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                <title>Security Forces - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Security Forces RSS Feed</description>
                
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                <title>गांदरबल में सोनमर्ग सुरंग के पास CRPF वाहन पलटा, छह जवान घायल</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनमर्ग सुरंग के निकट सीआरपीएफ का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे में छह जवान घायल हुए, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद सीआरपीएफ कैंप और अस्पताल में भर्ती कराया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/crpf-vehicle-overturned-near-sonamarg-tunnel-in-darbal-six-soldiers/article-57768"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/crpf-vehicle-accident.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जम्मू-कश्मीर के गांदरबल जिले में शुक्रवार को एक सड़क दुर्घटना में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के छह जवान घायल हो गए। यह हादसा श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सोनमर्ग सुरंग के पास हुआ, जहां सीआरपीएफ का एक वाहन अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से फिसल गया और पलट गया। दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा बलों और राहत टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया और सभी घायल जवानों को सुरक्षित बाहर निकाला। अधिकारियों के अनुसार, दुर्घटना उस समय हुई जब सीआरपीएफ का वाहन नियमित ड्यूटी के दौरान सोनमर्ग क्षेत्र से गुजर रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक वाहन का संतुलन बिगड़ने के कारण वह सड़क से फिसल गया और पलट गया। हादसे में वाहन में सवार छह जवान घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि किसी भी जवान की हालत गंभीर नहीं बताई गई है। दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, सीआरपीएफ और प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर पहुंच गईं। बचाव दल ने वाहन में फंसे जवानों को बाहर निकाला और मौके पर ही प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया। इसके बाद सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए गुंड स्थित सीआरपीएफ शिविर भेजा गया। कुछ जवानों को अतिरिक्त चिकित्सकीय जांच के लिए नजदीकी अस्पताल भी ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार जारी है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि वाहन का संतुलन बिगड़ने के कारण यह दुर्घटना हुई। हालांकि दुर्घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था, इसका पता लगाने के लिए विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हादसा सड़क की स्थिति, तकनीकी खराबी, मौसम या किसी अन्य कारण से हुआ। जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग जम्मू-कश्मीर का एक महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। इसी मार्ग से लद्दाख क्षेत्र तक आवश्यक आपूर्ति, सेना के वाहन और नागरिक यातायात संचालित होता है। सोनमर्ग सुरंग के आसपास का क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण यहां वाहन चालकों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बारिश, फिसलन और घुमावदार रास्तों की वजह से इस मार्ग पर समय-समय पर सड़क दुर्घटनाएं भी सामने आती रही हैं। सुरक्षा बलों के वाहन भी नियमित रूप से इसी मार्ग का उपयोग करते हैं। अधिकारियों के अनुसार सभी छह घायल जवानों की हालत फिलहाल स्थिर है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है। किसी भी जवान को गंभीर या जानलेवा चोट नहीं आई है। सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी घायल जवानों की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों में भी स्थानांतरित किया जा सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">स्थानीय पुलिस ने दुर्घटना का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल का निरीक्षण किया गया है और वाहन की तकनीकी जांच भी कराई जा रही है। जांच अधिकारी दुर्घटना के समय की परिस्थितियों, चालक के बयान और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेंगे। इसके अलावा सड़क की स्थिति और मौसम संबंधी पहलुओं को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।सोनमर्ग और गांदरबल क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। अमरनाथ यात्रा, सीमावर्ती इलाकों की सुरक्षा और लद्दाख की ओर सैन्य गतिविधियों के कारण इस मार्ग पर सुरक्षा बलों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। इसी कारण सड़क सुरक्षा और वाहनों की तकनीकी जांच को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है। अधिकारियों का कहना है कि दुर्घटना के कारणों की जांच के बाद भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता सभी घायल जवानों के बेहतर इलाज और दुर्घटना के कारणों की निष्पक्ष जांच करना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 15:09:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मणिपुर में बढ़ा तनाव, गांवों में सुरक्षा बलों की एंट्री पर नई शर्त</title>
                                    <description><![CDATA[नगा गांव में हमले के बाद विलेज अथॉरिटी का फैसला, बिना सूचना सुरक्षा बलों और ड्रोन की एंट्री पर आपत्ति]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/tension-increases-in-manipur-new-condition-on-entry-of-security/article-55452"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/manipur-violence.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मणिपुर में पिछले तीन वर्षों से जारी जातीय हिंसा के बीच एक बार फिर हालात तनावपूर्ण होते दिखाई दे रहे हैं। कांगपोकपी जिले के पोंग्रिंगलॅान्ग रोंग्मेई नगा गांव में हुई गोलीबारी की घटना के बाद राज्य के कई नगा संगठनों और ग्रामीण संस्थाओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। इसी बीच नोने जिले के लोंग्जांग और ठंगाल गांव की विलेज अथॉरिटी ने राज्य पुलिस, असम राइफल्स और सीआरपीएफ को नोटिस जारी कर कहा है कि गांवों में प्रवेश करने से पहले स्थानीय प्रशासन और विलेज अथॉरिटी को सूचना देना अनिवार्य होगा। इस फैसले ने राज्य में पहले से चल रहे तनाव को और बढ़ा दिया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार को कांगपोकपी जिले में स्थित पोंग्रिंगलॅान्ग रोंग्मेई नगा गांव में हथियारबंद लोगों द्वारा गोलीबारी की घटना सामने आई थी। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक इस हमले के बाद चुन्जांग्लुंग पान्मेई नामक एक नगा विलेज गार्ड लापता हो गया था। बाद में उसका शव आसपास के जंगलों से बरामद किया गया। अधिकारियों के अनुसार उसके सिर में गोली लगी थी। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया और सुरक्षा बलों ने आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान शुरू किया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">नगा संगठनों का आरोप है कि हमले के पीछे कुकी उग्रवादी समूहों का हाथ है। कुछ संगठनों ने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राज्य में चल रही हिंसा के दौरान कुछ समुदायों को विशेष संरक्षण दिया जा रहा है जबकि दूसरे समुदायों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त कदम नहीं उठाए जा रहे। हालांकि इन आरोपों पर अभी तक संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घटना के कुछ घंटों बाद चिंग मामांग गांव में भी गोलीबारी की खबर आई। बताया जा रहा है कि अज्ञात हथियारबंद लोगों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें एक व्यक्ति घायल हो गया। घायल को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं, लेकिन अब तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इसी बीच नोने जिले की विलेज अथॉरिटी ने सुरक्षा बलों को लेकर नया निर्देश जारी किया है। नोटिस में कहा गया है कि गांवों के भीतर किसी भी प्रकार की तलाशी, छापेमारी, गश्त या गिरफ्तारी अभियान चलाने से पहले संबंधित गांव की अथॉरिटी को सूचित करना होगा। साथ ही बिना पूर्व जानकारी के ड्रोन उड़ाने पर भी आपत्ति जताई गई है। ग्रामीण प्रतिनिधियों का कहना है कि यह कदम स्थानीय लोगों के अधिकारों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विलेज अथॉरिटी का दावा है कि मणिपुर हिल एरियाज विलेज अथॉरिटी एक्ट, 1956 के तहत गांवों की आंतरिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई अधिकार उन्हें प्राप्त हैं। ऐसे में किसी भी सरकारी कार्रवाई से पहले स्थानीय संस्थाओं को विश्वास में लिया जाना चाहिए। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में इस तरह की शर्तें सुरक्षा अभियानों को प्रभावित कर सकती हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नई चुनौतियां पैदा कर सकती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राजधानी इम्फाल में भी सोमवार को बड़ी संख्या में महिलाएं सड़कों पर उतरीं। करीब 14 नागरिक संगठनों के संयुक्त आह्वान पर निकाली गई महारैली में हजारों महिलाओं ने हिस्सा लिया। यह रैली लगभग पांच किलोमीटर तक चली। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करने, कथित अवैध घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें राज्य से बाहर करने की मांग उठाई। महिलाओं के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर विभिन्न मांगें लिखी गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि राज्य में लंबे समय से जारी अस्थिरता और जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर लोगों में चिंता बढ़ रही है। उनका मानना है कि एनआरसी लागू होने से वास्तविक नागरिकों की पहचान स्पष्ट होगी और अवैध घुसपैठ को रोका जा सकेगा। हालांकि इस मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग राय सामने आती रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मणिपुर में हिंसा और तनाव का असर अब भी हजारों परिवारों पर दिखाई दे रहा है। राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की संख्या बड़ी है और कई परिवार अब तक अपने घरों को नहीं लौट पाए हैं। हाल ही में सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त आंकड़ों में सामने आया कि पिछले तीन वर्षों में विस्थापन और उससे जुड़ी परिस्थितियों के कारण 731 लोगों की मौत हुई है। इनमें सबसे अधिक मौतें चूराचांदपुर जिले में दर्ज की गई हैं। इसके अलावा बिष्णुपुर और कांगपोकपी जिलों में भी बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आंकड़ों के अनुसार राज्य के नौ जिलों में अभी भी 43 हजार से अधिक लोग विस्थापित जीवन जी रहे हैं। राहत शिविरों में रहने वाले इन लोगों को आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सरकार और केंद्र सरकार लगातार हालात सामान्य करने की बात कह रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। नगा गांव में हालिया हमले, सुरक्षा बलों की एंट्री को लेकर नई शर्त और एनआरसी की मांग को लेकर हुए बड़े प्रदर्शन ने साफ संकेत दिया है कि मणिपुर में शांति बहाली की प्रक्रिया अभी लंबी और चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:41:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पीओके में हिंसा से 27 लोगों की मौत, चुनाव से पहले बढ़ा तनाव</title>
                                    <description><![CDATA[आरक्षित सीटों को लेकर आंदोलन कर रहे संगठन पर प्रतिबंध के बाद भड़की हिंसा, पुलिसकर्मियों समेत कई लोगों की जान गई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/27-people-died-due-to-violence-in-pok-tension-increased/article-55412"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pok-violence.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता और जन असंतोष खुलकर सामने आया है। क्षेत्र के कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़पों में कम से कम 27 लोगों की मौत होने की खबर है, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने पड़े। शुरुआती जानकारी के मुताबिक मृतकों में चार पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है और कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई जारी है, जबकि प्रदर्शनकारी सरकार पर दमनात्मक रवैया अपनाने का आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बताया जा रहा है कि यह विवाद विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ था, जो अब बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) लंबे समय से इन सीटों को समाप्त करने की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है और सत्ता कुछ चुनिंदा समूहों तक सीमित रह जाती है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो विभिन्न युद्धों और संघर्षों के दौरान जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। इसी मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच टकराव लगातार बढ़ता गया और आखिरकार हालात हिंसा तक पहुंच गए।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव उस समय और बढ़ गया जब पीओके सरकार ने 5 जून को आतंकवाद विरोधी कानून के तहत JAAC पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। सरकार ने सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को इसका कारण बताया। प्रतिबंध लगने के बाद पुलिस ने संगठन से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई समर्थकों को हिरासत में लिया गया। इसके विरोध में विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन शुरू हो गए। हालात तब ज्यादा बिगड़ गए जब संगठन के एक सदस्य की कथित पुलिस फायरिंग में मौत होने की खबर सामने आई। इस घटना के बाद समर्थक बड़ी संख्या में अस्पताल के शवगृह के बाहर जमा हो गए और विरोध प्रदर्शन करने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">रविवार को रावलकोट में स्थिति अचानक नियंत्रण से बाहर हो गई। प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची पुलिस और JAAC समर्थकों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला हिंसक हो गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। प्रशासन का दावा है कि प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षाबलों पर हथियारों से हमला किया, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने बल प्रयोग कर हालात को और बिगाड़ दिया। इस दौरान गोलीबारी और पत्थरबाजी की घटनाएं भी सामने आईं। अधिकारियों के अनुसार कई सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, वहीं बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को भी चोटें आई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">स्थानीय प्रशासन के मुताबिक अब तक 30 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियां हिंसा फैलाने वालों की पहचान करने में जुटी हैं। प्रशासन का कहना है कि किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं विपक्षी और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि सरकार राजनीतिक असहमति को दबाने के लिए कठोर कदम उठा रही है। इस बीच सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव दिखाई दे रहा है। हालांकि इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">आगामी विधानसभा चुनाव भी इस पूरे विवाद की एक बड़ी वजह हैं। पीओके में 27 जुलाई को विधानसभा चुनाव होने हैं और चुनाव से पहले बढ़ता तनाव सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। यहां विधानसभा की कुल 53 सीटें हैं, जिनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है। बाकी सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। ऐसे समय में आरक्षित सीटों का मुद्दा चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ वर्षों में पीओके की राजनीति लगातार अस्थिर रही है। सरकारों में बदलाव, नेतृत्व संकट और राजनीतिक दलों के बीच संघर्ष ने प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित किया है। 2021 के चुनावों के बाद बनी सरकार भी कई उतार-चढ़ाव से गुजरी। कई प्रधानमंत्रियों को बीच कार्यकाल में पद छोड़ना पड़ा और राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे। ऐसे माहौल में जनता के बीच असंतोष बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/27-people-died-due-to-violence-in-pok-tension-increased/article-55412</link>
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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 15:33:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा, आतंकियों के मोबाइल कराची और लाहौर तक पहुंचे</title>
                                    <description><![CDATA[एनआईए की जांच में सामने आए नए तथ्य, मोबाइल में बैसरन घाटी की लोकेशन और स्क्रीनशॉट मिले, सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचाए गए थे फोन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-revelation-in-the-investigation-of-pahalgam-terrorist-attack-terrorists/article-54751"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/pahalgam-terror-attack.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पहलगाम आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को मामले में एक महत्वपूर्ण सुराग मिला है। जांच के दौरान मारे गए आतंकियों के पास से बरामद मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। एजेंसी के अनुसार आतंकियों के कब्जे से मिले दोनों मोबाइल फोन चीन की एक कंपनी की सप्लाई चेन के माध्यम से पाकिस्तान पहुंचे थे और बाद में इन्हें कराची तथा लाहौर के पतों पर डिलीवर किया गया था। जांच एजेंसी का मानना है कि यह जानकारी हमले की पूरी साजिश और आतंकियों के नेटवर्क को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए के अनुसार पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को पिछले वर्ष जुलाई में सुरक्षा बलों ने एक मुठभेड़ में मार गिराया था। मुठभेड़ के बाद उनके पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। इनमें एक रेडमी 9टी और दूसरा रेडमी नोट 12 मॉडल का फोन था। जब इन उपकरणों की डिजिटल और फोरेंसिक जांच की गई तो इनके इस्तेमाल और वितरण से जुड़े कई तथ्य सामने आए। जांच में पता चला कि दोनों मोबाइल पाकिस्तान के कराची और लाहौर क्षेत्रों तक पहुंचाए गए थे। एजेंसी ने तकनीकी माध्यमों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर इनकी सप्लाई चेन का पता लगाया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान मोबाइल फोन में मौजूद डाटा ने भी कई महत्वपूर्ण संकेत दिए। अधिकारियों के मुताबिक मोबाइल के नेविगेशन एप में बैसरन घाटी की लोकेशन पहले से सेव थी। इसके अलावा बैसरन क्षेत्र के कई स्क्रीनशॉट भी फोन में मिले, जिन्हें हमले से कुछ दिन पहले लिया गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले की तैयारी पहले से की जा रही थी और लक्ष्य स्थल की रेकी तथा डिजिटल निगरानी भी की गई थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि हमले की योजना किस स्तर पर बनाई गई और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए इस हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले में पर्यटकों को निशाना बनाया गया था और बड़ी संख्या में लोगों की जान गई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार यह एक सुनियोजित आतंकी हमला था, जिसमें आतंकियों ने पहले से तय रणनीति के तहत कार्रवाई की थी। फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों ने अब इस बात को और मजबूत किया है कि हमले की तैयारी कई दिन पहले शुरू हो चुकी थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इससे पहले जांच एजेंसी ने एक अन्य खुलासा भी किया था, जिसमें बताया गया था कि आतंकियों के पास से एक हाई-टेक एक्शन कैमरा भी बरामद हुआ था। जांच में यह जानकारी सामने आई कि कैमरा अंतरराष्ट्रीय वितरण नेटवर्क के जरिए चीन पहुंचा और वहां से किसी माध्यम से आतंकियों तक पहुंचा। एजेंसी का मानना है कि ऐसे उपकरणों का उपयोग आतंकी घटनाओं की रिकॉर्डिंग, प्रचार और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए किया जाता है। यही कारण है कि इन उपकरणों की सप्लाई और उपयोग से जुड़े पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा आधुनिक तकनीक और डिजिटल उपकरणों के उपयोग में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। मोबाइल फोन, जीपीएस आधारित एप्लीकेशन, एक्शन कैमरे और एन्क्रिप्टेड संचार माध्यमों का इस्तेमाल अब आतंकवादी गतिविधियों का हिस्सा बन चुका है। इससे जांच एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां भी पैदा हो रही हैं, हालांकि डिजिटल फोरेंसिक तकनीकों की मदद से कई महत्वपूर्ण सुराग भी प्राप्त हो रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनआईए द्वारा दाखिल चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि हमले का मास्टरमाइंड पाकिस्तान में बैठा एक आतंकी संचालक था, जो लगातार हमलावरों के संपर्क में था। जांच में यह दावा किया गया है कि हमले के दौरान आतंकियों को रियल टाइम निर्देश दिए जा रहे थे और लक्ष्य क्षेत्र की जानकारी भी पहले से साझा की गई थी। एजेंसी ने हमले से जुड़े कई डिजिटल और तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं, जिनका विश्लेषण अभी भी जारी है। जांच में दो स्थानीय टूरिस्ट गाइडों की भूमिका भी सामने आई थी। एजेंसी के अनुसार दोनों ने कुछ संदिग्ध गतिविधियां देखी थीं, लेकिन समय रहते इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों तक नहीं पहुंचाई। इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की गई और दोनों को गिरफ्तार किया गया। जांचकर्ताओं का मानना है कि यदि समय पर सूचना मिल जाती तो संभव है कि हमले को रोका जा सकता था।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस मामले की जांच अभी भी जारी है और कई अंतरराष्ट्रीय कड़ियों की पड़ताल की जा रही है। मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड, संचार नेटवर्क और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य केवल हमले के दोषियों तक पहुंचना नहीं, बल्कि उन नेटवर्कों को भी उजागर करना है जो सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को समर्थन और संसाधन उपलब्ध कराते हैं। एनआईए का मानना है कि डिजिटल साक्ष्यों से मिले नए सुराग इस मामले में आगे की जांच को नई दिशा देंगे। आने वाले समय में जांच के दौरान और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं, जो इस पूरे आतंकी नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली को समझने में मदद करेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:56:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजौरी के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हुई शुरू, 2-3 आतंकियों के घिरे होने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ जारी है। दोरिमाल जंगल में 2-3 आतंकियों के फंसे होने की आशंका जताई गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/encounter-begins-between-security-forces-and-terrorists-in-the-forests/article-54059"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rajouri-indian-army-jammu-&amp;-kashmir-encounter.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले से शुक्रवार दोपहर एक बड़ी खबर आई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां दोरिमाल के जंगलों में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ हो रही है। शुरुआती जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इलाके में 2 से 3 आतंकियों के छिपे होने की संभावना जताई गई है। सुरक्षा एजेंसियों को संदिग्ध गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद सेना और अन्य सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। खबर है कि तलाशी अभियान के दौरान जंगल में छिपे आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई। देर शाम तक इलाके में गोलीबारी चलती रही। फिलहाल पूरे क्षेत्र को घेर लिया गया है और अतिरिक्त जवान भी तैनात किए गए हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अधिकारियों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये ऑपरेशन एक बेहद संवेदनशील इलाके में चल रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जंगल और पहाड़ों की वजह से आतंकियों को छिपने में आसानी होती है। सुरक्षा बल लगातार ड्रोन और अन्य आधुनिक उपकरणों से इलाके की निगरानी कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो आतंकियों के एक छोटे समूह की सक्रियता की पहले से जानकारी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी आधार पर संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया गया। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब तक किसी आतंकी के मारे जाने या किसी जवान के घायल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एहतियात के तौर पर स्थानीय लोगों को भी जंगल की तरफ जाने से रोका गया है। पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां इस ऑपरेशन को बड़ी सतर्कता से चला रही हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस साल फरवरी में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">White Knight Corps <span lang="hi" xml:lang="hi">ने किश्तवाड़ में आतंकी नेटवर्क खत्म करने का दावा किया था। उस समय सेना ने कई आतंकियों को मार गिराने की जानकारी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिनमें जैश से जुड़े आतंकी सैफुल्लाह का नाम भी शामिल था। हाल के महीनों में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षाबलों ने आतंकवाद विरोधी अभियान तेज कर दिए हैं। पिछले सप्ताह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह कहते हुए कि अगर आतंकवाद को समर्थन जारी रहा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके गंभीर परिणाम होंगे। इस समय राजौरी में चल रही मुठभेड़ पर पूरे इलाके की नजर बनी हुई है और सुरक्षा एजेंसियां ऑपरेशन खत्म होने तक लगातार जानकारी हासिल कर रही हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 16:20:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बस्तर में नक्सलवाद को बड़ा झटका: टॉप कैडर पापाराव आज करेगा सरेंडर</title>
                                    <description><![CDATA[AK-47 के साथ साथियों समेत आत्मसमर्पण की तैयारी, पश्चिम बस्तर डिवीजन लगभग खत्म होने के कगार पर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-blow-to-naxalism-in-bastar-top-cadre-paparao-will/article-48912"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/cg---2026-03-24t121802.205.jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान के बीच बड़ी सफलता मिलने की संभावना है। जानकारी के अनुसार, पश्चिम बस्तर का अंतिम सक्रिय बड़े कैडर का नक्सली पापाराव उर्फ मंगू आज अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर सकता है। बताया जा रहा है कि वह AK-47 समेत अन्य हथियारों के साथ सुरक्षा बलों के संपर्क में है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।</p>
<p>पापाराव (56) सुकमा जिले का निवासी है और वर्तमान में दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य तथा पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रभारी माना जाता है। वह लंबे समय से नक्सली संगठन का सक्रिय और प्रशिक्षित लड़ाकू रहा है। इलाके के जल, जंगल और जमीन की गहरी जानकारी के कारण वह कई बार सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ों में बच निकलने में सफल रहा।</p>
<p>सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यदि पापाराव आत्मसमर्पण करता है या मुठभेड़ में मारा जाता है, तो पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का अस्तित्व लगभग समाप्त हो जाएगा। इससे बस्तर क्षेत्र को नक्सल मुक्त घोषित करने की दिशा में बड़ी बढ़त मानी जा रही है।</p>
<p>पिछले एक साल में नक्सली संगठन को लगातार झटके लगे हैं। कई बड़े कमांडर मारे गए या उन्होंने सरेंडर किया है। बटालियन नंबर-1 के कमांडर देवा समेत कई शीर्ष नक्सलियों ने हथियार छोड़ दिए हैं। वर्तमान स्थिति में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में केवल 200 से 300 सक्रिय नक्सली कैडर बचे होने का अनुमान है, जो छोटे समूहों में छिपे हुए हैं।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि पापाराव का सरेंडर नक्सली संगठन के मनोबल पर सीधा असर डालेगा। इससे सुरक्षा बलों के अभियान को और मजबूती मिलेगी और स्थानीय स्तर पर शांति बहाली की प्रक्रिया तेज होगी।</p>
<p>हालांकि, अभी भी संगठन के कुछ शीर्ष नेता सक्रिय हैं, जिनमें मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति और मिशिर बेसरा जैसे नाम शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियां इनकी तलाश में लगातार अभियान चला रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-blow-to-naxalism-in-bastar-top-cadre-paparao-will/article-48912</link>
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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 12:20:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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