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                <title>auto stocks - दैनिक जागरण</title>
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                <title>सेंसेक्स में 200 अंक की गिरावट, आईटी और ऑटो शेयरों में बिकवाली से बाजार दबाव में</title>
                                    <description><![CDATA[सप्ताह के पहले कारोबारी दिन घरेलू शेयर बाजार कमजोर शुरुआत के साथ कारोबार करता दिखा। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे, जबकि आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-falls-by-200-points-market-under-pressure-due-to/article-57374"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/nifty-today.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स करीब 200 अंक तक फिसलकर 76,550 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी करीब 50 अंक की गिरावट के साथ 23,900 के स्तर पर बना रहा। बाजार खुलते ही निवेशकों ने मुनाफावसूली का रुख अपनाया, जिसका असर प्रमुख सूचकांकों के साथ कई बड़े सेक्टरों पर भी दिखाई दिया। खास तौर पर आईटी और ऑटो कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। कारोबार की शुरुआत में निवेशकों की नजर घरेलू और वैश्विक संकेतों पर रही। पिछले कुछ दिनों से बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है और निवेशक किसी भी बड़े निवेश से पहले सतर्क नजर आ रहे हैं। शुरुआती कारोबार में कई दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। इसके अलावा ऑटो सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के दिनों में जिन शेयरों में अच्छी तेजी आई थी, उनमें निवेशकों ने मुनाफावसूली की, जिससे प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि सभी सेक्टरों में एक जैसी स्थिति नहीं रही। कुछ चुनिंदा शेयरों में खरीदारी भी देखने को मिली, लेकिन उसका असर बाजार की समग्र दिशा बदलने के लिए पर्याप्त नहीं था। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में सीमित दायरे में कारोबार होता रहा, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मिश्रित रुख देखने को मिला। निवेशकों का फोकस फिलहाल आगामी आर्थिक आंकड़ों, कंपनियों के तिमाही नतीजों और वैश्विक बाजारों से मिलने वाले संकेतों पर बना हुआ है। वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशियाई शेयर बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। निक्केई में करीब 0.93 प्रतिशत और कोस्पी में लगभग 0.69 प्रतिशत की मजबूती दर्ज की गई। दूसरी ओर हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स कमजोरी के साथ कारोबार करता नजर आया और इसमें करीब 0.93 प्रतिशत की गिरावट रही। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित रुख का असर भी भारतीय बाजार की शुरुआत पर देखने को मिला, जहां निवेशकों ने सतर्कता बरतना बेहतर समझा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिकी शेयर बाजार से हालांकि सकारात्मक संकेत मिले थे। पिछले कारोबारी सत्र में डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज, नैस्डैक और एसएंडपी 500 तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। नैस्डैक में दो प्रतिशत से अधिक की तेजी रही, जबकि डाउ जोन्स और एसएंडपी 500 में भी अच्छी बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों की मजबूती के बावजूद घरेलू बाजार में उसका सकारात्मक असर सीमित रहा। इसकी एक बड़ी वजह घरेलू स्तर पर जारी मुनाफावसूली और विदेशी निवेशकों की बिकवाली मानी जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रही हैं। हाल के सात कारोबारी दिनों में विदेशी निवेशकों ने करीब 2,810 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है। वहीं पिछले 30 दिनों के दौरान भी विदेशी निवेशकों की ओर से 46 हजार करोड़ रुपये से अधिक की निकासी दर्ज की गई है। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार खरीदारी कर रहे हैं। पिछले सात दिनों में उन्होंने 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक और बीते एक महीने में लगभग 79 हजार करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं। घरेलू निवेशकों की यह खरीदारी बाजार को बड़े स्तर पर गिरने से रोकने में सहायक साबित हो रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पिछले कारोबारी सत्र में भी बाजार दबाव में रहा था। सेंसेक्स 372 अंक की गिरावट के साथ 76,728 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी 110 अंक टूटकर 23,946 के स्तर पर आ गया था। लगातार दूसरे कारोबारी दिन बाजार में कमजोरी बने रहने से निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ी है। यह गिरावट व्यापक घबराहट की नहीं बल्कि सामान्य उतार-चढ़ाव का हिस्सा है। निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और मजबूत कंपनियों में लंबी अवधि के नजरिए से निवेश बनाए रखना चाहिए। आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का असर बाजार की दिशा पर साफ दिखाई देगा। यदि विदेशी निवेशकों की बिकवाली कम होती है और घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है तो बाजार में स्थिरता लौट सकती है। वहीं किसी भी बड़े वैश्विक घटनाक्रम या आर्थिक आंकड़े का असर भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 11:20:52 +0530</pubDate>
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                <title>शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1000 अंक टूटा; निफ्टी 23,000 के करीब</title>
                                    <description><![CDATA[ऑटो और बैंकिंग शेयरों में बिकवाली, वैश्विक संकेतों और क्रूड कीमतों ने बढ़ाया दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/heavy-fall-in-stock-market-sensex-fell-by-1000-points/article-49211"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p> शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।आज27 मार्च को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 1000 अंक टूटकर 74,300 के स्तर पर आ गया, जबकि निफ्टी भी 300 अंक गिरकर 23,000 के आसपास कारोबार करता दिखा। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है और इसे ट्रेंडिंग न्यूज इंडिया में प्रमुखता से देखा जा रहा है।</p>
<p>बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से ऑटो और बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली के कारण आई। सेंसेक्स के 30 में से 25 शेयर लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जिससे साफ संकेत मिलता है कि बिकवाली व्यापक स्तर पर रही। निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए मुनाफावसूली का रास्ता चुना।</p>
<p>विश्लेषकों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेतों का भी भारतीय बाजार पर सीधा असर पड़ा है। एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान और दक्षिण कोरिया के प्रमुख सूचकांकों में गिरावट रही, जबकि हांगकांग और चीन के बाजार हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। यह अस्थिरता वैश्विक निवेशकों की अनिश्चितता को दर्शाती है।</p>
<p>वहीं, अमेरिकी बाजारों में भी पिछले कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी। प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए, जिसका असर आज भारतीय बाजार में खुलते ही दिखा। वैश्विक स्तर पर निवेशकों की सतर्कता और जोखिम से बचने की रणनीति ने घरेलू बाजार पर दबाव बनाया।</p>
<p>कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी बाजार की दिशा तय करने वाला अहम कारक बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 99 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। ऊर्जा कीमतों में इस तरह की अस्थिरता से महंगाई और कंपनियों के लागत ढांचे पर असर पड़ता है, जिससे निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है।</p>
<p>पिछले कारोबारी सत्र पर नजर डालें तो बाजार में मजबूती देखने को मिली थी। छुट्टी से पहले हुए सत्र में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अच्छी बढ़त दर्ज की गई थी। हालांकि, आज का रुख बताता है कि बाजार फिलहाल स्थिर नहीं है और छोटी अवधि में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।</p>
<p>बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, क्रूड ऑयल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर नजर रखनी होगी। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल है और निवेशकों को सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 11:15:32 +0530</pubDate>
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