 108 बार जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है। कई स्थानों पर श्रद्धालु पूरे दिन जप और भजन में लीन रहे।</p>
<p>धर्माचार्यों के अनुसार, पूजा के साथ आचरण की शुद्धता भी आवश्यक है। श्रद्धालुओं को दिनभर क्रोध, नकारात्मक सोच और विवाद से दूर रहने की सलाह दी जाती है। साथ ही कन्याओं को प्रसाद वितरित करना और पूजा के समय शंख या घंटी बजाना शुभ माना जाता है।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि नवरात्रि का यह दिन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक संतुलन का भी अवसर है। मां चंद्रघंटा की उपासना से आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन की बाधाओं को पार करने की शक्ति मिलती है।</p>
<p>फिलहाल देशभर में नवरात्रि के तीसरे दिन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में भी नवरात्रि के विभिन्न स्वरूपों के साथ यह धार्मिक उत्सव पूरे श्रद्धा भाव से जारी रहेगा।</p>
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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 09:40:57 +0530</pubDate>
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