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                <title>political update - दैनिक जागरण</title>
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                            <item>
                <title>राकेश यादव ने बदला राजनीतिक ठिकाना, कांग्रेस को दिया बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता और प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाने के बाद भाजपा का दामन थामा। उनके फैसले से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rakesh-yadav-changed-political-destination-gave-a-big-blow-to/article-58371"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव और पूर्व प्रवक्ता राकेश सिंह यादव भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। राजधानी भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। राकेश यादव के भाजपा में शामिल होने को प्रदेश की राजनीति का अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। राकेश सिंह यादव लंबे समय तक कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे और विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता के रूप में उन्होंने संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि पिछले कुछ समय से वे कांग्रेस नेतृत्व की कार्यप्रणाली को लेकर असहमति जता रहे थे। अंततः उन्होंने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया और अब भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद राकेश यादव ने कहा कि उन्होंने प्रदेश और देश के विकास की सोच को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने बीते वर्षों में विकास, सुशासन और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर उतारा है। उन्होंने कहा कि वे अब भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में संगठन को मजबूत बनाने और आम जनता के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं, गरीब कल्याण योजनाओं, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में हुए कार्यों से प्रेरित होकर उन्होंने भाजपा से जुड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा के मंच से उन्हें समाज और प्रदेश की जनता के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राकेश यादव का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर काम करने वाला संगठन है। उन्होंने कहा कि पार्टी में प्रत्येक कार्यकर्ता को समान सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राकेश यादव का राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ पार्टी के लिए उपयोगी साबित होगी और उनके आने से संगठन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लगातार अपने संगठन का विस्तार कर रही है और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े अनुभवी लोग पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से प्रभावित होकर जुड़ रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ऐसे में अनुभवी नेताओं का पार्टी में स्वागत किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी वरिष्ठ नेता का एक दल छोड़कर दूसरे दल में शामिल होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे फैसलों का असर राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक रणनीतियों पर भी देखने को मिलता है। राकेश यादव के भाजपा में शामिल होने से प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका पर सभी की नजर रहेगी। मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के अभियान में जुटी हुई है। पार्टी सदस्यता अभियान, संगठन विस्तार और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार नए लोगों को जोड़ रही है। ऐसे समय में राकेश यादव जैसे अनुभवी नेता का पार्टी से जुड़ना संगठन के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:15:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राज्यसभा उम्मीदवारी पर सुप्रीम कोर्ट से मीनााक्षी नटराजन को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नामांकन खारिज होने के खिलाफ दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज, चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप से किया इनकार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a2bcf22157b3/article-55735"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/meenakshi-natarajan-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद में कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने शुक्रवार को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने राज्यसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत न्यायालय का हस्तक्षेप सीमित है और ऐसे मामलों में चुनावी प्रक्रिया के दौरान दखल नहीं दिया जा सकता। न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब किसी उम्मीदवार का नामांकन रिटर्निंग अधिकारी द्वारा खारिज कर दिया जाता है, तब संविधान के प्रावधानों को देखते हुए अदालत सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकती। पीठ ने कहा कि पहले भी कई मामलों में चुनाव प्रक्रिया के बीच अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत अदालतों का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन संवैधानिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए न्यायालयों ने हस्तक्षेप से परहेज किया है। सुनवाई के दौरान कांग्रेस नेता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि नामांकन पत्र खारिज करने में स्पष्ट और गंभीर त्रुटि हुई है। उनके अनुसार यह ऐसा मामला था जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी था। सिंघवी ने यह भी सवाल उठाया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में था, तब भी चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उन्होंने अदालत में कहा कि उनकी मुवक्किल केवल चुनाव लड़ने का अवसर चाहती थीं। उनका तर्क था कि किसी उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतरने का मौका मिलना चाहिए और अंतिम फैसला मतदाताओं या निर्वाचन प्रक्रिया पर छोड़ दिया जाना चाहिए। सिंघवी ने यह भी कहा कि कांग्रेस द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष की गई शिकायत पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया था, इसके बावजूद परिणाम घोषित कर दिए गए। हालांकि अदालत ने इस दलील पर सहमति नहीं जताई। पीठ ने पूछा कि क्या ऐसा कोई उदाहरण मौजूद है जिसमें नामांकन खारिज होने के बाद चुनाव प्रक्रिया के बीच सर्वोच्च अदालत ने हस्तक्षेप किया हो। अदालत ने कहा कि चाहे रिटर्निंग अधिकारी का निर्णय गलत ही क्यों न हो, लेकिन कानून ने इसके लिए अलग उपचार का प्रावधान किया है और चुनाव प्रक्रिया के दौरान सीधे न्यायिक हस्तक्षेप उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान भाजपा उम्मीदवारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी भी उपस्थित रहे। उन्होंने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव लड़ना कोई मौलिक अधिकार नहीं बल्कि एक वैधानिक अधिकार है। इसलिए अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च अदालत के कई पुराने फैसलों में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि चुनाव लड़ने का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की श्रेणी में नहीं आता। मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो कांग्रेस ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों में से एक के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने अपना नामांकन दाखिल किया था, लेकिन भाजपा नेताओं ने उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई। आरोप लगाया गया कि उन्होंने अपने चुनावी हलफनामे में हैदराबाद की एक अदालत से जुड़े मामले का पूरा विवरण नहीं दिया। आपत्तियों पर विचार करने के बाद रिटर्निंग अधिकारी और मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा ने नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया। आदेश में कहा गया कि उनके द्वारा दाखिल किया गया फॉर्म-26 अधूरा था और उसमें एक न्यायिक नोटिस का उल्लेख नहीं किया गया था। रिटर्निंग अधिकारी ने इसे महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने की श्रेणी में माना।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस निर्णय के बाद कांग्रेस ने इसे राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चुनौती दी। पार्टी का कहना था कि मीनाक्षी नटराजन किसी आपराधिक मामले में आरोपी नहीं हैं। कांग्रेस के अनुसार जिस मामले का हवाला दिया गया, उसमें उनका नाम केवल एक अलग निजी शिकायत में आया था और उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं हुई थी। पार्टी ने यह भी तर्क दिया कि प्रारंभिक नोटिस को लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता, इसलिए उसका खुलासा करना आवश्यक नहीं था। सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि इन दलीलों के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की। अदालत ने साफ किया कि उसके आदेश का असर भविष्य में दायर की जाने वाली किसी चुनाव याचिका पर नहीं पड़ेगा। यानी यदि मीनाक्षी नटराजन या कांग्रेस इस मामले को आगे चुनाव याचिका के रूप में संबंधित उच्च न्यायालय में ले जाना चाहें तो उनके लिए रास्ता खुला रहेगा। उधर, राज्यसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए जा चुके हैं। नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद चुनावी मुकाबले की संभावना लगभग समाप्त हो गई थी और भाजपा उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 15:20:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>टीएमसी को एक और झटका, राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने दिया इस्तीफा</title>
                                    <description><![CDATA[एक हफ्ते में तीसरे सांसद ने छोड़ी पार्टी, बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल; ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठने लगे सवाल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a2a563257bd5/article-55605"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/prakash-chik-baraik.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बड़ा झटका लगा है। पार्टी के राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपने पद से इस्तीफा देकर राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। पिछले एक सप्ताह के भीतर टीएमसी छोड़ने वाले वे तीसरे राज्यसभा सांसद बन गए हैं। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव के इस्तीफे ने भी पार्टी को असहज स्थिति में ला दिया था। लगातार हो रहे इन इस्तीफों को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">जानकारी के मुताबिक प्रकाश चिक बराइक ने अपना इस्तीफा राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को सौंप दिया है। अपने संक्षिप्त इस्तीफा पत्र में उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का अनुरोध किया है। साथ ही उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मिले सहयोग के लिए सभापति और राज्यसभा सचिवालय का आभार भी व्यक्त किया। हालांकि इस्तीफे के पीछे की स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में बदले राजनीतिक समीकरणों का असर अब टीएमसी के संगठन और संसदीय दल पर भी दिखाई देने लगा है। राज्यसभा में पार्टी की ताकत लगातार घट रही है। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे के बाद उच्च सदन में टीएमसी सांसदों की संख्या और कम हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd"> बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही थीं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने सार्वजनिक रूप से संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर नाराजगी जताई थी। अब सांसदों के इस्तीफे उस असंतोष को और स्पष्ट रूप से सामने ला रहे हैं। बताया जा रहा है कि राज्य में कई विधायक भी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं। इसी बीच कुछ नेताओं के दूसरे राजनीतिक समूहों के संपर्क में होने की चर्चाएं भी तेज हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी तक इन अटकलों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। टीएमसी के लिए चिंता की बात केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं है। बंगाल विधानसभा में भी पार्टी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं मानी जा रही। राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच विपक्ष लगातार दावा कर रहा है कि टीएमसी के कई विधायक और नेता पार्टी नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने ऐसे समय में राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है, जब राज्य में विपक्षी दल लगातार टीएमसी पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में और सांसद या विधायक पार्टी छोड़ते हैं तो इसका असर राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी की भूमिका पर भी पड़ सकता है। टीएमसी लंबे समय से खुद को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत विपक्षी शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश करती रही है। लेकिन लगातार सामने आ रही अंदरूनी चुनौतियां उस रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं। पार्टी नेतृत्व के सामने अब संगठन को एकजुट रखने और कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd">उधर, विपक्षी दल इन इस्तीफों को टीएमसी के कमजोर होते जनाधार और संगठनात्मक संकट से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी के भीतर बढ़ती असहमति अब खुलकर सामने आने लगी है। हालांकि टीएमसी के नेताओं का दावा है कि पार्टी अभी भी मजबूत स्थिति में है और कुछ नेताओं के जाने से संगठन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। आने वाले सप्ताह टीएमसी के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। यदि पार्टी नेतृत्व असंतुष्ट नेताओं को मनाने में सफल रहता है तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन यदि इस्तीफों का सिलसिला जारी रहा तो बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे सकते हैं। प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल अभी थमने वाली नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 12:36:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>केरल में किसे मिलेगी कमान? कांग्रेस में CM के लिए इन 3 नेताओं की सबसे ज्यादा चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर केसी वेणुगोपाल, रमेश चेन्निथला और वीडी सतीशन के नाम चर्चा में हैं। विधायकों की राय पर रिपोर्ट सौंपी गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/who-will-get-the-command-in-kerala-these-3-leaders/article-52930"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-08t153354.370.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर अंदरखाने चर्चा अब खुलकर सामने आने लगी है। शुक्रवार को पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को सौंप दी। बताया जा रहा है कि रिपोर्ट तैयार करने से पहले पर्यवेक्षकों ने राज्य के कांग्रेस विधायकों से अलग-अलग बातचीत की और उनकी राय जानी। इस पूरी कवायद के बाद अब पार्टी नेतृत्व के सामने तीन बड़े नाम उभरकर आए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा केसी वेणुगोपाल की हो रही है। सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">करीब 40 से ज्यादा विधायक उनके पक्ष में बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर उन्हें संगठन और दिल्ली नेतृत्व दोनों के बीच मजबूत पकड़ वाला नेता माना जाता है। हालांकि मामला इतना सीधा भी नहीं दिख रहा। वे राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं और यही वजह है कि पार्टी हाईकमान उन्हें राज्य की राजनीति में भेजने को लेकर सावधानी बरत सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व इस बार ऐसा चेहरा सामने लाना चाहता है जो संगठन और गठबंधन दोनों को साथ लेकर चल सके। इसी कारण दूसरे विकल्पों पर भी गंभीरता से चर्चा हो रही है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमेश चेन्निथला का नाम भी दौड़ में बना हुआ है। उनके समर्थन में 20 से ज्यादा विधायकों का झुकाव बताया जा रहा है। चेन्निथला लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और पार्टी के पुराने तथा अनुभवी नेताओं में उनकी गिनती होती है। वहीं विपक्ष के नेता वीडी सतीशन को लेकर भी कांग्रेस और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UDF <span lang="hi" xml:lang="hi">सहयोगी दलों के बीच सकारात्मक माहौल बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार </span>IUML, <span lang="hi" xml:lang="hi">केरल कांग्रेस (जोसेफ गुट) और </span>RSP <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे सहयोगी दल सतीशन के नाम पर सहमति जता रहे हैं। उनका मानना है कि उन्होंने विपक्ष के नेता के तौर पर सरकार के खिलाफ आक्रामक भूमिका निभाई और जमीनी मुद्दों पर सक्रियता दिखाई।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व किसी जल्दबाजी में नजर नहीं आ रहा। पार्टी पहले विधायकों की राय</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गठबंधन सहयोगियों का रुख और आगामी राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर फैसला लेना चाहती है। ऐसा कहा जा रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में दिल्ली में और बैठकों का दौर चल सकता है। केरल में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस इस बार ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो पार्टी को सीधे सत्ता की लड़ाई में मजबूत स्थिति में ला सके। इसी वजह से मुख्यमंत्री पद को लेकर मंथन लगातार जारी है और अंतिम फैसला हाईकमान के स्तर पर ही होने की संभावना मानी जा रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 May 2026 15:43:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>MP विधानसभा विशेष सत्र में महिला आरक्षण पर प्रस्ताव, सरकार-विपक्ष आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव, पक्ष-विपक्ष आमने-सामने]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/government-opposition-face-to-face-on-proposal-on-womens-reservation-in/article-52186"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-vidhansabha.png" alt=""></a><br /><p>मध्यप्रदेश विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र सोमवार को आयोजित किया गया, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर व्यापक चर्चा शुरू हुई। सत्र की कार्यवाही सुबह 11 बजे आरंभ हुई और शुरुआत दिवंगत पूर्व विधायकों, सांसदों व अन्य गणमान्य व्यक्तियों को श्रद्धांजलि देने के साथ की गई। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सदन में महिला सशक्तिकरण से जुड़ा शासकीय संकल्प प्रस्तुत किया।</p>
<p>इस संकल्प में संसद और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने और परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे प्रभावी बनाने की बात शामिल है। सरकार का कहना है कि यह कदम देश की आधी आबादी को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।</p>
<p>सत्र के दौरान महिला आरक्षण के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न महिला कल्याण योजनाओं और उपलब्धियों पर भी चर्चा हुई। सत्तापक्ष की ओर से मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बहस की शुरुआत करते हुए महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है।</p>
<p>वहीं विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति स्पष्ट की। कांग्रेस ने मांग की कि मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में से 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। विपक्षी दलों ने यह भी कहा कि आरक्षण के क्रियान्वयन में देरी नहीं होनी चाहिए और इसे जल्द लागू किया जाए।</p>
<p>राजनीतिक बयानबाजी भी सत्र का प्रमुख हिस्सा रही। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर उदासीनता का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की। इससे सदन में बहस का माहौल तीखा बना रहा।</p>
<p>विशेष सत्र को लेकर सुबह से ही राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। सत्र से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों ने विधायक दल की बैठकें कर अपनी-अपनी रणनीति तय की। इससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि महिला आरक्षण का मुद्दा राजनीतिक रूप से भी अहम बना हुआ है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 11:13:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमपी कांग्रेस के लिए बुरी खबर! एक और विधायक की सदस्यता रद्द, कोर्ट सजा के बाद कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[एमपी कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द, 3 साल की सजा के बाद विधानसभा की कार्रवाई। जानिए पूरा मामला और राजनीतिक असर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bad-news-for-mp-congress-membership-of-another-mla-canceled/article-50042"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-congress-mla-rajendra-bharti-disqualified.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मध्यप्रदेश की सियासत में शुक्रवार को उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस के दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द कर दी गई। दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा 27 साल पुराने एफडी घोटाले में दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाए जाने के बाद यह कार्रवाई हुई। दो साल से अधिक सजा के प्रावधान के तहत विधानसभा सचिवालय ने देर रात आदेश जारी कर भारती की सदस्यता समाप्त कर दी। गुरुवार को सजा सुनाए जाने के बाद रात करीब 10:30 बजे सचिवालय खुला और कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए निर्णय लागू किया गया। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">मुख्य विवरण</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अदालत ने राजेंद्र भारती को दो धाराओं में तीन-तीन साल और एक अन्य धारा में दो साल की सजा सुनाई है। इस मामले में सह-आरोपी पूर्व बैंक क्लर्क रघुवीर शरण प्रजापति को भी तीन साल की सजा दी गई। हालांकि कोर्ट ने भारती को जमानत दे दी है और उन्हें उच्च न्यायालय में अपील के लिए 60 दिन का समय भी दिया गया है। विधानसभा सचिवालय ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर यह कार्रवाई की, जिसके अनुसार दो साल या उससे अधिक सजा मिलने पर जनप्रतिनिधि की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सियासी हलचल तेज</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">कोर्ट के फैसले और सदस्यता रद्द होने की खबर के बाद कांग्रेस नेताओं में सक्रियता बढ़ गई। देर रात पूर्व विधायक पीसी शर्मा और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी विधानसभा पहुंचे और अधिकारियों से चर्चा की। उन्होंने प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा से कहा कि मामले में स्टे मिलने की संभावना है, ऐसे में सदस्यता समाप्त करना जल्दबाजी है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वे केवल कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पृष्ठभूमि और मामला</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यह मामला 27 साल पुराने एफडी घोटाले से जुड़ा है, जिसमें बैंकिंग लेनदेन में अनियमितताओं के आरोप लगे थे। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने बुधवार को भारती को दोषी करार दिया और गुरुवार को सजा सुनाई। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह केस लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में था और हाल ही में इसमें तेजी आई थी, जिसके बाद फैसला आया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आधिकारिक स्थिति</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा सचिवालय ने पूरी कानूनी समीक्षा के बाद ही आदेश जारी किया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के स्थापित नियमों के अनुरूप है और इसमें किसी प्रकार की विवेकाधीन छूट नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">प्रभाव और विश्लेषण</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इस घटनाक्रम का सीधा असर मध्यप्रदेश की राजनीति पर पड़ सकता है। कांग्रेस के लिए यह एक और झटका माना जा रहा है, खासकर तब जब पार्टी पहले से ही संगठनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे आगामी राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं और दतिया सीट पर उपचुनाव की स्थिति भी बन सकती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Apr 2026 14:03:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेपाल को मिला सबसे युवा प्रधानमंत्री, आज शपथ लेंगे बालेंद्र शाह</title>
                                    <description><![CDATA[बहुमत के साथ सत्ता में आई पार्टी, युवा नेतृत्व से बदलाव की उम्मीदें तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/69c625cc64915/article-49232"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/nepal-pm-balen-shah.jpg" alt=""></a><br /><p>नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता बालेंद्र शाह आज, शुक्रवार को देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। वे नेपाल के इतिहास में सबसे कम उम्र के प्रधानमंत्री बनेंगे। यह घटनाक्रम भारत समाचार अपडेट और अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>
<p>हाल ही में संपन्न हुए प्रतिनिधि सभा चुनाव में उनकी पार्टी ने 182 सीटों पर जीत हासिल कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। इसके बाद पार्टी की केंद्रीय समिति ने सर्वसम्मति से उन्हें संसदीय दल का नेता चुना, जिससे उनके प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया।</p>
<p>शपथ ग्रहण से एक दिन पहले संसद के अस्थायी भवन में नवनिर्वाचित सांसदों का शपथ समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान वरिष्ठ सदस्य द्वारा सभी सांसदों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। खास बात यह रही कि 63 सांसदों ने नेपाली के साथ-साथ अपनी मातृभाषाओं में भी शपथ ली, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है।</p>
<p>संसद में दलों के आधार पर बैठने की व्यवस्था की गई थी, जिसमें प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसद एक ही पंक्ति में नजर आए। शपथ ग्रहण समारोह में अधिकांश सांसद पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे, जिससे कार्यक्रम का सांस्कृतिक महत्व और बढ़ गया।</p>
<p>प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से पहले नए नेतृत्व ने जनता से जुड़े संदेश भी दिए हैं। शपथ से एक दिन पहले जारी एक देशभक्ति गीत के जरिए राष्ट्रीय एकता और विकास का संदेश देने की कोशिश की गई। इस पहल को युवाओं के बीच अच्छा समर्थन मिला है।</p>
<p>हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। आर्थिक स्थिति, राजनीतिक स्थिरता और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को संतुलित रखना नई सरकार के सामने बड़ी जिम्मेदारी होगी। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि नया नेतृत्व इन मुद्दों से कैसे निपटता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:23:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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