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                <title>Isha Foundation - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Isha Foundation RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>90 करोड़ से बना अत्याधुनिक बांस घाट श्मशान, संचालन ईशा फाउंडेशन को सौंपा</title>
                                    <description><![CDATA[पटना के बांस घाट श्मशान में आधुनिक सुविधाओं के साथ अंतिम संस्कार की व्यवस्था, सरकार ने संचालन ईशा फाउंडेशन को दिया, शुल्क और लीज को लेकर भी चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/state-of-the-art-bamboo-ghat-cremation-operation-built-with-rs-90-crores/article-57012"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/patna-bans-ghat.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पटना के गंगा तट स्थित बांस घाट श्मशान घाट को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस कर नया स्वरूप दिया गया है। करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना को अब संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को सौंप दिया गया है। सरकार की ओर से यह जिम्मेदारी बिना किसी शुल्क के दी गई है। हालांकि यहां अंतिम संस्कार की सेवा निशुल्क नहीं होगी। उपलब्ध व्यवस्थाओं के अनुसार अंतिम संस्कार कराने वाले लोगों को 3500 से 5000 रुपये तक का खर्च वहन करना पड़ सकता है। वहीं शहर के अन्य सरकारी श्मशान घाटों पर पारंपरिक व्यवस्था के तहत काफी कम शुल्क लिया जाता है। इसी वजह से इस परियोजना और इसकी संचालन व्यवस्था को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है। करीब 4.5 एकड़ क्षेत्र में फैले इस आधुनिक श्मशान घाट का निर्माण पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड की ओर से कराया गया है। पहले यहां का श्मशान परिसर काफी छोटा था, लेकिन अब इसे विस्तार देकर आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा गया है। परिसर में एक समय में 18 शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था की गई है। इसके लिए इलेक्ट्रिक शवदाह गृह, आधुनिक वुड क्रीमेशन ओवन और पारंपरिक चिता स्थल तीनों प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, ताकि लोग अपनी धार्मिक मान्यताओं और आवश्यकता के अनुसार विकल्प चुन सकें। श्मशान परिसर में चार आधुनिक इलेक्ट्रिक ओवन लगाए गए हैं, जिनमें कम समय में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो जाती है। इसके अलावा छह विशेष वुड क्रीमेशन ओवन भी तैयार किए गए हैं, जिनमें पारंपरिक चिता की तुलना में कम लकड़ी का उपयोग होता है और प्रदूषण भी कम फैलता है। वहीं आठ पारंपरिक चिता स्थलों की भी व्यवस्था रखी गई है, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">सुविधाओं को देखते हुए यहां आने वाले लोगों के लिए दो वातानुकूलित प्रतीक्षालय भी बनाए गए हैं। शवों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक मोर्चरी रूम तैयार किया गया है, जिसमें फ्रीजर की व्यवस्था उपलब्ध है। परिसर के भीतर अंतिम संस्कार में उपयोग होने वाली सभी आवश्यक सामग्री के लिए अलग दुकानें बनाई गई हैं। यहां कफन, पूजन सामग्री, लकड़ी, घी, कपूर, अगरबत्ती और अन्य जरूरी सामान एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेगा, जिससे परिजनों को अलग-अलग स्थानों पर भटकना नहीं पड़ेगा। इस परियोजना का एक प्रमुख आकर्षण मोक्ष द्वार और बैकुंठ द्वार हैं। लगभग 42 फीट ऊंचे इन दोनों प्रवेश और निकास द्वारों पर कांस्य से निर्मित ओम का प्रतीक स्थापित किया गया है। परिसर के भीतर दो कृत्रिम जलाशय भी बनाए गए हैं, जहां अस्थि विसर्जन और स्नान की व्यवस्था की गई है। इन तालाबों में पाइपलाइन के माध्यम से गंगा का जल पहुंचाया जाता है ताकि सीधे नदी में भीड़ और प्रदूषण दोनों को कम किया जा सके। दोनों जलाशयों के बीच भगवान शिव की भव्य प्रतिमा भी स्थापित की गई है, जो पूरे परिसर को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करती है। श्मशान की दीवारों पर जीवन, मृत्यु और मानव जीवन के विभिन्न चरणों को दर्शाती कलात्मक पेंटिंग बनाई गई हैं। राजा हरिश्चंद्र की कथा सहित कई धार्मिक और प्रेरणादायक चित्रों को भी उकेरा गया है। प्रशासन का कहना है कि इन चित्रों का उद्देश्य शोकाकुल परिवारों को जीवन के दर्शन और मानवीय मूल्यों का संदेश देना है। परिसर में हजारों पौधे लगाए गए हैं और हरियाली विकसित की गई है ताकि वातावरण शांत और स्वच्छ बना रहे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए यहां ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। लोग वेबसाइट या व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए स्लॉट बुक कर सकेंगे। इसके साथ ही मुक्ति रथ की बुकिंग और मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन जैसी सुविधाएं भी एकीकृत की जा रही हैं। इससे अंतिम समय में परिजनों को होने वाली परेशानियों को कम करने का प्रयास किया गया है इसी बीच राज्य सरकार ने पटना के दीघा क्षेत्र में बिहार का पहला एलपीजी आधारित शवदाह गृह विकसित करने की योजना भी शुरू कर दी है। इस परियोजना का संचालन भी ईशा फाउंडेशन के सहयोग से किया जाएगा। इसके लिए लगभग 2.11 एकड़ जमीन 33 वर्ष की लीज पर नाममात्र एक रुपये में उपलब्ध कराई गई है। यहां एलपीजी आधारित आधुनिक फर्नेस लगाए जाएंगे, जिनमें पारंपरिक धार्मिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अंतिम संस्कार कराया जाएगा। इसके अलावा मुंगेर जिले के तारापुर क्षेत्र में भी ईशा फाउंडेशन को करीब 15.01 एकड़ जमीन 99 वर्ष की लीज पर एक रुपये के प्रतीकात्मक शुल्क पर देने का प्रस्ताव सामने आया है। सरकार के अनुसार इस भूमि पर सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों से जुड़ा परिसर विकसित किया जाएगा। हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष इसे आधुनिक सुविधाओं के विस्तार के रूप में देख रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सरकारी भूमि और सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठा रहा है। बिहार सरकार का कहना है कि राज्य में कुल 40 आधुनिक शवदाह गृह विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें से कई का निर्माण पूरा हो चुका है और जल्द ही उन्हें आम लोगों के लिए शुरू किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य अंतिम संस्कार की प्रक्रिया को अधिक सम्मानजनक, स्वच्छ, पर्यावरण अनुकूल और व्यवस्थित बनाना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 14:29:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>सद्गुरु जग्गी वासुदेव की शिक्षाएं चर्चा में, योग और Inner Engineering पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[सद्गुरु जग्गी वासुदेव की Inner Engineering पद्धति और योगिक विचारधारा को लेकर बढ़ी दिलचस्पी सद्गुरु की शिक्षाएं एक बार फिर चर्चा में हैं, जहां योग, ध्यान और आत्म-जागरूकता को लेकर लोगों की रुचि बढ़ती दिख रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/sadhguru-jaggi-vasudevs-teachings-discussed-emphasis-on-yoga-and-inner/article-51925"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/jivan-ke-mantra-(8).jpg" alt=""></a><br /><p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">सद्गुरु जग्गी वासुदेव</span></span> की शिक्षाएं और उनके द्वारा विकसित “Inner Engineering” कार्यक्रम इन दिनों फिर चर्चा में हैं। देश और दुनिया में बढ़ते तनाव, मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों और जीवनशैली में बदलाव के बीच लोग योग और ध्यान की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।</p>
<h5><strong>आंतरिक इंजीनियरिंग का सिद्धांत</strong></h5>
<p>सद्गुरु का प्रमुख कार्यक्रम <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Inner Engineering</span></span> इस विचार पर आधारित है कि व्यक्ति अपने शरीर, मन और ऊर्जा को संतुलित करके जीवन को बेहतर बना सकता है। इसका उद्देश्य बाहरी परिस्थितियों के बजाय भीतर की स्थिति को नियंत्रित करना है।</p>
<h5><strong> योग का व्यापक दृष्टिकोण</strong></h5>
<p>उनके अनुसार, योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो व्यक्ति की चेतना को विकसित करती है। यह आत्म-बोध और मानसिक स्पष्टता प्राप्त करने का माध्यम बनता है।</p>
<h5><strong> जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता</strong></h5>
<p>सद्गुरु बार-बार इस बात पर जोर देते हैं कि व्यक्ति को अपनी खुशी और दुख की जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। उनके अनुसार, बाहरी हालात को दोष देने के बजाय आंतरिक स्थिति को सुधारना ही स्थायी समाधान है।</p>
<h5><strong> ध्यान और क्रियाएं</strong></h5>
<p><span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">ईशा फाउंडेशन</span></span> के माध्यम से वे “ईशा क्रिया” और “शाम्भवी महामुद्रा” जैसे ध्यान अभ्यास सिखाते हैं। इनका उद्देश्य मानसिक शांति, फोकस और भावनात्मक संतुलन को बढ़ाना है।</p>
<h5><strong> पर्यावरण के प्रति जागरूकता</strong></h5>
<p>सद्गुरु ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई बड़े अभियान चलाए हैं, जिनमें “Cauvery Calling” और “Save Soil” प्रमुख हैं। इन अभियानों के जरिए वे प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास की आवश्यकता पर जोर देते हैं।</p>
<h5><strong> साहित्य और विचार</strong></h5>
<p>उन्होंने कई चर्चित पुस्तकें लिखी हैं, जैसे <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Inner Engineering: A Yogi's Guide to Joy</span></span>, <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Karma: A Yogi's Guide to Crafting Your Destiny</span></span> और <span class="hover:entity-accent entity-underline inline cursor-pointer align-baseline"><span class="whitespace-normal">Death: An Inside Story</span></span>। इन पुस्तकों में जीवन, मृत्यु और कर्म जैसे विषयों को सरल भाषा में समझाया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 15:02:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सद्गुरु जग्गी वासुदेव के प्रमुख विचार और जीवन मंत्र</title>
                                    <description><![CDATA[सद्गुरु जग्गी वासुदेव के अनमोल विचार और जीवन मंत्र: आनंद, जिम्मेदारी और जागरूकता के माध्यम से जीवन को संतुलित और सफल बनाने के उपाय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/major-thoughts-and-life-mantras-of-sadhguru-jaggi-vasudev/article-49267"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/jivan--ke-mantra.jpg" alt=""></a><br /><p>सद्गुरु के विचार मुख्य रूप से जीवन को आनंदमय, जागरूक और जिम्मेदारी से जीने पर केंद्रित हैं। वे आंतरिक इंजीनियरिंग (Inner Engineering), प्रेम, योग और व्यक्तिगत रूपांतरण के माध्यम से स्वयं को सुधारने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि आनंद आपका स्वभाव है, मंजिल नहीं।</p>
<p><strong>जीवन का आनंद</strong> "अपने आनंद को बाद के लिए बचाकर न रखें। जब आप आनंदित होते हैं, तो आपका पूरा जीवन एक उत्सव बन जाता है।"</p>
<p><strong>जिम्मेदारी</strong> "कर्म का अर्थ है जिम्मेदारी को स्वर्ग से हटाकर अपने ऊपर ले लेना। इस तरह आप स्वयं अपने भाग्य के निर्माता बन जाते हैं।"</p>
<p><strong>डर और चेतना</strong> "डर अचेतन होने का परिणाम है। केवल सचेतन होकर ही हम सही मायनों में जीवन का निर्माण कर सकते हैं।"</p>
<p><strong>सफलता</strong> "असफल होने का जोखिम उठाकर ही सफल हुआ जा सकता है। इसलिए कोशिश करते रहें, तभी सफलता मिलेगी।"</p>
<p><strong>सुख-दुख </strong>"जब आप अपने और अपने शरीर/मन के बीच दूरी बना लेते हैं, वहीं दुःख का अंत हो जाता है।"</p>
<p><strong>संबंध</strong> "जितना ज़्यादा आप खुद को खास बनाने की कोशिश करेंगे, उतना ही ज़्यादा आपको दुख होगा। बस शांत रहें और हर चीज़ का हिस्सा बन जाएं।"</p>
<p><strong>परिवर्तन </strong>"जो रूपांतरित नहीं होता, वह मृत के समान है।"</p>
<p><strong>शांति </strong>"शांति को बाहर से जबर्दस्ती थोपा नहीं जा सकता। हम अपने अंदर कैसे हैं, यही परिणाम तय करता है।"</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Mar 2026 14:54:23 +0530</pubDate>
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