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                <title>Promotion Rules - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Promotion Rules RSS Feed</description>
                
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                <title>मध्य प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया फिर होगी शुरू, सरकार ने सभी विभागों को दिए तैयारी के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[सामान्य प्रशासन विभाग ने महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर सभी विभागों को पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए, हालांकि सभी प्रमोशन अदालत के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/promotion-process-will-start-again-in-madhya-pradesh-government-has/article-57451"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mp-promotion-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत भरी खबर सामने आई है। करीब एक दशक से विभिन्न कानूनी कारणों और न्यायालय में लंबित मामलों के चलते रुकी हुई पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया अब दोबारा शुरू होने की दिशा में बढ़ती दिखाई दे रही है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने सोमवार को राज्य के सभी अपर मुख्य सचिवों, विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों को पत्र जारी कर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। विभागों को यह कार्रवाई महाधिवक्ता की कानूनी राय के आधार पर करने के लिए कहा गया है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि दिए जाने वाले सभी प्रमोशन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। राज्य सरकार के इस फैसले को लंबे समय से प्रमोशन की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। कई विभागों में वर्षों से पदोन्नति नहीं होने के कारण अधिकारी एक ही पद पर लंबे समय से कार्यरत हैं। इसका असर न केवल कर्मचारियों के करियर पर पड़ा, बल्कि विभागों की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई। अब सरकार के ताजा निर्देशों के बाद विभागीय स्तर पर पदोन्नति समितियों (DPC) की बैठकें बुलाने की तैयारी शुरू होने की संभावना है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र में बताया गया है कि मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को लेकर न्यायालय में कई याचिकाएं लंबित हैं। इन मामलों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने महाधिवक्ता से कानूनी राय प्राप्त की थी। महाधिवक्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन की राय सरकार को भेजी, जिसके आधार पर विभागों को आगे की कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। कानूनी राय में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में हाईकोर्ट ने पदोन्नति नियम-2025 पर किसी प्रकार की अंतरिम रोक (स्टे) नहीं लगाई है। पहले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से प्रमोशन नहीं करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह न्यायालय के आदेश का हिस्सा नहीं था और न ही किसी आधिकारिक न्यायिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया। कानूनी विशेषज्ञों का मत है कि अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं और मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए जाएगा। ऐसे में सरकार अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए पदोन्नति प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि कानूनी राय में यह भी कहा गया है कि सभी पदोन्नतियां न्यायालय के अंतिम फैसले के अधीन रहेंगी। इसका मतलब यह है कि यदि भविष्य में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का निर्णय अलग आता है, तो सरकार को उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई करनी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ओर प्रशासनिक कार्यों को सुचारु बनाए रखना है, वहीं दूसरी ओर न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान भी सुनिश्चित करना है। सरकार ने अपने पक्ष में यह भी कहा है कि लंबे समय से प्रमोशन नहीं होने के कारण कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। अनेक विभाग अपनी स्वीकृत क्षमता के मुकाबले लगभग 40 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ काम कर रहे हैं। वरिष्ठ पद रिक्त होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और निचले स्तर पर नई भर्तियां भी समय पर नहीं हो पा रही हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> यदि पदोन्नति प्रक्रिया समय पर पूरी होती है तो इसका सकारात्मक असर पूरे प्रशासनिक ढांचे पर दिखाई देगा। वरिष्ठ पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति होने से विभागों की कार्यक्षमता बढ़ेगी और खाली पदों पर नई भर्ती का रास्ता भी साफ होगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं। राज्य के कर्मचारी संगठनों ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि कई अधिकारी और कर्मचारी पिछले आठ से दस वर्षों से प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं। पदोन्नति नहीं मिलने के कारण न केवल उनका वेतन और सेवा लाभ प्रभावित हुए, बल्कि मनोबल पर भी असर पड़ा। संगठनों का कहना है कि यदि न्यायालय की शर्तों का पालन करते हुए प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो इससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। अब सभी विभागों की नजर सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के बाद होने वाली विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकों पर रहेगी। माना जा रहा है कि विभाग अपने-अपने स्तर पर पात्र कर्मचारियों की वरिष्ठता सूची, सेवा अभिलेख और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का परीक्षण शुरू करेंगे। इसके बाद डीपीसी की अनुशंसा के आधार पर पदोन्नति आदेश जारी किए जा सकते हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी आदेश न्यायालय के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। यदि भविष्य में अदालत कोई अलग निर्देश देती है तो उसी के अनुसार संशोधित कार्रवाई की जाएगी। इसलिए कर्मचारियों को प्रमोशन मिलने के बावजूद अंतिम कानूनी स्थिति का इंतजार करना पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 18:04:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मध्यप्रदेश पदोन्नति नियमों पर आज अहम बैठक, विरोध तेज</title>
                                    <description><![CDATA[20 विभागों के अधिकारियों के साथ जीएडी करेगा मंथन, SPEAK संगठन ने नियमों को जल्दबाजी बताते हुए जताया विरोध]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/important-meeting-today-on-madhya-pradesh-promotion-rules-protest-intensifies/article-57294"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/bhopal-double-murder-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मध्यप्रदेश में लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सोमवार को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) मंत्रालय में 20 विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक करने जा रहा है। इस बैठक में सरकार पदोन्नति नियमों को लेकर अपना रुख स्पष्ट करेगी और आगे की प्रक्रिया पर रणनीति तय करने की कोशिश करेगी। एक साल पहले जारी इन नियमों पर अभी तक हाईकोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन सरकार अब प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। बैठक में 20 प्रमुख विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव और विभागाध्यक्षों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उप सचिव स्तर के अधिकारियों को बैठक में भेजें। बैठक की अध्यक्षता सामान्य प्रशासन विभाग के अपर सचिव करेंगे। माना जा रहा है कि इसमें नियम-5 के तहत X और Y श्रेणी के निर्धारण को लेकर विस्तृत चर्चा की जाएगी, जो पदोन्नति ढांचे का अहम हिस्सा है।बैठक में उन संवर्गों पर खास फोकस रहेगा जिनमें X और Y की संख्या 0 या 1 तय की जानी है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए पदों की गणना और आरक्षण के प्रावधानों पर भी अधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी जाएगी। यह पूरा ढांचा पदोन्नति प्रक्रिया को नया स्वरूप देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, लेकिन इसे लेकर विभिन्न वर्गों में असंतोष भी बढ़ता जा रहा है। इस बीच सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी-कर्मचारी संस्था (SPEAK) ने सरकार के इस कदम का कड़ा विरोध किया है। संस्था का कहना है कि न्यायालय में मामला लंबित रहते हुए इस तरह नियमों को आगे बढ़ाना जल्दबाजी होगी और इससे कर्मचारियों के हित प्रभावित हो सकते हैं। संस्था के अध्यक्ष डॉ. के.एस. तोमर ने कहा कि सरकार को पहले कोर्ट का अंतिम निर्णय आने तक इंतजार करना चाहिए था।</p>
<p style="text-align:justify;">SPEAK संगठन का आरोप है कि यदि नए नियम केवल 2025 से लागू किए जाते हैं तो 2016 से अब तक पदोन्नति से वंचित रहे कर्मचारियों और इस दौरान सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों के अधिकारों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। संगठन का कहना है कि यह मुद्दा केवल वर्तमान कर्मचारियों का नहीं है, बल्कि एक लंबी अवधि से प्रभावित हजारों कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। 2016 से प्रदेश में पदोन्नति प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है, जिससे प्रशासनिक ढांचे में असंतुलन की स्थिति बन गई है। सरकार इस समस्या को हल करने के लिए नए नियमों को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन विवादित प्रावधानों को लेकर सहमति बनाना आसान नहीं दिख रहा है। SPEAK संगठन ने वरिष्ठता निर्धारण, कॉमन विचारण सूची, आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को अनारक्षित पदों पर भी विचार करने, प्रतीक्षा सूची और बैकलॉग पदों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने जैसे प्रावधानों पर भी गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि इन प्रावधानों से सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों के अवसर सीमित हो सकते हैं और यह संतुलन को प्रभावित करेगा। पदोन्नति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और वर्षों से लंबित मामलों को सुलझाने के लिए नए नियम जरूरी हैं। प्रशासनिक स्तर पर यह भी माना जा रहा है कि यदि जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो विभागों में कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 14:26:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला: कर्मचारियों का प्रमोशन कोई मौलिक अधिकार नहीं, CMO और RI का रास्ता साफ</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रमोशन किसी कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-high-courts-decision-promotion-of-employees-is-not-a/article-49105"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/chhattisgarh-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जो नगरीय प्रशासन विभाग के लिए दिशानिर्देश स्वरूप है। जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि किसी कर्मचारी के लिए पदोन्नति हासिल करना कोई मौलिक अधिकार नहीं है। इस फैसले के साथ ही 2017 के भर्ती नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजस्व निरीक्षक को मुख्य नगर पालिका अधिकारी पद की दौड़ में शामिल करना संवैधानिक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजस्व निरीक्षकों को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) क्लास-बी के पद पर पदोन्नति के लिए पात्र मानना पूरी तरह से संवैधानिक है। यह किसी भी कर्मचारी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं करता। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि सिविल पदों पर कार्यरत अधिकारी और नगरपालिका सेवक के बीच समानता का हनन हो रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पदोन्नति नीतिगत निर्णय के अंतर्गत आता है</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कोर्ट ने कहा कि पदोन्नति के लिए फीडर कैडर तय करना और अलग-अलग पदों की समकक्षता निर्धारित करना पूरी तरह से कार्यपालिका और सरकार के नीतिगत निर्णय के दायरे में आता है। कर्मचारियों को केवल यह अधिकार है कि नियमों के अनुसार उन्हें पदोन्नति के लिए विचार किया जाए</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रमोशन हासिल करना उनका निहित अधिकार नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अनुभव में छूट देना अवैध नहीं</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के उस आदेश को भी सही ठहराया</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसमें राजस्व निरीक्षकों के लिए अनुभव की अनिवार्य अवधि 6 साल से घटाकर 5 साल की गई थी। यह एक वन टाइम रियायत थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिसे अधिकारियों की कमी और जनहित को देखते हुए लागू किया गया था। कोर्ट ने कहा कि इसे अवैध नहीं ठहराया जा सकता।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">याचिकाएं खारिज</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नई सुनवाई</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने यह साबित नहीं किया कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है या नियम असंवैधानिक हैं। इसलिए सभी याचिकाएं निराधार पाई गईं और खारिज कर दी गईं। यह मामला पहले भी हाईकोर्ट में सुना गया था और तब प्रावधानों को अवैध घोषित किया गया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर 2025 को आदेश दिया कि मामला नए सिरे से सुनवाई के लिए हाईकोर्ट में लौटाया जाए। अब डिवीजन बेंच का नया निर्णय आया है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 13:18:46 +0530</pubDate>
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