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                <title>International News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>International News RSS Feed</description>
                
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                <title>ऑकलैंड में भावुक हुए पीएम मोदी, बोले- 25 साल पुराना मफलर आज भी संभालकर रखा है</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए साझा की पुरानी यादें, भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी, जनकल्याण और भविष्य के सहयोग पर दिया विशेष जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-became-emotional-in-auckland-and-said-i/article-58507"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने न्यूजीलैंड दौरे के अंतिम दिन ऑकलैंड में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए एक भावुक याद साझा की, जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। उन्होंने बताया कि करीब 25 से 30 वर्ष पहले, जब वे किसी सरकारी पद पर नहीं थे, तब पहली बार न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। उसी यात्रा के दौरान उन्हें एक मफलर, एक कैप और दस्तानों का एक सेट उपहार में मिला था। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन उपहारों में मिला मफलर आज भी उन्होंने संभालकर रखा है और इसी दौरे के दौरान वही मफलर पहनकर कार्यक्रम में पहुंचे हैं। उनके इस व्यक्तिगत अनुभव ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच वर्षों पुराने आत्मीय संबंधों की झलक भी पेश की।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि समय बदल सकता है, जिम्मेदारियां बदल सकती हैं, लेकिन लोगों से मिले स्नेह और सम्मान की यादें कभी पुरानी नहीं होतीं। उन्होंने कहा कि यह मफलर केवल एक वस्तु नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच मित्रता और अपनत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि उन्हें खुशी है कि वर्षों बाद फिर उसी देश में आने और भारतीय समुदाय से मिलने का अवसर मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय मूल के लोगों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि हजारों किलोमीटर दूर रहने के बावजूद भारतीय समुदाय का दिल हमेशा भारत के साथ धड़कता है। उन्होंने कहा कि भले ही शरीर न्यूजीलैंड में हो, लेकिन मन भारत में ही रहता है। यही कारण है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय देश की हर उपलब्धि पर गर्व महसूस करते हैं और उसे अपनी सफलता मानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि साझा मूल्यों, विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लिए किसी देश की जनसंख्या या आकार से अधिक महत्वपूर्ण उसकी जनकल्याण की भावना है। उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड ने कई ऐसे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं, जिनसे भारत लगातार सीखता रहा है। उन्होंने विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया कि न्यूजीलैंड दुनिया का पहला देश था जिसने महिलाओं को मतदान का अधिकार दिया और यह लोकतांत्रिक मूल्यों की दिशा में ऐतिहासिक कदम था।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के भविष्य के सहयोग की संभावनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज का दौर प्रतिस्पर्धा से अधिक सहयोग का है। यदि सोशल मीडिया और डिजिटल दुनिया की भाषा में कहा जाए तो यह "कोलेबरेशन" का समय है। भारत और न्यूजीलैंड कई क्षेत्रों में मिलकर नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से खेल, शिक्षा, कृषि, तकनीक और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया।</p>
<p style="text-align:justify;">खेलों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड की रग्बी टीम पूरी दुनिया में अपनी उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है। भारत भी रग्बी के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है और इसके लिए न्यूजीलैंड के अनुभव तथा विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहता है। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देश इस दिशा में साथ काम करें तो भारतीय खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने अंतरिक्ष क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जब भारत का चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरा था, तब न्यूजीलैंड में भी लोगों ने इस उपलब्धि का उत्साहपूर्वक स्वागत किया था। उन्होंने कहा कि यह केवल भारत की सफलता नहीं थी, बल्कि विज्ञान और मानवता की साझा उपलब्धि थी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड की कई स्पेस कंपनियां भारत के साथ मिलकर काम कर चुकी हैं और आने वाले वर्षों में यह सहयोग और मजबूत होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने वाले 18 महत्वपूर्ण फैसलों और 10 समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। दोनों नेताओं ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर लगभग 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य भी निर्धारित किया। इसके अलावा निवेश, शिक्षा, कृषि, रक्षा, नवाचार और तकनीकी सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में न्यूजीलैंड सरकार की ओर से गाला लंच का आयोजन किया गया, जिसमें दोनों देशों के उद्योगपतियों और प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान भारत और न्यूजीलैंड के कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री का पारंपरिक माओरी शैली में स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो दोनों देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय समुदाय के बीच अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि प्रवासी भारतीय भारत की सबसे बड़ी ताकतों में से एक हैं। उन्होंने विदेशों में रह रहे भारतीयों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से दुनिया के हर कोने में भारत का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार हमेशा प्रवासी भारतीयों के साथ खड़ी है और उनके हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल फिर महंगे, नई कीमतें 11 जुलाई से लागू</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने पेट्रोल पर 13.18 रुपये और हाई-स्पीड डीजल पर 13.80 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की। नई दरों के बाद पेट्रोल 310.71 और डीजल 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/petrol-and-diesel-again-expensive-in-pakistan-new-prices-implemented/article-58480"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pakistan-fuel-price.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पाकिस्तान में आम लोगों को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। सरकार ने पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है, जिसके बाद 11 जुलाई से नई दरें लागू हो गई हैं। सरकारी अधिसूचना के अनुसार पेट्रोल की कीमत में 13.18 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 13.80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की गई है। इस बढ़ोतरी के बाद देश में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 310.71 पाकिस्तानी रुपये और हाई-स्पीड डीजल की कीमत 323.30 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई है। लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों का असर आम लोगों के साथ-साथ परिवहन, कृषि, उद्योग और अन्य क्षेत्रों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पाकिस्तान पहले से ही महंगाई और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में नई बढ़ोतरी से रोजमर्रा की वस्तुओं और सेवाओं की लागत बढ़ने की संभावना भी बढ़ गई है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बदलाव का सीधा असर माल ढुलाई, सार्वजनिक परिवहन और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालिया बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी इस वर्ष के उच्चतम स्तर से नीचे बनी हुई हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 3 अप्रैल को हाई-स्पीड डीजल की कीमत 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जाता है। वहीं पेट्रोल की कीमत भी इसी अवधि में 458.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। ईंधन की कीमतों में तेजी का सिलसिला फरवरी के आखिर से शुरू हुआ था। बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों का इसका सीधा असर पड़ा। इसके बाद पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिला। सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति और आर्थिक आवश्यकताओं को देखते हुए ईंधन की नई कीमतें तय कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक आयातित तेल पर निर्भर है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का असर घरेलू ईंधन दरों पर भी दिखाई देता है। इसके अलावा मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव भी ईंधन की लागत को प्रभावित करता है। यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार संशोधन किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की ओर से ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ हुए समझौतों और कर ढांचे में बदलाव को भी एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। सरकार ने 1 जुलाई से क्लाइमेट सपोर्ट लेवी को बढ़ाकर 5 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर कर दिया है। हालांकि इसके साथ पेट्रोलियम लेवी में कुछ समायोजन भी किया गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर लगभग 80 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी वसूली जा रही है, जबकि पेट्रोल पर 70 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर पेट्रोलियम लेवी के साथ 5 रुपये प्रति लीटर क्लाइमेट सपोर्ट लेवी अलग से लागू है। इसके अलावा कस्टम ड्यूटी और अन्य शुल्क भी ईंधन की अंतिम कीमत में शामिल हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हाई-स्पीड डीजल पर कुल कर और शुल्क करीब 101 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाता है, जबकि पेट्रोल पर यह आंकड़ा लगभग 95 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर है। इनमें कस्टम ड्यूटी, पेट्रोलियम लेवी, क्लाइमेट सपोर्ट लेवी और अन्य नियामकीय शुल्क शामिल हैं। इसके अतिरिक्त केरोसिन और लाइट डीजल ऑयल पर भी अलग-अलग दरों से पेट्रोलियम लेवी वसूली जा रही है। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार के लिए राजस्व बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की शर्तों का पालन करने के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। दूसरी ओर आम उपभोक्ताओं को लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों के कारण अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 13:27:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>न्यूजीलैंड पहुंचे पीएम मोदी, 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक दौरा</title>
                                    <description><![CDATA[द्विपक्षीय वार्ता में मुक्त व्यापार समझौते पर होगी अहम चर्चा, ऑकलैंड में 40 हजार भारतीयों को करेंगे संबोधित; ऑस्ट्रेलिया दौरे में BBL के भारत में पहले मैच का भी किया ऐलान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pm-modi-reaches-new-zealand-historic-visit-by-indian-prime/article-58414"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(7).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय विदेश दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड पहुंच गए हैं। करीब चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह ऐतिहासिक दौरा माना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड की यात्रा की थी। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यूजीलैंड पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस यात्रा के दौरान उनका मुख्य फोकस भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करना, व्यापारिक संबंधों का विस्तार करना और विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को नई गति देना है। प्रधानमंत्री की यात्रा ऐसे समय हो रही है जब दोनों देश आपसी व्यापार और निवेश बढ़ाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की शुरुआत न्यूजीलैंड सरकार के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता से होगी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने पर चर्चा होगी। माना जा रहा है कि यदि यह समझौता आगे बढ़ता है तो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, डेयरी, शिक्षा, पर्यटन और तकनीकी सहयोग को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। व्यापारिक संगठनों की भी इस समझौते पर विशेष नजर बनी हुई है क्योंकि इससे भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के लिए नए अवसर खुल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री अपने दौरे के दौरान एक प्रमुख बिजनेस कार्यक्रम में भी हिस्सा लेंगे, जहां भारत और न्यूजीलैंड के उद्योगपतियों, निवेशकों और व्यापारिक प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने, नई परियोजनाओं को बढ़ावा देने और आर्थिक सहयोग को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। सरकार का मानना है कि दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक साझेदारी भविष्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा कर सकती है। दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी एक खेल कार्यक्रम में भी शामिल होंगे। भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेल संबंधों को भी दोनों देशों की मित्रता का अहम आधार माना जाता है। क्रिकेट समेत कई खेलों में दोनों देशों के बीच लंबे समय से सहयोग रहा है और इस यात्रा के दौरान खेलों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री के दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम ऑकलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ संवाद रहेगा। यहां करीब 40 हजार भारतीय मूल के लोगों को प्रधानमंत्री संबोधित करेंगे। इस कार्यक्रम को लेकर भारतीय समुदाय में खासा उत्साह देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए 'किया ओरा मोदी' नाम से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया है। भारतीय समुदाय का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत करेगी तथा विदेशों में बसे भारतीयों के साथ भारत के संबंधों को नई मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने एक बड़ी खेल घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित बिग बैश लीग (बीबीएल) का उद्घाटन मुकाबला इस वर्ष भारत में आयोजित किया जाएगा। यह मुकाबला 12 दिसंबर को चेन्नई के ऐतिहासिक एमए चिदंबरम स्टेडियम (चेपॉक) में खेला जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यह पहली बार होगा जब ऑस्ट्रेलिया की घरेलू टी-20 लीग का कोई मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के बाहर आयोजित किया जाएगा। क्रिकेट जगत इसे दोनों देशों के बीच खेल सहयोग का नया अध्याय मान रहा है। क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का भी मानना है कि भारत जैसे बड़े क्रिकेट बाजार में बीबीएल का पहला मैच आयोजित होने से लीग को वैश्विक पहचान मिलेगी और दोनों देशों के क्रिकेट संबंध और मजबूत होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>एमबाप्पे पर पैराग्वे की सीनेटर का विवादित हमला: इंटरव्यू में दी गाली, फुटबॉल वर्ल्ड कप में बढ़ा नया बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[मैच के बाद हाथ न मिलाने की घटना से शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा, पैराग्वे सरकार ने भी सीनेटर के बयान से बनाई दूरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/controversial-attack-by-paraguay-senator-on-mbapp%C3%A9-abuses-in-interview/article-58299"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/kylian-mbappe.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान मैदान पर खिलाड़ियों के बीच हुई एक छोटी-सी घटना अब अंतरराष्ट्रीय विवाद का रूप ले चुकी है। फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे और पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला के बीच शुरू हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब अमारिला ने एक इंटरव्यू में एमबाप्पे के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए उन्हें ‘सन ऑफ बिच’ कहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने पहले दिए गए विवादित बयानों पर माफी मांगने से भी साफ इनकार कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने खेल जगत के साथ-साथ राजनीतिक हलकों में भी नई बहस छेड़ दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह विवाद 5 जुलाई को खेले गए फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप के राउंड ऑफ-16 मुकाबले के बाद शुरू हुआ था। इस मैच में फ्रांस ने पैराग्वे को 1-0 से हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई थी। मुकाबला खत्म होने के बाद पैराग्वे के गोलकीपर ऑरलैंडो गिल फ्रांस के कप्तान किलियन एमबाप्पे से हाथ मिलाने के लिए आगे बढ़े। आरोप है कि एमबाप्पे ने उन्हें नजरअंदाज कर दिया और बिना हाथ मिलाए आगे बढ़ गए। इस व्यवहार से नाराज होकर गिल ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए फुटबॉल उनकी ओर उछाल दी थी। यह दृश्य कैमरों में कैद हो गया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के बाद पैराग्वे की सीनेटर सेलेस्टे अमारिला ने सोशल मीडिया पर एमबाप्पे की आलोचना करते हुए उन्हें घमंडी करार दिया था। इसके साथ ही उन्होंने ऐसी टिप्पणियां भी कीं, जिन्हें नस्लीय और व्यक्तिगत माना गया। उनके इन बयानों की दुनियाभर में आलोचना हुई और कई लोगों ने इसे खेल भावना के खिलाफ बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद यहीं नहीं रुका। स्पेन के अखबार 'मार्का' को दिए एक इंटरव्यू में अमारिला ने अपने बयान को और तीखा करते हुए कहा कि जब ऑरलैंडो गिल ने पूरी विनम्रता के साथ एक पैराग्वेयन खिलाड़ी की तरह हाथ बढ़ाया, तब एमबाप्पे ने हाथ मिलाने से इनकार कर दिया। उन्होंने इस व्यवहार को अपमानजनक बताते हुए एमबाप्पे के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि ऐसा व्यवहार फ्रांसीसी संस्कृति का हिस्सा नहीं हो सकता। अमारिला ने इंटरव्यू में यह भी कहा कि उनका गुस्सा फ्रांस से नहीं बल्कि केवल एमबाप्पे के व्यवहार से है। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने बचपन से फ्रेंच स्कूल में पढ़ाई की है, फ्रेंच भाषा जानती हैं और फ्रांस से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले वर्ष उन्होंने अपने परिवार के साथ फ्रांस में क्रिसमस मनाया था, इसलिए उनके बयान को पूरे फ्रांस के खिलाफ नहीं देखा जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर एमबाप्पे ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अमारिला को 'घृणित महिला' बताते हुए कहा था कि इस तरह की टिप्पणियां किसी सार्वजनिक प्रतिनिधि को शोभा नहीं देतीं। उन्होंने कहा कि खेल के मैदान पर हार-जीत होती रहती है, लेकिन खिलाड़ियों के खिलाफ व्यक्तिगत और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। विवाद बढ़ने के बाद पैराग्वे सरकार को भी सामने आना पड़ा। सरकार ने आधिकारिक बयान जारी कर सीनेटर अमारिला की टिप्पणियों से दूरी बना ली। सरकार ने कहा कि यह बयान उन मूल्यों और सिद्धांतों के खिलाफ हैं, जिनका पालन पैराग्वे करता है। सरकार ने स्पष्ट किया कि खेल के मंच पर सम्मान और आपसी सौहार्द बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब फुटबॉल वर्ल्ड कप पहले से ही कई विवादों के कारण चर्चा में है। हाल के दिनों में टूर्नामेंट के दौरान कई ऐसे घटनाक्रम हुए हैं, जिन्होंने खेल से ज्यादा विवादों को सुर्खियों में ला दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कड़ी में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से जुड़ा मामला भी काफी चर्चा में रहा। ट्रम्प ने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप के बाद अमेरिकी खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन का एक मैच का प्रतिबंध हटाया गया। इस फैसले के बाद फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फैन्टिनो पर राजनीतिक दबाव में निर्णय लेने के आरोप लगे। इस मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के एथिक्स कमीशन तक शिकायत पहुंची और खेल प्रशासन में राजनीतिक दखल को लेकर नई बहस शुरू हो गई। वर्ल्ड कप का एक और बड़ा विवाद अर्जेंटीना और मिस्र के बीच खेले गए मुकाबले में देखने को मिला। मिस्र फुटबॉल संघ ने रेफरी के फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) का गलत इस्तेमाल किया गया। संघ ने आरोप लगाया कि विवादित फैसलों ने मैच का परिणाम प्रभावित किया। हालांकि फीफा ने रेफरी का बचाव करते हुए कहा कि मैच अधिकारियों ने नियमों के अनुसार ही निर्णय लिए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोदी बोले- भारत और इंडोनेशिया साथ आएं तो ‘कुछ-कुछ’ नहीं, ‘बहुत कुछ’ होता है, जकार्ता में रिश्तों को मिली नई मजबूती</title>
                                    <description><![CDATA[20 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर, ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट देगा भारत; राष्ट्रपति प्रबोवो ने कहा- मैं मोदी के नेतृत्व और योजनाओं से सीख लेता हूं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/modi-said-if-india-and-indonesia-come-together-not/article-58129"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को नई दिशा देने वाले दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बात कही। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने लोकप्रिय बॉलीवुड फिल्म के गीत का जिक्र करते हुए कहा कि इंडोनेशिया में भारत का गाना ‘कुछ-कुछ होता है’ काफी पसंद किया जाता है, लेकिन जब भारत और इंडोनेशिया मिलकर आगे बढ़ते हैं तो सिर्फ ‘कुछ-कुछ’ नहीं बल्कि ‘बहुत कुछ’ होता है। प्रधानमंत्री के इस बयान पर वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने तालियों के साथ उनका स्वागत किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच केवल कूटनीतिक संबंध ही नहीं, बल्कि हजारों वर्षों पुराना सांस्कृतिक और सभ्यतागत जुड़ाव भी है। उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के उस बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके भीतर भारत का डीएनए है। मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति की यह बात भारत के लोगों के दिलों को छू गई। उन्होंने आगे कहा कि दोनों देशों का असली डीएनए आपसी विश्वास, साझेदारी और पारस्परिक सम्मान से बना है। यही भरोसा दोनों देशों को भविष्य में और मजबूत सहयोग की ओर लेकर जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने प्रधानमंत्री मोदी की खुले मंच से जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और कार्यशैली से काफी प्रभावित हैं। प्रबोवो ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक करियर और उनकी कई योजनाओं को कॉपी करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार की अनेक योजनाएं बेहद सफल रही हैं और वे चाहते हैं कि इंडोनेशिया भी उनसे सीख लेकर अपने यहां लागू करे। राष्ट्रपति ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अच्छी बात यह है कि इन योजनाओं पर कोई कॉपीराइट नहीं है, इसलिए उन्हें अपनाने में कोई परेशानी नहीं होगी। उनके इस बयान पर समारोह में मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां बजाईं। प्रधानमंत्री मोदी के इंडोनेशिया दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कुल 20 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन समझौतों में रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल सहयोग, व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा और तकनीकी साझेदारी जैसे कई अहम क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर भी सहमति जताई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में रक्षा सहयोग को लेकर हुआ समझौता माना जा रहा है। भारत ने इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम के बाद ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध और अधिक मजबूत होंगे तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक सहयोग को नई मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने कार्यक्रम के तहत वह इंडोनेशिया के सबसे बड़े और विश्व प्रसिद्ध हिंदू मंदिर प्रम्बानन भी जाएंगे। एक हजार वर्ष से अधिक पुराने इस मंदिर को दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा की जीवंत पहचान माना जाता है। प्रधानमंत्री का यह दौरा दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक विरासत को और मजबूत करने का संदेश भी देगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंडोनेशिया सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने विशेष समारोह में यह सम्मान प्रदान किया। इसे भारत और इंडोनेशिया के मजबूत होते संबंधों तथा क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका का प्रतीक माना जा रहा है। जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में प्रधानमंत्री मोदी का भव्य स्वागत किया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो ने स्वयं उन्हें गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद प्रधानमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद भारतीय मूल के बच्चों और प्रवासी भारतीयों से मुलाकात भी की। भारतीय समुदाय ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रधानमंत्री का स्वागत किया और दोनों देशों की मित्रता का संदेश दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री मोदी सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचे थे। उनके विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने विशेष एस्कॉर्ट प्रदान किया। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सम्मान का प्रतीक माना गया। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सामरिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। चीन पिछले कुछ वर्षों से दक्षिण चीन सागर और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत कर रहा है। चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इसके अलग-अलग हिस्सों पर अपना अधिकार जताते हैं। चीन ने कई कृत्रिम द्वीप बनाकर वहां सैन्य ढांचा तैयार किया है, जिससे क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ी है। ऐसे माहौल में भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा को लेकर बढ़ती साझेदारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देश स्वतंत्र, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं। समुद्री व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच होर्मुज में फिर हमले, तीन टैंकर बने निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने कमर्शियल जहाजों के तय समुद्री मार्ग छोड़ने पर जताई चिंता, अंतिम यात्रा में लाखों लोगों की मौजूदगी के बीच क्षेत्रीय तनाव और गहराया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/three-tankers-targeted-again-in-hormuz-amid-khameneis-last-visit/article-58127"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/iran.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। मंगलवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में तीन तेल टैंकरों पर हमलों की खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि कतर के तेल टैंकर अल-रकायत को निशाना बनाया गया, जबकि यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार ओमान तट के पास दो अन्य वाणिज्यिक जहाज भी हमलों की चपेट में आए। घटनाओं के बाद समुद्री व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। ईरान ने कहा है कि कुछ व्यावसायिक जहाज उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन नहीं कर रहे हैं और ऐसी स्थिति में उनकी सुरक्षा की गारंटी देना संभव नहीं होगा। अधिकारियों का यह भी कहना है कि होर्मुज की स्थिति अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और हालात पहले की तरह स्थिर नहीं माने जा सकते।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हमलों की खबर ऐसे समय सामने आई है जब ईरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम यात्रा जारी है। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर शिया समुदाय के प्रमुख धार्मिक शहर कोम पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अंतिम श्रद्धांजलि दी। शहर की सड़कों पर सुबह से ही लोगों की भीड़ उमड़ने लगी थी और लाखों समर्थकों की मौजूदगी के बीच धार्मिक रस्में पूरी की गईं। अंतिम यात्रा के दौरान कई लोगों के हाथों में लाल झंडे दिखाई दिए। शिया परंपरा में लाल झंडा अन्याय के खिलाफ प्रतिरोध और बदले की मांग का प्रतीक माना जाता है। पार्थिव शरीर पर ईरान का राष्ट्रीय ध्वज ओढ़ाया गया था, जबकि ताबूत पर उनकी काली पगड़ी भी रखी गई, जो उच्च धार्मिक विद्वानों की पहचान मानी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था भी बेहद कड़ी रखी गई और पूरे मार्ग पर बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सरकारी सूत्रों के अनुसार इससे पहले तेहरान में निकली अंतिम यात्रा में भी लाखों लोग शामिल हुए। भारी भीड़ के कारण कई स्थानों पर शव वाहन की रफ्तार धीमी करनी पड़ी और कुछ जगहों पर यात्रा थोड़ी देर के लिए रुक भी गई। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोम ले जाया गया। बताया गया है कि आगे की रस्मों के बाद उन्हें उनके गृह नगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अंतिम यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में धार्मिक नेता, राजनीतिक प्रतिनिधि और आम नागरिक मौजूद रहे। कई लोगों ने नारे लगाए और खामेनेई की विरासत को आगे बढ़ाने की बात कही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर समुद्री मोर्चे पर बढ़े तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या हमले का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान ने कहा है कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जहाजों को निर्धारित समुद्री मार्गों का पालन करना जरूरी है। यदि जहाज तय रास्तों से अलग होकर आवाजाही करेंगे तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना मुश्किल होगा। हालांकि हमलों को लेकर स्वतंत्र स्तर पर विस्तृत पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है और संबंधित एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान के भीतर भी इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। देश के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने अंतिम यात्रा के दौरान कहा कि देश खामेनेई के बताए रास्ते पर आगे बढ़ने का संकल्प दोहराता है। वहीं सेना प्रमुख अमीर हातमी ने कहा कि जिम्मेदार लोगों को उनके किए का जवाब देना होगा और उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। दूसरी ओर क्षेत्रीय राजनीति में भी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि अंतिम यात्रा में जुटी भीड़ पूरे ईरान की राय का प्रतिनिधित्व नहीं करती। वहीं इराक के प्रमुख शिया नेता अम्मार अल-हकीम ने लोगों से बड़ी संख्या में अंतिम यात्रा में शामिल होने की अपील की। अंतिम यात्रा के साथ-साथ समुद्री क्षेत्र में बढ़ी गतिविधियां पश्चिम एशिया की पहले से संवेदनशील स्थिति को और जटिल बना सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। यही कारण है कि दुनिया की कई सरकारें और समुद्री सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:12:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लीबिया में मध्यस्थता की कोशिशों में पाकिस्तान की एंट्री, विरोधी गुटों के बीच संवाद बढ़ाने की पहल</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्टों और सूत्रों के दावों के बीच कूटनीतिक हलचल तेज, अमेरिका और सऊदी अरब के समर्थन की भी चर्चा; लीबिया संकट के समाधान पर टिकी नजरें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/pakistans-entry-in-mediation-efforts-in-libya-initiative-to-increase/article-58118"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/libya.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">उत्तर अफ्रीकी देश लीबिया में लंबे समय से जारी राजनीतिक अस्थिरता और गृहसंघर्ष के बीच एक बार फिर कूटनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। पाकिस्तान विरोधी गुटों के बीच संवाद स्थापित कराने और समझौते की दिशा में मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन इन दावों ने क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की कोशिश दोनों प्रमुख पक्षों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने और राजनीतिक समाधान का रास्ता तलाशने पर केंद्रित है। यदि यह पहल सफल होती है तो पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत हो सकती है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि लीबिया जैसा जटिल संकट केवल एक देश की पहल से हल नहीं होगा, बल्कि इसके लिए कई क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के बीच समन्वय आवश्यक होगा। अमेरिका और सऊदी अरब इस पूरी प्रक्रिया से अवगत हैं और पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सकारात्मक रुख रखते हैं। हालांकि, इन दावों पर संबंधित देशों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में इन सूचनाओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल के महीनों में पाकिस्तान ने खुद को क्षेत्रीय कूटनीति में अधिक सक्रिय दिखाने का प्रयास किया है। कुछ रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच संवाद की प्रक्रिया में पाकिस्तान ने संपर्क सूत्र की भूमिका निभाई थी। इसी पृष्ठभूमि में अब लीबिया को लेकर उसकी सक्रियता को देखा जा रहा है। हालांकि, इस विषय पर भी अलग-अलग स्तर पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लीबिया पिछले कई वर्षों से राजनीतिक विभाजन, सशस्त्र संघर्ष और सत्ता के लिए प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहा है। देश में अलग-अलग क्षेत्रों पर विभिन्न गुटों का प्रभाव रहा है, जिससे स्थायी राजनीतिक व्यवस्था स्थापित करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। संयुक्त राष्ट्र की पहल पर कई दौर की वार्ताएं भी हो चुकी हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। लीबिया में किसी भी शांति समझौते की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी प्रमुख पक्ष एक साझा राजनीतिक ढांचे पर सहमत हों। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया, सत्ता के बंटवारे, सुरक्षा व्यवस्था और तेल संसाधनों से होने वाली आय के निष्पक्ष वितरण जैसे मुद्दों पर भी व्यापक सहमति बनाना जरूरी होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"> लीबिया केवल आंतरिक संघर्ष का मामला नहीं है, बल्कि इसमें कई बाहरी देशों के रणनीतिक हित भी जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि वहां किसी भी नई पहल को सफल बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग और संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी। पाकिस्तान और लीबिया के बीच रक्षा क्षेत्र में भी संपर्क बढ़ा है। दोनों देशों के बीच सुरक्षा और सैन्य सहयोग को लेकर बातचीत होने की जानकारी पहले भी सामने आ चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संबंध इस नई कूटनीतिक पहल में सहायक हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सभी संबंधित पक्ष बातचीत की प्रक्रिया को प्राथमिकता देते हैं तो लीबिया में स्थिरता की दिशा में सकारात्मक प्रगति संभव है। हालांकि, अतीत में कई बार वार्ता शुरू होने के बावजूद राजनीतिक मतभेद और क्षेत्रीय हितों के कारण समझौते आगे नहीं बढ़ पाए। इसलिए इस बार भी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सभी पक्ष कितनी गंभीरता से समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं। लीबिया में स्थायी शांति केवल राजनीतिक समझौते से नहीं आएगी। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, सरकारी संस्थाओं को प्रभावी बनाना, आर्थिक पुनर्निर्माण और आम नागरिकों का भरोसा जीतना भी उतना ही आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 16:39:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारतवंशी कारोबारी पर इंडोनेशिया में 425 करोड़ की कथित रक्षा धोखाधड़ी का आरोप</title>
                                    <description><![CDATA[रिपोर्ट में दावा- खुद को CIA एजेंट बताकर राष्ट्रपति प्रबोवो का भरोसा जीता, रक्षा सौदों के नाम पर फर्जी कर्ज मंजूर कराने का आरोप।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-origin-businessman-accused-of-alleged-defense-fraud-of-rs-425/article-58053"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-srivastava.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका में पहले से धोखाधड़ी के मामलों का सामना कर रहे भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव पर अब इंडोनेशिया में भी बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय जांच रिपोर्टों के अनुसार गौरव ने खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और उनके करीबी अधिकारियों का विश्वास हासिल किया। आरोप है कि इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने रक्षा सौदों के नाम पर लगभग 425 करोड़ रुपये के फर्जी कर्ज को मंजूरी दिलवाई। यह मामला सामने आने के बाद इंडोनेशिया में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि जिन रक्षा सौदों पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम समझौते तक नहीं पहुंचे और इसलिए सरकार को प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान नहीं हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच से जुड़ी रिपोर्टों के मुताबिक यह कथित घटनाक्रम वर्ष 2020 से 2022 के बीच का है। दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशियाई सेना को आधुनिक सैन्य उपकरण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया था। इसमें 36 एफ-15 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और अत्याधुनिक सैन्य कमांड सिस्टम उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। केवल लड़ाकू विमानों की संभावित डील का मूल्य लगभग 1.32 लाख करोड़ रुपये बताया गया। शुरुआती स्तर पर इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय व्यवस्थाओं और कर्ज से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए, लेकिन बाद में जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताओं की जानकारी सामने आई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने कई शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर रक्षा क्षेत्र से जुड़े सौदों को आगे बढ़ाने की कोशिश की। जांच में जिन चार कंपनियों का उल्लेख किया गया है, उनके माध्यम से पांच अलग-अलग रक्षा समझौतों की प्रक्रिया शुरू हुई थी। बाद में इन कंपनियों के खिलाफ टैक्स संबंधी अनियमितताओं के मामले सामने आए और उन्हें बंद कर दिया गया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक गतिविधियां बेहद सीमित थीं, जबकि इनके जरिए बड़े वित्तीय लेन-देन किए जा रहे थे। यही वजह है कि इन सौदों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिपोर्टों के अनुसार गौरव श्रीवास्तव ने केवल व्यावसायिक संपर्कों के आधार पर ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत विश्वास कायम करके भी प्रभाव बनाया। दावा किया गया है कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो उन्हें ‘मिस्टर जी’ कहकर संबोधित करते थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गौरव को राष्ट्रपति के निजी जीवन से जुड़ी कुछ ऐसी जानकारियां भी थीं, जो सामान्य तौर पर केवल उनके करीबी लोगों को ही मालूम थीं। इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल कर उसने अपने प्रभाव को और मजबूत बनाया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि गौरव ने अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए कई बड़े दावे किए थे। उसने कथित तौर पर कहा कि वर्ष 2002 के बाली बम धमाकों के आरोपियों को पकड़वाने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। इसके अलावा उसने यह भी दावा किया कि उसने राष्ट्रपति प्रबोवो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन की ब्लैकलिस्ट से हटवाने में मदद की थी। इन दावों के जरिए उसने खुद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और खुफिया नेटवर्क से जुड़ा प्रभावशाली व्यक्ति साबित करने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच एजेंसियां इन्हें भी मामले का हिस्सा मानकर जांच कर रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कथित फर्जीवाड़े से जुड़े पैसों का इस्तेमाल अमेरिका के लॉस एंजिलिस में एक महंगा आलीशान बंगला खरीदने में भी किया गया। इस संपत्ति की कीमत लगभग 208 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि धन का स्रोत क्या था और क्या इस खरीद में कथित धोखाधड़ी से जुड़ी रकम का इस्तेमाल हुआ। वित्तीय लेन-देन, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इधर इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जिन रक्षा परियोजनाओं पर बातचीत हुई थी, वे अंतिम अनुबंध तक नहीं पहुंचीं। मंत्रालय के प्रवक्ता रिको सिराइत के अनुसार किसी भी प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति नहीं मिली थी, इसलिए सरकार को प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान नहीं हुआ। फिर भी पूरे घटनाक्रम की गंभीरता को देखते हुए संबंधित तथ्यों की जांच जारी है। दूसरी ओर अमेरिका में भी गौरव श्रीवास्तव के खिलाफ वर्ष 2024 से धोखाधड़ी और अन्य वित्तीय मामलों में कानूनी कार्रवाई चल रही है</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:00:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग मजबूत, ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइल खरीद पर सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की बैठक में रक्षा, चुनावी तकनीक और रणनीतिक साझेदारी से जुड़े कई अहम समझौतों पर बनी सहमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/defense-cooperation-between-india-and-indonesia-strengthened-agreement-on-purchase/article-58049"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-indonesia-relations.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को नई मजबूती मिली है। जकार्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। सबसे बड़ा फैसला ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की खरीद को लेकर रहा। फिलीपींस और वियतनाम के बाद अब इंडोनेशिया भी भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। अधिकारियों के अनुसार इस समझौते के तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग और भारत की रक्षा तकनीक पर बढ़ते वैश्विक भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बैठक के दौरान इंडोनेशिया ने भारत में विकसित 'अस्त्र' एयर-टू-एयर मिसाइल खरीदने का भी फैसला किया। यह वही मिसाइल है, जिसका उपयोग हाल के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किया गया था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस फैसले से भारतीय रक्षा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी सफलता मिली है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की लगातार बढ़ती मांग भारत को वैश्विक रक्षा निर्यातक देशों की सूची में और मजबूत स्थिति दिला सकती है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया है और अब उसके उत्पाद कई देशों का भरोसा जीत रहे हैं। रक्षा सहयोग के अलावा दोनों देशों के बीच चुनावी तकनीक के क्षेत्र में भी अहम सहमति बनी है। भारत इंडोनेशिया के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम विकसित करने में तकनीकी सहायता देगा। इसे भारत की चुनाव प्रणाली और तकनीकी क्षमता पर इंडोनेशिया के भरोसे के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार इस सहयोग का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और आधुनिक बनाना है। भारत पहले भी कई देशों के साथ डिजिटल प्रशासन और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाता रहा है और अब इसमें चुनावी प्रबंधन भी शामिल हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="Z"></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे का मंगलवार को दूसरा दिन रहा। सुबह जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन में उनका औपचारिक स्वागत किया गया। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं उनका स्वागत किया और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। समारोह के दौरान वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों और बच्चों ने भी उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति भवन में हुई द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, डिजिटल तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग सहित कई विषयों पर विस्तार से चर्चा की। भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, व्यापार और सांस्कृतिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं। ऐसे समय में जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र रणनीतिक दृष्टि से दुनिया का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को विशेष महत्व दिया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि ब्रह्मोस और अस्त्र जैसी रक्षा प्रणालियों के निर्यात से भारत की रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी, वहीं इंडोनेशिया की रक्षा क्षमताओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"><img alt="2Q=="></img></p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी जावा द्वीप पर स्थित प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर भी जाने वाले हैं। नौवीं शताब्दी में निर्मित यह मंदिर भगवान शिव, विष्णु और ब्रह्मा को समर्पित है तथा यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है। यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के जरिए दोनों देशों के साझा सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिलेगी। सोमवार को इंडोनेशिया पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी के विमान को इंडोनेशियाई वायुसेना ने अपने एयरस्पेस में प्रवेश करते ही एस्कॉर्ट किया था। इसे दोनों देशों के बीच मजबूत मित्रता और सम्मान का प्रतीक माना गया। दो दिवसीय यात्रा के दौरान हुए समझौते यह संकेत देते हैं कि भारत और इंडोनेशिया अब केवल व्यापारिक साझेदार ही नहीं, बल्कि रक्षा, तकनीक, लोकतांत्रिक संस्थाओं और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में भी दीर्घकालिक सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 11:59:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तेहरान में अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम दर्शन के लिए तेहरान में हजारों लोग पहुंचे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला परिसर में श्रद्धांजलि अर्पित की, जबकि युद्धविराम के बीच अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी की गईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/indian-delegation-bids-final-farewell-to-ayatollah-ali-khamenei-in/article-57767"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ayatollah-ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की राजधानी तेहरान शुक्रवार को उस समय भावुक माहौल का गवाह बनी, जब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए ग्रैंड मोसल्ला धार्मिक परिसर लाया गया। सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग परिसर के बाहर एकत्र होने लगे थे। देशभर से आए नागरिकों, धार्मिक नेताओं, राजनीतिक हस्तियों और विदेशी प्रतिनिधिमंडलों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान भारत के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल ने भी ग्रैंड मोसल्ला पहुंचकर दिवंगत नेता के प्रति सम्मान व्यक्त किया। अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न कराई जा रही है। हाल के क्षेत्रीय संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन ने तेहरान के कई हिस्सों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। ग्रैंड मोसल्ला परिसर में प्रवेश करने वाले सभी लोगों की सघन जांच की गई और पूरे कार्यक्रम की निगरानी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम दर्शन के दौरान अयातुल्ला अली खामेनेई के पार्थिव शरीर के समक्ष श्रद्धासुमन अर्पित किए और कुछ क्षणों का मौन रखकर सम्मान प्रकट किया। इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के अधिकारियों से भी मुलाकात की और शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध लंबे समय से रहे हैं। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, समुद्री संपर्क, क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी रही है। ऐसे में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति को द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार पहले आयोजित किया जाना था, लेकिन हालिया सैन्य संघर्ष के चलते कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा। सुरक्षा कारणों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था। अब जब संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू हुआ है, तब प्रशासन ने अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की है। हालांकि क्षेत्र में अभी भी तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं माना जा रहा है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ईरान की संसद के अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अंतिम संस्कार से एक दिन पहले देशवासियों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यह केवल श्रद्धांजलि का अवसर नहीं बल्कि राष्ट्रीय एकता और संकल्प प्रदर्शित करने का भी समय है। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश की जनता की एकजुटता दुनिया तक स्पष्ट रूप से पहुंचनी चाहिए। उनके अनुसार, बड़ी जनभागीदारी ईरान की सामूहिक शक्ति और राष्ट्रीय भावना का प्रतीक होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह से ही हजारों लोग ग्रैंड मोसल्ला परिसर पहुंचने लगे थे। लोगों के हाथों में ईरानी झंडे और धार्मिक प्रतीक दिखाई दिए। कई लोग अपने परिवारों के साथ अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में धार्मिक छात्र और सामाजिक संगठनों के सदस्य भी मौजूद रहे। परिसर के भीतर धार्मिक अनुष्ठान किए गए और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम विदाई की तैयारियां पूरी की गईं। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग बनाए ताकि व्यवस्था सुचारू बनी रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालिया क्षेत्रीय घटनाक्रम को देखते हुए ईरानी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी कैमरों और विशेष सुरक्षा इकाइयों की मदद से पूरे कार्यक्रम पर नजर रखी गई। विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष प्रोटोकॉल लागू किए। कार्यक्रम स्थल के आसपास यातायात व्यवस्था में भी बदलाव किया गया ताकि भीड़ और सुरक्षा दोनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतिम संस्कार ऐसे समय हो रहा है जब ईरान और अमेरिका के बीच हालिया संघर्ष के बाद प्रारंभिक युद्धविराम लागू है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलने की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत और ईरान के बीच व्यापार, ऊर्जा, चाबहार बंदरगाह परियोजना और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण विषय सहयोग के प्रमुख आधार रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते भू-राजनीतिक हालात के बावजूद दोनों देश आपसी सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे। भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी इस बात का संकेत भी मानी जा रही है कि भारत पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को महत्व देता है और क्षेत्र में शांति तथा स्थिरता का समर्थक बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 12:30:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>प्रधानमंत्री मोदी अगले सप्ताह करेंगे न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई गति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह पहली बार आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड जाएंगे। यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के क्रियान्वयन और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने पर व्यापक चर्चा होगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/prime-minister-modi-will-make-his-first-official-visit-to/article-57766"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/pm-modi-new-zealand-visit.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले सप्ताह अपनी पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा पर जाएंगे। इस यात्रा की घोषणा न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा कि उन्हें खुशी है कि भारतीय प्रधानमंत्री पहली बार आधिकारिक दौरे पर न्यूजीलैंड आ रहे हैं। उन्होंने इस यात्रा को दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और मजबूत होते सहयोग का प्रतीक बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा अप्रैल 2026 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) के बाद पहला बड़ा उच्चस्तरीय दौरा होगी। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवा क्षेत्र, कृषि, शिक्षा, पर्यटन और तकनीकी सहयोग को नई दिशा देना है। दोनों देशों की सरकारों का मानना है कि इस समझौते से व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे। साथ ही निवेश बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलने की भी उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और न्यूजीलैंड की आर्थिक समृद्धि के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण साझेदार है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने से न्यूजीलैंड के उत्पादों और सेवाओं को 1.4 अरब से अधिक आबादी वाले भारतीय बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। इससे निर्यात बढ़ेगा, नए रोजगार पैदा होंगे और न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">न्यूजीलैंड सरकार ने अगले 15 वर्षों में भारत में लगभग 20 अरब डॉलर तक का निवेश बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस निवेश को सुगम बनाने के लिए भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के निवेशकों के लिए विशेष "सिंगल डेस्क" या "वन-स्टॉप सुविधा" स्थापित करने पर सहमति दी है। इस व्यवस्था के तहत निवेश से जुड़े अनुमोदनों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को तेज़ी से पूरा किया जाएगा, जिससे दोनों देशों के निवेशकों को आसानी होगी। न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने पहले भी कहा था कि भारत में निवेश के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है और दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। इसमें कृषि उत्पादकता, निवेश, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (MSME), महिला उद्यमिता, खेल, पर्यटन, शिक्षा, कौशल विकास और प्रतिभा आदान-प्रदान जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके अलावा दोनों देश छात्रों, शोधकर्ताओं और कुशल पेशेवरों के लिए भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। इससे दोनों देशों के युवाओं को शिक्षा और रोजगार के नए अवसर मिलने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">दोनों देशों के बीच होने वाला सहयोग कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देगा। न्यूजीलैंड डेयरी, पशुपालन और आधुनिक कृषि तकनीकों के लिए विश्वभर में जाना जाता है, जबकि भारत कृषि उत्पादन और विशाल उपभोक्ता बाजार के कारण एक महत्वपूर्ण साझेदार है। सेवा क्षेत्र, सूचना प्रौद्योगिकी, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्टार्टअप, पर्यटन और खेल सहयोग भी इस यात्रा के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत और न्यूजीलैंड के बीच पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक और आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त व्यापार और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर भी साझा दृष्टिकोण रखते हैं। प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा और कई महत्वपूर्ण समझौतों पर आगे की कार्ययोजना तय होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। मुक्त व्यापार समझौते के बाद यह दौरा आर्थिक सहयोग, निवेश, व्यापार और लोगों के बीच संपर्क को नई गति देने का अवसर प्रदान करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 12:30:21 +0530</pubDate>
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                <title>खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे बेटे मुजतबा, सुरक्षा एजेंसियों ने जताया इजराइली हमले का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। सुरक्षा कारणों से बेटे मुजतबा खामेनेई को अंतिम संस्कार से दूर रहने की सलाह दी गई है, जबकि कई देशों के प्रतिनिधि भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/son-mujtaba-will-not-attend-khameneis-funeral-security-agencies-expressed/article-57704"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ali-khamenei.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं, लेकिन इस बीच सबसे बड़ी चर्चा उनके बेटे मुजतबा खामेनेई को लेकर हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने की सलाह दी है। बताया जा रहा है कि इजराइल की ओर से संभावित हमले की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। हालांकि इस मामले में ईरानी अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम लीडर के एक प्रतिनिधि के हवाले से यह जानकारी सामने आई है। ऐसे में अंतिम संस्कार से पहले ईरान में सुरक्षा व्यवस्था और भी कड़ी कर दी गई है। अयातुल्ला अली खामेनेई को 9 जुलाई को मशहद शहर में दफनाया जाएगा, जबकि अंतिम संस्कार से जुड़े धार्मिक और राजकीय कार्यक्रमों की शुरुआत 4 जुलाई से होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े सार्वजनिक आयोजन के दौरान किसी भी तरह का हमला या सुरक्षा उल्लंघन होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी वजह से मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक मौजूदगी को फिलहाल सीमित रखने की सलाह दी गई है। पिछले दिनों अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़े तनाव के दौरान ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि मुजतबा खामेनेई हमलों में घायल हो गए थे। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी थी और उसके बाद से वह सार्वजनिक तौर पर भी नजर नहीं आए। अब अंतिम संस्कार में उनकी गैरमौजूदगी ने इन अटकलों को और तेज कर दिया है। ईरानी प्रशासन फिलहाल सुरक्षा से जुड़ी रणनीति पर ज्यादा जानकारी सार्वजनिक करने से बच रहा है। बताया जा रहा है कि मशहद में अंतिम संस्कार को लेकर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं। शहर के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जा रही है और समारोह स्थल के आसपास निगरानी भी बढ़ा दी गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि देने आने वाले लोगों को देखते हुए प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा दोनों पर विशेष ध्यान देने की तैयारी की है। अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा कई देशों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, जिससे यह समारोह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">भारत की ओर से भी अंतिम संस्कार में आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ईरान पहुंचकर भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे कूटनीतिक और सांस्कृतिक संबंधों को देखते हुए इस यात्रा को अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल ईरान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात भी कर सकता है, हालांकि कार्यक्रम का विस्तृत विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। अयातुल्ला अली खामेनेई कई दशकों तक ईरान की राजनीति और विदेश नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में रहे। उनके नेतृत्व में ईरान ने कई अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों में लगातार तनाव भी बना रहा। उनके निधन के बाद पूरे देश में शोक का माहौल है और बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंच रहे हैं। धार्मिक संस्थानों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर भी शोक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मशहद में होने वाला अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि राष्ट्रीय महत्व का कार्यक्रम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार संवेदनशील बने हुए हैं। इजराइल और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहतीं। बड़े सार्वजनिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा जोखिम पहले से अधिक बढ़ जाते हैं। यही वजह है कि मुजतबा खामेनेई की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है ताकि किसी भी संभावित खतरे से बचा जा सके। यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि ईरान का नया नेतृत्व इस संवेदनशील दौर में किस तरह आगे बढ़ता है और क्षेत्रीय हालात पर इसका क्या असर पड़ता है। दूसरी ओर, मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी को लेकर चर्चाएं जारी हैं, लेकिन आधिकारिक स्तर पर सुरक्षा को ही इसकी मुख्य वजह बताया जा रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:03:25 +0530</pubDate>
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