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                <title>BJP - दैनिक जागरण</title>
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                <description>BJP RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>दतिया में नरोत्तम मिश्रा समर्थकों का बवाल, NH-44 जाम; पुलिस पर पथराव, एसपी-एएसपी समेत 6 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[भाजपा की ओर से विधानसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। एनएच-44 पर लंबा जाम लगा और पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बन गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/narottam-mishra-supporters-create-ruckus-in-datia-stone-pelting-at/article-58468"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-news-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दतिया में आगामी विधानसभा उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद शुक्रवार शाम से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन देर रात और शनिवार तड़के हिंसक रूप ले बैठा। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से नाराज उनके समर्थकों ने नेशनल हाईवे-44 पर चक्का जाम कर दिया, जिससे करीब 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। हालात उस समय और बिगड़ गए जब पुलिस ने हाईवे खाली कराने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर पथराव किया गया, जिसमें दतिया के पुलिस अधीक्षक मयूर खंडेलवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित छह से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि पुलिस ने हालात पर नियंत्रण पाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और अतिरिक्त बल तैनात किया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस अधिकारियों के अनुसार शुक्रवार शाम करीब छह बजे से बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र होने लगे थे। प्रशासन का कहना है कि तीन हजार से अधिक लोगों की भीड़ ने पहले बाजार बंद कराने का प्रयास किया और फिर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठकर चक्का जाम कर दिया। हाईवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे दतिया के साथ-साथ आसपास के जिलों की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने कई बार प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर जाम समाप्त करने की अपील की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। अधिकारियों के मुताबिक तड़के करीब चार बजे स्थिति अचानक बिगड़ गई और पुलिस टीम पर पत्थर फेंके जाने लगे। इसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन पथराव जारी रहने पर अतिरिक्त बल बुलाना पड़ा। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई और कुछ लोगों को हिरासत में भी लिया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोध प्रदर्शन की वजह भारतीय जनता पार्टी द्वारा दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया जाना बताया जा रहा है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को उम्मीद थी कि पार्टी एक बार फिर उन्हें टिकट देगी। बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकन की तैयारी भी शुरू कर दी थी। जैसे ही पार्टी ने आशुतोष तिवारी के नाम की घोषणा की, समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई और वे सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शन के दौरान कुछ समर्थकों ने सड़क पर लेटकर विरोध जताया और पार्टी नेतृत्व से फैसला बदलने की मांग की। दूसरी ओर भाजपा के जिला मंत्री भानु सिंह ने दावा किया कि कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे और पूरी रात रामधुन गाकर पार्टी नेतृत्व से टिकट पर पुनर्विचार करने की अपील कर रहे थे। उनका आरोप है कि पुलिस प्रशासन ने सख्ती दिखाई, जिससे हालात बिगड़ गए। वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए और भीड़ द्वारा पहले हिंसक व्यवहार किया गया। इस बीच भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उनके वरिष्ठ नेता और अभिभावक हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि पार्टी के सभी कार्यकर्ता एकजुट होकर चुनाव लड़ेंगे और डॉ. मिश्रा का मार्गदर्शन उन्हें मिलता रहेगा। हाईवे पर यातायात धीरे-धीरे सामान्य कराया जा रहा है, जबकि पुलिस संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:27:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई को लहार दौरे पर, लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त करेंगे जारी</title>
                                    <description><![CDATA[भिण्ड जिले के लहार में आयोजित कार्यक्रम से मुख्यमंत्री लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करेंगे। साथ ही भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा की माताजी के निधन पर उनके निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/chief-minister-dr-mohan-yadav-will-release-the-38th-installment/article-58452"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई को भिण्ड जिले के लहार के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे प्रदेश की महत्वाकांक्षी <strong>लाड़ली बहना योजना</strong> की 38वीं किस्त की राशि प्रदेशभर की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से हस्तांतरित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और लाभार्थी महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री लहार पहुंचने के बाद भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा (गुड्डू) के निवास भी जाएंगे, जहां वे उनकी माताजी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा पहले मेहगांव में प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम में बदलाव कर इसे लहार स्थानांतरित कर दिया गया। गुरुवार देर रात इस बदलाव की आधिकारिक जानकारी सामने आई, जिसके बाद प्रशासन ने नई व्यवस्थाओं के अनुसार तैयारियां तेज कर दीं।</p>
<p>मुख्यमंत्री का कार्यक्रम दोपहर करीब 1 बजे शुरू होगा और वे लगभग दो घंटे तक लहार में रहेंगे। इस दौरान उनका सार्वजनिक कार्यक्रम दोपहर 3 बजे तक प्रस्तावित है। गुरुवार शाम तक कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। प्रशासन की ओर से बारिश की संभावना को देखते हुए ऐसे स्थान की तलाश की जा रही थी, जहां बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के बावजूद आयोजन सुचारु रूप से कराया जा सके। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम के लिए पक्के और सुरक्षित स्थल को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, मंच व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इससे पहले जब कार्यक्रम मेहगांव में प्रस्तावित था, तब भी संबंधित अधिकारियों ने मंडी परिसर का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए थे। अब कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद पूरी तैयारियों को नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है।</p>
<p>लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। इस योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिलती है। योजना की प्रत्येक किस्त का लाभ प्रदेश की लाखों महिलाओं को मिलता है और लाभार्थी हर माह निर्धारित तिथि का इंतजार करती हैं। 12 जुलाई को जारी होने वाली 38वीं किस्त भी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ऑनलाइन हस्तांतरित की जाएगी। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और परिवार में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान योजना से जुड़ी अन्य जानकारियां भी साझा की जा सकती हैं। वहीं, मुख्यमंत्री का भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा के निवास पहुंचकर उनकी माताजी को श्रद्धांजलि देना भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। हाल ही में विधायक की माताजी का निधन हुआ था, जिसके बाद मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से शोक व्यक्त करने के लिए उनके निवास जाने वाले हैं। मुख्यमंत्री के लहार आगमन की सूचना मिलते ही विधायक अम्बरीश शर्मा ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपते हुए कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने के निर्देश दिए। दूसरी ओर प्रशासन भी मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहीं लाभार्थी महिलाओं के लिए भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान उनके खातों में नई किस्त की राशि हस्तांतरित की जाएगी। ऐसे में 12 जुलाई का यह दौरा भिण्ड जिले के साथ-साथ प्रदेशभर की लाखों महिलाओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दतिया उपचुनाव में BJP का बड़ा सरप्राइज, आशुतोष तिवारी को मिला टिकट; नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा ने उम्मीदवार घोषित किया, चुनावी तैयारियों में जुटे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को नहीं मिला मौका; कांग्रेस और अन्य दल भी तेज कर रहे प्रचार अभियान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjps-big-surprise-ashutosh-tiwari-got-ticket-in-datia-by-election/article-58439"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का फैसला किया है। इस घोषणा के साथ ही दतिया की राजनीति में कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। खास बात यह रही कि पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा था। उन्होंने चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं, कई जनसभाएं कर चुके थे और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, लेकिन अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। भाजपा ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब दतिया उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ चुकी हैं। उम्मीदवार घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया और पार्टी ने चुनाव प्रचार को नई गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन अब आशुतोष तिवारी को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति बना रहा है। आशुतोष तिवारी भाजपा संगठन के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने वर्षों तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। संगठन और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें इस महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना है। हालांकि, इस फैसले ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को जरूर चौंकाया है। चुनाव की घोषणा के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने कई सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया और लोगों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में समर्थक भी पहुंचे थे, जिससे यह माना जा रहा था कि पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जता सकती है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt="BJP Candidate" width="1366" height="1556"></img></p>
<p>चुनावी अभियान के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने अपने संबोधनों में जनता से भावनात्मक अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनसे पूर्व में कोई गलती हुई हो तो लोग उन्हें क्षमा करें। उन्होंने अपने व्यवहार में बदलाव लाने की बात भी कही थी और भरोसा दिलाया था कि भविष्य में जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उनकी यह अपील राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बनी रही। इसके अलावा एक अन्य जनसभा में उन्होंने कांग्रेस के आरोपों का भी जवाब दिया था। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि भाजपा सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है और बेबुनियाद आरोपों का कोई आधार नहीं है। इन बयानों के जरिए वे चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे थे। भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। कांग्रेस भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। दूसरी ओर अन्य राजनीतिक दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। दतिया सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की कानूनी लड़ाई भी चर्चा में रही। उनकी ओर से दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद कांग्रेस के सामने भी उम्मीदवार चयन को लेकर नई परिस्थितियां बनीं। राजेंद्र भारती ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि पार्टी चाहे तो उनके परिवार के बजाय किसी अन्य नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है और वे पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। दतिया उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया भी जारी है। अब तक कई उम्मीदवार नामांकन पत्र खरीद चुके हैं और कुछ ने अपने नामांकन दाखिल भी कर दिए हैं। चुनाव आयोग की तय समय-सीमा के अनुसार आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दल प्रचार अभियान को और तेज करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:53:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>भोपाल मास्टर प्लान पर दिशा बैठक में बवाल, विधायक और जनपद अध्यक्ष आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[मास्टर प्लान लागू करने को लेकर कांग्रेस विधायकों और जनपद अध्यक्ष के बीच गरमागरम बहस, भाजपा विधायक ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना पर उठाए सवाल; सांसद ने मुख्यमंत्री से जल्द चर्चा का भरोसा दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/ruckus-in-disha-meeting-on-bhopal-master-plan-mla-and/article-58424"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय विवादों में आ गई, जब शहर के मास्टर प्लान को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, विधायक आतिफ अकील और फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के बीच हुई नोकझोंक ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की ओर उंगली उठाकर तीखी टिप्पणियां कीं और कुछ समय के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह गरमा गया। बैठक के दौरान शहर के नए मास्टर प्लान को लागू करने में हो रही देरी और विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मास्टर प्लान की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शहर का विकास इसी तरह चलता रहा तो भोपाल का संतुलित विकास संभव नहीं हो पाएगा। उनका कहना था कि लंबे समय से मास्टर प्लान लंबित होने के कारण शहर में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने चर्चा के दौरान हस्तक्षेप किया। उनके बीच में बोलने और उंगली दिखाकर अपनी बात रखने पर विधायक आरिफ मसूद नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि वह सांसद से चर्चा कर रहे हैं और बीच में इस तरह बोलना उचित नहीं है। मसूद ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा मास्टर प्लान किस काम का है, जो वर्षों बाद भी लागू नहीं हो पा रहा। इस पर प्रमोद सिंह राजपूत ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक को "औकात में रहकर बात करने" की नसीहत दी। दोनों नेताओं के बीच करीब दस मिनट तक तीखी बहस चलती रही। बैठक में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी माहौल शांत कराने का प्रयास करते रहे, लेकिन कुछ समय तक दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वह केवल सांसद से संवाद कर रहे थे और जनपद अध्यक्ष का इस तरह बीच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्यशैली से गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा प्रभावित होती है। विधायक आतिफ अकील भी इस मुद्दे पर मसूद के समर्थन में दिखाई दिए। बाद में दोनों विधायक बैठक से उठकर बाहर चले गए। बैठक में केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी कई जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना के नाम पर भोपाल की मूलभूत व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी-बड़ी इमारतें तो बना दी गईं, लेकिन उनमें आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर लिफ्ट खराब रहती हैं, सामुदायिक भवनों की कमी है और सार्वजनिक स्थानों के विकास पर भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए, ताकि अधिक निवेशक आगे आएं और परियोजना की आय बढ़ सके। उनका मानना था कि वर्तमान स्वरूप में बड़े प्लॉटों की बिक्री नहीं हो पा रही है, जिससे परियोजना की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इस तरह की समस्याएं उठा रहे हैं तो निश्चित रूप से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में भोपाल की महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में स्मार्ट सिटी के तहत लगाई गई कई स्ट्रीट लाइटें समय पर ठीक नहीं हो पातीं, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता बताई। स्मार्ट सिटी बोर्ड के चेयरमैन एवं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बैठक में भरोसा दिलाया कि सभी शिकायतों और समस्याओं की अलग-अलग समीक्षा कर उनका समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित और दीर्घकालिक विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह करेंगे। सांसद ने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। इसी कारण कई विकास कार्यों में टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाई जाए, जो सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सके। बैठक के दौरान भोपाल की झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए "भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण" गठित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव में संभागायुक्त को इसका अध्यक्ष बनाने तथा भोपाल और सीहोर के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को सदस्य बनाने की सिफारिश की गई। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी रखी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली एमसीडी में भाजपा और मजबूत, इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का आज होगा विलय</title>
                                    <description><![CDATA[AAP से अलग होकर बनी IVP के 16 पार्षद भाजपा में होंगे शामिल, वार्ड कमेटियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन प्रत्याशियों का भी होगा ऐलान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/bjp-and-strong-indraprastha-vikas-party-will-merge-in-delhi/article-58415"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/delhi-mcd.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की राजनीति में शुक्रवार का दिन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर बनी इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी (IVP) का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में औपचारिक विलय होने जा रहा है। इस विलय के साथ IVP के सभी 16 पार्षद भाजपा का दामन थामेंगे। इस घटनाक्रम के बाद एमसीडी में भाजपा की संख्या बढ़कर 139 हो जाएगी, जिससे निगम में पार्टी की स्थिति पहले से अधिक मजबूत मानी जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा की मौजूदगी में दिल्ली भाजपा कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इस विलय की औपचारिक घोषणा की जाएगी। कार्यक्रम में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के भी मौजूद रहने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम आगामी नगर निगम चुनावों और निगम की आंतरिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए काफी अहम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी का गठन मई 2025 में उस समय हुआ था, जब आम आदमी पार्टी के 16 पार्षदों ने संगठन से अलग होकर नया राजनीतिक दल बनाया था। उस समय इन पार्षदों ने संगठनात्मक कार्यप्रणाली और स्थानीय स्तर के मुद्दों को लेकर अलग राह अपनाई थी। हालांकि, अब करीब एक वर्ष बाद यही सभी पार्षद भाजपा में शामिल होकर अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के लिए यह विलय संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एमसीडी में पहले से भाजपा के पास मजबूत संख्या थी, लेकिन IVP के 16 पार्षदों के शामिल होने के बाद पार्टी की ताकत और बढ़ जाएगी। निगम के कुल 250 वार्डों में भाजपा के पार्षदों की संख्या अब 139 तक पहुंच जाएगी, जिससे कई समितियों और प्रशासनिक निर्णयों में पार्टी की स्थिति और प्रभावी होगी। विलय के बाद भाजपा नगर निगम की विभिन्न वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी करेगी। शुक्रवार को नामांकन की अंतिम तिथि होने के कारण पार्टी इस प्रक्रिया को समय पर पूरा करना चाहती है। माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन में वरिष्ठता, अनुभव और संगठनात्मक योगदान को प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के प्रमुख मुकेश गोयल को नगर निगम की किसी तदर्थ अथवा विशेष समिति का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। वहीं, पार्टी के सह-प्रमुख हेमचंद्र गोयल को सेंट्रल जोन से स्थायी समिति का सदस्य बनाए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व द्वारा औपचारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। भाजपा संगठन वार्ड समितियों में नई जिम्मेदारियां तय करते समय पहली, दूसरी और तीसरी बार निर्वाचित होकर आए पार्षदों की वरिष्ठता और अनुभव का भी ध्यान रख सकता है। पार्टी का उद्देश्य संगठन और निगम प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बताया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">एमसीडी के गठन के बाद वर्ष 2022 के नगर निगम चुनाव में भाजपा को 104 सीटों पर जीत मिली थी। समय के साथ विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रमों और पार्षदों के दल परिवर्तन के कारण पार्टी की संख्या लगातार बढ़ती रही। अब इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी के विलय के बाद भाजपा नगर निगम में पहले से अधिक मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगी। दूसरी ओर, नगर निगम की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में नए राजनीतिक समीकरण भी बना सकता है। वार्ड समितियों के गठन, स्थायी समिति में प्रतिनिधित्व और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को लेकर सभी दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। ऐसे में शुक्रवार को होने वाला यह विलय एमसीडी की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा नेतृत्व का कहना है कि संगठन लगातार विस्तार की दिशा में कार्य कर रहा है और अनुभवी जनप्रतिनिधियों का पार्टी में स्वागत किया जा रहा है। वहीं राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर अब इस बात पर भी रहेगी कि वार्ड समितियों के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन पदों पर किन नेताओं को जिम्मेदारी मिलती है और इसका नगर निगम के भविष्य के राजनीतिक समीकरणों पर क्या असर पड़ता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 16:32:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राकेश यादव ने बदला राजनीतिक ठिकाना, कांग्रेस को दिया बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता और प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाने के बाद भाजपा का दामन थामा। उनके फैसले से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rakesh-yadav-changed-political-destination-gave-a-big-blow-to/article-58371"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव और पूर्व प्रवक्ता राकेश सिंह यादव भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। राजधानी भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। राकेश यादव के भाजपा में शामिल होने को प्रदेश की राजनीति का अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। राकेश सिंह यादव लंबे समय तक कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे और विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता के रूप में उन्होंने संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि पिछले कुछ समय से वे कांग्रेस नेतृत्व की कार्यप्रणाली को लेकर असहमति जता रहे थे। अंततः उन्होंने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया और अब भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद राकेश यादव ने कहा कि उन्होंने प्रदेश और देश के विकास की सोच को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने बीते वर्षों में विकास, सुशासन और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर उतारा है। उन्होंने कहा कि वे अब भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में संगठन को मजबूत बनाने और आम जनता के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं, गरीब कल्याण योजनाओं, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में हुए कार्यों से प्रेरित होकर उन्होंने भाजपा से जुड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा के मंच से उन्हें समाज और प्रदेश की जनता के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राकेश यादव का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर काम करने वाला संगठन है। उन्होंने कहा कि पार्टी में प्रत्येक कार्यकर्ता को समान सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राकेश यादव का राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ पार्टी के लिए उपयोगी साबित होगी और उनके आने से संगठन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लगातार अपने संगठन का विस्तार कर रही है और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े अनुभवी लोग पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से प्रभावित होकर जुड़ रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ऐसे में अनुभवी नेताओं का पार्टी में स्वागत किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी वरिष्ठ नेता का एक दल छोड़कर दूसरे दल में शामिल होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे फैसलों का असर राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक रणनीतियों पर भी देखने को मिलता है। राकेश यादव के भाजपा में शामिल होने से प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका पर सभी की नजर रहेगी। मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के अभियान में जुटी हुई है। पार्टी सदस्यता अभियान, संगठन विस्तार और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार नए लोगों को जोड़ रही है। ऐसे समय में राकेश यादव जैसे अनुभवी नेता का पार्टी से जुड़ना संगठन के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:15:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बंगाल की सियासत में बड़ा उलटफेर, TMC के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद भाजपा में शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[राज्यसभा उपचुनाव से पहले भाजपा ने सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक को बनाया उम्मीदवार, टीएमसी में बढ़ी राजनीतिक हलचल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upheaval-in-bengal-politics-three-former-tmc-rajya-sabha/article-58360"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/tmc-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के तीन पूर्व राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। भाजपा ने पार्टी में शामिल होते ही तीनों नेताओं को राज्यसभा की रिक्त सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस राजनीतिक बदलाव को पश्चिम बंगाल की बदलती सियासी तस्वीर और आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। राज्यसभा उपचुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। तीनों नेताओं ने कुछ सप्ताह पहले ही राज्यसभा सदस्यता और तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। उस समय उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर मनमाने तरीके से फैसले लेने और वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी करने के आरोप लगाए थे। अब भाजपा में शामिल होने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा ने इन तीनों नेताओं को जिस तेजी से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार बनाया है, उससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि पार्टी बंगाल में अपने संगठन को और मजबूत करने के लिए अनुभवी नेताओं पर भरोसा जता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों की रणनीति का भी हिस्सा हो सकता है। राज्यसभा की इन तीन रिक्त सीटों के लिए 24 जुलाई को मतदान और मतगणना होगी। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार 14 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, जबकि 15 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। ऐसे में अगले कुछ दिनों तक बंगाल की राजनीति पूरी तरह इन उपचुनावों और दल-बदल की चर्चाओं के इर्द-गिर्द घूमती रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा में शामिल होने के बाद सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह भी सार्वजनिक रूप से बताई। उन्होंने कहा कि आरजी कर अस्पताल रेप और हत्या मामले में उन्होंने सबूतों से कथित छेड़छाड़ और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए थे। इसके बाद उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिलने लगीं। उन्होंने दावा किया कि उनके परिवार के सदस्यों के अपहरण की धमकी भी दी गई। सुखेंदु के अनुसार उन्होंने पुलिस आयुक्त और अस्पताल प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की थी, लेकिन उनकी बात पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। यहां तक कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्हें पुलिस मुख्यालय बुलाया गया, जिसके बाद उन्हें न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">सुष्मिता देव ने भी भाजपा में शामिल होने के बाद अपने बयान से राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम, ओडिशा और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भाजपा की लगातार बढ़ती ताकत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनता के विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने असम में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनने को इसकी बड़ी मिसाल बताया। साथ ही उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अन्य राजनीतिक दल उन्हें अपने साथ नहीं लेना चाहते, इसलिए वे अब भी टीएमसी में हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस ने इन इस्तीफों और भाजपा में शामिल होने की घटना को ज्यादा महत्व देने से इनकार किया है। टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि तीनों नेता पहले से ही भाजपा के संपर्क में थे। उनके अनुसार अब भाजपा ने केवल अपनी राजनीतिक जरूरत के कारण उन्हें उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने दावा किया कि इससे तृणमूल कांग्रेस को कोई राजनीतिक नुकसान नहीं होगा और भाजपा को भी कोई बड़ा लाभ मिलने वाला नहीं है। सौगत रॉय का कहना है कि दल बदलने वाले नेताओं का राजनीतिक प्रभाव सीमित होता है और जनता ऐसे नेताओं को अधिक महत्व नहीं देती।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर लगातार असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने पार्टी छोड़ दी या अलग गुट बना लिया। उपलब्ध राजनीतिक आंकड़ों के अनुसार लोकसभा में टीएमसी के सांसदों की संख्या में भी कमी आई है। राज्यसभा में भी कई सांसदों के इस्तीफे के बाद पार्टी की स्थिति पहले जैसी मजबूत नहीं रही।</p>
<p style="text-align:justify;">विधानसभा में भी पार्टी के सामने चुनौती बढ़ी है। चुनाव में बड़ी जीत हासिल करने के बावजूद कई विधायक अलग गुट का हिस्सा बन चुके हैं। इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है। हालांकि पार्टी नेतृत्व लगातार दावा कर रहा है कि संगठन पूरी तरह मजबूत है और कुछ नेताओं के जाने से उसके जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पश्चिम बंगाल में दल-बदल की राजनीति नई नहीं है, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी रफ्तार काफी बढ़ी है। भाजपा और टीएमसी दोनों एक-दूसरे के नेताओं को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इससे राज्य की राजनीति लगातार अधिक प्रतिस्पर्धी होती जा रही है। राज्यसभा उपचुनाव के नतीजे भले ही सीमित सीटों तक हों, लेकिन उनका राजनीतिक संदेश आने वाले चुनावों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाएगा। भाजपा बंगाल में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए ऐसे नेताओं को प्राथमिकता दे रही है जिनका प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक पहचान मजबूत हो। वहीं टीएमसी अपने संगठन को मजबूत रखने और असंतुष्ट नेताओं को रोकने की कोशिश में जुटी हुई है। आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच राजनीतिक संघर्ष और तेज होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 10:41:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोलकाता रैली में ममता बनर्जी का थप्पड़ विवाद: हंगामे के बीच वायरल वीडियो से गरमाई सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[बारुईपुर घटना के विरोध मार्च के दौरान कथित वीडियो सामने आने के बाद भाजपा ने साधा निशाना, तृणमूल ने आरोपों को बताया भ्रामक; पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/mamata-banerjees-slap-controversy-in-kolkata-rally-amid-uproar-politics/article-58297"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mamata-banerjee-(1).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बारुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के कथित दुष्कर्म और हत्या के विरोध में पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में निकाली गई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की रैली उस समय विवादों में आ गई, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में दावा किया गया कि भीड़ के बीच ममता बनर्जी ने पीली टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति को थप्पड़ मार दिया। इस घटना के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इसे लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम उस समय सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस ने बारुईपुर की घटना के विरोध में बालीगंज फाड़ी से हाजरा मोड़ तक विरोध मार्च निकाला था। इस मार्च में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल हुईं। रैली में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद थे। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे, लेकिन मार्च के दौरान कई स्थानों पर तनाव की स्थिति बन गई।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जुलूस आगे बढ़ने के दौरान कुछ लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसी बीच कथित तौर पर अंडे भी फेंके गए और ‘चोर-चोर’ के नारे लगाए गए। इससे माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि ममता बनर्जी पहले हाथ जोड़कर भीड़ को शांत करने की कोशिश करती हैं। इसके बाद वह आगे बढ़ती हैं और सामने खड़े एक युवक को थप्पड़ मारती हुई नजर आती हैं। हालांकि इस वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। भाजपा ने इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ इस तरह का व्यवहार करती हैं, तो इससे उनके नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े होते हैं। भाजपा नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर किसी भी व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार उचित नहीं माना जा सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ लेने के लिए वीडियो को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री भीड़ को नियंत्रित करने और सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश कर रही थीं। टीएमसी का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को गलत तरीके से प्रचारित किया जा रहा है ताकि सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। रैली के दौरान भाजपा और तृणमूल कांग्रेस की युवा शाखा के कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प भी हुई। पुलिस के अनुसार, स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। कुछ जगहों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हल्का लाठीचार्ज भी किया गया। अधिकारियों ने बताया कि किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।बताया जा रहा है कि जुलूस बालीगंज से शुरू होकर करीब तीन किलोमीटर का सफर तय करते हुए हाजरा क्रॉसिंग तक पहुंचा। इसी दौरान अलग-अलग स्थानों पर तनाव की घटनाएं सामने आईं। मुख्यमंत्री के कालीघाट स्थित आवास के आसपास भी भारी भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस ने सुरक्षा कारणों से कई रास्तों पर बैरिकेडिंग कर यातायात को नियंत्रित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">रैली के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुलिस अधिकारियों से भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करना सभी का अधिकार है, लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जानबूझकर रैली में व्यवधान पैदा किया और तनाव फैलाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की हिंसा या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यदि किसी ने कानून हाथ में लिया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इस पूरे घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। वायरल वीडियो को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग मुख्यमंत्री के व्यवहार की आलोचना कर रहे हैं, जबकि कई समर्थक इसे भीड़ को नियंत्रित करने की स्वाभाविक प्रतिक्रिया बता रहे हैं। हालांकि वीडियो की प्रामाणिकता और पूरी परिस्थितियों को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने आना बाकी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 15:40:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>13 जुलाई से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र, 1033 सवालों के साथ सरकार को घेरेगा विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय सत्र में कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट और मानसून की तैयारियों जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will-start-from-july-13/article-58083"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार अब तक विधायकों की ओर से 1033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रश्न विपक्षी कांग्रेस की ओर से हैं। कांग्रेस ने इस बार कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़कों की स्थिति और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और अपनी योजनाओं तथा उपलब्धियों को सदन के सामने रखने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान सदन में कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की स्थिति देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधानसभा का यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब प्रदेश में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय मुद्दे चर्चा में हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में प्रशासन समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में सफल नहीं रहा, इसलिए इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठने वाले हैं। खरीफ सीजन के बीच खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियां और कृषि विभाग की योजनाओं को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि कई क्षेत्रों से किसानों को समय पर उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं सरकार का दावा है कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सदन में इन दावों और आरोपों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। कृषि से जुड़े सवालों की संख्या भी इस बार अधिक बताई जा रही है, जिससे यह मुद्दा सत्र के दौरान प्रमुख बना रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के नकटी गांव का भूमि विवाद भी इस बार विधानसभा में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनने की संभावना है। अतिक्रमण हटाने, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार हो रही है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए कई सवाल उठाने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से पूरे मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी की गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी सदन में काफी देर तक बहस हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, पेयजल संकट और खराब सड़कें भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल हैं। कई जिलों से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेयजल की समस्या की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके अलावा बारिश के दौरान सड़कों की खराब स्थिति, जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले जिन तैयारियों का दावा किया गया था, उनकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी है। हालिया बारिश के दौरान राहत और बचाव कार्यों की स्थिति भी चर्चा का विषय बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों पर भी प्रश्न लगाए गए हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन, बजट खर्च और विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार प्रश्नों की संख्या को देखते हुए इस बार प्रश्नकाल काफी व्यस्त रहने की संभावना है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य कार्यवाही के दौरान भी कई महत्वपूर्ण विषय सदन में उठ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जा सके। मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर भी विभागवार समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में विकास कार्य लगातार जारी हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा। सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी सदन में प्रमुखता से रखने की रणनीति बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>प्रशांत किशोर का चुनावी डेब्यू, बांकीपुर उपचुनाव से आजमाएंगे राजनीतिक किस्मत</title>
                                    <description><![CDATA[जन सुराज के संस्थापक ने बांकीपुर सीट से उम्मीदवारी का ऐलान किया, कहा- जनता भरोसा जताएगी तो अकेला विधायक भी 242 पर भारी पड़ेगा; 30 जुलाई को मतदान, 3 अगस्त को आएंगे नतीजे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/6a4a2db093b67/article-57931"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/prashant-kishor.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">बिहार की राजनीति में लंबे समय तक चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर अब पहली बार चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। उन्होंने पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घोषणा की कि वह आगामी बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपनी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे। इसके साथ ही उनकी सक्रिय चुनावी राजनीति की औपचारिक शुरुआत भी हो जाएगी। प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज पार्टी की कोर कमेटी ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर सहमति जताई है। चुनाव आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा के बाद पार्टी की बैठक में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की इच्छा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया है। </p>
<p style="text-align:justify;">उम्मीदवारी की घोषणा के दौरान प्रशांत किशोर ने बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं से समर्थन की अपील की। उन्होंने कहा कि बांकीपुर बिहार के सबसे शिक्षित और जागरूक विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। यहां के मतदाता हमेशा सोच-समझकर अपना प्रतिनिधि चुनते हैं। उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र की जनता उन्हें योग्य समझती है और भरोसा जताती है, तो वह विधानसभा में उनकी आवाज को मजबूती से उठाने का पूरा प्रयास करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि जनता विकास, शिक्षा, रोजगार और जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देने वाले उम्मीदवार का साथ देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि प्रशांत किशोर पिछले कई वर्षों से देशभर में विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति तैयार करते रहे हैं, लेकिन यह पहला अवसर होगा जब वह स्वयं किसी चुनाव में उम्मीदवार के रूप में जनता के बीच जाएंगे। प्रशांत किशोर ने पिछले कुछ वर्षों में बिहार के विभिन्न जिलों का व्यापक दौरा किया है। जन सुराज अभियान के माध्यम से उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया और उनकी समस्याओं को समझने का प्रयास किया। अब उसी अनुभव के आधार पर वे जनता के बीच चुनाव लड़ने जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया सोमवार से शुरू होगी। उम्मीदवार 13 जुलाई तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस सीट पर मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को कराई जाएगी। चुनाव परिणामों पर पूरे बिहार की नजर रहेगी, क्योंकि इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मुकाबले के रूप में देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई है। उनके इस्तीफे के बाद चुनाव आयोग ने यहां उपचुनाव कराने का फैसला लिया। यह सीट लंबे समय से बिहार की महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों में गिनी जाती है। राजधानी पटना का हिस्सा होने के कारण यहां राजनीतिक गतिविधियां हमेशा चर्चा में रहती हैं। इस बार भी कई प्रमुख दल इस सीट पर अपनी जीत सुनिश्चित करने की तैयारी में जुटे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बांकीपुर उपचुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय जनता पार्टी जल्द ही अपने उम्मीदवार की घोषणा कर सकती है। वहीं विपक्षी दल भी अपने प्रत्याशी के नाम पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव की पार्टी जनशक्ति जनता दल ने भी सामाजिक कार्यकर्ता वीणा मानवी को उम्मीदवार घोषित किया है। ऐसे में इस सीट पर बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह चुनाव जन सुराज पार्टी के लिए संगठनात्मक मजबूती दिखाने का भी अवसर होगा। पार्टी पिछले कुछ समय से बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां बढ़ा रही है और स्थानीय स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटी है। प्रशांत किशोर की उम्मीदवारी से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। जन सुराज के समर्थकों का मानना है कि उनके चुनाव लड़ने से पार्टी को नई पहचान मिलेगी और संगठन को और मजबूती मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयास करना है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत होती है और जनता का विश्वास ही किसी भी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान वे क्षेत्र के लोगों से सीधे संवाद करेंगे और विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार तथा बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं साझा करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव अब बिहार की सबसे चर्चित राजनीतिक घटनाओं में शामिल हो गया है। पहली बार चुनाव लड़ रहे प्रशांत किशोर के कारण इस सीट पर लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है। सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने स्तर पर चुनावी रणनीति तैयार कर रहे हैं। 30 जुलाई को होने वाला मतदान और 3 अगस्त को आने वाला परिणाम यह तय करेगा कि बांकीपुर की जनता किस उम्मीदवार पर भरोसा जताती है। फिलहाल सभी दल चुनाव प्रचार की तैयारियों में जुट गए हैं और आने वाले दिनों में यह मुकाबला और भी रोचक होने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Jul 2026 16:27:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राजस्थान को मिली तीन बड़ी विकास परियोजनाएं, PM मोदी बोले- ऊर्जा संकट से भारत मजबूती से उबरा</title>
                                    <description><![CDATA[बालोतरा में देश की आधुनिक रिफाइनरी राष्ट्र को समर्पित, जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का लोकार्पण और जयपुर मेट्रो फेज-2 की आधारशिला; प्रधानमंत्री ने ऊर्जा सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भर भारत पर रखा जोर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/rajasthan-got-three-big-development-projects-pm-modi-said/article-57869"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/narendra-modi-(4).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को राजस्थान को विकास और आधारभूत ढांचे से जुड़ी तीन बड़ी परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने बालोतरा के पचपदरा में देश की सबसे आधुनिक रिफाइनरी का उद्घाटन किया, जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण किया और जयपुर मेट्रो फेज-2 परियोजना की वर्चुअल आधारशिला रखी। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने वैश्विक परिस्थितियों के बीच उत्पन्न हुए बड़े ऊर्जा संकट का सफलतापूर्वक सामना किया और बेहतर प्रबंधन के कारण आम नागरिकों पर उसका बोझ कम पड़ने दिया।प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण पूरी दुनिया ऊर्जा संकट से जूझ रही थी। यदि समय पर प्रभावी रणनीति नहीं बनाई जाती, तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 2 हजार रुपये तक पहुंच सकती थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने समय पर निर्णय लेकर ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखा, जिसके कारण देश में गैस सिलेंडर की कीमतों को नियंत्रित रखने में सफलता मिली।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक संकट के दौरान भारत की विदेश नीति और कूटनीतिक संबंध देश के लिए बड़ी ताकत बनकर उभरे। उन्होंने बताया कि पहले भारत लगभग 25 से 26 देशों से ईंधन आयात करता था, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए यह संख्या बढ़ाकर करीब 40 देशों तक पहुंचाई गई। इससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित नहीं हुई और देश की जरूरतों को लगातार पूरा किया जा सका। उन्होंने कहा कि भारत ने कठिन समय में भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित कर दुनिया के सामने एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अप्रैल से जून के बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए तेल विपणन कंपनियों को लगभग 75 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि यह राशि इतनी बड़ी थी कि इससे एक नई रिफाइनरी का निर्माण किया जा सकता था। सरकार ने यह आर्थिक भार स्वयं वहन किया ताकि आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और महंगाई को नियंत्रित रखा जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के विकास का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पचपदरा रिफाइनरी केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नई गति देने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि है। इससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा, पेट्रोकेमिकल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और राज्य में औद्योगिक निवेश के नए अवसर विकसित होंगे। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राजस्थान को देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में और मजबूत बनाएगी। प्रधानमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा सरकार केवल परियोजनाओं की घोषणा नहीं करती, बल्कि उन्हें समय पर पूरा भी करती है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल शिलान्यास करना नहीं, बल्कि जनता को परियोजनाओं का लाभ पहुंचाना है। पचपदरा रिफाइनरी इसका बड़ा उदाहरण है, जो अनेक चुनौतियों के बावजूद निर्धारित दिशा में आगे बढ़ी और आज राष्ट्र को समर्पित की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने रिफाइनरी में कुछ महीने पहले हुई दुर्घटना का भी उल्लेख किया और कहा कि उस घटना के बाद परियोजना से जुड़े इंजीनियरों, विशेषज्ञों और कर्मचारियों ने तेज गति से काम कर सभी चुनौतियों को पार किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि नया भारत कठिन परिस्थितियों से घबराता नहीं, बल्कि चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता रखता है। यही आत्मविश्वास विकसित भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत है।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने राजस्थान और गुजरात के बीच नर्मदा जल परियोजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राजस्थान में वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं, तब दोनों राज्यों ने बिना किसी विवाद के नर्मदा का पानी राजस्थान तक पहुंचाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति क्षेत्रवाद या टकराव की नहीं, बल्कि सहयोग और राष्ट्रहित की राजनीति है। आज राजस्थान के अनेक गांवों तक नर्मदा का पानी पहुंच रहा है, जिससे लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले प्रधानमंत्री सुबह जोधपुर पहुंचे, जहां उन्होंने नए एयरपोर्ट टर्मिनल भवन का उद्घाटन किया। उन्होंने आधुनिक सुविधाओं से लैस टर्मिनल का निरीक्षण किया और क्षेत्रीय हवाई संपर्क को मजबूत बनाने वाली 'उड़ान-2.0' योजना की शुरुआत भी की। इसके बाद वे बालोतरा पहुंचे, जहां रिफाइनरी के कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर विशेषज्ञों से तकनीकी जानकारी ली। उन्होंने परियोजना की कार्यप्रणाली, उत्पादन क्षमता और भविष्य की योजनाओं की भी समीक्षा की। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रिफाइनरी परिसर में बनाए गए विशाल डोम में हजारों लोगों ने जनसभा में भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 15:20:38 +0530</pubDate>
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                <title>भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का लखनऊ में भव्य स्वागत, 18 किलोमीटर रोड शो से शक्ति प्रदर्शन</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत, 42 से अधिक स्वागत मंचों पर होगा अभिनंदन, पार्टी मुख्यालय में संगठनात्मक बैठकों का भी कार्यक्रम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/6a48bac589b27/article-57864"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/nitin-naveen.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के लखनऊ आगमन पर शनिवार को राजधानी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई। चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। एयरपोर्ट से भाजपा प्रदेश मुख्यालय तक करीब 18 किलोमीटर लंबे रोड शो का आयोजन किया गया, जिसे पार्टी के लिए संगठनात्मक शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। पूरे मार्ग पर हजारों कार्यकर्ता राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए पहले से मौजूद रहे। राजधानी की प्रमुख सड़कों को पार्टी के झंडों, बैनरों और पोस्टरों से सजाया गया, जबकि विभिन्न सामाजिक और व्यापारिक संगठनों ने भी जगह-जगह स्वागत मंच तैयार किए।</p>
<p style="text-align:justify;">सुबह से ही एयरपोर्ट परिसर और रोड शो के पूरे मार्ग पर कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गई थीं। जैसे ही उनका काफिला एयरपोर्ट से निकला, कार्यकर्ताओं ने फूल बरसाकर और जयकारों के साथ उनका अभिनंदन किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार रोड शो के दौरान 42 से अधिक स्थानों पर स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए गए, जहां अलग-अलग संगठनों और पार्टी इकाइयों ने उन्हें सम्मानित किया। पूरे मार्ग पर ढोल-नगाड़ों, पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और फूलों की वर्षा के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा संगठन ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियां की थीं। पार्टी के अनुसार स्वागत व्यवस्था में 50 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां तय की गई थीं। राजधानी लखनऊ में एक लाख से अधिक पोस्टर और बैनर लगाए गए, जिनमें राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत संदेश के साथ पार्टी के विभिन्न अभियान और उपलब्धियां भी प्रदर्शित की गईं। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भी पूरे मार्ग पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया था, ताकि रोड शो के दौरान यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा केवल औपचारिक स्वागत तक सीमित नहीं है, बल्कि संगठन को आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी मुख्यालय पहुंचने के बाद नितिन नवीन प्रदेश पदाधिकारियों, क्षेत्रीय अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों के साथ विस्तृत बैठक करेंगे। इस बैठक में संगठन विस्तार, बूथ स्तर की मजबूती, सदस्यता अभियान और आगामी चुनावी रणनीति जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा नेतृत्व लगातार संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर जोर दे रहा है और इसी क्रम में राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा अहम माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिनभर के व्यस्त कार्यक्रम के बीच राष्ट्रीय अध्यक्ष शाम करीब चार बजे हनुमान सेतु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना भी करेंगे। भाजपा नेताओं के अनुसार धार्मिक स्थलों पर दर्शन करना उनके कार्यक्रम का हिस्सा है। मंदिर में दर्शन के बाद वह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा सांसदों और विधायकों के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान प्रदेश सरकार की योजनाओं, संगठन और सरकार के बीच समन्वय तथा आगामी कार्यक्रमों को लेकर भी चर्चा हो सकती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष का रात्रि भोजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ निर्धारित है। इस मुलाकात को भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच संगठन और सरकार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और उत्तर प्रदेश संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में यह बैठक अहम मानी जा रही है। लखनऊ में आयोजित इस भव्य स्वागत कार्यक्रम ने पार्टी कार्यकर्ताओं में भी नया उत्साह भरने का काम किया। रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता, महिला मोर्चा, किसान मोर्चा, व्यापारी संगठन और पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों के सदस्य शामिल हुए। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया, जिससे पूरे आयोजन को उत्सव जैसा स्वरूप मिला। पार्टी नेताओं का कहना है कि कार्यकर्ताओं का यह उत्साह संगठन की मजबूती और जनसमर्थन को दर्शाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:36 +0530</pubDate>
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