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                <title>Urban Development - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Urban Development RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर में अवैध कब्जों पर चला बुलडोजर, 3 एकड़ की अवैध प्लाटिंग भी ध्वस्त</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम ने जलभराव रोकने और अवैध निर्माण पर सख्ती दिखाते हुए पंडरी, सुखराम नगर और ब्रम्हदेईपारा में अतिक्रमण हटाया, अवैध प्लाटिंग पर भी बड़ी कार्रवाई की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/bulldozer-runs-on-illegal-encroachments-in-raipur-illegal-plotting-of/article-58486"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-news-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">रायपुर में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या और लगातार बढ़ रहे अवैध कब्जों के खिलाफ नगर निगम ने बड़ा अभियान चलाया। निगम की टीम ने शुक्रवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई करते हुए नालों पर किए गए अतिक्रमण हटाए, अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त किया और बिना अनुमति किए गए निर्माणों पर बुलडोजर चलाया। इस अभियान के तहत पंडरी कपड़ा बाजार के दुर्गा नगर क्षेत्र में नाले पर बने अवैध पाटे को तोड़ा गया, जबकि सुखराम नगर में करीब तीन एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को भी ध्वस्त कर दिया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि बारिश के मौसम में नालों पर कब्जों के कारण जल निकासी बाधित होती है, जिससे आसपास की बस्तियों में जलभराव की स्थिति बनती है। इसी को देखते हुए यह कार्रवाई की गई है। नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि शहर में बिना अनुमति किए गए कब्जों, अवैध प्लाटिंग और जल निकासी में बाधा बनने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। निगम आयुक्त संबित मिश्रा के निर्देश पर विभिन्न जोनों की टीमों ने जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से कार्रवाई को अंजाम दिया। प्रशासन का कहना है कि शहर को जलभराव मुक्त बनाने और नियोजित विकास सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।</p>
<p>कार्रवाई की शुरुआत पंडरी स्थित प्रकाश होलसेल मार्केट के सामने से की गई, जहां नाले पर करीब 100 वर्गफीट का अवैध पाटा बनाकर कब्जा किया गया था। नगर निगम के अनुसार संबंधित दुकान संचालक ने नाले के ऊपर निर्माण कर लिया था, जिससे नाले की नियमित सफाई प्रभावित हो रही थी। बारिश के दौरान यही अतिक्रमण दुर्गा नगर और आसपास की बस्तियों में जलभराव की बड़ी वजह बन रहा था। शिकायतों और निरीक्षण के बाद निगम की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी की सहायता से अवैध निर्माण को हटा दिया। अधिकारियों ने बताया कि मानसून में नालों की सफाई और पानी की निर्बाध निकासी प्रशासन की प्राथमिकता है। इसी कारण ऐसे सभी निर्माणों को हटाया जा रहा है, जो जल निकासी में बाधा बन रहे हैं। इसके साथ ही नगर निगम की जोन-1 नगर निवेश विभाग की टीम ने संत कबीर दास वार्ड क्रमांक-3 के सुखराम नगर में दो अलग-अलग स्थानों पर लगभग तीन एकड़ भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग के खिलाफ भी कार्रवाई की। मौके पर पहुंची टीम ने प्लाटिंग के लिए बनाई गई मुरम सड़क को काट दिया, प्रवेश मार्ग बंद कर दिया और तैयार की गई नींव को भी ध्वस्त कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अवैध कॉलोनियों के विकास को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है, ताकि भविष्य में लोगों को किसी प्रकार की कानूनी या मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी परेशानी का सामना न करना पड़े। नगर निगम ने संबंधित भूमि के वास्तविक स्वामित्व की जानकारी प्राप्त करने के लिए रायपुर तहसीलदार को पत्र भी भेजा है। भूमि मालिक की जानकारी मिलने के बाद संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p>इसी अभियान के दौरान वीर शिवाजी वार्ड क्रमांक-16 के ब्रम्हदेईपारा क्षेत्र में भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। यहां नाले के किनारे बनाई गई एक अवैध झोपड़ी को हटाया गया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित हो रही थी। निगम अधिकारियों के अनुसार मानसून में शहर के संवेदनशील इलाकों में जलभराव रोकने के लिए ऐसे सभी अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है। नगर निगम का कहना है कि बिना अनुमति किए गए निर्माण न केवल शहर की व्यवस्था को प्रभावित करते हैं, बल्कि बारिश के दौरान नागरिकों के लिए गंभीर समस्याएं भी पैदा करते हैं। इसलिए भविष्य में भी अवैध प्लाटिंग, अतिक्रमण और जल निकासी में बाधा बनने वाले निर्माणों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे बिना अनुमति किसी भी प्रकार का निर्माण या प्लाटिंग न करें और नगर नियोजन से जुड़े नियमों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा कि शहर के सुनियोजित विकास, बेहतर जल निकासी व्यवस्था और सुरक्षित आवासीय वातावरण के लिए अवैध निर्माणों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है। नगर निगम लगातार ऐसे क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है, जहां अवैध प्लाटिंग या नालों पर कब्जे की शिकायतें मिल रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 16:49:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल मास्टर प्लान पर दिशा बैठक में बवाल, विधायक और जनपद अध्यक्ष आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[मास्टर प्लान लागू करने को लेकर कांग्रेस विधायकों और जनपद अध्यक्ष के बीच गरमागरम बहस, भाजपा विधायक ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना पर उठाए सवाल; सांसद ने मुख्यमंत्री से जल्द चर्चा का भरोसा दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/ruckus-in-disha-meeting-on-bhopal-master-plan-mla-and/article-58424"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय विवादों में आ गई, जब शहर के मास्टर प्लान को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, विधायक आतिफ अकील और फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के बीच हुई नोकझोंक ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की ओर उंगली उठाकर तीखी टिप्पणियां कीं और कुछ समय के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह गरमा गया। बैठक के दौरान शहर के नए मास्टर प्लान को लागू करने में हो रही देरी और विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मास्टर प्लान की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शहर का विकास इसी तरह चलता रहा तो भोपाल का संतुलित विकास संभव नहीं हो पाएगा। उनका कहना था कि लंबे समय से मास्टर प्लान लंबित होने के कारण शहर में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने चर्चा के दौरान हस्तक्षेप किया। उनके बीच में बोलने और उंगली दिखाकर अपनी बात रखने पर विधायक आरिफ मसूद नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि वह सांसद से चर्चा कर रहे हैं और बीच में इस तरह बोलना उचित नहीं है। मसूद ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा मास्टर प्लान किस काम का है, जो वर्षों बाद भी लागू नहीं हो पा रहा। इस पर प्रमोद सिंह राजपूत ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक को "औकात में रहकर बात करने" की नसीहत दी। दोनों नेताओं के बीच करीब दस मिनट तक तीखी बहस चलती रही। बैठक में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी माहौल शांत कराने का प्रयास करते रहे, लेकिन कुछ समय तक दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वह केवल सांसद से संवाद कर रहे थे और जनपद अध्यक्ष का इस तरह बीच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्यशैली से गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा प्रभावित होती है। विधायक आतिफ अकील भी इस मुद्दे पर मसूद के समर्थन में दिखाई दिए। बाद में दोनों विधायक बैठक से उठकर बाहर चले गए। बैठक में केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी कई जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना के नाम पर भोपाल की मूलभूत व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी-बड़ी इमारतें तो बना दी गईं, लेकिन उनमें आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर लिफ्ट खराब रहती हैं, सामुदायिक भवनों की कमी है और सार्वजनिक स्थानों के विकास पर भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए, ताकि अधिक निवेशक आगे आएं और परियोजना की आय बढ़ सके। उनका मानना था कि वर्तमान स्वरूप में बड़े प्लॉटों की बिक्री नहीं हो पा रही है, जिससे परियोजना की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इस तरह की समस्याएं उठा रहे हैं तो निश्चित रूप से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में भोपाल की महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में स्मार्ट सिटी के तहत लगाई गई कई स्ट्रीट लाइटें समय पर ठीक नहीं हो पातीं, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता बताई। स्मार्ट सिटी बोर्ड के चेयरमैन एवं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बैठक में भरोसा दिलाया कि सभी शिकायतों और समस्याओं की अलग-अलग समीक्षा कर उनका समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित और दीर्घकालिक विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह करेंगे। सांसद ने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। इसी कारण कई विकास कार्यों में टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाई जाए, जो सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सके। बैठक के दौरान भोपाल की झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए "भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण" गठित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव में संभागायुक्त को इसका अध्यक्ष बनाने तथा भोपाल और सीहोर के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को सदस्य बनाने की सिफारिश की गई। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी रखी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बड़े कचरा उत्पादकों का ऑनलाइन पंजीयन अनिवार्य, सीपीसीबी पोर्टल से होगी निगरानी</title>
                                    <description><![CDATA[शहरी निकायों को बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान कर जल्द रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और नियमों के पालन पर रहेगा फोकस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/online-registration-of-big-waste-producers-mandatory-monitoring-will-be/article-58082"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/cpcb-portal.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने सभी नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों को निर्देश जारी किए हैं कि उनके क्षेत्र में संचालित सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स यानी बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों का अनिवार्य रूप से ऑनलाइन पंजीयन कराया जाए। इसके लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के केंद्रीकृत ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग किया जाएगा। विभाग का कहना है कि इससे प्रदेश में कचरा प्रबंधन की निगरानी मजबूत होगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि बड़े संस्थान ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का पालन कर रहे हैं या नहीं। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा जारी परिपत्र में सभी नगर निगम आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे सभी संस्थानों की पहचान करें, जो बड़ी मात्रा में ठोस कचरा उत्पन्न करते हैं। इनमें अस्पताल, होटल, बड़े आवासीय परिसर, शैक्षणिक संस्थान, औद्योगिक इकाइयां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य बड़े संस्थान शामिल हैं। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी का पंजीयन सीपीसीबी के ऑनलाइन पोर्टल पर कराना अनिवार्य होगा। विभाग ने इस प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दिया है ताकि नई व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का यह केंद्रीकृत पोर्टल एक जून 2026 से लागू हो चुका है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के तहत अब बड़े कचरा उत्पादकों का पंजीयन इसी पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। इस डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य केवल रिकॉर्ड तैयार करना नहीं है, बल्कि कचरे के उत्पादन से लेकर उसके संग्रहण, पृथक्करण, परिवहन और अंतिम निपटान तक की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना भी है। इससे संबंधित विभागों को वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध होगी और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में आसानी होगी। विभाग का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण कचरे की मात्रा लगातार बढ़ रही है। यदि बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थान अपने स्तर पर वैज्ञानिक तरीके से उसका प्रबंधन नहीं करते हैं, तो इसका सीधा असर पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसी वजह से अब ऐसे संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी। उन्हें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि कचरे का स्रोत पर पृथक्करण किया जाए और उसका निपटान निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">इस नई व्यवस्था से स्थानीय निकायों की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। नगर निगम और नगर पालिकाओं को अपने क्षेत्र में सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स का सर्वे कर सूची तैयार करनी होगी। इसके बाद उनका ऑनलाइन पंजीयन कराया जाएगा और समय-समय पर उनकी गतिविधियों की निगरानी भी की जाएगी। यदि कोई संस्थान नियमों का पालन नहीं करता है या बिना पंजीयन के कार्य करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों का कहना है कि इससे कचरा प्रबंधन प्रणाली अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनेगी। बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य स्रोत पर कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित करना भी है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि गीला और सूखा कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाए और उसका वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जाए, तो लैंडफिल पर दबाव कम होगा और पुनर्चक्रण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी। इससे पर्यावरण प्रदूषण कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग भी संभव होगा। इसी बीच राज्य में पर्यावरण संरक्षण को लेकर हाल के दिनों में कई अन्य सख्त कदम भी उठाए गए हैं। करीब 19 दिन पहले छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने बैटरी वेस्ट के अवैध कारोबार के खिलाफ भी सख्ती दिखाई थी। मंडल ने स्पष्ट किया था कि बिना पंजीयन और आवश्यक दस्तावेजों के पुरानी बैटरियों की खरीद-बिक्री, संग्रहण, भंडारण और परिवहन पूरी तरह अवैध माना जाएगा। बैटरी वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2022 के तहत केवल पंजीकृत संस्थाओं को ही बैटरी अपशिष्ट के संग्रहण और रीसाइक्लिंग की अनुमति है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सफाई मित्रों के लिए इंदौर नगर निगम की नई योजना, हादसे पर मिलेगा 2.5 लाख तक इलाज सहायता</title>
                                    <description><![CDATA[ड्यूटी के दौरान दुर्घटना का शिकार होने वाले सफाई मित्रों, ड्रेनेज और सीवरेज कर्मचारियों को गंभीरता के आधार पर 25 हजार से 2.50 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/indore-municipal-corporations-new-scheme-for-safai-mitras-in-case/article-57409"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-municipal-corporation.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर नगर निगम ने शहर की स्वच्छता व्यवस्था संभालने वाले सफाई मित्रों के हित में एक अहम फैसला लिया है। अब ड्यूटी के दौरान दुर्घटना का शिकार होने वाले सफाई मित्रों और ड्रेनेज-सीवरेज सफाई कार्य में लगे कर्मचारियों को इलाज के लिए आर्थिक सहायता मिलेगी। नगर निगम की इस नई योजना के तहत हादसे की गंभीरता के आधार पर 25 हजार रुपये से लेकर 2.50 लाख रुपये तक की सहायता राशि उपलब्ध कराई जाएगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि सफाई मित्र शहर की स्वच्छता व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और उनकी सुरक्षा व स्वास्थ्य को लेकर नगर निगम पूरी तरह गंभीर है। लंबे समय से ऐसी व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही थी, क्योंकि कई बार सफाई कार्य के दौरान घायल होने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों को इलाज के खर्च के लिए आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पिछले कुछ वर्षों में इंदौर में ड्रेनेज और सीवरेज लाइन की सफाई के दौरान कई दुर्घटनाएं सामने आई हैं। कहीं जहरीली गैस के रिसाव से कर्मचारी घायल हुए तो कहीं नालों और सड़कों की सफाई के दौरान हादसे हुए। कई मामलों में कर्मचारियों को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा, जबकि कुछ घटनाओं में गंभीर चोटों के कारण परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ गया। नगर निगम के सामने लगातार यह मांग उठ रही थी कि सफाई मित्रों के लिए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे दुर्घटना के बाद इलाज में देरी न हो और कर्मचारियों को तत्काल राहत मिल सके। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए यह नई योजना तैयार की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं बल्कि सफाई मित्रों को यह भरोसा दिलाना भी है कि संकट की स्थिति में नगर निगम उनके साथ खड़ा रहेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नई व्यवस्था के तहत सहायता राशि दुर्घटना की गंभीरता के अनुसार तय की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी को सामान्य चोट लगती है और उपचार की आवश्यकता होती है तो उसे 25 हजार रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी। अगर दुर्घटना गंभीर श्रेणी की होती है और डॉक्टर की सलाह के अनुसार लंबे इलाज की जरूरत पड़ती है, तो एक लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, अत्यंत गंभीर दुर्घटना की स्थिति में उपचार के लिए अधिकतम 2.50 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। नगर निगम का कहना है कि सहायता राशि जारी करने की प्रक्रिया को भी सरल बनाया गया है, ताकि घायल कर्मचारी को समय पर इलाज मिल सके। दुर्घटना की सूचना और प्रारंभिक दस्तावेज मिलने के बाद सहायता राशि स्वीकृत करने की कार्रवाई शुरू की जा सकेगी। इस योजना की एक खास बात यह भी है कि इसका लाभ केवल स्थायी कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। नगर निगम ने साफ किया है कि दैनिक वेतनभोगी, विनियमित और स्थायी सभी सफाई मित्र इस योजना के दायरे में आएंगे। यानी शहर की सफाई व्यवस्था से जुड़े हर कर्मचारी को जरूरत पड़ने पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी। सफाई मित्र लंबे समय से कठिन और जोखिम भरे माहौल में काम करते रहे हैं। कई बार उन्हें सीवर लाइन, ड्रेनेज चैंबर और गहरे नालों में उतरकर सफाई करनी पड़ती है, जहां गैस रिसाव, फिसलन या अन्य हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में यह योजना उनके लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बनता रहा है और इसके पीछे सफाई मित्रों की मेहनत सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि शहर को स्वच्छ रखने वाले इन कर्मचारियों का सम्मान करना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना नगर निगम की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों को यदि किसी दुर्घटना का सामना करना पड़ता है तो इलाज के लिए आर्थिक चिंता नहीं होनी चाहिए। यही सोच इस योजना के पीछे है। नगर निगम का मानना है कि इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों को संकट की घड़ी में आर्थिक संबल मिलेगा और वे बेहतर इलाज करा सकेंगे। शहर में सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी पिछले कुछ समय से लगातार जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा उपकरणों के उपयोग, प्रशिक्षण और आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल पर भी निगम काम कर रहा है। हालांकि, जोखिम वाले कार्यों में दुर्घटनाओं की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं की जा सकती। ऐसे में आर्थिक सहायता की यह योजना कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगी। सफाई मित्रों से जुड़े संगठनों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे कर्मचारियों के हित में उठाया गया सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि यदि योजना का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन हुआ तो इससे कई परिवारों को कठिन समय में राहत मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर में अवैध नल कनेक्शन नियमित कराने का शुल्क बढ़ा, कांग्रेस ने उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की नई योजना के तहत घरेलू कनेक्शन वैध कराने के लिए 20,882 रुपये जमा करने होंगे, विपक्ष ने आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/congress-raised-questions-on-increase-in-fee-for-regularizing-illegal/article-57127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-water-connection.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर नगर निगम ने शहर में वर्षों से चल रहे अवैध नल कनेक्शनों को नियमित करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का फैसला लिया है। निगम का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य जलकर राजस्व बढ़ाना और सभी जल उपभोक्ताओं को आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल करना है। हालांकि योजना की घोषणा के साथ ही इसे लेकर राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। घरेलू अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए 20 हजार रुपये से अधिक की राशि तय किए जाने पर कांग्रेस ने निगम प्रशासन और राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का कहना है कि पहले इसी प्रक्रिया के लिए केवल 600 रुपये शुल्क लिया जाता था, जबकि अब आम लोगों पर भारी आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। नगर निगम के आंकड़ों के अनुसार रायपुर शहर में लगभग 3.50 लाख संपत्तियां हैं, लेकिन इनमें से केवल 2.21 लाख संपत्तियों के नल कनेक्शन ही निगम के रिकॉर्ड में वैध रूप से दर्ज हैं। इसका मतलब यह है कि करीब 90 हजार संपत्तियों में ऐसे जल कनेक्शन हैं जो वर्षों से पानी की आपूर्ति ले रहे हैं, लेकिन उनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। निगम प्रशासन का मानना है कि ऐसे कनेक्शनों की वजह से जलकर के रूप में मिलने वाला राजस्व प्रभावित हो रहा है और इससे नगर निगम को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सभी जोन कार्यालय अपने-अपने क्षेत्रों में अवैध जल कनेक्शनों की पहचान करें और उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया तेज करें। इसी उद्देश्य से 'एकमुश्त जलकर निपटान योजना' लागू की गई है। इस योजना के तहत 15 जुलाई से 15 अक्टूबर 2026 तक नागरिकों को अपने अवैध नल कनेक्शन नियमित कराने का अवसर मिलेगा। निगम ने इसे अंतिम मौका बताया है और स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के बाद कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">योजना के अनुसार आधा इंच के घरेलू नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए 5 हजार रुपये नियमितीकरण शुल्क और 15,882 रुपये वैध कनेक्शन शुल्क देना होगा। इस तरह कुल 20,882 रुपये एकमुश्त जमा करने होंगे। वहीं व्यावसायिक उपयोग के लिए आधा इंच के कनेक्शन पर 15 हजार रुपये नियमितीकरण शुल्क और 15,882 रुपये कनेक्शन शुल्क मिलाकर कुल 30,882 रुपये का भुगतान करना होगा। निगम ने यह भी साफ किया है कि पूरी राशि एक बार में जमा करनी होगी। इसके अलावा संबंधित संपत्ति की यूनिक आईडी से कनेक्शन को लिंक करना और निर्धारित प्रारूप में अनुबंध करना भी अनिवार्य रहेगा। नगर निगम का कहना है कि इस अभियान के पूरा होने के बाद अवैध कनेक्शनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन नहीं करता है तो उसका जल कनेक्शन काटा जा सकता है। इसके साथ ही नियमितीकरण शुल्क की तीन गुना तक जुर्माना राशि भी वसूली जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार इस कदम का उद्देश्य सभी उपभोक्ताओं को नियमों के दायरे में लाना और जल वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर कांग्रेस ने इस योजना को आम लोगों के हितों के खिलाफ बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अवैध नल कनेक्शन को वैध कराने के लिए केवल 600 रुपये का शुल्क लिया जाता था। अब उसी प्रक्रिया के लिए 20 हजार रुपये से अधिक की राशि तय कर दी गई है, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवार जो वर्षों से पानी का उपयोग कर रहे हैं, उनके लिए इतनी बड़ी राशि एक साथ जमा करना आसान नहीं होगा। नगर निगम का पक्ष है कि जल वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित बनाने और राजस्व बढ़ाने के लिए यह अभियान जरूरी है। अधिकारियों का कहना है कि वैध कनेक्शन होने से भविष्य में उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। साथ ही जल आपूर्ति से जुड़ी योजनाओं का लाभ भी केवल पंजीकृत उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचाया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 14:07:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिलासपुर में अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम बनाने की मांग तेज</title>
                                    <description><![CDATA[नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई संगठनों का धरना, विकास में पिछड़ेपन का आरोप, चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/demand-to-make-arpa-par-area-a-separate-municipal-corporation/article-57043"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bilaspur-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बिलासपुर में अरपा पार सरकंडा क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा देने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आई। गुरुवार को नागरिक सुरक्षा मंच सहित कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अरपा पार क्षेत्र की आबादी लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद विकास और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। इसी असंतोष के बीच बड़ी संख्या में लोग सड़क पर उतरे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अलग नगर निगम बनाने की मांग दोहराई। प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता अमित तिवारी ने कहा कि यह मांग पिछले तीन दशकों से की जा रही है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनका आरोप था कि हर चुनाव के समय स्थानीय स्तर पर वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं होता। उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय स्थानीय विधायक ने अरपा पार क्षेत्र को प्राथमिकता देने की बात कही थी, लेकिन तीन साल बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि अब जनता “जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा” जैसे अभियानों के जरिए अपनी आवाज को और मजबूत करेगी। धरना स्थल पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि सरकंडा और अरपा पार क्षेत्र में तेजी से शहरीकरण हुआ है, लेकिन इसके अनुपात में विकास कार्य नहीं हो पाए हैं। कई लोगों का कहना था कि सड़क, जल आपूर्ति, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं में लगातार कमी महसूस की जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी दावा किया कि स्मार्ट सिटी योजना के तहत भी इस क्षेत्र को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है, जिससे स्थानीय नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। भीड़ में मौजूद लोगों का कहना था कि जब तक अलग नगर निगम का गठन नहीं होता, तब तक स्थानीय समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से नहीं हो पाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंदोलन को लेकर मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इसके तहत 10 जुलाई को मानव श्रृंखला बनाने की घोषणा की गई है। इसके बाद दूसरे चरण में मशाल जुलूस निकाला जाएगा और यदि मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो 15 अगस्त से आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी गई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह कदम मजबूरी में उठाया जा रहा है क्योंकि वर्षों से लगातार मांग के बावजूद कोई समाधान सामने नहीं आया है। उनका आरोप है कि क्षेत्र की उपेक्षा के कारण लोगों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। धरना प्रदर्शन में कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नेता मौजूद रहे, जिनमें श्याम मोहन दुबे, गौरव तिवारी, देवेंद्र मिश्रा, दिलीप पाटिल, रामकुमार यादव, अमित सोनकर, अजय कापसे, कमल साहू और अन्य लोग शामिल थे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि अरपा पार क्षेत्र को अलग नगर निगम का दर्जा दिया जाए ताकि प्रशासनिक कामकाज में तेजी आए और स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्तमान व्यवस्था में दूर-दराज के क्षेत्रों तक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हो पाता, जिससे आम जनता को समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शनकारियों ने यह भी बताया कि अरपा पार क्षेत्र में कुल 24 वार्ड शामिल हैं, जो वर्तमान नगर निगम व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी आबादी और क्षेत्रफल के बावजूद अलग प्रशासनिक इकाई नहीं होने से विकास कार्यों में बाधाएं आती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि अलग नगर निगम का गठन होता है तो योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी और तेज होगा। साथ ही नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए लंबी प्रक्रियाओं से नहीं गुजरना पड़ेगा। आंदोलनकारियों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक व्यापक रूप लेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 16:19:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायगढ़ में सड़क पर निर्माण सामग्री फैलाने वालों पर निगम की कार्रवाई, 11 हजार का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[विशेष अभियान में 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त, 10 से अधिक लोगों को दी गई चेतावनी और समझाइश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/corporations-action-against-those-spreading-construction-material-on-the-road/article-56397"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nagar-nigam-action.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायगढ़ शहर में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर भवन निर्माण सामग्री फैलाकर यातायात बाधित करने वालों के खिलाफ नगर निगम ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद निगम की टीम ने विशेष अभियान चलाकर अलग-अलग क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान सड़क पर निर्माण मलबा और अन्य सामग्री फैलाने वाले लोगों पर कुल 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया, जबकि 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त की गई। निगम की इस कार्रवाई से उन लोगों में हड़कंप की स्थिति देखी गई जो लंबे समय से सार्वजनिक स्थानों का उपयोग निजी निर्माण कार्यों के लिए कर रहे थे। नगर निगम की सफाई और प्रवर्तन टीम सुबह से शहर के विभिन्न इलाकों में निरीक्षण के लिए निकली थी। अभियान के दौरान जूटमिल, कबीर चौक, छातामुड़ा, विजयपुर चौक सहित कई प्रमुख मार्गों की जांच की गई। निरीक्षण के समय कई जगहों पर सड़क के किनारे और बीच हिस्सों में निर्माण सामग्री, रेत, गिट्टी और सीएंडडी वेस्ट यानी कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट फैला हुआ मिला। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा था बल्कि राहगीरों और वाहन चालकों के लिए भी परेशानी पैदा हो रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अधिकारियों के अनुसार शहर में पिछले कुछ समय से सड़क पर निर्माण सामग्री डालने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। कई स्थानों पर लोगों ने भवन निर्माण कार्य के दौरान मलबा और सामग्री सीधे सड़क पर रख दी थी, जिससे सड़क की चौड़ाई कम हो गई थी। ऐसे हालात में दुर्घटना होने की संभावना भी बढ़ जाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए निगम ने विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया। कार्रवाई के दौरान जूटमिल, कबीर चौक और छातामुड़ा क्षेत्र में गुरुजी आटा चक्की के पास सड़क पर सीएंडडी वेस्ट फैला हुआ पाया गया। इस मामले में संबंधित व्यक्ति पर 1 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। वहीं सुदर्शन देवांगन द्वारा सड़क पर निर्माण सामग्री फैलाकर सार्वजनिक मार्ग को प्रभावित करने पर 3 हजार रुपए की पेनाल्टी वसूली गई। इसी तरह डीएम साव के खिलाफ सड़क पर निर्माण मलबा फैलाने के मामले में 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। विजयपुर चौक क्षेत्र में रवि सोनी द्वारा सड़क पर निर्माण सामग्री रखकर आवागमन बाधित किए जाने पर 2 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया। अभियान के दौरान निगम अधिकारियों ने केवल जुर्माना लगाने तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी। संबंधित लोगों को मौके पर ही सार्वजनिक स्थानों और सड़कों से मलबा हटाने के निर्देश भी दिए गए। कई स्थानों पर निगम की टीम ने स्वयं कार्रवाई करते हुए निर्माण सामग्री को हटवाया और जब्ती की कार्रवाई की। पूरे अभियान के दौरान कुल 5 ट्रैक्टर-ट्रॉली निर्माण सामग्री जब्त की गई, जिसे निगम के कब्जे में लिया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">निरीक्षण के दौरान 10 से अधिक लोगों को समझाइश भी दी गई। अधिकारियों ने उन्हें स्पष्ट रूप से बताया कि सड़क, नाली और सार्वजनिक स्थानों पर निर्माण सामग्री डालना नियमों का उल्लंघन है। इससे आम लोगों को परेशानी होती है और शहर की स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित होती है। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि दोबारा ऐसी स्थिति पाई गई तो और अधिक सख्त कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम का कहना है कि शहर के कई इलाकों में भवन निर्माण कार्य तेजी से चल रहे हैं। ऐसे में कुछ लोग सुविधा के लिए सड़क और सार्वजनिक जगहों का उपयोग सामग्री रखने के लिए कर लेते हैं। हालांकि यह व्यवस्था आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनती है। कई बार सड़क पर फैली रेत, गिट्टी और मलबे के कारण दोपहिया वाहन चालक फिसलकर दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं। वहीं बड़े वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि शहर को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाए रखने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। जिन क्षेत्रों से शिकायतें मिलेंगी वहां नियमित निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ जुर्माना और जब्ती जैसी कार्रवाई लगातार की जाएगी। निगम प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि निर्माण कार्य के दौरान सामग्री अपने निजी परिसर में रखें और सार्वजनिक स्थानों का उपयोग न करें। निगम का मानना है कि नागरिकों के सहयोग से ही शहर को स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सकता है। इसलिए लोगों को नियमों का पालन करना चाहिए और ऐसी गतिविधियों से बचना चाहिए जिनसे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो या दुर्घटनाओं का खतरा बढ़े। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 15:13:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>10 लेन सड़क परियोजना में पुनर्वास को प्राथमिकता, कोई परिवार बेघर नहीं होगा</title>
                                    <description><![CDATA[नयापुरा सेंट्रल जेल क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने से पहले प्रभावितों को वैकल्पिक भूमि देने के निर्देश, मंत्री विश्वास सारंग ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rehabilitation-will-be-given-priority-in-10-lane-road-project/article-56284"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-10-lane-road-project.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल में प्रस्तावित 10 लेन सड़क परियोजना को लेकर प्रशासन की कार्रवाई के बीच प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया है। नयापुरा सेंट्रल जेल के समीप सड़क निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की तैयारी के दौरान बुधवार को राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। कार्रवाई की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक एवं प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग भी मौके पर पहुंचे और अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन किसी भी गरीब परिवार को बेघर नहीं होने दिया जाएगा। पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि 10 लेन सड़क परियोजना शहर के यातायात को बेहतर बनाने और बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। हालांकि सड़क निर्माण की जद में आने वाले कई परिवारों के सामने विस्थापन की स्थिति बन रही थी। स्थानीय लोगों ने अपनी चिंता प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने रखी थी। इसी के बाद मंत्री विश्वास सारंग ने स्वयं मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण के साथ-साथ प्रभावित परिवारों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">मंत्री सारंग ने कहा कि सरकार विकास और जनकल्याण दोनों को साथ लेकर चलने में विश्वास रखती है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित परिवारों को पहले वैकल्पिक भूमि और आवासीय व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए। जब तक पुनर्वास की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी परिवार को हटाने की जल्दबाजी नहीं की जाए। उनका कहना था कि गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार वर्षों से यहां रह रहे हैं और उन्हें अचानक असुविधा में नहीं डाला जा सकता। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक परिवार को सम्मानपूर्वक नई जगह बसाया जाए। मौके पर मौजूद अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि स्थानांतरण की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से हो और लोगों को पर्याप्त समय दिया जाए। मंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को शिफ्टिंग की तैयारी के लिए कम से कम एक सप्ताह का समय मिलना चाहिए। साथ ही एनएचएआई और प्रशासन मिलकर सामान के स्थानांतरण तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए जिससे उसकी आजीविका, बच्चों की पढ़ाई या दैनिक जीवन प्रभावित हो।</p>
<p style="text-align:justify;">क्षेत्र के लोगों ने मंत्री के समक्ष अपनी समस्याएं रखीं। कई परिवारों ने बताया कि वे लंबे समय से इसी इलाके में रह रहे हैं और यदि उन्हें दूर बसाया गया तो रोजगार और बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो सकती है। इस पर मंत्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रभावित परिवारों को उनके वर्तमान निवास क्षेत्र के आसपास ही वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए। उनका मानना है कि पुनर्वास केवल जमीन देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि लोगों की सामाजिक और आर्थिक जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार सड़क परियोजना शहर की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजनाओं में शामिल है। इससे आने वाले वर्षों में यातायात व्यवस्था को मजबूती मिलेगी और शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा। लेकिन इसके साथ ही पुनर्वास की प्रक्रिया को संवेदनशील और मानवीय तरीके से पूरा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित परिवारों का सर्वेक्षण किया जा रहा है और पात्र लोगों को नियमानुसार लाभ देने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर, हुजूर तहसील के अंतर्गत आने वाले कोल्हूखेड़ी और मीरपुर क्षेत्र में भी प्रशासन ने शासकीय भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। एसडीएम विनोद सोनकिया के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमणों को हटाने के लिए अभियान चलाया। इस दौरान बुलडोजर की मदद से शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी। शहर में चल रही इन कार्रवाइयों को लेकर प्रशासन का कहना है कि विकास परियोजनाओं और शासकीय भूमि संरक्षण दोनों पर समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। वहीं स्थानीय लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि पुनर्वास की प्रक्रिया किस तरह लागू होती है और प्रभावित परिवारों को कब तक वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रायपुर समेत पांच शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत, हडको ने जारी किए टेंडर</title>
                                    <description><![CDATA[250 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं से बदलेगी शहरी तस्वीर, शासकीय परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर सरकार का जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/hudco-has-started-redevelopment-projects-in-five-cities-including-raipur/article-56216"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-redevelopment-projects.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में शहरी विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य के विभिन्न शहरों में लंबे समय से अनुपयोगी या कम उपयोग में आने वाली शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए पांच प्रमुख रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत की जा रही है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की ओर से इन परियोजनाओं को अमलीजामा पहनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी क्रम में हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (HUDCO) के माध्यम से परियोजनाओं के लिए टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल शहरों का स्वरूप बदलेगा, बल्कि शासकीय भूमि और परिसंपत्तियों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। प्रस्तावित रिडेवलपमेंट परियोजनाएं रायपुर, महासमुंद, राजनांदगांव, कोरबा और जगदलपुर में विकसित की जाएंगी। इन सभी परियोजनाओं को राज्य की रिडेवलपमेंट नीति के तहत क्रियान्वित किया जाएगा। इसके लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल को क्रियान्वयन एजेंसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन पहले ही तैयार किए जा चुके हैं। साथ ही निजी डेवलपर्स के चयन के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया भी तय की गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राज्य सरकार के अनुसार इन पांच परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है। वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के आधार पर इनकी अनुमानित कीमत करीब 250.30 करोड़ रुपये आंकी गई है। जिन स्थानों पर रिडेवलपमेंट किया जाना है उनमें रायपुर का बी.टी.आई. रोड शंकर नगर क्षेत्र, महासमुंद का क्लब पारा, राजनांदगांव का कैलाश नगर, कोरबा का कटघोरा और जगदलपुर का चांदनी चौक फेज-2 शामिल हैं। इन क्षेत्रों को स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण और संभावनाओं से भरपूर माना जाता है। इन परियोजनाओं में रायपुर की योजना को विशेष महत्व दिया जा रहा है। राजधानी के शंकर नगर क्षेत्र में बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने और सिंधु भवन के समीप प्रस्तावित परियोजना शहर के सबसे विकसित और व्यस्त इलाकों में से एक में स्थित है। यह क्षेत्र शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक गतिविधियों और आवासीय कॉलोनियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां आधुनिक अधोसंरचना विकसित होने से पूरे क्षेत्र की उपयोगिता और आकर्षण दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिडेवलपमेंट मॉडल के माध्यम से शहरों के भीतर मौजूद पुरानी और कम उपयोग वाली परिसंपत्तियों को नई उपयोगिता दी जा सकती है। इससे सरकार को नई भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता कम होगी और पहले से उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल संभव हो सकेगा। यही वजह है कि देश के कई बड़े शहरों में रिडेवलपमेंट परियोजनाओं को शहरी विकास का प्रभावी माध्यम माना जा रहा है। अब छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इन परियोजनाओं में सार्वजनिक-निजी सहभागिता यानी पीपीपी मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और निवेश का लाभ मिलेगा, वहीं सरकारी निगरानी के कारण परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहेगी। निजी डेवलपर्स के लिए भी यह अवसर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि उन्हें शहरों की प्राइम लोकेशन पर विकास कार्य करने का मौका मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आधुनिक और नागरिक-केंद्रित शहरी विकास के लिए लगातार काम कर रही है। रिडेवलपमेंट नीति के जरिए जर्जर और अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त परिसरों में बदला जाएगा। इससे शहरों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि यह पहल केवल भवन निर्माण परियोजनाओं तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि इन योजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों का समग्र कायाकल्प करना है। उन्होंने विशेष रूप से रायपुर की प्रस्तावित परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राजधानी के लिए एक आदर्श शहरी विकास मॉडल बन सकती है और भविष्य की परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक साबित होगी। इन परियोजनाओं के लागू होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ने की संभावना है। निर्माण कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं परियोजनाएं पूरी होने के बाद व्यावसायिक गतिविधियों में भी वृद्धि हो सकती है। शहरी नियोजन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन होता है तो यह राज्य के शहरी विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। टेंडर प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इन परियोजनाओं को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विकास परियोजनाओं में पेड़ों की कटाई पर सख्ती, हाईकोर्ट में पेश हुई ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026</title>
                                    <description><![CDATA[एक पेड़ काटने पर लगाने होंगे 20 पौधे, 80% पेड़ों के वैज्ञानिक प्रत्यारोपण का प्रस्ताव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/strictness-on-cutting-of-trees-in-development-projects-tree-translocation/article-56169"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tree-translocation-policy-2026.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में विकास कार्यों के नाम पर बड़ी संख्या में होने वाली पेड़ों की कटाई पर अब सख्ती दिखाई दे सकती है। राज्य सरकार ने 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' का मसौदा तैयार कर लिया है, जिसे मंगलवार को हाईकोर्ट की डबल बेंच के समक्ष पेश किया गया। प्रस्तावित नीति का मुख्य उद्देश्य सड़क, मेट्रो, रेलवे, फ्लाईओवर और अन्य बड़े निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों को काटने की बजाय उन्हें वैज्ञानिक तरीके से दूसरी जगह स्थानांतरित करना है। सरकार का कहना है कि तेजी से हो रहे शहरी विकास और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के बीच पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व देना जरूरी है। इसी सोच के तहत यह नीति तैयार की गई है, ताकि विकास और हरित संतुलन दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ा जा सके। किसी भी सरकारी या निजी निर्माण एजेंसी के लिए पेड़ों की कटाई अब पहला विकल्प नहीं होगी। एजेंसियों को पहले यह साबित करना होगा कि परियोजना के डिजाइन में बदलाव या अन्य तकनीकी विकल्पों के माध्यम से पेड़ों को बचाने की पूरी कोशिश की गई है। यदि इसके बावजूद पेड़ों को हटाना अपरिहार्य हो जाता है, तो प्रभावित पेड़ों में से कम से कम 80 प्रतिशत का वैज्ञानिक तरीके से प्रत्यारोपण करना अनिवार्य होगा। इसके अलावा यदि किसी पेड़ को काटने की अनुमति दी जाती है, तो उसके बदले 20 नए पौधे लगाने होंगे। इन पौधों के संरक्षण और विकास की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि इस नीति के पीछे ग्वालियर की थाटीपुर पुनर्विकास परियोजना एक बड़ा कारण बनी। उस परियोजना के दौरान कई पेड़ों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया था, लेकिन बाद में उनकी उचित देखभाल नहीं हो सकी। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में पेड़ नष्ट हो गए। इस मामले ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई सवाल खड़े किए थे। बाद में हाईकोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए सरकार से स्पष्ट और वैज्ञानिक नीति तैयार करने के निर्देश दिए थे। न्यायालय का मानना था कि केवल प्रत्यारोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पेड़ों के जीवित रहने और उनकी निगरानी के लिए भी प्रभावी व्यवस्था जरूरी है। नई नीति में इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए तकनीक का व्यापक उपयोग करने का प्रस्ताव रखा गया है। प्रत्यारोपित किए गए पेड़ों और उनके बदले लगाए गए नए पौधों की जियो-टैगिंग की जाएगी। इसके लिए एक केंद्रीकृत ऑनलाइन डैशबोर्ड विकसित किया जाएगा, जहां प्रत्येक पेड़ की लोकेशन, तस्वीर, स्वास्थ्य स्थिति और रखरखाव से जुड़ी जानकारी दर्ज रहेगी। इससे न केवल निगरानी आसान होगी बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी। अधिकारियों के अनुसार, आम नागरिक और संबंधित विभाग भी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पेड़ों की स्थिति पर नजर रख सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से इस तरह की नीति की मांग कर रहे थे। उनका कहना है कि बड़े शहरों में तेजी से बढ़ते निर्माण कार्यों के कारण हर साल हजारों पेड़ काटे जाते हैं, जिससे स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता पर असर पड़ता है। गर्मी बढ़ने, भूजल स्तर में गिरावट और वायु प्रदूषण जैसी समस्याओं के पीछे हरित क्षेत्र में लगातार कमी भी एक प्रमुख कारण मानी जाती है। ऐसे में यदि पेड़ों को बचाने और उनके प्रत्यारोपण की प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत किया जाता है तो इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे सकता है। केवल नीति बनाना पर्याप्त नहीं होगा। उसके प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर भी उतना ही ध्यान देना होगा। कई बार प्रत्यारोपित पेड़ों की देखभाल शुरुआती महीनों में नहीं हो पाती, जिससे उनकी जीवित रहने की संभावना कम हो जाती है। इसलिए सरकार द्वारा प्रस्तावित डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और जवाबदेही तय करने की व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए ड्राफ्ट पर आगे विचार किया जाएगा। आवश्यक सुझावों और संशोधनों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। यदि यह नीति लागू होती है तो मध्यप्रदेश उन राज्यों में शामिल हो जाएगा जहां विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर अधिक मजबूती देने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:36:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भोपाल मेट्रो की रफ्तार बढ़ेगी, जुलाई से दोनों ट्रैक पर संचालन</title>
                                    <description><![CDATA[सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा, CMRS निरीक्षण के बाद नया शेड्यूल होगा लागू; यात्रियों को कम इंतजार और ज्यादा फेरे मिलेंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/bhopal-metro-speed-will-increase-operation-on-both-tracks-from/article-56166"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-metro.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच अब यात्रियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अपनी धीमी रफ्तार और कम फ्रीक्वेंसी के कारण चर्चा में रही भोपाल मेट्रो जल्द ही नए अंदाज में दिखाई देगी। मेट्रो के सुभाष नगर से एम्स तक के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है और जुलाई से इसके पूरी क्षमता के साथ संचालन की तैयारी शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का दावा है कि नए सिस्टम के लागू होने के बाद न केवल मेट्रो की गति बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों के फेरे भी बढ़ जाएंगे और यात्रियों को लंबे इंतजार से राहत मिलेगी। मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के अनुसार सुभाष नगर से एम्स तक करीब सात किलोमीटर लंबे ट्रैक पर आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। इसके बाद अब कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम को निरीक्षण के लिए आमंत्रित किया गया है। संभावना है कि अगले सप्ताह यह टीम भोपाल पहुंचकर पूरे सिस्टम का परीक्षण करेगी। यदि निरीक्षण के बाद हरी झंडी मिल जाती है तो जुलाई से नए सिस्टम के साथ मेट्रो का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल मेट्रो एक सीमित व्यवस्था के तहत संचालित हो रही है। वर्तमान में सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह लागू नहीं होने के कारण मेट्रो केवल एक ट्रैक पर चल रही है। यही वजह है कि यात्रियों को काफी लंबा इंतजार करना पड़ता है। अभी ट्रेनें दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सीमित समय के लिए चलाई जा रही हैं और उनकी फ्रीक्वेंसी लगभग 75 मिनट रखी गई है। इससे कई लोग मेट्रो का नियमित उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अभी सुभाष नगर से एम्स तक डाउन ट्रैक पर ही ट्रेन दोनों दिशाओं में संचालित की जा रही है। यानी जिस ट्रैक से ट्रेन आगे जाती है, उसी ट्रैक से वापस भी लौटती है। अप ट्रैक का उपयोग नहीं हो पाने के कारण मेट्रो की पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। यही वजह है कि ट्रेनों की संख्या और गति दोनों प्रभावित हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सिग्नलिंग सिस्टम किसी भी मेट्रो नेटवर्क की रीढ़ माना जाता है। यह सिस्टम तय करता है कि ट्रेन किस गति से चलेगी, ट्रेनों के बीच कितना अंतर रहेगा और किसी भी आपात स्थिति में किस प्रकार नियंत्रण किया जाएगा। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम के बिना एक साथ कई ट्रैक पर सुरक्षित संचालन संभव नहीं होता। भोपाल मेट्रो में अब जो तकनीक लागू की जा रही है, वह दिल्ली मेट्रो जैसी आधुनिक व्यवस्था पर आधारित है। इस तकनीक के लागू होने के बाद सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि मेट्रो दोनों ट्रैक पर एक साथ दौड़ सकेगी। इससे ट्रेनों के बीच का अंतर काफी कम हो जाएगा और यात्रियों को हर थोड़ी देर में मेट्रो उपलब्ध हो सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे मेट्रो की लोकप्रियता भी बढ़ेगी और यात्री संख्या में इजाफा होगा।  कई यात्रियों का कहना है कि 75 मिनट का इंतजार सार्वजनिक परिवहन के लिए काफी लंबा समय है। ऐसे में लोग बस, ऑटो या निजी वाहनों को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन नए सिस्टम के बाद यह स्थिति बदल सकती है। मेट्रो प्रबंधन की योजना है कि सिग्नलिंग सिस्टम चालू होने के बाद नया टाइम टेबल जारी किया जाए। इसमें सुबह और शाम के व्यस्त समय को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। खासतौर पर कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और नियमित यात्रियों को इसका लाभ मिलेगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो आने वाले महीनों में भोपाल मेट्रो शहर के प्रमुख सार्वजनिक परिवहन साधनों में शामिल हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल और इंदौर मेट्रो परियोजना के तहत कुल लगभग 30 किलोमीटर लंबे रूट पर काम किया जा रहा है। वर्तमान में केवल सीमित हिस्से में संचालन हो रहा है, लेकिन धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क को विकसित किया जा रहा है। ऐसे में सिग्नलिंग सिस्टम का पूरा होना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यात्रियों को अब CMRS की अंतिम मंजूरी का इंतजार है। निरीक्षण रिपोर्ट सकारात्मक आने के बाद भोपाल मेट्रो न सिर्फ तेज रफ्तार से दौड़ेगी, बल्कि अधिक ट्रेनों और बेहतर समय-सारिणी के साथ शहर की परिवहन व्यवस्था को नई दिशा देने का काम भी करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:36:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर महापौर का सख्त संदेश, ठेकेदारों के साथ लापरवाह अफसरों पर भी होगी कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[छह घंटे चली समीक्षा बैठक में विकास कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी, करबला तालाब परियोजना की खामियों को लेकर अधिकारियों को लगाई फटकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/raipur-mayors-strict-message-action-will-be-taken-against-negligent/article-56092"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-mayor-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे ने शहर में चल रहे विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और परियोजनाओं में सामने आ रही खामियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम मुख्यालय में सोमवार को करीब छह घंटे तक चली समीक्षा बैठक में महापौर ने अधिकारियों और अभियंताओं को स्पष्ट संदेश दिया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी निर्माण कार्य में गड़बड़ी पाए जाने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है तो उसकी निगरानी करने वाले अधिकारी और इंजीनियर भी जवाबदेही से बच नहीं सकते। बैठक के दौरान महापौर ने विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। इस दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जहां कार्यों में देरी, दस्तावेजी खामियां और निगरानी में लापरवाही की बात सामने आई। महापौर ने अधिकारियों से कहा कि विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उनका लाभ समय पर आम लोगों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने अपर आयुक्त को निर्देश दिए कि जिन अधिकारियों की निगरानी में लापरवाही सामने आई है, उनकी जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा करबला तालाब विकास योजना को लेकर हुई। समीक्षा के दौरान इस परियोजना से जुड़े कई दस्तावेजों और कार्यों में अनियमितताओं की जानकारी सामने आई। बताया गया कि मेजरमेंट बुक (एमबी) में कुछ त्रुटियां पाई गई हैं, जिसके बाद महापौर ने संबंधित अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि किसी भी विकास परियोजना में रिकॉर्ड और दस्तावेजों की शुद्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि कागजी कार्यवाही में ही गड़बड़ी होगी तो परियोजना की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों प्रभावित होंगी। महापौर ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों से जुड़े दस्तावेजों में त्रुटियां और निर्माण कार्यों में लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि जनता के पैसे से होने वाले कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में केवल ठेकेदारों पर कार्रवाई कर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जा सकती, बल्कि निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कई विकास कार्यों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन जमीन पर उनका काम शुरू नहीं हो पाया है। इस पर महापौर ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं को स्वीकृति मिलने के बाद उनका समय पर क्रियान्वयन होना चाहिए। यदि काम शुरू होने में अनावश्यक देरी हो रही है तो इसके कारणों की जानकारी सार्वजनिक रूप से दर्ज की जानी चाहिए। महापौर ने कहा कि रायपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और यहां की बढ़ती आबादी को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की जिम्मेदारी है। ऐसे में विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी लंबित परियोजनाओं की सूची तैयार की जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक परियोजना की वर्तमान स्थिति का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध हो।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं की अलग से समीक्षा की जाएगी। जिन मामलों में लापरवाही या अनावश्यक देरी पाई जाएगी, वहां जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विभागीय कार्रवाई भी की जा सकती है। महापौर ने कहा कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और समयसीमा दोनों पर विशेष ध्यान देना होगा, क्योंकि जनता परिणाम देखना चाहती है। समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, 15वें वित्त आयोग की योजनाएं, प्रधानमंत्री आवास योजना, सांसद निधि, विधायक निधि, महापौर निधि, पार्षद निधि और सामान्य निधि से संचालित विभिन्न विकास कार्यों की भी जोनवार समीक्षा की गई। अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिस पर महापौर ने कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि योजनाओं का उद्देश्य केवल बजट खर्च करना नहीं बल्कि नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक में मौजूद अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक जोन में चल रहे कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता मानकों का पालन हो। महापौर ने कहा कि कई बार परियोजनाएं समय पर पूरी तो हो जाती हैं, लेकिन गुणवत्ता में कमी के कारण कुछ ही समय बाद समस्याएं सामने आने लगती हैं। इसलिए गुणवत्ता और समयसीमा दोनों को समान महत्व दिया जाना चाहिए। करीब छह घंटे तक चली इस समीक्षा बैठक में अपर आयुक्त लोकेश्वर साहू, विनोद पाण्डेय, कृष्णा खटीक, मुख्य अभियंता संजय बागड़े, अधीक्षण अभियंता राजेश राठौर, इमरान खान, सभी जोन कमिश्नर, कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदार मौजूद रहे। बैठक के अंत में महापौर ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि आने वाले समय में विकास कार्यों की नियमित समीक्षा जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 15:27:31 +0530</pubDate>
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