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                <title>Vijay Shah - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Vijay Shah RSS Feed</description>
                
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                <title>मध्य प्रदेश में तबादलों पर नई व्यवस्था तय, कल CM मोहन यादव कैबिनेट में लगेगी मुहर</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश में तबादला नीति 2026 को बुधवार को कैबिनेट मंजूरी दे सकती है। प्रशासनिक और स्वैच्छिक ट्रांसफर नियमों में बदलाव संभव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/new-system-on-transfers-in-madhya-pradesh-will-be-approved/article-53805"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-transfer-policy-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>MP Transfer Policy 2026:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">मध्य प्रदेश में काफी समय से इंतजार कर रही तबादला नीति को </span>2026<span lang="hi" xml:lang="hi"> में होने वाली कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिल सकती है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। बताया गया है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव और मुख्य सचिव ने प्रस्ताव के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा कर ली है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब इसे मंत्रिमंडल की बैठक में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से हरी झंडी मिल जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसके बाद विभाग की ओर से आधिकारिक आदेश जारी कर दिया जाएगा। इस बार की तबादला नीति में सबसे ज्यादा बातचीत स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के अलग-अलग लिमिट को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि सरकार प्रशासनिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई व्यवस्था लागू कर सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पहले की नीतियों में कुल कर्मचारियों का एक सीमित प्रतिशत ही ट्रांसफर किया जा सकता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें प्रशासनिक और स्वैच्छिक दोनों तरह के तबादले शामिल होते थे। कई बार जरूरी पद खाली होने के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं हो पाता था। इस बार सरकार उस व्यवस्था में बदलाव कर सकती है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासनिक आधार पर तबादलों की गुंजाइश बढ़ाने पर सहमति बनी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और स्वैच्छिक तबादलों के लिए अलग नियम बनाने की तैयारी है। मंत्री विजय शाह ने पिछली कैबिनेट बैठक में स्वैच्छिक तबादलों की लिमिट को खत्म करने का सुझाव दिया था। उस समय मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि अगली बैठक में पूरी नीति का प्रस्ताव लाया जाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक स्थगित होने के बाद</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब बुधवार सुबह </span>11<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे मंत्रालय में बैठक होने जा रही है। मंगलवार को मुख्यमंत्री केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की क्षेत्रीय परिषद बैठक में व्यस्त रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए उस दिन भी कैबिनेट नहीं हो पाई। अब ये उम्मीद की जा रही है कि बुधवार की बैठक में तबादला नीति के साथ कुछ और प्रशासनिक प्रस्तावों पर भी चर्चा होगी। कर्मचारियों के बीच नई नीति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। कई विभागों में पिछले कई महीनों से ट्रांसफर रुके हुए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कर्मचारी नई सूची का इंतजार कर रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि इस बार सभी विभागों से ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति अलग रखने की योजना है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे हर साल होता आया है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनजातीय कार्य</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऊर्जा और राजस्व विभाग भी अलग गाइडलाइन जारी कर सकते हैं। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सामान्य प्रशासन विभाग के मूल नियमों से अलग कोई विभाग नीति नहीं बना सकेगा। प्रस्ताव में ये भी शामिल किया गया है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के तबादले जिले के भीतर प्रभारी मंत्री और कलेक्टर की मंजूरी से किए जाएंगे। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रथम श्रेणी के अधिकारियों के ट्रांसफर के लिए मुख्यमंत्री की स्वीकृति जरूरी होगी। सूत्रों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले एक साल में ट्रांसफर हो चुके कर्मचारियों को सामान्य परिस्थितियों में फिर से स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार ने राज्यमंत्रियों के स्वेच्छानुदान की राशि बढ़ाने का आदेश भी जारी कर दिया है। अब राज्य मंत्री जरूरतमंदों के लिए </span>25 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए तक की सहायता राशि मंजूर कर सकेंगे। इससे पहले ये सीमा </span>16 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए थी। कैबिनेट मंत्रियों के लिए यह राशि पहले ही </span>40 <span lang="hi" xml:lang="hi">हजार रुपए कर दी गई थी। </span>11 <span lang="hi" xml:lang="hi">मई को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार के इस फैसले को आगामी प्रशासनिक फेरबदल और राजनीतिक संतुलन के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 17:58:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>कर्नल सोफिया बयान विवाद: सुप्रीम कोर्ट सुनवाई से पहले मंत्री विजय शाह ने चौथी बार मांगी माफी</title>
                                    <description><![CDATA[सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में बोले—देशभक्ति के आवेश में निकले थे शब्द, किसी का अपमान उद्देश्य नहीं था]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/colonel-sophia-statement-controversy-minister-vijay-shah-apologizes-for-the/article-45594"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/lifestyel----2026-02-07t152521.352.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नल सोफिया को लेकर दिए गए विवादित बयान के मामले में मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने एक बार फिर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से दो दिन पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी कर अपने बयान को “आवेश और उत्तेजना” में निकला हुआ बताया। यह इस मामले में उनकी चौथी सार्वजनिक माफी है।</p>
<p>वीडियो में विजय शाह ने कहा कि उनका किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या किसी समाज और वर्ग का अपमान करने का कोई उद्देश्य नहीं था। उन्होंने कहा कि जिन शब्दों को लेकर विवाद हुआ, वे उनकी मूल भावना को नहीं दर्शाते। शाह के मुताबिक, देशभक्ति के उत्साह और भावनात्मक क्षण में कही गई बातों को गलत संदर्भ में लिया गया, जिसके लिए वह अंतःकरण से क्षमा याचना करते हैं।</p>
<p>मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में वाणी की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है और इस घटना ने उन्हें आत्ममंथन का अवसर दिया है। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा नहीं होगी और वह अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं।</p>
<p>यह विवाद 11 मई को इंदौर जिले के महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान के बाद शुरू हुआ था। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में दिए गए बयान को लेकर व्यापक आलोचना हुई और इसे सेना तथा महिला अधिकारी के सम्मान से जोड़कर देखा गया। इसके बाद मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया।</p>
<p>इस बीच, विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखना है। इससे पहले कोर्ट ने राज्य सरकार को तय समय सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार इस सुनवाई में अतिरिक्त समय की मांग कर सकती है, यह तर्क देते हुए कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है।</p>
<p>मामले की जांच तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) कर रही है, जिसमें प्रमोद वर्मा, कल्याण चक्रवर्ती और वाहिनी सिंह शामिल हैं। एसआईटी पहले भी विस्तृत जांच के लिए समय विस्तार की मांग कर चुकी है। सरकार ने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट दिल्ली भेज दी है और वरिष्ठ अधिकारियों ने कानूनी सलाहकारों के साथ विचार-विमर्श किया है।</p>
<p>राजनीतिक और कानूनी जानकारों का मानना है कि माफी का यह कदम अदालत में सरकार और मंत्री के पक्ष को नरम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और राज्य सरकार के रुख पर टिकी हैं।</p>
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                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Feb 2026 15:52:19 +0530</pubDate>
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