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                <title>Oil Crisis - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Oil Crisis RSS Feed</description>
                
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                <title>ईरान जंग के बीच वैश्विक तेल संकट गहराया, 115 करोड़ बैरल सप्लाई गायब</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद भी पूरी तरह राहत नहीं, तेल भंडार 36 साल के निचले स्तर पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/global-oil-crisis-deepens-amid-iran-war-115-crore-barrel/article-56437"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/iran-oil-crisis.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दुनिया के ऊर्जा बाजार में ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच बड़ा झटका सामने आया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले चार महीनों में वैश्विक तेल सप्लाई से करीब 115 करोड़ बैरल कच्चा तेल गायब हो गया है। यह आंकड़ा एनालिटिक्स फर्म केपलर की रिपोर्ट में सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया में ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंता खड़ी कर दी है। होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुलने के बाद बाजार में थोड़ी राहत जरूर देखी गई है, लेकिन स्थिति अभी भी सामान्य नहीं मानी जा रही है। मिडिल ईस्ट में युद्ध के दौरान तेल आपूर्ति लगभग बाधित रही, जिससे दुनिया के रणनीतिक और वाणिज्यिक तेल भंडार पर भारी दबाव पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान करीब 19 करोड़ बैरल तेल स्टॉक से निकाल लिया गया, जिससे वैश्विक रिजर्व तेजी से घटे हैं। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक स्ट्रेटजिक रिजर्व 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं, जबकि अमेरिका का इमरजेंसी रिजर्व 43 साल के न्यूनतम स्तर पर दर्ज किया गया है। हालात इतने गंभीर रहे कि कई देशों को अपने दैनिक ईंधन उपयोग को संतुलित करने के लिए आपातकालीन खरीदारी करनी पड़ी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में वर्साय में G7 बैठक के दौरान कहा कि अगर युद्ध लंबा चलता, तो अमेरिका के तेल भंडार करीब चार हफ्तों में खत्म हो जाते। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के साथ समझौते के बाद स्थिति नियंत्रण में आई है, लेकिन अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद रहता तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान ऊर्जा संकट की गंभीरता को दर्शाता है, क्योंकि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं तेल आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर हैं। सीजफायर और समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखी गई है। युद्ध के दौरान जहां कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, वहीं अब यह 80 डॉलर से नीचे आ चुकी हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल अस्थायी राहत है, क्योंकि सप्लाई चेन अभी भी पूरी तरह बहाल नहीं हुई है। समुद्री रास्तों से संभावित बारूदी खतरे हटाने, खाली टैंकरों की वापसी और उत्पादन सामान्य करने में अभी लंबा समय लग सकता है। बाजार फिलहाल जरूरत से ज्यादा आशावादी हो गया है। RBC कैपिटल मार्केट्स की विश्लेषक हेलिमा क्रॉफ्ट का कहना है कि संकट खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी, क्योंकि तेल आपूर्ति को सामान्य स्थिति में आने में कई महीनों का समय लग सकता है। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल एडवाइजर्स के CEO जे हैटफील्ड का मानना है कि OPEC देश उत्पादन बढ़ाकर बाजार में स्थिरता ला सकते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मैक्वेरी ग्रुप के ग्लोबल ऑयल एंड गैस स्ट्रैटेजिस्ट विकास द्विवेदी के अनुसार युद्ध से पहले दुनिया के पास पर्याप्त तेल स्टॉक था, इसी कारण इतनी बड़ी सप्लाई बाधा के बावजूद बाजार पूरी तरह नहीं टूटा। उन्होंने यह भी बताया कि डीजल और पेट्रोल के भंडार में गिरावट जरूर आई है, लेकिन स्थिति अभी नियंत्रण में है और आने वाले हफ्तों में सप्लाई चैन में सुधार देखा जा सकता है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में इस समय प्रतिदिन लगभग 10.3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है। इसमें अमेरिका, सऊदी अरब, रूस, कनाडा और इराक जैसे देश प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जो मिलकर वैश्विक तेल सप्लाई का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। ऐसे में इन देशों में किसी भी प्रकार की राजनीतिक अस्थिरता या युद्ध सीधे तौर पर वैश्विक बाजार और ईंधन कीमतों को प्रभावित करती है। युद्ध के दौरान गायब हुए 115 करोड़ बैरल तेल की भरपाई आसान नहीं होगी। यदि उत्पादन मांग से 50 लाख बैरल प्रतिदिन अधिक भी बढ़ाया जाए, तब भी इस कमी को पूरा करने में लगभग एक साल का समय लग सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी हमला, ईरान के 2 तेल टैंकर रोके, रातभर चली गोलीबारी</title>
                                    <description><![CDATA[स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका ने ईरान के दो टैंकरों पर कार्रवाई की। गोलीबारी और मिसाइल हमलों के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attack-in-strait-of-hormuz-stopped-2-oil-tankers/article-53011"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t174941.204.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के दो तेल टैंकरों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्क्रिय करने का दावा किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाके में पूरी रात तनाव बना रहा और दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष की आशंका फिर तेज हो गई है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया है कि उसके ऊपर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। हालांकि इन दावों को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के ये टैंकर अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने पहले कुछ सैन्य जहाजों पर संभावित हमले को रोका और उसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज के आसपास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ देर बाद दो तेल टैंकरों पर ऑपरेशन किया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक टैंकरों को पूरी तरह डुबोया नहीं गया लेकिन उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इलाके में मौजूद कई जहाजों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और समुद्री रास्तों की निगरानी बढ़ा दी गई है। हालात ऐसे हैं कि वैश्विक बाजार भी एक बार फिर दबाव में दिखाई दे रहे हैं क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बेहद अहम रास्ता माना जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दरअसल 28 फरवरी के बाद से यह जलमार्ग लगातार विवाद के केंद्र में बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद ईरान ने इस क्षेत्र में आवाजाही को सीमित कर दिया था। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और कई देशों की चिंता बढ़ गई। अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता भी बेनतीजा खत्म हुई थी। उसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती गईं। अब ताजा हमले के बाद स्थिति और संवेदनशील मानी जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अगर अमेरिकी हितों को चुनौती दी गई तो जवाब दिया जाएगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई को उकसाने वाला कदम बताया है और इसे संघर्षविराम का उल्लंघन करार दिया है। इस बीच शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान दोनों देशों के संपर्क में है और तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:54:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेल संकट के बीच बड़ी डील, होर्मुज मार्ग खोलने पर राजी हुए अमेरिका-ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सहमति बनने की खबर, फंसे जहाजों को जल्द मिल सकती है निकलने की अनुमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-iran-agree-to-open-hormuz-passage-in-big-deal-amid/article-52854"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t154500.443.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच अब राहत की खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम सहमति बनी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी में धीरे-धीरे ढील दी जाएगी और बदले में ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलने पर राजी हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आने वाले कुछ घंटों में वहां फंसे कई व्यापारिक जहाजों को निकलने की अनुमति मिल सकती है। पिछले कुछ दिनों से इस समुद्री मार्ग पर हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए थे और दुनिया भर की नजरें इसी इलाके पर टिकी थीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरबी मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच बैकचैनल बातचीत लगातार चल रही थी। बताया जा रहा है कि गुरुवार देर रात तक कई दौर की बातचीत के बाद स्थिति नरम पड़नी शुरू हुई। अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इसके बाद दुनिया के कई देशों की तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने लगी थी। हालात ऐसे हो गए थे कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदल दिए थे जबकि कुछ जहाज इसी मार्ग में फंस गए थे। समुद्री व्यापार से जुड़े विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे थे कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो एशिया और यूरोप के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा। शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ने इलाके में अपनी निगरानी बढ़ा दी थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान ने भी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी थीं। इसी बीच अमेरिकी लड़ाकू विमान द्वारा ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाने की खबर ने तनाव को और बढ़ा दिया था। बताया गया कि हमले में टैंकर के रडर हिस्से को नुकसान पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जहाज की दिशा नियंत्रित करने में दिक्कत आई। हालांकि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी काफी तेज हो गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौता नहीं होने की स्थिति में ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की बात कही गई थी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब जो संकेत सामने आ रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनसे माना जा रहा है कि फिलहाल टकराव टालने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा वक्त लग सकता है क्योंकि सुरक्षा जांच और जहाजों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं। तेल कारोबारियों और शिपिंग कंपनियों को उम्मीद है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि अभी तक अमेरिका और ईरान की ओर से इस समझौते को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में दुनिया फिलहाल अगले कुछ घंटों का इंतजार कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका ने ईरान को भेजा नया प्रस्ताव, ट्रंप बोले- समझौता नहीं हुआ तो फिर होगी बमबारी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने ईरान को युद्ध खत्म करने का नया प्रस्ताव भेजा है। ट्रंप की चेतावनी के बीच परमाणु कार्यक्रम पर समझौता अब भी अटका हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-sent-a-new-proposal-to-iran-trump-said/article-52857"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t161820.521.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच करीब दो महीने से जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने तेहरान को युद्ध खत्म करने के लिए नया प्रस्ताव भेजा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसकी समीक्षा फिलहाल ईरान कर रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा खोलने</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कुछ अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को कम करने जैसे बिंदु शामिल हैं। हालांकि मामला अभी पूरी तरह सुलझा नहीं है। तेहरान ने साफ संकेत दिए हैं कि वह जल्दबाजी में किसी समझौते पर दस्तखत नहीं करेगा। इसी बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया पर फिर चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो ईरान पर दोबारा बमबारी शुरू हो सकती है। इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में बेचैनी फिर बढ़ गई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गुरुवार सुबह से ही अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल देखने को मिली। कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय के लिए स्थिर हुईं और निवेशकों में उम्मीद जगी कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य खुलता है तो तेल सप्लाई सामान्य हो सकती है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ हफ्तों में पर्सियन गल्फ से गुजरने वाले कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई थी। इसी वजह से ब्रेंट क्रूड लगातार ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। बुधवार देर रात अमेरिकी सेना और एक ईरानी तेल टैंकर के बीच ओमान की खाड़ी में तनाव की खबर भी सामने आई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि टैंकर अमेरिकी नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद कार्रवाई की गई। हालांकि ईरान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है। हालात इतने तनावपूर्ण रहे कि कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अस्थायी रूप से अपने रूट बदल दिए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे युद्ध की सबसे बड़ी उलझन अब भी ईरान का परमाणु कार्यक्रम बना हुआ है। वॉशिंगटन चाहता है कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन सीमित करे और परमाणु हथियारों की दिशा में कोई कदम न बढ़ाए। दूसरी तरफ ईरान इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बता रहा है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच असली पेच यहीं फंसा है। अमेरिकी पक्ष चाहता है कि किसी भी समझौते में परमाणु गतिविधियों पर सख्त निगरानी शामिल हो</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान अपने कार्यक्रम को पूरी तरह रोकने के लिए तैयार नहीं दिख रहा। हालांकि अब यह भी कहा जा रहा है कि दोनों देश फिलहाल इस मुद्दे को अलग रखकर बाकी बिंदुओं पर सहमति बनाने की कोशिश कर सकते हैं ताकि युद्ध जैसी स्थिति खत्म हो सके। बाद में परमाणु वार्ता के लिए अलग दौर की बातचीत कराई जा सकती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस संघर्ष की शुरुआत फरवरी के आखिर में हुई थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हमले शुरू किए। उसी दौरान ईरान के शीर्ष नेतृत्व को बड़ा नुकसान पहुंचा और इसके बाद तेहरान ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। हालात तेजी से बिगड़े और होर्मुज जलडमरूमध्य पर असर पड़ने लगा। अप्रैल में संघर्षविराम की कोशिश हुई थी लेकिन बीच-बीच में दोनों पक्षों की तरफ से आरोप लगते रहे कि सीजफायर का उल्लंघन हुआ। पाकिस्तान की मध्यस्थता में भी बातचीत कराने की कोशिश हुई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मगर वह सफल नहीं हो पाई। अब ट्रंप प्रशासन दावा कर रहा है कि समझौता करीब है और एक छोटे मेमोरैंडम पर सहमति बन सकती है। लेकिन तेहरान अभी पूरी तरह भरोसा करने की स्थिति में नहीं दिख रहा।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान को ट्रंप की चेतावनी: होर्मुज खोलो, नहीं तो होगा विनाश</title>
                                    <description><![CDATA[डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और समझौते की राह अपनाने को कहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/trumps-warning-to-iran-to-open-hormuz-otherwise-there-will/article-49616"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/trump-iran-tension-strait-of-hormuz-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ जारी तनाव के बीच एक बार फिर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि ईरान को अब बातचीत और समझौते की राह अपनानी चाहिए, वरना परिणाम गंभीर होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">होर्मुज को लेकर चेतावनी</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अपने बयान में ट्रंप ने विशेष रूप से Strait of Hormuz का जिक्र करते हुए कहा कि यदि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को व्यापार के लिए पूरी तरह नहीं खोला गया तो स्थिति और बिगड़ सकती है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पिछले कुछ हफ्तों से जारी संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित किया है। ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता और व्यापारिक अनिश्चितता के कारण कई देश चिंता में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव और बढ़ा तो इसका असर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कूटनीतिक स्थिति और आगे की राह</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">फिलहाल दोनों देशों के बीच सुलह के संकेत कमजोर दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका की ओर से लगातार आक्रामक बयानबाजी स्थिति को और जटिल बना रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति की अपीलें की जा रही हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 18:50:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान का सख्त ऐलान: मुआवजा और प्रतिबंध हटे बिना जंग नहीं रुकेगी, अमेरिका से गारंटी की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान बोला—आर्थिक प्रतिबंध हटाओ, अमेरिका दखल नहीं देगा इसकी लिखित गारंटी चाहिए; इजराइल पर जारी हमले]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/irans-tough-announcement-war-will-not-stop-without-compensation-and/article-48903"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/international-(43).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह फिलहाल युद्धविराम के पक्ष में नहीं है। ईरान के वरिष्ठ सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई ने कहा है कि जब तक देश को हुए नुकसान की भरपाई नहीं होती और उस पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंध नहीं हटाए जाते, तब तक जंग जारी रहेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चिंता गहराती जा रही है।</p>
<p>रजेई ने ईरान के आधिकारिक टीवी चैनल पर दिए बयान में कहा कि उनकी शर्तें साफ हैं—आर्थिक प्रतिबंधों को पूरी तरह समाप्त किया जाए और अमेरिका यह गारंटी दे कि भविष्य में वह ईरान के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उनके मुताबिक, ईरानी सेना पूरी क्षमता के साथ अभियान चला रही है और देश का नेतृत्व स्थिति पर नियंत्रण बनाए हुए है।</p>
<p>यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब पिछले कुछ दिनों से ईरान और इजराइल के बीच हमले तेज हुए हैं। इजराइल के कई इलाकों में मिसाइल हमलों के कारण सायरन बजते रहे, जबकि कुछ स्थानों पर इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें हैं। वहीं, इजराइल ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए लेबनान सहित अन्य क्षेत्रों में सैन्य कार्रवाई की है।</p>
<p>ईरान का दावा है कि यह संघर्ष पहले ही समाप्त हो सकता था, लेकिन इजराइल के रुख के कारण हालात बिगड़े। रजेई के अनुसार, अमेरिका युद्धविराम की दिशा में आगे बढ़ रहा था, लेकिन इजराइल ने सैन्य कार्रवाई जारी रखने पर जोर दिया।</p>
<p>इस बीच अमेरिका की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बयान अलग-अलग संकेत दे रहे हैं। एक ओर वे बातचीत की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य कार्रवाई को लेकर भी बयान सामने आए हैं। इससे क्षेत्रीय स्थिति और जटिल हो गई है।</p>
<p>इस युद्ध का असर अब वैश्विक स्तर पर भी दिखने लगा है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। एशियाई बाजारों में भी अस्थिरता दर्ज की गई है, जिससे आर्थिक दबाव की स्थिति बन रही है।</p>
<p>------------------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 11:37:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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