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                <title>Global Tension - दैनिक जागरण</title>
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                <title>उत्तर कोरिया ने बदली परमाणु नीति, किम जोंग उन पर हमला होने पर होगा न्यूक्लियर अटैक</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर कोरिया ने नई परमाणु नीति अपनाई है। किम जोंग उन पर हमले की स्थिति में स्वत: परमाणु हमला करने का प्रावधान किया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/north-korea-changes-nuclear-policy-will-launch-nuclear-attack-if/article-53819"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/kim-jong-un-north-korea-nuclear-policy.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्तर कोरिया ने अपनी परमाणु नीति में एक बड़ा बदलाव किया है। हाल की रिपोर्ट्स के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">यदि देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन की हत्या कर दी जाती है या किसी विदेशी हमले में उन्हें गंभीर चोटें आती हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उत्तर कोरिया तुरंत और बिना किसी अतिरिक्त आदेश के परमाणु हमला कर सकता है। इस निर्णय ने दुनिया के कई देशों में चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि यह बदलाव मार्च में प्योंगयांग में हुई सुप्रीम पीपुल्स असेंबली की बैठक के दौरान किया गया। दक्षिण कोरिया की नेशनल इंटेलिजेंस एजेंसी ने भी इस बारे में जानकारी साझा की है। नई नीति में साफ कहा गया है कि अगर देश की न्यूक्लियर कमांड सिस्टम पर हमला होता है या नेतृत्व पर खतरा मडराता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो तुरंत परमाणु जवाबी हमला किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ महीने पहले ईरान के कई प्रमुख नेताओं की अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई में मौत हो गई थी। ऐसा कहा जा रहा है कि उसी घटना के बाद उत्तर कोरिया ने अपनी सुरक्षा रणनीति को और आक्रामक बना लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि प्योंगयांग को इस बात का डर है कि किसी युद्ध की स्थिति में सबसे पहले उसके शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया जा सकता है। कोरिया मामलों के जानकार प्रोफेसर आंद्रेई लैंकोव के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ईरान पर हुए हमलों ने उत्तर कोरिया को कड़ा संदेश दिया है। उनका कहना है कि उत्तर कोरिया पहले से ही ऐसी नीति पर काम कर रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन अब इसे संविधान में शामिल करके और मजबूत किया गया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उत्तर कोरिया को दुनिया के सबसे बंद देशों में से एक माना जाता है। वहां विदेशी नागरिकों की आवाजाही काफी सीमित है और इंटरनेट नेटवर्क भी लगभग पूरी तरह सरकारी नियंत्रण में रहता है। इसलिए इजरायल जैसी खुफिया एजेंसियों के लिए वहां निगरानी रखना वैसा आसान नहीं है जैसा ईरान में हुआ था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि किम जोंग उन अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क रहते हैं। वे अक्सर भारी सुरक्षा घेरे में यात्रा करते हैं और हवाई यात्रा से कतराते हैं। कई बार उन्हें बख्तरबंद ट्रेन से यात्रा करते देखा गया है। सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर कोरिया अब सैटेलाइट निगरानी और आधुनिक सैन्य तकनीकों को सबसे बड़ा खतरा मान रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया की सीमा के पास नई लंबी दूरी की तोप प्रणाली तैनात करने की तैयारी भी शुरू की है। सरकारी मीडिया के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किम जोंग उन ने हाल ही में नई 155 मिलीमीटर सेल्फ प्रोपेल्ड गन सिस्टम का निरीक्षण किया। दावा किया गया है कि यह सिस्टम 37 मील से ज्यादा दूरी तक हमला करने की क्षमता रखता है। दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल सीमा से करीब 35 मील दूर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए इस तैनाती के चलते तनाव और बढ़ सकता है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नई तोप प्रणाली इस साल सीमा क्षेत्र में तैनात की जा सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 11:48:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>दक्षिणी लेबनान में इजरायली एयरस्ट्राइक, 9 की मौत; सीजफायर कोशिशों के बीच बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[सिडोन क्षेत्र में हमले के बाद जवाबी रॉकेट दागे गए, कूटनीतिक प्रयास कमजोर पड़ते नजर आए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/israeli-airstrike-kills-9-in-southern-lebanon-tensions-rise-amid/article-49016"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/israeli-airstrike-kills.jpg" alt=""></a><br /><p>दक्षिणी लेबनान में  आज हुए इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 9 लोगों की मौत हो गई। सिडोन इलाके के आसपास हुए इन हमलों ने सीमा पर जारी तनाव को और बढ़ा दिया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब क्षेत्र में संघर्ष कम करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत की कोशिशें जारी हैं।</p>
<p>स्थानीय सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, हमले एक साथ कई जगहों पर किए गए। अदलौन इलाके में पहले हमले में चार लोगों की जान गई। वहीं, मियेह-मियेह शरणार्थी शिविर में एक इमारत को निशाना बनाए जाने से दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। सबसे ज्यादा नुकसान हब्बूश क्षेत्र में हुआ, जहां तीन लोगों की मौत हुई और 18 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।</p>
<p>इन हमलों के तुरंत बाद लेबनान के सशस्त्र समूह हिज़्बुल्लाह ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उत्तरी इजरायल की ओर करीब 30 रॉकेट दागे। सीमा से लगे कई इलाकों में सायरन बजने लगे। हालांकि, शुरुआती रिपोर्ट्स में इजरायल की तरफ किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन हालात गंभीर बने हुए हैं।</p>
<p>इस बीच, संघर्ष को रोकने के लिए चल रही कूटनीतिक कोशिशों को भी झटका लगा है। अमेरिका की ओर से एक प्रस्तावित सीजफायर योजना सामने आई थी, जिसे मध्यस्थों के जरिए ईरान तक पहुंचाया गया बताया जा रहा है। हालांकि, ईरान ने इस पहल को सार्वजनिक रूप से खारिज कर दिया है, जिससे बातचीत की संभावनाएं कमजोर पड़ती दिख रही हैं।</p>
<p>ईरान की प्रतिक्रिया से साफ संकेत मिलता है कि फिलहाल किसी समझौते की गुंजाइश कम है। वहीं, पाकिस्तान की भूमिका एक मध्यस्थ के रूप में सामने आई है, जिसने दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित करने की कोशिश की है।</p>
<p>मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव का असर वैश्विक स्तर पर भी दिखने लगा है। तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ रही है, जिससे कई देशों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता के संकेत मिल रहे हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहा, तो यह संघर्ष बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल सकता है। फिलहाल, कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीनी हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं।</p>
<p>आने वाले दिन इस बात का फैसला करेंगे कि क्या बातचीत के जरिए हालात संभल पाएंगे या फिर यह टकराव और गहराएगा।</p>
<p>-------------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 15:02:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान का सख्त ऐलान: मुआवजा और प्रतिबंध हटे बिना जंग नहीं रुकेगी, अमेरिका से गारंटी की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान बोला—आर्थिक प्रतिबंध हटाओ, अमेरिका दखल नहीं देगा इसकी लिखित गारंटी चाहिए; इजराइल पर जारी हमले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-tough-announcement-war-will-not-stop-without-compensation-and/article-48903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/international-(43).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल युद्धविराम के पक्ष में नहीं है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई ने कहा है कि जब तक देश को हुए नुकसान की भरपाई नहीं होती और उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक जंग जारी रहेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराती जा रही है।</p>
<p>रजेई ने ईरान के आधिकारिक टीवी चैनल पर दिए बयान में कहा कि उनकी शर्तें साफ हैं—आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त किया जाए और अमेरिका यह गारंटी दे कि भविष्य में वह ईरान के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उनके मुताबिक, ईरानी सेना पूरी क्षमता के साथ अभियान चला रही है और देश का नेतृत्व स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए है।</p>
<p>यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब पिछले कुछ दिनों से ईरान और इजराइल के बीच हमले तेज हुए हैं। इजराइल के कई इलाकों में मिसाइल हमलों के कारण सायरन बजते रहे, जबकि कुछ स्थानों पर इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। वहीं, इजराइल ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए लेबनान सहित अन्य क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई की है।</p>
<p>ईरान का दावा है कि यह संघर्ष पहले ही समाप्त हो सकता था, लेकिन इजराइल के रुख के कारण हालात बिगड़े। रजेई के अनुसार, अमेरिका युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ रहा था, लेकिन इजराइल ने सैन्य कार्रवाई जारी रखने पर जोर दिया।</p>
<p>इस बीच अमेरिका की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान अलग-अलग संकेत दे रहे हैं। एक ओर वे बातचीत की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई को लेकर भी बयान सामने आए हैं। इससे क्षेत्रीय स्थिति और जटिल हो गई है।</p>
<p>इस युद्ध का असर अब वैश्विक स्तर पर भी दिखने लगा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। एशियाई बाजारों में भी अस्थिरता दर्ज की गई है, जिससे आर्थिक दबाव की स्थिति बन रही है।</p>
<p>------------------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:37:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हॉर्मुज स्ट्रेट पर तनाव बढ़ा, ट्रम्प की चेतावनी से बाजार में हलचल; निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह</title>
                                    <description><![CDATA[मिडिल ईस्ट संकट, महंगा कच्चा तेल और विदेशी निवेश की बिकवाली—इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे 5 बड़े फैक्टर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/tension-increases-on-the-strait-of-hormuz-trumps-warning-stirs/article-48752"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-22t140112.555.jpg" alt=""></a><br /><p>मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी चेतावनी के बीच भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह बेहद अहम माना जा रहा है। 23 मार्च से शुरू हो रहे कारोबारी सप्ताह में निवेशकों को भारी उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधि और रुपये की कमजोरी बाजार की दिशा तय करेंगे।</p>
<p>अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह नहीं खोला गया, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे पर कार्रवाई कर सकता है। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है। ईरान ने भी पलटवार की चेतावनी दी है, जिससे भू-राजनीतिक तनाव और गहरा सकता है।</p>
<p>इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिख रहा है। ब्रेंट क्रूड 112 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो पिछले कई महीनों का उच्च स्तर है। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगा तेल महंगाई बढ़ाने वाला कारक बन सकता है, जिससे कॉर्पोरेट मुनाफे और बाजार की धारणा प्रभावित होती है।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। मार्च में अब तक बड़े पैमाने पर पूंजी निकासी दर्ज की गई है। हालांकि घरेलू निवेशकों ने कुछ हद तक इस दबाव को संतुलित किया है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी निवेशकों का रुख बाजार के लिए निर्णायक रहेगा।</p>
<p>इसी बीच, भारतीय रुपया भी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 93.73 तक गिर गया है। कमजोर रुपया आयात लागत को बढ़ाता है, जिसका असर कंपनियों की लागत और उपभोक्ता कीमतों पर पड़ता है। इससे बाजार में दबाव और बढ़ सकता है।</p>
<p>तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर फिलहाल मजबूत सपोर्ट के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और गिरावट संभव है। वहीं, 23,400 के ऊपर टिकने पर ही मजबूती के संकेत मिल सकते हैं।</p>
<p>----------------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 22 Mar 2026 14:03:13 +0530</pubDate>
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