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                <title>Balen Shah - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Balen Shah RSS Feed</description>
                
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                <title>नेपाल में बालेन सरकार पर उठने लगे सवाल, 100 में 88 वादे अब तक अधूरे</title>
                                    <description><![CDATA[दो महीने में बढ़ी नाराजगी, मंत्रियों के इस्तीफे और अधूरे वादों पर घिरी सरकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/questions-are-being-raised-on-balen-government-in-nepal-88/article-54507"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/_donald-trump-note-nepal-prime-minister.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr">नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को सत्ता संभाले अभी दो महीने ही हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार अब सवालों के घेरे में आ गई है। मार्च में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद बालेन शाह ने बड़े बदलावों और प्रशासनिक सुधारों का दावा करते हुए 100 पॉइंट एजेंडा पेश किया था। उस समय युवाओं और खासकर जेन-जी वर्ग में इसे लेकर काफी उत्साह दिखाई दिया था। लोग मान रहे थे कि पारंपरिक राजनीति से अलग छवि रखने वाले बालेन नेपाल की राजनीति में नया अध्याय शुरू करेंगे। लेकिन अब हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं।</p>
<p dir="ltr">प्रधानमंत्री कार्यालय की ट्रैकर वेबसाइट के मुताबिक बालेन सरकार के 100 में से 88 वादे तय समय से पीछे चल रहे हैं। कई योजनाएं अभी शुरुआती स्तर पर भी नहीं पहुंच पाई हैं। विपक्ष तो सरकार पर सवाल उठा ही रहा है, अब उनकी अपनी पार्टी के नेताओं ने भी सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर करनी शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर भी युवा पूछ रहे हैं कि अगर नई राजनीति में भी पुराने तरीके ही दिखेंगे तो फिर बदलाव कहां है।</p>
<p dir="ltr">सरकार बनने के कुछ ही दिनों के भीतर दो मंत्रियों का इस्तीफा भी बालेन सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। श्रम मंत्री दीपक शाह पर पत्नी को गलत तरीके से नौकरी दिलाने का आरोप लगा, जिसके बाद उन्हें पद छोड़ना पड़ा। वहीं गृह मंत्री सूदन गुरुंग पर एक विवादित कारोबारी से संबंधों के आरोप लगे। मामला बढ़ने के बाद उन्होंने भी इस्तीफा दे दिया। इन घटनाओं ने सरकार की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचाया है।</p>
<p dir="ltr">बालेन शाह ने प्रधानमंत्री बनने के बाद मंत्रालयों की संख्या कम करने, घाटे वाले बोर्ड और समितियों को मर्ज करने, सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों को राजनीति से दूर रखने जैसे कई बड़े वादे किए थे। इसके अलावा डिजिटल निवेश व्यवस्था, ऊर्जा निर्यात नीति और बंद पड़ी परियोजनाओं को फिर शुरू करने की बात भी कही गई थी। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार ने इन वादों के लिए बेहद कम समय सीमा तय कर दी थी। कई योजनाओं को 24 घंटे, 7 दिन और 15 दिन में पूरा करने का दावा किया गया, जो व्यवहारिक तौर पर मुश्किल माना जा रहा था।</p>
<p dir="ltr">नेपाल के राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रशासनिक सुधारों और आयोगों की सिफारिशें लागू करने में लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। लेकिन बालेन सरकार ने तेजी दिखाने के चक्कर में कई फैसले बिना पर्याप्त तैयारी के ले लिए। इसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है।</p>
<p dir="ltr">सरकार की सबसे ज्यादा आलोचना अध्यादेशों के जरिए फैसले लेने को लेकर हो रही है। बालेन सरकार निचले सदन में मजबूत स्थिति में है, लेकिन ऊपरी सदन नेशनल असेंबली में उसका कोई सदस्य नहीं है। ऐसे में सरकार ने कई अहम फैसले अध्यादेशों के जरिए लागू करने की कोशिश की। इनमें छात्र संगठनों और सिविल सर्विस यूनियनों को खत्म करने जैसे प्रस्ताव शामिल थे। बाद में नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने इन अध्यादेशों पर रोक लगा दी। छात्र संगठनों और सरकारी कर्मचारियों ने भी इसका विरोध किया।</p>
<p dir="ltr">बालेन शाह ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि सरकारी दफ्तरों और स्कूलों को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त करना जरूरी है। उनका कहना था कि छात्र संगठन और यूनियन अब पेशेवर संस्थाओं की जगह राजनीतिक दलों के “स्लीपर सेल” बन चुके हैं। हालांकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बता रहा है।</p>
<p dir="ltr">इसी बीच सरकार द्वारा शुरू किए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने भी विवाद खड़ा कर दिया है। काठमांडू घाटी समेत कई इलाकों में बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक करीब 4 हजार ढांचे हटाए गए हैं, जिससे लगभग 15 हजार लोग प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों का कहना है कि उन्हें बिना पर्याप्त समय दिए घरों और दुकानों से हटाया गया।</p>
<p dir="ltr">बालेन शाह जब काठमांडू के मेयर थे, तब भी उनकी पहचान बुलडोजर एक्शन को लेकर बनी थी। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने उसी मॉडल को देशभर में लागू करने की कोशिश की। लेकिन अब यह फैसला गरीब और भूमिहीन लोगों के विरोध का कारण बन रहा है।</p>
<p dir="ltr">भारत-नेपाल सीमा पर भी सरकार के नए नियमों को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। नेपाल सरकार ने भारत से आने वाले सामान पर कस्टम ड्यूटी के नियमों को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। नियम के अनुसार 100 नेपाली रुपए से ज्यादा का सामान लाने पर टैक्स देना होगा। दशकों से सीमा पर रहने वाले लोग भारत के शहरों से राशन, कपड़े और घरेलू सामान खरीदते रहे हैं। अब नए नियमों के बाद लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p dir="ltr">बालेन शाह की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। चुनाव के दौरान उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही की बात कही थी, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अब तक एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की। संसद में विपक्ष लगातार उनसे जवाब मांग रहा है। यहां तक कि उनकी अपनी पार्टी के नेताओं ने भी सवाल उठाए हैं कि सरकार संसद के प्रति जवाबदेह क्यों नहीं दिख रही। हालांकि सरकार का दावा है कि कुछ बड़े फैसले लागू किए जा चुके हैं। गरीब मरीजों के लिए अस्पतालों में मुफ्त बेड की व्यवस्था और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच शुरू करना इनमें शामिल है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:12:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>“हमने वोट दिया, फिर घर क्यों तोड़ा?” 11 साल की बच्ची की भावुक चिट्ठी बनी इंसाफ की आवाज</title>
                                    <description><![CDATA[काठमांडू में बुलडोजर कार्रवाई के बाद 11 साल की बच्ची की चिट्ठी वायरल। बेघर परिवारों की पीड़ा और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/%E2%80%9Cwe-voted-then-why-did-you-break-the-house%E2%80%9D-emotional/article-53340"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t142209.943.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नेपाल की राजधानी काठमांडू में अवैध बस्तियों पर चल रहे बुलडोजर अभियान के बीच एक 11 साल की बच्ची की भावुक चिट्ठी ने पूरे मामले को मानवीय नजरिए से फिर सुर्खियों में ला दिया है। इस चिट्ठी ने उन हजारों परिवारों की पीड़ा को सामने रख दिया है जो पिछले कुछ हफ्तों में अचानक बेघर हो गए हैं। काठमांडू के थापाथली इलाके से सामने आया यह मामला अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">तीसरी कक्षा में पढ़ने वाली राधिका महतो ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को लिखे पत्र में सीधे सवाल खड़े किए हैं। उसने लिखा कि उनके परिवार ने चुनाव में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">घंटी</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">चुनाव चिन्ह और पार्टी को वोट दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो फिर उनका घर क्यों तोड़ दिया गया। पत्र में बच्ची ने साफ शब्दों में पूछा है</span>, “<span lang="hi" xml:lang="hi">अब हम कहां रहेंगे और पढ़ाई कैसे करेंगे</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह चिट्ठी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोगों के बीच गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। बताया जा रहा है कि बच्ची का परिवार पहले थापाथली क्षेत्र की एक झुग्गी बस्ती में अस्थायी झोपड़ी में रहता था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे प्रशासन की कार्रवाई के बाद ढहा दिया गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">घटना के बाद राधिका का परिवार अन्य सैकड़ों परिवारों के साथ काठमांडू से करीब 75 किलोमीटर दूर बनेपा नगरपालिका के अस्थायी शिविर में भेज दिया गया है। चिट्ठी में बच्ची ने आगे लिखा कि उनके पास अब किराए का घर लेने के पैसे भी नहीं हैं और हालात पहले से ज्यादा खराब हो गए हैं। स्थानीय स्कूल में पढ़ाई कर रही राधिका की शिक्षा भी इस कार्रवाई के बाद रुक गई है। वह प्रशासन से अपील करती दिखी कि बच्चों के लिए पढ़ाई की व्यवस्था की जाए और रहने के लिए कोई स्थायी इंतजाम हो।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रशासन की ओर से काठमांडू में पिछले कुछ हफ्तों में करीब 15 हजार से ज्यादा भूमिहीन लोगों को हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं लगभग 4 हजार अस्थायी ढांचों और झुग्गियों को तोड़ा गया है। सरकार का कहना है कि ये बस्तियां नदी किनारे और सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए शहरी विकास और सुरक्षा के लिहाज से यह कार्रवाई जरूरी थी। हालांकि इस अभियान को लेकर लगातार विरोध भी बढ़ता जा रहा है और कई मानवाधिकार संगठन इसे बिना पुनर्वास की प्रक्रिया के किया गया कदम बता रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इसी बीच यह मामला नेपाल के सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। अदालत ने सुनवाई के दौरान अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा है कि बिना उचित पुनर्वास योजना के किसी भी झुग्गी बस्ती को नहीं हटाया जाए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि विस्थापन की प्रक्रिया में लोगों के आवास</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी अधिकारों की रक्षा जरूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वरना यह मानवीय संकट का रूप ले सकता है। दूसरी तरफ</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रशासन और सरकार की ओर से बुलडोजर अभियान का बचाव किया जा रहा है और कहा जा रहा है कि शहर को व्यवस्थित करना और अवैध अतिक्रमण हटाना जरूरी कदम है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। काठमांडू के बाहर भी विरोध प्रदर्शन और नाराजगी देखने को मिल रही है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां लोग सरकार से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। इसी बीच 11 साल की बच्ची की यह चिट्ठी लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा में है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसने एक प्रशासनिक कार्रवाई को सीधे मानवीय दर्द से जोड़ दिया है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:50:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>नेपाल को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री, आज शपथ लेंगे बालेंद्र शाह</title>
                                    <description><![CDATA[बहुमत के साथ सत्ता में आई पार्टी, युवा नेतृत्व से बदलाव की उम्मीदें तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/69c625cc64915/article-49232"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/nepal-pm-balen-shah.jpg" alt=""></a><br /><p>नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेंद्र शाह आज, शुक्रवार को देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। वे नेपाल के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बनेंगे। यह घटनाक्रम भारत समाचार अपडेट और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>हाल ही में संपन्न हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 182 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। इसके बाद पार्टी की केंद्रीय समिति ने सर्वसम्मति से उन्हें संसदीय दल का नेता चुना, जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया।</p>
<p>शपथ ग्रहण से एक दिन पहले संसद के अस्थायी भवन में नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान वरिष्ठ सदस्य द्वारा सभी सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। खास बात यह रही कि 63 सांसदों ने नेपाली के साथ-साथ अपनी मातृभाषाओं में भी शपथ ली, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।</p>
<p>संसद में दलों के आधार पर बैठने की व्यवस्था की गई थी, जिसमें प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद एक ही पंक्ति में नजर आए। शपथ ग्रहण समारोह में अधिकांश सांसद पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, जिससे कार्यक्रम का सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया।</p>
<p>प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले नए नेतृत्व ने जनता से जुड़े संदेश भी दिए हैं। शपथ से एक दिन पहले जारी एक देशभक्ति गीत के जरिए राष्ट्रीय एकता और विकास का संदेश देने की कोशिश की गई। इस पहल को युवाओं के बीच अच्छा समर्थन मिला है।</p>
<p>हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। आर्थिक स्थिति, राजनीतिक स्थिरता और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को संतुलित रखना नई सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि नया नेतृत्व इन मुद्दों से कैसे निपटता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:23:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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