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                <title>MP Education News - दैनिक जागरण</title>
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                <description>MP Education News RSS Feed</description>
                
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                <title>बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम बदलने के प्रस्ताव पर बढ़ा विवाद, कई संगठनों ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[भोपाल में विरोध की आवाजें तेज, सामाजिक और छात्र संगठनों ने ऐतिहासिक विरासत से जुड़े मुद्दे को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/controversy-increased-over-the-proposal-to-change-the-name-of/article-54988"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/barkatullah-university-(2).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भोपाल में स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ किए जाने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार गहराती जा रही है। विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने के बाद अब विभिन्न संगठनों ने इस फैसले के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। राजधानी भोपाल में कई मंचों और छात्र संगठनों ने इसे ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि विश्वविद्यालय का मौजूदा नाम स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे व्यक्तित्व से जुड़ा है, जिन्होंने विदेशी धरती पर रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष किया था। उनका तर्क है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की पहचान केवल भवनों और पाठ्यक्रमों से नहीं बल्कि उसके इतिहास और उससे जुड़े नामों से भी बनती है। ऐसे में नाम परिवर्तन का फैसला व्यापक चर्चा और सामाजिक सहमति के बिना नहीं लिया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जमीअत उलमा से जुड़े पदाधिकारियों ने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि यह मामला केवल एक विश्वविद्यालय के नाम का नहीं बल्कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत से जुड़ा हुआ है। संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि जिन व्यक्तित्वों ने आजादी की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई, उनके नामों को संरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि ऐतिहासिक नामों को बदलने की परंपरा बढ़ी तो आने वाली पीढ़ियां उन महान हस्तियों के योगदान से दूर होती चली जाएंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध करने वालों ने यह भी कहा कि प्रदेश के उच्च शिक्षा संस्थान पहले से कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। शिक्षकों के रिक्त पद, शोध कार्यों की सीमित संभावनाएं, संसाधनों की कमी और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से चर्चा में हैं। ऐसे में नाम परिवर्तन जैसे प्रस्तावों की बजाय शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनका मानना है कि विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अकादमिक सुधारों पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर छात्र संगठन एनएसयूआई ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। संगठन के नेताओं का आरोप है कि विश्वविद्यालय से जुड़े कई प्रशासनिक और वित्तीय मुद्दों पर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन उन समस्याओं के समाधान की बजाय नाम परिवर्तन जैसे विषयों को आगे लाया जा रहा है। छात्र नेताओं का कहना है कि यदि प्रस्ताव को वापस नहीं लिया गया तो प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भोपाल में विश्वविद्यालय परिसर के बाहर छात्र कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित कर अपनी नाराजगी जताई। इस दौरान छात्रों ने विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक पहचान बनाए रखने की मांग दोहराई। उनका कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का नाम बदलने से पहले पूर्व छात्रों, शिक्षकों, शोधार्थियों और समाज के विभिन्न वर्गों की राय लेना आवश्यक होना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध कर रहे संगठनों ने सरकार के सामने कई सुझाव भी रखे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी ऐतिहासिक शासक या सांस्कृतिक व्यक्तित्व के सम्मान में नया संस्थान स्थापित करना है तो उसके लिए अलग विश्वविद्यालय या शोध केंद्र बनाया जा सकता है। मौजूदा विश्वविद्यालय का नाम बदलना समाधान नहीं माना जा सकता। कुछ संगठनों ने यह भी मांग की है कि प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों और सामाजिक सुधारकों पर विशेष शोध केंद्र स्थापित किए जाएं ताकि युवाओं को उनके योगदान की जानकारी मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बीच सर्वधर्म सद्भावना से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी बयान जारी कर कहा है कि भोपाल की पहचान हमेशा विविध संस्कृतियों और साझा विरासत से जुड़ी रही है। उनके अनुसार किसी भी ऐतिहासिक नाम को बदलने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने सरकार से संवाद की प्रक्रिया शुरू करने और सभी पक्षों की बात सुनने की मांग की है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक गलियारों में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं और शिक्षाविदों का मानना है कि विश्वविद्यालयों के नाम केवल प्रशासनिक पहचान नहीं होते, बल्कि वे इतिहास, संस्कृति और सामाजिक स्मृतियों का हिस्सा भी बन जाते हैं। इसी वजह से नाम परिवर्तन जैसे फैसलों पर स्वाभाविक रूप से व्यापक बहस होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">----</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 17:58:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Priyanka ]]></dc:creator>
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                <title>शिक्षक पात्रता परीक्षा पर बड़ा फैसला, सरकार सुप्रीम कोर्ट में रखेगी शिक्षकों का पक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[मध्यप्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा पर सरकार सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखेगी, मंत्री उदय प्रताप सिंह ने शिक्षकों को भरोसा दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-decision-on-teacher-eligibility-test-government-will-present-the/article-50676"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/mp-teacher-eligibility-exam-supreme-court-government-stand.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच राज्य सरकार ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने शिक्षक संगठनों और राज्य कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों को भरोसा दिलाया है कि सरकार इस मुद्दे पर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों का पक्ष मजबूती से रखेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का निर्णय लेने में जल्दबाजी नहीं की जाएगी और शिक्षकों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">प्रतिनिधिमंडल ने रखी अपनी बात</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">शिक्षक पात्रता परीक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिक्षा मंत्री से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परीक्षा से संबंधित समस्याओं और आशंकाओं को विस्तार से रखा। प्रतिनिधियों ने सरकार से अनुरोध किया कि वह सुप्रीम कोर्ट में शिक्षकों के पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत करे ताकि उनके हित सुरक्षित रह सकें।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">सरकार ने दी कानूनी प्रक्रिया के बाद कार्रवाई की बात</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">राज्य कर्मचारी संघ के प्रवक्ता डॉ. अनिल भार्गव वायु ने बताया कि सरकार इस मामले में तकनीकी और विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद जल्द ही उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी निर्णय में जल्दबाजी नहीं करेगी और शिक्षकों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">संगठनों के प्रमुख भी रहे मौजूद</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश महामंत्री कुलदीप सिंह गुर्जर, मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़, राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव और महामंत्री जितेंद्र सिंह सहित कई प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में शिक्षकों के हितों की रक्षा की मांग की।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">शिक्षकों की एकजुटता पर जोर</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">राज्य कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हेमंत श्रीवास्तव ने कहा कि प्रदेश के सभी शिक्षक एकजुट हैं और अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह सजग हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि सरकार सकारात्मक कदम उठाएगी और शिक्षकों को न्याय मिलेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मजबूती से रखा जाएगा पक्ष</span></strong></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के अध्यक्ष क्षत्रवीर सिंह राठौड़ ने कहा कि शिक्षकों का पक्ष पूरी मजबूती के साथ रखा गया है और उन्हें उम्मीद है कि इसका सकारात्मक परिणाम सामने आएगा। वहीं, महामंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के रुख से शिक्षकों का विश्वास मजबूत हुआ है और सभी मिलकर अपने अधिकारों के लिए प्रयास जारी रखेंगे।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 12:29:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ग्वालियर में बदला स्कूलों का टाइम टेबल: 10 फरवरी से सुबह 9 बजे शुरू होंगी कक्षाएं</title>
                                    <description><![CDATA[मौसम सामान्य होने के बाद कलेक्टर के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने जारी किया आदेश]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/time-table-of-schools-changed-in-gwalior-classes-will-start/article-45634"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-02/mp-(11)1.jpg" alt=""></a><br /><p>ग्वालियर जिले में ठंड का असर कम होते ही स्कूलों के समय में एक बार फिर बदलाव कर दिया गया है। कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला शिक्षा अधिकारी हरिओम चतुर्वेदी ने नया आदेश जारी करते हुए बताया कि जिले के सभी स्कूल अब 10 फरवरी से नियमित समय के अनुसार संचालित होंगे।</p>
<p>नए आदेश के तहत शासकीय और अशासकीय सभी विद्यालय सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुलेंगे। इससे पहले कड़ाके की ठंड और कम तापमान को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा और सुविधा के लिए स्कूलों के समय में अस्थायी बदलाव किया गया था।</p>
<p>शिक्षा विभाग का कहना है कि फरवरी में मौसम सामान्य होने और तापमान में सुधार के बाद अब पढ़ाई को नियमित करने का निर्णय लिया गया है, ताकि छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों पर कोई असर न पड़े और सिलेबस समय पर पूरा किया जा सके।</p>
<p>यह आदेश ग्वालियर जिले के सभी सरकारी, निजी और मान्यता प्राप्त स्कूलों पर लागू होगा। इसमें मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल से जुड़े स्कूलों के साथ-साथ CBSE, ICSE और अन्य बोर्ड से संबद्ध विद्यालय भी शामिल हैं।</p>
<p>जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि समय परिवर्तन की सूचना विद्यार्थियों और अभिभावकों को पहले ही दे दी जाए, ताकि किसी तरह की परेशानी न हो और स्कूल संचालन सुचारू रूप से किया जा सके।</p>
<p>-----</p>
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                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Feb 2026 13:46:54 +0530</pubDate>
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