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                <title>Mahakal Darshan - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Mahakal Darshan RSS Feed</description>
                
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                <title>महाकाल की भस्म आरती में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दिव्य श्रृंगार ने मोहा भक्तों का मन</title>
                                    <description><![CDATA[पंचामृत पूजन के बाद भांग, चंदन, पुष्प और रुद्राक्ष की मालाओं से हुआ बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/there-was-a-flood-of-devotion-in-the-bhasma-aarti/article-56785"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(11).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान एक बार फिर आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खुलते ही पूरे परिसर में मंत्रोच्चार, घंटों और शंखध्वनि की गूंज सुनाई देने लगी। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। भस्म आरती की परंपरा के अनुसार सबसे पहले वीरभद्र भगवान को प्रणाम कर स्वस्तिवाचन किया गया और विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद चांदी द्वार खोला गया। इसके साथ ही गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले भगवान महाकाल के रात्रिकालीन श्रृंगार को उतारा। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान का जलाभिषेक किया गया। परंपरानुसार दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान महाकाल का पूजन संपन्न हुआ। गर्भगृह में मौजूद पुजारी और पुरोहितों ने वैदिक विधि-विधान के अनुसार पूजा संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा और मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले नंदी हॉल में भी विशेष धार्मिक अनुष्ठान किए गए। भगवान शिव के परम भक्त नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन किया गया। मंदिर परंपरा के अनुसार नंदी पूजन के बाद ही मुख्य आरती और पूजा की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इसके बाद भगवान महाकाल को पंचामृत अर्पित किया गया और विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से अभिषेक किया गया। पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की निगाहें गर्भगृह की ओर टिकी रहीं, जहां हर दिन होने वाली यह अलौकिक आरती एक विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूजन के बाद भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को भांग, चंदन, सिंदूर और सुगंधित द्रव्यों से सजाया गया। इसके साथ ही रजत मुकुट, रजत मुण्डमाला और रुद्राक्ष की मालाएं धारण कराई गईं। विभिन्न रंगों के ताजे पुष्पों से तैयार मालाओं से भगवान का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई दे रहा था। गर्भगृह में स्थापित ज्योतिर्लिंग पर चंदन का लेप और भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य नजर आया। आरती के दौरान मौजूद श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य को निहारते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महाकाल मंदिर की भस्म आरती की विशेषता यह है कि यह देशभर के शिव भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। मान्यता है कि भगवान महाकाल को भस्म अर्पित करने के बाद वे निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी मान्यता के चलते हर दिन हजारों श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होने के लिए दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं। बुधवार को भी मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी देखने को मिली। सुबह होने से पहले ही श्रद्धालु कतारों में लग गए थे ताकि उन्हें बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन का अवसर मिल सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भी परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और भस्म आरती का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म जीवन की नश्वरता का प्रतीक है और भगवान शिव को भस्म अति प्रिय मानी जाती है। इसी कारण महाकाल मंदिर में प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को विशेष महत्व प्राप्त है। श्रद्धालु इसे केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति के रूप में भी देखते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंदिर प्रशासन के अनुसार भस्म आरती के दौरान सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित बनाए रखने के लिए मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के बावजूद दर्शन व्यवस्था शांतिपूर्ण ढंग से संचालित होती रही।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक महत्ता देशभर में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां भक्तों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी भस्म आरती का आकर्षण कम नहीं होता। बुधवार को संपन्न हुई भस्म आरती ने एक बार फिर यह साबित किया कि बाबा महाकाल के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है। भोर की पहली किरणों के साथ जब भस्म आरती संपन्न हुई तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो चुका था। श्रद्धालु भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, लेकिन उनके मन में भस्म आरती का दिव्य और अलौकिक दृश्य लंबे समय तक बना रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Jun 2026 13:29:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोमवार भस्म आरती में महाकाल का दिव्य श्रृंगार, पंचामृत पूजन के बाद दिए राजा स्वरूप दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का जलाभिषेक, पंचामृत पूजन और रजत आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38cce6c593f/article-56623"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(9).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में सोमवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही गर्भगृह में धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। मंदिर के पंडे-पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान महाकाल का पूजन-अर्चन किया और इसके बाद जलाभिषेक संपन्न कराया। भस्म आरती में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर परिसर में कतारबद्ध होकर बाबा महाकाल के दर्शन की प्रतीक्षा कर रहे थे। सोमवार होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रही। मंदिर के पट खुलने के बाद सबसे पहले गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके पश्चात भगवान महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार अभिषेक के दौरान वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे मंदिर परिसर पूरी तरह आध्यात्मिक वातावरण में डूब गया। हर-हर महादेव और जय श्री महाकाल के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। जलाभिषेक के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत से विशेष पूजन किया गया। दूध, दही, घी, शक्कर और विभिन्न फलों के रस से तैयार पंचामृत भगवान को अर्पित किया गया। सनातन परंपरा में पंचामृत पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इससे भगवान प्रसन्न होते हैं और भक्तों पर अपनी विशेष कृपा बनाए रखते हैं। पूजन के दौरान पुजारियों ने वैदिक विधि से आराधना करते हुए भक्तों की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती से पहले प्रथम घंटाल बजाकर मंदिर में प्रवेश किया गया और मंत्रोच्चार के साथ भगवान का ध्यान किया गया। इसके बाद हरिओम का पवित्र जल अर्पित कर विशेष पूजा की गई। कपूर आरती के पश्चात भगवान महाकाल के मस्तक पर भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित किया गया। यह श्रृंगार भगवान शिव के स्वरूप का प्रतीक माना जाता है और महाकाल मंदिर की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय भगवान महाकाल का स्वरूप अत्यंत दिव्य और आकर्षक दिखाई देता है। श्रृंगार की अगली प्रक्रिया में भगवान महाकाल को रजत आभूषणों से अलंकृत किया गया। जटाधारी स्वरूप में विराजमान बाबा महाकाल को राजा स्वरूप में सजाया गया। रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की मालाएं और अन्य आभूषण अर्पित किए गए। इसके साथ ही सुगंधित पुष्पों से निर्मित विशेष मालाओं से भी भगवान का श्रृंगार किया गया। मोगरा और गुलाब के फूलों की सुगंध से पूरा गर्भगृह महक उठा। भगवान महाकाल का यह राजसी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित करने की प्रक्रिया शुरू की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई। भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे प्राचीन और विशेष परंपराओं में से एक मानी जाती है। यह परंपरा केवल उज्जैन के महाकाल मंदिर में ही देखने को मिलती है, जिसके कारण देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को देखने और इसमें शामिल होने की श्रद्धालुओं में विशेष उत्सुकता रहती है। आरती के दौरान मंदिर परिसर में मौजूद भक्त पूरी श्रद्धा के साथ बाबा महाकाल के जयकारे लगाते नजर आए। कई श्रद्धालु इस पल को अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म आरती के पश्चात भगवान महाकाल को फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सोमवार और विशेष पर्वों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसकी धार्मिक मान्यता अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन को आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से विशेष स्थान प्राप्त है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। सोमवार की भस्म आरती में भी यही आस्था और भक्ति देखने को मिली। पंचामृत पूजन, रजत आभूषणों से सुसज्जित राजसी श्रृंगार और भस्म आरती के दिव्य दृश्य ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। बाबा महाकाल के दर्शन कर भक्तों ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा और श्रद्धालु महाकाल के जयघोष के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:07:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>बुधवार की भस्म आरती में गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल, श्रद्धालुओं ने किए दिव्य दर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[भांग, चंदन, सिंदूर और रजत आभूषणों से हुआ विशेष शृंगार, भस्म आरती में उमड़ा आस्था का सैलाब]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/baba-mahakal-devotees-dressed-in-the-form-of-ganesha-had/article-54841"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान भक्तों को बाबा महाकाल के दिव्य और मनोहारी स्वरूप के दर्शन हुए। ज्योतिर्लिंग महाकाल के दरबार में रोजाना होने वाली भस्म आरती का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन बुधवार को भगवान महाकाल का गणेश स्वरूप में किया गया विशेष शृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहा। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्ति और श्रद्धा का वातावरण बना रहा तथा देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">परंपरा के अनुसार तड़के मंदिर के कपाट खुलने के बाद सबसे पहले वीरभद्र जी को प्रणाम किया गया। इसके पश्चात स्वस्तिवाचन के साथ पूजा-अर्चना की प्रक्रिया शुरू हुई और चांदी के द्वार खोले गए। गर्भगृह में प्रवेश करने के बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का पूर्व श्रृंगार उतारा और विधिवत पूजन की तैयारियां शुरू कीं। मंदिर की प्राचीन परंपराओं के अनुसार सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए गए। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। पवित्र जल से अभिषेक के बाद दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत द्वारा विशेष पूजन किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों ने पूरे विधि-विधान के साथ पूजा संपन्न कर भगवान महाकाल का दिव्य शृंगार किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">बुधवार होने के कारण भगवान महाकाल को विशेष रूप से गणेश स्वरूप में सजाया गया। भांग, चंदन और सिंदूर से अलौकिक शृंगार किया गया। इसके साथ ही रजत आभूषणों और पारंपरिक अलंकरणों से बाबा महाकाल की भव्य छवि तैयार की गई। श्रद्धालुओं को भगवान के इस विशेष स्वरूप के दर्शन कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति हुई। मंदिर में मौजूद भक्त लगातार जय महाकाल के जयघोष लगाते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। शृंगार के दौरान भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट धारण कराया गया। इसके अलावा रजत मुंडमाला, रुद्राक्ष की मालाएं और सुगंधित पुष्पों से निर्मित आकर्षक हार पहनाए गए। फूलों की सजावट ने भगवान के स्वरूप को और भी दिव्य बना दिया। गर्भगृह में दीपों की रोशनी और मंत्रों की ध्वनि के बीच बाबा महाकाल का स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">भस्म आरती से पहले नंदी हाल में भी विशेष पूजा-अर्चना की गई। यहां नंदी महाराज का स्नान, ध्यान और पूजन संपन्न किया गया। मान्यता है कि भगवान शिव के परम भक्त नंदी की पूजा के बिना महाकाल की आराधना पूर्ण नहीं मानी जाती। इसी परंपरा का पालन करते हुए नंदी जी की विशेष सेवा और पूजा की गई। पूजन-अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को ड्रायफ्रूट, ताजे फल और विभिन्न प्रकार की मिठाइयों का भोग अर्पित किया गया। इसके बाद भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू हुई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को पवित्र भस्म समर्पित की गई। यह भस्म आरती महाकाल मंदिर की सबसे विशिष्ट और प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक महत्व का माना जाता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु रात से ही मंदिर पहुंच जाते हैं ताकि उन्हें इस अद्भुत आरती का साक्षी बनने का अवसर मिल सके। बुधवार की भस्म आरती में भी हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए मंदिर प्रशासन और सुरक्षा कर्मी लगातार सक्रिय रहे। श्रद्धालु अनुशासित तरीके से दर्शन करते हुए बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त करते रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd">उज्जैन का श्री महाकालेश्वर मंदिर देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख स्थान रखता है। यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की ख्याति विश्वभर में है। धार्मिक दृष्टि से यह आरती केवल एक पूजा अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन परंपरा और शिव भक्ति का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है। विशेष अवसरों और वारों के अनुसार भगवान महाकाल का अलग-अलग स्वरूपों में शृंगार किया जाता है, जिसे देखने के लिए भक्तों में विशेष उत्साह रहता है। बुधवार को गणेश स्वरूप में सजे बाबा महाकाल के दर्शन ने श्रद्धालुओं को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। मंदिर में दिनभर दर्शन का सिलसिला जारी रहा और भक्त भगवान महाकाल के जयकारों के साथ अपनी आस्था व्यक्त करते रहे। महाकाल की नगरी उज्जैन में एक बार फिर भक्ति, परंपरा और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:32:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मंगलवार भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[चंदन, त्रिपुंड, भांग और रजत मुकुट से हुआ दिव्य श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/baba-mahakal-dressed-as-a-king-in-bhasma-aarti-on/article-54702"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दिव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन हुए। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रतिदिन की तरह भस्म आरती से पहले पुजारियों ने प्रथम घंटानाद के साथ गर्भगृह में प्रवेश किया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान का ध्यान किया गया और हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हुए। आरती के पश्चात बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार प्रारंभ हुआ। जटाधारी स्वरूप में भगवान के मस्तक पर चंदन, तिलक, त्रिपुंड और भांग अर्पित की गई। इसके साथ ही उन्हें रजत मुकुट धारण कराया गया और राजा स्वरूप में सजाया गया। यह दिव्य स्वरूप देखते ही श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति से भर उठीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित किया गया और पारंपरिक रीति से भस्म रमाई गई। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी विशेष पहचान रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल ही ऐसे देव हैं जिनकी आरती भस्म से की जाती है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत और दुर्लभ आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भक्तों के कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंगलवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखी गई। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालु देर रात ही मंदिर परिसर पहुंच गए थे ताकि वे भस्म आरती के दिव्य दर्शन कर सकें। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की ख्याति विश्वभर में है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। मंगलवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल का अलौकिक रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। मंगलवार की भस्म आरती के दौरान भी मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की आराधना में लीन दिखाई दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>26 मई महाकाल भस्म आरती: चंद्र-त्रिपुंड और बिल्वपत्र से सजे बाबा महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 26 मई की भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का चंद्र-त्रिपुंड और बिल्वपत्र से विशेष श्रृंगार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/26th-may-mahakal-bhasma-aarti-baba-mahakal-decorated-with-chandra-tripund/article-54207"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(8).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंगलवार तड़के उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का बेहद खूबसूरत और दिव्य श्रृंगार देखने को मिला। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। मंदिर परिसर में रात से ही भक्तों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। जैसे ही गर्भगृह के पट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, “</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारे गूंज उठे। इस बार महाकाल की भस्म आरती के दौरान बाबा को चंद्र-त्रिपुंड</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिल्वपत्र और सुगंधित फूलों से खास तरीके से सजाया गया। दर्शन के लिए आए श्रद्धालु लंबे समय तक नंदी हॉल और बैरिकेड्स में खड़े नज़र आए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रारंभिक पूजा के बाद पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं की पूजा की और फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया। इसके बाद दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से पंचामृत अभिषेक किया गया। बताया जा रहा है कि भस्म आरती से पहले हरिओम जल पूरे विधि-विधान के साथ अर्पित किया गया और वैदिक मंत्रों के बीच भगवान का ध्यान किया गया। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु लगातार मंत्रों का उच्चारण सुनते रहे। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। यह पल देखने के लिए श्रद्धालुओं में खास उत्साह था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई लोग मोबाइल में तस्वीरें कैद करने की कोशिश कर रहे थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि सुरक्षा कर्मी गर्भगृह के नियमों के बारे में उन्हें समझाते रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। भगवान को रजत का शेषनाग मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत मुण्डमाल और ताजे पुष्प अर्पित किए गए। चंदन और भांग से तैयार त्रिपुंड ने श्रृंगार को और भी आकर्षक बना दिया। सुबह होते-होते मंदिर परिसर भक्तों से पूरी तरह भर चुका था। कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना बताते हुए नज़र आए। अधिकारियों का कहना था कि सुबह की आरती शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई और दर्शन की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य दिनों की तुलना में अधिक रखी गई थी। ऐसा लग रहा था कि गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन आए हैं और आने वाले दिनों में भी भीड़ बढ़ सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 May 2026 10:15:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल भस्म आरती 22 मई: चांदी का बेलपत्र और त्रिशूल से सजा बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 22 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का चांदी के बेलपत्र और त्रिशूल से विशेष श्रृंगार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/mahakal-bhasma-aarti-22nd-may-divine-adornment-of-baba-mahakal/article-53937"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(5).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शुक्रवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती बड़े अदब से पूरी की गई। ज्येष्ठ महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि पर सुबह करीब </span>4<span lang="hi" xml:lang="hi"> बजे मंदिर के दरवाजे खोले गए और इसके बाद गर्भगृह में पूजा-अर्चना शुरू हुई। इस दौरान भगवान महाकालेश्वर को चांदी का बेलपत्र</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">त्रिशूल और कई आभूषणों से सजाया गया। मंदिर के परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आईं। कहा जा रहा है कि आरती शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में भक्त मंदिर पहुंच चुके थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजमान देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। शुरुआती जानकारी से पता चला है कि जलाभिषेक के बाद पंचामृत से अभिषेक हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहद और फलों का रस शामिल था। फिर भांग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित फूलों से बाबा का श्रंगार किया गया। भस्म आरती के दौरान पूरे मंदिर में मंत्रोच्चार और घंटियों की आवाज गूंजती रही। बताया जा रहा है कि आरती के समय का माहौल बहुत भक्ति से भरा और शांत था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और श्रद्धालु लगातार </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">के नारे लगाते रहे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण से पहले पहली घंटाल बजाई गई और हरिओम का जल अर्पित करके विधिवत पूजा की गई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान महाकाल को रजत का शेषनाग मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">रजत मुण्डमाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस सुबह की आरती में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई भक्त नंदी महाराज के पास जाकर कान में अपनी मनोकामनाएं भी कहते नजर आए। सुबह होते-होते पूरा मंदिर भक्तों की भीड़ और जयकारों से गूंज उठा। उज्जैन में महाकाल आरती का ये नजारा देखने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर ज्येष्ठ माह में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 May 2026 10:35:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल भस्म आरती में दिखा महाकालेश्वर का दिव्य रूप, त्रिशूल-त्रिनेत्र से हुआ बाबा का श्रृंगार</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन महाकाल मंदिर में 21 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का त्रिशूल, त्रिनेत्र और त्रिपुंड से विशेष श्रृंगार किया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/divine-form-of-mahakaleshwar-seen-in-mahakal-bhasma-aarti-baba/article-53843"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/ujjain-mahakal-bhasma-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Ujjain Mahakal Bhasma Aarti:</strong> उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गुरुवार 21 मई की सुबह भक्ति और श्रद्धा का एक विशेष माहौल था। ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए और इसके बाद बाबा महाकाल की भस्म आरती शुरू हुई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें नजर आ रही थीं। कई भक्त तो रात से ही दर्शन के इंतज़ार में बैठे थे। महाकाल आरती के समय पूरा मंदिर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">'</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">' </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के नारे से गूंज उठा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शुरुआत में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में स्थित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। फिर दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बनाए गए पंचामृत से अभिषेक किया गया। मंदिर के अंदर मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच माहौल पूरी तरह से भक्तिमय बना रहा। बताया गया कि आज के विशेष श्रृंगार में भगवान महाकाल के मस्तक पर त्रिशूल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">त्रिनेत्र और त्रिपुंड अर्पित किए गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने श्रद्धालुओं का ध्यान खासतौर पर आकर्षित किया। भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित फूलों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण की प्रक्रिया से पहले पहले घंटाल बजाकर हरिओम का जल अर्पित किया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार के बीच भगवान का ध्यान किया गया और कपूर आरती हुई। परंपरा के अनुसार ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढकने के बाद भस्म लगाई गई। इसके बाद शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मूंडमाल और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। मंदिर प्रशासन के अनुसार सुबह की इस भस्म आरती में देश के विभिन्न हिस्सों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। कई भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी इच्छाएँ बताते नजर आए। मंदिर परिसर में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर विशेष इंतज़ाम किए गए थे। सुबह होते-होते पूरा परिसर श्रद्धालुओं से भर गया और हर तरफ केवल बाबा महाकाल के जयकारे सुनाई दे रहे थे। महाकाल आरती के दर्शन के लिए आए लोगों का कहना था कि तड़के होने वाली यह आरती आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यही वजह है कि रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 10:03:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकाल भस्म आरती में दिव्य श्रृंगार, त्रिनेत्र-त्रिपुंड से सजा बाबा का स्वरूप</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में 20 मई की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/babas-form-decorated-with-divine-makeup-trinetra-tripund-in-mahakal-bhasma/article-53809"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के बाबा महाकाल की भस्म आरती श्रद्धा और परंपरा के साथ संपन्न हुई। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए। उसके बाद गर्भगृह में विशेष पूजा शुरू हुई। सुबह-सुबह ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर के बाहर देखी गईं। भक्त दूर-दूर से बाबा महाकाल के दर्शन के लिए रात से ही मंदिर परिसर में जुटने लगे थे। इस बार की भस्म आरती में भगवान महाकाल को आकर्षक और दिव्य श्रृंगार किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारों से मंदिर परिसर गूंजता रहा।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के पुजारियों ने पहले गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। फिर भगवान महाकाल का जलाभिषेक हुआ। इसके बाद उन्हें दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया गया। मंदिर की पारंपरिक व्यवस्था के तहत भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से बाबा का श्रृंगार किया गया। मस्तक पर त्रिनेत्र</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">त्रिपुंड और चंद्र अर्पित किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसने श्रृंगार को और भी दिव्य बना दिया। ऐसा कहा जा रहा है कि आरती के दौरान गर्भगृह का दृश्य बेहद अलौकिक था। श्रद्धालु लगातार हाथ जोड़कर दर्शन करते रहे। कई लोग इस पल को अपने मोबाइल में कैद करने की कोशिश कर रहे थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन गर्भगृह के भीतर नियमों का पालन कराया गया।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण की प्रक्रिया शुरू होने से पहले मंदिर में प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढक कर भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। सुगंधित फूलों और आभूषणों से किया गया अलंकरण श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करता रहा। सुबह होते-होते मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में बदल गया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन भी किए और उनके कान में अपनी मनोकामनाएं कही। अधिकारियों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म आरती का आयोजन शांतिपूर्वक हुआ। मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए अतिरिक्त इंतजाम भी किए थे। उज्जैन में इस समय श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है और महाकाल मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 May 2026 10:01:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>19 मई महाकाल भस्म आरती में हुआ दिव्य श्रृंगार, भस्म, चंदन और रजत मुकुट से सजे बाबा महाकालेश्वर</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में 19 मई की भस्म आरती में बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार हुआ। श्रद्धालुओं ने जयकारों के बीच दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/baba-mahakaleshwar-adorned-with-ashes-sandalwood-and-silver-crown-was/article-53727"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Mahakal Bhasma Aarti: </strong>विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार 19 मई की सुबह भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर सुबह करीब 4 बजे मंदिर के दरवाजे खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और उसके बाद श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने लगी। भस्म आरती में भाग लेने के लिए भक्त देर रात से ही लाइन में खड़े दिखे। मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा की प्रक्रिया शुरू हुई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे पूरा माहौल शिवमय हो गया। खबर है कि इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालुओं ने भी आरती में भाग लेकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लिया।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंदिर के दरवाजे खुलते ही पुजारियों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर पंचामृत से अभिषेक हुआ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों का रस शामिल था। इसके अलावा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बाबा का विशेष श्रृंगार भांग</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से किया गया। आरती से पहले पहले घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">और मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढककर परंपरा के अनुसार भस्म अर्पित की गई। फिर शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और फूलों की माला भगवान को अर्पित की गई। गर्भगृह का दृश्य उस समय बेहद भव्य नजर आ रहा था। कई श्रद्धालु मोबाइल में इस पल को कैद करने की कोशिश में थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन सुरक्षा व्यवस्था के चलते गर्भगृह में खास नजर रखी गई।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह होते-होते मंदिर का परिसर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में डूब गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नंदी हॉल और सभा मंडप से बाबा महाकाल के दर्शन किए। श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं बताते हुए नजर आए। मंदिर परिसर में लगातार </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के नारों की गूंज सुनाई देती रही। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर खास इंतजाम किए गए थे ताकि श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो। उज्जैन में इन दिनों श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और सुबह की भस्म आरती में शामिल होने के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से बड़ी संख्या में बुकिंग हो रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 09:30:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाकाल की भस्म आरती में दिखा दिव्य रूप, चंद्र और फूलों से सजा भगवान महाकालेश्वर का दरबार</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकाल मंदिर में सोमवार तड़के भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/divine-form-seen-in-mahakals-bhasma-aarti-lord-mahakaleshwars-court/article-53636"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Mahakal Bhasma Aarti: </span></strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में सोमवार तड़के ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर बाबा महाकाल की भस्म आरती बड़े धूमधाम के साथ संपन्न हुई। सुबह करीब 4 बजे मंदिर के कपाट खोले गए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उसके बाद गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। पुजारियों ने भगवान महाकाल का जलाभिषेक करने के बाद दूध</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से अभिषेक किया। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं। कई भक्त तो भस्म आरती में शामिल होने के लिए देर रात से ही वहां पहुंच गए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">भस्म अर्पण से पहले मंदिर में पहले घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित कर मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का ध्यान किया गया। फिर कपूर आरती की गई और ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर पारंपरिक तरीके से भस्म रमाई गई। पुजारियों ने बाबा महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और सुगंधित फूल अर्पित किए। इस बार मस्तक पर चंद्र अर्पित कर विशेष फूलों से श्रृंगार किया गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिससे भक्तों का ध्यान आकर्षित हुआ। गर्भगृह का वातावरण मंत्रों और घंटियों की आवाज से गूंजता रहा। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु लगातार </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">“</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जय श्री महाकाल</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">” </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">के जयकारे लगाते रहे।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह की भस्म आरती में देशभर से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। कई भक्त नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। मंदिर प्रशासन के अनुसार आरती के दौरान सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। सावन और विशेष तिथियों की तरह इन दिनों भी महाकाल मंदिर में भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 09:39:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>17 मई महाकाल भस्म आरती: बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार, त्रिपुंड-त्रिनेत्र से सजा ज्योतिर्लिंग</title>
                                    <description><![CDATA[उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 17 मई की भस्म आरती विशेष श्रृंगार के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन किए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/17-may-mahakal-bhasma-aarti-baba-mahakals-supernatural-makeup-jyotirling/article-53562"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mahakal-bhasma-aarti.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Mahakal Bhasma Aarti:</strong> रविवार तड़के 17 मई को विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा पर बाबा महाकाल की भस्म आरती धूमधाम से हुई। सुबह लगभग 4 बजे जब मंदिर के कपाट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो गर्भगृह में भक्ति का माहौल बन गया। मंदिर परिसर में हर-हर महादेव और बाबा महाकाल के जयकारों की गूंज सुनाई देने लगी। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही दर्शन के लिए कतारों में खड़े थे। बताया जा रहा है कि सप्ताहांत होने के चलते आज मंदिर में सामान्य दिनों की अपेक्षा ज्यादा भीड़ थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जब मंदिर के पट खुले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पुजारियों ने सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं की पूजा की। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। फिर दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">घी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहद और फलों के रस से तैयार पंचामृत से भगवान का अभिषेक हुआ। पुजारियों ने भांग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चंदन और सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य श्रृंगार किया। बाबा महाकाल को त्रिपुंड और त्रिनेत्र अर्पित कर एक आकर्षक स्वरूप दिया गया। भस्म आरती से पहले घंटे की पहली ध्वनि गूंजी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हरिओम का जल अर्पित करते हुए वैदिक मंत्रों के बीच पूजा संपन्न हुई। कपूर आरती के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढककर विधिपूर्वक भस्म लगाई गई। इसके बाद भगवान को शेषनाग का रजत मुकुट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रजत की मुण्डमाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुद्राक्ष की माला और रंग-बिरंगे पुष्प अर्पित किए गए। गर्भगृह का दृश्य बेहद अलौकिक नजर आ रहा था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुबह होते-होते मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से भर गया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर पुण्य की प्राप्ति की। कई श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। मंदिर में लगातार घंटियों की आवाज़ और शिव भजनों के बीच भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया। अधिकारियों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्शन व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए अतिरिक्त कर्मचारी भी तैनात किए गए थे। भस्म आरती के दौरान सुरक्षा का भी खास ख्याल रखा गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं ने कहा कि बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन से मन को शांति मिली और पूरा वातावरण शिवमय हो गया।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 10:45:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महाकाल मंदिर में मासूम की आस्था देख पिघला दिल, 8 साल के बच्चे को मिली स्पेशल एंट्री</title>
                                    <description><![CDATA[दर्शन न होने पर रो पड़ा बच्चा, मंदिर समिति ने चांदी द्वार से कराए विशेष दर्शन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/heart-melted-after-seeing-the-faith-of-innocent-child-in/article-51210"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-news-(41).jpg" alt=""></a><br /><p>उज्जैन स्थित <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">महाकालेश्वर मंदिर</span></span> में एक भावुक कर देने वाली घटना सामने आई, जहां एक 8 वर्षीय बच्चे की सच्ची भक्ति ने मंदिर प्रशासन का दिल पिघला दिया। दर्शन न हो पाने पर रो पड़े इस मासूम को बाद में विशेष व्यवस्था के तहत चांदी द्वार से भगवान महाकाल के दर्शन कराए गए।</p>
<p>मंगलवार दोपहर सीहोर से आई शिल्पी अपने छोटे भाई अगस्त गुप्ता के साथ मंदिर पहुंची थीं। बैरिकेड से दर्शन के दौरान बच्चे की इच्छा पूरी नहीं हो सकी। बाबा महाकाल को जल अर्पित करने की उसकी तीव्र इच्छा अधूरी रह गई, जिससे वह भावुक होकर रोने लगा।</p>
<p>मंदिर परिसर में मौजूद प्रबंधन समिति के अधिकारियों ने जब बच्चे की आस्था देखी, तो तत्काल विशेष व्यवस्था की गई। उसे चांदी द्वार तक ले जाया गया, जहां उसने विधिवत भगवान को जल अर्पित किया और करीब से दर्शन किए।</p>
<p>दर्शन के बाद बच्चा नंदी हॉल में बैठकर भक्ति में लीन नजर आया। वह कभी मंत्र जप करता दिखा तो कभी हाथ जोड़कर भगवान को निहारता रहा। उसकी भावनाओं को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने उसे महाकाल का दुपट्टा पहनाकर सम्मानित भी किया।</p>
<p>मंदिर प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करना उनकी प्राथमिकता है। विशेष परिस्थितियों में ऐसे निर्णय लिए जाते हैं, जिससे भक्तों को संतोष मिल सके।</p>
<p>महाकालेश्वर मंदिर में रोजाना हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। भीड़ के चलते कई बार सभी को संतोषजनक दर्शन नहीं मिल पाते, लेकिन इस तरह की घटनाएं व्यवस्था में मानवीय पहलू को भी सामने लाती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 11:51:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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