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                <title>financial news - दैनिक जागरण</title>
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                <description>financial news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शेयर बाजार में जोरदार वापसी, सेंसेक्स 500 अंक चढ़ा; निफ्टी 24,150 के पार</title>
                                    <description><![CDATA[सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में खरीदारी का माहौल दिखा। IT और ऑयल एंड गैस शेयरों में तेजी से सेंसेक्स 77,300 के करीब पहुंचा, जबकि निफ्टी में भी 150 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a38cae5b4995/article-56611"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की। पिछले कारोबारी सत्र में आई भारी गिरावट के बाद निवेशकों की वापसी देखने को मिली और बाजार में चौतरफा खरीदारी का माहौल बना रहा। शुरुआती कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 500 अंक की तेजी के साथ 77,300 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंक मजबूत होकर 24,150 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT और ऑयल एंड गैस सेक्टर के शेयरों में देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और विदेशी निवेशकों की खरीदारी ने घरेलू बाजार को सहारा दिया है। पिछले कुछ दिनों से बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ था, लेकिन सोमवार को निवेशकों का भरोसा लौटता दिखाई दिया। बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। कारोबार के शुरुआती घंटों में कई दिग्गज IT कंपनियों के शेयर हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। इसके अलावा तेल और गैस क्षेत्र की कंपनियों में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी। माना जा रहा है कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा बाजार में स्थिरता और घरेलू मांग के सकारात्मक संकेतों ने इन शेयरों को समर्थन दिया है। बैंकिंग और ऑटो सेक्टर में भी सीमित लेकिन सकारात्मक बढ़त दर्ज की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एशियाई बाजारों की बात करें तो सोमवार को वहां मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। जापान का निक्केई सूचकांक मजबूत बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी भी हरे निशान में रहा और निवेशकों का उत्साह देखने को मिला। हालांकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में रहा और उसमें गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों के इस मिश्रित प्रदर्शन के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई, जिसे घरेलू निवेशकों के भरोसे का संकेत माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक बाजारों से भी भारतीय निवेशकों को सकारात्मक संकेत मिले हैं। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजार बढ़त के साथ बंद हुए थे। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में मामूली तेजी दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में मजबूत उछाल देखने को मिला। तकनीकी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से अमेरिकी बाजारों को सहारा मिला था। इसका असर सोमवार को एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी देखने को मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">बाजार विशेषज्ञों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शुक्रवार को एफआईआई ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 4,859 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। यह आंकड़ा निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। हालांकि पिछले 30 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की कुल निकासी अभी भी अधिक बनी हुई है, लेकिन हाल के दिनों में उनकी खरीदारी ने बाजार को राहत दी है। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनी हुई है। पिछले कुछ महीनों में घरेलू निवेशकों ने बाजार में लगातार निवेश किया है, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार को स्थिरता मिली है। म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों की ओर से लगातार निवेश बाजार के लिए मजबूत आधार तैयार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोमवार की तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। शुक्रवार को सेंसेक्स करीब 607 अंक टूटकर 76,802 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी भी 154 अंक गिरकर 24,013 के स्तर पर आ गया था। उस गिरावट के बाद निवेशकों में कुछ चिंता देखी जा रही थी, लेकिन सप्ताह की शुरुआत में आई तेजी ने बाजार की धारणा को बेहतर किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कई महत्वपूर्ण आर्थिक संकेतकों और वैश्विक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां, विदेशी निवेशकों का रुख और मानसून की प्रगति जैसे कारक बाजार की दिशा तय कर सकते हैं। इसके अलावा कंपनियों के तिमाही नतीजों को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने लगी है। छोटे और मझोले शेयरों में भी सोमवार को सकारात्मक रुझान देखने को मिला। कई सेक्टरों में खरीदारी का दायरा बढ़ा, जिससे व्यापक बाजार को मजबूती मिली। हालांकि विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल तेजी देखकर निवेश के फैसले न लें और कंपनियों की बुनियादी स्थिति का मूल्यांकन जरूर करें।  सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ शुरुआत की है। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में आई बढ़त ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। विदेशी निवेशकों की खरीदारी, वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेत और चुनिंदा सेक्टरों में मजबूत प्रदर्शन के कारण बाजार में उत्साह का माहौल बना हुआ है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 11:38:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जियो प्लेटफॉर्म्स के सबसे बड़े IPO की तैयारी, 12.5 लाख करोड़ वैल्यूएशन का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[रिलायंस समर्थित जियो ने सेबी के पास DRHP दाखिल किया, भारत के सबसे बड़े IPO की दिशा में ऐतिहासिक कदम, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/preparation-for-the-biggest-ipo-of-jio-platforms-estimated-valuation/article-56438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/jio-ipo-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत के पूंजी बाजारों में एक ऐतिहासिक मोड़ लेते हुए रिलायंस इंडस्ट्रीज समर्थित जियो प्लेटफॉर्म्स ने शुक्रवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के पास अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर दिया है। इस कदम के साथ देश के अब तक के सबसे बड़े प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की नींव रखी गई है, जिसकी अनुमानित वैल्यूएशन करीब 12.5 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स इस आईपीओ के तहत लगभग 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी और इससे करीब 36,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की संभावना है। यह पूरी फंडरेजिंग नई इक्विटी जारी करके की जाएगी और इसमें मौजूदा निवेशकों द्वारा किसी तरह का ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा। इसका मतलब है कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचकर बाहर नहीं निकलेंगे, बल्कि कंपनी की ग्रोथ में बने रहेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कंपनी द्वारा जुटाई गई इस राशि का उपयोग मुख्य रूप से मौजूदा कर्ज को कम करने और सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों को पूरा करने में किया जाएगा। DRHP के अनुसार करीब 27,500 करोड़ रुपये के कर्ज को आंशिक या पूर्ण रूप से चुकाने की योजना है। यह कदम कंपनी के बैलेंस शीट को मजबूत करने और भविष्य की ग्रोथ को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है।इस IPO को भारतीय कैपिटल मार्केट्स के लिए एक बड़ी परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हाल के महीनों में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और बाजार की अस्थिरता के कारण निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह मेगा आईपीओ बाजार में नई ऊर्जा ला सकता है। दूसरी ओर, NSE द्वारा भी अपना DRHP दाखिल करने की तैयारी से आने वाले महीनों में IPO मार्केट में तेज गतिविधि देखने को मिल सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने इस घोषणा को एक भावनात्मक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल रिलायंस परिवार बल्कि करोड़ों शेयरधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उनके बच्चे आकाश, ईशा और अनंत जियो IPO प्रक्रिया का नेतृत्व कर रहे हैं और भविष्य में कंपनी के नए विकास अवसरों को आगे बढ़ाएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 2020 में वैश्विक निवेशकों से बड़ी पूंजी जुटाकर जियो प्लेटफॉर्म्स में अपनी हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत कम की थी। उस दौर में Meta, Google, KKR, Silver Lake, Vista Equity Partners और कई sovereign funds जैसे Abu Dhabi Investment Authority ने जियो में निवेश किया था। यह निवेश भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था पर वैश्विक भरोसे का संकेत माना गया था। आज जियो प्लेटफॉर्म्स केवल एक टेलीकॉम कंपनी नहीं रह गई है, बल्कि यह AI, क्लाउड सेवाओं, एंटरप्राइज नेटवर्क और डिजिटल एप्लिकेशन जैसे क्षेत्रों में भी विस्तार कर चुकी है। भारत की 1.4 अरब की जनसंख्या, सस्ती इंटरनेट दरें और तेजी से बढ़ती डिजिटल पहुंच ने कंपनी को बड़े पैमाने पर विकास का अवसर दिया है। वित्तीय वर्ष 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 1.47 लाख करोड़ रुपये का राजस्व और लगभग 30,000 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है, जो इसकी मजबूत वित्तीय स्थिति को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस IPO से कंपनी की वैश्विक स्थिति और मजबूत होगी और यह भारत को टेक्नोलॉजी कंपनियों के वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा। जियो प्लेटफॉर्म्स का यह प्रस्तावित IPO भारतीय बाजार के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 11:24:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती, 58 पैसे की तेज बढ़त</title>
                                    <description><![CDATA[कच्चे तेल में गिरावट और शेयर बाजार की मजबूती से रुपये ने शुरुआती कारोबार में 94.60 का स्तर छुआ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-strengthened-by-58-paise-against-dollar/article-55956"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indian-rupee-news.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">15 जून 2026, सोमवार की सुबह विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने मजबूत शुरुआत की और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 58 पैसे की तेजी दर्ज की। शुरुआती कारोबार में रुपया 94.70 पर खुला और थोड़ी ही देर में बढ़त दिखाते हुए 94.60 के स्तर पर पहुंच गया। यह मजबूती पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले उल्लेखनीय मानी जा रही है और इसे वैश्विक बाजारों में बने सकारात्मक माहौल का परिणाम बताया जा रहा है। मुद्रा कारोबारियों के अनुसार, रुपये की इस तेजी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट मानी जा रही है, जो अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते के बाद देखने को मिली। लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष के खत्म होने की खबर ने वैश्विक बाजारों में स्थिरता लाई है, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं को फायदा मिला है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर भी बाजार में सकारात्मक माहौल देखने को मिला। भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत शुरुआत की, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ा। विदेशी निवेशकों की ओर से खरीदारी बढ़ने और फंड फ्लो में सुधार होने से डॉलर की मांग में थोड़ी कमी आई, जिससे भारतीय मुद्रा को सहारा मिला। बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर में खरीदारी के चलते बाजार में भरोसा बढ़ा और इसका असर मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। फॉरेक्स डीलरों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी भी रुपये की मजबूती का एक प्रमुख कारण है। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर पर दबाव देखा जा रहा है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव में कमी आई है और सुरक्षित निवेश की मांग घट गई है। ऐसे में निवेशक जोखिम वाले बाजारों की ओर लौट रहे हैं, जिससे एशियाई मुद्राओं को मजबूती मिल रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में नरमी से आयात बिल कम होता है और चालू खाते के घाटे पर दबाव घटता है। इससे रुपये पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है और उसकी स्थिरता बढ़ती है। यही कारण है कि तेल बाजार में गिरावट के साथ रुपये में तेजी देखी जा रही है। आने वाले दिनों में रुपये की दिशा वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी। यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रण में रहती हैं और विदेशी निवेश का प्रवाह जारी रहता है, तो रुपये में और मजबूती देखी जा सकती है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति और वैश्विक आर्थिक संकेतक भी रुपये की चाल को प्रभावित कर सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुद्रा बाजार में कारोबारियों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों की भावना सकारात्मक बनी हुई है। वैश्विक शांति संकेतों के कारण जोखिम का माहौल कम हुआ है और उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ा है। इससे रुपये को मजबूती मिल रही है और अल्पकालिक रूप से यह रुझान जारी रह सकता है। यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि मुद्रा बाजार में अस्थिरता हमेशा बनी रहती है। किसी भी अप्रत्याशित अंतरराष्ट्रीय घटना या आर्थिक डेटा के कारण रुपये में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसलिए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। 15 जून 2026 का दिन भारतीय रुपये के लिए सकारात्मक शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक बाजारों में सुधार, कच्चे तेल की गिरती कीमतें और घरेलू शेयर बाजारों की मजबूती ने मिलकर रुपये को समर्थन दिया है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:41:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान शांति समझौते के बाद बाजार में जबरदस्त उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक रैली और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से सेंसेक्स 1100 अंक उछला, निफ्टी ने भी मजबूत शुरुआत की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a2f910dcfeae/article-55952"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market-news-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">15 जून 2026, सोमवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद मजबूत शुरुआत लेकर आई। वैश्विक स्तर पर बने सकारात्मक माहौल और कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट का सीधा असर घरेलू बाजारों पर देखने को मिला। सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव का खत्म होना और 107 दिन चले संघर्ष के बाद शांति समझौता माना जा रहा है। इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निवेशकों का भरोसा बढ़ा और इसका असर भारतीय इक्विटी बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुबह के शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स ने जोरदार छलांग लगाई और 1,112.70 अंकों की बढ़त के साथ 76,648.74 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं एनएसई का निफ्टी भी मजबूती के साथ खुला और 335.55 अंकों की तेजी के साथ 23,956.40 पर कारोबार करता देखा गया। शुरुआती मिनटों में ही बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली और लगभग सभी प्रमुख सेक्टर्स हरे निशान में दिखाई दिए। बैंकिंग, आईटी, ऑटो और एनर्जी शेयरों में खास तौर पर मजबूत खरीदारी का रुझान रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अमेरिका-ईरान शांति समझौते ने वैश्विक स्तर पर जोखिम की धारणा को कम किया है। लंबे समय से चले आ रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब स्थिति में सुधार के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा वापस लौटा है। इसका असर सीधे तौर पर एशियाई बाजारों पर पड़ा और भारतीय बाजार ने भी उसी रफ्तार को पकड़ लिया। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए राहत की बड़ी खबर मानी जा रही है, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम होने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विदेशी बाजारों की बात करें तो एशिया के प्रमुख सूचकांक भी मजबूत बढ़त के साथ खुले। जापान, दक्षिण कोरिया और हांगकांग के बाजारों में सकारात्मक रुझान देखा गया। अमेरिकी फ्यूचर्स में भी तेजी का माहौल रहा, जिससे वैश्विक निवेशकों की धारणा और मजबूत हुई। इस वैश्विक रैली का सीधा फायदा भारतीय बाजारों को मिला और निवेशकों ने शुरुआती कारोबार में आक्रामक खरीदारी की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">घरेलू स्तर पर भी बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है। निवेशकों का रुझान खासकर लार्जकैप शेयरों की ओर देखने को मिला, जिससे प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली। बैंकिंग सेक्टर में सार्वजनिक और निजी दोनों तरह के बैंकों के शेयरों में खरीदारी देखी गई। आईटी सेक्टर में भी विदेशी मांग की उम्मीद के चलते तेजी रही। ऑटो और एनर्जी सेक्टर में भी निवेशकों की रुचि बनी रही, जिससे पूरे बाजार को सपोर्ट मिला।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट को इस तेजी का एक अहम कारण माना जा रहा है। ब्रेंट क्रूड में नरमी आने से तेल आयात बिल पर दबाव कम होने की उम्मीद है। इससे न केवल कंपनियों की लागत घटेगी, बल्कि महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। इसी वजह से निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में नई पूंजी का प्रवाह देखने को मिल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि, कुछ बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह तेजी पूरी तरह स्थायी नहीं मानी जा सकती। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हैं और किसी भी तरह के नए तनाव से बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद, फिलहाल निवेशकों का रुझान सकारात्मक बना हुआ है और बाजार में खरीदारी का माहौल हावी है। देखा जाए तो 15 जून 2026 का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद मजबूत शुरुआत लेकर आया है। वैश्विक शांति संकेत, तेल की कीमतों में गिरावट और निवेशकों की मजबूत धारणा ने मिलकर बाजार को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो बाजार में और तेजी की संभावना जताई जा रही है</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 11:41:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों से शेयर बाजार में गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[सेंसेक्स और निफ्टी शुरुआती कारोबार में लुढ़के, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अमेरिकी महंगाई ने बढ़ाई चिंता]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/stock-market-falls-due-to-us-iran-tension-and-crude-oil/article-55589"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/stock-market-india-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय शेयर बाजार गुरुवार, 11 जून 2026 को शुरुआती कारोबार में दबाव में नजर आया, जब वैश्विक बाजारों में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर घरेलू बाजार पर भी पड़ा। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला। सुबह के सत्र में बीएसई सेंसेक्स 358.54 अंक गिरकर 73,624.64 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी 117 अंक टूटकर 23,098.30 पर कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट लगातार विदेशी निवेशकों की बिकवाली और ग्लोबल आर्थिक संकेतों की कमजोरी के कारण देखने को मिली।</p>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है। बुधवार को ही FIIs ने करीब 2,124 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेच दी थी, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ गया। अमेरिका की तरफ से ईरान से जुड़े ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया है। इससे कच्चे तेल के बाजार में तेजी देखी गई है और ब्रेंट क्रूड 1.70 प्रतिशत बढ़कर 94.68 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है।</p>
<p>शेयर बाजार के शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला। HCL Tech, Infosys, Tech Mahindra, TCS, Eternal और Trent जैसे प्रमुख शेयर गिरावट में रहे। वहीं दूसरी ओर कुछ बैंकिंग और एविएशन स्टॉक्स में हल्की खरीदारी देखने को मिली, जिनमें ICICI Bank, Bharti Airtel और InterGlobe Aviation शामिल रहे। वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का कमजोर रुख देखा गया। जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सभी में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजार पहले ही बुधवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए थे, जहां डॉव जोंस 950 अंकों से ज्यादा गिर गया था।</p>
<p>भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का मिश्रित असर निवेशकों के मूड को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी महंगाई दर में बढ़ोतरी ने यह संकेत दिया है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे वैश्विक निवेश प्रवाह प्रभावित हो रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। इससे न केवल महंगाई बढ़ने का खतरा है, बल्कि रुपये पर दबाव, कंपनियों के मुनाफे में गिरावट और राजकोषीय घाटे पर भी असर पड़ सकता है।</p>
<p>बुधवार को बाजार ने अंत में कुछ रिकवरी दिखाई थी और सेंसेक्स 64 अंक की मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ था, लेकिन गुरुवार की शुरुआत ने फिर से निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। निफ्टी भी हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ था, जिससे बाजार की अनिश्चितता साफ दिखाई देती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। खासकर तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:51:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट, निवेशकों में हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[चांदी ₹12,655 टूटकर ₹2.33 लाख किलो, सोना ₹5,373 गिरकर ₹1.47 लाख प्रति 10 ग्राम; बाजार में उतार-चढ़ाव जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-fall-in-gold-and-silver-prices-stir-among-investors/article-55593"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-silver-price-fall-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर तेज गिरावट देखने को मिली है, जिससे सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ गई है। बुधवार, 10 जून 2026 को जारी आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार और मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं के दामों में अचानक गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों के लिए यह गिरावट एक बड़ा संकेत मानी जा रही है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹5,373 टूटकर ₹1.47 लाख के स्तर पर आ गया है। वहीं चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली और 1 किलो चांदी ₹12,655 गिरकर ₹2.33 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले कुछ दिनों में चांदी के दामों में लगातार गिरावट का रुख देखा जा रहा है। 31 मई को जहां चांदी की कीमत ₹2.63 लाख प्रति किलो थी, वहीं अब यह करीब ₹30 हजार तक सस्ती हो चुकी है। इसी अवधि में सोने की कीमतों में भी करीब ₹9 हजार की गिरावट दर्ज की गई है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निवेशक सुरक्षित संपत्तियों से मुनाफावसूली कर रहे हैं, जिससे कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। मिडिल ईस्ट में तनाव और अमेरिकी आर्थिक संकेतों ने भी इस अस्थिरता को बढ़ाया है। सोने और चांदी की कीमतें आमतौर पर संकट के समय बढ़ती हैं, लेकिन मौजूदा स्थिति में निवेशकों की रणनीति बदल रही है। कई निवेशक ऊंचे स्तर पर मुनाफा वसूल रहे हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">घरेलू बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन की तैयारी भी शुरू हो रही है। आमतौर पर इस समय मांग बढ़ने से कीमतों में मजबूती आती है, लेकिन फिलहाल अंतरराष्ट्रीय दबाव ज्यादा प्रभावी दिखाई दे रहा है। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में इस तरह की तेज गिरावट से अल्पकालिक खरीदारी बढ़ सकती है। हालांकि, लंबे समय के निवेशक अभी भी बाजार की दिशा को लेकर सतर्क बने हुए हैं। इसी बीच वैश्विक बाजारों में भी सोने-चांदी की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। डॉलर की मजबूती और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने भी कीमती धातुओं पर दबाव बनाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ी एक बड़ी खबर भी सामने आई है। मेटा और रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत में पहला AI-इनेबल्ड डेटा सेंटर बनाने की योजना पर काम कर रही हैं। यह साझेदारी भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे सकती है। यह प्रोजेक्ट भारत को डिजिटल इकोनॉमी में एक मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेगा और डेटा प्रोसेसिंग तथा AI सेवाओं में बड़ा बदलाव ला सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:51:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केनरा बैंक पर RBI की बड़ी कार्रवाई, KYC नियमों में चूक पर लगा 41.8 लाख रुपए का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड समय पर अपलोड नहीं करने और सक्रिय खातों को निष्क्रिय श्रेणी में डालने के मामले में रिजर्व बैंक ने केनरा बैंक पर पेनल्टी लगाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-action-by-rbi-on-canara-bank-fine-of-rs/article-55076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/canara-bank.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय रिजर्व बैंक ने सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंकों में शामिल केनरा बैंक के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई करते हुए उस पर 41.8 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। केंद्रीय बैंक की ओर से की गई जांच में बैंक द्वारा कुछ महत्वपूर्ण बैंकिंग नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किए जाने की बात सामने आई है। यह कार्रवाई मुख्य रूप से नो योर कस्टमर यानी KYC नियमों के अनुपालन में कमी और खातों के संचालन से जुड़े दिशा-निर्देशों के उल्लंघन को लेकर की गई है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह जुर्माना बैंक की नियामकीय चूक के कारण लगाया गया है और इसका ग्राहकों की जमा राशि या बैंकिंग सेवाओं पर कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मामले की जानकारी सामने आने के बाद बैंकिंग क्षेत्र में इस कार्रवाई की चर्चा शुरू हो गई है। RBI के अनुसार केनरा बैंक कई ग्राहकों के KYC रिकॉर्ड निर्धारित समय सीमा के भीतर सेंट्रल केवाईसी रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री यानी CKYCR पर अपलोड नहीं कर पाया। बैंकिंग प्रणाली में KYC प्रक्रिया को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसके जरिए ग्राहकों की पहचान सत्यापित की जाती है और वित्तीय धोखाधड़ी, मनी लॉन्ड्रिंग तथा अन्य अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखने में मदद मिलती है। इसी उद्देश्य से सभी बैंकों को अपने नए और मौजूदा ग्राहकों का KYC डेटा निर्धारित समय के भीतर केंद्रीय रजिस्ट्री में अपडेट करना अनिवार्य होता है। जांच में पाया गया कि केनरा बैंक इस प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में विफल रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">RBI की कार्रवाई का दूसरा आधार खातों की संचालन स्थिति से जुड़ा है। केंद्रीय बैंक के नियमों के अनुसार यदि किसी बैंक खाते में पिछले एक वर्ष के भीतर ग्राहक की ओर से कोई लेनदेन किया गया है तो उस खाते को सक्रिय माना जाता है। हालांकि जांच में यह पाया गया कि केनरा बैंक ने कुछ ऐसे खातों को भी इनऑपरेटिव या निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया था जिनमें एक वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले ही ग्राहक की ओर से लेनदेन दर्ज किया गया था। इस तरह की प्रक्रिया ग्राहकों के लिए असुविधा का कारण बन सकती है और बैंकिंग संचालन में पारदर्शिता से जुड़े सवाल भी खड़े कर सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बताया जा रहा है कि यह मामला RBI द्वारा किए गए सुपरवाइजरी मूल्यांकन के दौरान सामने आया। केंद्रीय बैंक ने 31 मार्च 2025 तक की वित्तीय स्थिति और बैंक के संचालन की समीक्षा की थी। इसी समीक्षा प्रक्रिया में कुछ ऐसे बिंदु सामने आए जिन पर नियामकीय मानकों का पूर्ण रूप से पालन नहीं किया गया था। इसके बाद रिजर्व बैंक ने केनरा बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया और बैंक से विस्तृत जवाब मांगा। बैंक द्वारा दिए गए लिखित उत्तर और अधिकारियों की मौखिक दलीलों पर विचार करने के बाद RBI ने यह निष्कर्ष निकाला कि नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त आधार मौजूद हैं और पेनल्टी लगाना आवश्यक है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हाल के वर्षों में RBI ने नियामकीय अनुपालन को लेकर अपनी निगरानी और सख्त की है। केंद्रीय बैंक लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि बैंक केवल वित्तीय प्रदर्शन पर ही ध्यान न दें, बल्कि ग्राहकों के डेटा प्रबंधन, जोखिम नियंत्रण और नियामकीय दिशा-निर्देशों के पालन को भी प्राथमिकता दें। KYC नियमों को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है क्योंकि डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन वित्तीय सेवाओं के विस्तार के साथ धोखाधड़ी के मामलों की संभावना भी बढ़ी है। ऐसे में ग्राहकों के रिकॉर्ड का सही और समय पर अद्यतन होना बेहद आवश्यक माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">हालांकि RBI ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि जुर्माना लगाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि बैंक और उसके ग्राहकों के बीच हुए लेनदेन या अनुबंधों की वैधता पर कोई सवाल खड़ा हो गया है। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह कार्रवाई केवल नियामकीय कमियों को ध्यान में रखकर की गई है। बैंक के सामान्य संचालन, खाताधारकों की जमा पूंजी और ग्राहकों की बैंकिंग सेवाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। ग्राहक पहले की तरह बैंक की सेवाओं का उपयोग कर सकेंगे। इस तरह की कार्रवाई बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जरूरी होती है। इससे अन्य वित्तीय संस्थानों को भी नियमों का कड़ाई से पालन करने का संदेश मिलता है। नियामकीय संस्थाएं समय-समय पर ऐसी जांच करती रहती हैं ताकि बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों का विश्वास बना रहे और वित्तीय प्रणाली सुरक्षित बनी रहे।</p>
<p>केनरा बैंक की ओर से इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि बैंक भविष्य में ऐसी कमियों को दूर करने के लिए अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं की समीक्षा कर सकता है। RBI की यह कार्रवाई एक बार फिर यह संकेत देती है कि नियामकीय अनुपालन में छोटी दिखने वाली चूक भी बैंकों के लिए वित्तीय और प्रतिष्ठागत दोनों स्तरों पर महंगी साबित हो सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 12:44:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेंसेक्स 700 अंक टूटा, निफ्टी 23,350 के करीब फिसला, आईटी शेयरों में भारी बिकवाली</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक तनाव, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर मानसून अनुमान से बाजार पर दबाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a1fe1bfdc827/article-54853"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/sensex-today-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को कारोबार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई और दिन चढ़ने के साथ बिकवाली का दबाव और बढ़ता गया। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स करीब 700 अंक टूटकर 73,950 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की गिरावट के साथ 23,350 के आसपास पहुंच गया। बाजार में सबसे ज्यादा दबाव आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला। निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक घटनाक्रमों ने बाजार के माहौल को प्रभावित किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंगलवार को बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ था और निवेशकों को उम्मीद थी कि यह तेजी आगे भी जारी रह सकती है। हालांकि बुधवार को शुरुआती कारोबार से ही तस्वीर बदलती नजर आई। कई बड़े शेयरों में बिकवाली शुरू हुई और इसका असर प्रमुख सूचकांकों पर साफ दिखाई दिया। घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर मौजूद अनिश्चितताओं ने निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने के लिए मजबूर किया है। बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिका, इजराइल और ईरान से जुड़ी घटनाओं पर दुनिया भर के निवेशकों की नजर बनी हुई है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है। निवेशक फिलहाल जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं, जिसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा है। ऐसे समय में कई निवेशक मुनाफावसूली करना बेहतर समझ रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">दूसरा बड़ा कारण विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली को माना जा रहा है। हाल के दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला है। आंकड़ों के अनुसार मई महीने के दौरान विदेशी निवेशकों ने हजारों करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। केवल पिछले कारोबारी सत्र में भी विदेशी निवेशकों की ओर से भारी बिकवाली दर्ज की गई। इससे बाजार में दबाव और बढ़ गया। विदेशी निवेशक इस समय वैश्विक परिस्थितियों का मूल्यांकन कर रहे हैं। ब्याज दरों, अंतरराष्ट्रीय तनाव और अन्य आर्थिक कारकों के चलते वे अपने निवेश पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं। इसका असर उभरते बाजारों पर देखने को मिल रहा है, जिनमें भारत भी शामिल है।</p>
<p class="isSelectedEnd">तीसरा महत्वपूर्ण कारण मौसम से जुड़ा हुआ है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा मानसून के अनुमान में हल्की कमी किए जाने के बाद कृषि और ग्रामीण मांग को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि देश की बड़ी आबादी कृषि पर निर्भर है। बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका बाजार के कुछ वर्गों में चिंता का कारण बनी हुई है। वास्तविक प्रगति आने वाले सप्ताहों में अधिक स्पष्ट तस्वीर पेश करेगी। सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखी गई। कई बड़ी तकनीकी कंपनियों के शेयर दबाव में रहे। वैश्विक मांग को लेकर चिंताओं और विदेशी बाजारों से मिलने वाले संकेतों का असर इस क्षेत्र पर दिखाई दिया। इसके अलावा रियल्टी सेक्टर में भी बिकवाली का माहौल बना रहा। निवेशकों ने कई प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली की।</p>
<p class="isSelectedEnd">बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कुछ शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली, हालांकि चुनिंदा कंपनियों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार में व्यापक रूप से देखा जाए तो अधिकांश सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव बना रहा, जिससे निवेशकों का रुझान कमजोर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों से मिले संकेत भी मिश्रित रहे। जापान के बाजार में मजबूती देखने को मिली, जबकि हांगकांग के बाजार में गिरावट दर्ज की गई। दक्षिण कोरिया का बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता दिखाई दिया। इन मिश्रित संकेतों ने भी भारतीय बाजार को स्पष्ट दिशा देने में मदद नहीं की।</p>
<p class="isSelectedEnd">वहीं अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया था। डाउ जोंस, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए थे। इसके बावजूद भारतीय बाजार में घरेलू कारणों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर अधिक देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में घरेलू निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक परिस्थितियों पर भी बनी हुई है। निवेशकों को इस समय घबराने के बजाय संतुलित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अल्पकालिक घटनाएं अक्सर बाजार की दिशा को प्रभावित करती हैं। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना और सोच-समझकर निवेश करना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>RBI MPC Meeting 2026: आज से शुरू हुई बैठक, रेपो रेट पर टिकी बाजार और कर्जदारों की नजर</title>
                                    <description><![CDATA[5 जून को आएगा फैसला, फिलहाल 5.25% पर कायम है रेपो रेट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rbi-mpc-meeting-2026-meeting-starts-from-today-eyes-of/article-54852"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/rbi-mpc-meeting-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज 3 जून 2026 से शुरू हो गई है। यह बैठक 5 जून तक चलेगी, जिसके बाद आरबीआई गवर्नर की ओर से नीतिगत दरों और अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की जाएगी। इस बैठक पर बैंकिंग सेक्टर, उद्योग जगत, शेयर बाजार और आम कर्जदारों की खास नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार रेपो रेट में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है और केंद्रीय बैंक फिलहाल मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दरों को स्थिर रख सकता है। वर्तमान में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर है। रेपो रेट वह दर होती है जिस पर वाणिज्यिक बैंक आरबीआई से अल्पकालिक कर्ज लेते हैं। इसी दर के आधार पर बैंकों के लोन और जमा योजनाओं की ब्याज दरें प्रभावित होती हैं। ऐसे में हर मॉनेटरी पॉलिसी बैठक का सीधा असर करोड़ों लोगों की जेब पर पड़ता है। गृह ऋण, वाहन ऋण, शिक्षा ऋण और व्यापारिक कर्ज लेने वाले लोग विशेष रूप से इस फैसले का इंतजार करते हैं।</p>
<p>पिछले कुछ महीनों में महंगाई दर नियंत्रित दायरे में बनी हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितताओं ने आरबीआई के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों में अस्थिरता जैसे कारक भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में केंद्रीय बैंक किसी भी जल्दबाजी से बचते हुए संतुलित नीति अपनाने के पक्ष में दिखाई दे रहा है। बीते वर्ष 2025 में आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कई बार ब्याज दरों में कटौती की थी। फरवरी 2025 में पहली बार करीब पांच साल बाद रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इसके बाद अप्रैल, जून और दिसंबर में भी दरों में कमी की गई। कुल मिलाकर वर्ष 2025 में चार चरणों में 1.25 प्रतिशत की कटौती हुई और रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत तक आ गया। इन फैसलों का असर यह हुआ कि कई बैंकों ने अपने लोन की ब्याज दरें कम कीं और उपभोक्ताओं को राहत मिली।</p>
<p>अब स्थिति पहले जैसी नहीं है। महंगाई भले ही नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीआई फिलहाल ब्याज दरों को यथावत रखकर आर्थिक संकेतकों पर नजर बनाए रखना चाहेगा। कई वित्तीय संस्थानों की रिपोर्ट में भी अनुमान जताया गया है कि इस बैठक में रेपो रेट में कटौती की संभावना बेहद सीमित है। आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी में कुल छह सदस्य होते हैं। इनमें तीन सदस्य रिजर्व बैंक के प्रतिनिधि होते हैं जबकि तीन सदस्य केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। समिति आर्थिक विकास, महंगाई, रोजगार, उपभोक्ता मांग और वैश्विक परिस्थितियों का आकलन करने के बाद नीतिगत फैसले लेती है। प्रत्येक सदस्य अपना मत देता है और बहुमत के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाता है।</p>
<p>रेपो रेट का आम लोगों के जीवन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जब आरबीआई ब्याज दरें बढ़ाता है तो बैंकों के लिए धन जुटाना महंगा हो जाता है। इसके बाद बैंक ग्राहकों को दिए जाने वाले लोन की ब्याज दरें भी बढ़ा देते हैं। इससे होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज महंगे हो जाते हैं। दूसरी ओर जब रेपो रेट घटाया जाता है तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे ग्राहकों को भी कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध करा सकते हैं। मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। विनिर्माण गतिविधियों में सुधार, सेवाक्षेत्र की मजबूती और सरकारी निवेश योजनाओं से विकास को समर्थन मिल रहा है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में जारी अस्थिरता और वैश्विक मांग में कमजोरी जैसी चुनौतियां भी मौजूद हैं। इसलिए आरबीआई को विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखना होगा।</p>
<p>शेयर बाजार भी इस बैठक पर करीबी नजर बनाए हुए है। निवेशकों को उम्मीद है कि आरबीआई अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत देगा। यदि केंद्रीय बैंक विकास दर के अनुमान को बरकरार रखता है और महंगाई को नियंत्रित बताता है तो बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। वहीं किसी अप्रत्याशित फैसले का असर बाजार की चाल पर भी पड़ सकता है। 5 जून को होने वाली घोषणा के साथ यह साफ हो जाएगा कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों की दिशा क्या रहने वाली है।आरबीआई इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बनाए रख सकता है। हालांकि केंद्रीय बैंक के बयान और भविष्य के संकेत निवेशकों, उद्योगों और आम उपभोक्ताओं के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 14:17:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सोना-चांदी में जोरदार उछाल, चांदी ₹2.66 लाख किलो पहुंची</title>
                                    <description><![CDATA[बाजार में लगातार तेजी, इस साल अब तक चांदी ₹36 हजार और सोना ₹23 हजार महंगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/strong-rise-in-gold-and-silver-silver-reached-%E2%82%B9-266/article-54766"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-price-today-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सोने और चांदी के दामों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। 25 मई के ताजा कारोबार में दोनों कीमती धातुओं में तेजी दर्ज की गई है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 760 रुपये बढ़कर 1.56 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं चांदी में भी तेज बढ़त देखने को मिली है और 1 किलो चांदी की कीमत 2,950 रुपये बढ़कर 2.66 लाख रुपये हो गई है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और मांग में बढ़ोतरी इसका प्रमुख कारण है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस साल की शुरुआत से अब तक सोने-चांदी की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर 2025 को 10 ग्राम सोना 1.33 लाख रुपये पर था, जो अब बढ़कर 1.56 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। इसी अवधि में चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2.66 लाख रुपये पर पहुंच गई है। यानी इस साल सोना लगभग 23 हजार रुपये और चांदी करीब 36 हजार रुपये महंगी हो चुकी है। वहीं कुछ समय पहले 29 जनवरी को दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ था, जब सोना 1.76 लाख रुपये और चांदी 3.86 लाख रुपये के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">बाजार में लगातार हो रही इस तेजी ने निवेशकों की दिलचस्पी फिर से बढ़ा दी है। ज्वेलरी कारोबारियों का कहना है कि कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबे समय में सोना और चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं। खासकर शादी और त्योहारों के सीजन में इनकी मांग और बढ़ जाती है, जिससे कीमतों पर भी असर पड़ता है। हालांकि मौजूदा स्तर पर आम खरीदारों के लिए ज्वेलरी खरीदना महंगा साबित हो रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसी बीच विशेषज्ञों ने सोना खरीदने वाले ग्राहकों को सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। ज्वेलर्स का कहना है कि सोना खरीदते समय सबसे पहले BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क से यह सुनिश्चित होता है कि सोना कितने कैरेट का है और उसकी शुद्धता कितनी है। आमतौर पर यह अल्फान्यूमेरिक कोड के रूप में होता है, जिससे उसकी प्रमाणिकता की पहचान की जा सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इसके अलावा दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात है कीमत की क्रॉस चेकिंग। विशेषज्ञों के अनुसार ग्राहकों को खरीदारी से पहले सोने के ताजा दाम कई स्रोतों से जांच लेने चाहिए, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी या अधिक कीमत वसूली से बचा जा सके। इसके लिए इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन जैसे मान्यता प्राप्त स्रोतों की दरों को आधार माना जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रही आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर सोने-चांदी पर पड़ रहा है। निवेशक सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे इसकी मांग लगातार बनी हुई है। वहीं चांदी की औद्योगिक मांग भी कीमतों को ऊपर ले जा रही है।</p>
<p>स्थानीय बाजारों में भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। कई ज्वेलरी शोरूम में ग्राहकों की संख्या में हल्की कमी देखी गई है, लेकिन निवेश के उद्देश्य से खरीदारी जारी है। व्यापारियों का कहना है कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतें और नए रिकॉर्ड बना सकती हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:58:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>साउथ कोरिया ने भारतीय शेयर बाजार को पछाड़ा, AI बूम से बढ़ा मूल्यांकन</title>
                                    <description><![CDATA[आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी और चिप सेक्टर की मजबूती से कोरिया का मार्केट कैप भारत से आगे, निवेश प्रवाह में बड़ा बदलाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/south-korea-beats-indian-stock-market-valuation-increases-due-to/article-54769"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-stock-market.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वैश्विक शेयर बाजारों में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा इक्विटी मार्केट बन गया है। इसकी मुख्य वजह वहां की चिप बनाने वाली बड़ी कंपनियों में आई तेज उछाल है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के चलते रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं। इस तेजी ने कोरियाई बाजार की कुल वैल्यू को नई ऊंचाई दे दी है, जबकि भारतीय बाजार इस रेस में थोड़ा पीछे खिसक गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप इस साल करीब 86 प्रतिशत बढ़कर लगभग 5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 475 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर भारतीय शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 4.8 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 456 लाख करोड़ रुपये रह गया है। इस बदलाव ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान एक बार फिर एशियाई बाजारों की तरफ खींचा है और यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर किन वजहों से यह रैंकिंग बदल गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साउथ कोरिया की इस तेज छलांग के पीछे सबसे बड़ा कारण सेमीकंडक्टर और चिप इंडस्ट्री का मजबूत प्रदर्शन है। AI तकनीक के विस्तार के साथ-साथ डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग के लिए चिप्स की मांग तेजी से बढ़ी है। इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिला है जो मेमोरी चिप और एडवांस सेमीकंडक्टर प्रोडक्शन में ग्लोबल लीडर हैं। यही वजह है कि कोरियाई इंडेक्स में लगातार मजबूती देखने को मिली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">वहीं भारतीय बाजार में इस दौरान कई दबाव देखने को मिले। सबसे पहले रुपये में डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोरी का असर बाजार की डॉलर वैल्यू पर पड़ा। इसके अलावा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPIs की लगातार बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। कई हफ्तों तक भारी निकासी के कारण बाजार की कुल वैल्यूएशन पर असर दिखा। इसके साथ ही यह भी माना जा रहा है कि भारत में अभी तक ऐसी बड़ी लिस्टेड कंपनियों की कमी है जो सीधे तौर पर ग्लोबल AI इकोसिस्टम या चिप मैन्युफैक्चरिंग से गहराई से जुड़ी हों।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">हालांकि मार्केट कैप के मामले में साउथ कोरिया से पीछे होने के बावजूद भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुमानों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसके मुकाबले साउथ कोरिया की GDP लगभग 1.93 ट्रिलियन डॉलर के आसपास है, जो भारत की तुलना में आधे से भी कम है। इससे साफ है कि आर्थिक उत्पादन के मामले में भारत अभी भी काफी आगे है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मार्केट कैप और GDP दोनों अलग-अलग संकेतक होते हैं। मार्केट कैप का सीधा संबंध शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के मूल्यांकन से होता है, जबकि GDP किसी देश की कुल आर्थिक गतिविधियों को दर्शाता है। कई बार ऐसा होता है कि किसी देश का स्टॉक मार्केट बहुत तेजी से बढ़ता है लेकिन उसकी अर्थव्यवस्था उतनी तेजी से नहीं बढ़ती, या इसके विपरीत भी हो सकता है। इसी वजह से दोनों की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जाती।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">साउथ कोरिया में हाल के महीनों में टेक सेक्टर, खासकर AI और चिप इंडस्ट्री से जुड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी काफी बढ़ी है। ग्लोबल टेक कंपनियों के साथ सप्लाई चेन जुड़ाव और एआई आधारित प्रोडक्ट्स की मांग ने वहां के बाजार को मजबूती दी है। दूसरी तरफ भारत में बैंकिंग, एनर्जी और आईटी सेक्टर का दबदबा ज्यादा है, लेकिन AI हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में अभी शुरुआती विकास चरण देखने को मिल रहा है। आने वाले समय में भारत में भी AI और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ने पर स्थिति बदल सकती है। सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजनाएं और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता फोकस आने वाले वर्षों में भारतीय बाजार को नई दिशा दे सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 16:57:47 +0530</pubDate>
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                <title>इस हफ्ते सोने-चांदी में गिरावट, निवेशकों की नजर अब अगले रुख पर</title>
                                    <description><![CDATA[रिकॉर्ड स्तर से फिसले दाम, एक हफ्ते में सोना ₹1654 और चांदी ₹2650 सस्ती]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/fall-in-gold-and-silver-this-week-investors-are-now/article-54570"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/gold-price-today-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सोने और चांदी की कीमतों में इस सप्ताह गिरावट दर्ज की गई है। पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा में बने दोनों कीमती धातुओं के दाम अब नरम पड़ते दिखाई दे रहे हैं। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में एक सप्ताह के दौरान 1,654 रुपए प्रति 10 ग्राम की कमी आई है। इसके साथ ही सोने का भाव 1.58 लाख रुपए से घटकर करीब 1.56 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। वहीं चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली और यह 2.66 लाख रुपए प्रति किलोग्राम से फिसलकर 2.63 लाख रुपए प्रति किलोग्राम रह गई। यानी एक सप्ताह में चांदी करीब 2,650 रुपए सस्ती हो गई। जनवरी में जिस तेजी ने सोने और चांदी को रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचाया था, अब उसी तेजी के बाद मुनाफावसूली का दौर चल रहा है। बड़े निवेशक ऊंचे स्तर पर खरीद की गई होल्डिंग को बेच रहे हैं, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ी है और कीमतों पर दबाव बना हुआ है। यही वजह है कि पिछले कुछ सप्ताह से दोनों धातुओं में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अगर इस साल की शुरुआत से तुलना करें तो सोने ने पहले निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया था। 31 दिसंबर 2025 को सोने की कीमत करीब 1.33 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम थी। इसके बाद तेजी का ऐसा दौर आया कि 29 जनवरी 2026 को सोना अपने अब तक के उच्चतम स्तर 1.76 लाख रुपए तक पहुंच गया। महज एक महीने के भीतर आए इस उछाल ने बाजार को चौंका दिया था। हालांकि इसके बाद कीमतों में धीरे-धीरे गिरावट शुरू हुई और अब सोना अपने ऑलटाइम हाई से करीब 20 हजार रुपए नीचे कारोबार कर रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चांदी की बात करें तो इसमें उतार-चढ़ाव और भी ज्यादा देखने को मिला। साल की शुरुआत में चांदी का भाव करीब 2.30 लाख रुपए प्रति किलो था। जनवरी के अंत तक इसमें जबरदस्त तेजी आई और यह 3.86 लाख रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई। उस समय बाजार में चांदी की मांग और निवेश दोनों तेजी से बढ़े थे। लेकिन इसके बाद तस्वीर बदल गई। लगातार बिकवाली और निवेशकों के रुख में बदलाव के चलते चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। अब यह 2.63 लाख रुपए प्रति किलो के स्तर पर पहुंच चुकी है। यानी सिर्फ 118 दिनों में चांदी करीब 1.23 लाख रुपए प्रति किलो सस्ती हो गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय तनाव या युद्ध जैसे हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने और चांदी की ओर रुख करते हैं, जिससे इनके दाम बढ़ जाते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशकों का एक वर्ग नकदी को प्राथमिकता दे रहा है। बाजार जानकारों के मुताबिक कई निवेशक अपने पास मौजूद सोना और चांदी बेचकर नकदी जमा कर रहे हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति या बाजार में बड़े बदलाव के समय उनके पास पर्याप्त लिक्विड फंड उपलब्ध रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी बड़ी वजह प्रॉफिट बुकिंग को माना जा रहा है। जनवरी में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद कई बड़े निवेशकों ने अपने निवेश पर मुनाफा निकालना शुरू कर दिया। बड़ी मात्रा में हुई बिकवाली का असर सीधे कीमतों पर पड़ा और बाजार में गिरावट का माहौल बन गया। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक आर्थिक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक सोने और चांदी में इसी तरह का उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच शादी-ब्याह और निवेश के लिए सोना खरीदने वालों के लिए कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हमेशा बीआईएस हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदना चाहिए। हॉलमार्क यह सुनिश्चित करता है कि खरीदा गया सोना तय गुणवत्ता और शुद्धता का है। इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने की कीमत विभिन्न विश्वसनीय स्रोतों से जांच लेना भी जरूरी है ताकि उपभोक्ता सही कीमत पर खरीदारी कर सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 May 2026 14:57:24 +0530</pubDate>
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