<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/us-iran-talks/tag-5341" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>US Iran talks - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/5341/rss</link>
                <description>US Iran talks RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कतर में अमेरिका-ईरान वार्ता तेज, जमी संपत्ति और MoU क्रियान्वयन पर अहम चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[दोहा में अप्रत्यक्ष वार्ता के दौरान जमी संपत्ति, हॉटलाइन व्यवस्था, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय सुरक्षा समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a463522a604b/article-57668"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/america-iran-talks.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर अहम अप्रत्यक्ष वार्ता हुई, जिसमें दोनों देशों के बीच पहले हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के क्रियान्वयन, ईरान की जमी हुई संपत्तियों के उपयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। यह बैठक ऐसे समय हुई है जब पश्चिम एशिया में लगातार तनाव बना हुआ है और दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने की कोशिशें जारी हैं। बातचीत में प्रत्यक्ष रूप से अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधि आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के जरिए संवाद आगे बढ़ाया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों ने वार्ता जारी रखने पर सहमति जताई है और कई प्रस्तावों पर आगे भी विचार किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार, उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने बताया कि इस दौर की बातचीत समाप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान समझौते के पालन की निगरानी के लिए एक विशेष संचार व्यवस्था यानी हॉटलाइन स्थापित करने पर भी चर्चा हुई। प्रस्ताव है कि गुरुवार तक ऐसी प्रणाली तैयार की जाए जिसके जरिए यदि किसी भी पक्ष की ओर से MoU का उल्लंघन होता है तो उसकी जानकारी तुरंत साझा की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था भविष्य में विवादों को बढ़ने से रोकने और संवाद को जारी रखने में मददगार साबित हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक का सबसे अहम विषय ईरान की विदेशों में जमी हुई संपत्ति रहा। कतर में रखी गई ईरान की अरबों डॉलर की राशि के उपयोग को लेकर दोनों पक्षों के बीच विस्तार से बातचीत हुई। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि इस राशि का इस्तेमाल सीधे नकद भुगतान के बजाय आवश्यक वस्तुओं की खरीद के लिए किया जाएगा। इन वस्तुओं को बाद में ईरान भेजा जाएगा ताकि प्रतिबंधों के बीच भी जरूरी जरूरतें पूरी की जा सकें। बताया गया कि शुरुआती छह अरब डॉलर की राशि में से एक हिस्से के उपयोग के तौर-तरीकों पर भी कतर के अधिकारियों और वहां के केंद्रीय बैंक के साथ चर्चा हुई। ईरान का कहना है कि वह इस धनराशि का इस्तेमाल मानवीय जरूरतों और जरूरी सामान की खरीद तक सीमित रखना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वार्ता के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि अमेरिका और ईरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई। सभी संदेश और प्रस्ताव मध्यस्थ देशों के माध्यम से साझा किए गए। कतर लंबे समय से दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इस बार पाकिस्तान की भी मध्यस्थता में भागीदारी रही, जिससे वार्ता को आगे बढ़ाने में मदद मिली। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्यक्ष बातचीत भले ही नहीं हुई हो, लेकिन अप्रत्यक्ष संवाद भी दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दोहा में हुई बैठकों के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच त्रिपक्षीय बैठक में लेबनान की स्थिति, इजरायल की सैन्य गतिविधियों और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े हालात पर विस्तार से विचार किया गया। ईरान ने आरोप लगाया कि लेबनान में इजरायल की सैन्य मौजूदगी समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन में बाधा बन रही है। इसके साथ ही ईरान ने दोहराया कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान और ओमान की संप्रभुता है और इस क्षेत्र से जुड़े किसी भी निर्णय में उनकी भूमिका सर्वोपरि रहनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में ओमान की ओर से दिए गए नए प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और जहाजों की आवाजाही को लेकर भविष्य की रणनीति पर बातचीत जारी रहेगी। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल अब अपने-अपने देशों में इस प्रस्ताव का अध्ययन करेंगे और आवश्यक परामर्श के बाद अगली बैठक में अपना रुख स्पष्ट करेंगे। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां किसी भी प्रकार का तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार को प्रभावित कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ईरान ने वार्ता के दौरान यह भी मांग रखी कि MoU के पांच प्रमुख प्रावधानों को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जाए। अधिकारियों का कहना है कि समझौते के सभी बिंदुओं पर समान गति से काम होना जरूरी है ताकि किसी भी पक्ष को असंतोष का मौका न मिले। दूसरी ओर, अमेरिकी पक्ष की ओर से सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन माना जा रहा है कि वह भी चरणबद्ध तरीके से समझौते को आगे बढ़ाने के पक्ष में है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि दोहा में हुई यह वार्ता भविष्य की कूटनीतिक प्रक्रिया के लिए अहम साबित हो सकती है। हालांकि अभी कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं, लेकिन बातचीत जारी रहने की सहमति अपने आप में एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यदि जमी हुई संपत्तियों के उपयोग, हॉटलाइन व्यवस्था और समझौते के अन्य प्रावधानों पर ठोस प्रगति होती है तो इससे दोनों देशों के संबंधों में कुछ हद तक नरमी आ सकती है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a463522a604b/article-57668</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a463522a604b/article-57668</guid>
                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 16:06:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/america-iran-talks.jpg"                         length="120193"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान में US-ईरान बातचीत पर असमंजस, आमने-सामने वार्ता पर मतभेद</title>
                                    <description><![CDATA[US-ईरान बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत, पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका में; बैठक पर अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज है, लेकिन तस्वीर अब भी साफ नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/confusion-over-us-iran-talks-in-pakistan-disagreement-over-face-to-face-talks/article-52061"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/us-iran-talks-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर स्थिति उलझी हुई नजर आ रही है। एक ओर अमेरिका सीधे संवाद की उम्मीद जता रहा है, वहीं ईरान ने साफ संकेत दिया है कि वह आमने-सामने वार्ता के बजाय पाकिस्तान के जरिए अपनी बात रखेगा। इसी बीच दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं, जिससे कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।</p>
<p>ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुके हैं, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के भी पहुंचने की संभावना जताई गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पहले दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी और क्षेत्रीय तनाव लगातार बना हुआ है।</p>
<p>हालांकि, दोनों पक्षों के बयानों में स्पष्ट विरोधाभास दिख रहा है। अमेरिका का कहना है कि वह सीधे शांति वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन ईरान ने इसे खारिज करते हुए कहा है कि कोई औपचारिक बैठक तय नहीं है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि बातचीत की प्रक्रिया अभी शुरुआती और अनिश्चित चरण में है।</p>
<h5><span><strong>बातचीत पर मतभेद</strong></span></h5>
<p>अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह पाकिस्तान में ईरान के साथ सीधी बातचीत कर सकता है। इसके लिए विशेष दूतों को भेजा गया है।</p>
<p>वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय ने अलग रुख अपनाते हुए कहा है कि वह सीधे अमेरिका से बातचीत नहीं करेगा। ईरान की ओर से कहा गया है कि उसकी बातें पाकिस्तान के अधिकारियों के जरिए साझा की जाएंगी।</p>
<p>इस रुख से यह साफ होता है कि बातचीत अगर होती भी है, तो वह अप्रत्यक्ष रूप में हो सकती है, जिसमें पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।</p>
<h5><span><strong>पहला दौर रहा बेनतीजा</strong></span></h5>
<p>इससे पहले अप्रैल के मध्य में पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी, जो करीब 21 घंटे चली लेकिन किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।</p>
<p>मुख्य विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है। अमेरिका चाहता है कि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित और निर्बाध रहे, जबकि ईरान इस पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की मांग करता रहा है। ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह इसे बंद नहीं करेगा।</p>
<h5><span><strong>बढ़ता क्षेत्रीय तनाव</strong></span></h5>
<p>इसी दौरान क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अमेरिकी नौसेना ने हाल ही में एक ईरानी झंडे वाले जहाज को रोकने की कार्रवाई की। यह कदम समुद्री सुरक्षा और प्रतिबंधों के पालन के तहत उठाया गया बताया गया है।</p>
<p>दूसरी ओर, ईरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को लेकर दावा किया है कि वह अब देश में ही बड़ी संख्या में हथियारों का उत्पादन कर रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष दबाव की रणनीति भी साथ-साथ अपना रहे हैं।</p>
<h5><span><strong>आंतरिक मतभेद भी असरदार</strong></span></h5>
<p>ईरान के भीतर भी बातचीत को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ रहे हैं। कुछ नेता बातचीत में लचीलापन दिखाने के पक्ष में हैं, जबकि कट्टर रुख रखने वाला धड़ा किसी भी समझौते के खिलाफ है। वार्ता टीम में बदलाव की चर्चा भी चल रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान के भीतर रणनीति को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं है।फिलहाल नजर इस बात पर टिकी है कि पाकिस्तान में दोनों पक्षों के बीच किसी तरह का संवाद स्थापित हो पाता है या नहीं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/confusion-over-us-iran-talks-in-pakistan-disagreement-over-face-to-face-talks/article-52061</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/confusion-over-us-iran-talks-in-pakistan-disagreement-over-face-to-face-talks/article-52061</guid>
                <pubDate>Sat, 25 Apr 2026 11:06:36 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/us-iran-talks-%281%29.jpg"                         length="169028"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इजरायल की हिट लिस्ट से ईरान के विदेश मंत्री अराघची और गालिबाफ बाहर, रिपोर्ट में खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाग़ेर ग़ालिबाफ़ को हिट लिस्ट से हटा दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/foreign-minister-araghchi-and-ghalibaf-out-of-israels-hit-list/article-49149"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/israel-iran-war-(1)1.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Israel Iran War:</strong> मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और सैन्य टकराव के बीच एक नई कूटनीतिक हलचल सामने आई है। एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इजरायल ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाग़ेर ग़ालिबाफ़ को अपनी टारगेट लिस्ट से अस्थायी तौर पर हटा दिया है। इस घटनाक्रम को क्षेत्र में संभावित बातचीत की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका के जरिए कूटनीतिक पहल</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रिपोर्ट के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह फैसला सीधे तौर पर किसी एक देश के दबाव का परिणाम नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि व्यापक कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है। बताया गया है कि अमेरिका के जरिए यह संदेश इजरायल तक पहुंचाया गया कि यदि इन प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया गया तो बातचीत की संभावनाएं खत्म हो सकती हैं। इसी वजह से फिलहाल इन दोनों नेताओं को निशाने से दूर रखने का निर्णय लिया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीमित अवधि के लिए राहत</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के अनुसार यह राहत स्थायी नहीं है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बल्कि केवल कुछ दिनों के लिए दी गई है। बताया जा रहा है कि चार से पांच दिनों की इस अवधि में अमेरिका ईरान के साथ बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है। अराघची को परमाणु वार्ताओं का अनुभवी चेहरा माना जाता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जबकि ग़ालिबाफ़ को भी संभावित संवाद के लिए महत्वपूर्ण कड़ी समझा जा रहा है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जंग के बीच नेतृत्व पर हमले</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी सामने आया है कि मौजूदा संघर्ष के दौरान इजरायल ने ईरान के कई वरिष्ठ नेताओं को निशाना बनाया है। नेतृत्व स्तर पर हुए इन हमलों ने हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व की ओर से भी यह संकेत दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर ऐसे कदम आगे भी उठाए जा सकते हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि फिलहाल कूटनीति को मौका देने की कोशिश की जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मध्यस्थ देशों की भूमिका</span></strong></p>
<p><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तुर्की</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मिस्र और पाकिस्तान जैसे देश इस समय अमेरिका और ईरान के बीच संवाद बहाल करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इन देशों का मानना है कि यदि बातचीत की प्रक्रिया शुरू होती है तो क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम किया जा सकता है। यही कारण है कि प्रमुख नेताओं को अस्थायी राहत देने को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/foreign-minister-araghchi-and-ghalibaf-out-of-israels-hit-list/article-49149</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/foreign-minister-araghchi-and-ghalibaf-out-of-israels-hit-list/article-49149</guid>
                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 18:48:11 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/israel-iran-war-%281%291.jpg"                         length="135925"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        