<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/indian-politics/tag-4706" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Indian Politics - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/4706/rss</link>
                <description>Indian Politics RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>2029 तक ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ लागू करने की तैयारी तेज, जेपीसी अंतिम रिपोर्ट सौंपने की दिशा में आगे</title>
                                    <description><![CDATA[संयुक्त संसदीय समिति का दावा- अधिकांश लोगों ने किया समर्थन, राज्यों से सुझाव लेकर तैयार हो रहा रोडमैप; संवैधानिक संशोधन और राजनीतिक सहमति होगी सबसे बड़ी चुनौती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparation-to-implement-one-nation-one-election-by-2029-intensifies/article-58506"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/one-nation-one-election-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश में लंबे समय से चर्चा का विषय बने ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ यानी एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव कराने की दिशा में केंद्र सरकार और संसद की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) तेजी से आगे बढ़ रही है। समिति का लक्ष्य वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव तक इस व्यवस्था को लागू करने की संभावनाओं को मजबूत करना है। समिति के अध्यक्ष पीपी चौधरी ने कहा है कि अब तक हुई बैठकों और विचार-विमर्श में शामिल लगभग 99 प्रतिशत लोगों, संगठनों और विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">जेपीसी ने हाल ही में गोवा का दौरा कर मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्यों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से इस विषय पर चर्चा की। समिति के सदस्य और सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि बार-बार होने वाले चुनावों का प्रभाव छोटे राज्यों पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यदि गोवा जैसे छोटे राज्य में चुनावी प्रक्रिया का प्रशासनिक और आर्थिक असर इतना अधिक है, तो बड़े राज्यों और पूरे देश पर इसका प्रभाव और भी व्यापक होता है। उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव कराने से प्रशासनिक संसाधनों की बचत होगी और सरकारें विकास कार्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति का अगला दौरा उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रस्तावित है। यहां मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेताओं, विभिन्न राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद समिति 17 जुलाई को अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर संसद में पेश करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट के आधार पर सरकार आगे की रणनीति तय करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मूल उद्देश्य लोकसभा, राज्य विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव अलग-अलग समय पर कराने के बजाय एक निर्धारित चुनावी चक्र के तहत एक साथ कराना है। समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावों पर होने वाला भारी सरकारी खर्च कम होगा, बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे और प्रशासनिक मशीनरी का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इस व्यवस्था को लागू करना आसान नहीं माना जा रहा है। इसके लिए संविधान के कई महत्वपूर्ण अनुच्छेदों में संशोधन करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार अनुच्छेद 83, 172 और 356 सहित कई संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव आवश्यक होगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत के साथ-साथ देश के कम से कम आधे राज्यों की मंजूरी भी जरूरी होगी। यही कारण है कि सरकार राजनीतिक सहमति बनाने पर विशेष जोर दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ा सवाल उन राज्यों को लेकर है जिनकी विधानसभा का कार्यकाल वर्ष 2029 के बाद तक रहेगा। ऐसे राज्यों के कार्यकाल को समय से पहले समाप्त कर साझा चुनावी चक्र में शामिल करने का प्रस्ताव विचाराधीन है। वहीं जिन राज्यों का कार्यकाल 2029 से पहले समाप्त होगा, वहां सीमित अवधि के लिए चुनाव कराने या अन्य संवैधानिक विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। यदि किसी राज्य की सरकार बीच कार्यकाल में गिर जाती है, तो प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मध्यावधि चुनाव केवल शेष कार्यकाल के लिए कराए जाने की संभावना है, ताकि निर्धारित चुनावी चक्र प्रभावित न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार इस व्यवस्था को लागू करने के लिए 'टू-फेज ट्रांजिशन मॉडल' पर भी विचार कर रही है। इस मॉडल के तहत पूरे देश में एक साथ चुनाव कराने के बजाय इसे दो चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में वर्ष 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ लगभग 20 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं। इसके बाद वर्ष 2034 तक शेष राज्यों को भी इसी चुनावी चक्र में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इस मॉडल से विधानसभाओं के कार्यकाल में अत्यधिक कटौती या विस्तार की आवश्यकता कम होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस विषय पर संवैधानिक विशेषज्ञ भी अपनी राय दे रहे हैं। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि संविधान में इस दिशा में बदलाव की पर्याप्त गुंजाइश मौजूद है, लेकिन व्यापक राजनीतिक सहमति के बिना इसे लागू करना कठिन होगा। अतीत में भी विशेष परिस्थितियों में लोकसभा और विधानसभा के कार्यकाल में परिवर्तन किए जा चुके हैं। इसलिए कानूनी दृष्टि से यह पूरी तरह असंभव नहीं है, लेकिन इसके लिए संसद और राज्यों के बीच सहमति आवश्यक होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने सितंबर 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने करीब 191 दिनों तक विभिन्न विशेषज्ञों, राजनीतिक दलों, संवैधानिक संस्थाओं और अन्य हितधारकों से चर्चा की। विस्तृत अध्ययन के बाद समिति ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंप दी थी। अब उसी रिपोर्ट और जेपीसी की सिफारिशों के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में स्वतंत्रता के बाद शुरुआती चार आम चुनावों तक लोकसभा और अधिकांश राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होते थे। वर्ष 1952, 1957, 1962 और 1967 में यह व्यवस्था बनी रही। लेकिन 1967 के बाद कई राज्यों में सरकारें समय से पहले गिरने लगीं। 1968 और 1969 में कई विधानसभाएं भंग हुईं, जबकि 1970 में लोकसभा भी अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग कर दी गई। इसके बाद चुनावों का साझा चक्र टूट गया और अलग-अलग समय पर चुनाव होने लगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparation-to-implement-one-nation-one-election-by-2029-intensifies/article-58506</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/preparation-to-implement-one-nation-one-election-by-2029-intensifies/article-58506</guid>
                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 17:50:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/one-nation-one-election-%281%29.jpg"                         length="200059"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राकेश यादव ने बदला राजनीतिक ठिकाना, कांग्रेस को दिया बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता और प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाने के बाद भाजपा का दामन थामा। उनके फैसले से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rakesh-yadav-changed-political-destination-gave-a-big-blow-to/article-58371"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव और पूर्व प्रवक्ता राकेश सिंह यादव भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। राजधानी भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। राकेश यादव के भाजपा में शामिल होने को प्रदेश की राजनीति का अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। राकेश सिंह यादव लंबे समय तक कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे और विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता के रूप में उन्होंने संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि पिछले कुछ समय से वे कांग्रेस नेतृत्व की कार्यप्रणाली को लेकर असहमति जता रहे थे। अंततः उन्होंने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया और अब भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद राकेश यादव ने कहा कि उन्होंने प्रदेश और देश के विकास की सोच को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने बीते वर्षों में विकास, सुशासन और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर उतारा है। उन्होंने कहा कि वे अब भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में संगठन को मजबूत बनाने और आम जनता के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं, गरीब कल्याण योजनाओं, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में हुए कार्यों से प्रेरित होकर उन्होंने भाजपा से जुड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा के मंच से उन्हें समाज और प्रदेश की जनता के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राकेश यादव का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर काम करने वाला संगठन है। उन्होंने कहा कि पार्टी में प्रत्येक कार्यकर्ता को समान सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राकेश यादव का राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ पार्टी के लिए उपयोगी साबित होगी और उनके आने से संगठन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लगातार अपने संगठन का विस्तार कर रही है और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े अनुभवी लोग पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से प्रभावित होकर जुड़ रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ऐसे में अनुभवी नेताओं का पार्टी में स्वागत किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी वरिष्ठ नेता का एक दल छोड़कर दूसरे दल में शामिल होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे फैसलों का असर राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक रणनीतियों पर भी देखने को मिलता है। राकेश यादव के भाजपा में शामिल होने से प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका पर सभी की नजर रहेगी। मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के अभियान में जुटी हुई है। पार्टी सदस्यता अभियान, संगठन विस्तार और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार नए लोगों को जोड़ रही है। ऐसे समय में राकेश यादव जैसे अनुभवी नेता का पार्टी से जुड़ना संगठन के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rakesh-yadav-changed-political-destination-gave-a-big-blow-to/article-58371</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rakesh-yadav-changed-political-destination-gave-a-big-blow-to/article-58371</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:15:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/madhya-pradesh-%282%29.jpg"                         length="155120"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केरल और तमिलनाडु में राज्य चुनाव आयुक्त को लेकर बढ़ा विवाद, संवैधानिक स्वायत्तता पर फिर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया पर छिड़ी बहस, स्थानीय निकाय चुनावों की निष्पक्षता सुनिश्चित करने वाले राज्य चुनाव आयोग की भूमिका फिर चर्चा में।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/controversy-over-state-election-commissioner-increases-in-kerala-and-tamil/article-58313"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/state-election-commission.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देश में स्थानीय निकाय चुनावों की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाले राज्य चुनाव आयोग (SEC) की भूमिका एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इसकी वजह केरल और तमिलनाडु में सामने आए दो अलग-अलग घटनाक्रम हैं, जिन्होंने राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति, अधिकारों और संवैधानिक स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। दोनों राज्यों में उठे विवादों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता को किस तरह सुरक्षित रखा जाए और राजनीतिक हस्तक्षेप से उन्हें कैसे दूर रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">केरल में राज्य चुनाव आयुक्त पद के लिए सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एन. शेषाद्रिनाथन के नामांकन को लेकर विवाद शुरू हुआ है। इस नियुक्ति का विरोध करते हुए केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के महासचिव पी.एम. नियास ने राज्य के गृह विभाग से इस मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शेषाद्रिनाथन कथित तौर पर एक विशेष वैचारिक संगठन से जुड़े रहे हैं। हालांकि इन आरोपों पर आधिकारिक स्तर पर कोई पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी जांच एजेंसी ने इस संबंध में कोई निष्कर्ष सार्वजनिक किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एन. शेषाद्रिनाथन न्यायपालिका में लंबे समय तक सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने एर्नाकुलम स्थित केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत में न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है। इसके अलावा वे लक्षद्वीप के कवरत्ती में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश भी रह चुके हैं। उनके प्रशासनिक और न्यायिक अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति की गई, लेकिन राजनीतिक आरोपों के चलते यह मामला विवादों में आ गया।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तमिलनाडु में राज्य सरकार और वर्तमान राज्य चुनाव आयुक्त बी. ज्योति निर्मलासामी के बीच टकराव की स्थिति बन गई है। राज्य सरकार ने उनसे पद छोड़ने के लिए कहा है। बी. ज्योति निर्मलासामी भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और राज्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं। इस घटनाक्रम ने संवैधानिक पद पर कार्यरत अधिकारियों की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य चुनाव आयोग भारतीय संविधान द्वारा स्थापित एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्था है। इसका मुख्य दायित्व राज्यों में पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों जैसे स्थानीय स्वशासी निकायों के चुनावों का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन सुनिश्चित करना है। लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती में इस संस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर चुनी जाने वाली सरकारें सीधे जनता के दैनिक जीवन से जुड़ी होती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य चुनाव आयोग चुनाव कार्यक्रम घोषित करने, नामांकन प्रक्रिया की निगरानी, मतदान, मतगणना और परिणामों की घोषणा तक की पूरी प्रक्रिया का संचालन करता है। इसके साथ ही जहां राज्य कानून में व्यवस्था हो, वहां मतदाता सूची का पुनरीक्षण और अद्यतन कराने की जिम्मेदारी भी आयोग निभाता है। चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू कर उसका पालन सुनिश्चित करना भी आयोग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा स्थानीय निकाय चुनावों से पहले वार्डों और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्य भी कई राज्यों में राज्य चुनाव आयोग की देखरेख में किया जाता है। चुनाव से जुड़े विवादों का निपटारा संबंधित राज्य कानूनों के अनुसार नामित न्यायालयों या अधिकृत प्राधिकरणों के माध्यम से किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि संविधान में राज्य चुनाव आयुक्त बनने के लिए कोई समान या अनिवार्य योग्यता निर्धारित नहीं की गई है। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में नियुक्ति की प्रक्रिया और पात्रता अलग-अलग दिखाई देती है। कई राज्यों में सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों को इस पद पर नियुक्त किया जाता है, जबकि कुछ राज्यों में पूर्व आईएएस अधिकारियों या अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी जाती है। केरल में राज्य चुनाव आयुक्त को एक अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभानी होती है। वे परिसीमन आयोग से जुड़े सदस्य के रूप में विधानसभा और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं के निर्धारण से संबंधित प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं। साथ ही पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों के वार्ड परिसीमन के लिए गठित राज्य परिसीमन आयोग के अध्यक्ष भी होते हैं। तमिलनाडु में भी राज्य चुनाव आयुक्त परिसीमन आयोग के पदेन अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। चुनाव से पहले स्थानीय निकायों के वार्डों की सीमाओं का निर्धारण, आरक्षण व्यवस्था और जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य उनके नेतृत्व में पूरे किए जाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/controversy-over-state-election-commissioner-increases-in-kerala-and-tamil/article-58313</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/controversy-over-state-election-commissioner-increases-in-kerala-and-tamil/article-58313</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 16:38:59 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/state-election-commission.jpg"                         length="171056"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोलकाता रैली में ममता बनर्जी का थप्पड़ विवाद: हंगामे के बीच वायरल वीडियो से गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[बारुईपुर घटना के विरोध मार्च के दौरान कथित वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने साधा निशाना, तृणमूल ने आरोपों को बताया भ्रामक; पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में दावा किया गया कि भीड़ के बीच ममता बनर्जी ने पीली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने बारुईपुर की घटना के विरोध में बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन मार्च के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कथित तौर पर अंडे भी फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए। इससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी पहले हाथ जोड़कर भीड़ को शांत करने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह आगे बढ़ती हैं और सामने खड़े एक युवक को थप्पड़ मारती हुई नजर आती हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार करती हैं, तो इससे उनके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही थीं। टीएमसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।बताया जा रहा है कि जुलूस बालीगंज से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंचा। इसी दौरान अलग-अलग स्थानों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">रैली के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रैली में व्यवधान पैदा किया और तनाव फैलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई समर्थक इसे भीड़ को नियंत्रित करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:18 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/mamata-banerjee-%281%29.jpg"                         length="201475"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दशकों पुराना नर्मदा जल विवाद खत्म, चार राज्यों के बीच ऐतिहासिक समझौता; अमित शाह बोले- पानी का लाभ पूरे देश को मिलेगा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान ने सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े वित्तीय विवाद पर वन-टाइम सेटलमेंट समझौते पर किए हस्ताक्षर, वर्षों से लंबित भुगतान और दावों का हुआ अंतिम निपटारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4dd35b49837/article-58133"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narmada-water-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">नई दिल्ली में मंगलवार को देश के सबसे लंबे समय से चले आ रहे अंतरराज्यीय जल विवादों में से एक नर्मदा जल विवाद का महत्वपूर्ण समाधान सामने आया। सरदार सरोवर परियोजना की निर्माण लागत, मुआवजा और विभिन्न राज्यों के बीच वित्तीय दावों को लेकर वर्षों से चल रही खींचतान आखिरकार समाप्त हो गई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने वन-टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के साथ परियोजना से जुड़े सभी लंबित वित्तीय मामलों के अंतिम निपटारे का रास्ता साफ हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हस्ताक्षर किए। बैठक में केंद्र सरकार और चारों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। लंबे समय से लंबित इस विवाद के समाधान को सहकारी संघवाद की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जल किसी एक राज्य की संपत्ति नहीं बल्कि पूरे देश की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि पानी चाहे किसी भी राज्य में उपयोग हो, उसका लाभ अंततः भारत के किसानों और नागरिकों को ही मिलता है। उनके अनुसार राज्यों के बीच सहयोग की भावना से ही देश के संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव है और यही विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमित शाह ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार लगातार राज्यों के बीच समन्वय बढ़ाने और वर्षों पुराने विवादों को समाप्त करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद केवल एक विचार नहीं बल्कि व्यवहार में दिखाई देने वाला मॉडल बन चुका है। कई राज्यों में बेहतर समन्वय के कारण जल विवादों सहित अन्य जटिल मामलों का समाधान तेजी से हो रहा है। सरदार सरोवर परियोजना देश की सबसे महत्वपूर्ण बहुउद्देश्यीय नदी परियोजनाओं में गिनी जाती है। इस परियोजना से गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान को सिंचाई, पेयजल तथा बिजली उत्पादन के क्षेत्र में बड़ा लाभ मिला है। लाखों किसानों को सिंचाई सुविधा मिली है जबकि अनेक शहरों और गांवों में पेयजल की उपलब्धता भी बेहतर हुई है। राजस्थान के कई सूखा प्रभावित क्षेत्रों तक नर्मदा का पानी पहुंचने के बाद खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि परियोजना के निर्माण के दौरान लागत, पुनर्वास, मुआवजा और हिस्सेदारी को लेकर चारों राज्यों के बीच लंबे समय तक मतभेद बने रहे। नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसलों के बाद भी कई वित्तीय दावे लंबित थे, जिन पर लगातार चर्चा चल रही थी। अब वन-टाइम सेटलमेंट के जरिए इन सभी विवादों को समाप्त करने पर सहमति बनी है। समझौते के बाद हालांकि मध्य प्रदेश को आर्थिक दृष्टि से अपेक्षित लाभ नहीं मिला। राज्य सरकार ने सरदार सरोवर बांध के कारण प्रभावित भूमि और मुआवजे के आधार पर लगभग 7,669 करोड़ रुपये का दावा किया था। लेकिन नए समझौते के अनुसार मध्य प्रदेश को उल्टे गुजरात सरकार को लगभग 550 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा। इस पहलू को लेकर प्रदेश में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2019 में सरदार सरोवर बांध पहली बार अपनी पूर्ण क्षमता तक भरने के बाद मध्य प्रदेश के डूब क्षेत्र का वास्तविक आकलन सामने आया। पहले जहां 178 गांव प्रभावित बताए गए थे, वहीं बाद में यह संख्या बढ़कर 192 गांव हो गई। डूब क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि जलमग्न हुई, जिससे प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे का मुद्दा और अधिक महत्वपूर्ण बन गया था। इसी आधार पर मध्य प्रदेश ने संशोधित मुआवजे की मांग रखी थी। गृह मंत्री अमित शाह ने इस अवसर पर अन्य अंतरराज्यीय जल विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में हरियाणा-राजस्थान जल विवाद और किशाऊ बांध परियोजना जैसे मामलों में भी सहमति बनी है। उनका कहना था कि राज्यों के बीच विवाद जितनी जल्दी समाप्त होंगे, उतनी ही तेजी से विकास परियोजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4dd35b49837/article-58133</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/6a4dd35b49837/article-58133</guid>
                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 10:13:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/narmada-water-dispute.jpg"                         length="184391"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव प्रक्रिया शुरू, नामांकन दाखिल होना प्रारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[निर्वाचन आयोग ने तीन राज्यों की रिक्त विधानसभा सीटों के लिए अधिसूचना जारी की। 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश और शराबबंदी के निर्देश भी जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/by-election-process-begins-on-three-assembly-seats-of-madhya-pradesh/article-58095"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/election-commission-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार में विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने तीनों राज्यों की रिक्त विधानसभा सीटों के लिए अधिसूचना जारी कर नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इन उपचुनावों के परिणाम संबंधित राज्यों की राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ स्थानीय समीकरणों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार मध्य प्रदेश की 22-दतिया विधानसभा सीट, गुजरात की 145-मंजलपुर विधानसभा सीट और बिहार की 182-बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए जाएंगे। इन तीनों सीटों के लिए 6 जुलाई 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवार 13 जुलाई 2026 तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद 14 जुलाई को सभी नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव मैदान से हटना चाहता है तो वह 16 जुलाई तक अपना नाम वापस ले सकता है। नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद चुनाव मैदान में अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी और इसके बाद चुनाव प्रचार पूरी तरह गति पकड़ लेगा। निर्वाचन आयोग ने बताया है कि यदि आवश्यक हुआ तो इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में 30 जुलाई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान संपन्न होने के बाद सभी मतों की गणना 3 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। आयोग का लक्ष्य है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 4 अगस्त 2026 तक हर हाल में पूरी कर ली जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावी हो गई है। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने चुनाव वाले क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने और मतदाताओं को सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष निर्देश भी जारी किए हैं। आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों को कहा है कि मतदान के दिन सभी पात्र कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश दिया जाए ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। यह व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के तहत लागू होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यवसाय, औद्योगिक इकाई, व्यापारिक प्रतिष्ठान या अन्य संस्थान में कार्यरत ऐसे कर्मचारी, जो संबंधित विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं, उन्हें मतदान के दिन वेतन सहित अवकाश दिया जाएगा। यदि कोई नियोक्ता इस प्रावधान का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। यह सुविधा केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि दैनिक वेतनभोगी और आकस्मिक श्रमिक भी इसके दायरे में आएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था का उल्लेख किया है जो अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर किसी अन्य शहर या जिले में कार्यरत हैं। यदि उनका नाम संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है तो वे भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश पाने के अधिकारी होंगे, जिससे वे अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र में जाकर मतदान कर सकें। आयोग का मानना है कि इससे अधिक से अधिक मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए आयोग ने शराबबंदी को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135सी के तहत मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में शराब की बिक्री, वितरण और सेवन पर प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में होटल, बार, रेस्तरां, शराब की दुकानों और अन्य सार्वजनिक या निजी स्थानों पर मादक पेय पदार्थों की बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी। आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि मतदान से पहले निर्धारित अवधि के लिए 'ड्राई डे' घोषित किया जाए। इसके अलावा मतगणना वाले दिन यानी 3 अगस्त 2026 को भी संबंधित क्षेत्रों में शराबबंदी लागू रहेगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/by-election-process-begins-on-three-assembly-seats-of-madhya-pradesh/article-58095</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/by-election-process-begins-on-three-assembly-seats-of-madhya-pradesh/article-58095</guid>
                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:47:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/election-commission-of-india.jpg"                         length="109484"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल, चन्नी की नाराजगी की चर्चा; संगठन में नई जिम्मेदारियों पर मंथन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठनात्मक जिम्मेदारियां बांटीं, चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने प्रदेश नेतृत्व की मांग उठाई, पार्टी में अंदरूनी समीकरणों पर चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-turmoil-increased-in-punjab-congress-discussion-of-channis-displeasure/article-57866"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/punjab-congress.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पंजाब कांग्रेस में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच संगठनात्मक बदलावों के बाद नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का बंटवारा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। हालांकि, इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर अलग-अलग तरह की राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। चन्नी के समर्थकों ने उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई है, जिससे राज्य की राजनीति में संगठनात्मक समीकरणों को लेकर नया विमर्श शुरू हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस हाईकमान ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन में संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। इसी क्रम में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है। साथ ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी प्रताप सिंह बाजवा के पास ही रहने दी गई है। इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को पार्टी की कोर समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी का उद्देश्य सभी वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर चुनावी तैयारियों को मजबूत करना बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई नियुक्तियों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के आवास पर बड़ी संख्या में समर्थक और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता पहुंचे। इस दौरान समर्थकों ने खुलकर मांग की कि चन्नी को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जानी चाहिए। उनका कहना था कि चन्नी का व्यापक जनाधार और प्रशासनिक अनुभव आगामी चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर अलग-अलग राय मौजूद है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी तरह के मतभेद या नाराजगी की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बड़े नेताओं के समर्थकों की सक्रियता चुनावी तैयारियों के दौरान स्वाभाविक मानी जाती है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल सभी नेताओं को साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार करने पर जोर दे रहा है ताकि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस मजबूत स्थिति में उतर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने को भी संगठन में एक अहम जिम्मेदारी माना जा रहा है। चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष पूरे चुनाव अभियान की रणनीति तैयार करने, प्रचार कार्यक्रमों का समन्वय करने और विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी की चुनावी गतिविधियों को गति देने का कार्य करता है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि चन्नी के अनुभव का लाभ पूरे राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान मिलेगा। बताया जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों की घोषणा के बाद चन्नी के समर्थकों ने अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कीं। कई नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि कांग्रेस को भविष्य में राज्य की सत्ता में वापसी करनी है तो संगठनात्मक नेतृत्व में भी बदलाव पर विचार किया जा सकता है। हालांकि यह मांग समर्थकों की ओर से सामने आई है और पार्टी ने इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है। इस बीच सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुईं। हालांकि रंधावा ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात पहले से तय कार्यक्रम के तहत हुई थी और इसका पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक फैसलों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"> पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में चुनाव से पहले संगठनात्मक गतिविधियां तेज होना सामान्य प्रक्रिया है। कांग्रेस इस समय राज्य में अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत करने और सभी वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि विभिन्न गुटों के बीच समन्वय बनाकर चुनावी अभियान को प्रभावी बनाया जाए। चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री रहे हैं और राज्य के कई इलाकों में उनका प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें संगठन में और बड़ी भूमिका दिए जाने की मांग कर रहे हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी वरिष्ठ नेताओं को उनकी क्षमता और अनुभव के आधार पर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-turmoil-increased-in-punjab-congress-discussion-of-channis-displeasure/article-57866</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-turmoil-increased-in-punjab-congress-discussion-of-channis-displeasure/article-57866</guid>
                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:39:04 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/punjab-congress.jpg"                         length="127878"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जीतू पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, कोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[भिंड की विशेष MP-MLA कोर्ट ने 2024 चुनावी भाषण से जुड़े मामले में अगली सुनवाई पर हर हाल में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/arrest-warrant-against-jitu-patwari-court-seeks-answer-from-police/article-57505"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jitu-patwari.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दिए गए एक चुनावी भाषण से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्वालियर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए भिंड पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर उनकी अदालत में उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। अदालत ने सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब जीतू पटवारी सार्वजनिक कार्यक्रमों, मीडिया और राजनीतिक गतिविधियों में लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो पुलिस उन्हें तलाशने में असफल कैसे हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। यह मामला लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान 27 अप्रैल 2024 को भिंड जिले के ऊमरी कस्बे में आयोजित एक चुनावी सभा से जुड़ा है। उस समय जीतू पटवारी कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भिंड-दतिया लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी देवाशीष जरारिया को लेकर कुछ आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार, उन्होंने चुनावी मंच से बसपा प्रत्याशी पर भाजपा से सांठगांठ और कथित लेनदेन के आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि भाषण के दौरान कुछ आपत्तिजनक शब्दों का भी प्रयोग किया गया, जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव के कुछ दिनों बाद देवाशीष जरारिया की ओर से इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर 4 मई 2024 को भिंड जिले के उमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत के साथ चुनावी सभा की वीडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी गई थी। पुलिस ने वीडियो का परीक्षण करने के बाद प्रकरण दर्ज किया और जांच आगे बढ़ाई। इसके बाद अदालत ने 16 जनवरी 2026 को जीतू पटवारी को पेश होने का नोटिस जारी किया था, लेकिन निर्धारित तिथि पर वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। हालिया सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि जीतू पटवारी का पता नहीं चल सका, इसलिए उन्हें नोटिस तामील नहीं कराया जा सका। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब संबंधित व्यक्ति लगातार मीडिया में दिखाई दे रहे हैं, सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं और राजनीतिक गतिविधियां कर रहे हैं, तब पुलिस का उन्हें तलाश नहीं पाना समझ से परे है। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए भिंड पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि अगली सुनवाई में उनकी मौजूदगी हर हाल में सुनिश्चित की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि चुनावी सभा के दौरान जीतू पटवारी ने कहा था कि बसपा प्रत्याशी भाजपा से "माल लाए हैं" और मतदाताओं से उन्हें वोट नहीं देने की अपील की थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस तरह के बयान बिना किसी प्रमाण के सार्वजनिक मंच से दिए गए, जिससे उनकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसी आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषणों और सार्वजनिक बयानों की जिम्मेदारी संबंधित नेता की होती है। यदि किसी बयान को लेकर शिकायत दर्ज होती है और अदालत उसे सुनवाई योग्य मानती है, तो कानून के तहत पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इस मामले में भी अदालत ने अभी केवल उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। मामले में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आएगा। यह लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए भाषण से जुड़ा हुआ है। फिलहाल अदालत ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएं और संबंधित पक्ष की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। अब 27 जुलाई को होने वाली सुनवाई में इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/arrest-warrant-against-jitu-patwari-court-seeks-answer-from-police/article-57505</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/arrest-warrant-against-jitu-patwari-court-seeks-answer-from-police/article-57505</guid>
                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:43:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/jitu-patwari.jpg"                         length="143801"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पश्चिम बंगाल का पहला BJP बजट पेश, DA बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[नई सरकार ने 38% DA वृद्धि, 36,000 करोड़ की महिला योजना और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर ऐलान के साथ विकास और रोजगार पर जोर दिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/first-bjp-budget-of-west-bengal-presented-da-increased/article-56667"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/west-bengal-budget.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार ने अपना पूर्ण बजट पेश किया, जिसे राज्य की राजनीति और आर्थिक दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते हुए साफ संदेश दिया कि नई सरकार का फोकस अब रोजगार, उद्योग, बुनियादी ढांचा और कल्याणकारी योजनाओं के बीच संतुलन बनाने पर रहेगा। यह बजट ऐसे समय आया है जब राज्य पर कर्ज का दबाव, धीमी औद्योगिक वृद्धि और रोजगार संकट जैसी चुनौतियां पहले से मौजूद हैं।  यह बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं बल्कि नई सरकार की दिशा तय करने वाला बयान भी है। बजट में सबसे ज्यादा चर्चा सरकारी कर्मचारियों के लिए की गई घोषणा को लेकर रही, जहां महंगाई भत्ते (DA) में 38% तक की बढ़ोतरी की गई। इससे लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से डीए को लेकर राज्य में असंतोष देखा जा रहा था, जिसे इस फैसले से कम करने की कोशिश की गई है। इसके साथ ही सरकार ने विधायक फंड में 30 लाख रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा भी की है, जिससे स्थानीय विकास कार्यों को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। वित्त मंत्री ने बजट के बाद कहा कि राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती बिना कर बढ़ाए राजस्व बढ़ाना है, और इसी दिशा में सरकार काम कर रही है। महिला कल्याण को लेकर भी इस बजट में बड़ा कदम उठाया गया है। ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत 36,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसे सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजना बताया जा रहा है। इस फैसले के जरिए सरकार ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि वह कल्याणकारी योजनाओं से पीछे नहीं हटेगी, भले ही उसका जोर आर्थिक विकास और निवेश पर क्यों न हो। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिला वोटर हमेशा निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं, और इसी को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा आवंटन किया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रोजगार और उद्योग के क्षेत्र को बजट का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार ने करीब 40,000 करोड़ रुपये के विकास पैकेज की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य राज्य में निवेश को बढ़ाना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। इसके साथ ही एक नई औद्योगिक नीति लाने की बात भी कही गई है, जो ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को सुधारने और निवेशकों को आकर्षित करने पर केंद्रित होगी। लंबे समय से राज्य में औद्योगिक निवेश की कमी को लेकर सवाल उठते रहे हैं, ऐसे में नई सरकार इस छवि को बदलने की कोशिश कर रही है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी बजट में बड़े ऐलान किए गए हैं। कोलकाता क्षेत्र के लिए एक नए एयरपोर्ट की योजना पेश की गई है, जो लगभग 1000 एकड़ जमीन पर कालीनी के पास विकसित किया जाएगा। इसके अलावा राज्य में तीन नए एयरफील्ड बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। सरकार का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से न केवल यात्रा आसान होगी बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम राज्य को लॉजिस्टिक्स और एविएशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि बजट के साथ कुछ राजनीतिक विवाद भी जुड़े। अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा के बजट में बड़ी कटौती की गई है, जिसे लेकर विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है। सरकार ने मदरसा शिक्षा फंड को 5,713 करोड़ रुपये से घटाकर 2,165 करोड़ रुपये कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि यह फैसला सामाजिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है, जबकि सरकार का कहना है कि संसाधनों का बेहतर उपयोग प्राथमिकता है। यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश भी है। एक तरफ जहां कर्मचारियों और महिलाओं को राहत देकर सरकार ने सामाजिक आधार मजबूत करने की कोशिश की है, वहीं उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर देकर विकास की नई कहानी लिखने का प्रयास किया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ये घोषणाएं जमीन पर उतर पाएंगी या केवल कागजों तक सीमित रहेंगी। राज्य में बजट को लेकर चर्चा तेज है और हर वर्ग अपने हिसाब से इसे देख रहा है। कर्मचारी वर्ग राहत से खुश है, विपक्ष सवाल उठा रहा है और उद्योग जगत उम्मीदों के साथ आगे की नीतियों का इंतजार कर रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/first-bjp-budget-of-west-bengal-presented-da-increased/article-56667</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/first-bjp-budget-of-west-bengal-presented-da-increased/article-56667</guid>
                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 17:00:08 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/west-bengal-budget.jpg"                         length="148447"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेजप्रताप यादव पर FIR, अनुष्का मामले ने बढ़ाया सियासी विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[आकाश यादव के आरोपों में धमकी और जबरन घर में घुसने का दावा, तेजप्रताप ने बताया पूरी कार्रवाई को साजिश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/fir-against-tej-pratap-yadav-anushka-case-increases-political-controversy/article-56357"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/tej-pratap-yadav-fir-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पटना में पूर्व मंत्री तेजप्रताप यादव के खिलाफ दर्ज FIR ने एक बार फिर राजनीतिक और निजी जीवन से जुड़े विवाद को सुर्खियों में ला दिया है। अनुष्का यादव के भाई आकाश यादव ने आरोप लगाया है कि तेजप्रताप यादव अपने सहयोगियों के साथ उनके घर पहुंचे और जबरन अंदर घुसने की कोशिश की। मामला सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आरोपों में धमकी, दबाव और गंभीर परिणाम भुगतने जैसी बातें भी सामने आई हैं, जिससे पूरे मामले ने गंभीर मोड़ ले लिया है। आकाश यादव का कहना है कि 6 जून को जब वह खाटूश्याम यात्रा पर थे, उस समय तेजप्रताप यादव और उनके सहयोगी मोतीलाल यादव उनके पाटलिपुत्र स्थित घर पहुंचे। आरोप है कि वहां परिवार को धमकाया गया और घर में घुसने का प्रयास किया गया। इसके बाद फोन कॉल के जरिए कथित धमकियां दी गईं, जिनमें एक व्यक्ति ने खुद को कुख्यात गैंग से जुड़ा बताते हुए चेतावनी दी कि किसी भी तरह की शिकायत या बयान देने के गंभीर परिणाम होंगे। आकाश ने दावा किया कि उनके पास इन कॉल्स की रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसे उन्होंने अदालत में सबूत के तौर पर पेश किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आकाश यादव ने पहले थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन FIR दर्ज नहीं होने के बाद उन्होंने अदालत का रुख किया। अब पटना व्यवहार न्यायालय में मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है और पुलिस भी जांच में जुट गई है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आवेदन में विदेश से आए कॉल का भी जिक्र किया गया है, जिसकी तकनीकी जांच की जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मामले को और जटिल बना दिया है, क्योंकि इसमें राजनीतिक प्रभाव और निजी विवाद दोनों जुड़े हुए नजर आ रहे हैं। इधर, तेजप्रताप यादव ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे उनकी छवि खराब करने की साजिश बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लंबा बयान जारी कर कहा कि उनके खिलाफ झूठी और मनगढ़ंत कहानियां फैलाई जा रही हैं ताकि उनकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि वह कानून और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा रखते हैं और सच्चाई जल्द सामने आएगी। तेजप्रताप ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्हें बार-बार बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और यह पूरा मामला राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें और उनके परिवार को मानसिक रूप से परेशान करने की कोशिश की गई है। इससे पहले भी वह अनुष्का यादव के साथ अपने संबंधों को लेकर सार्वजनिक बयान दे चुके हैं, जिसमें उन्होंने सभी आरोपों को गलत बताया था और सोशल मीडिया पोस्ट को हैकिंग का परिणाम बताया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस पूरे मामले की जड़ 2025 में सामने आए सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ी मानी जा रही है, जिसमें तेजप्रताप यादव और अनुष्का यादव के रिश्ते को लेकर चर्चा शुरू हुई थी। हालांकि कुछ समय बाद वह पोस्ट डिलीट कर दिया गया और फिर से विवाद और बढ़ गया जब तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। इसने राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी थी। अब ताजा FIR और अदालत में शुरू हुई सुनवाई ने इस मामले को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पुलिस कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या यह मामला केवल निजी विवाद है या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश भी है।  दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/fir-against-tej-pratap-yadav-anushka-case-increases-political-controversy/article-56357</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/fir-against-tej-pratap-yadav-anushka-case-increases-political-controversy/article-56357</guid>
                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 10:33:28 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/tej-pratap-yadav-fir-case.jpg"                         length="155286"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मध्य प्रदेश में यूसीसी ड्राफ्ट अंतिम चरण में, लिव-इन पंजीकरण अनिवार्य प्रस्ताव पर विवाद तेज</title>
                                    <description><![CDATA[विवाह, तलाक और उत्तराधिकार में समान कानून लागू करने की तैयारी, लिव-इन संबंधों और बच्चों के अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस गर्म]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-intensifies-over-mandatory-live-in-registration-proposal-in-ucc-draft/article-56256"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/uniform-civil-code.jpg" alt=""></a><br /><div class="qMYqUG_convSearchResultHighlightRoot">
<div>

<div class="text-base my-auto mx-auto pb-10 [--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-xs,calc(var(--spacing)*4))] @w-sm/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-sm,calc(var(--spacing)*6))] @w-lg/main:[--thread-content-margin:var(--thread-content-margin-lg,calc(var(--spacing)*16))] px-(--thread-content-margin)">
<div class="[--thread-content-max-width:40rem] @w-lg/main:[--thread-content-max-width:48rem] mx-auto max-w-(--thread-content-max-width) flex-1 group/turn-messages focus-visible:outline-hidden relative flex w-full min-w-0 flex-col agent-turn">
<div class="flex max-w-full flex-col gap-4 grow">
<div class="min-h-8 text-message relative flex w-full flex-col items-end gap-2 text-start break-words whitespace-normal outline-none keyboard-focused:focus-ring [.text-message+&amp;]:mt-1">
<div class="flex w-full flex-col gap-1 empty:hidden">
<div class="markdown prose dark:prose-invert wrap-break-word w-full light markdown-new-styling">
<p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा दिए हैं। प्रस्तावित ड्राफ्ट अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसे आगामी विधानसभा सत्र में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इस पूरे प्रस्ताव का उद्देश्य राज्य में सभी नागरिकों के लिए एक समान पारिवारिक कानून व्यवस्था लागू करना है, जिससे विवाह, तलाक, भरण-पोषण, संपत्ति और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक स्पष्ट और समान कानूनी ढांचा तैयार किया जा सके। सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित समिति ने इस ड्राफ्ट पर व्यापक स्तर पर कार्य किया है। सात सदस्यीय इस समिति ने प्रदेश के विभिन्न जिलों का दौरा कर समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद स्थापित किया है। इसके साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी आम जनता से सुझाव लिए जा रहे हैं, जिसमें लोगों से सरल प्रश्नों के माध्यम से उनकी राय प्राप्त की जा रही है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रस्तावित कानून व्यापक जनभागीदारी के आधार पर तैयार हो।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रस्तावित यूसीसी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें विवाह और तलाक से जुड़े नियमों को सभी धर्मों के लिए समान बनाने की दिशा में प्रावधान शामिल किए जा रहे हैं। वर्तमान में विभिन्न धर्मों के पर्सनल लॉ अलग-अलग हैं, जिसके कारण कई बार कानूनी प्रक्रियाओं में असमानता और जटिलता देखने को मिलती है। सरकार का मानना है कि एक समान कानून लागू होने से इन जटिलताओं में कमी आएगी और न्याय व्यवस्था अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी। लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी ड्राफ्ट में विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके तहत ऐसे संबंधों में रहने वाले जोड़ों के लिए पंजीकरण या घोषणा को आवश्यक बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे संबंधों में रहने वाले व्यक्तियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। यदि ऐसे संबंधों से बच्चे पैदा होते हैं, तो उन्हें संपत्ति और भरण-पोषण से जुड़े सभी कानूनी अधिकार प्रदान करने का प्रावधान प्रस्तावित है, जिससे उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का यह भी कहना है कि यह कानून पूरी तरह से जेंडर समानता पर आधारित होगा। पुरुष और महिला दोनों को पारिवारिक कानूनों में समान अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाएंगी। संपत्ति के अधिकार, उत्तराधिकार और विवाह संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही तलाक की प्रक्रिया को भी सभी धर्मों के लिए एक समान कानूनी ढांचे के तहत लाने की योजना है, जिससे सभी नागरिकों को एक समान प्रक्रिया का लाभ मिल सके। प्रस्तावित यूसीसी को संविधान के प्रावधानों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है, जिसमें धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने पर विशेष ध्यान दिया गया है। सरकार का मानना है कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 के तहत समानता का अधिकार और अनुच्छेद 44 के तहत समान नागरिक संहिता का मार्गदर्शन इस कानून का आधार है। इसी कारण इसे एक आधुनिक और सुधारात्मक कानून के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">समिति द्वारा तैयार किए जा रहे ड्राफ्ट में यह भी ध्यान रखा गया है कि समाज के विभिन्न वर्गों की संवेदनशीलताओं का सम्मान किया जाए और किसी भी प्रकार की असमानता या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। इसी कारण व्यापक परामर्श प्रक्रिया अपनाई गई है, जिसमें विभिन्न सामाजिक संगठनों, विशेषज्ञों और आम नागरिकों की राय शामिल की गई है। राज्य सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने से नागरिकों को एक समान और स्पष्ट कानूनी व्यवस्था प्राप्त होगी, जिससे पारिवारिक विवादों में कमी आने की संभावना है। साथ ही न्याय प्रणाली पर बोझ कम होगा और मामलों का निपटारा अधिक तेजी से हो सकेगा। यह पहल समाज में एकरूपता और समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने संकेत दिए हैं कि सरकार इस दिशा में पूरी गंभीरता के साथ आगे बढ़ रही है और आगामी विधानसभा सत्र में इस प्रस्ताव को प्रस्तुत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा है कि यह सुधारात्मक कदम समाज के व्यापक हित को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में एक अधिक संगठित और समान कानूनी व्यवस्था स्थापित हो सके। मध्य प्रदेश में यूसीसी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और यह प्रस्ताव राज्य में एक बड़े कानूनी और सामाजिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>
</div>

</div>
</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-intensifies-over-mandatory-live-in-registration-proposal-in-ucc-draft/article-56256</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-intensifies-over-mandatory-live-in-registration-proposal-in-ucc-draft/article-56256</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:37:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/uniform-civil-code.jpg"                         length="132029"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इंदौर पहुंचीं, ओंकारेश्वर दर्शन के साथ 5 दिवसीय दौरा शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया स्वागत, मध्यप्रदेश में सुरक्षा और ट्रैफिक के कड़े इंतजाम लागू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/president-draupadi-murmu-reaches-indore-starts-5-day-tour-with/article-56254"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/president-draupadi-murmu-indore-visit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू बुधवार को मध्यप्रदेश के इंदौर शहर पहुंचीं। उनका विमान देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट पर उतरा, जहां राज्यपाल मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। यह दौरा मध्यप्रदेश में राष्ट्रपति के पांच दिवसीय आधिकारिक कार्यक्रमों की शुरुआत माना जा रहा है, जो 18 जून से 22 जून तक चलेगा। एयरपोर्ट पर कुछ समय रुकने के बाद राष्ट्रपति सीधे ओंकारेश्वर के लिए रवाना हुईं, जहां उन्होंने ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन और पूजा-अर्चना की। राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए इंदौर और ओंकारेश्वर दोनों क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को बेहद कड़ा कर दिया गया है। एयरपोर्ट और आसपास के इलाकों को अस्थायी रूप से नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है, ताकि किसी भी तरह की सुरक्षा चूक से बचा जा सके। प्रशासन ने ट्रैफिक व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए हैं और कई मार्गों पर डायवर्जन लागू किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम भीड़ प्रबंधन और राष्ट्रपति के काफिले की सुरक्षित आवाजाही को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर पहुंचने पर वीर हनुमान मंदिर स्थित ऐतिहासिक बावड़ी का अवलोकन किया। यह स्थान शहर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने स्थानीय विकास और धार्मिक स्थलों के संरक्षण को लेकर भी अधिकारियों से चर्चा की। प्रशासनिक स्तर पर इस पूरे दौरे को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें धार्मिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक गतिविधियां एक साथ शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस दौरे के दौरान 19 जून को विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें वे अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सा लेंगी। इसके बाद उनके ग्वालियर और श्योपुर जाने की भी संभावना है, जहां वे विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होंगी। राज्य सरकार और प्रशासन ने सभी कार्यक्रमों की तैयारियां पहले से पूरी कर ली हैं। ओंकारेश्वर में राष्ट्रपति के दर्शन को लेकर विशेष व्यवस्था की गई है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए अलग पार्किंग और बस व्यवस्था की गई है, ताकि भीड़ को व्यवस्थित तरीके से संभाला जा सके। प्रशासन ने आम नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ट्रैफिक नियमों का पालन करें और यात्रा के लिए अतिरिक्त समय लेकर निकलें। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के अनुसार, एयरपोर्ट से लेकर ओंकारेश्वर तक पूरे रूट पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। 17 से 19 जून तक कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू रहेगा। भारी वाहनों के लिए विशेष रूट प्लान तैयार किया गया है ताकि सामान्य यातायात प्रभावित न हो। भारी वाहनों की आवाजाही के लिए भी अलग-अलग रूट निर्धारित किए गए हैं। इंदौर-इच्छापुर मार्ग पर चलने वाले वाहनों को डायवर्ट किया गया है। इंदौर से खंडवा जाने वाले भारी वाहन तेजाजी नगर, महू, मानपुर, धामनोद, खरगोन, भीकनगांव और देशगांव होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेंगे। वहीं सिमरोल और बड़वाह से आने वाले वाहनों के लिए भी वैकल्पिक मार्ग तय किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी व्यवस्था राष्ट्रपति के दौरे को सुरक्षित और सुचारू बनाने के लिए की गई है। ओंकारेश्वर जैसे धार्मिक स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, ऐसे में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। पूरे क्षेत्र में पुलिस बल, होमगार्ड और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को तैनात किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह मध्यप्रदेश दौरा न सिर्फ आधिकारिक महत्व रखता है बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है। राज्य सरकार इस दौरे को सफल बनाने के लिए पूरी तरह सतर्क है और हर स्तर पर निगरानी रखी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/president-draupadi-murmu-reaches-indore-starts-5-day-tour-with/article-56254</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/president-draupadi-murmu-reaches-indore-starts-5-day-tour-with/article-56254</guid>
                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:36:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-06/president-draupadi-murmu-indore-visit.jpg"                         length="190252"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        