<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/rupee-fall/tag-5457" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>rupee fall - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/5457/rss</link>
                <description>rupee fall RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>रुपया ऑल टाइम लो: डॉलर 95.20 पर, महंगाई बढ़ने का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[डॉलर की मजबूती और वैश्विक तनाव के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, इम्पोर्ट महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-all-time-low-dollar-at-9520-danger-of-inflation/article-52400"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/rupee-all-time-low.jpg" alt=""></a><br /><p>गुरुवार को भारतीय मुद्रा बाजार में बड़ा झटका देखने को मिला, जब रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 95.20 के स्तर पर पहुंच गया। यह अब तक का इसका सबसे निचला स्तर है।रुपये में यह गिरावट वैश्विक आर्थिक दबाव, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली की वजह से आई है। बताया जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे, तो रुपया और कमजोर होकर 98 के स्तर तक भी पहुंच सकता है।</p>
<p>नई दिल्ली में वित्तीय बाजार से जुड़े पिछले कुछ महीनों से रुपये पर दबाव बना हुआ था, लेकिन अप्रैल के अंतिम सप्ताह में इसमें तेज गिरावट आई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों 90 की निकासी और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।दिसंबर 2025 में पहली बार रुपया 90 के स्तर से नीचे गया था और उसके बाद से लगातार गिरावट का ट्रेंड बना हुआ है। मौजूदा गिरावट को वैश्विक ऊर्जा संकट और व्यापारिक अनिश्चितता से जोड़कर देखा जा रहा है।</p>
<h5><strong>गिरावट के कारण</strong></h5>
<p>मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।इससे भारत का आयात बिल बढ़ा और रुपये पर दबाव आया।विशेषज्ञ बताते हैं कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर पड़ता है। इसके अलावा वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती भी रुपये की गिरावट का बड़ा कारण मानी जा रही है।</p>
<h5><strong>आम लोगों पर असर</strong></h5>
<p>रुपये की कमजोरी का सीधा असर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ सकता है।आयातित वस्तुएं और सेवाएं महंगी होने की आशंका है।आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित सामान की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही विदेश यात्रा, पढ़ाई और डॉलर में भुगतान करने वाली सेवाएं भी महंगी हो जाएंगी।</p>
<p>महंगाई के मोर्चे पर भी चिंता बढ़ गई है। अगर डॉलर मजबूत बना रहता है, तो खुदरा महंगाई दर में उछाल आ सकता है, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-all-time-low-dollar-at-9520-danger-of-inflation/article-52400</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-all-time-low-dollar-at-9520-danger-of-inflation/article-52400</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:34:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-04/rupee-all-time-low.jpg"                         length="194188"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: डॉलर के मुकाबले 94 के पार पहुंची भारतीय करेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में रुपया कमजोर, महंगाई बढ़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-hits-record-low-indian-currency-crosses-94-against-dollar/article-49228"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-27t120632.015.jpg" alt=""></a><br /><p>आज27 मार्च को रुपया पहली बार इतिहास में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के पार पहुंच गया। रुपये ने 93.98 के पिछले स्तर से गिरकर 94.14 पर कारोबार की शुरुआत की। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम संकेत मानी जा रही है और इसे भारत समाचार अपडेट में प्रमुखता से देखा जा रहा है।</p>
<p>रुपये में आई यह कमजोरी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट से आयात महंगा होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में डॉलर मजबूत होने पर रुपये पर दबाव बढ़ता है। पिछले एक महीने में ही रुपया करीब 3.5% तक कमजोर हुआ है।</p>
<p>वहीं, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और शेयर बाजार में गिरावट ने भी रुपये को प्रभावित किया है। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपये पर दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की निकासी भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।</p>
<p>विश्लेषकों के अनुसार, अगर वैश्विक तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। इससे देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है और आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>सरकार और रिजर्व बैंक की नजर इस स्थिति पर बनी हुई है। जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को स्थिर करने के उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में वैश्विक कारकों का प्रभाव अधिक होने के कारण त्वरित राहत मिलना आसान नहीं दिख रहा।</p>
<p>यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार संकेत देते हैं कि आने वाले समय में आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में निवेशकों और आम लोगों को सतर्क रहने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार वित्तीय फैसले लेने की जरूरत है।</p>
<hr />
<h3> </h3>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-hits-record-low-indian-currency-crosses-94-against-dollar/article-49228</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-hits-record-low-indian-currency-crosses-94-against-dollar/article-49228</guid>
                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:07:34 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/business---2026-03-27t120632.015.jpg"                         length="143777"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        