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                <title>National News Update - दैनिक जागरण</title>
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                <title>हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं, सोम डिस्टिलरीज की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[जबलपुर हाईकोर्ट ने 8 लाइसेंस निलंबन को सही ठहराया, नियम उल्लंघन पर सख्ती को बताया वैध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-decision-of-high-court-trade-of-liquor-is-not/article-48926"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/mp-news-(23).jpg" alt=""></a><br /><p>मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने शराब कारोबार से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि शराब का व्यापार मौलिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने सोम डिस्टिलरीज प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़ी कंपनी की याचिका खारिज करते हुए एक्साइज विभाग द्वारा 8 लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई को वैध ठहराया है।</p>
<p>जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने 32 पन्नों के विस्तृत आदेश में कहा कि शराब का उत्पादन, वितरण और बिक्री पूरी तरह सरकारी नियंत्रण के अधीन है। ऐसे में यदि नियमों का उल्लंघन होता है, तो लाइसेंस निलंबित या रद्द करना पूरी तरह कानूनी और उचित कार्रवाई है।</p>
<p>यह मामला 4 फरवरी 2026 के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें एक्साइज कमिश्नर ने सोम डिस्टिलरीज और सोम डिस्टिलरीज एंड ब्रेवरीज प्राइवेट लिमिटेड के कुल 8 लाइसेंस सस्पेंड कर दिए थे। यह कार्रवाई 26 फरवरी 2024 को जारी एक शो-कॉज नोटिस के आधार पर की गई थी, जिसमें फर्जी परमिट के जरिए शराब परिवहन के आरोप लगाए गए थे।</p>
<p>कंपनी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि संबंधित नोटिस 2023-24 की अवधि से जुड़ा था और 31 मार्च 2024 को उस अवधि के लाइसेंस समाप्त हो चुके थे। इसके बाद नए लाइसेंस जारी किए गए, इसलिए पुराने नोटिस के आधार पर कार्रवाई को अवैध माना जाना चाहिए।</p>
<p>हालांकि, राज्य सरकार की ओर से पेश पक्ष में कहा गया कि एक्साइज एक्ट के तहत विभाग को कार्रवाई का स्पष्ट अधिकार है और नियमों का पालन अनिवार्य है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि गंभीर अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई समय-सीमा से बंधी नहीं होती।</p>
<p>हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शो-कॉज नोटिस किसी एक अवधि तक सीमित नहीं होता। यदि आरोप गंभीर हों, तो बाद में भी कार्रवाई की जा सकती है और पुराने उल्लंघनों का प्रभाव नए लाइसेंस पर भी पड़ सकता है।</p>
<p>अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी जैसे मामलों में तकनीकी दलीलों का महत्व कम हो जाता है। एक बार आरोप प्रमाणित हो जाएं, तो अन्य कानूनी तर्क कमजोर पड़ जाते हैं।</p>
<p>फैसले में कहा गया कि डिस्टिलिंग, ब्रूइंग और बॉटलिंग जैसी गतिविधियों में नियमों का उल्लंघन सार्वजनिक हित से जुड़ा मामला है। ऐसे में सख्त कार्रवाई जरूरी है और यह ‘प्रोपोर्शनैलिटी टेस्ट’ पर भी खरी उतरती है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 14:07:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>महिला सैन्य अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत: स्थायी कमीशन और पेंशन का अधिकार बहाल</title>
                                    <description><![CDATA[कोर्ट ने कहा—महिलाओं को परमानेंट कमीशन से वंचित करना भेदभाव, केंद्र को पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/supreme-courts-big-relief-to-women-military-officers-restoration-of/article-48924"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/national-(57).jpg" alt=""></a><br /><p>सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेना में महिला अधिकारियों के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अफसरों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) से वंचित करना व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का परिणाम था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि मूल्यांकन प्रक्रिया की खामियों का नतीजा था।</p>
<p>जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने निर्देश दिया कि जिन महिला अधिकारियों को मनमाने या गलत आकलन के कारण स्थायी कमीशन नहीं मिला, उन्हें अब पूर्ण पेंशन का लाभ दिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी माना कि इन अधिकारियों की न्यूनतम 20 वर्ष की सेवा पूरी मानी जाएगी, भले ही वे पहले ही सेवा से बाहर हो चुकी हों।</p>
<p>फैसले में केंद्र सरकार को भविष्य के लिए स्पष्ट और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया गया है। अदालत ने कहा कि मूल्यांकन के सभी मानदंड पहले से बताए जाने चाहिए, ताकि किसी भी तरह का पूर्वाग्रह या भेदभाव न हो।</p>
<p>यह मामला महिला अधिकारियों द्वारा दायर याचिकाओं से जुड़ा था, जिनमें 2019 की सरकारी नीति और सशस्त्र बल अधिकरण (AFT) के फैसलों को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और पूर्वाग्रह के चलते उन्हें स्थायी कमीशन से वंचित किया गया।</p>
<p>कोर्ट ने अपने आदेश में तीन प्रमुख राहतें दीं। पहली, जिन अधिकारियों को पहले ही स्थायी कमीशन मिल चुका है, उनका दर्जा बरकरार रहेगा। दूसरी, जो महिला अफसर इस दौरान सेवा से बाहर हो गईं, उन्हें 20 साल की सेवा पूर्ण मानते हुए पेंशन और अन्य लाभ दिए जाएंगे, हालांकि एरियर नहीं मिलेगा। तीसरी, वर्तमान में सेवा में कार्यरत महिला अधिकारियों को निर्धारित मानदंड पूरा करने पर स्थायी कमीशन का अवसर मिलेगा।</p>
<p>सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी पाया कि कई मामलों में वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) इस धारणा के साथ तैयार की गई थी कि महिलाओं को आगे स्थायी भूमिका नहीं दी जाएगी। इससे उनकी मेरिट प्रभावित हुई और वे पुरुष अधिकारियों की तुलना में पीछे रह गईं।</p>
<p>यह मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित था। वर्ष 2003 में पहली बार इस मुद्दे को अदालत में उठाया गया था और 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला अधिकारियों के पक्ष में फैसला दिया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने 2019 में नई नीति बनाई, लेकिन उसमें कुछ सीमाएं जोड़ दी गईं, जिन पर विवाद जारी रहा।</p>
<p>कानूनी विशेषज्ञों ने इस फैसले को महिला सशक्तिकरण और समान अवसर की दिशा में बड़ा कदम बताया है। उनका मानना है कि इससे सेना में लैंगिक समानता को मजबूती मिलेगी और भविष्य में चयन प्रक्रिया अधिक निष्पक्ष हो सकेगी।</p>
<p>फिलहाल, यह फैसला न केवल पूर्व महिला अधिकारियों को राहत देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।</p>
<p>------------</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Mar 2026 13:23:18 +0530</pubDate>
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