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                <title>online fraud - दैनिक जागरण</title>
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                <description>online fraud RSS Feed</description>
                
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                <title>वॉट्सएप यूजरनेम फीचर पर सरकार की नजर, साइबर फ्रॉड की आशंका के बीच होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[मोबाइल नंबर छिपाकर चैट की सुविधा पर केंद्र सतर्क, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए सुरक्षा मानकों की होगी समीक्षा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/government-eyes-investigation-on-whatsapp-username-feature-amid-fear-of/article-57554"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gaurav-khanna-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारत में करोड़ों लोग रोजमर्रा की बातचीत के लिए वॉट्सएप का इस्तेमाल करते हैं और अब इस लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का नया यूजरनेम फीचर लॉन्च होने से पहले ही चर्चा में आ गया है। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि इस नए फीचर की विस्तार से जांच की जाएगी। सरकार की चिंता यह है कि यदि यूजर्स मोबाइल नंबर छिपाकर केवल यूजरनेम के जरिए बातचीत कर सकेंगे, तो इसका गलत इस्तेमाल भी बढ़ सकता है। विशेष रूप से साइबर अपराध, फर्जी पहचान बनाकर ठगी और ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे मामलों में इजाफा होने की आशंका जताई जा रही है। वॉट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा ने हाल ही में ऐसा फीचर पेश किया है, जिसके जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए दूसरे लोगों से बातचीत कर सकेंगे। इस सुविधा में हर यूजर अपना एक अलग और यूनिक यूजरनेम बना सकेगा। भविष्य में कोई नया व्यक्ति मोबाइल नंबर की बजाय इसी यूजरनेम के माध्यम से संपर्क कर सकेगा। कंपनी का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य यूजर्स की निजता को पहले से अधिक मजबूत बनाना है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इस फीचर के संभावित दुरुपयोग को लेकर सतर्क हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी अधिकारियों के अनुसार, भारत में वॉट्सएप के 50 करोड़ से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इतने बड़े डिजिटल नेटवर्क में यदि फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों से संपर्क करना आसान हो गया, तो साइबर अपराधियों के लिए नई संभावनाएं खुल सकती हैं। इसी कारण सरकार इस फीचर के सुरक्षा मानकों, पहचान सत्यापन प्रक्रिया और फर्जी खातों को रोकने की व्यवस्था की समीक्षा करेगी। अधिकारियों का मानना है कि किसी भी नई डिजिटल सुविधा को लागू करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि उसका उपयोग सुरक्षित तरीके से हो और आम नागरिक किसी तरह की ऑनलाइन ठगी का शिकार न बनें। मेटा ने 29 जून से दुनिया के अलग-अलग देशों में यूजरनेम बुकिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि यह सुविधा सभी यूजर्स को एक साथ उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। आने वाले महीनों में इसे चरणबद्ध तरीके से रोलआउट किया जाएगा। जैसे ही किसी क्षेत्र में यह सुविधा शुरू होगी, संबंधित यूजर्स को वॉट्सएप के भीतर नोटिफिकेशन मिलेगा और वे अपनी पसंद का यूजरनेम सुरक्षित कर सकेंगे। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि लोकप्रिय और छोटे यूजरनेम पहले बुक होने की संभावना ज्यादा रहती है, इसलिए कई लोग इस फीचर का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वॉट्सएप का कहना है कि यह फीचर खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए उपयोगी होगा, जहां लोग किसी नए व्यक्ति से बातचीत करना चाहते हैं लेकिन अपना मोबाइल नंबर साझा नहीं करना चाहते। उदाहरण के तौर पर किसी बिजनेस नेटवर्किंग कार्यक्रम, स्कूल के पैरेंट्स ग्रुप, नए सहकर्मी या किसी सामुदायिक कार्यक्रम में मिले व्यक्ति से संपर्क करते समय यूजर सिर्फ अपना यूजरनेम साझा कर सकेगा। इससे मोबाइल नंबर निजी रहेगा और यूजर की व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित बनी रहेगी। कंपनी ने यूजरनेम बनाने के लिए कुछ नियम भी तय किए हैं। यूजरनेम की लंबाई तीन से 35 कैरेक्टर के बीच होगी। इसमें केवल छोटे अंग्रेजी अक्षर, अंक, डॉट और अंडरस्कोर का इस्तेमाल किया जा सकेगा। हर यूजरनेम पूरी तरह यूनिक होगा और जरूरत पड़ने पर उसे बदला या हटाया भी जा सकेगा। हालांकि वॉट्सएप अकाउंट बनाने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह अनिवार्य रहेगा। जिन लोगों के पास पहले से किसी यूजर का मोबाइल नंबर सेव है या जिनसे पहले बातचीत हो चुकी है, उनके लिए चैटिंग का तरीका नहीं बदलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए कंपनी यूजरनेम की नाम का एक वैकल्पिक सुरक्षा फीचर भी ला रही है। यह एक अतिरिक्त सुरक्षा कोड की तरह काम करेगा। यदि कोई यूजर इस सुविधा को सक्रिय करता है, तो सिर्फ यूजरनेम जान लेने से कोई भी व्यक्ति उसे मैसेज नहीं भेज पाएगा। पहली बार संपर्क करने वाले व्यक्ति को पहले यह सुरक्षा की दर्ज करनी होगी, तभी बातचीत शुरू हो सकेगी। कंपनी का दावा है कि इससे स्पैम मैसेज और अनचाहे संपर्कों को काफी हद तक रोका जा सकेगा। सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्राइवेसी और सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। जहां एक ओर यूजरनेम फीचर लोगों की व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखने में मदद करेगा, वहीं दूसरी ओर इसकी आड़ में फर्जी पहचान बनाकर अपराध करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार इस फीचर के तकनीकी पहलुओं, सुरक्षा व्यवस्था और संभावित जोखिमों का मूल्यांकन करने के बाद ही आगे की रणनीति तय करेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 17:45:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>लॉ स्टूडेंट ने NEET पेपर बेचने का झांसा देकर छात्रों से ठगी, इंस्टाग्राम के जरिए वसूले पैसे</title>
                                    <description><![CDATA[इंदौर क्राइम ब्रांच ने फर्स्ट ईयर लॉ छात्र को किया गिरफ्तार, 30 से 35 छात्रों से ऑनलाइन भुगतान लेने का आरोप; फर्जी लिंक और एडिटेड सामग्री के जरिए चला रहा था खेल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a38dc8ab116e/article-56636"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/neet-paper-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर में NEET परीक्षा को लेकर छात्रों को गुमराह कर ऑनलाइन ठगी करने का एक मामला सामने आया है। क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने एक ऐसे लॉ स्टूडेंट को गिरफ्तार किया है जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का दावा कर छात्रों से पैसे वसूल रहा था। आरोपी छात्रों को यह विश्वास दिलाता था कि उसके पास परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सामग्री और प्रश्नपत्र मौजूद हैं। जांच में सामने आया है कि उसने फर्जी लिंक और भ्रामक पोस्ट के जरिए कई छात्रों को अपने जाल में फंसाया और उनसे ऑनलाइन भुगतान प्राप्त किया। क्राइम ब्रांच के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान अक्षय मालवीय के रूप में हुई है, जो लसूड़िया क्षेत्र के आंगन शक्करखेड़ी का निवासी है। वह इंदौर के एक लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष का छात्र बताया जा रहा है। आरोपी के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और उसके डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।  मामले की शुरुआत तब हुई जब राजस्थान के कोटा से पुलिस ने इंदौर पुलिस को एक ई-मेल भेजकर आरोपी की गतिविधियों की जानकारी साझा की। बताया जा रहा है कि आरोपी की ऑनलाइन गतिविधियां कई दिनों से संदिग्ध थीं और उसकी प्रोफाइल पर लगातार ऐसे पोस्ट डाले जा रहे थे जिनमें NEET परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था। सूचना मिलने के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच की एसआईटी सक्रिय हुई और शनिवार देर रात आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी परीक्षा से पहले सोशल मीडिया पर आकर्षक पोस्ट और संदेश वायरल करता था। इन पोस्ट में दावा किया जाता था कि छात्रों को परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र या विशेष अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। कई छात्र परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद में इन दावों पर विश्वास कर लेते थे। पोस्ट के साथ एक लिंक भी साझा किया जाता था, जिस पर क्लिक करने के बाद छात्रों को भुगतान करने के लिए कहा जाता था। बताया जा रहा है कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी होने के बाद छात्रों को ऐसी सामग्री भेजी जाती थी जिसे परीक्षा का असली पेपर बताया जाता था। हालांकि जांच में सामने आया है कि यह सामग्री वास्तविक प्रश्नपत्र नहीं थी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पुराने प्रश्नपत्रों और पहले से उपलब्ध अध्ययन सामग्री को एडिट कर नए पेपर के रूप में प्रस्तुत करता था। छात्र यह समझते थे कि उन्हें परीक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल रही है, जबकि वास्तव में उन्हें गुमराह किया जा रहा था। क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने यूपीआई और अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों के जरिए करीब 30 से 35 लोगों से रकम प्राप्त की है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कुल कितनी राशि एकत्र की गई और किन-किन राज्यों के छात्र इस ठगी का शिकार बने। जांच एजेंसियां आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया अकाउंट की भी जांच कर रही हैं ताकि लेन-देन का पूरा विवरण सामने आ सके।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">आरोपी पहले भी साइबर पुलिस की निगरानी में रहा है। NEET परीक्षा को लेकर पिछले वर्ष हुए विवाद और परीक्षा रद्द होने की चर्चाओं के दौरान भी उसने इसी तरह की भ्रामक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की थीं। उस समय भी उसकी गतिविधियों को लेकर शिकायतें मिली थीं, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। इस बार डिजिटल सबूत मिलने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की ऑनलाइन ठगी केवल आर्थिक अपराध नहीं है बल्कि छात्रों के भविष्य और मानसिक स्थिति से भी जुड़ा मुद्दा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले कई छात्र तनाव और दबाव में रहते हैं। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति परीक्षा का पेपर या विशेष सामग्री उपलब्ध कराने का दावा करता है तो कुछ छात्र उसके झांसे में आ जाते हैं। इसी मनोविज्ञान का फायदा उठाकर आरोपी कथित तौर पर पैसे वसूल रहा था। क्राइम ब्रांच अब यह भी जांच कर रही है कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ कोई और व्यक्ति या समूह भी जुड़ा हुआ था। पुलिस को संदेह है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट को व्यापक स्तर पर फैलाने और भुगतान की प्रक्रिया संभालने में अन्य लोगों की भी भूमिका हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि नेटवर्क में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि किसी भी परीक्षा से जुड़ी ऐसी भ्रामक पोस्ट, लिंक या संदेश पर भरोसा न करें। परीक्षा का पेपर उपलब्ध कराने का दावा करने वाले अधिकांश संदेश फर्जी होते हैं और उनका उद्देश्य लोगों से पैसे ठगना होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 22 Jun 2026 14:08:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>रायपुर में RTO ई-चालान के नाम पर साइबर ठगी, कर्मचारी से ₹2.63 लाख उड़ाए</title>
                                    <description><![CDATA[एपीके फाइल डाउनलोड करते ही बैंक खाते से साफ हुई रकम, पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/cyber-fraud-in-the-name-of-rto-e-challan-in-raipur/article-56475"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-cyber-fraud-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायपुर में साइबर ठगी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आरटीओ ई-चालान के नाम पर एक फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाकर 2.63 लाख रुपये से अधिक की रकम ठग ली गई। घटना आजाद चौक थाना क्षेत्र की बताई जा रही है, जहां साइबर अपराधियों ने एपीके फाइल के जरिए मोबाइल में घुसपैठ कर बैंक खाते तक पहुंच बना ली। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। पीड़ित की पहचान प्रेम नगर, मोवा निवासी 35 वर्षीय आशीष वर्मा के रूप में हुई है, जो हिंदूजा फाइनेंस कंपनी में कार्यरत हैं और उनका कार्यालय आजाद चौक क्षेत्र में स्थित है। जानकारी के मुताबिक 6 जून की दोपहर करीब 12:30 बजे उनके मोबाइल पर एक अनजान नंबर से संदेश आया, जिसमें आरटीओ ई-चालान का हवाला दिया गया था। संदेश के साथ एक एपीके फाइल भी भेजी गई थी, जिसे देखकर पीड़ित ने इसे आधिकारिक नोटिस समझ लिया। बिना किसी शक के उन्होंने उस फाइल को डाउनलोड कर ओपन कर लिया, और यहीं से साइबर ठगों ने अपने जाल को सक्रिय कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">फाइल खुलते ही मोबाइल में एक मालवेयर इंस्टॉल हो गया, जिससे ठगों को डिवाइस तक पहुंच मिल गई। कुछ ही समय में पीड़ित के एक्सिस बैंक खाते से अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए 2 लाख 63 हजार 673 रुपये निकाल लिए गए। शुरुआत में आशीष वर्मा को किसी तरह की जानकारी नहीं हुई, लेकिन जब उन्होंने अपने बैंक खाते की जांच की तो बड़ी रकम गायब देखकर उनके होश उड़ गए। इसके बाद उन्होंने तत्काल आजाद चौक थाने पहुंचकर घटना की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह एक संगठित साइबर फ्रॉड हो सकता है, जिसमें फर्जी लिंक और एपीके फाइल के जरिए लोगों के मोबाइल को टारगेट किया जाता है। पुलिस अब उस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की गहराई से जांच कर रही है, जिससे रकम ट्रांसफर की गई थी। साथ ही साइबर सेल की टीम तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में ठग आमतौर पर सरकारी विभागों जैसे आरटीओ, बैंक या ट्रैफिक चालान का नाम लेकर लोगों को भ्रमित करते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति बिना जांच के लिंक या फाइल ओपन करता है, उसका फोन रिमोट एक्सेस में चला जाता है और बैंकिंग जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है। रायपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान संदेश, लिंक या एपीके फाइल को बिना सत्यापन के डाउनलोड न करें, क्योंकि एक छोटी सी गलती बड़ा आर्थिक नुकसान कर सकती है। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। कई बार लोग जल्दबाजी में आधिकारिक दिखने वाले संदेशों पर भरोसा कर लेते हैं, जिसका फायदा ठग उठाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि डिजिटल युग में सुरक्षा जितनी आसान लगती है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 13:58:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>इंस्टाग्राम से पानी बोतल ऑर्डर के बाद 2.99 लाख की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[रिफंड लिंक और अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी देकर छात्रा से लाखों की साइबर ठगी, पुलिस जांच में जुटी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/cheated-of-rs-299-lakh-after-ordering-water-bottle-from/article-55962"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/instagram-scam-indore.jpg" alt=""></a><br /><p>इंदौर के खजराना क्षेत्र में रहने वाली एक कॉलेज छात्रा के साथ इंस्टाग्राम पर पानी की बोतल ऑर्डर करने के बाद साइबर ठगी और ब्लैकमेलिंग का बड़ा मामला सामने आया है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक छात्रा ने एक इंस्टाग्राम पेज से दो पानी की बोतलें ऑर्डर की थीं और ऑनलाइन भुगतान भी कर दिया था। इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। इस घटना में ठगों ने पहले रिफंड का झांसा देकर लिंक भेजा और फिर धीरे-धीरे छात्रा को डराकर बड़ी रकम ऐंठ ली। पुलिस के अनुसार यह पूरा मामला साइबर फ्रॉड का सुनियोजित पैटर्न दिखाता है जिसमें पहले छोटे लेनदेन का भरोसा दिलाया जाता है और बाद में मानसिक दबाव बनाकर पैसे वसूले जाते हैं। इस तरह के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है और युवा वर्ग खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए अधिक निशाने पर आ रहा है। बताया जा रहा है कि आरोपी पहले सामान्य ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बनकर संपर्क करते हैं और फिर बातचीत को धोखाधड़ी की दिशा में ले जाते हैं। इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन शॉपिंग और इंस्टाग्राम आधारित पेजों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खजराना पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि ठगों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से छात्रा को फंसाया और अलग-अलग चरणों में उसे मानसिक रूप से दबाव में रखा।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, यह पूरा मामला 11 मई का बताया जा रहा है जब छात्रा वरीदा की बहन अलीना ने इंस्टाग्राम पेज “सॉफ क्यूक इंडिया” से पानी की दो बोतलें ऑर्डर की थीं। ऑर्डर के बाद कुछ समय तक सब सामान्य रहा, लेकिन इसके बाद एक कॉल आया जिसमें कहा गया कि ऑर्डर कैंसिल हो गया है और रिफंड के लिए एक लिंक भेजा जा रहा है। ठगों ने यह भी कहा कि छोटी राशि सीधे वापस नहीं हो सकती, इसलिए लिंक के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जैसे ही छात्रा ने उस लिंक पर क्लिक किया, उसके बैंक डिटेल्स कथित तौर पर ठगों के हाथ लग गए। इसके बाद धीरे-धीरे खाते से लेनदेन शुरू हो गया। इसी बीच 20 मई को फिर एक कॉल आया जिसमें आरोपियों ने दावा किया कि उनके पास छात्रा की अश्लील तस्वीरें हैं और उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया जाएगा। इस धमकी के बदले 30 हजार रुपये की मांग की गई और डर के कारण छात्रा ने बताए गए यूपीआई खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि ठग लगातार अलग-अलग नंबरों से संपर्क कर रहे थे ताकि पीड़िता पर दबाव बना रहे और वह किसी को जानकारी न दे सके। यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था और हर कदम पर पीड़िता को उलझाया जा रहा था।</p>
<p>मामला तब सामने आया जब 9 जून को छात्रा कॉलेज फीस जमा करने बैंक पहुंची। वहां उसे पता चला कि उसके खाते में पैसे नहीं हैं। बैंक से जानकारी लेने पर सामने आया कि अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए उसके खाते से करीब 2 लाख 99 हजार रुपये निकाल लिए गए हैं। इसके बाद छात्रा ने तुरंत खजराना थाने और साइबर क्राइम सेल में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जिन बैंक खातों और यूपीआई आईडी में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, उनकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और तकनीकी टीम आरोपियों के लोकेशन ट्रेस करने में लगी हुई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और सोशल मीडिया पर आने वाले ऑफर्स या रिफंड कॉल्स पर तुरंत भरोसा न करें। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 12:42:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गिफ्ट-हॉलिडे पैकेज के नाम पर 50 लाख की ठगी, FIR दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर के मैग्नेटो मॉल में हॉलिडे पैकेज के नाम पर 50 लाख की ठगी का मामला सामने आया। कंपनी समेत 16 लोगों पर FIR दर्ज, जांच जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/fir-registered-for-fraud-of-rs-50-lakh-in-the/article-52830"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(100).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ऑनलाइन और कॉल के जरिए लोगों को गिफ्ट और हॉलिडे पैकेज का लालच देकर बड़े पैमाने पर ठगी का मामला सामने आया है। शहर के मैग्नेटो मॉल स्थित चौथी मंजिल पर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">क्लब्रियोंट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">नाम से चल रही कंपनी पर आरोप है कि उसने करीब 15 से 20 लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनसे लाखों रुपये वसूल लिए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है और पुलिस ने कंपनी के संचालक समेत 16 लोगों के खिलाफ </span>FIR <span lang="hi" xml:lang="hi">दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पीड़ितों का कहना है कि उन्हें फोन कॉल के जरिए बताया गया कि उनका नाम लकी ड्रॉ या कूपन में निकला है और उन्हें फ्री गिफ्ट या सस्ते हॉलिडे पैकेज दिए जाएंगे। इसी झांसे में आकर लोग मैग्नेटो मॉल के ऑफिस तक पहुंचते रहे। वहां पहुंचने के बाद उन्हें आकर्षक टूर पैकेज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">होटल स्टे और विदेश यात्रा जैसे सपने दिखाए जाते थे। धीरे-धीरे उनसे अलग-अलग बहाने से पैसे वसूले जाते रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कभी रजिस्ट्रेशन के नाम पर तो कभी टिकट बुकिंग और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">एक पीड़ित अमित गुप्ता ने पुलिस को बताया कि उन्हें 20 फरवरी को कॉल आया था और कहा गया कि उनका नाम गिफ्ट लकी ड्रॉ में आया है। इसके बाद उन्हें मैग्नेटो मॉल की चौथी मंजिल पर स्थित ऑफिस बुलाया गया। अमित वहां पहुंचे तो उन्हें काफी प्रीमियम सेटअप दिखाया गया और भरोसा दिलाया गया कि कंपनी पूरी तरह रजिस्टर्ड है और जल्द ही उन्हें विदेश टूर पैकेज मिलेगा। शुरुआती भरोसे के बाद उनसे 27 फरवरी को 25 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए गए और फिर धीरे-धीरे अलग-अलग बहानों से 50 हजार रुपये और वसूले गए।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालात तब बदलने लगे जब पैसे लेने के बाद कंपनी के कर्मचारी लगातार टालमटोल करने लगे। पीड़ितों के मुताबिक वादा किया गया था कि टिकट और पैकेज की पूरी जानकारी ईमेल पर भेजी जाएगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन कुछ ही दिनों में सभी नंबर बंद आने लगे। जब लोग दोबारा ऑफिस पहुंचे तो वहां ताला लटका मिला। यही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उस वक्त तक कई और लोग भी वहां पहुंच चुके थे जो इसी तरह की ठगी का शिकार हुए थे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पुलिस की शुरुआती जांच में अब तक करीब 8 लाख 12 हजार रुपये की ठगी का हिसाब सामने आया है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन पीड़ितों का दावा है कि यह रकम 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। अलग-अलग लोगों से 75 हजार से लेकर 1.28 लाख रुपये तक की वसूली की जानकारी भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह पूरा नेटवर्क सिर्फ बिलासपुर तक सीमित नहीं था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि रायपुर और भिलाई जैसे शहरों के मॉल में भी इनके ऑफिस होने की बात सामने आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक कंपनी के कर्मचारी रोजाना नए लोगों को कॉल करते थे और उन्हें फ्री गिफ्ट या हॉलिडे पैकेज का लालच देकर ऑफिस बुलाते थे। खास बात यह है कि इनके निशाने पर नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग के लोग ज्यादा होते थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिन्हें क्रेडिट कार्ड और यूपीआई के जरिए पेमेंट करवाया जाता था।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल पुलिस ने कंपनी के संचालक नागेश बालासाहेब साखरे समेत 16 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर लिया है और पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में ठगी का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अभी कई पीड़ित सामने आना बाकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल्स की भी जांच कर रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 May 2026 11:51:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>क्रेडिट कार्ड खो गया या चोरी हो गया? तुरंत करें ये काम, वरना मिनटों में हो सकता है बड़ा नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[क्रेडिट कार्ड खो जाए या चोरी हो जाए तो तुरंत ब्लॉक करें, ट्रांजैक्शन चेक करें, बैंक में शिकायत दर्ज करें और FIR जरूर कराएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/if-your-credit-card-is-lost-or-stolen-do-this/article-52656"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/credit-card-tips.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">क्रेडिट कार्ड खो जाए या चोरी हो जाए तो इसे हल्के में लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। आज के डिजिटल दौर में कार्ड सिर्फ प्लास्टिक का टुकड़ा नहीं, सीधे आपके बैंकिंग सिस्टम का रास्ता है। ऐसे में क्रेडिट कार्ड गायब होते ही पहला काम घबराना नहीं, बल्कि तुरंत एक्शन लेना है। जरा सी देरी आपके खाते, लिमिट और डिजिटल पहचान तीनों पर भारी पड़ सकती है। कई बार लोग कार्ड मिलने की उम्मीद में इंतजार करते रहते हैं, लेकिन यही चूक बाद में महंगी पड़ती है। क्रेडिट कार्ड खो गया है तो सबसे पहले उसे तुरंत ब्लॉक कराना जरूरी है। बैंक के मोबाइल ऐप, नेट बैंकिंग या कस्टमर केयर नंबर पर कॉल करके यह काम फौरन किया जा सकता है। जितनी जल्दी कार्ड ब्लॉक होगा, उतना कम रिस्क रहेगा। कई बैंक अस्थायी ब्लॉक का विकल्प भी देते हैं, लेकिन अगर कार्ड चोरी का शक है तो सीधे परमानेंट ब्लॉक ही बेहतर माना जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">कार्ड ब्लॉक होने के बाद अगला जरूरी काम है अपने हर ट्रांजैक्शन पर नजर डालना। SMS, ईमेल अलर्ट और बैंक ऐप की हिस्ट्री तुरंत चेक करें। यह देखना जरूरी है कि कार्ड खोने के बाद कोई अनधिकृत भुगतान तो नहीं हुआ। शुरुआती जानकारी में कई बार छोटी रकम के ट्रांजैक्शन दिखते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यहीं से बड़ा फ्रॉड शुरू होता है। अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक में डिस्प्यूट दर्ज करें। अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर बैंकों में जीरो या लिमिटेड लायबिलिटी का प्रावधान होता है, लेकिन इसका फायदा तभी मिलता है जब ग्राहक समय पर शिकायत दर्ज कराए। बैंक को मौखिक नहीं, लिखित शिकायत देना ज्यादा सुरक्षित रहता है। शिकायत नंबर लेना जरूरी है, क्योंकि आगे विवाद की स्थिति में यही सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनता है। आखिरी बार कार्ड कहां इस्तेमाल किया था, यह भी याद करें और बैंक स्टेटमेंट से मिलान करें।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Mangal Pro';">क्रेडिट कार्ड चोरी हुआ है तो सिर्फ कार्ड ब्लॉक कर देना काफी नहीं माना जाता। अपने सभी डिजिटल पेमेंट अकाउंट्स, UPI ऐप, ईमेल और बैंकिंग पासवर्ड भी तुरंत बदलें। कार्ड डिटेल लीक होने का मतलब सिर्फ एक कार्ड का खतरा नहीं, पूरी डिजिटल प्रोफाइल पर रिस्क हो सकता है। PIN बदलें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करें और सेव्ड कार्ड डिटेल्स हटाएं। इसके बाद नया कार्ड जरूर अप्लाई करें, ताकि नया नंबर और नया CVV जारी हो सके। बैंकिंग जानकार मानते हैं कि पुराना कार्ड बंद होने के बाद नया कार्ड लेना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। अगर मामला चोरी का है तो नजदीकी थाने में FIR दर्ज कराना भी जरूरी है। FIR की कॉपी बैंक विवाद, इंश्योरेंस क्लेम और किसी भी कानूनी जांच में काम आती है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 17:04:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ डिजिटल अरेस्ट ठगी: रिटायर्ड प्रोफेसर से 1.4 करोड़ की ठगी</title>
                                    <description><![CDATA[7 दिनों तक बंधक बनाकर महिला से करोड़ों वसूले, पुलिस जांच शुरू]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-digital-arrest-fraud-retired-professor-cheated-of-rs-14/article-52387"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg-news-(45).jpg" alt=""></a><br /><p>देशभर में इन दिनों साइबर ठगी के लगातार कई मामलें सामने आ रहे हैं ।ऐसा ही एक चौकानें वाला मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से सामने आया है। बता दें, इस मामले ने कानून-व्यवस्था और डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।बिलासपुर की  एक रिटायर्ड महिला प्रोफेसर को कथित तौर पर सात दिनों तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर उनसे करीब 1.4 करोड़ रुपए ठग लिए गए। आरोपियों ने खुद को पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का अधिकारी बताकर महिला को टेरर फंडिंग जैसे गंभीर आरोपों में फंसाने का डर दिखाया। इस दौरान फर्जी दस्तावेज, वारंट और नोटिस भेजकर मानसिक दबाव बनाया गया और महिला को घर से बाहर निकलने तक नहीं दिया गया।</p>
<p>मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना 20 अप्रैल से 27 अप्रैल के बीच हुई, जब ठगों ने योजनाबद्ध तरीके से महिला को निशाना बनाया और धीरे-धीरे बड़ी रकम ट्रांसफर करवाई।</p>
<p>ठगों ने व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया और खुद को पुलिस अधिकारी “संजय PSI” बताया। शुरुआती बातचीत में ही उन्होंने महिला को बताया कि उनका नाम एक प्रतिबंधित संगठन से जुड़ा है और उन पर टेरर फंडिंग का आरोप है। इसके बाद फर्जी बैंक स्टेटमेंट और दस्तावेज दिखाकर उन्हें डराया गया।</p>
<h5><strong>डिजिटल अरेस्ट का जाल</strong></h5>
<p>वीडियो कॉल पर घंटों तक महिला को रोके रखा गया और कहा गया कि उनका फोन निगरानी में है।ठगों ने सुप्रीम कोर्ट और ED के फर्जी नोटिस भेजकर गिरफ्तारी का भय पैदा किया।इस दौरान महिला को किसी से संपर्क न करने की सख्त हिदायत दी गई।डर और दबाव में आकर उन्होंने 21 से 24 अप्रैल के बीच अलग-अलग किस्तों में कुल 1 करोड़ 4 लाख 80 हजार रुपए चार बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।इसके बाद भी ठगों ने 50 लाख रुपए की अतिरिक्त मांग की और बेटे-पोते को जेल भेजने की धमकी दी।</p>
<h5><strong>ऐसे खुला मामला</strong></h5>
<p>जब महिला के खाते में पैसे खत्म हो गए, तब उन्होंने अपने बेटे को फोन कर मदद मांगी।बेटे को शक हुआ और वह तुरंत बिलासपुर पहुंचा।पूछताछ में पूरी घटना सामने आई, जिसके बाद साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने फर्जी पहचान और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर इस ठगी को अंजाम दिया।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। खासकर बुजुर्ग, रिटायर्ड कर्मचारी और कारोबारी इस तरह के साइबर अपराधियों के निशाने पर हैं। पिछले कुछ महीनों में ऐसे मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 11:37:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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                <title>रायगढ़ में मैट्रिमोनियल साइट के नाम पर बड़ा साइबर फ्रॉड, 7,693 लोग ठगे गए, 26 आरोपी गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[लोक सेवा केंद्र की आड़ में देशभर में चल रहा था फर्जीवाड़ा, रजिस्ट्रेशन और मीटिंग फीस के नाम पर 1.11 करोड़ की ठगी का खुलासा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-cyber-fraud-in-the-name-of-matrimonial-site-in/article-51235"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/cg---2026-04-15t150528.833.jpg" alt=""></a><br /><p>छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसने मैट्रिमोनियल साइट के जरिए हजारों लोगों को निशाना बनाकर करीब 1.11 करोड़ रुपये की ठगी की। इस मामले में पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।</p>
<p>पुलिस के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क कोतवाली थाना क्षेत्र के दरोगा पारा इलाके में संचालित लोक सेवा केंद्र ‘निधि परिवहन सुविधा केंद्र’ की आड़ में चल रहा था। बाहर से यह केंद्र सरकारी कामकाज और दस्तावेज निर्माण का वैध कार्यालय प्रतीत होता था, लेकिन अंदर से एक संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क सक्रिय था।</p>
<p>जांच में सामने आया कि गिरोह यूट्यूब चैनलों, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और कॉल सेंटर के माध्यम से देशभर के लोगों को शादी के नाम पर संपर्क करता था। इसके बाद उनसे रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोफाइल मैचिंग फीस और मीटिंग चार्ज के नाम पर यूपीआई के जरिए पैसे वसूले जाते थे। पैसे लेने के बाद पीड़ितों को कोई वास्तविक प्रोफाइल या सेवा उपलब्ध नहीं कराई जाती थी।</p>
<p>पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से कई लैपटॉप, मोबाइल फोन और फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इनमें फोटोशॉप के जरिए तैयार किए गए नकली दस्तावेज, सरकारी मुहरें और सील भी शामिल हैं। जांच टीम को यह भी पता चला कि अलग-अलग कमरों में कॉल सेंटर और एडिटिंग यूनिट चल रही थी, जहां से ठगी को अंजाम दिया जा रहा था।</p>
<p>इस गिरोह का संचालन कपिल गर्ग और हिमांशु मेहर कर रहे थे, जिन्हें मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इनके अलावा कई अन्य लोग भी इस नेटवर्क में सक्रिय थे, जिन्हें युवतियों और अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर लोगों को फंसाने और उनसे पैसे वसूलने की जिम्मेदारी दी गई थी।</p>
<p>पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2022 से अब तक इस नेटवर्क के जरिए करीब 7,693 लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया। कुल मिलाकर 1 करोड़ 11 लाख रुपये से अधिक की अवैध वसूली की गई। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान 55 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, 2 प्रिंटर और बैंक खातों को भी जब्त किया है।</p>
<p>सभी आरोपियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।</p>
<p>फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य राज्यों में फैले लिंक और डिजिटल लेनदेन की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस गिरोह से और कितने लोग जुड़े हुए थे और कितने लोग अभी भी इसके निशाने पर हो सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 15:06:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्वालियर में डॉक्टर के बेटे से ऑनलाइन ठगी, 36.66 लाख रुपये लेने के बाद आरोपी गायब, शेयर और आईपीओ में 800% मुनाफे का वादा किया</title>
                                    <description><![CDATA[ग्वालियर में ऑनलाइन ठगी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें डॉक्टर के बेटे हर्ष बरुआ से 36.66 लाख रुपए ठगे गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/in-gwalior-after-taking-online-fraud-of-rs-3666-lakh/article-49345"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/gwalior-doctor’s-son-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ग्वालियर में ऑनलाइन ठगी का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक डॉक्टर के बेटे हर्ष बरुआ से 36.66 लाख रुपए की ठगी हुई। घटना 21 अगस्त 2025 से 15 दिसंबर 2025 के बीच हुई। आरोपी ने हर्ष बरुआ को “नुवामा VIP परामर्श क्लब</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> के नाम से संपर्क कर शेयर और आईपीओ निवेश में 800% तक मुनाफे का झांसा दिया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">VIP परामर्श क्लब का झांसा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आरोपी ने खुद को निवेश विशेषज्ञ बताते हुए हर्ष बरुआ को अपने क्लब में जोड़ा। उसने दावा किया कि उसके क्लब के माध्यम से निवेश करने पर सामान्य निवेश के मुकाबले कई गुना मुनाफा कमाया जा सकता है। हर्ष बरुआ ने झांसे में आकर कुल 36.66 लाख रुपए अलग-अलग ट्रांजेक्शन में निवेश कर दिए।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पैसे मांगने पर आरोपी गायब</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जब हर्ष ने निवेश की गई रकम और मुनाफा वापस मांगा, तो आरोपी ने भुगतान से साफ इनकार कर दिया और संपर्क भी तोड़ लिया। ठगी का अहसास होने के बाद हर्ष ने थाटीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पुलिस की कार्रवाई और जांच</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">थाटीपुर थाना प्रभारी विपेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि “नुवामा VIP परामर्श क्लब</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">”</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;"> असल में कहां संचालित हो रहा है और इसका संचालक कौन है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">निवेशकों के लिए चेतावनी</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पुलिस ने निवेशकों को सचेत किया है कि ऑनलाइन निवेश के नाम पर मिलने वाले ऐसे क्लब और ऐप्स से सावधानी बरतें। कोई भी निवेश करने से पहले उसके वैध होने और संचालक की पहचान सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 11:14:29 +0530</pubDate>
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