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                <title>Medical News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Medical News RSS Feed</description>
                
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                <title>भारत में लॉन्च हुई दुनिया की पहली साप्ताहिक बेसल इंसुलिन, डायबिटीज मरीजों को अब हफ्ते में सिर्फ एक इंजेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[नोवो नॉर्डिस्क की Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) से रोजाना इंजेक्शन की जरूरत होगी खत्म, टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज के वयस्क मरीजों के लिए नई उम्मीद। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/worlds-first-weekly-basal-insulin-launched-in-india-diabetes-patients/article-58315"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/awiqli.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">भारत में डायबिटीज के इलाज के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने देश में Awiqli (इंसुलिन आइकोडेक) लॉन्च कर दी है। कंपनी का दावा है कि यह दुनिया की पहली ऐसी सप्ताह में एक बार दी जाने वाली बेसल इंसुलिन है, जिसे टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित वयस्क मरीजों के लिए विकसित किया गया है। इस नई तकनीक के आने से उन मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अब तक हर दिन इंसुलिन का इंजेक्शन लगाना पड़ता था।</p>
<p>अब तक अधिकांश इंसुलिन पर निर्भर मरीजों को रोजाना बेसल इंसुलिन लेना पड़ता था। यानी पूरे साल में करीब 365 इंजेक्शन लगाने पड़ते थे। नई साप्ताहिक बेसल इंसुलिन के आने से यह संख्या घटकर केवल 52 इंजेक्शन सालाना रह जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल मरीजों की दिनचर्या आसान होगी, बल्कि इलाज को नियमित रूप से अपनाने की संभावना भी बढ़ेगी।</p>
<p>नोवो नॉर्डिस्क के अनुसार, भारत में इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रोजाना इंजेक्शन लगाने का डर है। कई मरीज इंसुलिन शुरू करने से बचते रहते हैं और इलाज में सात से नौ साल तक की देरी हो जाती है। इस देरी के कारण ब्लड शुगर लंबे समय तक अनियंत्रित रहती है, जिससे हृदय, किडनी, आंखों और नसों से जुड़ी गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p>कंपनी ने Awiqli का 700 यूनिट पैक 2,611 रुपये में लॉन्च किया है। इस हिसाब से इसकी कीमत लगभग 3.73 रुपये प्रति यूनिट पड़ती है। कंपनी का दावा है कि यह मौजूदा दैनिक बेसल इंसुलिन की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक अधिक किफायती है। यदि किसी मरीज को रोजाना 10 यूनिट इंसुलिन की आवश्यकता होती है, तो उसे सप्ताह में 70 यूनिट इंसुलिन लगेगी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 261 रुपये प्रति सप्ताह होगी।</p>
<p>नई इंसुलिन को FlexTouch पेन डिवाइस के जरिए सप्ताह में केवल एक बार लगाया जाएगा। यह पेन उपयोग में आसान है और मरीज स्वयं भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसे इस्तेमाल कर सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इंजेक्शन की संख्या कम होने से मरीज इलाज को बीच में छोड़ने की संभावना भी कम होगी।</p>
<p>मुंबई के वरिष्ठ डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ. राजीव कोविल का कहना है कि इस दवा की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्रतिस्पर्धी कीमत और आसान उपयोग है। उनके अनुसार, क्लिनिकल ट्रायल में Awiqli ने कई मामलों में रोजाना दी जाने वाली बेसल इंसुलिन के बराबर या उससे बेहतर ब्लड शुगर नियंत्रण दिखाया है। इससे यह तकनीक केवल बड़े शहरों या सीमित मरीजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अधिक लोगों तक पहुंच सकेगी।</p>
<p>क्लिनिकल ट्रायल के दौरान ONWARDS-1 प्रोग्राम के आंकड़ों में यह सामने आया कि Awiqli ने ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने और HbA1c स्तर कम करने में सकारात्मक परिणाम दिए। कंपनी के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज के अधिक मरीज बिना गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया की समस्या के HbA1c को 7 प्रतिशत से नीचे लाने में सफल रहे। हालांकि, किसी भी मरीज के लिए दवा की उपयुक्तता का निर्णय उसके चिकित्सक द्वारा ही किया जाना चाहिए।</p>
<p>भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। अनुमान के अनुसार, देश में करीब 10.1 करोड़ लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं, जबकि लगभग 13.6 करोड़ लोग प्री-डायबिटीज की स्थिति में हैं। इसके अलावा 9 लाख से अधिक लोग टाइप-1 डायबिटीज से प्रभावित हैं, जिनके इलाज में इंसुलिन अनिवार्य है। वहीं टाइप-2 डायबिटीज के लगभग 10 प्रतिशत मरीजों को भी समय के साथ इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता पड़ती है।</p>
<p>नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. एस.के. वांगनू का कहना है कि इंसुलिन शुरू करने में देरी और इलाज का नियमित पालन न करना आज भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। उनके अनुसार, यदि मरीजों को कम इंजेक्शन लगाने पड़ें और उपचार सरल हो, तो अधिक लोग समय रहते इंसुलिन थेरेपी शुरू कर सकते हैं, जिससे भविष्य में जटिलताओं का खतरा कम होगा।</p>
<p>नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विक्रांत श्रोत्रिया ने इसे भारत में डायबिटीज उपचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उनका कहना है कि सप्ताह में केवल एक बार की डोज मरीजों पर मानसिक और शारीरिक दोनों तरह का बोझ कम करेगी। साथ ही इससे इलाज को नियमित रूप से जारी रखने में भी मदद मिलेगी। भारत में फिलहाल लगभग 60 लाख लोग इंसुलिन थेरेपी ले रहे हैं, </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 16:51:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>NEET PG 2026 परीक्षा 30 अगस्त को होगी, NBEMS ने जारी किया पूरा शेड्यूल</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड ने NEET PG 2026 की परीक्षा तिथि घोषित की, 1 जुलाई से आवेदन प्रक्रिया शुरू, 21 जुलाई तक भर सकेंगे फॉर्म।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/neet-pg-2026-exam-will-be-held-on-30th-august/article-57637"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/neet-pg-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">मेडिकल पोस्टग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर है। नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशंस इन मेडिकल साइंसेज (NBEMS) ने NEET PG 2026 परीक्षा की तारीख का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। जारी नोटिस के मुताबिक NEET PG 2026 का आयोजन 30 अगस्त 2026 को देशभर के निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराया जाएगा। इसके साथ ही बोर्ड ने आवेदन प्रक्रिया, परीक्षा शहर की जानकारी और परिणाम की संभावित तारीख भी जारी कर दी है। लंबे समय से परीक्षा कार्यक्रम का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए अब तैयारी को अंतिम चरण में ले जाने का समय आ गया है। NBEMS की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार 1 जुलाई 2026 से सूचना बुलेटिन उपलब्ध करा दिया गया है। इसी दिन शाम 5 बजे से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। उम्मीदवार 21 जुलाई 2026 की रात 11:55 बजे तक आवेदन पत्र जमा कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को सूचना बुलेटिन ध्यान से पढ़ने की सलाह दी गई है, ताकि पात्रता, दस्तावेज, फीस और अन्य नियमों से जुड़ी किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। हर साल बड़ी संख्या में उम्मीदवार अधूरी जानकारी या दस्तावेजों में गलती के कारण आवेदन प्रक्रिया के दौरान दिक्कतों का सामना करते हैं। ऐसे में इस बार भी बोर्ड ने समय रहते सभी दिशा-निर्देश पढ़ने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">NEET PG देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। इसी परीक्षा के आधार पर एमडी, एमएस और पीजी डिप्लोमा जैसे पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में दाखिला दिया जाता है। सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया इसी परीक्षा के परिणाम के आधार पर पूरी होती है। ऐसे में हर वर्ष लाखों MBBS स्नातक इस परीक्षा में शामिल होते हैं। इस बार भी देशभर से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के आवेदन करने की संभावना है। परीक्षा एक ही दिन और एक ही शिफ्ट में कंप्यूटर आधारित प्रणाली के तहत आयोजित की जाएगी। NBEMS की ओर से जारी कैलेंडर के अनुसार 11 अगस्त 2026 को उम्मीदवारों को उनके परीक्षा शहर की जानकारी उपलब्ध करा दी जाएगी। इसके बाद निर्धारित समय पर एडमिट कार्ड जारी किए जाएंगे, जिनमें परीक्षा केंद्र, रिपोर्टिंग समय और परीक्षा से जुड़े अन्य जरूरी निर्देश होंगे। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि परीक्षा शहर आवंटित होने के बाद यात्रा और रहने की व्यवस्था समय रहते सुनिश्चित कर लें, ताकि परीक्षा वाले दिन किसी प्रकार की असुविधा न हो। पिछले वर्षों में कई उम्मीदवारों को अंतिम समय में यात्रा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा था।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bhopal-noida-flight-(1).jpg" alt="NEET 2026" width="1366" height="1498"></img></p>
<p style="text-align:justify;">इस बार भी परीक्षा पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होगी। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कड़ी रहने की संभावना है। परीक्षा में प्रवेश से पहले पहचान पत्र, एडमिट कार्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जांच की जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, स्मार्ट वॉच, मोबाइल फोन या अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं को परीक्षा केंद्र के भीतर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। बोर्ड की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश एडमिट कार्ड जारी होने के साथ उपलब्ध कराए जाएंगे। उम्मीदवारों को समय से पहले परीक्षा केंद्र पहुंचने की सलाह दी गई है। NBEMS ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा से जुड़ी पात्रता, फीस संरचना, परीक्षा योजना और अन्य सभी महत्वपूर्ण जानकारियां सूचना बुलेटिन में उपलब्ध हैं। ऐसे में आवेदन करने से पहले प्रत्येक उम्मीदवार को इन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ना चाहिए। आवेदन भरने में जल्दबाजी करने के बजाय सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही फॉर्म जमा करना बेहतर रहेगा। विशेष रूप से नाम, जन्मतिथि, मेडिकल रजिस्ट्रेशन और अन्य विवरणों में किसी प्रकार की गलती आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती है। परीक्षा परिणाम को लेकर भी बोर्ड ने संभावित समयसीमा जारी कर दी है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार 30 सितंबर 2026 तक NEET PG 2026 का परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें ऑल इंडिया कोटा और राज्य कोटा की सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। परिणाम घोषित होने के बाद योग्य उम्मीदवार अपनी रैंक के आधार पर विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा और परिणाम के बीच लगभग एक महीने का अंतर रखने से मूल्यांकन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समय पर पूरा किया जा सकेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 12:52:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इबोला को लेकर छत्तीसगढ़ अलर्ट, क्वारंटाइन किए गए लोगों में नहीं मिले संक्रमण के लक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा- प्रदेश में सभी स्तरों पर तैयारियां पूरी, एहतियातन तीन विदेशी नागरिकों को 21 दिन के लिए आइसोलेशन में रखा गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/chhattisgarh-alert-regarding-ebola-no-symptoms-of-infection-found-in/article-55079"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ebola-virus-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ में इबोला वायरस संक्रमण की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राज्य सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने जैसी कोई स्थिति नहीं है, लेकिन संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्रदेश में पिछले एक महीने से इबोला वायरस को लेकर लगातार निगरानी रखी जा रही है और स्वास्थ्य तंत्र को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को क्वारंटाइन और आइसोलेशन में रखा गया है, उनमें अब तक संक्रमण के कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अफ्रीकी देशों में इबोला संक्रमण के कुछ मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने एहतियातन कदम उठाने शुरू कर दिए थे। दुर्ग जिले में तीन विदेशी नागरिकों को निगरानी में रखा गया है। इनमें कांगो, इथियोपिया और एक अन्य अफ्रीकी देश का नागरिक शामिल बताया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार ये लोग हाल ही में ऐसे क्षेत्रों से आए थे जहां संक्रमण को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें 21 दिनों के लिए क्वारंटाइन किया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंत्री ने कहा कि अब तक हुई चिकित्सकीय जांच में किसी भी व्यक्ति में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है। न तो बुखार, न रक्तस्राव और न ही अन्य कोई गंभीर लक्षण सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि यह पूरी कार्रवाई केवल सुरक्षा और सावधानी के तौर पर की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार इन लोगों की निगरानी कर रही हैं और समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं तो तत्काल आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">इबोला वायरस को दुनिया के सबसे खतरनाक संक्रमणों में गिना जाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैल सकता है। इस बीमारी में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और गंभीर मामलों में आंतरिक रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यही कारण है कि किसी भी संभावित मामले को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां अतिरिक्त सावधानी बरतती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार का कहना है कि राज्य के सभी प्रमुख अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और जिला स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य विभाग ने एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर भी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों को तैयार रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्रदेश में इबोला संक्रमण का कोई पुष्ट मामला नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस बीच स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य सरकार की नई सीएम हेल्पलाइन व्यवस्था को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह पहल आम नागरिकों और प्रशासन के बीच संवाद को मजबूत बनाने का काम करेगी। कई बार लोगों की शिकायतें और समस्याएं समय पर संबंधित अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती हैं, जिससे समाधान में देरी होती है। नई हेल्पलाइन व्यवस्था के माध्यम से लोग सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उनकी निगरानी भी प्रभावी ढंग से की जाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंत्री के अनुसार सरकार चाहती है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अनावश्यक दौड़भाग न करनी पड़े। सीएम हेल्पलाइन के जरिए शिकायतों का रिकॉर्ड तैयार होगा और उनके निपटारे की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जाएगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और लोगों का शासन व्यवस्था पर विश्वास भी मजबूत होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल शिकायत दर्ज करना नहीं बल्कि उसका समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इबोला जैसे संक्रमणों को लेकर जागरूकता और सतर्कता सबसे बड़ा बचाव है। लोगों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए। फिलहाल छत्तीसगढ़ में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है और स्वास्थ्य विभाग लगातार निगरानी बनाए हुए है। राज्य सरकार इबोला संक्रमण की आशंका को लेकर पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। क्वारंटाइन किए गए लोगों में संक्रमण के लक्षण नहीं मिलने से राहत जरूर मिली है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग किसी भी तरह की लापरवाही से बचना चाहता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Jun 2026 14:11:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>वरुण धवन की बेटी को हुई DDH बीमारी, ढाई महीने तक प्लास्टर में रही</title>
                                    <description><![CDATA[चलने में हो रही थी दिक्कत, बिना सर्जरी इलाज के बाद अब पूरी तरह स्वस्थ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/varun-dhawans-daughter-suffered-from-ddh-disease-and-remained-in/article-49380"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/bollywood---2026-03-28t135118.147.jpg" alt=""></a><br /><p>अभिनेता वरुण धवन ने हाल ही में खुलासा किया कि उनकी डेढ़ साल की बेटी लारा को डेवलपमेंटल डिस्प्लेसिया ऑफ द हिप (DDH) नाम की बीमारी हो गई थी। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें हिप जॉइंट अपनी सामान्य जगह से खिसक जाता है, जिससे चलने-फिरने में परेशानी होती है।</p>
<p>एक इंटरव्यू में वरुण ने बताया कि लारा को कम उम्र में ही इस बीमारी का पता चला। इस कारण उनके चलने में दिक्कत आ रही थी और शरीर के निचले हिस्से में असंतुलन दिखाई दे रहा था। डॉक्टरों के मुताबिक, समय रहते इलाज न हो तो आगे चलकर आर्थराइटिस या रीढ़ से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है।</p>
<p>हालांकि, राहत की बात यह रही कि लारा को सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ी। डॉक्टरों ने एक विशेष प्रक्रिया के जरिए उनके हिप को सही स्थिति में सेट किया। इसके बाद उन्हें करीब ढाई महीने तक स्पिका कास्ट, यानी कमर से लेकर पैरों तक प्लास्टर में रहना पड़ा।</p>
<p>वरुण ने इस दौर को परिवार के लिए काफी कठिन बताया। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी बच्ची के लिए लंबे समय तक प्लास्टर में रहना आसान नहीं था। एनेस्थीसिया के बाद जब लारा को होश आया तो वह असहज थीं, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने खुद को इस स्थिति के अनुसार ढाल लिया।</p>
<p>उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों में इस बीमारी की पहचान जन्म के समय ही बेहतर तरीके से हो जाती है, जिससे इलाज जल्दी शुरू हो जाता है। भारत में भी अच्छे डॉक्टर उपलब्ध हैं, लेकिन हर जगह ऐसी सुविधाएं समान रूप से नहीं हैं।</p>
<p>अब लारा पूरी तरह स्वस्थ हैं और सामान्य जीवन जी रही हैं। वरुण और उनकी पत्नी नताशा दलाल ने अब तक अपनी बेटी का चेहरा सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 13:55:29 +0530</pubDate>
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