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                <title>Elections 2026 - दैनिक जागरण</title>
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                <title>फलता सीट पर बड़ा उलटफेर, TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने लिया नाम वापस</title>
                                    <description><![CDATA[पश्चिम बंगाल की फलता सीट पर TMC उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव से नाम वापस लिया। 21 मई को दोबारा मतदान की तैयारी, राजनीतिक हलचल तेज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/big-upset-on-phalta-seat-tmc-candidate-jahangir-khan-withdrew/article-53781"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/west-bengal-falta-seat-tmc-jahangir-khan-elections-2026.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">पश्चिम बंगाल की राजनीति में फिर से हलचल मच गई है। खास खबर ये है कि दक्षिण </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">24<span lang="hi" xml:lang="hi"> परगना जिले की फलता विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस (</span>TMC) <span lang="hi" xml:lang="hi">के उम्मीदवार जहांगीर खान ने अचानक चुनावी मैदान से हटने का फैसला किया है। इस कदम के बाद इलाके में राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है। कहा जा रहा है कि जहांगीर ने अपने समर्थकों से कहा कि वह फलता के लोगों के हित और क्षेत्र की शांति के लिए ऐसा कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थानीय स्तर पर इस मामले ने और भी तूल पकड़ा</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उन्होंने ये कहा कि वह नहीं चाहते कि इलाके में कोई तनाव या टकराव बढ़े। उनके बयान पर प्रतिक्रिया भी आ रही है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत फैसला बता रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">वहीं कुछ इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देख रहे हैं। फलता सीट को लेकर पहले से ही जो विवाद चल रहा था</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अब इस नए घटनाक्रम ने उसे और संवेदनशील बना दिया है। सूत्र बताते हैं कि नाम वापसी की प्रक्रिया और इसके पीछे की स्थितियों को लेकर अब तक पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">चुनावी प्रक्रिया भी लगातार बदल रही है। शिकायतों के बाद इस सीट पर मतदान से जुड़ी अनियमितताओं का मुद्दा चुनाव आयोग तक पहुंचा था। कुछ जगहों पर आरोप था कि मतदाताओं पर दबाव डाला गया</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद मामले की जांच हुई। इसी बीच </span>21<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को दोबारा मतदान की योजना बनाई जा रही है और </span>24<span lang="hi" xml:lang="hi"> मई को नतीजे आने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त कदम उठाए जाने की चर्चा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि कोई गड़बड़ी न हो।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">अब उम्मीदवार के हटने के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव की बातें हो रही हैं। स्थानीय लोग इस घटनाक्रम से हैरान हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि चुनावी माहौल पहले से ही कड़ा था और सभी पार्टियाँ अपनी पूरी ताकत लगा रही थीं। अचानक नाम वापसी ने मुकाबले की दिशा को प्रभावित किया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन आधिकारिक तौर पर स्थिति अभी साफ नहीं है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में पश्चिम बंगाल की मौजूदा सत्ता और नेतृत्व को लेकर चर्चाएं हो रही हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को लेकर विभिन्न पक्षों से बयान आ रहे हैं और माहौल पूरी तरह चुनावी चर्चाओं में डूबा हुआ है। स्थानीय लोग अब देख रहे हैं कि आगे इस सीट पर मुकाबला किस दिशा में जाएगा और क्या दोबारा मतदान के बाद हालात सामान्य हो पाएंगे।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्पेशल खबरें</category>
                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:31:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>हिमंत सरमा दूसरी बार बने असम के CM, जनता के बीच ‘मामा’ नाम से क्यों हैं सबसे ज्यादा मशहूर</title>
                                    <description><![CDATA[असम CM हिमंत बिस्वा सरमा को ‘मामा’ नाम कैसे मिला? जानें इसकी दिलचस्प कहानी और उनकी लोकप्रियता की वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/himanta-sarma-became-the-cm-of-assam-for-the-second/article-53189"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t135514.582.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">असम की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिला है क्योंकि हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">NDA <span lang="hi" xml:lang="hi">की प्रचंड जीत के बाद जब हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। खास बात यह है कि राज्य के कई हिस्सों में लोग उन्हें नाम से नहीं बल्कि प्यार से </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर बुलाते हैं। असम में उनकी लोकप्रियता इस हद तक पहुंच चुकी है कि बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक उन्हें इसी नाम से पहचानते हैं। जालुकबाड़ी सीट से भी उन्होंने एक बार फिर करीब </span>89<span lang="hi" xml:lang="hi"> हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत साबित की थी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">हिमंत बिस्वा सरमा का यह </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">वाला नाम यूं ही नहीं पड़ा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसकी कहानी काफी दिलचस्प मानी जाती है। बताया जाता है कि इसकी शुरुआत असम के कुछ स्कूलों और बच्चों के बीच बातचीत से हुई थी। शुरुआती दौर में माजुली इलाके के कुछ बच्चों ने उन्हें मजाकिया और अपनापन जताते हुए </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहना शुरू किया। धीरे-धीरे यह नाम सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे राज्य में फैल गया। उस समय शिक्षा मंत्री रहते हुए और बाद में मुख्यमंत्री बनने के बाद जब उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए साइकिल जैसी योजनाओं पर काम किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो यह जुड़ाव और बढ़ गया। एक चुनावी रैली के दौरान जब उन्होंने बच्चों से सीधे पूछा कि क्या उन्हें भी साइकिल चाहिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो जवाब में बच्चों की खुशी और उत्साह ने इस नाम को और मजबूती दे दी। इसके बाद कई जगहों पर बच्चे उनसे पूछने लगे</span>—“<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा हमें साइकिल कब मिलेगी</span>?” <span lang="hi" xml:lang="hi">यहीं से यह उपनाम आम लोगों की जुबान पर चढ़ गया।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">समय के साथ उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनती गई जो सीधे जनता से जुड़ता है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बिना औपचारिक दूरी के लोगों की बात सुनता है और समाधान की कोशिश करता है। यही वजह रही कि </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">शब्द सिर्फ एक उपनाम नहीं रहा बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया। असम के कई वीडियो और तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हुईं जिनमें बच्चे उन्हें गले लगाते और </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">कहकर पुकारते नजर आते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह की जनसंपर्क शैली ने उनकी लोकप्रियता को जमीन पर और मजबूत किया है। कई जगहों पर सरकारी योजनाओं के लाभार्थी भी उन्हें इसी नाम से संबोधित करने लगे और </span>“<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा की गारंटी</span>” <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे नारे तक चल पड़े।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">राजनीतिक दृष्टि से देखें तो हिमंत बिस्वा सरमा का यह सफर काफी अहम माना जाता है। </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">2015 <span lang="hi" xml:lang="hi">में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने असम की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया। </span>2016 <span lang="hi" xml:lang="hi">में भाजपा सरकार बनाने में उनकी भूमिका अहम रही और बाद में </span>2021 <span lang="hi" xml:lang="hi">में वह खुद मुख्यमंत्री बने। विश्लेषकों का कहना है कि उनकी </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">वाली छवि ने उन्हें एक सख्त प्रशासक के साथ-साथ एक पारिवारिक और सहज नेता के रूप में स्थापित किया है। भारतीय राजनीति में </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दीदी</span>’, ‘<span lang="hi" xml:lang="hi">अम्मा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">और </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">दादा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे उपनाम पहले से ही लोकप्रिय रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और अब असम में </span>‘<span lang="hi" xml:lang="hi">मामा</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">का नाम भी इसी परंपरा में जुड़ गया है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो जनता और नेता के बीच भावनात्मक रिश्ते को दर्शाता है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 13:56:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>भाजपा ने TMC पर चुनाव हाईजैक का आरोप, असम में कांग्रेस-AIDUF झड़पें; बंगाल में वोटर्स को धमकाने की शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[पांच राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज; राहुल गांधी केरल पहुंचे, तमिलनाडु में DMK घोषणापत्र चर्चा में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjp-accuses-tmc-of-election-hijacking-congress-aiduf-clashes-in-assam/article-49558"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/tmc,-bjp,-assam,-.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल में भाजपा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC चुनाव को हाईजैक कर रही है। भाजपा प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर शिकायत की कि राज्य में टीएमसी घर-घर जाकर मतदाताओं को डराकर धमका रही है। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि प्रशासनिक ढांचा, वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर निचले स्तर तक, TMC के नियंत्रण में काम कर रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने की मांग की।</p>
<p>उधर, असम के श्रीभूमि में कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIDUF) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। यह घटना स्थानीय चुनाव प्रचार के दौरान हुई। AIDUF असम में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और इसके समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव से इलाके में तनाव बढ़ गया।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) के बाद चौथी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने नाम जोड़े या हटाए गए। पहले प्रकाशित अंतिम सूची में लगभग 60 लाख नाम “निर्णयाधीन” के रूप में चिह्नित किए गए थे।</p>
<p>तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई के कोलाथुर सीट से नामांकन दाखिल किया। DMK का घोषणापत्र महिलाओं और छात्रों पर केंद्रित है। इसके तहत इनकम टैक्स दायरे से बाहर परिवारों की महिला मुखिया को ₹8,000 का कूपन मिलेगा, जिससे वे घरेलू उपकरण खरीद सकेंगी। DMK सांसद कनिमोझी ने कहा कि यह फ्रीबीज नहीं बल्कि सामाजिक निवेश है, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार को दिल्ली से केरल के लिए रवाना हुए। वे चुनाव प्रचार के तहत मीटिंग करेंगे और जनसभाओं को संबोधित करेंगे। वहीं, केरल में 85 वर्ष से अधिक उम्र और दिव्यांग मतदाताओं के लिए होम वोटिंग आज से शुरू हो गई। कुल 2.07 लाख से अधिक मतदाताओं ने इस सुविधा का लाभ लेने का विकल्प चुना।</p>
<p>युवा मतदाता वोटिंग को लेकर असमंजस में हैं। कई युवा NOTA विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जबकि कुछ सोचते हैं कि वोट देने से बदलाव नहीं आएगा। चुनाव आयोग ने ‘My Vote, My Strength’ अभियान शुरू किया है, ताकि युवाओं को मतदान के लिए जागरूक किया जा सके।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में BJP और कांग्रेस उम्मीदवारों ने भी आरोप लगाए कि राज्य में योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुँच रहा और सरकार भत्तों पर निर्भर रही है। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रोड शो के दौरान जनता का आशीर्वाद मिलने की जानकारी दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:11:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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