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                <title>economic news - दैनिक जागरण</title>
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                <description>economic news RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सोने के आयात में 70% गिरावट, शुल्क वृद्धि का बड़ा असर</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की अपील और बढ़े सीमा शुल्क के बाद आयात मात्रा में भारी कमी, हालांकि मूल्य में बढ़ोतरी जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/70-decline-in-gold-imports-big-impact-of-duty-increase/article-56363"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-import-india-decline.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में सोने के आयात को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकार की नीतियों, आयात शुल्क में वृद्धि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई सोना कम खरीदने की अपील का सीधा असर अब आंकड़ों में साफ नजर आने लगा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने के भीतर भारत में सोने का आयात मात्रा के हिसाब से करीब 70 प्रतिशत तक घट गया है। पहले जहां आयात 75 से 100 टन के बीच था, अब यह गिरकर लगभग 25 से 30 टन तक पहुंच गया है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सरकार ने 13 मई से सोने पर सीमा शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य सोने के आयात पर निर्भरता कम करना और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री की ओर से लोगों से अपील की गई थी कि एक वर्ष तक सोने की खरीद में संयम बरता जाए, जिसका असर भी बाजार में देखने को मिल रहा है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि आयात मात्रा में भारी गिरावट के बावजूद सोने के कुल आयात मूल्य में वृद्धि दर्ज की गई है। मई महीने में सोने का आयात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसका प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी बताई जा रही है। यानी कम मात्रा में आयात होने के बावजूद कीमतों की बढ़ोतरी ने कुल मूल्य को ऊपर बनाए रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल और मई के दौरान भारत का कुल सोने का आयात 60 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड स्तर पर 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। हालांकि मात्रा के हिसाब से इसमें 4.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कुल आयात 721.03 टन पर रहा। यह स्पष्ट करता है कि देश में सोने की मांग बनी हुई है, लेकिन महंगे दामों और नीतिगत बदलावों के कारण इसका स्वरूप बदल रहा है। सोने के आयात में यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोना देश के कुल आयात का 5 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखता है। आयात में कमी से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन घरेलू मांग और निवेश व्यवहार पर इसका असर भी देखने को मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच चालू वित्त वर्ष 2026-27 में शुद्ध आयकर संग्रह में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जून तक शुद्ध आयकर संग्रह 15 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसमें कॉरपोरेट और गैर-कॉरपोरेट दोनों तरह के कर संग्रह शामिल हैं। कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है और यह 2.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 8 प्रतिशत बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह संकेत देता है कि देश की कर प्रणाली में सुधार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का असर राजस्व पर भी दिखाई दे रहा है। सोने के आयात में आई भारी गिरावट और कर संग्रह में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर को दर्शाती है। एक तरफ जहां सरकार आयात पर नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय कीमतें और घरेलू मांग स्थिति को संतुलित बनाए हुए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:00:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>96 पर नहीं रुका रुपया! डॉलर की रफ्तार ने बाजार में मचाई हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार सातवें दिन गिरा। जानिए गिरावट की वजह, वैश्विक असर और इसका आम जनता पर प्रभाव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-did-not-stop-at-96-dollar-movement-created-stir/article-53764"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rupee-vs-dollar.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Rupee vs Dollar:</strong> रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मंगलवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">19 मई को शुरुआती कारोबार में स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 18 पैसे टूटकर 96.38 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। यह गिरावट ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल और डॉलर की मजबूती जैसे कारण सामने आ रहे हैं। रुपया-डॉलर के इस उतार-चढ़ाव ने बाजार में बेचैनी बढ़ा दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर जब कि भारतीय मुद्रा लगातार सातवें कारोबारी सत्र में दबाव में है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में सोमवार को भी रुपया 96.20 प्रति डॉलर पर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बंद हुआ था। कारोबारियों का कहना है कि पिछले हफ्ते में करेंसी लगभग 2.2 प्रतिशत तक कमजोर हो चुकी है और सितंबर के बाद से इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई है। बाजार में इस वक्त ये चर्चाएं भी चल रही हैं कि मौजूदा हालात में रुपये की दिशा अभी साफ नहीं है और अस्थिरता बनी रह सकती है। सुबह ट्रेडिंग फ्लोर पर हल्की घबराहट का माहौल था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर विदेशी निवेश और तेल कीमतों को लेकर।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फॉरेक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये पर दबाव की एक बड़ी वजह ग्लोबल अनिश्चितता है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी बॉंड यील्ड में वृद्धि और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर मोड़ दिया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी भारत के लिए चिंता का विषय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में कोई बाधा आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ये भारत के आयात बिल को और बढ़ा सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही वजह है कि रुपया दबाव में है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुछ एक्सपर्ट्स ने यह भी संकेत दिए हैं कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">USD/INR <span lang="hi" xml:lang="hi">का स्तर धीरे-धीरे 97 की ओर बढ़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि बीच में कुछ तकनीकी सपोर्ट ज़ोन भी हैं जिस पर बाजार की नजर बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में हल्की गिरावट जरूर देखी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये रुपये को मजबूत करने के लिए काफी नहीं है। दूसरी तरफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रेंट क्रूड में भी मामूली गिरावट हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वैश्विक स्तर पर कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं। बाजार की चाल फिलहाल मिली-जुली संकेत दे रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी वजह से निवेशक कोई बड़ा दांव लगाने से कतरा रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घरेलू शेयर बाजार में इसके उलट माहौल थोड़ा अलग था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी रही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ये संकेत मिला कि विदेशी संस्थागत निवेशक (</span>FII) <span lang="hi" xml:lang="hi">को अभी भी भारतीय इक्विटी बाजार में रुचि है। आंकड़ों के मुताबिक हाल के दिनों में </span>FIIs <span lang="hi" xml:lang="hi">ने हजारों करोड़ रुपये की खरीदारी की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपये की कमजोरी इस सकारात्मकता पर थोड़ा असर डाल रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की ओर से ऊर्जा नीति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से तेल खरीद जारी रखेगा। वैश्विक प्रतिबंधों और राजनीतिक दबावों के बीच ये रुख बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की बात ये है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से बढ़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हाल के आंकड़ों के अनुसार इसमें अरबों डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई है। इससे आर्थिक मोर्चे पर कुछ स्थिरता जरूर मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन रुपये पर दबाव फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 13:04:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर फिसला, क्रूड 110 डॉलर पार, शेयर बाजार में भारी दबाव</title>
                                    <description><![CDATA[डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड 96.18 पर पहुंचा, क्रूड 110 डॉलर पार। सेंसेक्स-निफ्टी दबाव में, FIIs की भारी बिकवाली जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rupee-slips-to-record-9618-against-dollar-crude-crosses-110/article-53683"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rupee-weakness-share-market-today-crude-oil-rates-update.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोमवार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">18 मई को मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता के चलते भारतीय रुपये में भारी गिरावट आई। डॉलर के मुकाबले रु 96.18 तक पहुंच गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना जा रहा है। शुरुआती कारोबार में ही रुपये ने करीब 20 पैसे की गिरावट के साथ शुरुआत की और बाद में लगातार दबाव में रहा। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतें भी तेजी से बढ़ी हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्रूड ऑयल 2 प्रतिशत से ज्यादा चढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और सप्लाई की चिंता ने तेल की कीमतों को और बढ़ा दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे वैश्विक स्तर पर असर साफ दिख रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारतीय शेयर बाजार पर भी दबाव बना रहा। सेंसेक्स सुबह के सत्र में एक समय 1000 अंक से ज्यादा गिरकर 74,180 तक चला गया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशकों में घबराहट बढ़ गई। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फिर कुछ रिकवरी देखने को मिली और अंत में सेंसेक्स करीब 250 अंक की गिरावट के साथ 75,000 के आसपास कारोबार करता नजर आया। निफ्टी भी दबाव में रहा और लगभग 90 अंक गिरकर 23,550 के पास आ गया। बाजार में उठापटक के बीच विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने चिंताएँ बढ़ा दी हैं। पिछले 30 दिनों में </span>FII <span lang="hi" xml:lang="hi">ने करीब 55 हजार करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक (</span>DII) <span lang="hi" xml:lang="hi">थोड़ी बहुत खरीदारी करते नजर आए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वे दबाव को पूरा संभाल नहीं पाए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">टेक्निकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि बाजार अभी बेहद संवेदनशील स्थिति में है। सेंसेक्स फिलहाल 75,200 से 75,300 के बीच संघर्ष कर रहा है और अगर ऊपर की ओर ब्रेकआउट नहीं होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दबाव बना रह सकता है। नीचे की ओर 74,500 से 74,200 का जोन मजबूत सपोर्ट माना जा रहा है। निफ्टी के लिए 24,000 और 24,250 महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि नीचे 23,250 और 23,000 पर सपोर्ट देखा जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय में कोई बड़ा ब्रेकआउट आने तक ट्रेडिंग में सावधानी बरतनी चाहिए और स्टॉप-लॉस का पालन करना बेहतर रणनीति होगी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">उधर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिले हैं। अमेरिकी बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां डाउ जोन्स</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नैस्डैक और </span>S&amp;P <span lang="hi" xml:lang="hi">500 सभी लाल निशान में रहे। एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहीं हल्की तेजी तो कहीं गिरावट नजर आई। क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल के पीछे मिडिल ईस्ट का तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता विवाद भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद भी बाजार में अस्थिरता बढ़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशक सतर्क हो गए हैं। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने मिलकर बाजार पर दबाव बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा पूरी तरह से ग्लोबल संकेतों और कच्चे तेल की गतिविधियों पर निर्भर रहने की संभावना है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 May 2026 14:39:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सब्जी, दूध, किराना और कैब किराया..... पेट्रोल-डीजल महंगा होने से कहां-कहां जेब पर पड़ेगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[पेट्रोल-डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, सब्जी, दूध, किराना और कैब किराए महंगे होने की आशंका, आम आदमी की जेब पर सीधा असर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/where-will-the-pockets-be-affected-due-to-increase-in/article-53437"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/petrol-and-diesel-prices-hike-impact.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसके परिणाम आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नजर आने लगे हैं। महंगे पेट्रोल-डीजल के चलते महंगाई फिर से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसका असर ट्रांसपोर्ट से लेकर किचन तक हर जगह पड़ेगा। भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में सुबह जैसे ही नए दर लागू हुए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोग इस मुद्दे पर चर्चा करते हुए देखे गए। कई लोगों का कहना था कि पहले ही उनके बजट को संभालना मुश्किल था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब हालात और भी कठिन होने वाले हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी से सबसे बड़ा प्रभाव माल ढुलाई पर पड़ता है। जब ट्रक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">टैंकर और डिलीवरी वाहन अधिक खर्च में चलते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसका बोझ सीधे सामान की कीमतों पर पड़ता है। इससे सब्जी मंडियों से लेकर किराना दुकानों तक इसके असर धीरे-धीरे दिखने लगता है। ऐसा कहा जा रहा है कि सब्जी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">फल और रोजमर्रा की जरूरी चीजों की सप्लाई चेन पूरी तरह डीजल पर निर्भर करती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ऐसे में थोड़ी सी बढ़ोतरी भी पूरे बाजार को प्रभावित कर सकती है। सुबह के समय मंडियों में इस मुद्दे पर व्यापारी आपस में चर्चा कर रहे थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कई ट्रांसपोर्टर बताते हैं कि डीजल उनके काम की लाइफलाइन है और हर लीटर में बढ़ोतरी से उनके खर्च में सीधा इजाफा होता है। मजबूरी में उन्हें किराया बढ़ाना पड़ता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसका असर अंततः आम ग्राहकों पर भी पड़ता है। कैब और बाइक एग्रीगेटर कंपनियां भी मौजूदा हालात को देखते हुए किराया बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बसों का किराया भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। दवा और मेडिकल सप्लाई पर इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि लॉजिस्टिक्स खर्च के बढ़ने से सप्लाई कॉस्ट भी ऊपर जाती है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आम उपभोक्ताओं को यह चिंता भी सता रही है कि ग्रॉसरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पैकेज्ड फूड और कुछ हद तक फ्लाइट टिकट भी महंगे हो सकते हैं। किसानों के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि खेती में उपयोग होने वाले ट्रैक्टर और मशीनें भी डीजल पर निर्भर हैं। यानी उत्पादन लागत बढ़ेगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसका असर बाजार में महसूस किया जाएगा। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पेट्रोल-डीजल की यह बढ़ोतरी धीरे-धीरे हर घर के बजट में एक नई चुनौती जोड़ती दिखाई दे रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:22:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपया पहली बार 96 के पार पहुंचा, शेयर मार्केट में फिर आई गिरावट, सेंसेक्स 161 अंक टूटा</title>
                                    <description><![CDATA[रुपये में रिकॉर्ड गिरावट और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच शेयर बाजार कमजोर बंद हुआ। सेंसेक्स 161 अंक टूटा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-crossed-96-for-the-first-time-stock-market-fell/article-53438"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rupee-crosses-96-sensex-declines.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>Stock Market Update:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">घरेलू शेयर बाजार में शुक्रवार को फिर से कमी देखी गई। दिन की शुरुआत थोड़ा सकारात्मक रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कारोबार के आखिरी घंटे में परिस्थितियां पूरी तरह बदल गईं। रुपये में लगातार गिरावट</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और एशियाई बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का असर भारतीय बाजार पर साफ नजर आया। बीएसई सेंसेक्स 160.73 अंक गिरकर 75,237.99 पर बंद हुआ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि एनएसई निफ्टी 46.10 अंक गिरकर 23,643.50 पर पहुंच गया। इस गिरावट के बीच सबसे ज्यादा चर्चा रुपये की रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पहली बार डॉलर के मुकाबले 96 के पार जा पहुंचा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कारोबार के दौरान रुपया लगभग 50 पैसे गिरकर 96.14 प्रति डॉलर तक पहुंच गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो अब तक का सबसे न्यूनतम स्तर माना जा रहा है। विदेशी निवेशकों की बिक्री और डॉलर की मजबूती के चलते रुपये पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात पर निर्भर देश के लिए चिंता का विषय हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसका असर सीधे रुपये और बाजार दोनों पर पड़ता है। सुबह बैंकिंग और आईटी शेयरों में थोड़ी खरीदारी दिखी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बाद में निवेशकों ने मुनाफा स्क्रिप्ट करना शुरू कर दिया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बाजार की शुरुआती बढ़त स्थायी नहीं रह पाई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">यह भी कहा जा रहा है कि वैश्विक बाजारों में भी हालात ज्यादा मजबूत नहीं थे। एशियाई बाजारों में गिरावट ने भारतीय निवेशकों के मनोबल पर असर डाला। इसी बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">विदेशी संस्थागत निवेशक सतर्कता बरत रहे हैं। बाजार के जानकार मानते हैं कि अगर रुपये में गिरावट और कच्चे तेल की कीमतें ऊँची रहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो आने वाले दिनों में बाजार पर और दबाव पड़ सकता है। फिलहाल</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेशकों की नजर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है। छोटे निवेशकों में भी थोड़ा घबराहट देखी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि बार-बार के उतार-चढ़ाव से बाजार का भरोसा कमजोर होता नजर आ रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:21:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोना-चांदी के दामों में आई भारी गिरावट, चांदी 17 हजार तक हुई सस्ती</title>
                                    <description><![CDATA[सोना-चांदी के दामों में भारी गिरावट, MCX और रिटेल बाजार में तेज टूट। चांदी 17 हजार रुपये तक सस्ती, निवेशकों में हलचल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/heavy-fall-in-the-prices-of-gold-and-silver-silver/article-53431"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/gold-silver-rate.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"><strong>:</strong> <span lang="hi" xml:lang="hi">सोने और चांदी के बाजार में आज अचानक बिकवाली का जोरदार दौर देखने को मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे पूरे दिन के ट्रेडिंग सेशन में </span>Gold Silver Rate <span lang="hi" xml:lang="hi">में भारी गिरावट आई। एमसीएक्स पर सुबह के कारोबार में ही सोना और चांदी दोनों ही धड़ाम हो गए। शुरुआती जानकारियों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सुबह करीब 11 बजे सोने की कीमत लगभग 2,800 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं चांदी में भी करीब 12 हजार रुपये प्रति किलोग्राम की कमी आई। लेकिन गिरावट यही नहीं रुकी</span>; <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे ही कारोबार आगे बढ़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार पर दबाव और बढ़ गया। करीब 11:20 बजे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चांदी की कीमत 17 हजार रुपये प्रति किलोग्राम से भी ज्यादा गिर गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे निवेशकों में हलचल मच गई। इसी दौरान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">5 जून एक्सपायरी वाले गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट में भी भारी गिरावट देखी गई और दाम 1,59,120 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बाजार के जानकारों का कहना है कि हाल के दिनों में कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव का माहौल बना हुआ है। कुछ दिन पहले</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की ओर से इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव की खबर के बाद गोल्ड और सिल्वर में तेजी आई थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और उस समय सोना एक दिन में लगभग 11 हजार रुपये तक उछल गया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि चांदी के दाम 3 लाख रुपये प्रति किलो के पार पहुंच गए थे। लेकिन उसके बाद से बाजार में स्थिरता नहीं रही और लगातार मुनाफावसूली और ग्लोबल संकेतों के चलते कीमतें ऊपर-नीचे होती रहीं। 14 मई को भी दिनभर बाजार में हलचल रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन 15 मई को हालात अचानक बदल गए और </span>Gold Silver Rate <span lang="hi" xml:lang="hi">में तेज गिरावट देखने को मिली। कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय संकेतों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">डॉलर की मजबूती और घरेलू मांग में उतार-चढ़ाव का सीधा असर कीमती धातुओं पर पड़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">रिटेल बाजार में भी इसका सीधा असर देखने को मिला है। जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सोने के दाम में करीब 2</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">820 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई और यह घटकर लगभग 1</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">59</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">830 रुपये पर पहुंच गया। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">चांदी के रिटेल रेट में भी बड़ी गिरावट देखी गई</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो करीब 16</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">780 रुपये टूटकर 2</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">74</span>,<span lang="hi" xml:lang="hi">980 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। देश के प्रमुख शहरों में भी यही ट्रेंड देखने को मिला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां ज्वैलर्स के पास ग्राहकों की पूछताछ तो बनी हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कीमतों में तेजी से गिरावट के बाद कई लोग अभी और नरमी का इंतजार कर रहे हैं। कुल मिलाकर</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बाजार फिलहाल दबाव में है और आने वाले दिनों में </span>Gold Silver Rate <span lang="hi" xml:lang="hi">की दिशा ग्लोबल संकेतों और घरेलू मांग पर निर्भर करती नजर आ रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 15 May 2026 15:14:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पीएम मोदी ने क्यों की 1 साल तक सोना न खररदने की अपील? समझें वजह</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की एक साल सोना न खरीदने की अपील पर चर्चा तेज। जानें गोल्ड आयात, फॉरेक्स रिजर्व और आर्थिक असर का पूरा गणित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/why-did-pm-modi-appeal-not-to-buy-gold-for/article-53114"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-11t130237.512.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देश में सोने की खरीद को लेकर हाल ही में एक नई बहस शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की गई है। इसके साथ ही उन्होंने अनावश्यक विदेश यात्रा टालने की भी बात की। यह अपील ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर टेंशन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि इस संदेश का उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए सोने का आयात महंगा साबित हो रहा है। देश में सोने की मांग बहुत ज्यादा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसकी पूर्ति मुख्य रूप से विदेशों से आयात के जरिए होती है। जब भारत सोना खरीदता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे डॉलर में भुगतान करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि सोने की कीमतों और आयात में वृद्धि के साथ देश का इंपोर्ट बिल भी तेजी से बढ़ता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने हालात को और भी कठिन बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इससे डॉलर की निकासी बढ़ती है और फॉरेन एक्सचेंज पर दबाव आता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों की माने तो पीएम की अपील को देशभक्ति और स्वदेशी भावना से जोड़ने की कोशिश की गई है। उन्होंने लोगों से ऊर्जा की बचत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की सलाह दी है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर देश में सोने की खपत कुछ कम होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इससे ट्रेड बैलेंस को सुधारने में मदद मिल सकती है और रुपये की स्थिति भी मज़बूत हो सकती है। लेकिन यह भी सच है कि भारत में सोना सिर्फ एक निवेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व भी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए किसी भी बदलाव का सीधा असर आम लोगों की आदतों पर पड़ेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल फॉरेक्स रिजर्व की स्थिति पूरी तरह से चिंताजनक नहीं है। मार्च </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग </span>691 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के स्तर पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कई महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट्स से यह भी पता चला है कि रिजर्व में सोने का हिस्सा धीरे-धीरे बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो निवेश रणनीति में बदलाव का संकेत देता है। सितंबर </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">की तुलना में इसमें वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए आयात और खर्च दोनों पर संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि लंबे समय में आर्थिक स्थिरता बनी रह सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 13:39:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: डॉलर के मुकाबले 94 के पार पहुंची भारतीय करेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में रुपया कमजोर, महंगाई बढ़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-hits-record-low-indian-currency-crosses-94-against-dollar/article-49228"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-27t120632.015.jpg" alt=""></a><br /><p>आज27 मार्च को रुपया पहली बार इतिहास में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के पार पहुंच गया। रुपये ने 93.98 के पिछले स्तर से गिरकर 94.14 पर कारोबार की शुरुआत की। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम संकेत मानी जा रही है और इसे भारत समाचार अपडेट में प्रमुखता से देखा जा रहा है।</p>
<p>रुपये में आई यह कमजोरी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट से आयात महंगा होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में डॉलर मजबूत होने पर रुपये पर दबाव बढ़ता है। पिछले एक महीने में ही रुपया करीब 3.5% तक कमजोर हुआ है।</p>
<p>वहीं, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और शेयर बाजार में गिरावट ने भी रुपये को प्रभावित किया है। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपये पर दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की निकासी भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।</p>
<p>विश्लेषकों के अनुसार, अगर वैश्विक तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। इससे देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है और आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>सरकार और रिजर्व बैंक की नजर इस स्थिति पर बनी हुई है। जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को स्थिर करने के उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में वैश्विक कारकों का प्रभाव अधिक होने के कारण त्वरित राहत मिलना आसान नहीं दिख रहा।</p>
<p>यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार संकेत देते हैं कि आने वाले समय में आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में निवेशकों और आम लोगों को सतर्क रहने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार वित्तीय फैसले लेने की जरूरत है।</p>
<hr />
<h3> </h3>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:07:34 +0530</pubDate>
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