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                <title>Breaking News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Breaking News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सरगुजा में दो भीषण सड़क हादसे, चार लोगों की मौत; मैनपाट में तीन युवकों ने गंवाई जान</title>
                                    <description><![CDATA[तेज रफ्तार दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन युवकों की मौत, नेशनल हाईवे-43 पर ट्रक की चपेट में आने से महिला की जान गई; पुलिस जांच में जुटी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/four-people-died-in-two-horrific-road-accidents-in-surguja/article-58490"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/surguja-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में शुक्रवार रात दो अलग-अलग सड़क हादसों ने चार परिवारों की खुशियां छीन लीं। जिले के मैनपाट क्षेत्र में तेज रफ्तार दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर में तीन युवकों की मौत हो गई, जबकि कुछ ही घंटों बाद नेशनल हाईवे-43 पर एक अज्ञात ट्रक की टक्कर से बाइक सवार महिला की जान चली गई। दोनों हादसों के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने दोनों मामलों में जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा रहा है। शुरुआती जांच में मैनपाट हादसे में तेज रफ्तार को प्रमुख वजह माना जा रहा है, जबकि हाईवे हादसे में ट्रक चालक की लापरवाही की आशंका जताई गई है। मृतकों की पहचान अर्जुन लोहार (23), विफल कुमार माझी (21), गुड्डू राम (22) और रीता एक्का (48) के रूप में हुई है। पुलिस ने शवों का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। इन घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p>पहला हादसा कमलेश्वरपुर थाना क्षेत्र के नर्मदापुर-बिजलहवा मुख्य मार्ग पर शुक्रवार रात करीब आठ बजे हुआ। पुलिस के अनुसार दो तेज रफ्तार बाइक आमने-सामने टकरा गईं। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं और सवार कई फीट दूर सड़क पर जा गिरे। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने का प्रयास किया, लेकिन लुंड्रा निवासी अर्जुन लोहार और सीतापुर के कोट गांव निवासी गुड्डू राम की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। तीसरे युवक विफल कुमार माझी को गंभीर हालत में पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया। परिजनों ने बताया कि विफल कुमार अपने दोस्त गुड्डू राम के साथ मैनपाट घूमने गया था और लौटते समय यह दर्दनाक हादसा हो गया। वहीं अर्जुन लोहार अपनी ससुराल नर्मदापुर जा रहा था। उसकी शादी करीब एक वर्ष पहले हुई थी और परिवार में उसकी अचानक मौत से मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर दोनों क्षतिग्रस्त बाइकों को जब्त कर लिया है। प्रारंभिक जांच में मौसम सामान्य होने की बात सामने आई है, इसलिए दुर्घटना की प्रमुख वजह तेज रफ्तार और नियंत्रण खोना माना जा रहा है। हालांकि पुलिस तकनीकी जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरी घटना की पड़ताल कर रही है।</p>
<p>दूसरा हादसा नेशनल हाईवे-43 पर सेदम बाजार के पास हुआ, जहां बाइक से घर लौट रहे दंपती को पीछे से आ रहे एक अज्ञात ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में देवरी निवासी 48 वर्षीय रीता एक्का की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति सुखन एक्का गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस के अनुसार दोनों सीतापुर से अपने घर लौट रहे थे, तभी तेज रफ्तार ट्रक ने उनकी बाइक को पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर के बाद चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर ट्रक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। लगातार हो रहे सड़क हादसों को देखते हुए पुलिस ने वाहन चालकों से सावधानी बरतने, निर्धारित गति सीमा का पालन करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की अपील की है।  सरगुजा जिले में एक ही रात चार लोगों की मौत ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भिलाई में नर्सिंग छात्रा की निर्मम हत्या, एकतरफा प्यार में युवक ने PG में घुसकर उतारा मौत के घाट</title>
                                    <description><![CDATA[नंबर ब्लॉक करने से नाराज आरोपी ने ऑनलाइन चाकू मंगवाया, पहले गला दबाया फिर किए कई वार; रायपुर से गिरफ्तार, पुलिस कर रही जांच।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/brutal-murder-of-a-nursing-student-in-bhilai-a-young/article-58489"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhilai-new.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भिलाई में एकतरफा प्यार की सनक ने एक 19 वर्षीय नर्सिंग छात्रा की जान ले ली। दुर्ग जिले के वैशाली नगर थाना क्षेत्र के रामनगर स्थित एक पीजी में रहने वाली खुशी साहू की शुक्रवार को बेरहमी से हत्या कर दी गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी पिंटू साहू लंबे समय से छात्रा को परेशान कर रहा था। युवती द्वारा उसका नंबर ब्लॉक किए जाने के बाद उसने हत्या की साजिश रची और रायपुर से भिलाई पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने पहले छात्रा का गला दबाया और जब वह बेहोश हो गई तो चाकू से उस पर कई वार किए। गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण छात्रा की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने आरोपी को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है और घटनास्थल पर ले जाकर सीन रिक्रिएट भी कराया। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और हत्या की पूरी साजिश का खुलासा पूछताछ के बाद किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आरोपी ने वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू पहले से ऑनलाइन मंगवाया था, जिससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार बेमेतरा निवासी खुशी साहू भिलाई में किराये के पीजी में रहकर निजी कॉलेज से फार्मेसी की पढ़ाई कर रही थी। पढ़ाई के साथ वह एक कैफे में पार्ट टाइम काम भी करती थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि बलौदाबाजार निवासी 24 वर्षीय पिंटू साहू काफी समय से खुशी के संपर्क में आने की कोशिश कर रहा था और उससे शादी करना चाहता था। युवती ने उसकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया और परेशान किए जाने से तंग आकर उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया। इसके बाद आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लगातार कॉल करता रहा। घटना वाले दिन भी उसने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने खुशी की सहेली को फोन किया और उसके बारे में जानकारी ली। सहेली ने बताया कि खुशी कमरे में है और उसके पास मोबाइल नहीं है। इसी जानकारी के बाद आरोपी सीधे पीजी पहुंच गया। उस समय खुशी की रूममेट बाथरूम में थी और खुशी कमरे में अकेली मौजूद थी। पुलिस के अनुसार कमरे में दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान आरोपी ने पहले खुशी का गला दबा दिया। जब वह विरोध नहीं कर सकी तो उसने अपने साथ लाए चाकू से पीठ, पेट और हाथ सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों पर करीब दस बार वार किए। हमले के दौरान आरोपी के हाथ में भी चोट आई। वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार हो गया और रायपुर की ओर निकल गया।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ देर बाद जब खुशी की सहेली बाथरूम से बाहर आई तो उसने कमरे का भयावह दृश्य देखा। खुशी खून से लथपथ फर्श पर पड़ी थी। उसने तुरंत मकान मालिक और आसपास मौजूद लोगों को सूचना दी। इसके बाद डायल-112 और पुलिस टीम मौके पर पहुंची। छात्रा को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि खुशी ने कुछ दिन पहले अपने भाई को बताया था कि एक युवक लगातार अलग-अलग नंबरों से फोन कर परेशान कर रहा है। परिवार के अनुसार आरोपी ने छात्रा के भाई को भी धमकी दी थी। इतना ही नहीं, जिस कैफे में खुशी काम करती थी वहां के संचालक को भी उसने धमकाया था और खुशी को नौकरी छोड़ने के लिए दबाव बना रहा था। पुलिस का कहना है कि आरोपी का व्यवहार लगातार आक्रामक होता जा रहा था और वह युवती पर शादी के लिए दबाव बना रहा था। जांच में यह भी पता चला कि वारदात में इस्तेमाल किया गया चाकू आरोपी ने ऑनलाइन खरीदा था। इससे पुलिस हत्या की पूर्व नियोजित साजिश के पहलू की भी जांच कर रही है। आरोपी को रायपुर से गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने उसे घटनास्थल पर ले जाकर पूरे घटनाक्रम का पुनर्निर्माण कराया। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और जल्द ही पूरे मामले का विस्तृत खुलासा किया जाएगा। पुलिस का कहना है कि आरोपी के खिलाफ हत्या सहित अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और उसे न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर एकतरफा प्रेम, पीछा करने और महिलाओं को लगातार परेशान किए जाने जैसे मामलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:50:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने पेट्रोल पर 13.18 रुपये और हाई-स्पीड डीजल पर 13.80 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। नई दरों के बाद पेट्रोल 310.71 और डीजल 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-and-diesel-again-expensive-in-pakistan-new-prices-implemented/article-58480"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pakistan-fuel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पाकिस्तान में आम लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिसके बाद 11 जुलाई से नई दरें लागू हो गई हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 13.18 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 13.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद देश में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 310.71 पाकिस्तानी रुपये और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर आम लोगों के साथ-साथ परिवहन, कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पाकिस्तान पहले से ही महंगाई और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में नई बढ़ोतरी से रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ने की संभावना भी बढ़ गई है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी इस वर्ष के उच्चतम स्तर से नीचे बनी हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 3 अप्रैल को हाई-स्पीड डीजल की कीमत 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जाता है। वहीं पेट्रोल की कीमत भी इसी अवधि में 458.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में तेजी का सिलसिला फरवरी के आखिर से शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों का इसका सीधा असर पड़ा। इसके बाद पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिला। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और आर्थिक आवश्यकताओं को देखते हुए ईंधन की नई कीमतें तय कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर घरेलू ईंधन दरों पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव भी ईंधन की लागत को प्रभावित करता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार संशोधन किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की ओर से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ हुए समझौतों और कर ढांचे में बदलाव को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। सरकार ने 1 जुलाई से क्लाइमेट सपोर्ट लेवी को बढ़ाकर 5 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर कर दिया है। हालांकि इसके साथ पेट्रोलियम लेवी में कुछ समायोजन भी किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर लगभग 80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी वसूली जा रही है, जबकि पेट्रोल पर 70 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी के साथ 5 रुपये प्रति लीटर क्लाइमेट सपोर्ट लेवी अलग से लागू है। इसके अलावा कस्टम ड्यूटी और अन्य शुल्क भी ईंधन की अंतिम कीमत में शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर कुल कर और शुल्क करीब 101 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाता है, जबकि पेट्रोल पर यह आंकड़ा लगभग 95 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर है। इनमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और अन्य नियामकीय शुल्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त केरोसिन और लाइट डीजल ऑयल पर भी अलग-अलग दरों से पेट्रोलियम लेवी वसूली जा रही है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के लिए राजस्व बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की शर्तों का पालन करने के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दतिया में धारा-163 लागू, बिना अनुमति सभा-जुलूस पर रोक; प्रशासन अलर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[टिकट विवाद के बाद हुए बवाल और हाईवे जाम की घटना के बाद प्रशासन ने पूरे दतिया अनुभाग में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिए हैं। बिना अनुमति प्रदर्शन, रैली और पांच से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/section-163-imposed-in-datia-ban-on-meetings-and-processions/article-58471"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-163.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए पूरे दतिया अनुभाग में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा-163 लागू कर दी है। यह आदेश 10 जुलाई की रात 9 बजे से प्रभावी हो गया है और अगले आदेश तक लागू रहेगा। प्रशासन का कहना है कि हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन, राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबे चक्का जाम और हिंसक घटनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। अधिकारियों के अनुसार उपचुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के उद्देश्य से प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। आदेश लागू होने के बाद अब बिना प्रशासन की अनुमति कोई भी सभा, जुलूस, रैली, धरना या प्रदर्शन आयोजित नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अनुविभागीय दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार सार्वजनिक स्थानों पर लाठी, तलवार, भाला, फरसा, चाकू या अन्य घातक हथियार लेकर चलने पर भी प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही एक स्थान पर पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना अनुमति लाउडस्पीकर, ध्वनि विस्तारक यंत्र या अन्य सार्वजनिक प्रसारण उपकरणों का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। सोशल मीडिया, पोस्टर, बैनर, नारे, भाषण या अन्य माध्यमों से ऐसी किसी भी सामग्री के प्रचार-प्रसार पर भी रोक रहेगी, जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने या कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका हो। अधिकारियों ने बताया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के पालन के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द बनाए रखना भी आवश्यक है। इसलिए हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। साथ ही राजनीतिक दलों और उनके कार्यकर्ताओं से भी चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपेक्षा जताई गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रशासन ने अपने आदेश में हाल ही में झांसी-ग्वालियर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए चक्का जाम का भी उल्लेख किया है। अधिकारियों के अनुसार 10 जुलाई की रात हुए प्रदर्शन के दौरान लगभग 15 से 20 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया था, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान कुछ स्थानों पर पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ की घटनाएं भी सामने आई थीं। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसलिए एहतियात के तौर पर प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए गए हैं। आदेश के तहत भारतीय निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। इसके अलावा मध्यप्रदेश संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 1994, मध्यप्रदेश कोलाहल नियंत्रण अधिनियम, 1985 और ध्वनि प्रदूषण (विनियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000 के प्रावधानों को भी प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। हालांकि यह आदेश पुलिस, होमगार्ड, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों, सीआरपीएफ और अन्य प्रशासनिक एवं न्यायिक अधिकारियों पर उनके शासकीय दायित्वों के निर्वहन के दौरान लागू नहीं होगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कहा कि दतिया विधानसभा उपचुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जा रही है। धारा-163 लागू होने के बाद जिले में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का बवाल, NH-44 जाम; पुलिस पर पथराव, एसपी-एएसपी समेत 6 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा की ओर से विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। एनएच-44 पर लंबा जाम लगा और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/narottam-mishra-supporters-create-ruckus-in-datia-stone-pelting-at/article-58468"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया में आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद शुक्रवार शाम से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देर रात और शनिवार तड़के हिंसक रूप ले बैठा। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 पर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात उस समय और बिगड़ गए जब पुलिस ने हाईवे खाली कराने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि पुलिस ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और अतिरिक्त बल तैनात किया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार शाम करीब छह बजे से बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र होने लगे थे। प्रशासन का कहना है कि तीन हजार से अधिक लोगों की भीड़ ने पहले बाजार बंद कराने का प्रयास किया और फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे दतिया के साथ-साथ आसपास के जिलों की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने कई बार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम समाप्त करने की अपील की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों के मुताबिक तड़के करीब चार बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई और पुलिस टीम पर पत्थर फेंके जाने लगे। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन पथराव जारी रहने पर अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध प्रदर्शन की वजह भारतीय जनता पार्टी द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया जाना बताया जा रहा है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी एक बार फिर उन्हें टिकट देगी। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन की तैयारी भी शुरू कर दी थी। जैसे ही पार्टी ने आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा की, समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई और वे सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान कुछ समर्थकों ने सड़क पर लेटकर विरोध जताया और पार्टी नेतृत्व से फैसला बदलने की मांग की। दूसरी ओर भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने दावा किया कि कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे और पूरी रात रामधुन गाकर पार्टी नेतृत्व से टिकट पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहे थे। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने सख्ती दिखाई, जिससे हालात बिगड़ गए। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और भीड़ द्वारा पहले हिंसक व्यवहार किया गया। इस बीच भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके वरिष्ठ नेता और अभिभावक हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और डॉ. मिश्रा का मार्गदर्शन उन्हें मिलता रहेगा। हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य कराया जा रहा है, जबकि पुलिस संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्र का नया निर्देश: सरकारी कार्यक्रमों में पहले वंदे मातरम्, फिर होगा जन-गण-मन</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को तय प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक शब्द, सही उच्चारण और निर्धारित क्रम का पालन अनिवार्य बताया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/centres-new-instructions-first-vande-mataram-and-then-jana-gana-mana-in/article-58450"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vande-mataram.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">केंद्र सरकार ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम् और राष्ट्रगान जन-गण-मन के गायन और वादन को लेकर एक बार फिर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों को निर्देश जारी किए हैं। गृह मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिन सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों शामिल किए जाते हैं, वहां पहले वंदे मातरम् और उसके बाद जन-गण-मन प्रस्तुत किया जाएगा। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि यह व्यवस्था पहले से निर्धारित नियमों के अनुरूप है और सभी संबंधित विभागों को इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करना होगा। 9 जुलाई को जारी इस पत्र की जानकारी अब सामने आई है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन राज्यों का अपना राज्य गीत है, वहां भी निर्धारित क्रम में पहले राष्ट्रगीत और फिर राष्ट्रगान का पालन किया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, उद्देश्य पूरे देश में एक समान प्रोटोकॉल लागू करना और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।</p>
<p>निर्देश में राज्यों से कहा गया है कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान हमेशा उनके आधिकारिक और मूल शब्दों के साथ ही गाए या बजाए जाएं। उच्चारण, प्रस्तुति और समय से जुड़े तय मानकों का भी पालन किया जाना जरूरी होगा। इसके लिए दोनों की आधिकारिक प्रतियां मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई हैं ताकि किसी तरह की त्रुटि या भ्रम की स्थिति न बने। मंत्रालय ने संबंधित विभागों और संस्थानों से कहा है कि कार्यक्रम आयोजित करते समय इन्हीं अधिकृत संस्करणों का उपयोग किया जाए। बताया जा रहा है कि यह दूसरा अवसर है जब केंद्र सरकार ने इस विषय पर राज्यों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इससे पहले 28 जनवरी को भी इसी संबंध में आदेश जारी किया गया था। उस समय स्कूलों में दिन की शुरुआत राष्ट्रगीत से करने, वंदे मातरम् के दौरान सभी लोगों के खड़े रहने और पूरे छह अंतरे गाने की बात कही गई थी। छह अंतरों को गाने की कुल अवधि लगभग तीन मिनट दस सेकंड बताई गई थी, जबकि पहले सामान्य तौर पर केवल शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाते थे। हालांकि, सिनेमाघरों को इन नियमों से अलग रखा गया था। सरकार ने स्पष्ट किया था कि फिल्म शुरू होने से पहले वंदे मातरम् बजाना या दर्शकों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं होगा। इसी तरह यदि किसी समाचार फिल्म या डॉक्यूमेंट्री के हिस्से के रूप में राष्ट्रगीत प्रस्तुत किया जाता है, तो उस दौरान दर्शकों के लिए खड़ा होना आवश्यक नहीं माना जाएगा।</p>
<p>राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और देश के इतिहास में विशेष स्थान रहा है। इसे साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 7 नवंबर 1875 को लिखा था और बाद में 1882 में प्रकाशित उनके प्रसिद्ध उपन्यास आनंदमठ में इसे शामिल किया गया। वर्ष 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने सार्वजनिक मंच से वंदे मातरम् का गायन किया था। इसके बाद यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष का प्रमुख नारा भी बना। संस्कृत भाषा के इस वाक्यांश का अर्थ है, "हे मातृभूमि, मैं तुम्हें नमन करता हूं।" आजादी के बाद इसे राष्ट्रगीत का दर्जा मिला और तब से यह राष्ट्रीय समारोहों और विशेष अवसरों पर सम्मानपूर्वक गाया जाता है। हाल के वर्षों में भी वंदे मातरम् राष्ट्रीय आयोजनों का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा है। इस वर्ष गणतंत्र दिवस परेड की थीम भी वंदे मातरम् रखी गई थी। संस्कृति मंत्रालय ने इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष झांकी प्रस्तुत की थी, जिसे मंत्रालयों और विभागों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ झांकी का पुरस्कार भी मिला। वहीं, संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम् को लेकर राजनीतिक बहस भी देखने को मिली थी। विभिन्न दलों ने इसके इतिहास, महत्व और प्रस्तुति को लेकर अपने-अपने पक्ष रखे थे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर तीखी चर्चा हुई थी, जिसमें ऐतिहासिक दस्तावेजों और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े संदर्भ भी सामने आए थे। हालांकि, केंद्र सरकार के ताजा निर्देश प्रशासनिक स्तर पर तय प्रोटोकॉल के पालन पर केंद्रित हैं। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और राष्ट्रीय गीतों के सम्मान से जुड़े नियमों का एक समान अनुपालन देशभर में सुनिश्चित किया जाना चाहिए। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्पेन के जंगल में भीषण आग से 12 की मौत, 19 लापता; राहत अभियान जारी</title>
                                    <description><![CDATA[एंडालूसिया के लॉस गैलार्डोस क्षेत्र में लगी भीषण आग ने बड़े इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती आशंका बिजली की गिरी हुई तार से आग लगने की है, हालांकि जांच अभी जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/12-killed-19-missing-in-massive-fire-in-spains-forest/article-58451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/spain-wildfire.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">स्पेन के दक्षिणी हिस्से में स्थित एंडालूसिया क्षेत्र के लॉस गैलार्डोस में शुक्रवार को लगी भीषण जंगल की आग ने भारी तबाही मचा दी। इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 19 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन के अनुसार आठ लोग घायल हुए हैं और इनमें से चार की हालत गंभीर बनी हुई है। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को सुरक्षित निकलने का मौका तक नहीं मिला। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में तलाश अभियान चला रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि लापता लोगों की तलाश के लिए फायरफाइटर, पुलिस और सेना की इमरजेंसी यूनिट मिलकर काम कर रही है। भीषण गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग पर पूरी तरह काबू पाने में मुश्किलें आ रही हैं। कई इलाकों से लोगों को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया था, लेकिन कुछ लोग समय रहते बाहर नहीं निकल सके। स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं का पालन करने की अपील की है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire-(2).jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस आग की शुरुआत बिजली की गिरी हुई तार से होने की आशंका जताई गई थी। एंडालूसिया की इमरजेंसी सर्विस ने शुरुआती कॉल के आधार पर यही संभावना व्यक्त की, लेकिन बिजली कंपनी एंडेसा ने इस दावे से इनकार किया है। कंपनी का कहना है कि जिस बिजली लाइन की बात सामने आ रही है, उसमें उस समय बिजली का प्रवाह नहीं था। ऐसे में आग लगने के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है। हादसे के दौरान सामने आई कई घटनाओं ने स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया। अधिकारियों के मुताबिक एक कार में सवार चार लोग आग की चपेट में आने से जिंदा जल गए। वाहन का स्टीयरिंग दाईं ओर होने के कारण आशंका जताई जा रही है कि वे ब्रिटिश नागरिक हो सकते हैं। इसके अलावा सात अन्य लोग भी मृत पाए गए, जिन्होंने अपनी गाड़ियां छोड़कर दूसरे रास्ते से निकलने की कोशिश की थी। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों ने निर्धारित निकासी मार्ग का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे वे तेजी से फैलती आग के बीच फंस गए।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire-(1).jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने लोगों से आपातकालीन स्थिति में केवल प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करने की अपील की है। राहत दलों के सामने चुनौती यह भी है कि कई इलाकों में धुआं इतना घना है कि दृश्यता बेहद कम हो गई है, जिससे खोज अभियान प्रभावित हो रहा है। 12 लोगों की मौत के साथ यह आग वर्ष 2005 के बाद स्पेन की सबसे घातक जंगल की आग मानी जा रही है। वर्ष 2005 में ग्वाडालाहारा प्रांत में लगी आग में 11 फायरफाइटरों की मौत हुई थी, जिसके बाद स्पेन ने जंगल की आग से निपटने की रणनीति और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में कई बड़े बदलाव किए थे। इसके बावजूद इस बार की आग ने एक बार फिर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। आग बुझाने के लिए करीब 150 फायरफाइटर लगातार मोर्चे पर डटे हुए हैं और सेना की इमरजेंसी यूनिट भी राहत कार्य में शामिल है। एंडालूसिया के आपातकाल प्रमुख एंटोनियो सान्ज के अनुसार मृतकों में एक स्पेनिश नागरिक है, जबकि बाकी अधिकांश विदेशी नागरिक बताए जा रहे हैं। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने अधिकारियों की घरों के भीतर सुरक्षित रहने की सलाह का पालन नहीं किया और कारों से निकलने का प्रयास किया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/andalusia-fire.jpg" alt="Andalusia Fire" width="1366" height="749"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इसी दौरान वे आग की लपटों में घिर गए। लॉस गैलार्डोस के मेयर फ्रांसिस्को मिगुएल रेयेस ने इस घटना को अभूतपूर्व बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में इतना भयावह मंजर पहले कभी नहीं देखा। उनके अनुसार पूरा इलाका ऐसा दिखाई दे रहा है मानो किसी बड़े विस्फोट ने सब कुछ तबाह कर दिया हो। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह हादसा पूरे देश के लिए बेहद दुखद है। यूरोपियन फॉरेस्ट फायर इंफॉर्मेशन सिस्टम के अनुसार इस वर्ष अब तक स्पेन में लगभग 57 हजार हेक्टेयर जंगल जल चुके हैं</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई को लहार दौरे पर, लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त करेंगे जारी</title>
                                    <description><![CDATA[भिण्ड जिले के लहार में आयोजित कार्यक्रम से मुख्यमंत्री लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करेंगे। साथ ही भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा की माताजी के निधन पर उनके निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/chief-minister-dr-mohan-yadav-will-release-the-38th-installment/article-58452"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई को भिण्ड जिले के लहार के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे प्रदेश की महत्वाकांक्षी <strong>लाड़ली बहना योजना</strong> की 38वीं किस्त की राशि प्रदेशभर की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से हस्तांतरित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और लाभार्थी महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री लहार पहुंचने के बाद भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा (गुड्डू) के निवास भी जाएंगे, जहां वे उनकी माताजी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा पहले मेहगांव में प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम में बदलाव कर इसे लहार स्थानांतरित कर दिया गया। गुरुवार देर रात इस बदलाव की आधिकारिक जानकारी सामने आई, जिसके बाद प्रशासन ने नई व्यवस्थाओं के अनुसार तैयारियां तेज कर दीं।</p>
<p>मुख्यमंत्री का कार्यक्रम दोपहर करीब 1 बजे शुरू होगा और वे लगभग दो घंटे तक लहार में रहेंगे। इस दौरान उनका सार्वजनिक कार्यक्रम दोपहर 3 बजे तक प्रस्तावित है। गुरुवार शाम तक कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। प्रशासन की ओर से बारिश की संभावना को देखते हुए ऐसे स्थान की तलाश की जा रही थी, जहां बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के बावजूद आयोजन सुचारु रूप से कराया जा सके। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम के लिए पक्के और सुरक्षित स्थल को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, मंच व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इससे पहले जब कार्यक्रम मेहगांव में प्रस्तावित था, तब भी संबंधित अधिकारियों ने मंडी परिसर का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए थे। अब कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद पूरी तैयारियों को नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है।</p>
<p>लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। इस योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिलती है। योजना की प्रत्येक किस्त का लाभ प्रदेश की लाखों महिलाओं को मिलता है और लाभार्थी हर माह निर्धारित तिथि का इंतजार करती हैं। 12 जुलाई को जारी होने वाली 38वीं किस्त भी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ऑनलाइन हस्तांतरित की जाएगी। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और परिवार में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान योजना से जुड़ी अन्य जानकारियां भी साझा की जा सकती हैं। वहीं, मुख्यमंत्री का भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा के निवास पहुंचकर उनकी माताजी को श्रद्धांजलि देना भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। हाल ही में विधायक की माताजी का निधन हुआ था, जिसके बाद मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से शोक व्यक्त करने के लिए उनके निवास जाने वाले हैं। मुख्यमंत्री के लहार आगमन की सूचना मिलते ही विधायक अम्बरीश शर्मा ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपते हुए कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने के निर्देश दिए। दूसरी ओर प्रशासन भी मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहीं लाभार्थी महिलाओं के लिए भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान उनके खातों में नई किस्त की राशि हस्तांतरित की जाएगी। ऐसे में 12 जुलाई का यह दौरा भिण्ड जिले के साथ-साथ प्रदेशभर की लाखों महिलाओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दतिया उपचुनाव में BJP का बड़ा सरप्राइज, आशुतोष तिवारी को मिला टिकट; नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा ने उम्मीदवार घोषित किया, चुनावी तैयारियों में जुटे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को नहीं मिला मौका; कांग्रेस और अन्य दल भी तेज कर रहे प्रचार अभियान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjps-big-surprise-ashutosh-tiwari-got-ticket-in-datia-by-election/article-58439"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का फैसला किया है। इस घोषणा के साथ ही दतिया की राजनीति में कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। खास बात यह रही कि पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा था। उन्होंने चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं, कई जनसभाएं कर चुके थे और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, लेकिन अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। भाजपा ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब दतिया उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ चुकी हैं। उम्मीदवार घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया और पार्टी ने चुनाव प्रचार को नई गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन अब आशुतोष तिवारी को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति बना रहा है। आशुतोष तिवारी भाजपा संगठन के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने वर्षों तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। संगठन और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें इस महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना है। हालांकि, इस फैसले ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को जरूर चौंकाया है। चुनाव की घोषणा के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने कई सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया और लोगों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में समर्थक भी पहुंचे थे, जिससे यह माना जा रहा था कि पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जता सकती है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt="BJP Candidate" width="1366" height="1556"></img></p>
<p>चुनावी अभियान के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने अपने संबोधनों में जनता से भावनात्मक अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनसे पूर्व में कोई गलती हुई हो तो लोग उन्हें क्षमा करें। उन्होंने अपने व्यवहार में बदलाव लाने की बात भी कही थी और भरोसा दिलाया था कि भविष्य में जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उनकी यह अपील राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बनी रही। इसके अलावा एक अन्य जनसभा में उन्होंने कांग्रेस के आरोपों का भी जवाब दिया था। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि भाजपा सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है और बेबुनियाद आरोपों का कोई आधार नहीं है। इन बयानों के जरिए वे चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे थे। भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। कांग्रेस भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। दूसरी ओर अन्य राजनीतिक दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। दतिया सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की कानूनी लड़ाई भी चर्चा में रही। उनकी ओर से दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद कांग्रेस के सामने भी उम्मीदवार चयन को लेकर नई परिस्थितियां बनीं। राजेंद्र भारती ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि पार्टी चाहे तो उनके परिवार के बजाय किसी अन्य नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है और वे पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। दतिया उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया भी जारी है। अब तक कई उम्मीदवार नामांकन पत्र खरीद चुके हैं और कुछ ने अपने नामांकन दाखिल भी कर दिए हैं। चुनाव आयोग की तय समय-सीमा के अनुसार आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दल प्रचार अभियान को और तेज करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjps-big-surprise-ashutosh-tiwari-got-ticket-in-datia-by-election/article-58439</link>
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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:53:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राम मंदिर दान विवाद में नया मोड़: 23 कर्मचारियों का सामूहिक इस्तीफा, सुप्रीम कोर्ट में 13 जुलाई को होगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[दान गिनने वाले कर्मचारियों ने बढ़े कार्यभार और बदली व्यवस्था पर जताई नाराजगी, दान प्रबंधन और कथित गड़बड़ी मामले में CBI जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट करेगा सुनवाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/new-twist-in-ram-temple-donation-dispute-mass-resignation-of/article-58425"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार चर्चा श्रद्धालुओं की आस्था या धार्मिक आयोजन को लेकर नहीं, बल्कि मंदिर में आने वाले दान की गिनती और उससे जुड़े प्रशासनिक विवाद को लेकर हो रही है। दान की गिनती का जिम्मा संभाल रहे 23 कर्मचारियों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कर्मचारियों का कहना है कि दान चोरी का मामला सामने आने के बाद दान की प्रकृति बदल गई है, जिससे उनका कार्यभार पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है। इसी बीच इस पूरे मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 13 जुलाई को सुनवाई करेगा, जिससे इस विवाद पर सभी की नजरें टिक गई हैं। मंदिर में आने वाले दान की गिनती का कार्य बैंक कर्मचारियों की टीम करती थी। पहले दान में बड़ी संख्या में 500 रुपये के नोट आते थे, जिससे गिनती का काम अपेक्षाकृत तेजी से पूरा हो जाता था। कर्मचारियों के मुताबिक पहले प्रतिदिन 500 रुपये के नोटों के 70 से 80 बंडल तैयार हो जाते थे। लेकिन दान चोरी की खबरें सामने आने के बाद श्रद्धालुओं के दान देने के तरीके में बदलाव देखने को मिला है। अब मंदिर में 10 और 20 रुपये के नोटों की संख्या काफी बढ़ गई है, जबकि 500 रुपये के नोटों की संख्या पहले के मुकाबले काफी कम हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">कर्मचारियों का कहना है कि छोटे मूल्य के नोटों की गिनती में अधिक समय लगता है। पहले जहां दो शिफ्टों में काम होता था और प्रत्येक कर्मचारी लगभग छह घंटे की ड्यूटी करता था, वहीं अब पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक लगातार काम करना पड़ रहा है। इसके बावजूद उनके वेतन में किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की गई। बढ़े हुए कार्यभार और लंबी ड्यूटी के कारण कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता गया और अंततः 23 कर्मचारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देने का फैसला कर लिया। बताया जा रहा है कि इस्तीफों के बाद अब केवल 13 कर्मचारी ही दान गिनने का काम संभाल रहे हैं। ऐसे में मंदिर में प्रतिदिन आने वाले दान की गिनती और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका भी जताई जा रही है। यदि जल्द ही नई नियुक्तियां नहीं की गईं या कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में दान प्रबंधन की व्यवस्था और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, राम मंदिर दान प्रबंधन से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले ने कानूनी मोड़ भी ले लिया है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में दान चोरी के आरोपों की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने, विशेष जांच दल (SIT) गठित करने और मंदिर में दान प्रबंधन की पूरी व्यवस्था की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की मांग की गई है। इन सभी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ 13 जुलाई को सुनवाई करेगी। इस सुनवाई को पूरे देश में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे आगे की जांच और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर दिशा तय हो सकती है। दान विवाद पर देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी नेपाल से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। नेपाल के जनकपुर स्थित प्रसिद्ध जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के किसी मंदिर में दान से जुड़ी ऐसी घटना पहले कभी सुनने या देखने को नहीं मिली। उनके अनुसार, जब से उन्हें अयोध्या में दान से जुड़े विवाद की जानकारी मिली है, तब से वे बेहद दुखी और चिंतित हैं। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जानी चाहिए। राम मंदिर देशभर के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में मंदिर की दान व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। श्रद्धालु यह उम्मीद कर रहे हैं कि दान की राशि का पूरी पारदर्शिता के साथ उपयोग हो और उसकी गिनती एवं प्रबंधन की प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित तथा विश्वसनीय बनी रहे। अब सभी की निगाहें 13 जुलाई को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देशों के आधार पर इस पूरे मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी जाती है या दान प्रबंधन प्रणाली में बदलाव के निर्देश दिए जाते हैं, तो इसका असर भविष्य में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी दिखाई दे सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>करूर हादसे पर भावुक हुए सीएम विजय, पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल, भीड़ प्रबंधन में लापरवाही का लगाया आरोप; हादसे में जान गंवाने वालों की याद में स्मारक बनाने का किया ऐलान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/cm-vijay-became-emotional-over-karur-accident-and-raised-questions/article-58416"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cm-vijay.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय ने करूर भगदड़ हादसे के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से इस घटना पर विस्तार से अपनी प्रतिक्रिया दी। करूर पहुंचकर आयोजित सभा में मुख्यमंत्री विजय ने हादसे को अपनी राजनीतिक यात्रा का सबसे बड़ा और सबसे गहरा घाव बताया। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी ने उन्हें व्यक्तिगत और राजनीतिक दोनों स्तरों पर गहरा आघात पहुंचाया है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने भीड़ प्रबंधन को लेकर पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए और कहा कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए जाते तो इतने बड़े हादसे से बचा जा सकता था। मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में कई तरह की चुनौतियां और कठिन परिस्थितियां सामने आती हैं, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी होती हैं जिन्हें जीवन भर भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि करूर की घटना उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम में हुई दुर्घटना नहीं, बल्कि ऐसा दर्द है जिसे वे हमेशा अपने साथ लेकर चलेंगे। उन्होंने कहा कि इस हादसे में जिन लोगों ने अपनी जान गंवाई, उनमें कई बच्चे भी शामिल थे, जिनकी याद उन्हें लगातार विचलित करती है। अपने संबोधन में विजय ने कहा कि उनकी राज्यव्यापी 'पीपल्स मीट' यात्रा का उद्देश्य प्रदेश के लोगों से सीधे संवाद करना, उनकी समस्याओं को समझना और जनसंपर्क मजबूत करना था। इसी क्रम में करूर में भी कार्यक्रम आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान विभिन्न जिलों में प्रशासन और पुलिस के साथ लगातार समन्वय बनाया गया था ताकि कार्यक्रम सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि करूर कार्यक्रम से पहले पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें किसी भी प्रकार की विशेष चेतावनी नहीं दी गई थी। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस को यह महसूस हो रहा था कि कार्यक्रम स्थल पर अत्यधिक भीड़ एकत्रित होने वाली है या सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, तो कार्यक्रम को स्थगित करने या आवश्यक बदलाव करने का सुझाव दिया जा सकता था। उनके अनुसार पुलिस के पास ऐसा करने का अधिकार भी था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। विजय ने कहा कि उन्होंने पुलिस प्रशासन पर पूरा भरोसा किया था और कार्यक्रम के दौरान भी अधिकारियों का धन्यवाद किया था। उन्हें विश्वास था कि सभी व्यवस्थाएं उचित ढंग से की गई हैं। लेकिन हादसे के बाद जब पूरे घटनाक्रम की जानकारी सामने आई तो उन्हें गहरा दुख हुआ। उन्होंने कहा कि यदि भीड़ नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम होते तो शायद इतनी बड़ी जनहानि टाली जा सकती थी। सभा के दौरान मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किसकी है। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बावजूद क्या पर्याप्त पुलिस बल और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदारियों का स्पष्ट निर्धारण होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों और अन्य लोगों को याद करते हुए भावुक शब्दों में कहा कि कई बच्चे उनसे मिलने और कार्यक्रम में शामिल होने आए थे, लेकिन दुर्भाग्यवश वे इस दुनिया से चले गए। उन्होंने कहा कि यह क्षति उनके लिए बेहद व्यक्तिगत है और इसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। उन्होंने सभी दिवंगत लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार उनके साथ खड़ी है। इस दौरान विजय ने यह भी कहा कि हादसे के बाद उन्हें कई तरह की आलोचनाओं और आरोपों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में भी उनके ऊपर विभिन्न प्रकार के सवाल उठाए गए, जबकि उनकी प्राथमिकता केवल प्रभावित परिवारों की सहायता और स्थिति को संभालना थी। उन्होंने कहा कि किसी भी त्रासदी को राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए और ऐसे संवेदनशील मामलों में सभी पक्षों को जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। मुख्यमंत्री ने करूर भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में एक स्मारक बनाने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि तमिलगा वेत्री कड़गम की ओर से करूर में स्मारक का निर्माण कराया जाएगा ताकि भविष्य की पीढ़ियां इस घटना को याद रख सकें और ऐसी त्रासदियों से सबक लिया जा सके। उन्होंने कहा कि स्मारक केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक नहीं होगा बल्कि यह जनसुरक्षा और जिम्मेदारी के महत्व का संदेश भी देगा। सभा के दौरान विजय ने प्रशासनिक जवाबदेही, बेहतर भीड़ प्रबंधन और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बड़े आयोजनों में सुरक्षा एजेंसियों, प्रशासन और आयोजकों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है, ताकि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:24 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान हंगामा, अभद्र व्यवहार पर याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[सुनवाई के दौरान वकील ने कोर्ट की गरिमा का उल्लंघन किया, सुरक्षा कर्मियों ने बाहर निकाला; अदालत ने अवमानना की कार्रवाई से परहेज करते हुए याचिका खारिज की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/uproar-during-hearing-in-supreme-court-petition-on-indecent-behavior/article-58413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/supreme-court-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश की सर्वोच्च अदालत में शुक्रवार को एक सुनवाई के दौरान ऐसा घटनाक्रम देखने को मिला जिसने कुछ समय के लिए कोर्ट रूम का माहौल पूरी तरह बदल दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने अदालत में अभद्र व्यवहार किया। सुनवाई के दौरान उन्होंने न केवल आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया बल्कि अदालत की कार्यवाही के बीच फाइल भी उछाल दी। स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा और संबंधित वकील को कोर्ट रूम से बाहर ले जाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मामला सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ के समक्ष आया जिसमें जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे सुनवाई कर रहे थे। याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के खिलाफ दायर की गई थी और याचिकाकर्ता स्वयं अधिवक्ता के रूप में अपना पक्ष रख रहे थे। शुरुआत से ही उनका रवैया आक्रामक बताया गया। अदालत की कार्यवाही के दौरान उन्होंने लगातार ऊंची आवाज में अपनी बात रखी और न्यायालय की प्रक्रिया पर असंतोष जताया। सुनवाई के दौरान स्थिति तब गंभीर हो गई जब उन्होंने अदालत में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया और गुस्से में केस से जुड़े दस्तावेज हवा में उछाल दिए। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम से कुछ क्षणों के लिए कोर्ट रूम में मौजूद सभी लोग स्तब्ध रह गए। न्यायिक कार्यवाही के दौरान इस तरह के व्यवहार को देखते हुए सुरक्षा कर्मी तुरंत सक्रिय हुए और संबंधित वकील को अदालत कक्ष से बाहर ले गए, जिससे आगे की कार्यवाही शांतिपूर्वक जारी रह सके।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वकील ने सुनवाई के दौरान न्यायालय से एक विशेष आदेश जारी करने की मांग की थी। उन्होंने कथित रूप से कहा कि संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। इस पर पीठ ने उनसे सवाल किया कि क्या वे अदालत को आदेश दे रहे हैं। इसके बाद माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया। वकील ने अपनी बात दोहराने के बाद दस्तावेज फेंक दिए और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। घटना के दौरान कोर्ट रूम में मौजूद कई अधिवक्ता और अन्य लोग कुछ समय के लिए असहज हो गए। अचानक हुए इस घटनाक्रम के कारण कार्यवाही कुछ देर के लिए प्रभावित हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय रहने से स्थिति जल्द सामान्य हो गई। अदालत ने शांति बनाए रखते हुए सुनवाई आगे बढ़ाई।</p>
<p style="text-align:justify;">घटना के बाद जस्टिस के. वी. विश्वनाथन ने कहा कि संबंधित व्यक्ति स्पष्ट रूप से मानसिक और भावनात्मक दबाव में दिखाई दे रहे थे। उन्होंने कहा कि अदालत को उनके प्रति सहानुभूति है और इस पूरे घटनाक्रम को हताशा के रूप में देखा जाना चाहिए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत का उद्देश्य किसी व्यक्ति को अनावश्यक रूप से दंडित करना नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को निष्पक्ष और संतुलित बनाए रखना है। महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने इस मामले में वकील के खिलाफ तत्काल अवमानना की कार्रवाई करने का निर्णय नहीं लिया। हालांकि, पीठ ने याचिका के गुण-दोष पर विचार करने के बाद स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड का अवलोकन करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं पाया गया। इसी कारण विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:32 +0530</pubDate>
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