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                <title>Commodity News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Commodity News RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कच्चा तेल छह महीने के निचले स्तर पर, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम जस के तस</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट के बावजूद आम लोगों को राहत नहीं, रिपोर्ट के मुताबिक तेल कंपनियां पेट्रोल और डीजल पर प्रति लीटर मजबूत मार्जिन कमा रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-is-at-its-lowest-in-six-months-yet/article-58185"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/crude-oil-price-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, लेकिन इसका फायदा अब तक देश के आम उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाया है। अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने वाला कच्चा तेल अब करीब छह महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। इंडियन बास्केट के अनुसार कच्चे तेल की कीमत घटकर 68.69 डॉलर प्रति बैरल तक आ गई है। यह युद्ध के दौरान बने करीब 157 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर से लगभग 56 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में किसी तरह की कमी नहीं की गई है। ऐसे में एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता हो चुका है तो घरेलू बाजार में उपभोक्ताओं को राहत क्यों नहीं मिल रही।</p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा हालात में सरकारी तेल विपणन कंपनियां अच्छी स्थिति में हैं। डीएएम कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा कच्चे तेल की कीमत पर तेल कंपनियां पेट्रोल पर करीब 10.5 रुपए और डीजल पर लगभग 11 रुपए प्रति लीटर तक का मार्जिन हासिल कर रही हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब इंडियन बास्केट का कच्चा तेल 87 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहता है, तब कंपनियां लगभग ब्रेक ईवन की स्थिति में होती हैं, यानी न उन्हें विशेष लाभ होता है और न ही नुकसान। चूंकि 1 जून के बाद से कच्चे तेल की कीमत लगातार इस स्तर से नीचे बनी हुई है, इसलिए कंपनियां पिछले कई सप्ताह से मुनाफे में कारोबार कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें धीरे-धीरे नीचे आने लगीं। शुरुआती युद्धविराम के बाद भी कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल से नीचे बना रहा और अब यह 70 डॉलर के आसपास पहुंच गया है। इसके बावजूद भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा ईंधन की कीमतों में कोई राहत नहीं दी है। यही वजह है कि उपभोक्ताओं के बीच असंतोष भी देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो साफ दिखाई देता है कि कच्चे तेल की कीमतों और पेट्रोल-डीजल के खुदरा दामों के बीच सीधा संबंध हमेशा नहीं रहा। वर्ष 2018 में जब कच्चा तेल करीब 80 डॉलर प्रति बैरल था, तब दिल्ली में पेट्रोल लगभग 72 रुपए और डीजल करीब 70 रुपए प्रति लीटर बिक रहा था। इसके बाद 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कच्चे तेल की कीमत गिरकर करीब 43 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, लेकिन खुदरा कीमतों में वैसी राहत देखने को नहीं मिली जैसी उपभोक्ता उम्मीद कर रहे थे। बाद में 2022 में जब कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई। हालांकि जनवरी 2023 में कच्चे तेल के दाम फिर करीब 75 डॉलर तक आ गए, लेकिन उस समय भी खुदरा कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं किया गया। तेल कंपनियों का तर्क था कि वे पहले हुए नुकसान की भरपाई कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह भी है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों वाले दौर में भी तेल कंपनियों का वित्तीय प्रदर्शन मजबूत बना रहा। जनवरी से मार्च 2026 की चौथी तिमाही में देश की प्रमुख तेल कंपनियों के नतीजे सकारात्मक रहे। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चार बड़ी तेल कंपनियों का संयुक्त मुनाफा पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 22 प्रतिशत तक बढ़ा। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 157 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा था और मार्च के दौरान इसका औसत भाव भी 125 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहा। इसके बावजूद कंपनियों के मुनाफे में कमी नहीं आई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच निजी क्षेत्र की ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने 1 जुलाई को अपने ग्राहकों को राहत देते हुए पेट्रोल की कीमत में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपए प्रति लीटर की कटौती की थी। इस फैसले के बाद कई शहरों में नायरा के पंपों पर ईंधन सरकारी कंपनियों की तुलना में सस्ता मिलने लगा। भोपाल जैसे शहरों में भी नायरा के पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। हालांकि इसके बाद भी सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले मई महीने में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल का हवाला देते हुए चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में कुल 7.50 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। देशभर के अधिकांश पेट्रोल पंप इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के नियंत्रण में हैं, इसलिए इन कंपनियों के फैसलों का असर सीधे करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ता है। फिलहाल कीमतों में कटौती नहीं होने से आम लोगों की जेब पर बोझ बना हुआ है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:55:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोना ₹177 चढ़कर ₹1.44 लाख पहुंचा, चांदी ₹2.27 लाख किलो हुई</title>
                                    <description><![CDATA[आईबीजेए के ताजा आंकड़ों में सोने-चांदी दोनों में बढ़त दर्ज, 2026 में अब तक सोना करीब ₹11 हजार महंगा जबकि चांदी अभी भी साल की शुरुआत के स्तर से नीचे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-rose-by-%E2%82%B9-177-to-%E2%82%B9-144-lakh-silver/article-58184"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gold-price-today-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार, 8 जुलाई को फिर हलचल देखने को मिली। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत 177 रुपए बढ़कर करीब 1.44 लाख रुपए पर पहुंच गई। वहीं एक किलो चांदी का भाव 150 रुपए की तेजी के साथ 2.27 लाख रुपए हो गया। पिछले कुछ महीनों से कीमती धातुओं के दाम लगातार ऊपर-नीचे हो रहे हैं और इसका असर आम खरीदारों से लेकर निवेशकों तक पर साफ दिखाई दे रहा है। बाजार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों, डॉलर की चाल, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और निवेशकों की खरीदारी का असर घरेलू बाजार में भी लगातार देखने को मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2026 की शुरुआत से अब तक सोने ने निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। 31 दिसंबर 2025 को 24 कैरेट 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए थी, जो अब बढ़कर 1.44 लाख रुपए के आसपास पहुंच चुकी है। यानी महज कुछ महीनों में सोना करीब 11 हजार रुपए महंगा हो चुका है। हालांकि इस दौरान कीमतों में कई बार उतार-चढ़ाव भी आया। कुछ दिनों तक गिरावट देखने को मिली तो कई कारोबारी सत्रों में तेजी लौट आई। बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षित निवेश की तलाश में लोग अब भी सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल का सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चांदी की बात करें तो आज इसमें हल्की तेजी जरूर दर्ज हुई, लेकिन साल की शुरुआत के मुकाबले इसकी कीमत अब भी नीचे बनी हुई है। 31 दिसंबर 2025 को एक किलो चांदी का भाव करीब 2.30 लाख रुपए था, जबकि अब यह 2.27 लाख रुपए के आसपास कारोबार कर रही है। यानी इस अवधि में करीब 3 हजार रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। कारोबारियों का कहना है कि औद्योगिक मांग, अंतरराष्ट्रीय बाजार और निवेशकों की गतिविधियों के कारण चांदी की कीमतों में सोने के मुकाबले अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल कीमती धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। 29 जनवरी 2026 को सोने ने करीब 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम का ऑलटाइम हाई बनाया था। वहीं चांदी ने भी लगभग 3.86 लाख रुपए प्रति किलो का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। उसके बाद बाजार में मुनाफावसूली और वैश्विक परिस्थितियों में बदलाव के चलते दोनों धातुओं की कीमतों में गिरावट आई। अब एक बार फिर बाजार में हलचल बढ़ने से निवेशकों की नजर अगले कुछ महीनों की चाल पर टिकी हुई है। कई निवेशक मानते हैं कि लंबी अवधि में सोना अब भी सुरक्षित निवेश का विकल्प बना हुआ है, जबकि चांदी में जोखिम के साथ बेहतर रिटर्न की संभावना भी रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्वेलरी खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए भी विशेषज्ञ कुछ जरूरी सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं। सबसे पहले हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना तय शुद्धता का है। इसके अलावा खरीदारी से पहले उस दिन का ताजा बाजार भाव जरूर जांच लेना चाहिए। अलग-अलग कैरेट के सोने की कीमत अलग होती है, इसलिए बिल में दर्ज जानकारी और वजन को भी ध्यान से देखना जरूरी है। कई ग्राहक केवल डिजाइन देखकर खरीदारी कर लेते हैं, लेकिन मेकिंग चार्ज, टैक्स और शुद्धता की जानकारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">चांदी खरीदते समय भी सतर्क रहना जरूरी है। बाजार में असली और नकली दोनों तरह के उत्पाद उपलब्ध रहते हैं। असली चांदी की पहचान के लिए कुछ आसान तरीके अपनाए जा सकते हैं। मैग्नेट टेस्ट में असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती। आइस टेस्ट में चांदी पर रखी बर्फ तेजी से पिघलती है क्योंकि इसकी तापीय चालकता अधिक होती है। इसके अलावा असली चांदी में किसी तरह की गंध नहीं होती, जबकि मिलावटी धातु में तांबे जैसी गंध महसूस हो सकती है। सफेद कपड़े से रगड़ने पर हल्का काला निशान आना भी शुद्ध चांदी की एक सामान्य पहचान माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 13:55:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोना 927 गिरा, 1.51 लाख पर; चांदी 4,700 सस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट के बावजूद 2026 में अब तक सोना महंगा; निवेशकों की नजर बाजार पर आज के बाजार में सोना-चांदी के दामों में आई गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों का ध्यान खींचा है। हालांकि सालाना रुझान अभी भी तेजी का संकेत दे रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-fell-by-927-rupees-and-silver-became-cheaper-by/article-51919"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-23t142059.885.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई में आज जारी आंकड़ों के मुताबिक, सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन</span></span> के अनुसार, 24 कैरेट सोना 927 रुपए सस्ता होकर 10 ग्राम के लिए ₹1.51 लाख पर पहुंच गया। एक दिन पहले इसकी कीमत ₹1.52 लाख थी। वहीं, चांदी की कीमत में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई है और यह ₹4,700 घटकर ₹2.43 लाख प्रति किलो पर आ गई है।</p>
<h5><strong>बाजार में ताजा उतार-चढ़ाव</strong></h5>
<p>कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी धातुओं के दामों में अस्थिरता बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक आर्थिक संकेतों और डॉलर की मजबूती का असर घरेलू बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।</p>
<p>पिछले कुछ दिनों से सोने-चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है, जिससे निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। ज्वेलरी खरीदने वालों के लिए यह गिरावट कुछ राहत लेकर आई है।</p>
<h5><strong>सालभर में अब भी बढ़त</strong></h5>
<p>हालांकि, ताजा गिरावट के बावजूद 2026 में सोना अब तक मजबूत स्थिति में बना हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोने की कीमत ₹1.33 लाख थी, जो अब बढ़कर ₹1.51 लाख तक पहुंच चुकी है। यानी इस साल अब तक करीब ₹18 हजार की बढ़त दर्ज की गई है।</p>
<p>इसी तरह चांदी भी साल की शुरुआत से अब तक करीब ₹13 हजार महंगी हुई है। हालांकि अपने उच्चतम स्तर से दोनों धातुएं अभी नीचे कारोबार कर रही हैं।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, जनवरी 2026 में सोने ने ₹1.76 लाख और चांदी ने ₹3.86 लाख का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इसके बाद से बाजार में करेक्शन देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>खरीदारों के लिए सलाह</strong></h5>
<p>ज्वेलरी खरीदने से पहले ग्राहकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हमेशा हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। इसके अलावा खरीदारी के दिन की कीमत अलग-अलग स्रोतों से जांचना जरूरी है।चांदी खरीदते समय भी उसकी शुद्धता की जांच के लिए सरल घरेलू तरीके अपनाए जा सकते हैं, जैसे मैग्नेट या आइस टेस्ट।</p>
<p>विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में सोने-चांदी की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वैश्विक आर्थिक हालात, ब्याज दरें और भू-राजनीतिक तनाव इनकी दिशा तय करेंगे।फिलहाल, सोना-चांदी की कीमतों में आई यह गिरावट बाजार में अस्थायी मानी जा रही है। ऐसे में निवेशक और खरीदार दोनों ही आने वाले दिनों के संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:21:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोने की कीमत में 3 हजार की तेजी, चांदी ₹6 हजार बढ़कर 2.28 लाख हुई</title>
                                    <description><![CDATA[IBJA के अनुसार 10 ग्राम सोना 1.46 लाख रुपए और 1 किलो चांदी 2.28 लाख रुपए पर पहुंचा; बाजार की दिशा अमेरिका-ईरान तनाव और डॉलर के आंकड़ों पर निर्भर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-price-increased-by-%E2%82%B9-3-thousand-silver-increased-by/article-49566"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-30t133255.196.jpg" alt=""></a><br /><p>30 मार्च 2026 को सोने और चांदी के दाम में तेज वृद्धि दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 3 हजार रुपए बढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया, जबकि 1 किलो चांदी की कीमत 6 हजार रुपए बढ़कर 2.28 लाख रुपए हो गई।</p>
<p>विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने की कीमत में यह वृद्धि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और निवेश धाराओं के कारण हुई है। बीते साल के अंत में सोने का भाव 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम था, जो अब 1.46 लाख रुपए हो गया है। इसका मतलब है कि इस साल सोने की कीमत में कुल 13 हजार रुपए की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, चांदी की कीमत में इस अवधि के दौरान 2 हजार रुपए की गिरावट देखी गई थी, लेकिन आज इसके दाम बढ़कर 2.28 लाख रुपए पहुंच गए।</p>
<p>बाजार के जानकार मानते हैं कि आगे की दिशा मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करेगी। पहला, मिडिल ईस्ट की स्थिति, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव। अगर तनाव बढ़ता है, तो निवेशक सुरक्षित संपत्ति की तलाश में सोने और चांदी में निवेश बढ़ा सकते हैं। दूसरा, अमेरिका के आर्थिक आंकड़े। यदि डेटा उम्मीद से बेहतर आते हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों पर दबाव बन सकता है।</p>
<p>वित्तीय विशेषज्ञों ने निवेशकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि सोना फिलहाल 'करेक्शन फेज' में है, यानी कीमतों में थोड़ी स्थिरता या सुधार देखे जा सकते हैं। शॉर्ट टर्म में मोमेंटम कमजोर होने के बावजूद, लॉन्ग टर्म में सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि का रुझान बरकरार है। इसीलिए विशेषज्ञ निवेशकों को सुझाव देते हैं कि छोटे निवेश करके सोने में पोर्टफोलियो तैयार किया जा सकता है।</p>
<p>देश के प्रमुख शहरों में सोने-चांदी की कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है। मुंबई, दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई जैसे बड़े बाजारों में कीमतें स्थानीय मांग और सप्लाई के अनुसार थोड़ी भिन्न हो सकती हैं। IBJA ने निवेशकों को यह भी सलाह दी है कि खरीदी से पहले नवीनतम स्थानीय रेट की जांच अवश्य करें।</p>
<p>विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से इस समय कीमती धातुओं का बाजार अस्थिर है। निवेशक अपनी लंबी अवधि की रणनीति के हिसाब से ही खरीदारी करें और जल्दबाज़ी में निवेश से बचें।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:34:02 +0530</pubDate>
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                <title>रिकॉर्ड हाई से सोना 41 हजार और चांदी 1.84 लाख नीचे</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका-इजराइल और ईरान तनाव के बीच निवेशकों की रणनीति बदली; मुनाफावसूली और कैश की मांग से सोना-चांदी की कीमतों में तेज गिरावट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/gold-41-thousand-and-silver-184-lakh-below-record-high/article-48820"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-23t131354.543.jpg" alt=""></a><br /><p>अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹12,077 घटकर ₹1.35 लाख पर आ गया है। वहीं चांदी की कीमत ₹30,864 गिरकर ₹2.01 लाख प्रति किलोग्राम रह गई। यह गिरावट ऐसे समय आई है जब आमतौर पर वैश्विक संकट के दौरान कीमती धातुओं में तेजी देखी जाती है।</p>
<p><strong>क्या हुआ और कितना असर पड़ा?</strong><br />पिछले 24 दिनों में सोने की कीमत करीब ₹24 हजार तक गिर चुकी है, जबकि चांदी में ₹65 हजार तक की गिरावट आई है। जनवरी के अंत में रिकॉर्ड स्तर छूने के बाद दोनों धातुओं में लगातार दबाव बना हुआ है।<br />29 जनवरी 2026 को सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख के अपने ऑल टाइम हाई पर थी। इसके मुकाबले अब सोना करीब ₹41 हजार और चांदी ₹1.84 लाख तक सस्ती हो चुकी है।</p>
<p><strong>क्यों आई गिरावट?</strong><br />विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार बाजार का व्यवहार पारंपरिक पैटर्न से अलग है। आमतौर पर युद्ध जैसी स्थिति में निवेशक सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख करते हैं, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में निवेशक नकदी को प्राथमिकता दे रहे हैं।</p>
<p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते अनिश्चितता बढ़ी है, जिससे निवेशकों ने अपने मेटल होल्डिंग्स बेचकर कैश जमा करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा, जनवरी में कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद बड़े निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने भी बाजार में सप्लाई बढ़ा दी है।</p>
<p><strong>कैसे असर डाल रही हैं वैश्विक परिस्थितियां?</strong><br />अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख और डॉलर की मजबूती ने भी सोने-चांदी की मांग को कमजोर किया है। ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक फिक्स्ड इनकम विकल्पों की ओर झुकाव दिखा रहे हैं, जिससे कीमती धातुओं की चमक फीकी पड़ी है।</p>
<p><strong>स्थानीय बाजार में कीमतें क्यों अलग?</strong><br />विशेषज्ञ बताते हैं कि अलग-अलग शहरों में सोने की कीमतें ट्रांसपोर्ट लागत, स्थानीय मांग, ज्वेलरी एसोसिएशन के रेट और पुराने स्टॉक की खरीद कीमत जैसे कारकों पर निर्भर करती हैं। यही वजह है कि देशभर में रेट में मामूली अंतर देखने को मिलता है।</p>
<p>--------------------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2026 13:16:17 +0530</pubDate>
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