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                <title>Sports News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Sports News RSS Feed</description>
                
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                <title>टी-20 सीरीज बचाने उतरेगा भारत, इंग्लैंड की नजर नंबर-1 बनने और क्लीन स्वीप पर</title>
                                    <description><![CDATA[साउथैम्प्टन के रोज बाउल में आज होगा पांचवां मुकाबला, हार से भारत पहली बार गंवा सकता है तीन से ज्यादा मैचों की टी-20 सीरीज; जीतते ही इंग्लैंड बनेगा दुनिया की नंबर-1 टीम]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/india-will-try-to-save-t20-series-england-is-eyeing/article-58505"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-vs-england-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और इंग्लैंड के बीच खेली जा रही पांच मैचों की टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज का अंतिम मुकाबला शनिवार को साउथैम्प्टन के ऐतिहासिक रोज बाउल स्टेडियम में खेला जाएगा। भारतीय समयानुसार शाम 7 बजे शुरू होने वाले इस मैच पर दोनों टीमों की नजरें टिकी हैं। हालांकि सीरीज का फैसला पहले ही हो चुका है और इंग्लैंड ने 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ट्रॉफी अपने नाम कर ली है, लेकिन आखिरी मुकाबले की अहमियत कम नहीं है। भारत जहां सम्मान बचाने और जीत के साथ दौरे का समापन करना चाहेगा, वहीं इंग्लैंड की कोशिश क्लीन स्वीप करने के साथ टी-20 अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में दुनिया की नंबर-1 टीम बनने की होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सीरीज का पहला मुकाबला बारिश के कारण बेनतीजा रहा था, जबकि उसके बाद खेले गए लगातार तीनों मुकाबलों में इंग्लैंड ने हर विभाग में बेहतर प्रदर्शन करते हुए भारत को मात दी। बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों क्षेत्रों में मेजबान टीम ने शानदार खेल दिखाया, जबकि भारतीय टीम लगातार अपनी कमजोरियों से जूझती नजर आई।</p>
<p style="text-align:justify;">टी-20 विश्व कप 2026 जीतने के बाद भारतीय टीम का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। 8 मार्च को विश्व कप जीतने के बाद से टीम एक भी टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं जीत सकी है। भारत लगातार छह मैचों से जीत का इंतजार कर रहा है। यदि टीम आखिरी मुकाबला भी हार जाती है तो यह पहली बार होगा जब भारत तीन या उससे अधिक मैचों वाली किसी द्विपक्षीय टी-20 सीरीज में हार का सामना करेगा। ऐसे में यह मुकाबला केवल औपचारिक नहीं बल्कि भारतीय टीम की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर के सामने भी यह मैच बेहद महत्वपूर्ण है। कप्तानी संभालने के बाद वे अब तक एक भी टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं जीत सके हैं। हालांकि व्यक्तिगत प्रदर्शन के लिहाज से उन्होंने निराश नहीं किया है। मौजूदा सीरीज में उनके बल्ले से दो शानदार अर्धशतक निकले हैं। पिछले मुकाबले में उन्होंने 49 गेंदों में नाबाद 80 रन बनाकर टीम को सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचाने की कोशिश की थी, लेकिन दूसरे बल्लेबाजों का साथ नहीं मिलने से टीम जीत दर्ज नहीं कर सकी।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय टीम के लिए एक सकारात्मक पहलू रोज बाउल स्टेडियम का रिकॉर्ड है। भारत ने इस मैदान पर अब तक केवल एक टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला है और उसमें शानदार जीत हासिल की थी। जुलाई 2022 में खेले गए उस मैच में हार्दिक पंड्या ने ऑलराउंड प्रदर्शन करते हुए 51 रन बनाए और चार विकेट लेकर भारत को 50 रन से जीत दिलाई थी। इसी मैदान पर तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह ने अपने टी-20 अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज किया था। ऐसे में भारतीय टीम इस मैदान की अच्छी यादों को दोहराने की उम्मीद करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम की नजरें युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर भी रहेंगी। महज 15 वर्षीय इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने अब तक तीन टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में क्रमशः 14, 13 और 15 रन बनाए हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि उनमें बड़ी पारी खेलने की क्षमता है और आखिरी मुकाबले में वे अपनी प्रतिभा का बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता लगातार बल्लेबाजी में अस्थिरता रही है। हालांकि विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने वर्ष 2026 में खेले गए 19 टी-20 मुकाबलों में 611 रन बनाए हैं। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 185.15 का रहा है और उन्होंने एक शतक तथा चार अर्धशतक भी लगाए हैं। टीम को उनसे एक और बड़ी पारी की उम्मीद होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गेंदबाजी विभाग में भारतीय तेज गेंदबाज नई गेंद से विकेट लेने में सफल रहे हैं, लेकिन रन रोकने में संघर्ष करते दिखाई दिए हैं। इस वर्ष भारतीय तेज गेंदबाजों ने 18 मुकाबलों में 25 विकेट जरूर लिए हैं, लेकिन उनका इकोनॉमी रेट चिंता का विषय बना हुआ है। डेथ ओवरों में लगातार रन लुटाने का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर इंग्लैंड पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगा। पूर्व कप्तान जोस बटलर इस समय खराब फॉर्म से गुजर रहे हैं। पिछले 18 टी-20 अंतरराष्ट्रीय पारियों में वे एक भी बार 40 रन का आंकड़ा पार नहीं कर सके हैं और उनका औसत भी बेहद कम रहा है। इसके बावजूद इंग्लैंड की बल्लेबाजी कमजोर नहीं दिखी है। कप्तान हैरी ब्रूक, फिल सॉल्ट और जैकब बेथेल लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। बेथेल ने इस वर्ष 15 मैचों में 425 रन बनाए हैं और उनका स्ट्राइक रेट 175 से अधिक रहा है। गेंदबाजी में अनुभवी लेग स्पिनर आदिल राशिद इंग्लैंड के सबसे भरोसेमंद गेंदबाज साबित हुए हैं। उन्होंने 15 मुकाबलों में 22 विकेट हासिल किए हैं। वहीं जोफ्रा आर्चर और जोश टंग नई गेंद से भारतीय बल्लेबाजों को लगातार परेशान करते रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रोज बाउल स्टेडियम की पिच बल्लेबाजों और तेज गेंदबाजों दोनों के लिए मददगार मानी जाती है। शुरुआती ओवरों में नई गेंद से अच्छी स्विंग और अतिरिक्त उछाल मिलती है, लेकिन जैसे-जैसे गेंद पुरानी होती है बल्लेबाजी आसान हो जाती है। इस मैदान पर पहली पारी का औसत स्कोर 166 रन है, जबकि दूसरी पारी का औसत स्कोर 138 रन रहा है। यहां का सर्वोच्च टी-20 स्कोर 248 रन है, जो इंग्लैंड के नाम दर्ज है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>विंबलडन में सिनर का जलवा, जोकोविच का 25वें ग्रैंड स्लैम का सपना फिर अधूरा</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व नंबर-1 जैनिक सिनर ने सेमीफाइनल में नोवाक जोकोविच को सीधे सेटों में हराया, पहली बार फाइनल में पहुंचे अलेक्जेंडर ज्वेरेव; सचिन तेंदुलकर, शुभमन गिल और रोजर फेडरर रहे आकर्षण का केंद्र]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/sinner-shines-in-wimbledon-djokovics-dream-of-25th-grand-slam/article-58504"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/wimbledon-2026-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">विंबलडन टेनिस चैंपियनशिप 2026 में पुरुष एकल वर्ग का सेमीफाइनल मुकाबला टेनिस प्रेमियों के लिए बेहद यादगार साबित हुआ। विश्व नंबर-1 इटली के जैनिक सिनर ने सात बार के विंबलडन चैंपियन और 24 ग्रैंड स्लैम विजेता नोवाक जोकोविच को सीधे सेटों में हराकर न सिर्फ फाइनल का टिकट हासिल किया, बल्कि दिग्गज सर्बियाई खिलाड़ी के रिकॉर्ड 25वें ग्रैंड स्लैम जीतने के सपने को भी एक बार फिर अधूरा छोड़ दिया। लंदन के प्रतिष्ठित ऑल इंग्लैंड क्लब में खेले गए इस मुकाबले में 24 वर्षीय सिनर ने 39 वर्षीय जोकोविच को 6-4, 6-4 और 6-4 से मात दी।</p>
<p>करीब दो घंटे 20 मिनट तक चले इस मुकाबले में जैनिक सिनर ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज अपनाया। उनकी दमदार सर्विस, सटीक बेसलाइन शॉट्स और बेहतरीन कोर्ट कवरेज के सामने जोकोविच अपनी लय हासिल नहीं कर सके। तीनों सेटों में सिनर ने महत्वपूर्ण मौकों पर शानदार प्रदर्शन करते हुए बढ़त बनाई और एक भी सेट गंवाए बिना मुकाबला अपने नाम कर लिया।</p>
<p>यह जीत जैनिक सिनर के लिए कई मायनों में खास रही। पिछले साल भी उन्होंने विंबलडन के फाइनल में जगह बनाई थी और इस बार लगातार दूसरे वर्ष फाइनल में पहुंचने में सफल रहे। इसके साथ ही उन्होंने इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में जोकोविच से मिली हार का बदला भी पूरा कर लिया। विश्व नंबर-1 खिलाड़ी के रूप में सिनर ने साबित कर दिया कि वे मौजूदा दौर के सबसे मजबूत टेनिस खिलाड़ियों में शामिल हैं।</p>
<p>दूसरी ओर, नोवाक जोकोविच के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। 24 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके सर्बियाई स्टार रिकॉर्ड 25वां ग्रैंड स्लैम जीतने के इरादे से विंबलडन पहुंचे थे, लेकिन सेमीफाइनल में उनका सफर समाप्त हो गया। जोकोविच का आखिरी ग्रैंड स्लैम खिताब 2023 के यूएस ओपन में आया था। इसके बाद वे कई बड़े टूर्नामेंटों में खिताब के करीब पहुंचे, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी।</p>
<p>इस साल भी उनका अभियान उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ सका। ऑस्ट्रेलियन ओपन में उन्हें फाइनल में हार का सामना करना पड़ा, जबकि फ्रेंच ओपन में उनका सफर तीसरे दौर में ही समाप्त हो गया। विंबलडन में भी वे फाइनल तक पहुंचने में असफल रहे। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका संघर्ष और फिटनेस प्रशंसकों के लिए प्रेरणा बनी हुई है, लेकिन युवा खिलाड़ियों की चुनौती लगातार कठिन होती जा रही है।</p>
<p>मैच समाप्त होने के बाद दोनों खिलाड़ियों ने खेल भावना का शानदार परिचय दिया। जैनिक सिनर और नोवाक जोकोविच ने नेट पर एक-दूसरे को गले लगाया। इसके बाद जोकोविच ने सेंटर कोर्ट पर मौजूद दर्शकों का अभिवादन किया। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर तालियों के साथ इस महान खिलाड़ी का सम्मान किया।</p>
<p>अब विंबलडन 2026 के पुरुष एकल वर्ग के फाइनल में जैनिक सिनर का सामना जर्मनी के अलेक्जेंडर ज्वेरेव से होगा। पहले सेमीफाइनल में ज्वेरेव ने ब्रिटेन के वाइल्ड कार्ड खिलाड़ी आर्थर फेरी को 7-6, 6-2 और 6-4 से हराकर पहली बार विंबलडन फाइनल में जगह बनाई। 29 वर्षीय ज्वेरेव 1995 के बाद विंबलडन के फाइनल में पहुंचने वाले पहले जर्मन खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अब तक केवल दो सेट गंवाए हैं और शानदार फॉर्म में नजर आ रहे हैं।</p>
<p>फाइनल मुकाबले को लेकर टेनिस विशेषज्ञों में उत्साह है। एक ओर विश्व नंबर-1 जैनिक सिनर हैं, जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया है, वहीं दूसरी ओर पहली बार विंबलडन फाइनल में पहुंचे अलेक्जेंडर ज्वेरेव हैं, जो अपने पहले खिताब के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदा फॉर्म को देखते हुए मुकाबले के बेहद रोमांचक होने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>
<p>विंबलडन का यह सेमीफाइनल केवल कोर्ट पर खेले गए मुकाबले के कारण ही नहीं, बल्कि रॉयल बॉक्स में मौजूद खेल जगत की दिग्गज हस्तियों की वजह से भी चर्चा में रहा। भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर, भारतीय टेस्ट कप्तान शुभमन गिल, वेस्टइंडीज के महान बल्लेबाज ब्रायन लारा और नीदरलैंड्स के फुटबॉलर वर्जिल वान डाइक सहित कई अंतरराष्ट्रीय सितारों ने सेंटर कोर्ट से मुकाबले का आनंद लिया।</p>
<p>विंबलडन आयोजकों ने सचिन तेंदुलकर का विशेष स्वागत करते हुए उन्हें "क्रिकेट रॉयल्टी" बताया। मैच के दौरान सचिन तेंदुलकर और शुभमन गिल की मुलाकात टेनिस के महान खिलाड़ी रोजर फेडरर से भी हुई। तीनों दिग्गजों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गईं और खेल प्रेमियों ने इसे अलग-अलग खेलों के महान खिलाड़ियों का यादगार संगम बताया।</p>
<p>रॉयल बॉक्स विंबलडन की सबसे प्रतिष्ठित परंपराओं में से एक माना जाता है। करीब 80 सीटों वाली यह विशेष दीर्घा 1922 से विंबलडन का हिस्सा रही है। यहां बैठने के लिए टिकट नहीं खरीदे जा सकते। ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस क्लब के चेयरमैन स्वयं खेल, संस्कृति, समाज और सार्वजनिक जीवन की प्रतिष्ठित हस्तियों को आमंत्रित करते हैं। यही वजह है कि रॉयल बॉक्स में मौजूद होना अपने आप में सम्मान माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जर्मनी में अनिमेष कुजूर की ऐतिहासिक रफ्तार, विदेश में सबसे तेज 100 मीटर दौड़ने वाले भारतीय बने</title>
                                    <description><![CDATA[वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर चैलेंजर में 10.14 सेकेंड में पूरी की रेस, भारत का दूसरा सबसे तेज समय दर्ज; कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले बढ़ी उम्मीदें]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/animesh-kujurs-historic-speed-in-germany-becomes-the-fastest-indian/article-58495"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/animesh-kujur.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय एथलेटिक्स के लिए जर्मनी से एक बड़ी और गर्व की खबर सामने आई है। देश के उभरते हुए धावक अनिमेष कुजूर ने वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर चैलेंजर प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए विदेश की धरती पर सबसे तेज 100 मीटर दौड़ने वाले भारतीय बनने का गौरव हासिल किया है। 23 वर्षीय अनिमेष ने 100 मीटर की दौड़ महज 10.14 सेकेंड में पूरी कर न केवल अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (पर्सनल बेस्ट) दर्ज किया, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स इतिहास में भी अपना नाम सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जर्मनी में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में अनिमेष कुजूर ने शुरुआत से ही शानदार लय दिखाई। उन्होंने बेहतरीन स्टार्ट और आखिरी क्षण तक तेज रफ्तार बनाए रखते हुए 10.14 सेकेंड का समय निकाला। हालांकि, दक्षिण अफ्रीका के आर. म्लेंगा ने 10.03 सेकेंड का समय निकालकर पहला स्थान हासिल किया, जबकि अनिमेष दूसरे स्थान पर रहे। इसके बावजूद भारतीय खिलाड़ी का प्रदर्शन सबसे अधिक चर्चा में रहा, क्योंकि उन्होंने विदेश में किसी भारतीय द्वारा 100 मीटर में अब तक का सबसे तेज समय दर्ज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि अनिमेष ने विदेश में सबसे तेज दौड़ने का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने लगातार अपने प्रदर्शन में सुधार किया है और अब वे भारतीय स्प्रिंट के सबसे भरोसेमंद चेहरों में शामिल हो चुके हैं। उनकी यह उपलब्धि इस बात का संकेत भी है कि भारतीय एथलीट अब वैश्विक स्तर पर स्प्रिंट स्पर्धाओं में भी मजबूत चुनौती पेश करने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अनिमेष का 10.14 सेकेंड का समय भारत के इतिहास में दूसरा सबसे तेज 100 मीटर प्रदर्शन भी बन गया है। देश का राष्ट्रीय रिकॉर्ड 10.09 सेकेंड का है, जिसे इसी वर्ष गुरिंदरवीर सिंह ने रांची में आयोजित फेडरेशन कप के दौरान बनाया था। दोनों खिलाड़ियों के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा भारतीय एथलेटिक्स के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है, क्योंकि इससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय स्प्रिंट में इस साल मई के दौरान रिकॉर्ड टूटने का सिलसिला बेहद रोमांचक रहा था। फेडरेशन कप में पहले गुरिंदरवीर सिंह ने 10.17 सेकेंड का समय निकालकर नया रिकॉर्ड बनाया था। इसके तुरंत बाद अनिमेष कुजूर ने 10.15 सेकेंड दौड़कर उनसे बेहतर प्रदर्शन किया। लेकिन अगले ही दिन गुरिंदरवीर ने 10.09 सेकेंड का समय निकालते हुए राष्ट्रीय रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। महज 24 घंटे के भीतर रिकॉर्ड तीन बार टूटना भारतीय स्प्रिंट इतिहास की बड़ी घटना माना गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अनिमेष कुजूर की इस उपलब्धि का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि वे पहले ही 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भारत की 100 मीटर और 200 मीटर टीम में अपनी जगह पक्की कर चुके हैं। जर्मनी में शानदार प्रदर्शन के बाद उनका आत्मविश्वास निश्चित रूप से और मजबूत हुआ है। अब वे पोलैंड के स्पाला में भारतीय टीम के प्रशिक्षण शिविर से जुड़ेंगे, जहां कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कोचों का मानना है कि यदि अनिमेष इसी तरह अपने प्रदर्शन में निरंतर सुधार करते रहे तो आने वाले समय में वे राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी अपने नाम कर सकते हैं। 10.14 सेकेंड का समय इस बात का संकेत है कि वे 10 सेकेंड के बेहद करीब पहुंच चुके हैं और उचित तैयारी के साथ इस बाधा को भी पार करने की क्षमता रखते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व एथलेटिक्स में 100 मीटर दौड़ सबसे प्रतिष्ठित स्पर्धाओं में गिनी जाती है। इस स्पर्धा का विश्व रिकॉर्ड जमैका के महान धावक उसेन बोल्ट के नाम है, जिन्होंने 2009 की विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 9.58 सेकेंड का अविश्वसनीय समय निकालकर इतिहास रचा था। आज भी उनका यह रिकॉर्ड कायम है और दुनिया भर के धावकों के लिए प्रेरणा बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">ओलंपिक खेलों के इतिहास पर नजर डालें तो 100 मीटर स्पर्धा हमेशा सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र रही है। 1896 में आधुनिक ओलंपिक की शुरुआत के बाद शुरुआती वर्षों में श्वेत एथलीटों का दबदबा रहा, लेकिन 1932 में एडी टोलन पहले अश्वेत ओलंपिक चैंपियन बने। इसके बाद से इस स्पर्धा में लगातार नए रिकॉर्ड बनते रहे और आधुनिक दौर में यह प्रतियोगिता दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित एथलेटिक्स स्पर्धाओं में शामिल हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय एथलेटिक्स भी अब नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। नीरज चोपड़ा की सफलता के बाद ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में युवाओं का रुझान बढ़ा है और अब स्प्रिंट में भी भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रहे हैं। अनिमेष कुजूर का प्रदर्शन इसी बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। उनकी उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि भारतीय एथलेटिक्स के भविष्य के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>लॉर्ड्स में भारतीय महिला टीम ने रचा इतिहास, 142 साल बाद खेला पहला महिला टेस्ट मैच</title>
                                    <description><![CDATA[क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर पहली बार महिला टेस्ट मैच खेला गया। भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों ने इस ऐतिहासिक मुकाबले के साथ महिला क्रिकेट के इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/indian-womens-team-created-history-at-lords-played-the-first/article-58470"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-women-cricket.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा अध्याय जोड़ दिया, जिसका इंतजार दशकों से किया जा रहा था। 10 जुलाई 2026 को लंदन के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड पर भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच पहला महिला टेस्ट मैच शुरू हुआ। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले इस मैदान पर पुरुषों का पहला टेस्ट मुकाबला वर्ष 1884 में खेला गया था, लेकिन महिलाओं को यहां टेस्ट क्रिकेट खेलने का अवसर 142 साल बाद मिला। इस ऐतिहासिक मैच के साथ महिला क्रिकेट ने एक नई उपलब्धि हासिल की और खेल जगत में लैंगिक समानता की दिशा में एक मजबूत संदेश भी दिया। भारतीय टीम की कप्तानी हरमनप्रीत कौर कर रही हैं, जबकि इंग्लैंड की कमान नैट साइवर-ब्रंट के हाथों में है। दोनों टीमों के मैदान पर उतरते ही लॉर्ड्स का ऐतिहासिक मैदान एक ऐसे पल का गवाह बना, जिसे महिला क्रिकेट के विकास की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। खिलाड़ियों के लिए यह केवल एक अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं था, बल्कि उस लंबे संघर्ष और इंतजार का परिणाम भी था, जिसने महिला क्रिकेट को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राउंड का इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, उतना ही यह परंपराओं और विरासत के लिए भी जाना जाता है। लंबे समय तक यह मैदान केवल पुरुष क्रिकेट के बड़े मुकाबलों का केंद्र रहा। वर्ष 1999 तक यहां के प्रतिष्ठित पवेलियन और प्रसिद्ध 'लॉन्ग रूम' में महिलाओं के प्रवेश पर भी प्रतिबंध था। समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और महिला क्रिकेट को वह सम्मान मिलने लगा, जिसकी वह हकदार थी। अब उसी लॉर्ड्स के मैदान पर महिला खिलाड़ियों का टेस्ट मैच खेलना इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया है। मैच शुरू होने से पहले लॉर्ड्स की वर्षों पुरानी घंटी बजाने की परंपरा को भी खास अंदाज में निभाया गया। सामान्य तौर पर यह घंटी मैदान के बाहर से बजाई जाती है, लेकिन इस ऐतिहासिक अवसर पर इंग्लैंड की कई पूर्व महिला क्रिकेटरों ने राष्ट्रगान से ठीक पहले मैदान के बीचों-बीच खड़े होकर लगभग पांच मिनट तक घंटी बजाई। इस विशेष आयोजन ने मुकाबले की गरिमा को और बढ़ा दिया। इसके बाद जब दोनों टीमें राष्ट्रगान के लिए मैदान की ओर बढ़ीं तो मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) के सदस्यों ने लॉन्ग रूम में खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ खिलाड़ियों का स्वागत किया। महिला खिलाड़ियों को इस ऐतिहासिक स्थान पर गार्ड ऑफ ऑनर मिलना भी अपने आप में एक भावुक और यादगार क्षण बन गया। खिलाड़ियों के चेहरों पर गर्व, खुशी और उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। खेल प्रेमियों और पूर्व क्रिकेटरों ने भी इस पल को महिला क्रिकेट के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अवसरों में से एक बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय महिला क्रिकेट ने पिछले कुछ वर्षों में लगातार नई ऊंचाइयों को छुआ है। विश्व स्तर पर टीम ने अपने प्रदर्शन से पहचान बनाई है और अब लॉर्ड्स में पहला टेस्ट खेलना उस यात्रा की एक और बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह मुकाबला केवल भारत और इंग्लैंड के बीच खेला जा रहा एक टेस्ट मैच नहीं है, बल्कि महिला क्रिकेट की बदलती तस्वीर का प्रतीक भी है। दूसरी ओर इंग्लैंड की कप्तान नैट साइवर-ब्रंट की अगुआई में मेजबान टीम भी इस ऐतिहासिक मुकाबले का हिस्सा बनकर गौरवान्वित महसूस कर रही है। क्रिकेट जगत के कई दिग्गजों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे महिला क्रिकेट के लिए नई शुरुआत बताया है। लॉर्ड्स का यह टेस्ट मैच आने वाले वर्षों में केवल स्कोरकार्ड के लिए नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों को मिले सम्मान, अवसर और समान पहचान के लिए भी याद किया जाएगा। 142 वर्षों का लंबा इंतजार आखिरकार खत्म हुआ और क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित मैदान ने पहली बार महिला टेस्ट क्रिकेट की मेजबानी कर इतिहास के सुनहरे पन्नों में अपना एक नया अध्याय जोड़ दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:28:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांस लगातार तीसरी बार वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में, मोरक्को को 2-0 से हराकर रचा इतिहास</title>
                                    <description><![CDATA[कप्तान किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले के गोल से मिली जीत, एम्बाप्पे ने मेसी के वर्ल्ड कप गोल रिकॉर्ड की बराबरी की; लंदन में जश्न के बीच हिंसा की घटनाएं भी सामने आईं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/france-created-history-by-defeating-morocco-2-0-in-the-world/article-58352"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/lionel-messi-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने एक बार फिर अपनी ताकत का शानदार प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में जगह बना ली है। क्वार्टर फाइनल मुकाबले में फ्रांसीसी टीम ने मोरक्को को 2-0 से हराकर न सिर्फ जीत दर्ज की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि पिछले कई वर्षों से विश्व फुटबॉल में उसकी बादशाहत कायम है। इस मुकाबले में कप्तान किलियन एम्बाप्पे और उस्मान डेम्बेले ने शानदार प्रदर्शन किया। दोनों खिलाड़ियों के गोल की बदौलत फ्रांस ने मुकाबले पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए रखा और मोरक्को की चुनौती को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया। इस जीत के साथ फ्रांस लगातार तीसरे वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंच गया। इससे पहले टीम 2018 और 2022 में भी अंतिम चार में पहुंची थी। अब उसकी नजर लगातार तीसरी बार फाइनल में जगह बनाने और एक और विश्व कप खिताब जीतने पर होगी। सेमीफाइनल में फ्रांस का सामना स्पेन और बेल्जियम के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(5).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="858"></img></p>
<p>मैच की शुरुआत से ही फ्रांस ने आक्रामक अंदाज अपनाया। शुरुआती मिनटों में ही किलियन एम्बाप्पे ने गोल करने की कोशिश की, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने शानदार बचाव करते हुए टीम को शुरुआती झटका लगने से बचा लिया। इसके बाद भी फ्रांस लगातार हमले करता रहा। दायो उपामेकानो, उस्मान डेम्बेले और माइकल ओलीसे ने कई मौके बनाए, लेकिन मोरक्को की मजबूत रक्षापंक्ति ने पहले हाफ तक मुकाबले को गोलरहित बनाए रखा। पहले हाफ का सबसे अहम पल 26वें मिनट में आया, जब बॉक्स के भीतर एम्बाप्पे को गिराए जाने पर फ्रांस को पेनल्टी मिली। पूरी दुनिया की निगाहें एम्बाप्पे पर थीं, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने शानदार डाइव लगाकर उनका शॉट रोक दिया। इस बचाव ने मोरक्को के खिलाड़ियों और समर्थकों में नई उम्मीद जगा दी और पहला हाफ बिना किसी गोल के समाप्त हुआ।दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी रणनीति में और आक्रामकता दिखाई। टीम लगातार गेंद पर कब्जा बनाए रही और मोरक्को के डिफेंस पर दबाव बनाती रही। आखिरकार 60वें मिनट में कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने बॉक्स के बाहर से शानदार कर्लिंग शॉट लगाकर गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। इस गोल के साथ फ्रांस को महत्वपूर्ण बढ़त मिल गई और स्टेडियम में मौजूद फ्रांसीसी समर्थकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/kylian-mbappe-(1).jpg" alt="Kylian Mbappe" width="1366" height="768"></img></p>
<p>एम्बाप्पे के गोल के केवल छह मिनट बाद उस्मान डेम्बेले ने शानदार स्ट्राइक लगाकर फ्रांस की बढ़त 2-0 कर दी। मोरक्को के गोलकीपर ने गेंद को रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन शॉट इतना सटीक था कि गेंद गोललाइन पार कर गई। इसके बाद फ्रांस ने संयमित खेल दिखाते हुए मुकाबले को अपने नियंत्रण में रखा और मोरक्को को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। इस मुकाबले में किलियन एम्बाप्पे ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। टूर्नामेंट में यह उनका आठवां गोल था, जिसके साथ उन्होंने अर्जेंटीना के महान फुटबॉलर लियोनेल मेसी की बराबरी कर ली। दोनों खिलाड़ियों के अब इस वर्ल्ड कप में आठ-आठ गोल हैं। हालांकि एम्बाप्पे तीन असिस्ट के कारण गोल्डन बूट की दौड़ में फिलहाल सबसे आगे पहुंच गए हैं। कुल मिलाकर वर्ल्ड कप इतिहास में एम्बाप्पे के अब 20 गोल हो चुके हैं, जबकि मेसी के नाम 21 गोल दर्ज हैं। इससे साफ है कि युवा फ्रांसीसी कप्तान विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े रिकॉर्ड की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।</p>
<p><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/fifa-world-cup-2026-(15).jpg" alt="FIFA World Cup 2026" width="1366" height="996"></img></p>
<p>मोरक्को के लिए यह हार बेहद निराशाजनक रही। अफ्रीकी टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचा था। लेकिन फ्रांस जैसी मजबूत टीम के सामने उसके खिलाड़ियों की मेहनत रंग नहीं ला सकी। इस हार के साथ टूर्नामेंट में अफ्रीका की आखिरी उम्मीद भी समाप्त हो गई। हालांकि मोरक्को ने अपने जुझारू खेल से दुनिया भर के फुटबॉल प्रेमियों का दिल जरूर जीता। मैच समाप्त होने के बाद फ्रांस के खिलाड़ी मैदान पर जश्न मनाते नजर आए। कप्तान एम्बाप्पे ने अपने साथियों और समर्थकों का अभिवादन किया, जबकि मोरक्को के खिलाड़ी हार के बाद भावुक दिखाई दिए। स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने दोनों टीमों के प्रदर्शन की सराहना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:21:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत में पहली बार विदेशी क्रिकेट लीग का मुकाबला, चेन्नई में होगा बिग बैश लीग का ओपनिंग मैच</title>
                                    <description><![CDATA[मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया बड़ा ऐलान, ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान खेल सहयोग को नई दिशा; इसके बाद न्यूजीलैंड दौरे पर होंगे रवाना।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/for-the-first-time-in-india-a-foreign-cricket-league/article-58346"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(6).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेल सहयोग को नई ऊंचाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐतिहासिक घोषणा की है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित टी-20 प्रतियोगिता बिग बैश लीग (BBL) का उद्घाटन मुकाबला इस वर्ष 12 दिसंबर को चेन्नई में खेला जाएगा। यह पहली बार होगा जब किसी विदेशी क्रिकेट लीग का आधिकारिक मैच भारतीय धरती पर आयोजित किया जाएगा। इस फैसले को दोनों देशों के बीच खेल संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने यह घोषणा अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के तीसरे और अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) के दौरे के दौरान की। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ सहित दोनों देशों के कई वरिष्ठ अधिकारी और खेल जगत की हस्तियां मौजूद थीं। एमसीजी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने क्रिकेट को दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों का सबसे प्रभावी माध्यम बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया केवल रणनीतिक और आर्थिक साझेदार ही नहीं हैं, बल्कि क्रिकेट दोनों देशों के लोगों को भावनात्मक रूप से भी जोड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत में बिग बैश लीग का मुकाबला आयोजित होना इस मजबूत मित्रता का नया प्रतीक होगा और इससे खेल संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">चेन्नई को इस ऐतिहासिक मुकाबले की मेजबानी मिलने के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। शहर लंबे समय से क्रिकेट का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां के दर्शकों का खेल के प्रति उत्साह पूरी दुनिया में जाना जाता है। आधुनिक स्टेडियम, उत्कृष्ट सुविधाएं और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का अनुभव चेन्नई को इस आयोजन के लिए उपयुक्त बनाता है। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय प्रशंसकों को पहली बार किसी विदेशी फ्रेंचाइजी लीग का आधिकारिक मुकाबला अपने देश में देखने का अवसर मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बिग बैश लीग दुनिया की सबसे लोकप्रिय टी-20 क्रिकेट प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है। इसमें ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों की फ्रेंचाइजी टीमें हिस्सा लेती हैं और दुनिया भर के कई स्टार खिलाड़ी इसमें खेलते हैं। भारत में इसके उद्घाटन मैच के आयोजन से दोनों देशों के क्रिकेट बोर्डों के बीच सहयोग और मजबूत होने की संभावना है। साथ ही भविष्य में अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड के दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज के साथ स्टेडियम का भ्रमण किया। उन्होंने प्रसिद्ध शेन वॉर्न स्टैंड का भी दौरा किया और ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास की उपलब्धियों की जानकारी ली। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने युवा क्रिकेट खिलाड़ियों से मुलाकात की और उनकी जर्सियों पर हस्ताक्षर कर उनका उत्साह बढ़ाया। प्रधानमंत्री ने ऑस्ट्रेलिया के प्रतीक माने जाने वाले लोकप्रिय कंगारू कैरेक्टर ‘रूबी द रू’ से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के खेल संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव मिलेगा और खेल पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में क्रिकेट संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। दोनों देशों के खिलाड़ी एक-दूसरे की घरेलू लीगों में भी हिस्सा लेते रहे हैं। भारतीय खिलाड़ी बिग बैश लीग में भले नियमित रूप से नहीं खेलते हों, लेकिन इस लीग की लोकप्रियता भारत में लगातार बढ़ी है। ऐसे में भारत में इसके आधिकारिक मैच का आयोजन क्रिकेट प्रेमियों के लिए बड़ी सौगात माना जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल खेल तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष सहयोग सहित कई क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच समझौतों को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। क्रिकेट को भी उन्होंने दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाला सबसे प्रभावी सांस्कृतिक माध्यम बताया।</p>
<p style="text-align:justify;">ऑस्ट्रेलिया दौरे के बाद प्रधानमंत्री अपने छह दिवसीय विदेश दौरे के अंतिम चरण में न्यूजीलैंड रवाना होंगे। वहां उनकी यात्रा की शुरुआत द्विपक्षीय वार्ताओं से होगी, जिसमें दोनों देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर आगे चर्चा की जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री एक व्यापार सम्मेलन, खेल कार्यक्रम और भारतीय समुदाय के विशेष आयोजन में भी हिस्सा लेंगे। ऑकलैंड में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में करीब 40 हजार भारतीय मूल के लोगों के शामिल होने की संभावना है। भारतीय समुदाय ने प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए ‘किया ओरा मोदी’ नाम से विशेष कार्यक्रम तैयार किया है। यह यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि करीब चार दशक बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर पहुंच रहा है। इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:07:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सीरीज बचाने उतरेगा भारत, इंग्लैंड के खिलाफ चौथा टी-20 आज ब्रिस्टल में</title>
                                    <description><![CDATA[इंग्लैंड 2-0 की बढ़त के साथ सीरीज जीतने से एक कदम दूर, भारत के लिए करो या मरो का मुकाबला; वैभव सूर्यवंशी से बड़ी पारी की उम्मीद।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/india-will-try-to-save-the-series-in-the-fourth/article-58243"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/india-vs-england-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैचों की टी-20 सीरीज का चौथा मुकाबला गुरुवार को ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड में खेला जाएगा। भारतीय समय के अनुसार मैच रात 10 बजे शुरू होगा। मौजूदा सीरीज में इंग्लैंड 2-0 की मजबूत बढ़त बनाए हुए है। पहला मुकाबला बारिश के कारण पूरा नहीं हो सका था, जबकि दूसरे और तीसरे टी-20 में मेजबान टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की। अब भारतीय टीम के सामने सीरीज बचाने की बड़ी चुनौती है। अगर टीम इंडिया यह मुकाबला हार जाती है तो सीरीज भी गंवा देगी। ऐसे में खिलाड़ियों पर दबाव तो रहेगा, लेकिन टीम के पास वापसी करने का यह आखिरी मौका भी होगा। भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला सिर्फ एक जीत का नहीं बल्कि सम्मान और निरंतरता का भी है। यदि भारत यह सीरीज हारता है तो 2018-19 के बाद पहली बार ऐसा होगा जब टीम लगातार दो टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज गंवाएगी। पिछले मैच में मिली 125 रन की बड़ी हार ने टीम की कमजोरियों को उजागर कर दिया था। बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी तक लगभग हर विभाग में भारत संघर्ष करता नजर आया। अब टीम प्रबंधन चाहेगा कि खिलाड़ी पिछली हार को भूलकर नए जोश के साथ मैदान में उतरें।</p>
<p style="text-align:justify;">टीम की नजर एक बार फिर 15 वर्षीय युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी पर रहेगी। अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में शानदार शुरुआत की उम्मीदों के साथ उतरे वैभव अब तक दो मैचों में केवल 27 रन ही बना सके हैं। उन्होंने पहली दो पारियों में क्रमशः 14 और 13 रन बनाए। हालांकि उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता जरूर दिखाई दी है और उन्होंने अब तक सात स्कोरिंग शॉट लगाए हैं, जिनमें चार छक्के शामिल हैं। टीम प्रबंधन को उम्मीद होगी कि युवा बल्लेबाज इस अहम मुकाबले में लंबी पारी खेलकर अपनी प्रतिभा साबित करेंगे। कप्तान श्रेयस अय्यर भी लगातार चर्चा में बने हुए हैं। टी-20 टीम की कमान संभालने के बाद उन्हें अब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीत का इंतजार है। इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे मुकाबले में मिली करारी हार के बाद उन्होंने स्वीकार किया था कि टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। आंकड़े भी उनके पक्ष में नहीं हैं। आईपीएल सहित अपनी पिछली 11 टी-20 कप्तानी में वह 10 मुकाबले हार चुके हैं। हालांकि टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने कप्तान का बचाव करते हुए कहा कि एक हार या एक खराब सीरीज से किसी खिलाड़ी या टीम का आकलन नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ किया कि भारत अपनी आक्रामक खेलने की रणनीति में कोई बदलाव नहीं करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बल्लेबाजी की बात करें तो मौजूदा सीरीज में अभिषेक शर्मा भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे हैं। उन्होंने तीन मैचों में 112 रन बनाए हैं और लगातार अच्छी लय में नजर आए हैं। कप्तान श्रेयस अय्यर ने भी 110 रन बनाकर योगदान दिया है। वहीं मिडिल ऑर्डर में शिवम दुबे से इस मुकाबले में बड़ी उम्मीदें रहेंगी। पहले टी-20 में उन्होंने 21 गेंदों पर नाबाद 42 रन बनाकर शानदार फिनिश किया था, लेकिन अगले दोनों मुकाबलों में बड़ी पारी खेलने में सफल नहीं रहे। टीम चाहेगी कि वह अपनी पावर हिटिंग से मध्यक्रम को मजबूती दें। गेंदबाजी में अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा ने अब तक तीन-तीन विकेट लेकर सबसे अधिक सफलता हासिल की है। हालांकि भारतीय गेंदबाज इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाने में सफल नहीं रहे। तीसरे मुकाबले में इंग्लैंड के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजी की जमकर धुनाई की थी। ऐसे में चौथे मुकाबले में गेंदबाजों के प्रदर्शन पर भी सभी की नजर रहेगी। टीम संयोजन में बदलाव की संभावना भी जताई जा रही है। संजू सैमसन, वॉशिंगटन सुंदर, सूर्यांश शेडगे, रवि बिश्नोई और प्रसिद्ध कृष्णा विकल्प के तौर पर उपलब्ध हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर इंग्लैंड पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान में उतरेगा। कप्तान हैरी ब्रूक की अगुआई में टीम लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है। इंग्लैंड ने अपने पिछले 21 पूरे हुए टी-20 मुकाबलों में 18 जीत दर्ज की हैं, जो उसकी मौजूदा फॉर्म को दर्शाता है। टीम के पास इतिहास रचने का भी मौका है क्योंकि उसने अब तक भारत के खिलाफ दो या उससे अधिक मैचों की टी-20 सीरीज कभी नहीं जीती है। यदि वह चौथा मुकाबला जीत जाती है तो यह उपलब्धि पहली बार उसके नाम होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इंग्लैंड के बल्लेबाजी क्रम में जैकब बेथेल और फिल सॉल्ट शानदार फॉर्म में हैं। बेथेल ने तीन मैचों में 89 रन बनाए हैं, जबकि फिल सॉल्ट ने पिछले मुकाबले में 70 रन की मैच जिताऊ पारी खेली थी। गेंदबाजी में जोफ्रा आर्चर, सैम करन और जोश टंग ने चार-चार विकेट लेकर भारतीय बल्लेबाजों को काफी परेशान किया है। अनुभवी स्पिनर आदिल रशीद भी बीच के ओवरों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ब्रिस्टल के काउंटी ग्राउंड की पिच आमतौर पर बल्लेबाजों के लिए अनुकूल मानी जाती है। यहां की सीधी बाउंड्री अपेक्षाकृत छोटी हैं, जिससे बड़े शॉट लगाना आसान होता है। हालांकि इस सीजन घरेलू टी-20 प्रतियोगिता में पहली पारी का औसत स्कोर करीब 156 रन रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मैच के दौरान मौसम साफ रहने की संभावना है और बारिश की आशंका बेहद कम है। ऐसे में पूरे 20-20 ओवर का मुकाबला देखने को मिल सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:08:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>फ्रांस और मोरक्को की टक्कर आज, एमबाप्पे के पास मेसी को पीछे छोड़ने का सुनहरा मौका</title>
                                    <description><![CDATA[FIFA वर्ल्ड कप 2026 के पहले क्वार्टर फाइनल में फ्रांस का सामना मोरक्को से होगा। सात गोल कर चुके किलियन एमबाप्पे गोल्डन बूट की दौड़ में लियोनेल मेसी के आठ गोल के रिकॉर्ड की बराबरी या उससे आगे निकलने की कोशिश करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/todays-clash-between-france-and-morocco-mbappe-has-a-golden/article-58256"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/fifa-world-cup-2026-(14).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">FIFA वर्ल्ड कप 2026 अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। टूर्नामेंट का पहला क्वार्टर फाइनल मुकाबला शुक्रवार देर रात फ्रांस और मोरक्को के बीच खेला जाएगा। दोनों टीमें बोस्टन स्टेडियम में आमने-सामने होंगी। मुकाबला भारतीय समयानुसार रात 1:30 बजे शुरू होगा। इस मैच पर दुनिया भर के फुटबॉल प्रशंसकों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि एक ओर मौजूदा चैंपियन फ्रांस है तो दूसरी ओर इस विश्व कप की सबसे बड़ी सरप्राइज टीम मोरक्को, जिसने अपने शानदार प्रदर्शन से कई मजबूत टीमों को चुनौती दी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मुकाबले का सबसे बड़ा आकर्षण फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे होंगे। टूर्नामेंट में अब तक एमबाप्पे सात गोल दाग चुके हैं और गोल्डन बूट की दौड़ में दूसरे स्थान पर हैं। अर्जेंटीना के कप्तान लियोनेल मेसी आठ गोल के साथ फिलहाल सबसे आगे हैं। ऐसे में यदि एमबाप्पे इस मैच में गोल करने में सफल रहते हैं तो वह मेसी की बराबरी कर सकते हैं या उनसे आगे भी निकल सकते हैं। यही वजह है कि यह मुकाबला सिर्फ क्वार्टर फाइनल नहीं बल्कि गोल्डन बूट की रेस के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फ्रांस की टीम पूरे टूर्नामेंट में शानदार लय में नजर आई है। टीम ने अब तक खेले सभी मुकाबलों में जीत दर्ज की है और किसी भी प्रतिद्वंद्वी को वापसी का मौका नहीं दिया। ग्रुप चरण में फ्रांस ने नॉर्वे को 4-1, इराक को 3-0 और सेनेगल को 3-1 से हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया। इसके बाद नॉकआउट चरण में स्वीडन को 3-0 और फिर पैराग्वे को 1-0 से हराकर टीम ने क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। मजबूत आक्रमण और संतुलित मिडफील्ड फ्रांस की सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर मोरक्को ने भी अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया है। टीम अभी तक टूर्नामेंट में अजेय रही है और उसने कई मजबूत टीमों के खिलाफ बेहतरीन खेल दिखाया है। ग्रुप स्टेज में मोरक्को ने हैती को 4-2 से हराया, स्कॉटलैंड को 1-0 से मात दी और ब्राजील जैसी दिग्गज टीम को 1-1 की बराबरी पर रोक दिया। नॉकआउट चरण में नीदरलैंड के खिलाफ पेनाल्टी शूटआउट में जीत दर्ज करने के बाद टीम ने राउंड ऑफ-16 में कनाडा को 3-0 से हराकर अंतिम आठ में जगह बनाई। मोरक्को का आत्मविश्वास इस समय काफी ऊंचा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फ्रांस और मोरक्को के बीच अब तक छह अंतरराष्ट्रीय मुकाबले खेले गए हैं। इनमें फ्रांस का पलड़ा भारी रहा है। फ्रांस ने चार मैच जीते हैं, जबकि मोरक्को को केवल एक जीत मिली है। एक मुकाबला ड्रॉ रहा। विश्व कप इतिहास में दोनों टीमें दूसरी बार आमने-सामने होंगी। इससे पहले 2022 के विश्व कप सेमीफाइनल में फ्रांस ने मोरक्को को 2-0 से हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया था। ऐसे में मोरक्को के पास इस हार का बदला लेने का भी अच्छा अवसर होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस मुकाबले में सबसे दिलचस्प भिड़ंत फ्रांस के स्टार स्ट्राइकर किलियन एमबाप्पे और मोरक्को के कप्तान अचराफ हकीमी के बीच देखने को मिल सकती है। दोनों खिलाड़ी क्लब फुटबॉल में लंबे समय तक एक साथ खेल चुके हैं और एक-दूसरे की ताकत व कमजोरियों से अच्छी तरह परिचित हैं। एमबाप्पे अपनी तेज रफ्तार, शानदार ड्रिब्लिंग और सटीक फिनिशिंग के लिए जाने जाते हैं, जबकि हकीमी अपनी मजबूत डिफेंस, गति और टैकलिंग क्षमता के दम पर किसी भी बड़े खिलाड़ी को रोकने का माद्दा रखते हैं। यही मुकाबला इस क्वार्टर फाइनल का निर्णायक पहलू बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">फ्रांस के कोच को उम्मीद होगी कि उनकी टीम शुरुआत से ही आक्रामक खेल दिखाए और जल्दी बढ़त हासिल करे। वहीं मोरक्को की रणनीति मजबूत रक्षात्मक खेल के साथ जवाबी हमलों पर आधारित रहने की संभावना है। टीम ने पूरे टूर्नामेंट में इसी रणनीति के दम पर कई बड़ी टीमों को परेशान किया है। संभावित प्लेइंग इलेवन की बात करें तो फ्रांस की ओर से माइक मैग्नन गोलकीपर की भूमिका निभा सकते हैं। डिफेंस में जूल्स कौंडे, उपामेकानो, विलियम सलीबा और थियो हर्नांडेज जिम्मेदारी संभालेंगे। मिडफील्ड में चुआमेनी और एड्रियन रैबियो के साथ माइकल ओलिस खेल सकते हैं, जबकि आक्रमण की जिम्मेदारी उस्मान डेमबेले, बार्कोला और किलियन एमबाप्पे के कंधों पर होगी। मोरक्को की संभावित टीम में यासीन बोनो गोलकीपर होंगे। डिफेंस में अचराफ हकीमी, नायेफ अगुएर्ड, रोमन साइस और नुसैर मजरौई शामिल हो सकते हैं। मिडफील्ड में सोफयान अमराबत, अजेदीन औनाही और सेलिम अमल्लाह खेलेंगे। आगे की पंक्ति में हाकिम जियेच, यूसुफ एन-नेसिरी और सोफियान बौफाल टीम के लिए गोल करने की कोशिश करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 12:07:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>5 घंटे 15 मिनट का ऐतिहासिक मुकाबला जीतकर जोकोविच विंबलडन सेमीफाइनल में पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[39 वर्षीय नोवाक जोकोविच ने विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल जीतते हुए कनाडा के फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे को पांच सेटों में हराया। अब सेमीफाइनल में उनका सामना दुनिया के नंबर-1 जैनिक सिनर से होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/djokovic-reaches-wimbledon-semi-finals-after-winning-a-historic-match-of/article-58193"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/novak-djokovic-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">39 वर्षीय सर्बियाई टेनिस स्टार नोवाक जोकोविच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मुकाबलों में उनका अनुभव और मानसिक मजबूती उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती है। ऑल इंग्लैंड क्लब के सेंटर कोर्ट पर खेले गए विंबलडन पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल में जोकोविच ने कनाडा के फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे को पांच घंटे 15 मिनट तक चले रोमांचक मुकाबले में 7-6 (10), 3-6, 6-3, 6-7 (4), 7-6 (4) से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। यह मुकाबला विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल क्वार्टर फाइनल बन गया। इससे पहले 2008 में रेनर शुटलर और अरनो क्लेमेंट के बीच खेला गया क्वार्टर फाइनल पांच घंटे 12 मिनट तक चला था। इस जीत के साथ जोकोविच ने कई नए रिकॉर्ड भी अपने नाम किए और अपने शानदार करियर में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया।</p>
<p>शुरुआत से ही मुकाबला बेहद कड़ा रहा। पहले सेट में दोनों खिलाड़ियों ने शानदार सर्विस और दमदार रैलियों का प्रदर्शन किया। कोई भी खिलाड़ी आसानी से बढ़त बनाने में सफल नहीं हुआ और पहला सेट टाई-ब्रेक तक पहुंचा। टाई-ब्रेक में जोकोविच ने अनुभव का परिचय देते हुए 10-8 से बढ़त बनाई और पहला सेट अपने नाम किया। हालांकि युवा कनाडाई खिलाड़ी फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे ने हार नहीं मानी और दूसरे सेट में आक्रामक खेल दिखाते हुए 6-3 से जीत दर्ज कर मुकाबले में बराबरी कर ली।</p>
<p>तीसरे सेट में जोकोविच ने फिर से अपनी लय हासिल की। उन्होंने लंबी रैलियों में बढ़त बनाई और प्रतिद्वंद्वी की गलतियों का पूरा फायदा उठाते हुए 6-3 से सेट जीत लिया। लेकिन चौथे सेट में फेलिक्स ने शानदार वापसी की। दोनों खिलाड़ियों के बीच एक बार फिर कड़ी टक्कर देखने को मिली और फैसला टाई-ब्रेक में पहुंचा। इस बार कनाडाई खिलाड़ी ने बाजी मारते हुए मुकाबले को निर्णायक पांचवें सेट तक पहुंचा दिया। स्टेडियम में मौजूद दर्शकों को लगातार उतार-चढ़ाव से भरा मुकाबला देखने को मिला और हर अंक पर रोमांच चरम पर था।</p>
<p>पांचवां और अंतिम सेट दोनों खिलाड़ियों की फिटनेस, धैर्य और मानसिक मजबूती की असली परीक्षा साबित हुआ। पांच घंटे से अधिक समय तक कोर्ट पर संघर्ष करने के बावजूद दोनों खिलाड़ी लगातार शानदार टेनिस खेलते रहे। आखिरकार मुकाबले का फैसला सुपर टाई-ब्रेक में हुआ। यहीं 22 शॉट की लंबी रैली मैच का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी। जोकोविच ने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए फेलिक्स को कोर्ट के एक कोने से दूसरे कोने तक दौड़ाया। आखिर में कनाडाई खिलाड़ी का फोरहैंड शॉट बाहर चला गया और जोकोविच ने 9-4 की अहम बढ़त बना ली। अगले ही अंक पर उन्होंने मैच अपने नाम कर लिया और सेंटर कोर्ट पर दर्शकों की तालियों के बीच ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया।</p>
<p>इस जीत के साथ जोकोविच लगातार आठवीं बार विंबलडन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले खिलाड़ी बन गए। उन्होंने इस मामले में रोजर फेडरर के लगातार सात सेमीफाइनल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। अब उनका अगला मुकाबला दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी और मौजूदा चैंपियन जैनिक सिनर से होगा। सिनर ने अपने क्वार्टर फाइनल में जर्मनी के जान-लेनार्ड स्ट्रफ को सीधे सेटों में 7-5, 7-6 (4), 6-3 से हराकर अंतिम चार में जगह बनाई। पिछले साल विंबलडन के सेमीफाइनल में सिनर ने जोकोविच को सीधे सेटों में हराया था, जबकि इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन के सेमीफाइनल में जोकोविच ने पांच सेटों तक चले मुकाबले में सिनर को मात दी थी। ऐसे में दोनों दिग्गजों के बीच होने वाला सेमीफाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक माना जा रहा है।</p>
<p>जोकोविच ने इस मुकाबले में कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए। उन्होंने अपने करियर का 50वां पांच सेट वाला ग्रैंड स्लैम मैच खेला और ओपन एरा में सबसे ज्यादा पांच सेट के ग्रैंड स्लैम मुकाबले खेलने वाले खिलाड़ी बन गए। इससे पहले यह रिकॉर्ड स्विट्जरलैंड के स्टेन वावरिंका के नाम था, जिन्होंने 49 ऐसे मुकाबले खेले थे। इसके अलावा जोकोविच ओपन एरा में किसी एक ग्रैंड स्लैम में 15 पुरुष एकल सेमीफाइनल खेलने वाले तीसरे खिलाड़ी भी बन गए। इससे पहले रोजर फेडरर ऑस्ट्रेलियन ओपन और राफेल नडाल फ्रेंच ओपन में यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं।</p>
<p>39 साल और 38 दिन की उम्र में जोकोविच विंबलडन पुरुष एकल के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले दूसरे सबसे उम्रदराज खिलाड़ी भी बन गए। उनसे आगे केवल केन रोसेवाल हैं, जिन्होंने 39 साल 234 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। इसके साथ ही जोकोविच ने विंबलडन में अपनी 107वीं जीत दर्ज की और टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा मैच जीतने का अपना रिकॉर्ड और मजबूत कर लिया। यह उनके करियर का 55वां ग्रैंड स्लैम सेमीफाइनल भी है, जो अपने आप में एक सर्वकालिक रिकॉर्ड है।</p>
<p>मुकाबले के दौरान जोकोविच को शारीरिक परेशानी का भी सामना करना पड़ा। पहले सेट में उनके बाएं टखने और पिंडली में दर्द महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने मेडिकल टाइमआउट लिया। फिजियो ने उनकी मसाज की और पट्टी बांधी, जिसके बाद उन्होंने खेल जारी रखा। दूसरे सेट के बाद सेंटर कोर्ट की छत बंद करने के फैसले पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उनका कहना था कि बाहर पर्याप्त रोशनी थी और खेल बिना छत बंद किए भी जारी रह सकता था।</p>
<p>मैच के बाद जोकोविच ने कहा कि वह आज भी ऐसे ही ऐतिहासिक मुकाबलों के लिए टेनिस खेलते हैं। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें खुद भी हैरानी होती है कि वह अब भी युवा खिलाड़ियों के साथ इतने लंबे और कठिन मुकाबले जीत पा रहे हैं। सेमीफाइनल में सिनर से होने वाली भिड़ंत पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि काश यह फाइनल होता, ताकि अगले दिन शरीर की हालत को लेकर चिंता नहीं करनी पड़ती। उन्होंने यह भी बताया कि चौथे सेट के बाद उन्होंने अपने बच्चों से सो जाने के लिए कहा था, लेकिन वे मैच खत्म होने तक रुके रहे। जोकोविच के अनुसार यह सेंटर कोर्ट पर उनके करियर के सर्वश्रेष्ठ मुकाबलों में से एक था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:51:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चार साल बाद घर में टेस्ट सीरीज जीता वेस्टइंडीज, श्रीलंका को 1-0 से हराया</title>
                                    <description><![CDATA[एंटीगुआ टेस्ट ड्रॉ पर खत्म हुआ, लेकिन पहले मैच की बड़ी जीत के दम पर वेस्टइंडीज ने सीरीज अपने नाम की। जॉन कैंपबेल और ब्रैंडन किंग की नाबाद साझेदारी ने आखिरी दिन हार का खतरा भी टाल दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/west-indies-won-the-test-series-at-home-after-four/article-58192"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/west-indies-vs-sri-lanka-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">करीब चार साल के लंबे इंतजार के बाद वेस्टइंडीज ने अपने घरेलू मैदान पर टेस्ट सीरीज जीतने का स्वाद चखा है। कैरेबियाई टीम ने दो मैचों की टेस्ट सीरीज में श्रीलंका को 1-0 से हराकर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। एंटीगुआ के नॉर्थ साउंड में खेला गया दूसरा और अंतिम टेस्ट ड्रॉ पर समाप्त हुआ, लेकिन पहले टेस्ट में पारी और 217 रन की विशाल जीत ने वेस्टइंडीज को सीरीज का विजेता बना दिया। यह टीम की 2023 के बाद किसी भी टेस्ट सीरीज में पहली जीत भी है, जिससे खिलाड़ियों और प्रशंसकों में खासा उत्साह देखने को मिला।</p>
<p>दूसरे टेस्ट के पांचवें और अंतिम दिन श्रीलंका ने 92 रन पर दो विकेट से अपनी दूसरी पारी आगे बढ़ाई। टीम का इरादा तेजी से रन बनाकर वेस्टइंडीज को चुनौतीपूर्ण लक्ष्य देने का था और बल्लेबाजों ने उसी अंदाज में शुरुआत भी की। पहले सत्र में श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने तेज रन बटोरे और स्कोर को तेजी से आगे बढ़ाया। दिनेश चांदीमल ने जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए 71 रन बनाए, जबकि कामिंडु मेंडिस ने भी आक्रामक अंदाज में रन जुटाए। दोनों बल्लेबाजों ने रन गति को लगातार ऊंचा रखा और वेस्टइंडीज के गेंदबाजों पर दबाव बनाने की कोशिश की।</p>
<p>हालांकि तेजी से रन बनाने के प्रयास में श्रीलंका ने लगातार विकेट भी गंवाए। पहले सत्र के 24 ओवरों में टीम ने 139 रन जोड़ दिए, लेकिन इसी दौरान छह बल्लेबाज पवेलियन भी लौट गए। कामिंडु मेंडिस को जेडेन सील्स ने आउट किया, जबकि कप्तान धनंजय डी सिल्वा कैच देकर चलते बने। दिनेश चांदीमल और कुसल मेंडिस भी बड़ी पारी को और आगे नहीं बढ़ा सके। सोनल दिनुषा दूसरा रन लेने के प्रयास में रन आउट हो गए। लगातार विकेट गिरने के बावजूद श्रीलंका ने 251 रन पर नौ विकेट के स्कोर पर अपनी दूसरी पारी घोषित कर दी और वेस्टइंडीज के सामने जीत के लिए 302 रन का लक्ष्य रखा।</p>
<p>लंच के बाद लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद संतुलित रही। ओपनर जॉन कैंपबेल और ब्रैंडन किंग ने जल्दबाजी दिखाने के बजाय विकेट बचाने को प्राथमिकता दी। दोनों बल्लेबाजों ने श्रीलंका के तेज गेंदबाजों के साथ-साथ अनुभवी स्पिनर प्रभात जयसूर्या का भी धैर्यपूर्वक सामना किया। दोनों ने जोखिम भरे शॉट खेलने से बचते हुए रन गति को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। टी ब्रेक तक वेस्टइंडीज का स्कोर बिना किसी नुकसान के 65 रन हो चुका था और टीम पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में नजर आ रही थी।</p>
<p>आखिरी सत्र में मौसम ने भी कुछ देर के लिए खेल में बाधा डाली। हल्की बारिश के कारण मुकाबला लगभग दस मिनट तक रुका रहा। खेल दोबारा शुरू होने पर वेस्टइंडीज ने बिना विकेट गंवाए 109 रन बना लिए थे। दोनों ओपनरों ने शानदार संयम दिखाया और श्रीलंका को कोई सफलता नहीं मिलने दी। इसके बाद जब परिणाम की संभावना लगभग समाप्त हो गई तो दोनों टीमों के कप्तानों ने आपसी सहमति से मैच ड्रॉ घोषित करने का फैसला किया। इस तरह दूसरा टेस्ट बराबरी पर समाप्त हुआ, जबकि सीरीज का खिताब वेस्टइंडीज के नाम रहा।</p>
<p>मैच के दौरान ब्रैंडन किंग दो बार एलबीडब्ल्यू अपील में फंसे, लेकिन दोनों मौकों पर उन्हें जीवनदान मिला। पहली बार डीआरएस में पता चला कि गेंद स्टंप के ऊपर से निकल रही थी, जबकि दूसरी बार अंपायर्स कॉल के कारण फैसला बल्लेबाज के पक्ष में गया। इन दोनों मौकों का फायदा उठाते हुए किंग ने अपनी पारी संभाली और अंत तक नाबाद लौटे। दूसरी ओर जॉन कैंपबेल ने भी जिम्मेदारी के साथ बल्लेबाजी करते हुए साझेदारी को टूटने नहीं दिया। दोनों की ओपनिंग जोड़ी ने साबित किया कि मुश्किल परिस्थितियों में धैर्य और तकनीक कितनी अहम होती है।</p>
<p>इस सीरीज में वेस्टइंडीज की सफलता का सबसे बड़ा आधार उसकी पहली टेस्ट में मिली एकतरफा जीत रही। पहले मुकाबले में टीम ने श्रीलंका को पारी और 217 रन से हराया था। उस मैच में बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों ने शानदार प्रदर्शन किया था। उसी जीत ने सीरीज में बढ़त दिलाई और दूसरे टेस्ट में ड्रॉ भी वेस्टइंडीज के लिए पर्याप्त साबित हुआ। सीरीज के सबसे बड़े सितारे जस्टिन ग्रीव्स रहे। उन्हें दूसरे टेस्ट में 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया। ग्रीव्स ने पहली पारी में शानदार 180 रन की यादगार पारी खेली, जिसने वेस्टइंडीज को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। बल्लेबाजी के अलावा उन्होंने गेंदबाजी में भी योगदान देते हुए एक विकेट हासिल किया। पूरे सीरीज में उनके लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' का पुरस्कार भी दिया गया। उन्होंने तीन पारियों में कुल 183 रन बनाए और चार विकेट भी अपने नाम किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:51:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंग्लैंड ने भारत को 125 रन से हराया, टी-20 इतिहास की सबसे बड़ी हार</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रेंट ब्रिज में भारतीय टीम 76 रन पर सिमटी, टी-20 में दूसरा सबसे कम स्कोर बनाया। एमएस धोनी जन्मदिन पर मुकाबला देखने पहुंचे, जबकि वैभव सूर्यवंशी लगातार दूसरे मैच में नाकाम रहे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/england-defeated-india-by-125-runs-the-biggest-defeat-in/article-58191"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ind-vs-eng.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">इंग्लैंड ने नॉटिंघम के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर खेले गए तीसरे टी-20 मुकाबले में भारत को 125 रन से हराकर बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में रनों के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी हार बन गई। 202 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम महज 76 रन पर ऑलआउट हो गई। यह भारत का टी-20 अंतरराष्ट्रीय में दूसरा सबसे कम स्कोर भी है। इससे पहले टीम 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मेलबर्न में 74 रन पर सिमट गई थी। इस हार के साथ भारतीय टीम का लगातार पांच मैचों से जीत का इंतजार भी जारी है, जो इस फॉर्मेट में उसकी सबसे लंबी जीतविहीन श्रृंखला बन गई है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/t20-cricket.jpg" alt="T20 Cricket" width="1366" height="763"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए इंग्लैंड ने सात विकेट पर 201 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया। शुरुआती ओवरों से ही इंग्लैंड के बल्लेबाज आक्रामक नजर आए और भारतीय गेंदबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा। कप्तान जोस बटलर ने तेज शुरुआत करते हुए 21 गेंदों में 36 रन बनाए और टीम को मजबूत शुरुआत दिलाई। हालांकि पावरप्ले के आखिरी ओवर में युवा तेज गेंदबाज प्रिंस यादव ने अपनी पहली ही गेंद पर बटलर को बोल्ड कर भारत को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई। उनकी सटीक यॉर्कर बल्लेबाज के बल्ले से लगकर सीधे स्टंप्स पर जा लगी। प्रिंस यादव ने अपने चार ओवर के स्पेल में 30 रन देकर दो विकेट हासिल किए और अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया, लेकिन दूसरे छोर से इंग्लैंड के बल्लेबाज लगातार रन बनाते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/jofra-archer.jpg" alt="Jofra Archer" width="1366" height="763"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इंग्लैंड के मध्यक्रम ने भी तेजी से रन जोड़े और निर्धारित 20 ओवर में टीम का स्कोर 200 के पार पहुंचा दिया। भारत के खिलाफ यह इंग्लैंड का चौथा 200 से अधिक का स्कोर रहा। इससे पहले भी इंग्लैंड भारतीय गेंदबाजी के खिलाफ कई बार बड़े स्कोर बना चुका है। बल्लेबाजों ने मैदान के चारों ओर आकर्षक शॉट लगाए और डेथ ओवरों में तेजी से रन बटोरकर भारत के सामने चुनौतीपूर्ण लक्ष्य रखा। 202 रन के जवाब में भारतीय बल्लेबाजी शुरुआत से ही लड़खड़ाती नजर आई। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी से टीम को अच्छी शुरुआत की उम्मीद थी, लेकिन वह लगातार दूसरे मुकाबले में प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। जोफ्रा आर्चर ने तीसरे ओवर में उन्हें शॉर्ट गेंद पर विकेटकीपर जोस बटलर के हाथों कैच करा दिया। वैभव ने पांच गेंदों में 13 रन बनाए, लेकिन बड़ी पारी खेलने का मौका गंवा बैठे। आईपीएल में दोनों खिलाड़ी एक ही फ्रेंचाइजी के लिए खेल चुके हैं, ऐसे में यह मुकाबला भी चर्चा का विषय बना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/team-india.jpg" alt="Team India" width="1366" height="890"></img></p>
<p style="text-align:justify;">वैभव के आउट होने के बाद भारतीय बल्लेबाजी पूरी तरह बिखर गई। एक के बाद एक विकेट गिरते रहे और किसी भी बल्लेबाज ने लंबी साझेदारी नहीं निभाई। तिलक वर्मा का विकेट भी चर्चा में रहा। वह विल जैक्स की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में क्रीज से काफी बाहर निकल आए और विकेटकीपर जोस बटलर ने उन्हें स्टंप कर दिया। शुरुआत में यह फैसला थोड़ा विवादित लगा, क्योंकि ऐसा महसूस हुआ कि गेंद बटलर के हाथ से निकल गई थी। हालांकि थर्ड अंपायर ने रिप्ले देखने के बाद तिलक को आउट करार दिया। वह केवल तीन रन बनाकर पवेलियन लौटे। भारतीय टीम के बल्लेबाज इंग्लैंड के गेंदबाजों के सामने पूरी तरह संघर्ष करते नजर आए। नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और पूरी टीम सिर्फ 76 रन पर सिमट गई। यह टी-20 अंतरराष्ट्रीय में भारत का दूसरा सबसे कम स्कोर है। इससे पहले 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 74 रन पर ऑलआउट होना भारत का सबसे न्यूनतम स्कोर था। इस हार ने भारतीय टीम के कई पुराने रिकॉर्ड भी तोड़ दिए। रनों के लिहाज से इससे पहले भारत की सबसे बड़ी हार 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 80 रन की थी, लेकिन अब इंग्लैंड ने 125 रन से हराकर नया रिकॉर्ड बना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/ind-vs-eng.jpg" alt="IND vs ENG" width="1366" height="763"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस मुकाबले में एक और दिलचस्प दृश्य तब देखने को मिला, जब भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपने जन्मदिन पर ट्रेंट ब्रिज स्टेडियम पहुंचे। 7 जुलाई को अपना जन्मदिन मना रहे धोनी ब्लैक कोट और ब्लैक चश्मे में नजर आए। जैसे ही स्टेडियम की बड़ी स्क्रीन पर उनकी तस्वीर दिखाई गई, दर्शकों ने जोरदार तालियों और नारों से उनका स्वागत किया। मैदान पर मौजूद भारतीय समर्थकों के लिए यह खास पल रहा, हालांकि टीम का प्रदर्शन उनके लिए निराशाजनक साबित हुआ। भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने इस मुकाबले में लगातार पांचवीं बार टॉस जीतकर एक अलग रिकॉर्ड की बराबरी की। उन्होंने टी-20 अंतरराष्ट्रीय में लगातार पांच टॉस जीतने के मामले में रोहित शर्मा की बराबरी कर ली। भारत के लिए लगातार सबसे ज्यादा सात टॉस जीतने का रिकॉर्ड अब भी महेंद्र सिंह धोनी के नाम दर्ज है, जिन्होंने 2010 से 2012 के बीच यह उपलब्धि हासिल की थी। हालांकि इस मैच में टॉस जीतने का फायदा टीम को नहीं मिल सका।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पोर्ट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:51:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>13 मिनट में तीन गोल, मिस्र को हराकर अर्जेंटीना क्वार्टर फाइनल में पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[दो गोल से पिछड़ने के बाद डिफेंडिंग चैंपियन की ऐतिहासिक वापसी, लियोनेल मेसी ने टूर्नामेंट का आठवां गोल दागा और अर्जेंटीना ने 3-2 से रोमांचक जीत दर्ज की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/sports/argentina-reached-quarter-finals-by-defeating-egypt-by-three-goals-in/article-58186"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/argentina-vs-egypt.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना ने फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप में ऐसा शानदार प्रदर्शन किया, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होगी। अटलांटा स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अर्जेंटीना ने मिस्र को 3-2 से हराकर अंतिम आठ में जगह बना ली। मैच के 78वें मिनट तक अर्जेंटीना दो गोल से पीछे था और ऐसा लग रहा था कि मौजूदा विश्व चैंपियन का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा। लेकिन अगले 13 मिनट में पूरी तस्वीर बदल गई। क्रिस्टियन रोमेरो, कप्तान लियोनेल मेसी और एंजो फर्नांडीज ने लगातार तीन गोल दागकर टीम को यादगार जीत दिला दी। विश्व कप इतिहास में यह पहला मौका भी बना, जब अर्जेंटीना दो गोल से पिछड़ने के बाद मुकाबला जीतने में सफल रहा।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(1).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="761"></img></p>
<p style="text-align:justify;">मुकाबले की शुरुआत से ही मिस्र ने आक्रामक अंदाज अपनाया। टीम ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण रखा और अर्जेंटीना के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। इसका फायदा उसे 15वें मिनट में मिला, जब यासिर इब्राहिम ने शानदार मूव को गोल में बदलते हुए मिस्र को 1-0 की बढ़त दिला दी। शुरुआती झटके के बाद अर्जेंटीना ने वापसी की कोशिश की और कई हमले किए, लेकिन मिस्र के गोलकीपर मुस्तफा शौबीर ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक के बाद एक बेहतरीन बचाव किए। पहले हाफ में अर्जेंटीना को बराबरी का सबसे बड़ा मौका 21वें मिनट में मिला, जब टीम को पेनाल्टी मिली। कप्तान लियोनेल मेसी गेंद लेकर आए, लेकिन शौबीर ने शानदार डाइव लगाकर उनका शॉट रोक दिया। पेनाल्टी चूकने के बाद मेसी और अर्जेंटीना के खिलाड़ी निराश दिखाई दिए, जबकि मिस्र का आत्मविश्वास और बढ़ गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(2).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="865"></img></p>
<p style="text-align:justify;">दूसरे हाफ में भी मिस्र ने अपनी लय बरकरार रखी। 67वें मिनट में मुस्तफा जीको ने बेहतरीन मैदानी गोल कर स्कोर 2-0 कर दिया। इस गोल के बाद स्टेडियम में मौजूद मिस्र के समर्थकों का उत्साह चरम पर था। दूसरी ओर अर्जेंटीना के प्रशंसकों के चेहरे पर चिंता साफ दिखाई दे रही थी। 78 मिनट तक मिस्र पूरी तरह मुकाबले पर नियंत्रण बनाए हुए था और ऐसा लग रहा था कि वह बड़ी उलटफेर करने जा रहा है। लेकिन फुटबॉल में आखिरी सीटी बजने तक कुछ भी तय नहीं माना जाता। अर्जेंटीना ने भी यही साबित किया। 79वें मिनट में लियोनेल मेसी के शानदार क्रॉस पर क्रिस्टियन रोमेरो ने हेडर के जरिए गोल कर टीम की वापसी की शुरुआत की। इस गोल ने पूरे मैच का रुख बदल दिया। अर्जेंटीना के खिलाड़ियों में नया जोश भर गया और उन्होंने लगातार मिस्र के गोल पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। महज चार मिनट बाद 83वें मिनट में कप्तान मेसी ने शानदार फिनिश के साथ गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचाकर स्कोर 2-2 कर दिया। स्टेडियम अर्जेंटीना समर्थकों की खुशी से गूंज उठा और मैच पूरी तरह खुल गया।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/argentina-vs-egypt-(1).jpg" alt="Argentina vs Egypt" width="1366" height="1005"></img></p>
<p style="text-align:justify;">बराबरी के बाद दोनों टीमें जीत का गोल तलाशने लगीं, लेकिन निर्णायक पल इंजरी टाइम में आया। अतिरिक्त समय के तीसरे मिनट में लाउतारो मार्टिनेज के सटीक क्रॉस पर एंजो फर्नांडीज ने शानदार हेडर लगाया और गेंद सीधे गोलपोस्ट में पहुंच गई। इस गोल के साथ अर्जेंटीना ने 3-2 की बढ़त हासिल कर ली। यह गोल फीफा विश्व कप इतिहास का 3000वां गोल भी बन गया। अंतिम मिनटों में मिस्र ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन अर्जेंटीना के डिफेंडरों ने कोई मौका नहीं दिया और अंतिम सीटी बजते ही खिलाड़ियों के साथ लाखों प्रशंसकों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/lionel-messi-(3).jpg" alt="Lionel Messi" width="1366" height="759"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस मुकाबले में कप्तान लियोनेल मेसी ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया। उन्होंने टूर्नामेंट में अपना आठवां गोल दागा और गोल्डन बूट की दौड़ में शीर्ष स्थान पर पहुंच गए। इसके साथ ही विश्व कप में उनके कुल गोलों की संख्या 21 हो गई, जिससे वह टूर्नामेंट के सर्वकालिक सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी बने हुए हैं। मेसी ने लगातार नौ अलग-अलग विश्व कप मुकाबलों में गोल करने का अपना ही रिकॉर्ड और मजबूत किया। मैच खत्म होने के बाद मेसी भावुक हो गए और मैदान पर ही उनकी आंखों से आंसू निकल पड़े। साथी खिलाड़ियों ने उन्हें गले लगाया और जीत का जश्न पूरे मैदान में देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/argentina-vs-egypt-(2).jpg" alt="Argentina vs Egypt" width="1366" height="918"></img></p>
<p style="text-align:justify;">अब अर्जेंटीना का सामना 12 जुलाई को क्वार्टर फाइनल में स्विट्जरलैंड से होगा। स्विट्जरलैंड ने 72 साल बाद पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है। दूसरी ओर मोरक्को लगातार दूसरे विश्व कप में नॉकआउट चरण तक पहुंचने वाली पहली अफ्रीकी टीम बन गई है। इस बार के क्वार्टर फाइनल में मोरक्को, बेल्जियम, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसी टीमें भी शामिल हैं, जिन्होंने अब तक विश्व कप का खिताब नहीं जीता है। ऐसे में आगे का मुकाबला और भी रोमांचक होने की उम्मीद है। अर्जेंटीना की यह जीत केवल स्कोरलाइन की वजह से नहीं, बल्कि उसके संघर्ष, धैर्य और आखिरी मिनट तक हार नहीं मानने वाले जज्बे के कारण भी याद रखी जाएगी। दो गोल से पिछड़ने के बाद जिस तरह टीम ने 13 मिनट में तीन गोल कर इतिहास रचा, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े टूर्नामेंट में अनुभव, आत्मविश्वास और टीम भावना किसी भी मैच का परिणाम बदल सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:51:00 +0530</pubDate>
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