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                <title>Global Tensions - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Global Tensions RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीएम मोदी ने क्यों की 1 साल तक सोना न खररदने की अपील? समझें वजह</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की एक साल सोना न खरीदने की अपील पर चर्चा तेज। जानें गोल्ड आयात, फॉरेक्स रिजर्व और आर्थिक असर का पूरा गणित।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/why-did-pm-modi-appeal-not-to-buy-gold-for/article-53114"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-11t130237.512.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देश में सोने की खरीद को लेकर हाल ही में एक नई बहस शुरू हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की गई है। इसके साथ ही उन्होंने अनावश्यक विदेश यात्रा टालने की भी बात की। यह अपील ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर टेंशन</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। ऐसा माना जा रहा है कि इस संदेश का उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और आर्थिक स्थिरता को बनाए रखना है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का कहना है कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए सोने का आयात महंगा साबित हो रहा है। देश में सोने की मांग बहुत ज्यादा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसकी पूर्ति मुख्य रूप से विदेशों से आयात के जरिए होती है। जब भारत सोना खरीदता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे डॉलर में भुगतान करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर सीधा असर पड़ता है। यही वजह है कि सोने की कीमतों और आयात में वृद्धि के साथ देश का इंपोर्ट बिल भी तेजी से बढ़ता है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने हालात को और भी कठिन बना दिया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इससे डॉलर की निकासी बढ़ती है और फॉरेन एक्सचेंज पर दबाव आता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों की माने तो पीएम की अपील को देशभक्ति और स्वदेशी भावना से जोड़ने की कोशिश की गई है। उन्होंने लोगों से ऊर्जा की बचत</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक उपयोग</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और स्वदेशी उत्पादों को अपनाने की सलाह दी है। आर्थिक जानकार मानते हैं कि अगर देश में सोने की खपत कुछ कम होती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इससे ट्रेड बैलेंस को सुधारने में मदद मिल सकती है और रुपये की स्थिति भी मज़बूत हो सकती है। लेकिन यह भी सच है कि भारत में सोना सिर्फ एक निवेश नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि इसका सांस्कृतिक और पारंपरिक महत्व भी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए किसी भी बदलाव का सीधा असर आम लोगों की आदतों पर पड़ेगा।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फिलहाल फॉरेक्स रिजर्व की स्थिति पूरी तरह से चिंताजनक नहीं है। मार्च </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2026 <span lang="hi" xml:lang="hi">तक के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग </span>691 <span lang="hi" xml:lang="hi">अरब डॉलर के स्तर पर है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कई महीनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त माना जाता है। इसके अलावा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रिपोर्ट्स से यह भी पता चला है कि रिजर्व में सोने का हिस्सा धीरे-धीरे बढ़ रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो निवेश रणनीति में बदलाव का संकेत देता है। सितंबर </span>2025 <span lang="hi" xml:lang="hi">की तुलना में इसमें वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत के लिए आयात और खर्च दोनों पर संतुलन बनाए रखना ज़रूरी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि लंबे समय में आर्थिक स्थिरता बनी रह सके।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 11 May 2026 13:39:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी हमला, ईरान के 2 तेल टैंकर रोके, रातभर चली गोलीबारी</title>
                                    <description><![CDATA[स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका ने ईरान के दो टैंकरों पर कार्रवाई की। गोलीबारी और मिसाइल हमलों के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/american-attack-in-strait-of-hormuz-stopped-2-oil-tankers/article-53011"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-09t174941.204.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक बार फिर हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के दो तेल टैंकरों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें निष्क्रिय करने का दावा किया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इलाके में पूरी रात तनाव बना रहा और दोनों पक्षों के बीच भारी गोलीबारी की खबरें सामने आईं। इस घटनाक्रम के बाद मिडिल ईस्ट में बड़े संघर्ष की आशंका फिर तेज हो गई है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात ने भी दावा किया है कि उसके ऊपर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। हालांकि इन दावों को लेकर दोनों पक्षों की तरफ से अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार ईरान के ये टैंकर अमेरिकी नाकाबंदी को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि अमेरिकी नौसेना ने पहले कुछ सैन्य जहाजों पर संभावित हमले को रोका और उसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए होर्मुज के आसपास मौजूद ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ देर बाद दो तेल टैंकरों पर ऑपरेशन किया गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक टैंकरों को पूरी तरह डुबोया नहीं गया लेकिन उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया गया। इलाके में मौजूद कई जहाजों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और समुद्री रास्तों की निगरानी बढ़ा दी गई है। हालात ऐसे हैं कि वैश्विक बाजार भी एक बार फिर दबाव में दिखाई दे रहे हैं क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का बेहद अहम रास्ता माना जाता है।</span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;color:#222222;background:#FFFFFF;" xml:lang="hi">दरअसल 28 फरवरी के बाद से यह जलमार्ग लगातार विवाद के केंद्र में बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल की ओर से सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद ईरान ने इस क्षेत्र में आवाजाही को सीमित कर दिया था। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया और कई देशों की चिंता बढ़ गई। अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता भी बेनतीजा खत्म हुई थी। उसके बाद से दोनों देशों के बीच बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती गईं। अब ताजा हमले के बाद स्थिति और संवेदनशील मानी जा रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अगर अमेरिकी हितों को चुनौती दी गई तो जवाब दिया जाएगा। वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी कार्रवाई को उकसाने वाला कदम बताया है और इसे संघर्षविराम का उल्लंघन करार दिया है। इस बीच शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि पाकिस्तान दोनों देशों के संपर्क में है और तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 May 2026 17:54:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कंडोम 50% तक महंगे होने की आशंका</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान युद्ध से सप्लाई चेन प्रभावित, अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल की कमी; फैमिली प्लानिंग पर असर का खतरा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/condoms-expected-to-become-expensive-by-rs-50/article-49464"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/condom-price.jpg" alt=""></a><br /><p>मध्य-पूर्व में जारी युद्ध का असर अब रोजमर्रा की जरूरतों पर भी दिखने लगा है। कंडोम की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, ईरान क्षेत्र में तनाव और समुद्री मार्गों पर बाधा के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे उत्पादन लागत तेजी से बढ़ रही है।</p>
<p>कंडोम निर्माण में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे पदार्थ—एनहाइड्रस अमोनिया और सिलिकॉन ऑयल—की उपलब्धता पर सीधा असर पड़ा है। अमोनिया की आपूर्ति मुख्य रूप से खाड़ी देशों से होती है और भारत इसकी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। समुद्री मार्गों, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के चलते शिपमेंट में देरी और कमी दर्ज की गई है।</p>
<p>अमोनिया लेटेक्स को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी होता है, जबकि सिलिकॉन ऑयल का इस्तेमाल लुब्रिकेंट के रूप में किया जाता है। इनके बिना उत्पादन प्रक्रिया प्रभावित होती है। उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि कच्चे माल के साथ पैकेजिंग से जुड़े उत्पाद—जैसे पीवीसी और एल्युमीनियम फॉयल—भी महंगे हो गए हैं, जिससे कुल लागत बढ़ गई है।</p>
<p>भारत का कंडोम बाजार करीब 1.7 बिलियन डॉलर का माना जाता है। इस क्षेत्र में सक्रिय कंपनियां बढ़ती लागत और अनिश्चित सप्लाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। कुछ कंपनियों ने कच्चे माल का अतिरिक्त स्टॉक जुटाना शुरू किया है, जिससे बाजार में कीमतों पर और दबाव बढ़ने की संभावना है।</p>
<p>स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनके अनुसार, कंडोम की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग पर पड़ सकता है। यदि उपयोग में कमी आती है, तो अनचाहे गर्भ और यौन संचारित संक्रमणों के मामलों में वृद्धि हो सकती है। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों, विशेषकर परिवार नियोजन मिशन पर असर पड़ने की आशंका है।</p>
<p>इस बीच, वैश्विक तनाव का असर अन्य क्षेत्रों में भी दिख रहा है। ड्राई फ्रूट्स और दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। व्यापारियों के अनुसार, खाड़ी और आसपास के देशों से आने वाली सप्लाई प्रभावित होने से बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Mar 2026 15:23:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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