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                <title>devotion - दैनिक जागरण</title>
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                <title>गुरु पूर्णिमा 2026: 5 जुलाई, रविवार को मनाया जाएगा गुरु श्रद्धा और ज्ञान का महापर्व</title>
                                    <description><![CDATA[5 जुलाई 2026, रविवार को देशभर में गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। इस दिन गुरु पूजन, दान, सत्संग और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व माना जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/festival-festival/guru-purnima-2026-the-great-festival-of-guru-shraddha-and/article-57455"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/guru-purnima-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सदैव सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि जीवन की सही दिशा दिखाने वाला मार्गदर्शक भी होता है। इसी गुरु परंपरा को सम्मान देने के लिए हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि पर गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा 5 जुलाई, रविवार को मनाई जाएगी। इस अवसर पर देशभर के मंदिरों, आश्रमों, मठों और धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना, सत्संग, भजन-कीर्तन और गुरु वंदना के कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लाखों श्रद्धालु अपने गुरु का आशीर्वाद लेने के लिए विभिन्न धार्मिक स्थलों पर पहुंचेंगे और ज्ञान, सेवा तथा संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेंगे। सनातन धर्म में गुरु को भगवान से भी ऊंचा स्थान दिया गया है। प्रसिद्ध श्लोक <em>"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः"</em> गुरु की महिमा का वर्णन करता है। मान्यता है कि गुरु ही वह शक्ति हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। गुरु के बिना जीवन अधूरा माना जाता है, क्योंकि सही मार्गदर्शन ही व्यक्ति को सफलता, संस्कार और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों का संकलन किया, महाभारत की रचना की और अठारह पुराणों का संपादन किया। भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यवस्थित स्वरूप देने में उनका योगदान अतुलनीय माना जाता है। इसलिए इस दिन उन्हें आदिगुरु के रूप में भी याद किया जाता है और श्रद्धापूर्वक पूजा की जाती है। गुरु पूर्णिमा का महत्व केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी बहुत बड़ा है। इस दिन विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं, उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं और उनसे जीवन में आगे बढ़ने का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। कई स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में गुरु सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हैं और उनके मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">देशभर के प्रमुख आश्रमों और आध्यात्मिक केंद्रों में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विशेष आयोजन किए जाते हैं। सुबह से ही श्रद्धालु स्नान कर पूजा की तैयारी करते हैं। भगवान विष्णु, महर्षि वेदव्यास और अपने गुरु का पूजन किया जाता है। फूल, फल, दीपक, धूप और प्रसाद अर्पित कर आशीर्वाद लिया जाता है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं और जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र तथा अन्य आवश्यक सामग्री का दान करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि गुरु पूर्णिमा पर किया गया दान और सेवा विशेष पुण्य प्रदान करता है। बौद्ध धर्म में भी गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि ज्ञान प्राप्त करने के बाद भगवान बुद्ध ने इसी दिन सारनाथ में अपने प्रथम पांच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। इसे धर्मचक्र प्रवर्तन दिवस भी कहा जाता है। इसलिए बौद्ध अनुयायी इस दिन ध्यान, प्रार्थना और धर्म उपदेश के कार्यक्रम आयोजित करते हैं। जैन धर्म में भी गुरु पूर्णिमा के अवसर पर आचार्यों और साधु-संतों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आधुनिक समय में गुरु पूर्णिमा का स्वरूप कुछ बदला जरूर है, लेकिन इसकी भावना आज भी वैसी ही बनी हुई है। आज लोग अपने गुरु, शिक्षक और मार्गदर्शक को सोशल मीडिया, वीडियो कॉल और डिजिटल माध्यमों से भी शुभकामनाएं भेजते हैं। कई धार्मिक संस्थाएं ऑनलाइन प्रवचन और लाइव सत्संग का आयोजन करती हैं, जिनमें देश-विदेश से श्रद्धालु जुड़ते हैं। इससे यह पर्व नई पीढ़ी तक भी प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। गुरु पूर्णिमा केवल पूजा-पाठ का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन और सीखने का अवसर भी है। यह पर्व हमें विनम्रता, अनुशासन, सेवा और ज्ञान का महत्व समझाता है। गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा मानी जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">गुरु पूर्णिमा के दिन कई लोग नए कार्यों की शुरुआत भी करते हैं। आध्यात्मिक साधना, योग, ध्यान और धार्मिक अध्ययन प्रारंभ करने के लिए भी यह दिन शुभ माना जाता है। कई आश्रमों में नए शिष्यों को दीक्षा दी जाती है और आध्यात्मिक जीवन की शुरुआत कराई जाती है। इस दिन किए गए संकल्पों को विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु पूर्णिमा पर पीले वस्त्र पहनना, भगवान विष्णु की पूजा करना, केले के पेड़ की पूजा करना और ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल और दक्षिणा का दान करना शुभ माना जाता है। साथ ही अपने गुरु या शिक्षकों का सम्मान करना और उनका आशीर्वाद लेना भी इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य माना गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">5 जुलाई 2026, रविवार को मनाई जाने वाली गुरु पूर्णिमा एक बार फिर पूरे देश में श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का संदेश लेकर आएगी। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि जीवन में सफलता पाने के लिए केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सही मार्गदर्शन भी उतना ही आवश्यक है। गुरु का सम्मान, उनके प्रति कृतज्ञता और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प ही इस पर्व की वास्तविक भावना है। भारतीय संस्कृति में सदियों से चली आ रही गुरु-शिष्य परंपरा आज भी समाज को संस्कार, नैतिकता और ज्ञान की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है और गुरु पूर्णिमा इसी अमूल्य परंपरा का सबसे महत्वपूर्ण उत्सव है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पर्व त्यौहार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:45 +0530</pubDate>
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                <title>रामलला का दिव्य सूर्य तिलक, 9 मिनट तक ललाट पर चमकी किरणें</title>
                                    <description><![CDATA[रामनवमी पर अयोध्या में भव्य आयोजन, लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ramlalas-divine-sun-tilak-shone-on-the-forehead-for-9/article-49236"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/ram-lalla.jpg" alt=""></a><br /><p>रामनवमी के पावन अवसर पर आज अयोध्या में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का भव्य सूर्य तिलक किया गया। इस दौरान करीब 9 मिनट तक सूर्य की किरणें भगवान के ललाट पर पड़ीं, जिससे पूरा गर्भगृह दिव्य प्रकाश से भर उठा।</p>
<p>यह प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दूसरा अवसर है जब इस विशेष सूर्य तिलक का आयोजन किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी क्षण भगवान राम का जन्म माना जाता है। सूर्य तिलक के समय गर्भगृह में 14 पुजारी मौजूद रहे, जिन्होंने वैदिक मंत्रों के बीच विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद आरती संपन्न हुई और कुछ समय के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए।</p>
<p>इससे पहले सुबह रामलला का पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग किया गया। भगवान को स्वर्ण जड़ित पीतांबर वस्त्र पहनाए गए, जिनमें सोने-चांदी की बारीक कढ़ाई की गई है। इसके साथ ही आकर्षक आभूषण और मुकुट से श्रृंगार किया गया।</p>
<p>सूर्य तिलक के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था तैयार की गई थी। अष्टधातु के 20 पाइप और करीब 65 फीट लंबे सिस्टम के जरिए सूर्य की किरणों को गर्भगृह तक पहुंचाया गया। इसमें लेंस और दर्पणों का उपयोग कर किरणों को सीधे भगवान के मस्तक तक केंद्रित किया गया।</p>
<p>रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अनुमान है कि करीब 10 लाख भक्त रामलला के दर्शन के लिए आए हैं। मंदिर परिसर, राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन का समय भी बढ़ाकर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक कर दिया गया।</p>
<p>पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल, अर्धसैनिक बल और विशेष सुरक्षा एजेंसियां तैनात हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p>सूर्य तिलक के बाद भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा, जिसमें विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और फलाहार शामिल हैं। यह प्रसाद बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।</p>
<p>रामनवमी के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर अयोध्या को आस्था, परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम का केंद्र बना दिया है। भक्तों के लिए यह क्षण आध्यात्मिक अनुभव से कम नहीं रहा, जहां श्रद्धा और विज्ञान का अद्भुत मेल देखने को मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:31:48 +0530</pubDate>
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