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                <title>Personal Finance - दैनिक जागरण</title>
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                <title>कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र हर महीने कैसे बचाएं पैसे? अपनाएं ये आसान तरीके</title>
                                    <description><![CDATA[छोटी-छोटी बचत की आदतें छात्रों को आर्थिक रूप से मजबूत बना सकती हैं। सही बजट, समझदारी से खर्च और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके हर महीने अच्छी रकम बचाई जा सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/life-style/how-to-save-money-every-month-for-college-and-university/article-57243"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/student-money-saving.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">कॉलेज या यूनिवर्सिटी की पढ़ाई शुरू होते ही अधिकांश छात्रों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मासिक खर्च को संभालने की होती है। कई छात्रों को परिवार से तय पॉकेट मनी मिलती है, जबकि कुछ छात्र पार्ट-टाइम नौकरी या फ्रीलांस काम करके अपनी जरूरतें पूरी करते हैं। ऐसे में महीने के आखिर तक पैसे बचाना आसान नहीं होता। अक्सर देखा जाता है कि महीने की शुरुआत में जरूरत से ज्यादा खर्च हो जाता है और बाद में जरूरी चीजों के लिए भी पैसों की कमी महसूस होने लगती है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर छात्र शुरुआत से ही पैसे बचाने की आदत विकसित कर लें तो आगे चलकर उनकी आर्थिक स्थिति अधिक मजबूत हो सकती है। सबसे पहला कदम मासिक बजट बनाना है। छात्र को सबसे पहले यह लिखना चाहिए कि हर महीने कितनी रकम मिलती है और किन-किन चीजों पर खर्च होती है। जैसे हॉस्टल या किराया, खाना, यात्रा, मोबाइल रिचार्ज, इंटरनेट, पढ़ाई का सामान और मनोरंजन। जब पूरा खर्च कागज या मोबाइल ऐप में दर्ज होता है तो यह समझना आसान हो जाता है कि कहां अनावश्यक खर्च हो रहा है। बजट बनाने से महीने के बीच में आर्थिक परेशानी की संभावना भी कम हो जाती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पॉकेट मनी या आय का कम से कम 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा शुरुआत में ही अलग रख देना चाहिए। इसे पहले खर्च करने के बजाय बचत के रूप में रखना बेहतर माना जाता है। कई छात्र महीने के अंत में बचा हुआ पैसा जमा करने की सोचते हैं, लेकिन अक्सर तब तक कुछ भी नहीं बचता। इसलिए पहले बचत और बाद में खर्च करने की आदत अधिक प्रभावी मानी जाती है। बाहर का खाना छात्रों के सबसे बड़े खर्चों में शामिल होता है। रोजाना कैफे, रेस्टोरेंट या ऑनलाइन फूड डिलीवरी से ऑर्डर करने पर महीने का बजट तेजी से बढ़ जाता है। अगर सप्ताह में कुछ दिन घर या हॉस्टल का खाना खाया जाए और बाहर खाने की संख्या सीमित रखी जाए तो अच्छी-खासी बचत हो सकती है। साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद रहता है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ऑनलाइन शॉपिंग भी छात्रों के खर्च बढ़ाने का एक बड़ा कारण बनती जा रही है। कई बार डिस्काउंट और ऑफर के नाम पर ऐसी चीजें खरीद ली जाती हैं जिनकी वास्तव में जरूरत नहीं होती। खरीदारी करने से पहले यह तय करना जरूरी है कि वस्तु जरूरत की है या केवल इच्छा के कारण खरीदी जा रही है। 24 घंटे का नियम अपनाना भी फायदेमंद हो सकता है। यदि किसी सामान की जरूरत अगले दिन भी महसूस हो, तभी उसे खरीदें।</p>
<p class="isSelectedEnd">कॉलेज जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या दोस्तों के साथ साझा यात्रा का विकल्प चुनने से भी हर महीने खर्च कम किया जा सकता है। यदि कॉलेज पास में है तो पैदल चलना न केवल पैसे बचाता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है। छोटी दूरी के लिए बार-बार कैब बुक करना बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। छात्रों को स्टूडेंट डिस्काउंट का पूरा लाभ उठाना चाहिए। कई कंपनियां, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, किताबों की दुकानें, सॉफ्टवेयर सेवाएं और यात्रा सेवाएं छात्रों को विशेष छूट देती हैं। पहचान पत्र दिखाकर या स्टूडेंट ऑफर का उपयोग करके हर महीने अच्छी बचत की जा सकती है। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शिक्षा से जुड़े कोर्स भी छात्रों को कम कीमत पर उपलब्ध कराए जाते हैं। पढ़ाई के दौरान अतिरिक्त आय का स्रोत बनाना भी बचत में मदद कर सकता है। आज कई छात्र फ्रीलांस लेखन, ग्राफिक डिजाइन, ऑनलाइन ट्यूशन, कंटेंट क्रिएशन, वीडियो एडिटिंग या पार्ट-टाइम जॉब के जरिए अतिरिक्त कमाई कर रहे हैं। इस आय का कुछ हिस्सा बचत में जमा करने से भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा बन सकती है। हालांकि पढ़ाई और काम के बीच संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।</p>
<p class="isSelectedEnd">मोबाइल रिचार्ज, ओटीटी सब्सक्रिप्शन और अन्य डिजिटल सेवाओं पर भी नजर रखना चाहिए। कई बार छात्र ऐसी सदस्यताओं का भुगतान करते रहते हैं जिनका वे नियमित उपयोग नहीं करते। जरूरत न होने पर इन्हें बंद करने से भी मासिक खर्च कम किया जा सकता है। परिवार या दोस्तों के साथ वैध फैमिली प्लान का उपयोग करने से भी लागत घटाई जा सकती है। आपातकालीन फंड बनाना भी छात्रों के लिए जरूरी माना जाता है। हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम अलग रखने से अचानक आने वाले खर्च, जैसे स्वास्थ्य संबंधी समस्या, यात्रा या पढ़ाई से जुड़े जरूरी खर्च आसानी से पूरे किए जा सकते हैं। इससे किसी से उधार लेने की जरूरत भी कम पड़ती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">बचत केवल पैसे जमा करने का नाम नहीं है, बल्कि समझदारी से खर्च करने की आदत भी है। यदि छात्र शुरुआत से ही आय और खर्च का सही संतुलन बनाना सीख लें तो आगे चलकर नौकरी या व्यवसाय शुरू करने के बाद भी यह आदत उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित होगी। छोटी-छोटी बचत समय के साथ बड़ी राशि में बदल सकती है। कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्र बिना अपनी पढ़ाई या सामान्य जीवनशैली पर असर डाले भी हर महीने अच्छी बचत कर सकते हैं। इसके लिए केवल खर्चों पर नजर रखना, जरूरत और इच्छा में अंतर समझना, बजट बनाना और नियमित बचत की आदत विकसित करना जरूरी है। आर्थिक अनुशासन भविष्य की वित्तीय मजबूती की पहली सीढ़ी माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लाइफ स्टाइल</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 29 Jun 2026 00:00:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>PF निकासी और FD ब्याज पर कटा TDS वापस कैसे मिलेगा? ITR फाइल करने से मिल सकता है टैक्स रिफंड</title>
                                    <description><![CDATA[पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में अलग-अलग नियम, सही तरीके से ITR दाखिल करने पर बैंक खाते में आ सकता है अतिरिक्त टैक्स रिफंड]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/6a3f6ca73121d/article-57102"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/itr-filing.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आते ही सबसे ज्यादा सवाल टैक्स रिफंड को लेकर पूछे जाते हैं। कई नौकरीपेशा और वरिष्ठ नागरिक ऐसे हैं, जिनके फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज पर बैंक पहले ही TDS काट लेता है। वहीं, कुछ मामलों में कर्मचारी भविष्य निधि (PF) की समय से पहले निकासी पर भी टैक्स काटा जाता है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि कटा हुआ टैक्स वापस नहीं मिल सकता, जबकि यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी कम बनती है तो ITR दाखिल कर आप इस राशि का रिफंड प्राप्त कर सकते हैं। टैक्स रिफंड अपने आप नहीं मिलता। इसके लिए आयकर रिटर्न सही जानकारी के साथ दाखिल करना जरूरी होता है। आयकर विभाग आपकी कुल आय, लागू टैक्स स्लैब, कटौतियों और पहले से कटे TDS का मिलान करता है। यदि पहले से जमा टैक्स आपकी वास्तविक देनदारी से अधिक होता है तो अतिरिक्त राशि सीधे आपके बैंक खाते में भेज दी जाती है। पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले करदाताओं को कई तरह की टैक्स छूट का लाभ मिलता है। धारा 80C के तहत निवेश, पीएफ, जीवन बीमा और अन्य योग्य निवेशों पर कटौती का दावा किया जा सकता है। इसके अलावा धारा 80D के तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर भी राहत मिलती है। इन कटौतियों के कारण कुल कर योग्य आय कम हो जाती है और कई मामलों में पहले से कटा TDS पूरी तरह या आंशिक रूप से वापस मिल सकता है। हालांकि FD से मिलने वाला ब्याज और टैक्स योग्य PF निकासी को आय में दिखाना अनिवार्य होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई टैक्स व्यवस्था में अधिकांश पारंपरिक कटौतियां उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टैक्स रिफंड नहीं मिलेगा। यदि आपकी कुल टैक्स देनदारी पहले से कटे TDS से कम है तो नई व्यवस्था में भी रिफंड का दावा किया जा सकता है। अंतिम निर्णय आपकी कुल आय, लागू टैक्स स्लैब और उपलब्ध टैक्स राहत के आधार पर किया जाता है। रिफंड प्राप्त करने के लिए सबसे पहले आयकर पोर्टल पर अपने PAN से जुड़े खाते के माध्यम से लॉगिन करना होगा। इसके बाद Form 26AS और Annual Information Statement (AIS) की जांच करनी चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि FD ब्याज और PF निकासी पर कटा TDS सही तरीके से दर्ज है। यदि किसी प्रकार की विसंगति दिखाई देती है तो पहले उसे ठीक करवाना बेहतर रहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद सही असेसमेंट ईयर का चयन करते हुए पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था में से उपयुक्त विकल्प चुनना होगा। रिटर्न भरते समय वेतन, FD ब्याज, PF निकासी, किराया, व्यवसाय या अन्य सभी कर योग्य आय की जानकारी सही-सही दर्ज करनी चाहिए। यदि पुरानी टैक्स व्यवस्था का चयन किया गया है तो पात्र निवेश और खर्चों की कटौतियां भी शामिल करनी होंगी। सभी जानकारी भरने के बाद रिटर्न जमा कर उसका सत्यापन करना आवश्यक है। सत्यापन पूरा होने के बाद ही आयकर विभाग रिटर्न की प्रोसेसिंग शुरू करता है। PF निकासी पर हर स्थिति में टैक्स नहीं लगता। यदि कर्मचारी निर्धारित नियमों के अनुसार तय अवधि पूरी करने के बाद PF निकालता है तो सामान्य परिस्थितियों में TDS नहीं काटा जाता। लेकिन समय से पहले निकासी करने पर कुछ मामलों में टैक्स कट सकता है। वहीं, फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज "Income from Other Sources" के अंतर्गत कर योग्य माना जाता है। यदि ब्याज निर्धारित सीमा से अधिक हो जाता है तो बैंक TDS काट सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"> ITR दाखिल करने से पहले सभी दस्तावेजों का मिलान अवश्य कर लें। PAN की जानकारी अपडेट होनी चाहिए, बैंक खाते का विवरण सही होना चाहिए और Form 26AS तथा AIS में दिखाई गई TDS जानकारी आपके रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए। यदि किसी बैंक या संस्था द्वारा TDS जमा नहीं किया गया है या गलत जानकारी दर्ज हुई है तो पहले उसे ठीक करवाना जरूरी है। समय पर ITR दाखिल करना भी बेहद महत्वपूर्ण है। निर्धारित समय सीमा के बाद रिटर्न दाखिल करने पर न केवल जुर्माना लग सकता है बल्कि टैक्स रिफंड मिलने में भी देरी हो सकती है। इसलिए करदाताओं को सलाह दी जाती है कि सभी वित्तीय दस्तावेज तैयार रखें और अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय समय रहते रिटर्न दाखिल करें। सही जानकारी, सटीक आय विवरण और उचित टैक्स व्यवस्था का चयन करके PF निकासी और FD ब्याज पर कटे अतिरिक्त TDS का रिफंड आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Jun 2026 12:39:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महज 10,000 रुपये की SIP से बन सकता है करोड़ों का फंड, ऐसे मिलेगी हर महीने 1 लाख से ज्यादा की इनकम</title>
                                    <description><![CDATA[जानिए कैसे ₹10,000 की SIP लंबे समय में करोड़ों का फंड बना सकती है और रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹1 लाख से ज्यादा इनकम दे सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/a-fund-worth-crores-can-be-created-with-a-sip/article-54001"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/sip.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">महंगाई के चलते अब ज्यादातर लोग सिर्फ अपनी नौकरी की कमाई पर निर्भर नहीं रहना चाहते। खासकर रिटायरमेंट के बाद भी नियमित आय सुनिश्चित करने के लिए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई लोग पहले से ही निवेश करने की योजना बना रहे हैं। इसीलिए</span>, SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान अब तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक अनुशासन के साथ निवेश जारी रखे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो छोटी रकम से भी बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है। यही कारण है कि </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">10,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> की मासिक </span>SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">के बारे में काफी चर्चा हो रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि सही योजना के साथ इससे भविष्य में हर महीने </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">1<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख से ज्यादा की आय संभव मानी जा रही है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असल में</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">में निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि म्यूचुअल फंड में डालता है। इसमें सबसे बड़ा फायदा कंपाउंडिंग का होता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">मतलब कि जो रिटर्न आपको मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वो भी आगे चलकर कमाई करने लग जाता है। लंबे समय तक लगातार निवेश करने से ये छोटी-छोटी राशियाँ एक बड़ा फंड तैयार कर सकती हैं। मान लिजिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कोई व्यक्ति हर महीने </span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">10,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> की </span>SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">करीब </span>30<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल तक करता है और उसे औसतन </span>12<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके पास लगभग </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये या उससे ज्यादा का फंड तैयार हो सकता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि असली ताकत समय में छिपी होती है। जो लोग कम उम्र में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">शुरू करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें ज्यादा फायदा मिल सकता है। माना जाता है कि </span>25<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल की उम्र में शुरू किया गया निवेश</span>, 35<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल की उम्र में शुरू हुई </span>SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">के मुकाबले कई गुना बड़ा फंड तैयार कर सकता है। यही वजह है कि एक्सपर्ट्स जल्दी निवेश शुरू करने की सलाह देते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब यह सोचने वाली बात है कि इस फंड से हर महीने </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;">₹</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">1<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख या उससे ज्यादा की आय कैसे मिलेगी। इसे समझने के लिए कह सकते हैं कि अगर रिटायरमेंट तक करीब </span>3<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये का फंड बन जाता है और उस पैसे को किसी ऐसे निवेश में रखा जाए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहाँ </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>8<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत सालाना रिटर्न मिलता रहे</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो नियमित आय बनाई जा सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">3<span lang="hi" xml:lang="hi"> करोड़ रुपये पर </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> प्रतिशत के हिसाब से सालाना लगभग </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये की कमाई हो सकती है। यानी हर महीने करीब </span>1.5<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये तक की आय बनने की संभावना है। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह पूरी तरह से बाजार की स्थिति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेश के तरीके और निकासी की योजना पर निर्भर करता है। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि समझदारी से निकासी करने पर लंबे समय तक नियमित आय को बनाए रखना संभव है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">विशेषज्ञों का मानना है कि </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">में सबसे जरूरी बात धैर्य और अनुशासन है। कई लोग जब बाजार गिरता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो निवेश रोक देते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि लंबे समय में बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य होता है। ऐसे में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो लोग लगातार निवेश करते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें भविष्य में ज्यादा फायदा हो सकता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 00:00:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सिर्फ 10,000 की मंथली SIP से 5 साल में बन सकता है लाखों का फंड, समझें पूरा कैलकुलेशन</title>
                                    <description><![CDATA[हर महीने ₹10,000 की SIP करने पर 5 साल में कितना फंड बन सकता है? जानिए 12% रिटर्न के हिसाब से पूरा कैलकुलेशन और कंपाउंडिंग का फायदा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/with-a-monthly-sip-of-just-rs-10000-a-fund/article-53067"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t161651.056.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">आज के समय में </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान तेजी से लोगों की पहली पसंद बनती जा रही है। खासकर नौकरीपेशा और मिडिल क्लास परिवारों में </span>SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">को लेकर रुचि बढ़ी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसमें एकमुश्त बड़ी रकम लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। हर महीने छोटी राशि निवेश करके भी लंबे समय में अच्छा फंड तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में म्यूचुअल फंड </span>SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">में निवेश करने वालों की संख्या लगातार बढ़ी है। अगर कोई निवेशक हर महीने </span></span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">₹</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">10,000 की </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">करता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो 5 साल में उसके पास कितना पैसा जमा हो सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसे लेकर लोग अक्सर कैलकुलेशन जानना चाहते हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारों के मुताबिक </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">में निवेश की सबसे बड़ी ताकत कंपाउंडिंग मानी जाती है। यानी आपके लगाए गए पैसे पर जो रिटर्न मिलता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वही आगे फिर से रिटर्न कमाने लगता है। यही प्रक्रिया धीरे-धीरे फंड को बड़ा बनाती है। उदाहरण के तौर पर अगर कोई व्यक्ति हर महीने </span></span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">₹</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">10,000 निवेश करता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो एक साल में उसका निवेश </span></span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">₹</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">1.20 लाख और 5 साल में कुल </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">₹</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">6 लाख हो जाएगा। अब अगर इस निवेश पर औसतन 12 फीसदी सालाना रिटर्न माना जाए</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इक्विटी म्यूचुअल फंड में लंबे समय में देखा जाता रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो 5 साल बाद निवेशक के पास करीब </span></span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">₹</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">8.11 लाख का फंड तैयार हो सकता है। इस</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">में लगभग </span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:'Times New Roman', serif;" xml:lang="hi">₹</span><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">2.11 लाख केवल अनुमानित रिटर्न होगा। हालांकि बाजार की स्थिति के हिसाब से यह रिटर्न कम या ज्यादा भी हो सकता है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षों में कई </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">निवेशकों को इससे बेहतर रिटर्न भी मिले हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन विशेषज्ञ हमेशा लंबी अवधि का नजरिया रखने की सलाह देते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SIP Calculator <span lang="hi" xml:lang="hi">की मदद से निवेशक पहले से यह अंदाजा लगा सकते हैं कि तय समय में उनका पैसा कितना बढ़ सकता है। वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि 5 साल की अवधि को </span>SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">के लिए ठीक-ठाक माना जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन असली फायदा 10 से 15 साल जैसे लंबे निवेश में दिखता है। ऐसे में छोटे निवेश से भी बड़ा कॉर्पस तैयार किया जा सकता है। बाजार में उतार-चढ़ाव जरूर रहता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कई बार रिटर्न उम्मीद से कम भी मिल सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन नियमित निवेश करने वाले लोगों को लंबी अवधि में इसका फायदा मिलता देखा गया है। यही कारण है कि आज युवा निवेशक भी बैंक </span>FD <span lang="hi" xml:lang="hi">की जगह </span>SIP <span lang="hi" xml:lang="hi">की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 16:28:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>SBI FD में 6 महीने के लिए 2 लाख रुपये जमा करें, तो कितना मिलेगा रिटर्न, देखें कैलकुलेशन</title>
                                    <description><![CDATA[SBI की 6 महीने की FD में ₹2 लाख जमा करने पर सामान्य, वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों को कितना ब्याज मिलेगा, जानें पूरा कैलकुलेशन।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/if-you-deposit-rs-2-lakh-in-sbi-fd-for/article-53065"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t155015.676.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश का चलन तेजी से बढ़ा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन इसके बावजूद देश में बड़ी संख्या में लोग आज भी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी </span>FD <span lang="hi" xml:lang="hi">को सबसे सुरक्षित निवेश मानते हैं। खासकर सरकारी बैंकों की एफडी पर लोगों का भरोसा ज्यादा रहता है। ऐसे में भारतीय स्टेट बैंक यानी </span>SBI <span lang="hi" xml:lang="hi">की एफडी स्कीम्स लगातार निवेशकों का ध्यान खींच रही हैं। </span>SBI <span lang="hi" xml:lang="hi">फिलहाल अलग-अलग अवधि की एफडी पर </span>3.05%<span lang="hi" xml:lang="hi"> से लेकर </span>7.15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक ब्याज दे रहा है। ब्याज दरें निवेश की अवधि और ग्राहक की उम्र के हिसाब से तय होती हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SBI <span lang="hi" xml:lang="hi">में ग्राहक </span>7<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन से लेकर </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल तक की अवधि के लिए एफडी करा सकते हैं। बैंक की </span>444<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिनों वाली </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">अमृत वृष्टि</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">स्कीम इन दिनों काफी चर्चा में है। इसमें सामान्य ग्राहकों को </span>6.45%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक ब्याज मिल रहा है। वहीं वरिष्ठ नागरिकों को ज्यादा फायदा दिया जा रहा है। </span>60<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल से अधिक उम्र के ग्राहकों को </span>5<span lang="hi" xml:lang="hi"> से </span>10<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल की एफडी पर </span>7.05%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक ब्याज ऑफर किया जा रहा है। अति वरिष्ठ नागरिकों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यानी </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए यह ब्याज दर </span>7.15%<span lang="hi" xml:lang="hi"> तक पहुंच जाती है। बैंक की इन स्कीम्स को लेकर ग्राहकों में रुचि बनी हुई है क्योंकि इसमें रिटर्न तय होता है और जोखिम काफी कम माना जाता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब बात करते हैं उस सवाल की जिसे लेकर सबसे ज्यादा लोग जानकारी तलाशते हैं कि अगर </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">SBI <span lang="hi" xml:lang="hi">में </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने के लिए </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये की </span>FD <span lang="hi" xml:lang="hi">कराई जाए तो मैच्योरिटी पर कितना पैसा मिलेगा। बैंक के मौजूदा ब्याज दरों के हिसाब से सामान्य नागरिक अगर </span>180<span lang="hi" xml:lang="hi"> दिन यानी करीब </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने के लिए </span>2,00,000<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये जमा करते हैं तो उन्हें करीब </span>5,650<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये ब्याज मिलेगा। ऐसे में मैच्योरिटी पर कुल रकम </span>2,05,650<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये हो जाएगी।</span></span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">वहीं वरिष्ठ नागरिकों को इसी अवधि की एफडी पर थोड़ा ज्यादा फायदा मिलता है। अगर कोई सीनियर सिटीजन </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये की एफडी कराता है तो उसे लगभग </span>6,150<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये ब्याज मिलेगा। यानी मैच्योरिटी के समय कुल रकम </span>2,06,150<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये हो जाएगी। इसके अलावा अति वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज और ज्यादा है। </span>80<span lang="hi" xml:lang="hi"> साल या उससे अधिक उम्र के ग्राहक अगर </span>6<span lang="hi" xml:lang="hi"> महीने की </span>FD <span lang="hi" xml:lang="hi">में </span>2<span lang="hi" xml:lang="hi"> लाख रुपये निवेश करते हैं तो उन्हें करीब </span>6,250<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये ब्याज मिलेगा। इस हिसाब से मैच्योरिटी पर कुल रकम </span>2,06,250<span lang="hi" xml:lang="hi"> रुपये बनती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में एफडी में निवेश बढ़ा है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर उन लोगों के बीच जो जोखिम लेने से बचते हैं। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच फिक्स्ड रिटर्न वाली योजनाओं की तरफ लोगों का रुझान फिर बढ़ा है। बैंकिंग सेक्टर से जुड़े जानकारों का कहना है कि छोटी अवधि की एफडी उन लोगों के लिए बेहतर मानी जाती है जिन्हें कुछ महीनों बाद पैसों की जरूरत पड़ सकती है और साथ ही वे सुरक्षित रिटर्न भी चाहते हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हालांकि एफडी कराने से पहले निवेशकों को ब्याज दर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">अवधि और टैक्स नियमों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। कई बार ब्याज दरों में बदलाव होता रहता है। ऐसे में निवेश से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी शाखा से ताजा जानकारी लेना जरूरी माना जाता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 16:27:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>टैक्स बचाने के लिए बचे सिर्फ 2 दिन: PPF, NPS और सुकन्या खातों में जमा करें मिनिमम राशि</title>
                                    <description><![CDATA[31 मार्च की डेडलाइन से पहले निपटाएं 3 जरूरी वित्तीय काम; अप्रैल से लागू होंगे 10 बड़े बदलाव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/only-2-days-left-to-save-tax-deposit-minimum-amount/article-49512"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/business---2026-03-30t090704.116.jpg" alt=""></a><br /><p>आज 30 मार्च 2026 है और देशभर के निवेशक और नौकरीपेशा नागरिक अपने वित्तीय कामों को समय पर निपटाने के लिए अब सिर्फ 2 दिन बचे हैं। पब्लिक प्रॉविडेंट फंड (PPF), नेशनल पेंशन स्कीम (NPS) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) जैसे खातों में न्यूनतम राशि जमा करना 31 मार्च की रात 12 बजे तक अनिवार्य है। इसके साथ ही टैक्स बचत और ऑफिस में इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करने की डेडलाइन भी समाप्त हो जाएगी।</p>
<hr />
<h5><strong>31 मार्च तक निपटाने योग्य 3 काम</strong></h5>
<p><strong>सरकारी स्कीम्स को चालू रखें</strong><br />PPF, NPS और SSY में सालाना ₹250 से ₹500 तक की न्यूनतम राशि जमा करना आवश्यक है। यदि यह राशि जमा नहीं होती, तो खाता निष्क्रिय हो जाएगा और चालू कराने के लिए पेनाल्टी और बैंक के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। इन खातों में निवेश पर इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है।</p>
<p><strong> पुरानी टैक्स रिजीम में निवेश</strong><br />सेक्शन 80C और 80D के तहत निवेश करने के लिए यह अंतिम दिन है। PPF, लाइफ इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम में निवेश से इस वित्तीय वर्ष में टैक्स छूट मिल सकती है। 1 अप्रैल के बाद किया गया निवेश अगले साल के खाते में गिना जाएगा।</p>
<p><strong>ऑफिस में इन्वेस्टमेंट प्रूफ जमा करें</strong><br />नौकरीपेशा लोगों को किराया प्रमाणपत्र, बीमा प्रीमियम रसीद और होम लोन ब्याज सर्टिफिकेट जैसी दस्तावेज़ ऑफिस में जमा करने होंगे। समय पर जमा न करने पर कंपनी अंतिम सैलरी से अधिक TDS काट सकती है, जिसे वापस पाने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरना पड़ेगा।</p>
<hr />
<h5><strong>1 अप्रैल से लागू होंगे 10 बड़े बदलाव</strong></h5>
<p>अप्रैल 2026 से वित्तीय नियमों में कई बदलाव हो रहे हैं। इनमें मिनिमम बैलेंस नियम, निवेश और टैक्स कटौती की शर्तें, और PPF/NPS/SSY से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, 31 मार्च की डेडलाइन से पहले ये काम निपटाना निवेशकों और नौकरीपेशाओं के लिए फायदेमंद रहेगा।</p>
<p>वित्तीय सलाहकारों का कहना है कि समय पर निवेश और डॉक्यूमेंट्स जमा करने से न केवल टैक्स बचता है, बल्कि बैंकिंग और निवेश खातों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होती है। उन्होंने निवेशकों को अंतिम दिन भी सक्रिय रहने की चेतावनी दी है।</p>
<p>31 मार्च के बाद निवेश और दस्तावेज जमा करने पर छूट अगले वित्तीय वर्ष में शामिल होगी। इसलिए निवेशक और नौकरीपेशा लोग समय पर यह काम निपटाएं और नियमों के बदलाव के अनुसार योजना बनाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 09:16:34 +0530</pubDate>
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