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                <title>temple rituals - दैनिक जागरण</title>
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                <description>temple rituals RSS Feed</description>
                
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                <title>मंगलवार भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल</title>
                                    <description><![CDATA[चंदन, त्रिपुंड, भांग और रजत मुकुट से हुआ दिव्य श्रृंगार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/baba-mahakal-dressed-as-a-king-in-bhasma-aarti-on/article-54702"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mahakal-bhasma-aarti-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं को बाबा महाकाल के दिव्य और मनमोहक स्वरूप के दर्शन हुए। अलसुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम शुरू हुआ। गर्भगृह में स्थापित सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया और दूध, दही, घी, शक्कर तथा फलों के रस से निर्मित पंचामृत से विशेष अभिषेक संपन्न हुआ। मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और घंटियों की ध्वनि के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रतिदिन की तरह भस्म आरती से पहले पुजारियों ने प्रथम घंटानाद के साथ गर्भगृह में प्रवेश किया। धार्मिक परंपराओं के अनुसार भगवान का ध्यान किया गया और हरिओम जल अर्पित किया गया। इसके बाद कपूर आरती की गई, जिसमें उपस्थित श्रद्धालु भी पूरी श्रद्धा के साथ शामिल हुए। आरती के पश्चात बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार प्रारंभ हुआ। जटाधारी स्वरूप में भगवान के मस्तक पर चंदन, तिलक, त्रिपुंड और भांग अर्पित की गई। इसके साथ ही उन्हें रजत मुकुट धारण कराया गया और राजा स्वरूप में सजाया गया। यह दिव्य स्वरूप देखते ही श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा और भक्ति से भर उठीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">श्रृंगार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से आच्छादित किया गया और पारंपरिक रीति से भस्म रमाई गई। महाकाल मंदिर की भस्म आरती देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में अपनी विशेष पहचान रखती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान महाकाल ही ऐसे देव हैं जिनकी आरती भस्म से की जाती है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अद्भुत और दुर्लभ आरती के दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भस्म अर्पित किए जाने के बाद भगवान महाकाल को शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाला और रुद्राक्ष की मालाएं अर्पित की गईं। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों से बाबा का आकर्षक श्रृंगार किया गया। गर्भगृह में फूलों की सुगंध और मंत्रोच्चार के बीच भक्तों को आध्यात्मिक शांति का अनुभव हुआ। विशेष श्रृंगार के बाद भगवान को फल और मिष्ठान का भोग अर्पित किया गया। मंदिर के पुजारियों ने विधिवत पूजा-अर्चना कर भक्तों के कल्याण की कामना की।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंगलवार होने के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में अधिक देखी गई। सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लग गई थीं। देश के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कई श्रद्धालु देर रात ही मंदिर परिसर पहुंच गए थे ताकि वे भस्म आरती के दिव्य दर्शन कर सकें। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की गई थीं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। यही कारण है कि भस्म आरती को अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी उसी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ निभाई जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यहां प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती की ख्याति विश्वभर में है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य विशेष अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। हालांकि सामान्य दिनों में भी बाबा महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। मंगलवार की भस्म आरती में राजा स्वरूप में सजे बाबा महाकाल का अलौकिक रूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ बाबा महाकाल के दर्शन करने से जीवन की कठिनाइयां दूर होती हैं और मन को शांति प्राप्त होती है। मंगलवार की भस्म आरती के दौरान भी मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल की आराधना में लीन दिखाई दिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धर्म</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:25:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शनिवार के शुभ योग में चमक सकती है किस्मत, जानें धन लाभ के आसान उपाय</title>
                                    <description><![CDATA[शनिवार को श्रवण नक्षत्र और शुभ योग में किए गए ये उपाय धन, सम्मान और पारिवारिक सुख बढ़ाने वाले माने जाते हैं। जानें आसान उपाय।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/religion/luck-can-shine-in-the-auspicious-time-of-saturday-know/article-52959"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t103431.420.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शनिवार का दिन ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से खास माना जाता है। इस बार शनिवार को ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि के साथ श्रवण नक्षत्र और शुभ योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक इस तरह के योग में किए गए कुछ उपाय व्यक्ति के जीवन पर सकारात्मक असर डाल सकते हैं। खासकर आर्थिक स्थिति</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">, </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पारिवारिक जीवन और समाज में सम्मान से जुड़े मामलों में अच्छे परिणाम देखने को मिल सकते हैं। बताया जा रहा है कि इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय मानसिक शांति और आत्मविश्वास बढ़ाने में भी मददगार माने जाते हैं। कई लोग शनिवार को शनि देव की पूजा और दान-पुण्य से जुड़े कार्य करते हैं ताकि जीवन में चल रही रुकावटें कम हो सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ज्योतिष के जानकारों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति का आत्मविश्वास कमजोर हो गया है और वह अपने काम को सही तरीके से नहीं कर पा रहा है तो शनिवार को सफेद मोतियों की माला धारण करना लाभकारी माना गया है। वहीं जीवन में तरक्की की रफ्तार बढ़ाने के लिए सफेद फूल वाले पौधे की जड़ में जल चढ़ाने और मंदिर में कपूर दान करने की सलाह दी जाती है। ऐसा कहा जा रहा है कि इससे कार्यक्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी की सफलता और उन्नति चाहता है तो शनिवार के दिन चांदी की कोई वस्तु खरीदकर उसे मंदिर में रखकर पूजा करना शुभ माना गया है। अगले दिन उस वस्तु को अपने पास रखने से दांपत्य जीवन और करियर में लाभ मिलने की मान्यता है। समाज में पहचान और सम्मान बढ़ाने के लिए एक मुट्ठी चावल और थोड़ी मिश्री कपड़े में बांधकर मंदिर में दान करने का उपाय भी बताया गया है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के मुताबिक शनिवार के दिन माता-पिता का आशीर्वाद लेना भी बेहद शुभ माना जाता है। विशेष रूप से मां के पैर छूकर आशीर्वाद लेने से व्यक्ति अपने कर्तव्यों को बेहतर तरीके से निभा पाता है। दांपत्य जीवन में चल रही परेशानियों को दूर करने के लिए पीपल के पेड़ के पास काले तिल अर्पित करने और </span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">‘</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऊँ श्रीं शं श्रीं शनैश्चराय नमः</span><span lang="en-us" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">’ </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मंत्र का जाप करने की सलाह दी जाती है। वहीं ऑफिस में लगातार आ रही दिक्कतों से राहत पाने के लिए सफेद दक्षिणावर्त्ती शंख की पूजा कर उसे मंदिर में रखने का उपाय बताया गया है। कुछ ज्योतिषाचार्य मदार के पेड़ को प्रणाम करने को भी पारिवारिक तनाव कम करने वाला उपाय मानते हैं। संतान की तरक्की और सुख-समृद्धि के लिए दूध और चावल की खीर बनाकर किसी ब्राह्मण को दान करने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि उपायों के साथ मेहनत और सकारात्मक सोच भी जरूरी होती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राशिफल</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 10:36:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रामलला का दिव्य सूर्य तिलक, 9 मिनट तक ललाट पर चमकी किरणें</title>
                                    <description><![CDATA[रामनवमी पर अयोध्या में भव्य आयोजन, लाखों श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/ramlalas-divine-sun-tilak-shone-on-the-forehead-for-9/article-49236"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/ram-lalla.jpg" alt=""></a><br /><p>रामनवमी के पावन अवसर पर आज अयोध्या में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का भव्य सूर्य तिलक किया गया। इस दौरान करीब 9 मिनट तक सूर्य की किरणें भगवान के ललाट पर पड़ीं, जिससे पूरा गर्भगृह दिव्य प्रकाश से भर उठा।</p>
<p>यह प्राण-प्रतिष्ठा के बाद दूसरा अवसर है जब इस विशेष सूर्य तिलक का आयोजन किया गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी क्षण भगवान राम का जन्म माना जाता है। सूर्य तिलक के समय गर्भगृह में 14 पुजारी मौजूद रहे, जिन्होंने वैदिक मंत्रों के बीच विशेष पूजा-अर्चना की। इसके बाद आरती संपन्न हुई और कुछ समय के लिए मंदिर के पट बंद कर दिए गए।</p>
<p>इससे पहले सुबह रामलला का पंचामृत से अभिषेक किया गया, जिसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का उपयोग किया गया। भगवान को स्वर्ण जड़ित पीतांबर वस्त्र पहनाए गए, जिनमें सोने-चांदी की बारीक कढ़ाई की गई है। इसके साथ ही आकर्षक आभूषण और मुकुट से श्रृंगार किया गया।</p>
<p>सूर्य तिलक के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था तैयार की गई थी। अष्टधातु के 20 पाइप और करीब 65 फीट लंबे सिस्टम के जरिए सूर्य की किरणों को गर्भगृह तक पहुंचाया गया। इसमें लेंस और दर्पणों का उपयोग कर किरणों को सीधे भगवान के मस्तक तक केंद्रित किया गया।</p>
<p>रामनवमी के अवसर पर अयोध्या में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। अनुमान है कि करीब 10 लाख भक्त रामलला के दर्शन के लिए आए हैं। मंदिर परिसर, राम पथ, भक्ति पथ और जन्मभूमि पथ पर लंबी-लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए दर्शन का समय भी बढ़ाकर सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक कर दिया गया।</p>
<p>पूरे शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस बल, अर्धसैनिक बल और विशेष सुरक्षा एजेंसियां तैनात हैं। ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी की जा रही है ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।</p>
<p>सूर्य तिलक के बाद भगवान को 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा, जिसमें विभिन्न प्रकार की मिठाइयां और फलाहार शामिल हैं। यह प्रसाद बाद में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाएगा।</p>
<p>रामनवमी के इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर अयोध्या को आस्था, परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम का केंद्र बना दिया है। भक्तों के लिए यह क्षण आध्यात्मिक अनुभव से कम नहीं रहा, जहां श्रद्धा और विज्ञान का अद्भुत मेल देखने को मिला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>धर्म</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 12:31:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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