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                <title>Income Tax - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Income Tax RSS Feed</description>
                
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                <title>PF निकासी और FD ब्याज पर कटा TDS वापस कैसे मिलेगा? ITR फाइल करने से मिल सकता है टैक्स रिफंड</title>
                                    <description><![CDATA[पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में अलग-अलग नियम, सही तरीके से ITR दाखिल करने पर बैंक खाते में आ सकता है अतिरिक्त टैक्स रिफंड]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a3f6ca73121d/article-57102"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/itr-filing.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आते ही सबसे ज्यादा सवाल टैक्स रिफंड को लेकर पूछे जाते हैं। कई नौकरीपेशा और वरिष्ठ नागरिक ऐसे हैं, जिनके फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर बैंक पहले ही TDS काट लेता है। वहीं, कुछ मामलों में कर्मचारी भविष्य निधि (PF) की समय से पहले निकासी पर भी टैक्स काटा जाता है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि कटा हुआ टैक्स वापस नहीं मिल सकता, जबकि यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी कम बनती है तो ITR दाखिल कर आप इस राशि का रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। टैक्स रिफंड अपने आप नहीं मिलता। इसके लिए आयकर रिटर्न सही जानकारी के साथ दाखिल करना जरूरी होता है। आयकर विभाग आपकी कुल आय, लागू टैक्स स्लैब, कटौतियों और पहले से कटे TDS का मिलान करता है। यदि पहले से जमा टैक्स आपकी वास्तविक देनदारी से अधिक होता है तो अतिरिक्त राशि सीधे आपके बैंक खाते में भेज दी जाती है। पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं को कई तरह की टैक्स छूट का लाभ मिलता है। धारा 80C के तहत निवेश, पीएफ, जीवन बीमा और अन्य योग्य निवेशों पर कटौती का दावा किया जा सकता है। इसके अलावा धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर भी राहत मिलती है। इन कटौतियों के कारण कुल कर योग्य आय कम हो जाती है और कई मामलों में पहले से कटा TDS पूरी तरह या आंशिक रूप से वापस मिल सकता है। हालांकि FD से मिलने वाला ब्याज और टैक्स योग्य PF निकासी को आय में दिखाना अनिवार्य होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई टैक्स व्यवस्था में अधिकांश पारंपरिक कटौतियां उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स रिफंड नहीं मिलेगा। यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी पहले से कटे TDS से कम है तो नई व्यवस्था में भी रिफंड का दावा किया जा सकता है। अंतिम निर्णय आपकी कुल आय, लागू टैक्स स्लैब और उपलब्ध टैक्स राहत के आधार पर किया जाता है। रिफंड प्राप्त करने के लिए सबसे पहले आयकर पोर्टल पर अपने PAN से जुड़े खाते के माध्यम से लॉगिन करना होगा। इसके बाद Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) की जांच करनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि FD ब्याज और PF निकासी पर कटा TDS सही तरीके से दर्ज है। यदि किसी प्रकार की विसंगति दिखाई देती है तो पहले उसे ठीक करवाना बेहतर रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद सही असेसमेंट ईयर का चयन करते हुए पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था में से उपयुक्त विकल्प चुनना होगा। रिटर्न भरते समय वेतन, FD ब्याज, PF निकासी, किराया, व्यवसाय या अन्य सभी कर योग्य आय की जानकारी सही-सही दर्ज करनी चाहिए। यदि पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन किया गया है तो पात्र निवेश और खर्चों की कटौतियां भी शामिल करनी होंगी। सभी जानकारी भरने के बाद रिटर्न जमा कर उसका सत्यापन करना आवश्यक है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही आयकर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू करता है। PF निकासी पर हर स्थिति में टैक्स नहीं लगता। यदि कर्मचारी निर्धारित नियमों के अनुसार तय अवधि पूरी करने के बाद PF निकालता है तो सामान्य परिस्थितियों में TDS नहीं काटा जाता। लेकिन समय से पहले निकासी करने पर कुछ मामलों में टैक्स कट सकता है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज "Income from Other Sources" के अंतर्गत कर योग्य माना जाता है। यदि ब्याज निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है तो बैंक TDS काट सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"> ITR दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान अवश्य कर लें। PAN की जानकारी अपडेट होनी चाहिए, बैंक खाते का विवरण सही होना चाहिए और Form 26AS तथा AIS में दिखाई गई TDS जानकारी आपके रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए। यदि किसी बैंक या संस्था द्वारा TDS जमा नहीं किया गया है या गलत जानकारी दर्ज हुई है तो पहले उसे ठीक करवाना जरूरी है। समय पर ITR दाखिल करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर न केवल जुर्माना लग सकता है बल्कि टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है। इसलिए करदाताओं को सलाह दी जाती है कि सभी वित्तीय दस्तावेज तैयार रखें और अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते रिटर्न दाखिल करें। सही जानकारी, सटीक आय विवरण और उचित टैक्स व्यवस्था का चयन करके PF निकासी और FD ब्याज पर कटे अतिरिक्त TDS का रिफंड आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 12:39:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सोने के आयात में 70% गिरावट, शुल्क वृद्धि का बड़ा असर</title>
                                    <description><![CDATA[पीएम मोदी की अपील और बढ़े सीमा शुल्क के बाद आयात मात्रा में भारी कमी, हालांकि मूल्य में बढ़ोतरी जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/70-decline-in-gold-imports-big-impact-of-duty-increase/article-56363"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/gold-import-india-decline.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में सोने के आयात को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सरकार की नीतियों, आयात शुल्क में वृद्धि और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई सोना कम खरीदने की अपील का सीधा असर अब आंकड़ों में साफ नजर आने लगा है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, एक महीने के भीतर भारत में सोने का आयात मात्रा के हिसाब से करीब 70 प्रतिशत तक घट गया है। पहले जहां आयात 75 से 100 टन के बीच था, अब यह गिरकर लगभग 25 से 30 टन तक पहुंच गया है। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सरकार ने 13 मई से सोने पर सीमा शुल्क को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य सोने के आयात पर निर्भरता कम करना और चालू खाते के घाटे को नियंत्रित करना था। इसके साथ ही प्रधानमंत्री की ओर से लोगों से अपील की गई थी कि एक वर्ष तक सोने की खरीद में संयम बरता जाए, जिसका असर भी बाजार में देखने को मिल रहा है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि आयात मात्रा में भारी गिरावट के बावजूद सोने के कुल आयात मूल्य में वृद्धि दर्ज की गई है। मई महीने में सोने का आयात सालाना आधार पर 34 प्रतिशत बढ़कर 3.41 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसका प्रमुख कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में तेजी बताई जा रही है। यानी कम मात्रा में आयात होने के बावजूद कीमतों की बढ़ोतरी ने कुल मूल्य को ऊपर बनाए रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अप्रैल और मई के दौरान भारत का कुल सोने का आयात 60 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने रिकॉर्ड स्तर पर 71.98 अरब डॉलर मूल्य का सोना आयात किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 24 प्रतिशत अधिक है। हालांकि मात्रा के हिसाब से इसमें 4.76 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कुल आयात 721.03 टन पर रहा। यह स्पष्ट करता है कि देश में सोने की मांग बनी हुई है, लेकिन महंगे दामों और नीतिगत बदलावों के कारण इसका स्वरूप बदल रहा है। सोने के आयात में यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सोना देश के कुल आयात का 5 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखता है। आयात में कमी से विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन घरेलू मांग और निवेश व्यवहार पर इसका असर भी देखने को मिलेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच चालू वित्त वर्ष 2026-27 में शुद्ध आयकर संग्रह में भी मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 जून तक शुद्ध आयकर संग्रह 15 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसमें कॉरपोरेट और गैर-कॉरपोरेट दोनों तरह के कर संग्रह शामिल हैं। कॉरपोरेट टैक्स संग्रह में 22 प्रतिशत की मजबूत बढ़ोतरी देखी गई है और यह 2.08 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। वहीं गैर-कॉरपोरेट टैक्स संग्रह 8 प्रतिशत बढ़कर 2.94 लाख करोड़ रुपये हो गया है। यह संकेत देता है कि देश की कर प्रणाली में सुधार और आर्थिक गतिविधियों में तेजी का असर राजस्व पर भी दिखाई दे रहा है। सोने के आयात में आई भारी गिरावट और कर संग्रह में बढ़ोतरी भारतीय अर्थव्यवस्था की बदलती तस्वीर को दर्शाती है। एक तरफ जहां सरकार आयात पर नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय कीमतें और घरेलू मांग स्थिति को संतुलित बनाए हुए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Jun 2026 11:00:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>PAN Card New Rules: अब पैन कार्ड बनवाना हुआ कठिन, अब लगेंगे कई तरह के डॉक्यूमेंट, देखें डिटेल</title>
                                    <description><![CDATA[PAN Card New Rules के तहत पैन कार्ड बनाने की प्रक्रिया सख्त हुई, आधार के साथ अतिरिक्त दस्तावेज जरूरी किए गए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/pan-card-new-rules-now-making-pan-card-has-become/article-49941"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/pan-card-new-rules.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पैन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। आयकर विभाग ने PAN Card New Rules लागू करते हुए दस्तावेज सत्यापन को पहले से अधिक सख्त कर दिया है। अब केवल आधार और ओटीपी के आधार पर पैन जारी नहीं होगा, बल्कि अतिरिक्त पहचान और पते के प्रमाण भी मांगे जा सकते हैं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नई व्यवस्था में बदलाव</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आयकर विभाग द्वारा लागू PAN Card New Rules के अनुसार अब पैन कार्ड आवेदन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाया गया है। पहले जहां आधार और मोबाइल ओटीपी के जरिए तुरंत पैन जारी हो जाता था, वहीं अब कई मामलों में विस्तृत दस्तावेज जांच अनिवार्य कर दी गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव फर्जी या डुप्लीकेट पैन कार्ड की समस्या को रोकने के उद्देश्य से किया गया है। इसके तहत अब हर आवेदन का बहु-स्तरीय सत्यापन किया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">दस्तावेज प्रक्रिया सख्त</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">नए PAN Card New Rules में दस्तावेजों की सूची को भी स्पष्ट और विस्तृत किया गया है। अब आवेदन के समय निम्न दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:107%;">—</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पहचान प्रमाण के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस मान्य होंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">जन्मतिथि प्रमाण के लिए जन्म प्रमाण पत्र, 10वीं की मार्कशीट या पासपोर्ट स्वीकार किए जाएंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पते के प्रमाण के रूप में आधार, वोटर आईडी, बिजली या पानी का बिल उपयोग किया जा सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">यदि किसी व्यक्ति के नाम में बदलाव हुआ है, जैसे विवाह के बाद नाम परिवर्तन, तो उसके लिए मैरिज सर्टिफिकेट या सरकारी गजट नोटिफिकेशन अनिवार्य होगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">फर्जीवाड़े पर रोक</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">PAN Card New Rules का मुख्य उद्देश्य सिस्टम में हो रहे फर्जीवाड़े को रोकना है। पहले कई मामलों में एक ही व्यक्ति के नाम पर एक से अधिक पैन कार्ड बनाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आयकर विशेषज्ञों के मुताबिक, आधार आधारित सिस्टम के बावजूद कई स्तरों पर गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है। इसी को देखते हुए अब अतिरिक्त दस्तावेज सत्यापन जोड़ा गया है, जिससे पहचान की पुष्टि और मजबूत हो सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">इसके अलावा आवेदन प्रक्रिया को समय-समय पर अपडेट किया जाएगा ताकि डिजिटल फ्रॉड और पहचान चोरी जैसी समस्याओं पर नियंत्रण रखा जा सके।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">पैन-आधार लिंक अनिवार्य</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">सरकार ने PAN Card New Rules के तहत पैन और आधार लिंकिंग को पहले की तरह अनिवार्य रखा है। यदि दोनों दस्तावेज लिंक नहीं होते हैं, तो पैन निष्क्रिय हो सकता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">ऐसी स्थिति में व्यक्ति आयकर रिटर्न दाखिल नहीं कर पाएगा और बैंकिंग, निवेश तथा वित्तीय लेनदेन में भी परेशानी आ सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञों का कहना है कि नाम, जन्मतिथि और अन्य विवरण दोनों दस्तावेजों में समान होना जरूरी है, अन्यथा लिंकिंग में बाधा आ सकती है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">विशेषज्ञों की राय</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आयकर विशेषज्ञ सुरेश कोठारी के अनुसार PAN Card New Rules का उद्देश्य पूरी प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है। उनके मुताबिक अब दस्तावेजों की जांच पहले की तुलना में अधिक गहराई से की जाएगी, जिससे गलत पहचान के आधार पर पैन जारी होने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आगे क्या होगा</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">आने वाले समय में पैन कार्ड आवेदन प्रक्रिया और अधिक डिजिटल और सुरक्षित की जा सकती है। सरकार लगातार ऐसे बदलाव कर रही है जिससे कर प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे और पहचान से जुड़े मामलों में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:107%;font-family:'Nirmala UI', sans-serif;">PAN Card New Rules लागू होने के बाद उम्मीद है कि पैन जारी करने की प्रक्रिया भले ही थोड़ी लंबी हो जाए, लेकिन इसकी विश्वसनीयता और सुरक्षा पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Apr 2026 15:43:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टैक्स बचाने के लिए बचे सिर्फ 2 दिन: PPF, NPS और सुकन्या खातों में जमा करें मिनिमम राशि</title>
                                    <description><![CDATA[31 मार्च की डेडलाइन से पहले निपटाएं 3 जरूरी वित्तीय काम; अप्रैल से लागू होंगे 10 बड़े बदलाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/only-2-days-left-to-save-tax-deposit-minimum-amount/article-49512"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-30t090704.116.jpg" alt=""></a><br /><p>आज 30 मार्च 2026 है और देशभर के निवेशक और नौकरीपेशा नागरिक अपने वित्तीय कामों को समय पर निपटाने के लिए अब सिर्फ 2 दिन बचे हैं। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) जैसे खातों में न्यूनतम राशि जमा करना 31 मार्च की रात 12 बजे तक अनिवार्य है। इसके साथ ही टैक्स बचत और ऑफिस में इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करने की डेडलाइन भी समाप्त हो जाएगी।</p>
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<h5><strong>31 मार्च तक निपटाने योग्य 3 काम</strong></h5>
<p><strong>सरकारी स्कीम्स को चालू रखें</strong><br />PPF, NPS और SSY में सालाना ₹250 से ₹500 तक की न्यूनतम राशि जमा करना आवश्यक है। यदि यह राशि जमा नहीं होती, तो खाता निष्क्रिय हो जाएगा और चालू कराने के लिए पेनाल्टी और बैंक के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इन खातों में निवेश पर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है।</p>
<p><strong> पुरानी टैक्स रिजीम में निवेश</strong><br />सेक्शन 80C और 80D के तहत निवेश करने के लिए यह अंतिम दिन है। PPF, लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में निवेश से इस वित्तीय वर्ष में टैक्स छूट मिल सकती है। 1 अप्रैल के बाद किया गया निवेश अगले साल के खाते में गिना जाएगा।</p>
<p><strong>ऑफिस में इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करें</strong><br />नौकरीपेशा लोगों को किराया प्रमाणपत्र, बीमा प्रीमियम रसीद और होम लोन ब्याज सर्टिफिकेट जैसी दस्तावेज़ ऑफिस में जमा करने होंगे। समय पर जमा न करने पर कंपनी अंतिम सैलरी से अधिक TDS काट सकती है, जिसे वापस पाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरना पड़ेगा।</p>
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<h5><strong>1 अप्रैल से लागू होंगे 10 बड़े बदलाव</strong></h5>
<p>अप्रैल 2026 से वित्तीय नियमों में कई बदलाव हो रहे हैं। इनमें मिनिमम बैलेंस नियम, निवेश और टैक्स कटौती की शर्तें, और PPF/NPS/SSY से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 31 मार्च की डेडलाइन से पहले ये काम निपटाना निवेशकों और नौकरीपेशाओं के लिए फायदेमंद रहेगा।</p>
<p>वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि समय पर निवेश और डॉक्यूमेंट्स जमा करने से न केवल टैक्स बचता है, बल्कि बैंकिंग और निवेश खातों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। उन्होंने निवेशकों को अंतिम दिन भी सक्रिय रहने की चेतावनी दी है।</p>
<p>31 मार्च के बाद निवेश और दस्तावेज जमा करने पर छूट अगले वित्तीय वर्ष में शामिल होगी। इसलिए निवेशक और नौकरीपेशा लोग समय पर यह काम निपटाएं और नियमों के बदलाव के अनुसार योजना बनाएं।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 09:16:34 +0530</pubDate>
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