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                <title>Jainism - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Jainism RSS Feed</description>
                
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                <title>रायपुर में ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण महोत्सव, 71 साल बाद मिला नया आचार्य</title>
                                    <description><![CDATA[खरतरगच्छ परंपरा में विनय कुशल मुनि को मिली आचार्य पदवी, देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालु; ओम बिरला बोले- रायपुर आज आध्यात्म की धरती बन गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/historic-acharya-padarohan-mahotsav-in-raipur-new-acharya-found-after/article-56296"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/raipur-acharya-padarohan-mahotsav.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">रायपुर में आयोजित जैन समाज के ऐतिहासिक आचार्य पदारोहण महोत्सव ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। बूढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में आयोजित इस भव्य आयोजन में खरतरगच्छ परंपरा के प्रमुख संत विनय कुशल मुनि को आचार्य पदवी प्रदान की गई। विशेष बात यह रही कि इस परंपरा में करीब 71 वर्षों बाद किसी संत को आचार्य पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यही कारण है कि इस अवसर को जैन समाज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण अध्याय के रूप में देखा जा रहा है। इस ऐतिहासिक समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु रायपुर पहुंचे। सुबह से ही आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। धार्मिक जयघोष, मंगल पाठ, पूजा-अर्चना और विशेष विधानों के बीच पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का सौभाग्यशाली अवसर बताया और बड़ी संख्या में कार्यक्रम में शामिल होकर नव आचार्य का आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्य पद जैन धर्म में अत्यंत सम्मान और जिम्मेदारी का प्रतीक माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक पद नहीं, बल्कि तप, त्याग, अनुशासन, ज्ञान और समाज के मार्गदर्शन की सर्वोच्च भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है। विनय कुशल मुनि को यह पद प्रदान किए जाने के साथ ही खरतरगच्छ परंपरा को नया नेतृत्व प्राप्त हुआ है। समाज के वरिष्ठजनों का मानना है कि उनके मार्गदर्शन में धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए जैन धर्म की तपस्या, त्याग और अहिंसा की परंपरा को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि आज रायपुर की धरती आध्यात्मिक चेतना से आलोकित हो गई है। उन्होंने कहा कि जैन संतों ने सदियों से तप, संयम और त्याग का मार्ग अपनाकर समाज को सही दिशा दिखाई है। उनके अनुसार आचार्य पद केवल सम्मान का विषय नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी और आध्यात्मिक नेतृत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इतने बड़े संतों और महापुरुषों की उपस्थिति से पूरा छत्तीसगढ़ गौरवान्वित महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि संत समाज का आशीर्वाद राज्य की प्रगति और जनकल्याण के लिए सदैव महत्वपूर्ण रहा है। मुख्यमंत्री ने नव आचार्य को शुभकामनाएं देते हुए उनके नेतृत्व में समाज की निरंतर उन्नति की कामना की।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी इस अवसर को छत्तीसगढ़ के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या और आत्मसंयम का अद्भुत उदाहरण होता है। उन्होंने जैन साधु-संतों की कठिन साधना और अनुशासित जीवनशैली की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आदर्श समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं। महोत्सव के दौरान एक और विशेष आकर्षण सहस्त्रावधान का प्रदर्शन रहा। कार्यक्रम के दूसरे दिन हंसभद्र मुनिजी ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति का परिचय देते हुए एक हजार शब्दों को याद रखकर उन्हें क्रमवार प्रस्तुत किया। इस अनूठी उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है। इस प्रदर्शन ने उपस्थित श्रद्धालुओं और अतिथियों को आश्चर्यचकित कर दिया। लोगों ने इसे साधना, एकाग्रता और मानसिक क्षमता का अद्भुत उदाहरण बताया। तीन दिवसीय इस महोत्सव में 26 साधु और 16 साध्वियों की पावन निश्रा में विभिन्न धार्मिक आयोजन संपन्न हो रहे हैं। धर्मसभा, प्रवचन, पूजा-विधान और आध्यात्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जैन धर्म के सिद्धांतों और जीवन मूल्यों से परिचित कराया जा रहा है। आयोजन स्थल पर अनुशासन, श्रद्धा और भक्ति का अनूठा वातावरण देखने को मिल रहा है। रायपुर में आयोजित यह आचार्य पदारोहण महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया है। 71 वर्षों बाद खरतरगच्छ परंपरा को नया आचार्य मिलने से जैन समाज में उत्साह और गौरव का माहौल है। हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति और संतों के मार्गदर्शन ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया है, जिसकी चर्चा लंबे समय तक होती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:06:04 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, 128 अर्घ अर्पित कर मांगी सुख-शांति की कामना</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल के चौक स्थित धर्मशाला में चल रहे धार्मिक अनुष्ठान में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु, मुनि संभव सागर महाराज ने मन की स्थिरता को बताया शांति का आधार]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/6a1e6d6c8b772/article-54705"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/shri-siddha-chakra-mahamandal-vidhan.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भोपाल के चौक स्थित जैन धर्मशाला में आयोजित श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान इन दिनों श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। आचार्य विद्यासमयसागर महाराज के शिष्य मुनि संभव सागर महाराज के ससंघ सानिध्य में चल रहे इस विशेष धार्मिक आयोजन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। सुबह से ही धर्मशाला परिसर में भक्तों की आवाजाही शुरू हो जाती है और पूजा-अर्चना, अभिषेक तथा धार्मिक अनुष्ठानों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है। आयोजन में शामिल श्रद्धालु न केवल धार्मिक क्रियाओं में भाग ले रहे हैं, बल्कि आध्यात्मिक प्रवचनों का लाभ लेकर आत्मिक शांति का अनुभव भी कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधान के दौरान इंद्रों द्वारा भगवान जिनेंद्र का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। इसके पश्चात शांति धारा और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ। धार्मिक परंपराओं के अनुरूप श्रद्धालुओं ने विधान मंडल पर 128 अर्घ अर्पित कर अपने परिवार, समाज और देश की सुख-समृद्धि तथा शांति की कामना की। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति गीतों और मंत्रोच्चारों से वातावरण गूंजता रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने बड़ी श्रद्धा और समर्पण के साथ धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया। आयोजन स्थल पर अनुशासन और धार्मिक गरिमा का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को पूजा और साधना के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त हो सका।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि संभव सागर महाराज ने जीवन में मन की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार में अधिकांश दुखों का कारण मन की चंचलता और अस्थिरता है। व्यक्ति जब मोह, माया, क्रोध, लोभ और अहंकार जैसे भावों में उलझ जाता है, तब उसके जीवन में अशांति और तनाव बढ़ने लगता है। उन्होंने कहा कि बाहरी परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण मन की स्थिति होती है। यदि मन स्थिर और संयमित हो तो कठिन परिस्थितियों में भी व्यक्ति संतुलन बनाए रख सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मुनि श्री ने कहा कि आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों के पीछे लगातार दौड़ रहा है, लेकिन वास्तविक सुख और संतोष आत्मिक शांति में निहित है। मन को धर्म, ध्यान और आत्मचिंतन के माध्यम से स्थिर किया जा सकता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में कुछ समय आत्ममंथन और आध्यात्मिक साधना के लिए अवश्य निकालें। यही मार्ग व्यक्ति को आत्मा से जोड़ता है और आगे चलकर परमात्मा की अनुभूति तक पहुंचने में सहायक बनता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधान के प्रवक्ता अंशुल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि इस धार्मिक अनुष्ठान के पुण्यार्जक परिवार के रूप में श्रीमती पांचूबाई, सुहागमल जैन तथा ऋषभ-मंजू जैन द्वारा विधान मंडल पर प्रमुख धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। उन्होंने बताया कि आयोजन के प्रति समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और प्रतिदिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। विभिन्न आयु वर्ग के लोग परिवार सहित कार्यक्रम में पहुंच रहे हैं और धार्मिक गतिविधियों में भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम में कई श्रद्धालुओं ने विभिन्न पात्रों की जिम्मेदारी निभाई। प्रमुख पात्रों के रूप में सो धर्म इंद्र, प्रियंका, महेंद्र, कुबेर, आशा और विजेंद्र उपस्थित रहे। वहीं ध्वजारोहण का दायित्व विनोद और विपिन (एमपीटी) द्वारा निभाया गया। शांति धारा की महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया मनोज और प्रीति बांगा द्वारा संपन्न की गई। इसके अलावा महाज्ञानायक की भूमिका प्रतिभा और सचिन ने निभाई, जबकि यज्ञनायक के रूप में पूर्ति और शशांक ने विधान मंडल पर अर्घ अर्पित किए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">धार्मिक आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। कई परिवार सुबह से ही कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंच गए थे। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ समाज में नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री सिद्ध चक्र महामंडल विधान का यह आयोजन लगातार श्रद्धालुओं को धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का कार्य कर रहा है। मुनि संभव सागर महाराज के प्रेरक प्रवचन और धार्मिक अनुष्ठानों की गरिमा ने इस आयोजन को विशेष बना दिया है। आने वाले दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। आयोजन के माध्यम से समाज में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना का संदेश प्रसारित हो रहा है, जो वर्तमान समय की आवश्यकता भी माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 11:26:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महावीर स्वामी की शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक, अहिंसा और सत्य का संदेश बना मार्गदर्शक</title>
                                    <description><![CDATA[पंच महाव्रत और त्रिरत्न के सिद्धांतों पर आधारित जीवन दर्शन, सामाजिक समानता पर दिया जोर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/mahavir-swamis-teachings-are-relevant-even-today-the-message-of/article-49388"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/jivan-mantra-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, की शिक्षाएं आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक मानी जाती हैं। उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य और संयम के सिद्धांत वर्तमान समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उनके समय में थे।</p>
<p><strong>अहिंसा परमो धर्म</strong><br />महावीर स्वामी के अनुसार अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट नहीं देना चाहिए।</p>
<p><strong>जियो और जीने दो</strong><br />हर प्राणी को जीने का अधिकार है। सह-अस्तित्व और करुणा पर आधारित जीवन जीने का संदेश।</p>
<p><strong>पंच महाव्रत (पंचशील सिद्धांत)</strong></p>
<p><strong>अहिंसा</strong> – किसी भी जीव को नुकसान न पहुंचाना</p>
<p><strong>सत्य</strong> – हमेशा सच बोलना</p>
<p><strong>अस्तेय (अचौर्य)</strong> – चोरी न करना</p>
<p><strong>अपरिग्रह</strong> – जरूरत से ज्यादा संग्रह न करना</p>
<p><strong>ब्रह्मचर्य</strong> – इंद्रियों पर नियंत्रण रखना</p>
<p><strong>त्रिरत्न (मोक्ष का मार्ग)</strong></p>
<p><strong>सम्यक दर्शन</strong> – सही आस्था</p>
<p><strong>सम्यक ज्ञान</strong> – सच्चा ज्ञान</p>
<p><strong>सम्यक चरित्र</strong> – सही आचरण</p>
<p><strong>अनेकांतवाद</strong><br />सत्य एक नहीं, कई दृष्टिकोणों से देखा जा सकता है। दूसरों के विचारों का सम्मान करना चाहिए।</p>
<p><strong>स्यादवाद</strong><br />हर बात को सापेक्ष (relative) रूप से समझना चाहिए, किसी एक दृष्टिकोण को अंतिम सत्य नहीं मानना चाहिए।</p>
<p><strong>ईश्वर के प्रति दृष्टिकोण</strong><br />महावीर स्वामी ने सृष्टि के रचयिता के रूप में ईश्वर को नहीं माना, बल्कि आत्मा की शुद्ध अवस्था को सर्वोच्च माना।</p>
<p><strong>आत्म-साक्षात्कार</strong><br />खुद को जानना और आत्मा की शुद्धि ही जीवन का मुख्य उद्देश्य है।</p>
<p><strong>सामाजिक समानता</strong><br />जाति-पाति और भेदभाव का विरोध, सभी मनुष्यों को समान मानना।</p>
<p><strong>संयम और सादगी</strong><br />सादा जीवन, उच्च विचार और इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की शिक्षा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 14:21:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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