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                <title>Congress - दैनिक जागरण</title>
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                <title>दतिया उपचुनाव में BJP का बड़ा सरप्राइज, आशुतोष तिवारी को मिला टिकट; नरोत्तम मिश्रा की दावेदारी खत्म</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा ने उम्मीदवार घोषित किया, चुनावी तैयारियों में जुटे पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा को नहीं मिला मौका; कांग्रेस और अन्य दल भी तेज कर रहे प्रचार अभियान।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjps-big-surprise-ashutosh-tiwari-got-ticket-in-datia-by-election/article-58439"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">दतिया विधानसभा उपचुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने लंबे इंतजार के बाद अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने का फैसला किया है। इस घोषणा के साथ ही दतिया की राजनीति में कई दिनों से चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। खास बात यह रही कि पूर्व गृहमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे मजबूत दावेदारों में माना जा रहा था। उन्होंने चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं, कई जनसभाएं कर चुके थे और नामांकन पत्र भी खरीद लिया था, लेकिन अंतिम समय में पार्टी नेतृत्व ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया। भाजपा ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब दतिया उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेजी से बढ़ चुकी हैं। उम्मीदवार घोषित होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई दिया और पार्टी ने चुनाव प्रचार को नई गति देने की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन अब आशुतोष तिवारी को लेकर क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने की रणनीति बना रहा है। आशुतोष तिवारी भाजपा संगठन के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने वर्षों तक संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाई हैं। वे भाजपा के संभागीय संगठन मंत्री भी रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था, जहां उन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। संगठन और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए पार्टी ने उन्हें इस महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए उपयुक्त उम्मीदवार माना है। हालांकि, इस फैसले ने पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को जरूर चौंकाया है। चुनाव की घोषणा के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया क्षेत्र में सक्रिय थे। उन्होंने कई सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया और लोगों से संवाद स्थापित करने का प्रयास किया। उनकी सभाओं में बड़ी संख्या में समर्थक भी पहुंचे थे, जिससे यह माना जा रहा था कि पार्टी एक बार फिर उन पर भरोसा जता सकती है।</p>
<p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-07/bjp-candidate.jpg" alt="BJP Candidate" width="1366" height="1556"></img></p>
<p>चुनावी अभियान के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने अपने संबोधनों में जनता से भावनात्मक अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि यदि उनसे पूर्व में कोई गलती हुई हो तो लोग उन्हें क्षमा करें। उन्होंने अपने व्यवहार में बदलाव लाने की बात भी कही थी और भरोसा दिलाया था कि भविष्य में जनता की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरा उतरने का प्रयास करेंगे। उनकी यह अपील राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा का विषय बनी रही। इसके अलावा एक अन्य जनसभा में उन्होंने कांग्रेस के आरोपों का भी जवाब दिया था। उन्होंने विपक्ष द्वारा लगाए गए खरीद-फरोख्त के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि भाजपा सिद्धांतों पर चलने वाली पार्टी है और बेबुनियाद आरोपों का कोई आधार नहीं है। इन बयानों के जरिए वे चुनावी माहौल को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहे थे। भाजपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब चुनावी मुकाबला और रोचक हो गया है। कांग्रेस भी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है। दूसरी ओर अन्य राजनीतिक दल और निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी समीकरणों पर नजर बनाए हुए हैं। दतिया सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस बीच कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की कानूनी लड़ाई भी चर्चा में रही। उनकी ओर से दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। इसके बाद कांग्रेस के सामने भी उम्मीदवार चयन को लेकर नई परिस्थितियां बनीं। राजेंद्र भारती ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि पार्टी चाहे तो उनके परिवार के बजाय किसी अन्य नेता को उम्मीदवार बनाया जा सकता है और वे पूरी निष्ठा के साथ पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी का समर्थन करेंगे। दतिया उपचुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया भी जारी है। अब तक कई उम्मीदवार नामांकन पत्र खरीद चुके हैं और कुछ ने अपने नामांकन दाखिल भी कर दिए हैं। चुनाव आयोग की तय समय-सीमा के अनुसार आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की अंतिम तस्वीर साफ हो जाएगी। इसके बाद सभी प्रमुख राजनीतिक दल प्रचार अभियान को और तेज करेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 18:53:32 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भोपाल मास्टर प्लान पर दिशा बैठक में बवाल, विधायक और जनपद अध्यक्ष आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[मास्टर प्लान लागू करने को लेकर कांग्रेस विधायकों और जनपद अध्यक्ष के बीच गरमागरम बहस, भाजपा विधायक ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना पर उठाए सवाल; सांसद ने मुख्यमंत्री से जल्द चर्चा का भरोसा दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/ruckus-in-disha-meeting-on-bhopal-master-plan-mla-and/article-58424"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/bhopal-master-plan.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">भोपाल कलेक्ट्रेट में शुक्रवार को आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक उस समय विवादों में आ गई, जब शहर के मास्टर प्लान को लेकर जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस छिड़ गई। बैठक में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, विधायक आतिफ अकील और फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत के बीच हुई नोकझोंक ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की ओर उंगली उठाकर तीखी टिप्पणियां कीं और कुछ समय के लिए बैठक का माहौल पूरी तरह गरमा गया। बैठक के दौरान शहर के नए मास्टर प्लान को लागू करने में हो रही देरी और विकास कार्यों को लेकर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने मास्टर प्लान की मौजूदा स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शहर का विकास इसी तरह चलता रहा तो भोपाल का संतुलित विकास संभव नहीं हो पाएगा। उनका कहना था कि लंबे समय से मास्टर प्लान लंबित होने के कारण शहर में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और आम लोगों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बीच फंदा जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रमोद सिंह राजपूत ने चर्चा के दौरान हस्तक्षेप किया। उनके बीच में बोलने और उंगली दिखाकर अपनी बात रखने पर विधायक आरिफ मसूद नाराज हो गए। उन्होंने कहा कि वह सांसद से चर्चा कर रहे हैं और बीच में इस तरह बोलना उचित नहीं है। मसूद ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा मास्टर प्लान किस काम का है, जो वर्षों बाद भी लागू नहीं हो पा रहा। इस पर प्रमोद सिंह राजपूत ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक को "औकात में रहकर बात करने" की नसीहत दी। दोनों नेताओं के बीच करीब दस मिनट तक तीखी बहस चलती रही। बैठक में मौजूद अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी माहौल शांत कराने का प्रयास करते रहे, लेकिन कुछ समय तक दोनों पक्ष अपने-अपने तर्कों पर अड़े रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">विवाद के दौरान कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि वह केवल सांसद से संवाद कर रहे थे और जनपद अध्यक्ष का इस तरह बीच में हस्तक्षेप करना उचित नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्यशैली से गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा प्रभावित होती है। विधायक आतिफ अकील भी इस मुद्दे पर मसूद के समर्थन में दिखाई दिए। बाद में दोनों विधायक बैठक से उठकर बाहर चले गए। बैठक में केवल मास्टर प्लान ही नहीं बल्कि स्मार्ट सिटी परियोजना को लेकर भी कई जनप्रतिनिधियों ने अधिकारियों को कठघरे में खड़ा किया। भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस योजना के नाम पर भोपाल की मूलभूत व्यवस्थाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी-बड़ी इमारतें तो बना दी गईं, लेकिन उनमें आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। कई स्थानों पर लिफ्ट खराब रहती हैं, सामुदायिक भवनों की कमी है और सार्वजनिक स्थानों के विकास पर भी अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्मार्ट सिटी क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक प्लॉटों को छोटे हिस्सों में विभाजित किया जाए, ताकि अधिक निवेशक आगे आएं और परियोजना की आय बढ़ सके। उनका मानना था कि वर्तमान स्वरूप में बड़े प्लॉटों की बिक्री नहीं हो पा रही है, जिससे परियोजना की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह रही कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी की बातों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यदि वरिष्ठ जनप्रतिनिधि इस तरह की समस्याएं उठा रहे हैं तो निश्चित रूप से इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया कि स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़ी समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए। बैठक में भोपाल की महापौर मालती राय ने भी स्मार्ट सिटी परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शहर में स्मार्ट सिटी के तहत लगाई गई कई स्ट्रीट लाइटें समय पर ठीक नहीं हो पातीं, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से व्यवस्था में सुधार करने की आवश्यकता बताई। स्मार्ट सिटी बोर्ड के चेयरमैन एवं कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बैठक में भरोसा दिलाया कि सभी शिकायतों और समस्याओं की अलग-अलग समीक्षा कर उनका समाधान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए सभी मुद्दों को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक की अध्यक्षता कर रहे सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल के सुनियोजित और दीर्घकालिक विकास के लिए मास्टर प्लान का जल्द लागू होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वे जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे और मास्टर प्लान को शीघ्र लागू कराने का आग्रह करेंगे। सांसद ने यह भी कहा कि स्मार्ट सिटी परियोजना में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी दिखाई देती है। इसी कारण कई विकास कार्यों में टकराव की स्थिति बन रही है। उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे प्रोजेक्ट के लिए एक नोडल एजेंसी बनाई जाए, जो सभी विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर सके। बैठक के दौरान भोपाल की झीलों और जलाशयों के संरक्षण के लिए "भोजपाल वेटलैंड प्राधिकरण" गठित करने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। प्रस्ताव में संभागायुक्त को इसका अध्यक्ष बनाने तथा भोपाल और सीहोर के कलेक्टर, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को सदस्य बनाने की सिफारिश की गई। इस प्रस्ताव को राज्य सरकार के पास भेजा जाएगा। साथ ही भोपाल को आधिकारिक रूप से वेटलैंड सिटी घोषित करने की मांग भी रखी गई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:11:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राकेश यादव ने बदला राजनीतिक ठिकाना, कांग्रेस को दिया बड़ा झटका</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस प्रवक्ता और प्रदेश महासचिव राकेश सिंह यादव ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाने के बाद भाजपा का दामन थामा। उनके फैसले से प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों पर चर्चा तेज हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhopal/rakesh-yadav-changed-political-destination-gave-a-big-blow-to/article-58371"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/madhya-pradesh-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला, जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव और पूर्व प्रवक्ता राकेश सिंह यादव भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। राजधानी भोपाल स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। राकेश यादव के भाजपा में शामिल होने को प्रदेश की राजनीति का अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। राकेश सिंह यादव लंबे समय तक कांग्रेस संगठन से जुड़े रहे और विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। प्रदेश महासचिव और प्रवक्ता के रूप में उन्होंने संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई। हालांकि पिछले कुछ समय से वे कांग्रेस नेतृत्व की कार्यप्रणाली को लेकर असहमति जता रहे थे। अंततः उन्होंने पार्टी से अलग होने का निर्णय लिया और अब भारतीय जनता पार्टी के साथ अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद राकेश यादव ने कहा कि उन्होंने प्रदेश और देश के विकास की सोच को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। उनके अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने बीते वर्षों में विकास, सुशासन और जनकल्याण को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीन पर उतारा है। उन्होंने कहा कि वे अब भाजपा के कार्यकर्ता के रूप में संगठन को मजबूत बनाने और आम जनता के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं, गरीब कल्याण योजनाओं, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में हुए कार्यों से प्रेरित होकर उन्होंने भाजपा से जुड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने विश्वास जताया कि भाजपा के मंच से उन्हें समाज और प्रदेश की जनता के लिए अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने का अवसर मिलेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राकेश यादव का स्वागत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी राष्ट्र प्रथम की विचारधारा पर काम करने वाला संगठन है। उन्होंने कहा कि पार्टी में प्रत्येक कार्यकर्ता को समान सम्मान और आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राकेश यादव का राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक समझ पार्टी के लिए उपयोगी साबित होगी और उनके आने से संगठन को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा लगातार अपने संगठन का विस्तार कर रही है और समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े अनुभवी लोग पार्टी की नीतियों और नेतृत्व से प्रभावित होकर जुड़ रहे हैं। पार्टी का उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग तक विकास की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। ऐसे में अनुभवी नेताओं का पार्टी में स्वागत किया जाता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">किसी भी वरिष्ठ नेता का एक दल छोड़कर दूसरे दल में शामिल होना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे फैसलों का असर राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक रणनीतियों पर भी देखने को मिलता है। राकेश यादव के भाजपा में शामिल होने से प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं और आने वाले समय में उनकी भूमिका पर सभी की नजर रहेगी। मध्य प्रदेश में भाजपा लगातार अपने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने के अभियान में जुटी हुई है। पार्टी सदस्यता अभियान, संगठन विस्तार और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लगातार नए लोगों को जोड़ रही है। ऐसे समय में राकेश यादव जैसे अनुभवी नेता का पार्टी से जुड़ना संगठन के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                            <category>भोपाल</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jul 2026 11:15:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तीन कथित घोटालों के आरोपी रामगोपाल अग्रवाल ने किया सरेंडर, EOW की पूछताछ शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[पूर्व कांग्रेस कोषाध्यक्ष पर शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच; जब्त डायरी में कथित वित्तीय लेन-देन की एंट्री मिलने के बाद कार्रवाई तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/ramgopal-aggarwal-accused-of-three-alleged-scams-surrenders-eow-inquiry/article-58276"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/ramgopal-agrawal.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग घोटालों की जांच में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल ने करीब तीन साल बाद रायपुर स्थित आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) के कार्यालय पहुंचकर सरेंडर कर दिया। इसके बाद EOW ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का कहना है कि उनसे कथित वित्तीय लेन-देन, जब्त दस्तावेजों और विभिन्न मामलों में सामने आए तथ्यों के आधार पर पूछताछ की जा रही है। यह मामला उन तीन प्रमुख आर्थिक मामलों से जुड़ा है, जिनकी जांच पिछले कुछ वर्षों से केंद्रीय और राज्य की जांच एजेंसियां कर रही हैं। EOW के अनुसार, कोल लेवी मामले की जांच के दौरान कारोबारी सूर्यकांत तिवारी से जब्त की गई एक डायरी में कथित तौर पर कांग्रेस भवन के नाम पर करोड़ों रुपये की एंट्रियां मिली थीं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन एंट्रियों के आधार पर यह संदेह पैदा हुआ कि कथित रकम रामगोपाल अग्रवाल के माध्यम से कांग्रेस भवन तक पहुंची। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि धन का स्रोत क्या था, राशि किसने उपलब्ध कराई, किसने उसे प्राप्त किया और उसका उपयोग किन उद्देश्यों के लिए किया गया। इन सभी बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि कथित शराब घोटाले में आरोपी अनवर ढेबर और उससे जुड़े लोगों ने करोड़ों रुपये रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाए थे। वहीं, कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाले में भी कारोबारी रोशन चंद्राकर के माध्यम से बड़ी रकम कांग्रेस भवन तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और मामले की जांच तथा अदालती प्रक्रिया जारी है। रामगोपाल अग्रवाल या कांग्रेस की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया फिलहाल सामने नहीं आई है। EOW ने रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से भी लगातार दो दिनों तक पूछताछ की है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने उनसे पिछले तीन वर्षों के दौरान रामगोपाल अग्रवाल के ठिकानों, उनके संपर्कों, आर्थिक गतिविधियों और कथित नेटवर्क से जुड़े कई सवाल किए। एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान प्राप्त जानकारियों का अन्य दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों से मिलान किया जा रहा है। जांच पूरी तरह तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा का कहना है कि रामगोपाल अग्रवाल की भूमिका, उनसे जुड़े लोगों के संपर्क, बैंकिंग लेन-देन, धन के स्रोत, उसकी प्राप्ति और उपयोग सहित कई पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। एजेंसी ने बताया कि पूछताछ के दौरान जब्त डायरी, दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और विवेचना में जुटाए गए अन्य साक्ष्यों का उपयोग किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। रामगोपाल अग्रवाल का नाम जिन मामलों में सामने आया है, उनमें कथित 3,000 करोड़ रुपये का शराब घोटाला, लगभग 450 करोड़ रुपये का कोल लेवी मामला और करीब 127 करोड़ रुपये का कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला शामिल है। जांच एजेंसियां इन मामलों में कथित धन के प्रवाह, लाभार्थियों और कमीशन के नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि इन मामलों में सभी आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं तथा किसी भी आरोपी को अदालत द्वारा दोषी घोषित नहीं किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए थे। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी सामने आती रहीं। जांच एजेंसियां उनकी गतिविधियों और लोकेशन से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही थीं। अब उनके सरेंडर के बाद जांच को नई दिशा मिलने की संभावना जताई जा रही है। छत्तीसगढ़ का कथित शराब घोटाला राज्य के सबसे चर्चित आर्थिक मामलों में शामिल है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW के अनुसार वर्ष 2019 से 2022 के बीच सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में कथित सिंडिकेट बनाकर अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप है। जांच एजेंसियों का दावा है कि इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये का अवैध आर्थिक लाभ अर्जित किया गया। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी शेष है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कथित कोल लेवी घोटाला वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन कारोबार से जुड़ा मामला है। जांच एजेंसियों के अनुसार कोयला परिवहन करने वाले कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की कथित अवैध वसूली की गई। एजेंसियों का दावा है कि इस नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों रुपये की अवैध लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम जांच में सामने आए हैं, लेकिन अंतिम निर्णय अदालत में विचाराधीन है।कथित कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन घोटाला धान मिलिंग के लिए राइस मिलर्स को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। EOW के अनुसार वर्ष 2015 से 2023 के बीच नियमों का उल्लंघन कर कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की जांच की जा रही है। एजेंसी का दावा है कि इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 13:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच तेज, कांग्रेस नेता रामगोपाल अग्रवाल के बेटे से EOW की लंबी पूछताछ</title>
                                    <description><![CDATA[शराब, कोल लेवी और कस्टम मिलिंग मामलों में जांच का दायरा बढ़ा, वैभव अग्रवाल से कई घंटों तक पूछताछ; एजेंसी ने आधिकारिक बयान जारी नहीं किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/investigation-into-chhattisgarh-liquor-scam-intensifies-eows-long-interrogation-of/article-58201"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-liquor-scam.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर तेज होती नजर आ रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने कांग्रेस के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के बेटे वैभव अग्रवाल से लंबी पूछताछ की है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक अधिकारियों ने उनसे रामगोपाल अग्रवाल के पिछले कुछ वर्षों के ठिकानों, आर्थिक गतिविधियों और संपर्कों को लेकर कई सवाल किए। हालांकि पूछताछ के बाद न तो किसी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है और न ही एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच अभी जारी है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस घटनाक्रम के बाद राज्य की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है, क्योंकि यह मामला पहले से ही कई बड़े नामों और आर्थिक अनियमितताओं के आरोपों से जुड़ा हुआ है। बताया जा रहा है कि वैभव अग्रवाल से सुबह शुरू हुई पूछताछ देर शाम तक चली। सूत्रों के अनुसार अधिकारियों ने केवल पारिवारिक जानकारी ही नहीं बल्कि कथित आर्थिक नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और उन लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाने की कोशिश की, जो पिछले कुछ वर्षों में रामगोपाल अग्रवाल के संपर्क में रहे। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हुई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित अवैध धन का प्रवाह किन-किन माध्यमों से हुआ। फिलहाल एजेंसी ने पूछताछ के विषय और उसमें सामने आई जानकारियों को सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">रामगोपाल अग्रवाल पिछले करीब तीन वर्षों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इस दौरान उनके देश और विदेश में होने की चर्चाएं भी समय-समय पर सामने आती रही हैं। जांच एजेंसियां उनकी वास्तविक लोकेशन और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं। EOW के सूत्रों के अनुसार हाल ही में उन्हें प्रदेश में होने की सूचना मिली थी। इसी इनपुट के बाद जांच में तेजी लाई गई और उनके बेटे को पूछताछ के लिए बुलाया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। एजेंसी की ओर से अभी तक यह भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ आगे क्या कदम उठाए जाएंगे। रामगोपाल अग्रवाल का नाम राज्य के तीन बड़े कथित आर्थिक मामलों में सामने आया है। इनमें करीब 3,200 करोड़ रुपए के कथित शराब घोटाले, कोल लेवी वसूली और कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़े मामले शामिल हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इन मामलों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं हुईं और सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया गया। हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि इन सभी मामलों में आरोपों की न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच के साथ-साथ अदालती प्रक्रिया भी जारी है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम फैसला अदालत ही करेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कथित शराब घोटाले की बात करें तो जांच एजेंसियों का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच राज्य की सरकारी शराब बिक्री व्यवस्था में एक संगठित नेटवर्क के जरिए अवैध शराब की बिक्री, कमीशनखोरी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क से हजारों करोड़ रुपए के अवैध लेन-देन की आशंका है। इस मामले में कई अधिकारियों, कारोबारियों और राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों के नाम भी जांच के दायरे में आए हैं। हालांकि संबंधित पक्षों ने समय-समय पर आरोपों से इनकार किया है और कई मामलों में कानूनी लड़ाई जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह कोल लेवी मामले में भी प्रवर्तन निदेशालय (ED) और EOW का आरोप है कि वर्ष 2020 से 2022 के बीच कोयला परिवहन और खनन से जुड़े कारोबारियों से प्रति टन तय राशि की अवैध वसूली की गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस कथित नेटवर्क के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की लेवी वसूली गई। इस मामले में भी कई अधिकारियों, कारोबारियों और अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। कस्टम मिलिंग प्रोत्साहन राशि से जुड़ा मामला भी जांच एजेंसियों के लिए अहम बना हुआ है। EOW का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2023 के बीच धान मिलिंग के लिए दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के भुगतान में नियमों का उल्लंघन किया गया और कुछ राइस मिलर्स को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। एजेंसी के अनुसार इस प्रक्रिया में करोड़ों रुपए की वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। इस मामले में भी कई अधिकारियों और कारोबारियों की भूमिका की जांच जारी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>13 जुलाई से शुरू होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र, 1033 सवालों के साथ सरकार को घेरेगा विपक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिवसीय सत्र में कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट और मानसून की तैयारियों जैसे मुद्दों पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस के आसार।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/monsoon-session-of-chhattisgarh-assembly-will-start-from-july-13/article-58083"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-assembly.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ विधानसभा का पांच दिवसीय मानसून सत्र 13 जुलाई से शुरू होने जा रहा है। सत्र शुरू होने से पहले ही प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार अब तक विधायकों की ओर से 1033 प्रश्न लगाए जा चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या में प्रश्न विपक्षी कांग्रेस की ओर से हैं। कांग्रेस ने इस बार कानून-व्यवस्था, किसानों की समस्याएं, नकटी भूमि विवाद, बिजली-पानी संकट, सड़कों की स्थिति और मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की है। वहीं सत्ता पक्ष भी विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने और अपनी योजनाओं तथा उपलब्धियों को सदन के सामने रखने की तैयारी में जुटा है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि मानसून सत्र के दौरान सदन में कई मुद्दों पर तीखी बहस और हंगामे की स्थिति देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">विधानसभा का यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब प्रदेश में कई स्थानीय और राज्य स्तरीय मुद्दे चर्चा में हैं। प्रश्नकाल, शून्यकाल और ध्यानाकर्षण प्रस्तावों के दौरान विपक्ष सरकार से जवाब मांगेगा। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। हत्या, चाकूबाजी, महिलाओं के खिलाफ अपराध, नशे के कारोबार और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी। विपक्ष का आरोप है कि कई मामलों में प्रशासन समय पर प्रभावी कार्रवाई करने में सफल नहीं रहा, इसलिए इन विषयों पर विस्तृत चर्चा की जरूरत है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मानसून सत्र में किसानों से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठने वाले हैं। खरीफ सीजन के बीच खाद और बीज की उपलब्धता, सिंचाई व्यवस्था, बिजली आपूर्ति, धान खरीदी की तैयारियां और कृषि विभाग की योजनाओं को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस का कहना है कि कई क्षेत्रों से किसानों को समय पर उर्वरक और अन्य जरूरी संसाधन नहीं मिलने की शिकायतें सामने आई हैं। वहीं सरकार का दावा है कि किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। सदन में इन दावों और आरोपों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। कृषि से जुड़े सवालों की संख्या भी इस बार अधिक बताई जा रही है, जिससे यह मुद्दा सत्र के दौरान प्रमुख बना रह सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">रायपुर के नकटी गांव का भूमि विवाद भी इस बार विधानसभा में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बनने की संभावना है। अतिक्रमण हटाने, विस्थापन और विधायक आवास के लिए प्रस्तावित भूमि को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद बना हुआ है। इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी भी लगातार हो रही है। विपक्ष इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए कई सवाल उठाने की तैयारी में है। वहीं सरकार की ओर से पूरे मामले में अपना पक्ष रखने की तैयारी की गई है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी सदन में काफी देर तक बहस हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती, पेयजल संकट और खराब सड़कें भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल हैं। कई जिलों से लगातार बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेयजल की समस्या की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके अलावा बारिश के दौरान सड़कों की खराब स्थिति, जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियों पर भी सवाल उठाए जाएंगे। विपक्ष का कहना है कि मानसून शुरू होने से पहले जिन तैयारियों का दावा किया गया था, उनकी वास्तविक स्थिति की समीक्षा जरूरी है। हालिया बारिश के दौरान राहत और बचाव कार्यों की स्थिति भी चर्चा का विषय बन सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े मामलों पर भी प्रश्न लगाए गए हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं के क्रियान्वयन, बजट खर्च और विकास कार्यों की प्रगति को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा जाएगा। विधानसभा सचिवालय के अनुसार प्रश्नों की संख्या को देखते हुए इस बार प्रश्नकाल काफी व्यस्त रहने की संभावना है। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और अन्य कार्यवाही के दौरान भी कई महत्वपूर्ण विषय सदन में उठ सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर सरकार ने भी मानसून सत्र को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। विभिन्न विभागों से संबंधित जानकारी एकत्र की जा रही है ताकि विपक्ष के सवालों का तथ्यात्मक जवाब दिया जा सके। मंत्रियों और अधिकारियों के स्तर पर भी विभागवार समीक्षा की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश में विकास कार्य लगातार जारी हैं और विपक्ष के सवालों का जवाब तथ्यों के साथ दिया जाएगा। सत्ता पक्ष अपनी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों को भी सदन में प्रमुखता से रखने की रणनीति बना रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:37:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में NSUI संगठनात्मक चुनाव का ऐलान, कैंपस से चुना जाएगा नया नेतृत्व</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी और निजी कॉलेजों में पहले चरण में कैंपस अध्यक्ष का चुनाव होगा, इसके बाद जिला और प्रदेश स्तर पर निर्वाचित प्रतिनिधि नई संगठनात्मक टीम का चयन करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/nsui-organizational-elections-announced-in-chhattisgarh-new-leadership-will-be/article-58076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/chhattisgarh-nsui-election.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई (NSUI) ने लंबे समय बाद संगठनात्मक चुनाव कराने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। इस फैसले के साथ राज्यभर के सरकारी, निजी और अन्य मान्यता प्राप्त कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों में छात्र राजनीति एक बार फिर सक्रिय होती नजर आएगी। संगठन ने चुनाव प्रक्रिया को दो चरणों में पूरा करने का फैसला लिया है। पहले चरण में सभी कॉलेज और विश्वविद्यालयों में कैंपस अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में जिला और प्रदेश स्तर के संगठनात्मक चुनाव होंगे। एनएसयूआई का कहना है कि नई व्यवस्था के जरिए संगठन में नेतृत्व नीचे से ऊपर की ओर तैयार किया जाएगा, जिससे सक्रिय छात्र नेताओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। चुनाव की घोषणा के बाद विभिन्न कॉलेजों में छात्र संगठनों के बीच हलचल तेज हो गई है और संभावित उम्मीदवारों ने अपनी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">संगठन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार पहले चरण में छात्र-छात्राएं केवल अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय के कैंपस अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। मतदान के आधार पर जिस उम्मीदवार को जीत मिलेगी, उसी के नेतृत्व में संबंधित संस्थान की 11 सदस्यीय कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा। इस कार्यकारिणी में विभिन्न पदों पर नियुक्तियां संगठन की निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएंगी। एनएसयूआई का मानना है कि इससे कॉलेज स्तर पर संगठनात्मक गतिविधियां मजबूत होंगी और छात्रों को सीधे नेतृत्व का अनुभव मिलेगा। कैंपस अध्यक्ष और उनकी टीम कॉलेज की समस्याओं को संगठन के सामने रखने के साथ-साथ छात्र हितों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाएगी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दूसरे चरण की प्रक्रिया पहले चरण से पूरी तरह जुड़ी होगी। संगठन ने स्पष्ट किया है कि जिला और प्रदेश स्तर के चुनाव में वही उम्मीदवार हिस्सा ले सकेंगे जो अपने-अपने कॉलेज या विश्वविद्यालय में कैंपस अध्यक्ष चुने जाएंगे। इतना ही नहीं, जिला और प्रदेश संगठन के चुनाव में मतदान का अधिकार भी केवल निर्वाचित कैंपस अध्यक्षों को ही मिलेगा। यानी संगठन की पूरी नेतृत्व प्रक्रिया कैंपस स्तर से शुरू होकर जिला और प्रदेश स्तर तक पहुंचेगी। एनएसयूआई का कहना है कि इससे संगठन में लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी और नेतृत्व का चयन सीधे जमीनी स्तर से होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">चुनाव लड़ने के लिए संगठन ने कुछ स्पष्ट नियम भी तय किए हैं। उम्मीदवार की आयु 16 वर्ष से कम और 27 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उम्मीदवार किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान का छात्र होना अनिवार्य होगा। संगठन ने यह भी साफ किया है कि यूथ कांग्रेस की तरह कैंपस के बाहर सदस्यता अभियान नहीं चलाया जाएगा। केवल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के माध्यम से ही सदस्यता दी जाएगी। सदस्यता शुल्क तीन वर्षों के लिए 45 रुपये निर्धारित किया गया है। संगठन का मानना है कि इस व्यवस्था से केवल वास्तविक छात्र ही चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बन सकेंगे और छात्र राजनीति को शैक्षणिक संस्थानों तक सीमित रखा जा सकेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">एनएसयूआई ने यह भी बताया है कि चुनाव परिणाम आने के बाद प्रक्रिया वहीं समाप्त नहीं होगी। निर्वाचित प्रतिनिधियों की पहले स्क्रूटनी की जाएगी, जिसमें उनके दस्तावेज, सदस्यता और पात्रता की जांच होगी। इसके बाद उम्मीदवारों का इंटरव्यू भी लिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य संगठन में सक्रिय, योग्य और जिम्मेदार कार्यकर्ताओं को आगे लाना है। स्क्रूटनी और इंटरव्यू के आधार पर ही जिला और प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों का अंतिम चयन किया जाएगा। संगठन का कहना है कि इससे नेतृत्व चयन में पारदर्शिता बनी रहेगी और संगठनात्मक गुणवत्ता भी मजबूत होगी।एनएसयूआई का कहना है कि नई चुनाव प्रणाली का उद्देश्य केवल पदाधिकारियों का चयन करना नहीं, बल्कि भविष्य के नेतृत्व को तैयार करना भी है। कैंपस स्तर पर चुने गए प्रतिनिधियों को संगठनात्मक प्रशिक्षण, वैचारिक मार्गदर्शन और नेतृत्व विकास के अवसर दिए जाएंगे। इससे वे आगे चलकर जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार हो सकेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 12:54:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंजाब कांग्रेस में बढ़ी सियासी हलचल, चन्नी की नाराजगी की चर्चा; संगठन में नई जिम्मेदारियों पर मंथन तेज</title>
                                    <description><![CDATA[2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठनात्मक जिम्मेदारियां बांटीं, चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थकों ने प्रदेश नेतृत्व की मांग उठाई, पार्टी में अंदरूनी समीकरणों पर चर्चा तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/political-turmoil-increased-in-punjab-congress-discussion-of-channis-displeasure/article-57866"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/punjab-congress.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पंजाब कांग्रेस में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच संगठनात्मक बदलावों के बाद नई राजनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य संगठन में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का बंटवारा करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। हालांकि, इस फैसले के बाद पार्टी के भीतर अलग-अलग तरह की राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। चन्नी के समर्थकों ने उन्हें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने की मांग उठाई है, जिससे राज्य की राजनीति में संगठनात्मक समीकरणों को लेकर नया विमर्श शुरू हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस हाईकमान ने आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए संगठन में संतुलन बनाए रखने की रणनीति अपनाई है। इसी क्रम में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा गया है। साथ ही विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी प्रताप सिंह बाजवा के पास ही रहने दी गई है। इसके अलावा पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा को पार्टी की कोर समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। पार्टी का उद्देश्य सभी वरिष्ठ नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर चुनावी तैयारियों को मजबूत करना बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">नई नियुक्तियों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के आवास पर बड़ी संख्या में समर्थक और कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता पहुंचे। इस दौरान समर्थकों ने खुलकर मांग की कि चन्नी को पंजाब कांग्रेस की कमान सौंपी जानी चाहिए। उनका कहना था कि चन्नी का व्यापक जनाधार और प्रशासनिक अनुभव आगामी चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई कि संगठन के भीतर नेतृत्व को लेकर अलग-अलग राय मौजूद है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि कांग्रेस की ओर से आधिकारिक तौर पर किसी तरह के मतभेद या नाराजगी की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन बड़े नेताओं के समर्थकों की सक्रियता चुनावी तैयारियों के दौरान स्वाभाविक मानी जाती है। पार्टी नेतृत्व फिलहाल सभी नेताओं को साथ लेकर चुनावी रणनीति तैयार करने पर जोर दे रहा है ताकि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस मजबूत स्थिति में उतर सके।</p>
<p style="text-align:justify;">चन्नी को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाए जाने को भी संगठन में एक अहम जिम्मेदारी माना जा रहा है। चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष पूरे चुनाव अभियान की रणनीति तैयार करने, प्रचार कार्यक्रमों का समन्वय करने और विभिन्न क्षेत्रों में पार्टी की चुनावी गतिविधियों को गति देने का कार्य करता है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि चन्नी के अनुभव का लाभ पूरे राज्य में चुनाव प्रचार के दौरान मिलेगा। बताया जा रहा है कि नई जिम्मेदारियों की घोषणा के बाद चन्नी के समर्थकों ने अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त कीं। कई नेताओं ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यदि कांग्रेस को भविष्य में राज्य की सत्ता में वापसी करनी है तो संगठनात्मक नेतृत्व में भी बदलाव पर विचार किया जा सकता है। हालांकि यह मांग समर्थकों की ओर से सामने आई है और पार्टी ने इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया है। इस बीच सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हुईं। हालांकि रंधावा ने स्पष्ट किया कि यह मुलाकात पहले से तय कार्यक्रम के तहत हुई थी और इसका पंजाब कांग्रेस के संगठनात्मक फैसलों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;"> पंजाब जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में चुनाव से पहले संगठनात्मक गतिविधियां तेज होना सामान्य प्रक्रिया है। कांग्रेस इस समय राज्य में अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत करने और सभी वरिष्ठ नेताओं के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि विभिन्न गुटों के बीच समन्वय बनाकर चुनावी अभियान को प्रभावी बनाया जाए। चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री रहे हैं और राज्य के कई इलाकों में उनका प्रभाव माना जाता है। यही वजह है कि उनके समर्थक उन्हें संगठन में और बड़ी भूमिका दिए जाने की मांग कर रहे हैं। वहीं पार्टी नेतृत्व का कहना है कि सभी वरिष्ठ नेताओं को उनकी क्षमता और अनुभव के आधार पर जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:39:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिग्विजय सिंह का ऐलान: महाकाल से अयोध्या तक करेंगे 1000 किमी पदयात्रा, राम मंदिर चंदे का हिसाब मांगेंगे</title>
                                    <description><![CDATA[2 अक्टूबर से शुरू होगी यात्रा, कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी; यात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए सोशल मीडिया से दूरी बनाने की घोषणा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/6a48b697e584e/article-57851"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/digvijaya-singh.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा ऐलान किया है। भोपाल में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि वह आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर से अयोध्या की राम जन्मभूमि तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकालेंगे। दिग्विजय सिंह ने कहा कि यह यात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य किसी दल या संगठन के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए मिले चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और न ही वे फेसबुक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) या किसी अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करेंगे। उनके अनुसार उन्होंने स्वयं भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1.11 लाख रुपये का योगदान दिया था और आज भी उस दान की रसीद तथा चेक की प्रति उनके पास सुरक्षित है। उनका कहना है कि जिन श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ दान दिया है, उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने बताया कि पदयात्रा शुरू होने से पहले वह वरिष्ठ अधिवक्ताओं से कानूनी सलाह लेंगे। उन्होंने कहा कि 5 या 6 जुलाई को वकीलों से चर्चा के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करने की तैयारी है। उनका कहना है कि न्यायालय से राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित धन का पूरा लेखा-जोखा प्रस्तुत करने की मांग की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय न्यायालय और जांच प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के प्रति लोगों की आस्था बहुत गहरी होती है, इसलिए आर्थिक मामलों में भी स्पष्टता बनी रहनी चाहिए।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन या आम नागरिक को यदि चंदे के उपयोग में पारदर्शिता की अपेक्षा है तो वह इस यात्रा में शामिल हो सकता है। उनके अनुसार यात्रा के दौरान वह अपने साथ दान की रसीद और चेक की प्रतियां भी रखेंगे ताकि यह दिखाया जा सके कि उन्होंने स्वयं भी इस अभियान में योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए स्वेच्छा से दान दिया था और ऐसे में यदि चंदे के उपयोग को लेकर कोई सवाल उठते हैं तो उनका समाधान भी पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि अदालत में किसी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी साबित होती है तो वह अपना दिया गया चंदा वापस लेकर उसे किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दिग्विजय सिंह ने उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर क्षेत्र में बने एक गेस्ट हाउस का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना और उससे जुड़े आर्थिक पहलुओं पर भी पारदर्शिता होनी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक स्थलों से जुड़ी सभी संस्थाओं और ट्रस्टों के आर्थिक लेन-देन का समय-समय पर सार्वजनिक विवरण उपलब्ध होना चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत हो। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग केवल एक ट्रस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक ट्रस्टों के लिए समान रूप से पारदर्शिता लागू होनी चाहिए। उन्होंने अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाने की भी घोषणा की, जिस पर लिखा होगा कि "मेरे घर में चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है।" इसे उन्होंने प्रतीकात्मक संदेश बताया। दिग्विजय सिंह ने दोहराया कि उनकी पूरी यात्रा शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में होगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं बल्कि दानदाताओं के मन में उठ रहे सवालों को उचित मंच पर रखना है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 14:38:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दतिया विधानसभा उपचुनाव 30 जुलाई को, 3 अगस्त को आएंगे नतीजे</title>
                                    <description><![CDATA[6 जुलाई से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी, राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई सीट पर सियासी मुकाबला तेज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/datia-assembly-by-election-will-be-held-on-30th-july-results/article-57714"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/datia-by-election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को चुनाव की तारीखों का ऐलान करते हुए बताया कि उपचुनाव के लिए अधिसूचना 6 जुलाई को जारी की जाएगी। इसके साथ ही नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उम्मीदवार 13 जुलाई तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे, जबकि 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी। नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 16 जुलाई तय की गई है। सभी तैयारियां पूरी होने के बाद 30 जुलाई को मतदान कराया जाएगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे। चुनावी प्रक्रिया 4 अगस्त तक पूरी कर ली जाएगी। चुनाव कार्यक्रम जारी होते ही दतिया विधानसभा क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी मतदान केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट के माध्यम से मतदान कराया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की जीत तय है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पार्टी उम्मीदवार बनाएगी, तो उन्होंने कहा कि इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी उचित समय पर उम्मीदवार की घोषणा करेगी और चुनाव पूरी मजबूती के साथ लड़ा जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">दतिया विधानसभा सीट पर उपचुनाव की नौबत कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद आई। विधानसभा सचिवालय ने उनकी सीट रिक्त घोषित कर निर्वाचन आयोग को इसकी सूचना भेजी थी। दरअसल राजेंद्र भारती को एक पुराने आपराधिक मामले में दो वर्ष से अधिक की सजा सुनाई गई थी, जिसके बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8(3) के तहत उनकी विधानसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई। यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के लिली थॉमस बनाम भारत संघ मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसले और संविधान के प्रावधानों के अनुरूप की गई। यह मामला वर्ष 1998 में दतिया सहकारी ग्रामीण विकास बैंक में सामने आए कथित फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) घोटाले से जुड़ा है। आरोप था कि बैंक के रिकॉर्ड में कथित रूप से हेरफेर कर एक एफडी की अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पंद्रह वर्ष कर दी गई थी। इसके आधार पर वर्ष 1999 से 2011 के बीच ब्याज की राशि निकाली जाती रही। उस समय राजेंद्र भारती बैंक के अध्यक्ष और संबंधित संस्था के ट्रस्टी बताए गए थे। मामले की जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया और लंबी कानूनी प्रक्रिया चली।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">करीब 28 वर्ष पुराने इस मामले में 1 अप्रैल 2026 को विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराया। अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजते हुए अगले दिन 2 अप्रैल को तीन वर्ष के कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। साथ ही उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए सजा के क्रियान्वयन पर 60 दिन की मोहलत भी दी गई। हालांकि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने के कारण विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की कानूनी प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से लागू हो गई।  वर्ष 2013 में सुप्रीम कोर्ट के लिली थॉमस फैसले के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई थी। इससे पहले जनप्रतिनिधियों को अपील दाखिल करने तक राहत मिल जाती थी, लेकिन अब यदि किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होती है तो उसकी सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। केवल अपील दायर करना पर्याप्त नहीं माना जाता। सदस्यता तभी बहाल हो सकती है जब उच्च न्यायालय दोषसिद्धि या अयोग्यता पर रोक लगाए। निर्वाचन आयोग ने प्रशासन को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। सुरक्षा व्यवस्था, मतदान केंद्रों की तैयारी और चुनावी नियमों के पालन को लेकर भी आवश्यक व्यवस्थाएं शुरू कर दी गई हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 06:07:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जीतू पटवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट, कोर्ट ने पुलिस से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[भिंड की विशेष MP-MLA कोर्ट ने 2024 चुनावी भाषण से जुड़े मामले में अगली सुनवाई पर हर हाल में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/arrest-warrant-against-jitu-patwari-court-seeks-answer-from-police/article-57505"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/jitu-patwari.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान दिए गए एक चुनावी भाषण से जुड़े मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ग्वालियर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करते हुए भिंड पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर उनकी अदालत में उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित की जाए। अदालत ने सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि जब जीतू पटवारी सार्वजनिक कार्यक्रमों, मीडिया और राजनीतिक गतिविधियों में लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो पुलिस उन्हें तलाशने में असफल कैसे हो सकती है। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। यह मामला लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान 27 अप्रैल 2024 को भिंड जिले के ऊमरी कस्बे में आयोजित एक चुनावी सभा से जुड़ा है। उस समय जीतू पटवारी कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया के समर्थन में प्रचार करने पहुंचे थे। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने भिंड-दतिया लोकसभा सीट से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी देवाशीष जरारिया को लेकर कुछ आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार, उन्होंने चुनावी मंच से बसपा प्रत्याशी पर भाजपा से सांठगांठ और कथित लेनदेन के आरोप लगाए थे। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि भाषण के दौरान कुछ आपत्तिजनक शब्दों का भी प्रयोग किया गया, जिससे उनकी छवि प्रभावित हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव के कुछ दिनों बाद देवाशीष जरारिया की ओर से इस मामले में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के आधार पर 4 मई 2024 को भिंड जिले के उमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। शिकायत के साथ चुनावी सभा की वीडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी गई थी। पुलिस ने वीडियो का परीक्षण करने के बाद प्रकरण दर्ज किया और जांच आगे बढ़ाई। इसके बाद अदालत ने 16 जनवरी 2026 को जीतू पटवारी को पेश होने का नोटिस जारी किया था, लेकिन निर्धारित तिथि पर वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। हालिया सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि जीतू पटवारी का पता नहीं चल सका, इसलिए उन्हें नोटिस तामील नहीं कराया जा सका। इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब संबंधित व्यक्ति लगातार मीडिया में दिखाई दे रहे हैं, सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं और राजनीतिक गतिविधियां कर रहे हैं, तब पुलिस का उन्हें तलाश नहीं पाना समझ से परे है। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए भिंड पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए कि अगली सुनवाई में उनकी मौजूदगी हर हाल में सुनिश्चित की जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">एफआईआर में दर्ज विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि चुनावी सभा के दौरान जीतू पटवारी ने कहा था कि बसपा प्रत्याशी भाजपा से "माल लाए हैं" और मतदाताओं से उन्हें वोट नहीं देने की अपील की थी। शिकायत में यह भी कहा गया कि इस तरह के बयान बिना किसी प्रमाण के सार्वजनिक मंच से दिए गए, जिससे उनकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसी आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषणों और सार्वजनिक बयानों की जिम्मेदारी संबंधित नेता की होती है। यदि किसी बयान को लेकर शिकायत दर्ज होती है और अदालत उसे सुनवाई योग्य मानती है, तो कानून के तहत पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। इस मामले में भी अदालत ने अभी केवल उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। मामले में अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही आएगा। यह लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए भाषण से जुड़ा हुआ है। फिलहाल अदालत ने पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई तक सभी आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी की जाएं और संबंधित पक्ष की अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। अब 27 जुलाई को होने वाली सुनवाई में इस मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 13:43:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राम मंदिर चढ़ावा मामले में सियासी हलचल, अयोध्या में कांग्रेस नेताओं पर पुलिस की कार्रवाई</title>
                                    <description><![CDATA[राम मंदिर चढ़ावा मामले को लेकर अयोध्या में राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल के प्रस्तावित कार्यक्रम से पहले पुलिस ने कई नेताओं पर एहतियाती कार्रवाई की, जबकि मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/political-stir-in-ram-temple-offering-case-police-action-against/article-57413"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ayodhya-ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">राम मंदिर में चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले को लेकर अयोध्या में मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियां तेज रहीं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ अयोध्या पहुंचे थे। पार्टी की ओर से मंदिर ट्रस्ट कार्यालय के बाहर विरोध कार्यक्रम की घोषणा की गई थी। इससे पहले सोमवार देर रात पुलिस ने अजय राय को अयोध्या के एक होटल में रोक दिया। बाद में उन्हें कृषि विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस ले जाया गया। प्रशासन ने इसे एहतियाती कदम बताया। इसी दौरान कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं और जनप्रतिनिधियों को भी उनके आवास पर ही रोक दिया गया, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो। मंगलवार दोपहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राम जन्मभूमि परिसर की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने मंदिर क्षेत्र से पहले टेढ़ी बाजार इलाके में बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक लिया। इस दौरान कुछ देर के लिए धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। हालात को देखते हुए पुलिस ने कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर वहां से हटा दिया। पूरे इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा के सभी आवश्यक इंतजाम पहले से किए गए थे।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">उधर, अजय राय की पत्नी रीना राय ने वाराणसी से एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने अपने पति की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और कहा कि वह जल्द से जल्द उनसे मिलने की उम्मीद कर रही हैं। कांग्रेस की ओर से भी कहा गया कि पार्टी इस मुद्दे पर अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रखेगी। वहीं प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और सभी फैसले उसी के अनुसार लिए गए। इस बीच चढ़ावा प्रबंधन से जुड़े मामले की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। जांच के क्रम में राम मंदिर परिसर में लंबे समय से तैनात रेडियो ऑपरेशन अधिकारी (आरएमओ) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। वह करीब 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात थे। उनकी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी नेटवर्क की निगरानी से जुड़ी थी। बताया जाता है कि चढ़ावा गिनती वाले कक्ष सहित पूरे मंदिर परिसर में लगे लगभग 1600 सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी उनके कार्यक्षेत्र में शामिल थी।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;"> विशेष जांच दल (एसआईटी) इस पूरे मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। अर्जुन देव की लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। प्रशासन की ओर से अभी तक इस पर कोई विस्तृत आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। जांच के सिलसिले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय से भी पुलिस ने पूछताछ की। जानकारी के अनुसार उनसे यह जानने का प्रयास किया गया कि उन्हें मामले की जानकारी पहली बार कब मिली और उसके बाद क्या कदम उठाए गए। इससे पहले इस मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की न्यायिक हिरासत अदालत ने 14 दिन के लिए बढ़ा दी थी। जांच एजेंसियां अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था। इसके बाद राज्य सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल का गठन किया। 25 जून को प्राथमिकी दर्ज की गई और मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसी दिन मंदिर ट्रस्ट से जुड़े दो पदाधिकारियों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से जांच लगातार जारी है और संबंधित दस्तावेजों व अन्य पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है। अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था पहले की तरह कड़ी रखी गई है और संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती जारी है। वहीं जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर अपनी कार्रवाई आगे बढ़ा रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 14:17:42 +0530</pubDate>
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