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                <title>global market - दैनिक जागरण</title>
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                <description>global market RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>कच्चे तेल की कीमतें फिर 72 डॉलर पर, एपल प्रोडक्ट महंगे; टेक और बाजार में बड़े बदलाव</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध से पहले वाले स्तर पर लौटा ब्रेंट क्रूड, भारत में आईपैड और मैकबुक की कीमतों में भारी बढ़ोतरी, माइक्रोन ने मार्केट कैप में मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/crude-oil-prices-again-at-72-apple-products-expensive-tech/article-57087"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/crude-oil-price-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी गिरावट देखने को मिली है। ईरान से जुड़े तनाव के बीच जो उछाल कच्चे तेल में आया था, वह अब लगभग खत्म हो चुका है। गुरुवार को वैश्विक बाजार में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड ऑयल 72 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। यह वही कीमत है जो युद्ध जैसे हालात बनने से पहले दर्ज की गई थी। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सप्लाई को लेकर डर कम होने और बाजार में स्थिरता लौटने से कीमतों पर दबाव बना है। इसका असर आने वाले दिनों में कई देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन बाजार पर भी दिखाई दे सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऐसे समय आई है जब दुनिया भर के निवेशक पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कुछ सप्ताह पहले तक यह आशंका जताई जा रही थी कि यदि तनाव और बढ़ा तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी डर से कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। लेकिन हालात फिलहाल नियंत्रण में रहने और सप्लाई चेन सामान्य रहने से बाजार का भरोसा वापस लौटा है। यही वजह है कि ब्रेंट क्रूड फिर से 72 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारत जैसे तेल आयात करने वाले देशों के लिए यह राहत भरी खबर मानी जा रही है। देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने पर आयात बिल घट सकता है। इससे पेट्रोल और डीजल की लागत पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद रहती है। हालांकि खुदरा ईंधन की कीमतों में किसी बदलाव का फैसला तेल कंपनियां और सरकार बाजार की स्थिति को देखते हुए करती हैं। फिलहाल उपभोक्ताओं की नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की यह गिरावट घरेलू बाजार तक कब पहुंचती है। इधर टेक्नोलॉजी सेक्टर से भी बड़ी खबर सामने आई है। एपल ने अमेरिका में अपने कई लोकप्रिय प्रोडक्ट्स की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। कंपनी ने आईपैड और मैकबुक के कुछ मॉडल 300 डॉलर तक महंगे कर दिए हैं। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला है। भारत में इन डिवाइसों की कीमतों में लगभग एक लाख रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नई कीमतें लागू होने के बाद प्रीमियम कैटेगरी के कई मॉडल पहले की तुलना में काफी महंगे हो गए हैं। कीमतों में यह बदलाव उत्पादन लागत, आयात शुल्क, वैश्विक सप्लाई चेन और मुद्रा विनिमय दर जैसे कई कारणों से जुड़ा हो सकता है। भारत में एपल के प्रोडक्ट पहले से ही प्रीमियम श्रेणी में आते हैं। ऐसे में नई कीमतें उन ग्राहकों पर सीधा असर डालेंगी जो नया आईपैड या मैकबुक खरीदने की योजना बना रहे हैं। कई रिटेल स्टोर्स पर नई कीमतों के अनुसार बिक्री शुरू हो चुकी है और ग्राहक भी इस बढ़ोतरी को लेकर चर्चा कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरी ओर शेयर बाजार और टेक इंडस्ट्री में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन ने बाजार पूंजीकरण के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। कंपनी का मार्केट कैप बढ़ने के बाद उसने दुनिया की दो बड़ी टेक कंपनियों मेटा और टेस्ला को पीछे छोड़ दिया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और हाई-परफॉर्मेंस मेमोरी चिप्स की बढ़ती मांग का सबसे बड़ा फायदा माइक्रोन को मिल रहा है। निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ने से कंपनी के शेयरों में तेजी आई और उसका मूल्यांकन भी मजबूत हुआ। एआई तकनीक के तेजी से विस्तार ने सेमीकंडक्टर कंपनियों की स्थिति बदल दी है। पहले जहां निवेशकों का अधिक ध्यान सोशल मीडिया और इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनियों पर था, वहीं अब चिप बनाने वाली कंपनियां भी बाजार की अगली बड़ी ताकत बनती दिखाई दे रही हैं। माइक्रोन की इस उपलब्धि को उसी बदलाव का संकेत माना जा रहा है। आने वाले समय में यदि एआई आधारित तकनीकों की मांग इसी तरह बढ़ती रही तो सेमीकंडक्टर उद्योग में और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। एक ही दिन में सामने आई इन तीन खबरों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की अलग-अलग तस्वीर पेश की है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ऊर्जा बाजार को राहत देती दिख रही है, वहीं एपल के महंगे प्रोडक्ट उपभोक्ताओं की जेब पर असर डाल सकते हैं। दूसरी तरफ माइक्रोन का तेजी से बढ़ता बाजार मूल्य यह संकेत देता है कि दुनिया की टेक इंडस्ट्री अब नई दिशा में आगे बढ़ रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 11:57:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>96 पर नहीं रुका रुपया! डॉलर की रफ्तार ने बाजार में मचाई हलचल</title>
                                    <description><![CDATA[Rupee vs Dollar: डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार सातवें दिन गिरा। जानिए गिरावट की वजह, वैश्विक असर और इसका आम जनता पर प्रभाव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-did-not-stop-at-96-dollar-movement-created-stir/article-53764"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/rupee-vs-dollar.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi"><strong>Rupee vs Dollar:</strong> रुपया डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होता जा रहा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">और मंगलवार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">19 मई को शुरुआती कारोबार में स्थिति में कोई खास सुधार नजर नहीं आया। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 18 पैसे टूटकर 96.38 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। यह गिरावट ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक तनाव</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतों में उथल-पुथल और डॉलर की मजबूती जैसे कारण सामने आ रहे हैं। रुपया-डॉलर के इस उतार-चढ़ाव ने बाजार में बेचैनी बढ़ा दी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर जब कि भारतीय मुद्रा लगातार सातवें कारोबारी सत्र में दबाव में है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में सोमवार को भी रुपया 96.20 प्रति डॉलर पर अपने रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब बंद हुआ था। कारोबारियों का कहना है कि पिछले हफ्ते में करेंसी लगभग 2.2 प्रतिशत तक कमजोर हो चुकी है और सितंबर के बाद से इसमें 6 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई है। बाजार में इस वक्त ये चर्चाएं भी चल रही हैं कि मौजूदा हालात में रुपये की दिशा अभी साफ नहीं है और अस्थिरता बनी रह सकती है। सुबह ट्रेडिंग फ्लोर पर हल्की घबराहट का माहौल था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर विदेशी निवेश और तेल कीमतों को लेकर।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फॉरेक्स एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपये पर दबाव की एक बड़ी वजह ग्लोबल अनिश्चितता है। डॉलर इंडेक्स में मजबूती</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अमेरिकी बॉंड यील्ड में वृद्धि और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित संपत्तियों की ओर मोड़ दिया है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी भी भारत के लिए चिंता का विषय है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ जैसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में कोई बाधा आती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो ये भारत के आयात बिल को और बढ़ा सकती है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और यही वजह है कि रुपया दबाव में है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कुछ एक्सपर्ट्स ने यह भी संकेत दिए हैं कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">USD/INR <span lang="hi" xml:lang="hi">का स्तर धीरे-धीरे 97 की ओर बढ़ सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि बीच में कुछ तकनीकी सपोर्ट ज़ोन भी हैं जिस पर बाजार की नजर बनी हुई है। डॉलर इंडेक्स में हल्की गिरावट जरूर देखी गई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन ये रुपये को मजबूत करने के लिए काफी नहीं है। दूसरी तरफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ब्रेंट क्रूड में भी मामूली गिरावट हुई है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन वैश्विक स्तर पर कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं। बाजार की चाल फिलहाल मिली-जुली संकेत दे रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसी वजह से निवेशक कोई बड़ा दांव लगाने से कतरा रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घरेलू शेयर बाजार में इसके उलट माहौल थोड़ा अलग था। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी रही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे ये संकेत मिला कि विदेशी संस्थागत निवेशक (</span>FII) <span lang="hi" xml:lang="hi">को अभी भी भारतीय इक्विटी बाजार में रुचि है। आंकड़ों के मुताबिक हाल के दिनों में </span>FIIs <span lang="hi" xml:lang="hi">ने हजारों करोड़ रुपये की खरीदारी की है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रुपये की कमजोरी इस सकारात्मकता पर थोड़ा असर डाल रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार की ओर से ऊर्जा नीति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से तेल खरीद जारी रखेगा। वैश्विक प्रतिबंधों और राजनीतिक दबावों के बीच ये रुख बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी ओर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">राहत की बात ये है कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार फिर से बढ़ा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और हाल के आंकड़ों के अनुसार इसमें अरबों डॉलर की बढ़ोतरी देखी गई है। इससे आर्थिक मोर्चे पर कुछ स्थिरता जरूर मिलती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन रुपये पर दबाव फिलहाल खत्म होता नहीं दिख रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 13:04:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेल संकट के बीच बड़ी डील, होर्मुज मार्ग खोलने पर राजी हुए अमेरिका-ईरान</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर सहमति बनने की खबर, फंसे जहाजों को जल्द मिल सकती है निकलने की अनुमति।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/america-iran-agree-to-open-hormuz-passage-in-big-deal-amid/article-52854"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-07t154500.443.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के बीच अब राहत की खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर एक अहम सहमति बनी है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी में धीरे-धीरे ढील दी जाएगी और बदले में ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">को चरणबद्ध तरीके से फिर से खोलने पर राजी हुआ है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक आने वाले कुछ घंटों में वहां फंसे कई व्यापारिक जहाजों को निकलने की अनुमति मिल सकती है। पिछले कुछ दिनों से इस समुद्री मार्ग पर हालात काफी तनावपूर्ण बने हुए थे और दुनिया भर की नजरें इसी इलाके पर टिकी थीं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अरबी मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच बैकचैनल बातचीत लगातार चल रही थी। बताया जा रहा है कि गुरुवार देर रात तक कई दौर की बातचीत के बाद स्थिति नरम पड़नी शुरू हुई। अमेरिका-ईरान संघर्ष तेज होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया था। इसके बाद दुनिया के कई देशों की तेल और गैस सप्लाई प्रभावित होने लगी थी। हालात ऐसे हो गए थे कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला। कई शिपिंग कंपनियों ने अपने जहाजों के रूट बदल दिए थे जबकि कुछ जहाज इसी मार्ग में फंस गए थे। समुद्री व्यापार से जुड़े विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे थे कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है तो एशिया और यूरोप के कई देशों में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इसके बंद होने का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा। शुरुआती रिपोर्ट्स में कहा गया था कि अमेरिकी नौसेना ने इलाके में अपनी निगरानी बढ़ा दी थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि ईरान ने भी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी थीं। इसी बीच अमेरिकी लड़ाकू विमान द्वारा ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाने की खबर ने तनाव को और बढ़ा दिया था। बताया गया कि हमले में टैंकर के रडर हिस्से को नुकसान पहुंचा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे जहाज की दिशा नियंत्रित करने में दिक्कत आई। हालांकि इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच बयानबाजी भी काफी तेज हो गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौता नहीं होने की स्थिति में ईरान पर बड़े हमले की चेतावनी दी थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं ईरान की तरफ से भी जवाबी कार्रवाई की बात कही गई थी।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब जो संकेत सामने आ रहे हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उनसे माना जा रहा है कि फिलहाल टकराव टालने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार समुद्री मार्ग को पूरी तरह सामान्य होने में थोड़ा वक्त लग सकता है क्योंकि सुरक्षा जांच और जहाजों की आवाजाही को चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार भी इस खबर पर नजर बनाए हुए हैं। तेल कारोबारियों और शिपिंग कंपनियों को उम्मीद है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलता है तो कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता लौट सकती है। हालांकि अभी तक अमेरिका और ईरान की ओर से इस समझौते को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में दुनिया फिलहाल अगले कुछ घंटों का इंतजार कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 16:25:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सेंसेक्स 1000 अंक गिरकर बंद, निफ्टी 23,898 पर; आईटी शेयरों में भारी बिकवाली</title>
                                    <description><![CDATA[सेंसेक्स गिरावट के पीछे वैश्विक तनाव और IT सेक्टर की कमजोरी, निवेशकों में सतर्कता शेयर बाजार में हफ्ते के आखिरी दिन बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/sensex-fell-by-1000-points-nifty-closed-at-23898-heavy/article-52030"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/business---2026-04-24t163121.009.jpg" alt=""></a><br /><p>आज 24 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली दर्ज की गई। <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">BSE Sensex</span></span> 1000 अंक यानी 1.29% गिरकर 76,664 पर बंद हुआ, जबकि <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Nifty 50</span></span> 275 अंक फिसलकर 23,898 के स्तर पर आ गया। दिनभर के कारोबार में खासतौर पर आईटी सेक्टर के शेयरों में तेज गिरावट ने बाजार का मूड खराब कर दिया।</p>
<p>इस गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय हालात और निवेशकों की कमजोर धारणा मानी जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है, जिसका असर भारतीय बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।</p>
<h5><strong>आईटी शेयरों में दबाव</strong></h5>
<p>आईटी सेक्टर में आज सबसे ज्यादा बिकवाली देखी गई।इसका सबसे बड़ा उदाहरण <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Infosys</span></span> रहा, जिसका शेयर करीब 7% गिरकर 1,155 रुपए पर बंद हुआ।हालांकि कंपनी के तिमाही नतीजे बेहतर रहे और मुनाफा सालाना आधार पर बढ़ा, लेकिन निवेशकों ने भविष्य की ग्रोथ को लेकर सतर्क रुख अपनाया। आईटी कंपनियों की अमेरिकी बाजार पर निर्भरता के कारण भी यह दबाव बढ़ा है।</p>
<h5><strong>वैश्विक संकेत कमजोर</strong></h5>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका-ईरान के बीच हालात अभी भी तनावपूर्ण बने हुए हैं।<span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Donald Trump</span></span> द्वारा सीजफायर की समयसीमा बढ़ाने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं है।ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को कब्जे में लेने और अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों ने निवेशकों को चिंतित किया है। इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है, जो 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।</p>
<h5><strong>विदेशी निवेशकों की बिकवाली</strong></h5>
<p>विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। 23 अप्रैल को ही उन्होंने करीब 3,200 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।इस महीने अब तक विदेशी निवेशक लगभग 47 हजार करोड़ रुपए की निकासी कर चुके हैं, जिससे बाजार में तरलता पर असर पड़ा है। हालांकि घरेलू निवेशकों (DII) ने कुछ हद तक खरीदारी कर संतुलन बनाने की कोशिश की।</p>
<p>बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख आने वाले दिनों की दिशा तय करेंगे।</p>
<p>निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और बाजार की स्थिति स्पष्ट होने तक सतर्क रणनीति अपनाएं। सेंसेक्स गिरावट के मौजूदा दौर में चुनिंदा सेक्टरों में ही निवेश के अवसर तलाशना बेहतर माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 16:32:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शुरुआती तेजी के बाद बाजार फिसला, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में, निवेशकों की बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[शेयर बाजार में गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में। वैश्विक संकेतों और तेल कीमतों के असर से बाजार में उतार-चढ़ाव जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/after-the-initial-rise-the-market-slipped-sensex-nifty-in-red/article-51658"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/stock-market-today-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को शुरुआती मजबूती ज्यादा देर टिक नहीं पाई और बाजार गिरावट के साथ लाल निशान में आ गया। सुबह करीब 9:44 बजे बीएसई सेंसेक्स 33 अंक टूटकर 78,460 के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि एनएसई निफ्टी 37 अंकों की गिरावट के साथ 24,315 के आसपास आ गया। इससे पहले शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 236 अंकों की तेजी के साथ 78,730 तक पहुंच गया था और निफ्टी भी 24,420 के स्तर तक गया था। बाजार में इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, खासकर तब जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">दिन की शुरुआत में बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार में तेजी आई। आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, अदानी एंटरप्राइजेज और एलएंडटी जैसे शेयरों ने शुरुआती बढ़त में योगदान दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">हालांकि, जल्द ही मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण बाजार में गिरावट आ गई। जियो फाइनेंशियल, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और बजाज ऑटो जैसे शेयरों में दबाव देखने को मिला।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती बनी रही। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स करीब 0.5% ऊपर रहा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2% की बढ़त दर्ज की गई। सेक्टोरल स्तर पर पूंजीगत वस्तुएं, मीडिया, PSU बैंक और बिजली सेक्टर में हल्की तेजी देखने को मिली।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">वैश्विक संकेतों का असर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बाजार पर दबाव का प्रमुख कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने वैश्विक सप्लाई चेन पर असर डाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई बढ़ने का जोखिम बढ़ता है, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजारों पर पड़ता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">रुपया और फॉरेक्स बाजार</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 13 पैसे की बढ़त के साथ 92.78 पर पहुंच गया। इंटरबैंक फॉरेन एक्सचेंज में रुपया 92.73 पर खुला और 92.70 तक मजबूत हुआ।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी और रिजर्व बैंक के कदमों से रुपये को समर्थन मिला है। हालांकि, विदेशी निवेशकों की सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितता के चलते बड़ी तेजी की संभावना सीमित मानी जा रही है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">विशेषज्ञों की राय</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संभावित भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। एक निवेश रणनीतिकार ने कहा कि संघर्ष-विराम की समयसीमा नजदीक आने के साथ बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। सूत्रों के मुताबिक, निवेशक फिलहाल जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं और बड़े फैसले लेने से पहले वैश्विक संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से वैश्विक घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अल्पावधि में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशकों को सतर्क रहने और सेक्टर-आधारित रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 13:31:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर: डॉलर के मुकाबले 94 के पार पहुंची भारतीय करेंसी</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल के दबाव में रुपया कमजोर, महंगाई बढ़ने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/rupee-hits-record-low-indian-currency-crosses-94-against-dollar/article-49228"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-27t120632.015.jpg" alt=""></a><br /><p>आज27 मार्च को रुपया पहली बार इतिहास में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94 के पार पहुंच गया। रुपये ने 93.98 के पिछले स्तर से गिरकर 94.14 पर कारोबार की शुरुआत की। यह गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम संकेत मानी जा रही है और इसे भारत समाचार अपडेट में प्रमुखता से देखा जा रहा है।</p>
<p>रुपये में आई यह कमजोरी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी आर्थिक प्रभाव हो सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की गिरावट से आयात महंगा होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल, गैस और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ सकता है। इससे आम उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।</p>
<p>इस गिरावट के पीछे मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव है। मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में डॉलर मजबूत होने पर रुपये पर दबाव बढ़ता है। पिछले एक महीने में ही रुपया करीब 3.5% तक कमजोर हुआ है।</p>
<p>वहीं, वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और शेयर बाजार में गिरावट ने भी रुपये को प्रभावित किया है। निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और रुपये पर दबाव बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की निकासी भी इस गिरावट का एक प्रमुख कारण मानी जा रही है।</p>
<p>विश्लेषकों के अनुसार, अगर वैश्विक तनाव लंबा खिंचता है और कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपये पर दबाव आगे भी जारी रह सकता है। इससे देश का चालू खाता घाटा (Current Account Deficit) बढ़ सकता है और आर्थिक संतुलन प्रभावित हो सकता है।</p>
<p>सरकार और रिजर्व बैंक की नजर इस स्थिति पर बनी हुई है। जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये को स्थिर करने के उपाय किए जा सकते हैं। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में वैश्विक कारकों का प्रभाव अधिक होने के कारण त्वरित राहत मिलना आसान नहीं दिख रहा।</p>
<p>यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय समाचार संकेत देते हैं कि आने वाले समय में आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में निवेशकों और आम लोगों को सतर्क रहने और बदलती परिस्थितियों के अनुसार वित्तीय फैसले लेने की जरूरत है।</p>
<hr />
<h3> </h3>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:07:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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