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                <title>fitness - दैनिक जागरण</title>
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                <description>fitness RSS Feed</description>
                
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                <title>तनाव कम करने के लिए अपनाएं ये 7 आसान डेली हैबिट्स, मानसिक स्वास्थ्य रहेगा बेहतर</title>
                                    <description><![CDATA[भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-छोटी अच्छी आदतें तनाव कम करने, मन शांत रखने और रोजमर्रा की चुनौतियों से बेहतर तरीके से निपटने में मदद कर सकती हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/adopt-these-7-easy-daily-habits-to-reduce-stress-mental/article-58447"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/stress-management.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">तनाव आज की जीवनशैली का ऐसा हिस्सा बन चुका है जिससे शायद ही कोई पूरी तरह बच पाता हो। नौकरी का दबाव, पढ़ाई की चिंता, परिवार की जिम्मेदारियां, आर्थिक परेशानियां और लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। कई बार लोग तनाव को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव शरीर और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तनाव को पूरी तरह खत्म करना हमेशा संभव नहीं होता, लेकिन कुछ आसान डेली हैबिट्स अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी महंगे इलाज या बड़े बदलाव की जरूरत नहीं होती। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें मानसिक संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि दिन की शुरुआत सकारात्मक तरीके से हो और जीवनशैली में कुछ जरूरी बदलाव किए जाएं तो तनाव का असर काफी कम महसूस होता है। यही वजह है कि मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहली आदत है सुबह की शुरुआत बिना मोबाइल फोन देखे करना। बहुत से लोग जागते ही सोशल मीडिया, ईमेल या खबरें देखने लगते हैं, जिससे दिमाग पर शुरुआत से ही अतिरिक्त दबाव बनने लगता है। इसके बजाय कुछ मिनट शांत बैठना, गहरी सांस लेना या हल्की स्ट्रेचिंग करना दिन को बेहतर बना सकता है। दूसरी जरूरी आदत है नियमित व्यायाम। रोजाना 30 मिनट की वॉक, योग या हल्की एक्सरसाइज शरीर में ऐसे हार्मोन सक्रिय करती है जो तनाव कम करने और मूड बेहतर बनाने में मदद करते हैं। तीसरी आदत पर्याप्त और अच्छी नींद लेना है। लगातार कम नींद लेने से चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है और मानसिक थकान महसूस होती है। अधिकांश विशेषज्ञ वयस्कों के लिए रोजाना सात से आठ घंटे की नींद को जरूरी मानते हैं। चौथी आदत संतुलित भोजन करना है। समय पर पौष्टिक भोजन और पर्याप्त पानी पीना भी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। जरूरत से ज्यादा चाय, कॉफी या जंक फूड का सेवन कई लोगों में बेचैनी और तनाव बढ़ा सकता है। पांचवीं आदत अपने लिए थोड़ा समय निकालना है। दिनभर की व्यस्तता के बीच कुछ मिनट अपनी पसंद का संगीत सुनना, किताब पढ़ना, बागवानी करना या किसी रचनात्मक काम में समय बिताना मन को सुकून देता है। छठी आदत अपने करीबी लोगों से खुलकर बातचीत करना है। कई लोग अपनी परेशानियां मन में दबाकर रखते हैं, जिससे तनाव और बढ़ जाता है। परिवार या दोस्तों से बातचीत करने से मन हल्का होता है और समस्याओं को नए नजरिए से देखने का मौका मिलता है। सातवीं और सबसे अहम आदत है डिजिटल ब्रेक लेना। लगातार मोबाइल, लैपटॉप और सोशल मीडिया पर बने रहने से मानसिक थकान बढ़ सकती है। दिन में कुछ समय स्क्रीन से दूरी बनाना आंखों और दिमाग दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">तनाव कम करने के लिए अपनाई गई ये सात आसान डेली हैबिट्स तभी असर दिखाती हैं जब इन्हें नियमित रूप से जीवन का हिस्सा बनाया जाए। एक-दो दिन अपनाने से बड़ा बदलाव नजर नहीं आता, लेकिन लगातार अभ्यास से मानसिक स्थिति में सकारात्मक सुधार महसूस होने लगता है। साथ ही समय प्रबंधन भी तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाता है। जरूरी कामों की प्राथमिकता तय करना, एक साथ कई काम करने से बचना और बीच-बीच में छोटा ब्रेक लेना मानसिक दबाव को कम कर सकता है। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक उदासी, बेचैनी, घबराहट, नींद न आना या किसी काम में मन न लगने जैसी समस्याएं लगातार बनी रहें तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर विकल्प हो सकता है। तनाव जीवन का हिस्सा जरूर है, लेकिन इसे जीवन पर हावी होने देना सही नहीं है। छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें न केवल तनाव को कम करने में मदद करती हैं, बल्कि आत्मविश्वास बढ़ाती हैं, रिश्तों को बेहतर बनाती हैं और काम करने की क्षमता में भी सुधार लाती हैं। स्वस्थ शरीर के साथ स्वस्थ मन भी उतना ही जरूरी है और इसकी शुरुआत रोजमर्रा की अच्छी आदतों से ही होती है। बदलती जीवनशैली के इस दौर में यदि लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और नियमित रूप से इन आसान उपायों को अपनाएं, तो वे न सिर्फ तनाव से बेहतर तरीके से निपट पाएंगे बल्कि अधिक संतुलित, खुशहाल और ऊर्जावान जीवन भी जी सकेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:04:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महात्मा गांधी का जीवन मंत्र: स्वास्थ्य ही वास्तविक धन, सुखी जीवन की सबसे बड़ी पूंजी</title>
                                    <description><![CDATA[बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के दौर में महात्मा गांधी का स्वास्थ्य पर दिया गया संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है, जितना उनके समय में था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/mantras-of-life/mahatma-gandhis-life-mantra-health-is-the-real-wealth-and/article-58449"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mahatma-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>महात्मा गांधी ने अपने जीवन में सादगी, अनुशासन और स्वस्थ जीवनशैली को जितना महत्व दिया, उतना ही जोर उन्होंने मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भी दिया था। उनका प्रसिद्ध विचार, "स्वास्थ्य ही वास्तविक धन है, सोने और चांदी के टुकड़े नहीं", आज भी लोगों को यह समझाने का काम करता है कि जीवन में सबसे बड़ी पूंजी अच्छी सेहत है। बदलती जीवनशैली, बढ़ते तनाव, अनियमित खानपान और भागदौड़ के दौर में यह संदेश पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हो गया है। आज लोग आर्थिक सफलता, करियर और सुविधाओं के पीछे लगातार भाग रहे हैं, लेकिन इसी दौड़ में अपनी सेहत को पीछे छोड़ देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि यदि शरीर और मन स्वस्थ नहीं हैं, तो धन-दौलत और भौतिक सुविधाओं का आनंद लेना भी मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि गांधीजी के इस विचार को आज के समय में स्वस्थ जीवन का मूल मंत्र माना जा रहा है। उनका मानना था कि व्यक्ति का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वह शारीरिक, मानसिक और नैतिक रूप से स्वस्थ हो। उन्होंने अपने जीवन में प्राकृतिक जीवनशैली, नियमित दिनचर्या, संतुलित भोजन और आत्मसंयम को अपनाकर इसका उदाहरण भी प्रस्तुत किया।</p>
<p>गांधीजी का जीवन केवल राजनीतिक संघर्ष तक सीमित नहीं था, बल्कि वह स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का भी एक बड़ा संदेश देता है। वे सादा भोजन करते थे, नियमित पैदल चलते थे और प्राकृतिक चिकित्सा में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए महंगे संसाधनों की नहीं, बल्कि सही आदतों की जरूरत होती है। आज जब जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं, तब उनका यह संदेश लोगों को अपनी प्राथमिकताओं पर दोबारा सोचने के लिए प्रेरित करता है। डॉक्टरों के अनुसार, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय रोग जैसी कई समस्याएं अनियमित दिनचर्या और खराब खानपान से जुड़ी हुई हैं। यदि लोग समय पर भोजन करें, पर्याप्त नींद लें, रोजाना कुछ समय व्यायाम या पैदल चलने के लिए निकालें और तनाव को नियंत्रित रखने का प्रयास करें, तो कई बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। गांधीजी भी आत्मअनुशासन को स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी कुंजी मानते थे। उनका विश्वास था कि संयमित जीवन व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ मानसिक रूप से भी संतुलित रखता है। यही कारण है कि उनके विचार आज केवल इतिहास की किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए इसी तरह की सलाह देते हैं।</p>
<p>आज के दौर में मोबाइल, लैपटॉप और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। घंटों एक ही जगह बैठकर काम करना, फास्ट फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। ऐसे समय में गांधीजी का संदेश याद दिलाता है कि स्वस्थ शरीर के बिना जीवन का संतुलन बनाए रखना कठिन है। मानसिक स्वास्थ्य भी आज बड़ी चिंता का विषय बन चुका है। तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं हर आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि स्वस्थ जीवन केवल शारीरिक फिटनेस तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक शांति भी उतनी ही जरूरी है। नियमित योग, ध्यान, संतुलित भोजन, पर्याप्त आराम और परिवार के साथ समय बिताना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। गांधीजी का जीवन भी आत्मचिंतन, धैर्य और सकारात्मक सोच का उदाहरण रहा है। उन्होंने हमेशा यह संदेश दिया कि सरल जीवन और उच्च विचार व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाते हैं। यही सोच आज भी लोगों को प्रेरित करती है कि सफलता का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक समृद्धि नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन भी है। बदलती दुनिया में जहां भौतिक उपलब्धियों को सफलता का पैमाना माना जाता है, वहीं गांधीजी का यह विचार याद दिलाता है कि यदि स्वास्थ्य साथ नहीं है, तो बाकी उपलब्धियां अधूरी रह जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि लोग अपने व्यस्त जीवन में स्वास्थ्य को सबसे पहली प्राथमिकता दें, नियमित दिनचर्या अपनाएं, संतुलित खानपान रखें और मानसिक शांति बनाए रखने के लिए समय निकालें। यही आदतें लंबे समय तक बेहतर जीवन की आधारशिला बन सकती हैं और महात्मा गांधी के इस अमर संदेश को व्यवहार में उतारने का सबसे अच्छा तरीका भी यही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जीवन के मंत्र</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रात को देर तक मोबाइल चलाना पड़ सकता है भारी, जानिए शरीर और दिमाग पर इसके गंभीर असर</title>
                                    <description><![CDATA[नींद की कमी से लेकर आंखों की समस्या, मानसिक तनाव और हार्मोन असंतुलन तक—विशेषज्ञ बताते हैं क्यों सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना है जरूरी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/using-mobile-phone-till-late-at-night-can-be-harmful/article-58219"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mobile-at-night.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">रात को सोने से पहले मोबाइल फोन चलाना आज की जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना, चैटिंग करना या वेब सीरीज देखना कई लोगों की रोजमर्रा की आदत बन गई है। लेकिन यही आदत धीरे-धीरे सेहत पर भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक मोबाइल स्क्रीन के सामने समय बिताने से न केवल नींद प्रभावित होती है, बल्कि इसका असर शरीर, दिमाग और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज के समय में बच्चे, युवा और बुजुर्ग लगभग हर आयु वर्ग के लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं। कई लोग बिस्तर पर जाने के बाद भी एक-दो घंटे तक मोबाइल देखते रहते हैं। शुरुआत में यह सामान्य आदत लगती है, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करने से कई गंभीर समस्याएं जन्म ले सकती हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>नींद की गुणवत्ता पर पड़ता है सबसे ज्यादा असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट शरीर में मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को प्रभावित करती है। यही हार्मोन शरीर को यह संकेत देता है कि अब सोने का समय हो गया है। जब रात में लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है, तो मस्तिष्क सक्रिय बना रहता है और नींद आने में देरी होती है। इसका परिणाम यह होता है कि व्यक्ति पर्याप्त नींद नहीं ले पाता और अगले दिन थकान महसूस करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लगातार कई दिनों तक नींद पूरी नहीं होने पर शरीर की कार्यक्षमता कम होने लगती है। इससे काम में मन नहीं लगता, याददाश्त कमजोर हो सकती है और दिनभर चिड़चिड़ापन बना रहता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>आंखों पर बढ़ता है दबाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मोबाइल स्क्रीन को लगातार देखने से आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे आंखों में जलन, सूखापन, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई लोग देर रात तक अंधेरे कमरे में मोबाइल चलाते हैं, जिससे आंखों को और अधिक नुकसान पहुंच सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>मानसिक स्वास्थ्य भी हो सकता है प्रभावित</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डाल सकता है। लगातार नकारात्मक खबरें, तुलना की भावना और सोशल मीडिया का दबाव तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। कई बार लोग देर रात तक ऑनलाइन रहने के कारण मानसिक रूप से शांत नहीं हो पाते, जिससे दिमाग को आराम नहीं मिल पाता।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बढ़ सकता है मोटापा</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कम लोग जानते हैं कि देर रात तक जागने और मोबाइल चलाने का संबंध वजन बढ़ने से भी जुड़ा हो सकता है। पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर शरीर में भूख नियंत्रित करने वाले हार्मोन प्रभावित होते हैं। इसके कारण व्यक्ति को बार-बार भूख लगती है और जंक फूड खाने की इच्छा बढ़ सकती है। इसके अलावा देर रात तक जागने वाले लोग अक्सर शारीरिक गतिविधियां कम करते हैं, जिससे मोटापे का खतरा भी बढ़ जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>गर्दन और पीठ में दर्द की समस्या</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">मोबाइल का लगातार उपयोग करते समय अधिकांश लोग गर्दन झुकाकर बैठते या लेटते हैं। लंबे समय तक इसी स्थिति में रहने से गर्दन, कंधे और पीठ में दर्द की शिकायत शुरू हो सकती है। इसे कई विशेषज्ञ "टेक्स्ट नेक" की समस्या भी मानते हैं।यदि यह आदत लंबे समय तक बनी रहती है तो रीढ़ की हड्डी पर भी असर पड़ सकता है और मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या बढ़ सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>हार्मोन संतुलन पर असर</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पर्याप्त नींद शरीर के हार्मोन संतुलन के लिए बेहद जरूरी होती है। लगातार देर रात तक मोबाइल चलाने और कम सोने से शरीर का जैविक चक्र प्रभावित होता है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है और शरीर की रिकवरी प्रक्रिया भी धीमी पड़ सकती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>बच्चों और किशोरों के लिए ज्यादा नुकसानदायक</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों और किशोरों में मोबाइल की लत तेजी से बढ़ रही है। पढ़ाई के बाद भी घंटों मोबाइल देखने से उनकी नींद, पढ़ाई और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है। कई बच्चों में ध्यान की कमी, व्यवहार में बदलाव और आंखों की समस्याएं भी देखने को मिल रही हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखें और सोने से पहले मोबाइल के इस्तेमाल की आदत को सीमित करें।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>कैसे करें बचाव</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कुछ आसान उपाय अपनाने की सलाह देते हैं। सोने से कम से कम 45 मिनट से एक घंटे पहले मोबाइल का उपयोग बंद कर दें। यदि जरूरी हो तो मोबाइल में ब्लू लाइट फिल्टर या नाइट मोड का इस्तेमाल करें। बिस्तर पर मोबाइल लेकर न जाएं और अलार्म के लिए अलग घड़ी का उपयोग करें। रात के समय किताब पढ़ना, हल्का संगीत सुनना या ध्यान करना बेहतर विकल्प हो सकते हैं। इसके अलावा दिनभर नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय पर सोने की आदत भी अच्छी नींद और बेहतर स्वास्थ्य के लिए जरूरी मानी जाती है। आज के डिजिटल दौर में मोबाइल हमारी जरूरत बन चुका है, लेकिन इसका सही समय और सीमित उपयोग ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है। छोटी-सी सावधानी भविष्य में कई स्वास्थ्य समस्याओं से बचा सकती है। यदि आप भी रात को देर तक मोबाइल चलाने की आदत रखते हैं, तो समय रहते इस आदत में बदलाव करना आपके शरीर और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 17:37:01 +0530</pubDate>
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                <title>फ्रोजन फूड सेहत के लिए कितना सही? जानिए फायदे, नुकसान और कितनी मात्रा में खाना चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रोजन फूड पूरी तरह नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन सही चुनाव, सीमित मात्रा और संतुलित आहार के साथ इसका सेवन करना स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/know-how-frozen-food-is-good-for-health-its-advantages/article-57447"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/frozen-food.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में फ्रोजन फूड लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। कामकाजी लोग हों, छात्र हों या फिर छोटे परिवार, समय बचाने के लिए फ्रोजन फूड का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। बाजार में फ्रोजन मटर, कॉर्न, सब्जियां, चिकन, फिश, फ्रेंच फ्राइज, रेडी-टू-कुक पराठे, पिज्जा, नगेट्स और कई तरह के पैकेज्ड खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं। हालांकि, अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या फ्रोजन फूड सेहत के लिए सुरक्षित है या नहीं। विशेषज्ञों के अनुसार इसका जवाब पूरी तरह "हां" या "नहीं" में नहीं दिया जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि फ्रोजन फूड किस प्रकार का है, उसे कैसे तैयार किया गया है और आप कितनी मात्रा में उसका सेवन करते हैं। फ्रोजन फूड तैयार करने की प्रक्रिया में खाद्य पदार्थों को बहुत कम तापमान पर तेजी से फ्रीज किया जाता है। इस प्रक्रिया से उनमें मौजूद अधिकांश पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। खासतौर पर फ्रोजन फल और सब्जियां कई बार ताजी सब्जियों जितनी ही पौष्टिक हो सकती हैं, क्योंकि इन्हें तोड़ने के तुरंत बाद फ्रीज कर दिया जाता है। इसके विपरीत, बाजार में कई दिनों तक रखी ताजी सब्जियों में कुछ विटामिन धीरे-धीरे कम हो सकते हैं। इसलिए हर फ्रोजन फूड को नुकसानदायक मानना सही नहीं होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">फ्रोजन फूड का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुविधा है। व्यस्त जीवनशैली में खाना बनाने का समय कम होने पर यह अच्छा विकल्प बन सकता है। यह लंबे समय तक खराब नहीं होता, जिससे भोजन की बर्बादी भी कम होती है। फ्रोजन सब्जियां पूरे साल उपलब्ध रहती हैं, चाहे उनका मौसम हो या नहीं। इसके अलावा इन्हें साफ करने, काटने और तैयार करने में समय नहीं लगता, जिससे खाना जल्दी बन जाता है। कई लोगों के लिए यह बजट के लिहाज से भी सुविधाजनक साबित होता है। हालांकि सभी फ्रोजन फूड एक जैसे नहीं होते। फ्रोजन मटर, पालक, कॉर्न, मिश्रित सब्जियां और बिना मसाले वाला फ्रोजन चिकन अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प माने जाते हैं। दूसरी ओर फ्रोजन पिज्जा, बर्गर पैटी, फ्रेंच फ्राइज, सॉसेज, नगेट्स और अधिक प्रोसेस्ड रेडी-टू-ईट उत्पादों में नमक, चीनी, ट्रांस फैट और प्रिजर्वेटिव की मात्रा काफी अधिक हो सकती है। ऐसे खाद्य पदार्थों का बार-बार सेवन स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अत्यधिक प्रोसेस्ड फ्रोजन फूड खाने से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। इनमें मौजूद अतिरिक्त सोडियम शरीर में पानी रोकता है, जिससे रक्तचाप बढ़ने की संभावना रहती है। कई उत्पादों में संतृप्त वसा और कृत्रिम स्वाद भी मिलाए जाते हैं, जो लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए खरीदारी करते समय पैकेट पर लिखी पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना जरूरी है। कितना फ्रोजन फूड खाना चाहिए, इसका कोई एक निश्चित नियम नहीं है। पोषण विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि आपका आहार संतुलित है तो सप्ताह में एक-दो बार फ्रोजन रेडी-टू-कुक भोजन लेना सामान्य माना जा सकता है। वहीं फ्रोजन सब्जियों और फलों का उपयोग जरूरत के अनुसार नियमित रूप से भी किया जा सकता है, बशर्ते उनमें अतिरिक्त नमक, चीनी या मसाले न मिले हों। कोशिश करें कि आपकी थाली का अधिकांश हिस्सा ताजा और घर में बना भोजन ही हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी फ्रोजन फूड चुनते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की बजाय साधारण फ्रोजन सब्जियां, फल या बिना मसाले वाले खाद्य विकल्प देना बेहतर माना जाता है। जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी या हृदय संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें ज्यादा सोडियम वाले फ्रोजन उत्पादों से बचना चाहिए। फ्रोजन फूड का उपयोग करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना भी जरूरी है। एक बार पिघलाए गए खाद्य पदार्थ को दोबारा फ्रीज नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है। पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट जरूर जांचें और उत्पाद को निर्देशानुसार ही स्टोर करें। खाना बनाते समय उसे पूरी तरह पकाना भी आवश्यक है ताकि किसी प्रकार के संक्रमण की संभावना कम हो।</p>
<p class="isSelectedEnd">यदि आप स्वस्थ जीवनशैली अपनाना चाहते हैं तो फ्रोजन फूड को सुविधा के रूप में देखें, भोजन का स्थायी विकल्प नहीं। ताजे फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, दूध, अंडे और घर का बना भोजन अब भी सबसे बेहतर विकल्प माने जाते हैं। फ्रोजन फूड का उपयोग तभी करें जब समय की कमी हो या ताजे विकल्प उपलब्ध न हों। आखिरकार यह कहना गलत होगा कि फ्रोजन फूड हमेशा नुकसानदायक होता है। सही उत्पाद चुनकर, सीमित मात्रा में और संतुलित आहार के साथ इसका सेवन किया जाए तो यह व्यस्त जीवनशैली में उपयोगी साबित हो सकता है। वहीं अत्यधिक प्रोसेस्ड और जंक फ्रोजन फूड का नियमित सेवन लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलिए खरीदारी करते समय लेबल पढ़ें, पोषण संबंधी जानकारी समझें और अपनी जरूरत के अनुसार समझदारी से चुनाव करें। संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली ही अच्छी सेहत की सबसे मजबूत नींव मानी जाती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 00:00:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>100 साल तक स्वस्थ जीवन चाहते हैं? आज ही छोड़ दें ये 10 बुरी आदतें</title>
                                    <description><![CDATA[ कुछ आदतें बदलकर बढ़ाई जा सकती है उम्र और बेहतर बनाया जा सकता है स्वास्थ्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/if-you-want-a-healthy-life-for-100-years-leave/article-55757"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/longevity.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हर व्यक्ति लंबा और स्वस्थ जीवन जीना चाहता है। केवल अच्छी चिकित्सा सुविधाएं या बेहतर जीन ही लंबी उम्र की गारंटी नहीं होते। हमारी रोजमर्रा की आदतें भी यह तय करती हैं कि हम कितने समय तक स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान बने रहेंगे। दुनिया के कई शोध बताते हैं कि कुछ सामान्य लेकिन नुकसानदायक आदतें समय के साथ शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती हैं। यदि आप भी 100 साल तक स्वस्थ जीवन जीने का सपना देखते हैं, तो इन 10 आदतों को छोड़ना आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>1. अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड खाना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में अक्सर अधिक मात्रा में नमक, चीनी, ट्रांस फैट और कृत्रिम रसायन होते हैं। लगातार ऐसे भोजन का सेवन मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों का खतरा बढ़ा सकता है। विशेषज्ञ ताजा फल, सब्जियां, साबुत अनाज और घर का बना भोजन खाने की सलाह देते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>2. धूम्रपान करना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">धूम्रपान को दुनिया भर में समय से पहले मृत्यु के प्रमुख कारणों में गिना जाता है। यह फेफड़ों के कैंसर, हृदय रोग, स्ट्रोक और सांस संबंधी कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। धूम्रपान छोड़ने के बाद शरीर धीरे-धीरे खुद को सुधारना शुरू कर देता है और स्वास्थ्य जोखिम कम होने लगते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>3. लंबे समय तक बैठे रहना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">आधुनिक जीवनशैली में घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना आम हो गया है। लेकिन लगातार बैठे रहने से मोटापा, मधुमेह और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ हर 30 से 60 मिनट में कुछ देर टहलने या हल्की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह देते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>4. मन में नाराजगी और गुस्सा रखना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">किसी के प्रति लंबे समय तक गुस्सा या नाराजगी रखने से मानसिक तनाव बढ़ सकता है। इससे रक्तचाप बढ़ने, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। माफ करना और सकारात्मक सोच विकसित करना मानसिक शांति के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>5. खुद को सामाजिक रूप से अलग रखना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">अकेलापन सिर्फ भावनात्मक नहीं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि सामाजिक संबंध मजबूत होने से मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और जीवन संतुष्टि बढ़ती है। परिवार, मित्रों और समुदाय से जुड़े रहना लंबी उम्र के लिए लाभदायक माना जाता है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>6. यह सोचना कि केवल बड़े बदलाव ही मायने रखते हैं</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कई लोग मानते हैं कि स्वास्थ्य सुधारने के लिए बड़े और कठिन बदलाव जरूरी हैं। जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें भी समय के साथ बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं। रोजाना 15 मिनट की वॉक, अतिरिक्त पानी पीना या जंक फूड कम करना भी महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>7. डर या लापरवाही के कारण स्वास्थ्य जांच से बचना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">कई लोग बीमारी के डर से नियमित स्वास्थ्य जांच नहीं करवाते। कुछ लोग लक्षणों को नजरअंदाज करते रहते हैं। इससे कई बीमारियां गंभीर अवस्था में पहुंच जाती हैं। समय पर जांच और उपचार गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने में मदद कर सकते हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>8. पर्याप्त नींद नहीं लेना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">नींद शरीर और मस्तिष्क की मरम्मत का सबसे महत्वपूर्ण समय होती है। लगातार कम नींद लेने से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो सकती है और हृदय रोग, मोटापा तथा मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। अधिकांश वयस्कों के लिए प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी मानी जाती है।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>9. लगातार तनाव में रहना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">तनाव जीवन का हिस्सा है, लेकिन लगातार तनाव में रहना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे रक्तचाप बढ़ सकता है, नींद प्रभावित हो सकती है और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। योग, ध्यान, व्यायाम और समय प्रबंधन जैसी तकनीकें तनाव कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><strong>10. हर चीज के लिए जीन को जिम्मेदार ठहराना</strong></h5>
<p style="text-align:justify;">बहुत से लोग मानते हैं कि उनकी सेहत पूरी तरह जीन पर निर्भर करती है। जीवनशैली और पर्यावरण भी स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डालते हैं। स्वस्थ खानपान, नियमित व्यायाम और सकारात्मक आदतें कई आनुवंशिक जोखिमों को कम करने में मदद कर सकती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लंबी उम्र का कोई जादुई फार्मूला नहीं है। लेकिन संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, तनाव नियंत्रण और मजबूत सामाजिक संबंध स्वस्थ जीवन की मजबूत नींव बन सकते हैं। छोटी-छोटी अच्छी आदतें समय के साथ बड़े बदलाव लाती हैं और जीवन को अधिक खुशहाल व सक्रिय बना सकती हैं। स्वस्थ और लंबा जीवन जीने का लक्ष्य केवल वर्षों की संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि उन वर्षों को बेहतर स्वास्थ्य, ऊर्जा और मानसिक संतुलन के साथ जीना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए यदि आप अपने भविष्य को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो आज से ही इन 10 बुरी आदतों को छोड़ने की शुरुआत कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 16:51:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>गर्मी में थकान और कमजोरी बढ़ा सकती हैं ये गलतियां, डाइट में शामिल करें ये चीजें</title>
                                    <description><![CDATA[गर्मी में थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए जानिए क्या खाएं, क्या नहीं और किन आसान आदतों से शरीर को रखें एक्टिव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/these-mistakes-can-increase-fatigue-and-weakness-in-summer-include/article-53615"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/summer-health-tips.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जैसे ही गर्मी का मौसम आता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लोगों को थकान</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कमजोरी और आलस्य जैसी समस्याएं परेशान करने लगती हैं। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि बिना ज्यादा काम किए ही शरीर थक गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सिर भारी होने लगता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और थोड़ी देर धूप में रहने पर चक्कर भी आ सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी है। तेज धूप और लगातार पसीना बहाने से शरीर धीरे-धीरे डिहाइड्रेशन की ओर बढ़ने लगता है। और अगर सही खानपान न हो तो कमजोरी और बढ़ जाती है। गर्मियों में थोड़ी सतर्कता बरतकर डाइट और लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है। डॉक्टर भी यही कहते हैं कि इस मौसम में हल्का</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पौष्टिक और पानी से भरपूर भोजन शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गर्मी में कमजोरी के कुछ सामान्य लक्षण भी होते हैं। बहुत से लोगों को दिन भर आलस्य होता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">काम में मन नहीं लगता और आराम करने के बाद भी शरीर तरोताजा महसूस नहीं करता। डिहाइड्रेशन बढ़ने पर सिरदर्द और चक्कर आना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। कुछ लोगों की भूख भी कम हो जाती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे शरीर को जरूरी पोषण नहीं मिल पाता। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ज्यादा पसीना बहने के कारण इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी होने लगती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसका असर मांसपेशियों पर पड़ता है। कभी-कभी हाथ-पैरों में कमजोरी या हल्की ऐंठन तक महसूस होने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि पानी कम पीना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">नींद पूरी न लेना और अनियमित खानपान इन समस्याओं को बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि गर्मियों में खानपान में लापरवाही करना हानिकारक हो सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">ऐसे मौसम में पानी से भरपूर फल खाना काफी फायदेमंद होता है। जैसे तरबूज</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खरबूजा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संतरा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अनानास और स्ट्रॉबेरी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये सारे फल शरीर को लंबे समय तक हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। इनमें मौजूद विटामिन और मिनरल्स शरीर को ऊर्जा देने में मददगार साबित होते हैं। सुबह का हेल्दी नाश्ता भी बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नाश्ते में दूध</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अंडा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">दही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">स्प्राउट्स या पनीर जैसी चीजें शामिल करनी चाहिए ताकि शरीर को पर्याप्त प्रोटीन और ऊर्जा मिल सके। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ड्राई फ्रूट्स और बीज भी शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं। गर्मियों में नारियल पानी और नींबू पानी भी बहुत फायदेमंद होते हैं क्योंकि ये शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं। हाल के कुछ समय में गोंद कतीरा का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। आयुर्वेद में इसे शरीर को ठंडक देने वाला माना गया है और कई लोग इसे दूध या शरबत में मिलाकर पीते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्वास्थ्य विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सिर्फ खानपान ही नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लाइफस्टाइल में बदलाव भी जरूरी हैं। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना सबसे अहम होता है। कोशिश करें कि धूप में ज्यादा देर न रहें और शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाकर रखें। अच्छी नींद भी शरीर की रिकवरी के लिए जरूरी है। गर्मियों में लोग अक्सर देर रात तक जागते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर की ऊर्जा पर असर डालता है। सुबह की हल्की वॉक या योग भी शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन बहुत गर्मी में भारी एक्सरसाइज से बचने की सलाह दी जाती है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तली-भुनी और मसालेदार चीजों का सेवन कम करना चाहिए। ज्यादा चाय</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कॉफी और कोल्ड ड्रिंक पीने से भी शरीर में पानी की कमी बढ़ सकती है। पैकेटबंद और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाना बेहतर होता है क्योंकि इनमें सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो शरीर को और ज्यादा डिहाइड्रेट कर सकती है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 17 May 2026 16:18:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>पेट के इंफेक्शन से सबा आजाद अस्पताल में भर्ती, 14 दिन में 4 किलो वजन घटा</title>
                                    <description><![CDATA[हालत बिगड़ने पर शेयर किया हेल्थ अपडेट, कहा— जिंदगी के सबसे कठिन दिन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/admitted-to-saba-azad-hospital-due-to-stomach-infection-lost/article-49395"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/bollywood---2026-03-28t144350.392.jpg" alt=""></a><br /><p>अभिनेत्री सबा आजाद ने हाल ही में सोशल मीडिया के जरिए अपनी तबीयत को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि गंभीर पेट के इंफेक्शन के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। पिछले 14 दिनों को उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे कठिन समय बताया है।</p>
<p>सबा ने इंस्टाग्राम पर अस्पताल से अपनी तस्वीर साझा करते हुए बताया कि उन्हें साइक्लोस्पोरा कैटेनेन्सिस नामक संक्रमण हुआ है। यह एक प्रकार का आंतों का संक्रमण है, जो दूषित भोजन या पानी के जरिए फैलता है। उन्होंने लिखा कि सावधानी बरतने के बावजूद यह संक्रमण अचानक हो गया, जिससे उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई।</p>
<p>अभिनेत्री के मुताबिक, इन दो हफ्तों में उनका लगभग 4 किलो वजन कम हो गया। उन्होंने बताया कि एक समय वह नियमित रूप से वर्कआउट कर रही थीं और शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट थीं, लेकिन अचानक इतनी कमजोरी आ गई कि सामान्य काम करना भी मुश्किल हो गया। उन्होंने कहा कि हालत ऐसी हो गई थी कि ठीक से चलना तक संभव नहीं था।</p>
<p>सबा ने लोगों को सावधान करते हुए साफ-सफाई और खानपान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बाहर की चीजें खाने से पहले और कच्ची सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले अच्छी तरह साफ करना बेहद जरूरी है, क्योंकि लापरवाही गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है।</p>
<p>इस दौरान उनके साथ अभिनेता ऋतिक रोशन भी मौजूद रहे। सबा ने बताया कि अस्पताल में उनकी जो तस्वीर साझा की गई, वह ऋतिक ने ही ली थी। उन्होंने यह भी कहा कि कठिन समय में भी ऋतिक ने उन्हें हिम्मत दी और माहौल को हल्का बनाए रखने की कोशिश की।</p>
<p>सबा आजाद और ऋतिक रोशन के रिश्ते की चर्चा पिछले कुछ वर्षों से लगातार होती रही है। दोनों को कई सार्वजनिक मौकों पर साथ देखा गया है और वे 2021 से एक-दूसरे को डेट कर रहे हैं।</p>
<p>वर्कफ्रंट की बात करें तो सबा जल्द ही फिल्म ‘बंदर’ में नजर आएंगी, जबकि ऋतिक रोशन अपनी अगली फिल्म ‘कृष 4’ के जरिए निर्देशन में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं।</p>
<p>डॉक्टरों के अनुसार, इस तरह के संक्रमण से बचाव के लिए स्वच्छ भोजन और सुरक्षित पानी का सेवन बेहद जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है, लेकिन लापरवाही से यह गंभीर रूप ले सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 14:48:18 +0530</pubDate>
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