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                <title>Assam - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Assam RSS Feed</description>
                
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                <title>कामाख्या देवी मंदिर पहुंचीं उर्फी जावेद, पारंपरिक लुक में किए दर्शन-पूजन</title>
                                    <description><![CDATA[गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर में उर्फी जावेद ने पारंपरिक वेशभूषा में पूजा-अर्चना की। हाल ही में धर्म परिवर्तन और नाम बदलने की अफवाहों को उन्होंने पूरी तरह खारिज किया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/bollywood/urfi-javed-reached-kamakhya-devi-temple-and-did-darshan-and/article-57778"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/urfi-javed.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और अभिनेत्री उर्फी जावेद एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार वजह उनके फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि उनका धार्मिक दौरा है। उर्फी हाल ही में असम के गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर पहुंचीं, जहां उन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ मां कामाख्या के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इस दौरान उनका पारंपरिक भारतीय परिधान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। आमतौर पर अपने बोल्ड और अलग अंदाज के फैशन के लिए सुर्खियों में रहने वाली उर्फी इस बार बेहद सादगीपूर्ण रूप में नजर आईं। उन्होंने पीले रंग का सूट-सलवार पहना था और सिर पर चुनरी ओढ़ रखी थी। मंदिर परिसर में दर्शन के बाद उन्होंने माथे पर सिंदूर और तिलक भी लगाया, जिसकी तस्वीरें उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा कीं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उर्फी जावेद ने कामाख्या देवी मंदिर यात्रा की कई तस्वीरें इंस्टाग्राम पर पोस्ट कीं। तस्वीरों में वह मंदिर परिसर में श्रद्धा के साथ पूजा करती दिखाई दे रही हैं। उन्होंने पोस्ट के साथ लिखा कि उन्हें गुवाहाटी में स्थित कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। उनकी पोस्ट सामने आते ही लाखों प्रशंसकों ने तस्वीरों पर प्रतिक्रिया दी। कई लोगों ने उनके पारंपरिक रूप की सराहना की, जबकि कुछ यूजर्स ने उनके पुराने बयानों को लेकर सवाल भी उठाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">उर्फी जावेद का यह लुक उनके सामान्य सार्वजनिक अंदाज से बिल्कुल अलग था। पीले रंग के पारंपरिक परिधान, सिर पर दुपट्टा और माथे पर तिलक के साथ उनका शांत और श्रद्धापूर्ण रूप सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। मनोरंजन जगत से जुड़े कई लोगों ने भी उनकी तस्वीरों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। फैशन के लिए पहचान बनाने वाली उर्फी का यह धार्मिक और सादगीपूर्ण रूप उनके प्रशंसकों के लिए अलग अनुभव रहा।</p>
<p class="isSelectedEnd">मंदिर दर्शन के बाद उर्फी जावेद के पुराने इंटरव्यू भी सोशल मीडिया पर फिर से वायरल होने लगे। उन्होंने पहले कई अवसरों पर खुद को नास्तिक बताया था। उर्फी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनका जन्म मुस्लिम परिवार में हुआ, लेकिन वे किसी विशेष धर्म का पालन नहीं करतीं। उन्होंने यह भी कहा था कि वह किसी भी धर्म में विश्वास नहीं रखतीं और अपने जीवन को व्यक्तिगत सोच और मान्यताओं के आधार पर जीती हैं। ऐसे में कामाख्या मंदिर में उनकी मौजूदगी के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि धार्मिक स्थल पर जाना या पूजा करना किसी व्यक्ति की निजी आस्था और व्यक्तिगत निर्णय हो सकता है। उर्फी ने अपनी पोस्ट में भी केवल मंदिर दर्शन की जानकारी साझा की और किसी धार्मिक या वैचारिक टिप्पणी से परहेज किया।</p>
<p class="isSelectedEnd">कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया था कि उर्फी जावेद ने धर्म परिवर्तन कर लिया है और उन्होंने अपना नाम बदलकर "रीता भारद्वाज" रख लिया है। यह दावा तेजी से वायरल हुआ था। इन खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उर्फी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि यह पूरी तरह झूठी और भ्रामक जानकारी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर संबंधित दावों को फर्जी बताते हुए नाराजगी जताई थी और कहा था कि बिना किसी तथ्य के इस तरह की खबरें फैलाना गलत है। उन्होंने साफ किया था कि उन्होंने न तो अपना धर्म बदला है और न ही अपना नाम। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील भी की थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित कामाख्या देवी मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि और अंबुबाची मेले के दौरान यहां बड़ी संख्या में भक्तों का आगमन होता है। यह मंदिर केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण भी प्रसिद्ध है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां मां कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">उर्फी जावेद सोशल मीडिया पर सबसे सक्रिय और चर्चित सेलिब्रिटीज में शामिल हैं। उनके फैशन प्रयोग अक्सर इंटरनेट पर वायरल होते हैं। कई बार उनके पहनावे को लेकर बहस भी छिड़ जाती है, जबकि उनके समर्थक इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताते हैं। इस बार हालांकि उनकी चर्चा फैशन नहीं बल्कि धार्मिक यात्रा को लेकर रही। पारंपरिक वेशभूषा में उनकी तस्वीरों को लाखों लोगों ने पसंद किया और कई यूजर्स ने इसे उनके व्यक्तित्व का अलग पहलू बताया।</p>
<p class="isSelectedEnd">उर्फी जावेद ने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन धारावाहिकों से की थी। उन्होंने कई लोकप्रिय टीवी शो में अभिनय किया। बाद में रियलिटी शोज और सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें व्यापक लोकप्रियता मिली। हाल के वर्षों में वे कई डिजिटल और रियलिटी प्रोजेक्ट्स का हिस्सा रही हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उनकी जिंदगी पर आधारित शो भी रिलीज हो चुका है। इसके अलावा विभिन्न मनोरंजन कार्यक्रमों में उनकी लगातार मौजूदगी बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बालीवुड</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 16:58:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिमंत सरकार का बड़ा फैसला: असम में UCC लागू, 26 मई को विधानसभा में पेश होगा विधेयक</title>
                                    <description><![CDATA[असम कैबिनेट ने यूसीसी लागू करने को मंजूरी दी। आदिवासी समुदाय को बाहर रखा गया है। 26 मई को विधानसभा में विधेयक पेश होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-decision-of-himanta-government-ucc-implemented-in-assam-bill/article-53343"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-14t143650.510.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम में यूसीसी यानी समान नागरिक संहिता को लेकर एक अहम राजनीतिक और प्रशासनिक फैसला बुधवार को आया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब राज्य मंत्रिमंडल ने इसे लागू करने की मंजूरी दे दी। यह फैसला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की अध्यक्षता में हुई दूसरी कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया। बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुद मुख्यमंत्री ने इसकी जानकारी दी और बताया कि यूसीसी विधेयक </span>26<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को नई विधानसभा में पेश किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सरकार इस निर्णय को अपने चुनावी वादों से जोड़कर देख रही है और इसे एक "महत्वपूर्ण कदम" बताया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि इस फैसले को लेकर राजनीतिक माहौल भी गर्म होता दिख रहा है। सबसे खास बात यह है कि असम यूसीसी के दायरे से आदिवासी समुदाय को पूरी तरह बाहर रखा गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे सरकार ने स्थानीय सामाजिक संरचना और परंपराओं का ध्यान रखते हुए लिया गया निर्णय बताया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कैबिनेट फैसले के बाद जो जानकारी मिली है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसके मुताबिक यूसीसी का दायरा मुख्य रूप से विवाह</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तलाक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उत्तराधिकार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सहजीवन यानी लिव-इन रिलेशन और उनके अनिवार्य पंजीकरण तक सीमित रहेगा। सरकार का कहना है कि इससे कानून में एकरूपता आएगी और व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े मामलों में स्पष्टता बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उत्तराखंड</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गोवा और गुजरात जैसे राज्यों में यूसीसी को पहले से ही अलग-अलग रूपों में लागू किया जा चुका है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और असम का मॉडल उनके मुकाबले अलग होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि इसे राज्य की जरूरतों और सामाजिक विविधता के हिसाब से तैयार किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर यह भी कहा गया है कि असम में रहने वाले लोगों की परंपराएं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">रीति-रिवाज और स्थानीय सामाजिक ढांचा काफी विविध है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसलिए सरकार ने आदिवासी समुदाय को इस कानून से बाहर रखने का फैसला किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि उनकी पहचान और सांस्कृतिक अधिकारों पर कोई असर न पड़े। हालांकि</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस पूरे ढांचे को लेकर कई तकनीकी और कानूनी पहलुओं पर चर्चा अभी भी आगे जारी रह सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">दूसरी तरफ</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">इस फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने इस कदम की आलोचना की है। कांग्रेस नेता गौरव गोगोई</span>i <span lang="hi" xml:lang="hi">का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी समान नागरिक संहिता के नाम पर समाज में एकरूपता थोपने की कोशिश कर रही है और इसके जरिए विभाजनकारी राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उनका कहना है कि यूसीसी का इस्तेमाल सभी नागरिकों को समान अधिकार देने के बजाय राजनीतिक एजेंडे के रूप में किया जा रहा है। कांग्रेस का यह भी कहना है कि सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि अलग-अलग समुदायों की परंपराओं का ध्यान रखने के बजाय एक समान कानून थोपने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल सरकार अपने फैसले को ऐतिहासिक और सुधारात्मक बता रही है जबकि विपक्ष इसे सामाजिक संतुलन के लिए चुनौतीपूर्ण मान रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 May 2026 14:50:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिमंत सरमा दूसरी बार बने असम के CM, जनता के बीच ‘मामा’ नाम से क्यों हैं सबसे ज्यादा मशहूर</title>
                                    <description><![CDATA[असम CM हिमंत बिस्वा सरमा को ‘मामा’ नाम कैसे मिला? जानें इसकी दिलचस्प कहानी और उनकी लोकप्रियता की वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/himanta-sarma-became-the-cm-of-assam-for-the-second/article-53189"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t135514.582.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है क्योंकि हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NDA <span lang="hi" xml:lang="hi">की प्रचंड जीत के बाद जब हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। खास बात यह है कि राज्य के कई हिस्सों में लोग उन्हें नाम से नहीं बल्कि प्यार से </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर बुलाते हैं। असम में उनकी लोकप्रियता इस हद तक पहुंच चुकी है कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उन्हें इसी नाम से पहचानते हैं। जालुकबाड़ी सीट से भी उन्होंने एक बार फिर करीब </span>89<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिमंत बिस्वा सरमा का यह </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">वाला नाम यूं ही नहीं पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसकी कहानी काफी दिलचस्प मानी जाती है। बताया जाता है कि इसकी शुरुआत असम के कुछ स्कूलों और बच्चों के बीच बातचीत से हुई थी। शुरुआती दौर में माजुली इलाके के कुछ बच्चों ने उन्हें मजाकिया और अपनापन जताते हुए </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहना शुरू किया। धीरे-धीरे यह नाम सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे राज्य में फैल गया। उस समय शिक्षा मंत्री रहते हुए और बाद में मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए साइकिल जैसी योजनाओं पर काम किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह जुड़ाव और बढ़ गया। एक चुनावी रैली के दौरान जब उन्होंने बच्चों से सीधे पूछा कि क्या उन्हें भी साइकिल चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जवाब में बच्चों की खुशी और उत्साह ने इस नाम को और मजबूती दे दी। इसके बाद कई जगहों पर बच्चे उनसे पूछने लगे</span>—“<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा हमें साइकिल कब मिलेगी</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं से यह उपनाम आम लोगों की जुबान पर चढ़ गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समय के साथ उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनती गई जो सीधे जनता से जुड़ता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना औपचारिक दूरी के लोगों की बात सुनता है और समाधान की कोशिश करता है। यही वजह रही कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द सिर्फ एक उपनाम नहीं रहा बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया। असम के कई वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं जिनमें बच्चे उन्हें गले लगाते और </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर पुकारते नजर आते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की जनसंपर्क शैली ने उनकी लोकप्रियता को जमीन पर और मजबूत किया है। कई जगहों पर सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी उन्हें इसी नाम से संबोधित करने लगे और </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा की गारंटी</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे नारे तक चल पड़े।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक दृष्टि से देखें तो हिमंत बिस्वा सरमा का यह सफर काफी अहम माना जाता है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2015 <span lang="hi" xml:lang="hi">में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने असम की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया। </span>2016 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भाजपा सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम रही और बाद में </span>2021 <span lang="hi" xml:lang="hi">में वह खुद मुख्यमंत्री बने। विश्लेषकों का कहना है कि उनकी </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">वाली छवि ने उन्हें एक सख्त प्रशासक के साथ-साथ एक पारिवारिक और सहज नेता के रूप में स्थापित किया है। भारतीय राजनीति में </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दीदी</span>’, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">अम्मा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दादा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे उपनाम पहले से ही लोकप्रिय रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब असम में </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का नाम भी इसी परंपरा में जुड़ गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जनता और नेता के बीच भावनात्मक रिश्ते को दर्शाता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>हिमंता बिस्वा सरमा बने बीजेपी विधायक दल के नेता, इस दिन लेंगे मुख्यमंत्री पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[असम में हिमंता बिस्वा सरमा को बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया। वे 12 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। पीएम मोदी भी समारोह में शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/himanta-biswa-sarma-becomes-leader-of-bjp-legislature-party-and/article-53051"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-10t133744.166.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम में राजनीतिक हलचल के बीच एक बड़ा फैसला सामने आया है। बीजेपी ने डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा को सर्वसम्मति से विधायक दल और एनडीए विधायक दल का नेता चुन लिया है। यानी साफ हो गया है कि हिमंता बिस्वा सरमा एक बार फिर असम की सत्ता संभालने जा रहे हैं। पार्टी के अंदर हुई अहम बैठक में उनके नाम पर बिना किसी विरोध के मुहर लगी। अब वे 12 मई को असम के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने की भी पुष्टि की गई है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे यह कार्यक्रम और ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक बीजेपी विधायक दल की यह बैठक काफी अहम रही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसमें पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। बैठक में औपचारिक प्रक्रिया के बाद नेता का चुनाव हुआ और सभी विधायकों ने एकमत होकर हिमंता बिस्वा सरमा के नाम का समर्थन किया। बताया जा रहा है कि 6 मई को उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन फिलहाल वे कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब नई सरकार के गठन के साथ उनका दोबारा सीएम बनना लगभग तय हो गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और पार्टी के भीतर भी इसे निरंतरता का फैसला माना जा रहा है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में इस बार बीजेपी गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन किया है। बीजेपी ने अकेले 82 सीटों पर जीत दर्ज की है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि सहयोगी दल असम गण परिषद (</span>AGP) <span lang="hi" xml:lang="hi">और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (</span>BPF) <span lang="hi" xml:lang="hi">ने 10-10 सीटें हासिल की हैं। कुल मिलाकर गठबंधन के पास 102 सीटें हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जनादेश सरकार की नीतियों और संगठन की जमीनी पकड़ को दर्शाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और इसी भरोसे के साथ पार्टी ने नेतृत्व में कोई बदलाव न करते हुए फिर से सरमा पर भरोसा जताया है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिमंता बिस्वा सरमा का सियासी सफर भी काफी दिलचस्प और उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। उन्होंने 90 के दशक में ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">AASU) <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए राजनीति में कदम रखा था और बाद में कांग्रेस से जुड़कर मुख्यधारा की राजनीति में आए। 2001 में जालुकबारी सीट से पहली बार विधायक बनने के बाद वे पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेहद करीबी माने जाते थे। स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे अहम विभागों में काम करते हुए उन्होंने प्रशासनिक पकड़ मजबूत की</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन 2015 में कांग्रेस नेतृत्व से मतभेद के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी और बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा और वे नॉर्थ ईस्ट की राजनीति में एक मजबूत रणनीतिक चेहरा बनकर उभरे।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बीजेपी में आने के बाद उन्हें </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NEDA <span lang="hi" xml:lang="hi">का संयोजक बनाया गया और उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों में पार्टी विस्तार में अहम भूमिका निभाई। 2016 में असम में पहली बार बीजेपी की सरकार बनने में उनका बड़ा योगदान रहा। इसके बाद 2021 के चुनाव में जब पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला तो उन्हें मुख्यमंत्री बनाया गया। अब एक बार फिर हिमंता बिस्वा सरमा को नेतृत्व सौंपा जाना यह संकेत देता है कि पार्टी उनके कामकाज और संगठनात्मक क्षमता पर पूरा भरोसा जता रही है। 12 मई को होने वाला शपथ ग्रहण समारोह इसी राजनीतिक यात्रा का अगला बड़ा अध्याय माना जा रहा है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 May 2026 13:49:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा ने TMC पर चुनाव हाईजैक का आरोप, असम में कांग्रेस-AIDUF झड़पें; बंगाल में वोटर्स को धमकाने की शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[पांच राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज; राहुल गांधी केरल पहुंचे, तमिलनाडु में DMK घोषणापत्र चर्चा में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjp-accuses-tmc-of-election-hijacking-congress-aiduf-clashes-in-assam/article-49558"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/tmc,-bjp,-assam,-.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल में भाजपा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC चुनाव को हाईजैक कर रही है। भाजपा प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर शिकायत की कि राज्य में टीएमसी घर-घर जाकर मतदाताओं को डराकर धमका रही है। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि प्रशासनिक ढांचा, वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर निचले स्तर तक, TMC के नियंत्रण में काम कर रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने की मांग की।</p>
<p>उधर, असम के श्रीभूमि में कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIDUF) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। यह घटना स्थानीय चुनाव प्रचार के दौरान हुई। AIDUF असम में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और इसके समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव से इलाके में तनाव बढ़ गया।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) के बाद चौथी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने नाम जोड़े या हटाए गए। पहले प्रकाशित अंतिम सूची में लगभग 60 लाख नाम “निर्णयाधीन” के रूप में चिह्नित किए गए थे।</p>
<p>तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई के कोलाथुर सीट से नामांकन दाखिल किया। DMK का घोषणापत्र महिलाओं और छात्रों पर केंद्रित है। इसके तहत इनकम टैक्स दायरे से बाहर परिवारों की महिला मुखिया को ₹8,000 का कूपन मिलेगा, जिससे वे घरेलू उपकरण खरीद सकेंगी। DMK सांसद कनिमोझी ने कहा कि यह फ्रीबीज नहीं बल्कि सामाजिक निवेश है, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार को दिल्ली से केरल के लिए रवाना हुए। वे चुनाव प्रचार के तहत मीटिंग करेंगे और जनसभाओं को संबोधित करेंगे। वहीं, केरल में 85 वर्ष से अधिक उम्र और दिव्यांग मतदाताओं के लिए होम वोटिंग आज से शुरू हो गई। कुल 2.07 लाख से अधिक मतदाताओं ने इस सुविधा का लाभ लेने का विकल्प चुना।</p>
<p>युवा मतदाता वोटिंग को लेकर असमंजस में हैं। कई युवा NOTA विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जबकि कुछ सोचते हैं कि वोट देने से बदलाव नहीं आएगा। चुनाव आयोग ने ‘My Vote, My Strength’ अभियान शुरू किया है, ताकि युवाओं को मतदान के लिए जागरूक किया जा सके।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में BJP और कांग्रेस उम्मीदवारों ने भी आरोप लगाए कि राज्य में योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुँच रहा और सरकार भत्तों पर निर्भर रही है। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रोड शो के दौरान जनता का आशीर्वाद मिलने की जानकारी दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:11:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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