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                <title>International trade - दैनिक जागरण</title>
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                <description>International trade RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>G7 शिखर सम्मेलन में बोले प्रधानमंत्री मोदी, संतुलित और समावेशी विकास के लिए वैश्विक साझेदारी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 समिट के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ के हितों की जोरदार पैरवी की। उन्होंने IMPACT पहल, वैश्विक कौशल साझेदारी और विकासशील देशों के लिए आर्थिक सुरक्षा तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/prime-minister-modi-said-in-g7-summit-that-global-partnership/article-56292"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/narendra-modi-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>फ्रांस के एवियन में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के आउटरीच सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया के सामने साझा, संतुलित और टिकाऊ आर्थिक विकास का विजन प्रस्तुत किया। “Reviving a Balanced, Shared and Sustainable Economic Growth for All” विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज जब दुनिया अनिश्चितताओं, संघर्षों और आर्थिक चुनौतियों से जूझ रही है, तब विकास का अर्थ केवल GDP वृद्धि या व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं होना चाहिए। विकास का वास्तविक उद्देश्य लोगों का कल्याण, समावेशिता और अवसरों की समान उपलब्धता होना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले वर्षों में समावेशी विकास का जो मॉडल अपनाया है, वह “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के सिद्धांत पर आधारित है। इसी सोच के कारण भारत ने करोड़ों लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि यही दृष्टिकोण भारत की अंतरराष्ट्रीय नीतियों में भी दिखाई देता है और G20 की अध्यक्षता के दौरान “One Earth, One Family, One Future” का संदेश इसी सोच का विस्तार था।</p>
<p>प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए देशों के बीच सहयोग, विश्वास और साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना केवल एक परिवहन या व्यापार मार्ग नहीं है, बल्कि यह निवेश, रोजगार, नवाचार और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे और भी संपर्क एवं व्यापार गलियारों की आवश्यकता है, जो विभिन्न क्षेत्रों को आर्थिक रूप से जोड़ सकें। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों की चुनौतियों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और भू-राजनीतिक संकटों का सबसे अधिक असर विकासशील देशों पर पड़ता है। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, ईंधन कीमतों और निवेश पर पड़ने वाले प्रभाव का बोझ अक्सर गरीब और उभरती अर्थव्यवस्थाओं को उठाना पड़ता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह इन देशों को अकेला न छोड़े। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से अपील की कि वे ऐसे सहायता तंत्र विकसित करें जो विकासशील देशों को आर्थिक झटकों से उबरने और उनकी आर्थिक मजबूती बनाए रखने में मदद कर सकें। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था तभी टिकाऊ होगी, जब कमजोर देशों को भी समान अवसर और सुरक्षा मिलेगी।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने एक नई पहल “International Mobilization Partnership for Accelerating Connectivity and Trade” यानी IMPACT का प्रस्ताव भी रखा। उन्होंने बताया कि इस पहल के माध्यम से G7 देशों की पूंजी, भारत की प्रतिभा और ग्लोबल साउथ के देशों की भागीदारी को एक मंच पर लाया जा सकता है। इसका उद्देश्य संपर्क, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा करना होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि IMEC की तर्ज पर अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और प्रशांत द्वीपीय देशों को जोड़ने वाली नई परियोजनाओं पर भी काम किया जाना चाहिए। इससे विकासशील क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और वैश्विक स्तर पर संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी परियोजनाओं में स्थानीय स्वामित्व, पारदर्शी वित्तपोषण और दीर्घकालिक स्थिरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने विकसित देशों के सामने मौजूद जनसंख्या संबंधी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई विकसित देश वृद्ध होती आबादी की समस्या का सामना कर रहे हैं, जबकि भारत और ग्लोबल साउथ के अन्य देशों के पास युवा प्रतिभा, कौशल और उद्यमशीलता की अपार क्षमता है। इस प्राकृतिक पूरकता का लाभ उठाने के लिए उन्होंने “Global Skills Partnership” स्थापित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी के तहत देशों के बीच कौशल मानचित्रण, प्रशिक्षण और विश्वसनीय कुशल मानव संसाधन की आवाजाही को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे विकसित देशों को आवश्यक कार्यबल मिलेगा और विकासशील देशों के युवाओं को वैश्विक अवसर प्राप्त होंगे। प्रधानमंत्री ने इसे भविष्य की आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बताया।</p>
<p>अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक नीतियों और वैश्विक व्यापार के प्रति प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने G7 देशों सहित दुनिया के कई प्रमुख देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत संरक्षणवाद की बजाय साझेदारी और एकीकरण में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल अपनी आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि वह एक स्थिर, भरोसेमंद और समृद्ध वैश्विक अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाना चाहता है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि दुनिया सहयोग, विश्वास और साझा विकास के सिद्धांतों पर आगे बढ़ेगी तो आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था अधिक मजबूत, समावेशी और टिकाऊ बन सकेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:04:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भारत-UK फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से सस्ते होंगे व्हिस्की, कार और कपड़े</title>
                                    <description><![CDATA[15 जुलाई से लागू होगा ऐतिहासिक समझौता, 99% सामानों पर टैरिफ में भारी कटौती, व्यापार 2030 तक दोगुना होने की उम्मीद]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a337b3f0ab00/article-56253"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/india-uk-fta.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) अब 15 जुलाई से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के लागू होते ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। खासकर भारत में UK से आने वाली व्हिस्की, लग्जरी कारें, कपड़े और फुटवियर जैसे प्रोडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे। वहीं भारत से UK को निर्यात होने वाले लगभग 99% सामानों पर जीरो टैरिफ की सुविधा मिलेगी। इस डील को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देगा। सरकारी और व्यापारिक रिपोर्ट्स के अनुसार, UK से भारत आने वाले सामानों पर औसत टैरिफ अब 15% से घटकर लगभग 3% रह जाएगा। इस बदलाव के बाद 85% सामान अगले 10 वर्षों में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त हो जाएंगे। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा क्योंकि कई आयातित प्रोडक्ट्स की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी। खासकर स्कॉच व्हिस्की, जिन, लग्जरी कारें और फैशन से जुड़े सामान अब पहले की तुलना में काफी सस्ते मिल सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">व्हिस्की और लग्जरी कारों के सेगमेंट में सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। स्कॉच व्हिस्की और जिन पर पहले जहां लगभग 150% टैरिफ लगता था, वह धीरे-धीरे घटकर 40% तक आ जाएगा। वहीं जगुआर, लैंड रोवर और रोल्स-रॉयस जैसी ब्रिटिश कारों पर भी टैक्स में बड़ी राहत दी जाएगी, जिससे इनकी कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना है। इसी तरह चॉकलेट, बिस्किट, सैल्मन, लैंब और सॉफ्ट ड्रिंक्स जैसे फूड प्रोडक्ट्स भी सस्ते हो सकते हैं। फैशन और लाइफस्टाइल सेक्टर में भी इस समझौते का असर साफ दिखेगा। UK से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, होमवेयर, फर्नीचर और कॉस्मेटिक्स पर कम टैरिफ के कारण उनकी कीमतों में गिरावट आएगी। साथ ही मेडिकल डिवाइस और एयरोस्पेस पार्ट्स जैसे हाई-टेक सेक्टर में भी लागत कम होने की उम्मीद है। इससे भारत में इन प्रोडक्ट्स की उपलब्धता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत की ओर से भी इस डील को बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है। टेक्सटाइल, गारमेंट्स, ज्वेलरी, चमड़ा उद्योग और इंजीनियरिंग सामान जैसे सेक्टर को UK बाजार में अब बिना टैक्स के पहुंच मिलेगी। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और निर्यात में तेजी आने की संभावना है। विशेषकर सूरत, तिरुप्पुर और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ सकते हैं। फार्मा सेक्टर के लिए भी यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है। भारतीय दवाइयों को UK में आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का लाभ मिलेगा, जिससे जेनेरिक दवाइयों की पहुंच ब्रिटेन की हेल्थ सर्विस तक तेजी से बढ़ेगी। इसके अलावा बासमती चावल, समुद्री उत्पाद, मसाले और चाय जैसे कृषि उत्पादों पर भी टैक्स हटने से भारतीय किसानों और निर्यातकों को सीधा फायदा मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">समझौते के तहत भारत और UK के बीच व्यापार 2030 तक दोगुना होकर लगभग 120 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इसके लिए दोनों देशों ने करीब 3 साल और 14 राउंड की बातचीत के बाद इस डील को अंतिम रूप दिया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसे दोनों देशों के रिश्तों में एक नया अध्याय माना जा रहा है। यह समझौता भारत की अर्थव्यवस्था के लिए लंबे समय में बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ निर्यात बढ़ेगा, बल्कि लाखों नए रोजगार भी पैदा होंगे। खासकर MSME सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है, जो भारत के कुल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। इसके साथ ही ग्रीन एनर्जी, EV टेक्नोलॉजी और क्लीनटेक जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ने की संभावना है।  इस डील के लागू होने से पहले दोनों देशों को अपनी घरेलू प्रक्रियाओं और अनुमोदन को पूरा करना होगा। भारत की ओर से केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है, जबकि UK में संसदीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:36:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रूस से जुड़े कारोबार पर EU की सख्ती, भारत समेत 6 देशों की कंपनियां निशाने पर</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन युद्ध के बीच यूरोपीय यूनियन ने रूस के खिलाफ 21वें प्रतिबंध पैकेज का प्रस्ताव रखा, भारत, चीन और यूएई सहित कई देशों की 50 कंपनियों पर एक्सपोर्ट बैन की तैयारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/eus-strictness-on-business-related-to-russia-targets-companies-of/article-55511"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/eu-sanctions-on-russia.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यूक्रेन युद्ध को लेकर यूरोप और रूस के बीच जारी टकराव के बीच यूरोपीय यूनियन ने एक बार फिर बड़ा कदम उठाया है। यूरोपीय संघ ने रूस पर 21वें प्रतिबंध पैकेज का प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत भारत, चीन, तुर्किये, संयुक्त अरब अमीरात, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान की करीब 50 कंपनियां प्रतिबंधों के दायरे में आ सकती हैं। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे रूस की सैन्य और औद्योगिक गतिविधियों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान कर रही हैं। इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीतिक हलकों में इसकी व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मंगलवार को यूरोपीय यूनियन की ओर से जारी जानकारी में कहा गया कि रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी युद्ध क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से यह नया प्रतिबंध पैकेज तैयार किया गया है। यूरोपीय अधिकारियों का मानना है कि रूस पर पहले से लागू प्रतिबंधों के बावजूद कई विदेशी कंपनियां विभिन्न माध्यमों से रूस को आवश्यक तकनीक, उपकरण और अन्य सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। ऐसे में अब उन कंपनियों को भी निशाना बनाया जा रहा है जो सीधे रूस में नहीं हैं, लेकिन रूस की सैन्य जरूरतों से जुड़े नेटवर्क का हिस्सा मानी जा रही हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा कल्लास ने इस संबंध में कहा कि नए प्रतिबंधों का उद्देश्य केवल रूस को आर्थिक रूप से कमजोर करना नहीं है, बल्कि उन अंतरराष्ट्रीय नेटवर्कों को भी रोकना है जो रूस की युद्ध अर्थव्यवस्था को समर्थन दे रहे हैं। उनके अनुसार नई सूची में शामिल कंपनियों पर निर्यात नियंत्रण और अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लागू किए जाएंगे। इससे रूस को उन्नत तकनीक और महत्वपूर्ण उपकरणों की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">प्रस्तावित सूची में भारत और चीन की कई कंपनियां भी शामिल हैं। हालांकि यूरोपीय यूनियन की ओर से सभी कंपनियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन संकेत दिए गए हैं कि ये संस्थाएं रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करने के आरोपों का सामना कर रही हैं। यदि प्रतिबंध लागू होते हैं तो इन कंपनियों के लिए यूरोपीय बाजारों तक पहुंच सीमित हो सकती है और कई प्रकार के व्यापारिक लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोपीय यूनियन रूस पर लगातार प्रतिबंध लगाता रहा है। बीते दो वर्षों में रूस के बैंकिंग, ऊर्जा, रक्षा, परिवहन और तकनीकी क्षेत्रों पर कई स्तरों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। इसके बावजूद यूरोपीय देशों का मानना है कि रूस ने वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों और तीसरे देशों के माध्यम से कई आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति जारी रखी है। इसी वजह से अब प्रतिबंधों का दायरा रूस के बाहर मौजूद कंपनियों तक बढ़ाया जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस कदम का असर केवल रूस तक सीमित नहीं रहेगा। भारत, चीन और अन्य देशों की वे कंपनियां जो अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हैं, उन्हें भी नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापारिक विश्लेषकों के मुताबिक यदि निर्यात नियंत्रण सख्ती से लागू किए गए तो कई क्षेत्रों में कारोबारी गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। खासकर तकनीकी उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और ड्रोन से जुड़े उद्योगों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई दे सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">काजा कल्लास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि नई सूची में ड्रोन निर्माण और उससे जुड़े क्षेत्रों की 30 से अधिक संस्थाओं को भी शामिल किया जाएगा। उनका कहना है कि रूस की सैन्य क्षमताओं को बनाए रखने में इन क्षेत्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूरोपीय यूनियन अब ऐसे नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश कर रहा है जो युद्ध संचालन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि यह प्रतिबंध पैकेज यूरोप की अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई में से एक हो सकता है। ब्रुसेल्स पिछले दो वर्षों में रूस के खिलाफ सबसे बड़ी प्रतिबंध सूची तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है। इसका उद्देश्य केवल वर्तमान युद्ध को प्रभावित करना नहीं बल्कि रूस की दीर्घकालिक आर्थिक और सैन्य क्षमता को भी सीमित करना है। प्रस्तावित प्रतिबंधों पर सदस्य देशों के बीच अंतिम सहमति बनना बाकी है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो भारत समेत कई देशों की कंपनियों को नई व्यापारिक और नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। वहीं रूस और यूरोपीय यूनियन के बीच आर्थिक टकराव का दायरा और बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Jun 2026 14:21:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>रूस ने 4 महीने के लिए पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाई, 1 अप्रैल से लागू</title>
                                    <description><![CDATA[भारत पर असर सीमित, चीन, तुर्की और ब्राजील जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में पड़ेगा ज्यादा प्रभाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/russia-bans-petrol-export-for-4-months-effective-from-april/article-49402"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/pm.jpg" alt=""></a><br /><p>रूस ने 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक पेट्रोल निर्यात पर अस्थायी रोक लगाने का निर्णय लिया है। उप-प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने ऊर्जा मंत्रालय को इस प्रस्ताव को तैयार करने का निर्देश दिया। रूस ने कहा कि यह कदम घरेलू सप्लाई बनाए रखने और घरेलू कीमतों को स्थिर रखने के लिए जरूरी है।</p>
<p>नोवाक ने कहा कि मिडिल ईस्ट में इजराइल-ईरान संघर्ष के चलते वैश्विक तेल और पेट्रोलियम बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। रूस वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 1.2 से 1.7 लाख बैरल पेट्रोल का निर्यात करता है।</p>
<p>रूस के पेट्रोल निर्यात पर रोक का प्रभाव चीन, तुर्की, ब्राजील, अफ्रीका और सिंगापुर जैसे देशों पर ज्यादा होगा। भारत पर इसका असर कम होने की संभावना है क्योंकि भारत पेट्रोल के बजाय कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का आयात करता है। भारत की जरूरत का लगभग 20% क्रूड रूस से आता है।</p>
<h5><span><strong>रूस में घरेलू समीक्षा और कीमत नियंत्रण</strong></span></h5>
<p>रूस में उप-प्रधानमंत्री नोवाक ने पेट्रोल और अन्य तेल उत्पादों की उपलब्धता और कीमतों की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में कहा कि पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। राष्ट्रपति पुतिन की प्राथमिकता घरेलू ईंधन कीमतों को नियंत्रित रखना है।</p>
<p>रूस ने पहले भी घरेलू सप्लाई और कीमत नियंत्रण के लिए पेट्रोल-डीजल निर्यात पर रोक लगाई थी। पिछले साल यूक्रेन पर हमलों के दौरान रिफाइनरियों में उत्पादन प्रभावित होने के कारण ऐसा कदम उठाया गया था।</p>
<h5><span><strong>भारत पर असर और खरीदारी</strong></span></h5>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पेट्रोल पर ज्यादा निर्भर नहीं है क्योंकि देश के पास बड़ा रिफाइनरी नेटवर्क है। भारत रोजाना करीब 56 लाख बैरल कच्चा तेल रिफाइन करता है और अपनी घरेलू जरूरतों के साथ तैयार ईंधन का निर्यात भी करता है।</p>
<p>हालांकि, वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इजराइल-ईरान संघर्ष की वजह से सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण भारत ने अप्रैल महीने के लिए रूस से लगभग 6 करोड़ बैरल कच्चे तेल का सौदा किया है।</p>
<p>रिपोर्ट्स के अनुसार, अब रूस से तेल खरीदने के लिए ब्रेंट क्रूड कीमतों पर 5 से 15 डॉलर प्रति बैरल का प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है। भारत की यह खरीदारी अमेरिका की दी गई छूट के तहत की गई है, जिससे रूस के मार्च पहले लोड किए गए कार्गो को लेने की अनुमति मिली।</p>
<p>रूस का यह कदम घरेलू बाजार को सुरक्षित रखने और कीमतों में स्थिरता लाने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, वैश्विक बाजार में सप्लाई की कमी चीन, तुर्की और ब्राजील जैसे देशों में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी ला सकती है। भारत पर असर सीमित रहेगा, लेकिन क्रूड आयात की कीमतों में मामूली वृद्धि देखने को मिल सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sat, 28 Mar 2026 15:41:40 +0530</pubDate>
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