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                <title>Democracy - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Democracy RSS Feed</description>
                
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                <title>मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव प्रक्रिया शुरू, नामांकन दाखिल होना प्रारंभ</title>
                                    <description><![CDATA[निर्वाचन आयोग ने तीन राज्यों की रिक्त विधानसभा सीटों के लिए अधिसूचना जारी की। 13 जुलाई तक नामांकन, 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को मतगणना होगी। मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश और शराबबंदी के निर्देश भी जारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/by-election-process-begins-on-three-assembly-seats-of-madhya-pradesh/article-58095"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/election-commission-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">देश के तीन राज्यों मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार में विधानसभा उपचुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग ने तीनों राज्यों की रिक्त विधानसभा सीटों के लिए अधिसूचना जारी कर नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों और संभावित उम्मीदवारों ने चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। इन उपचुनावों के परिणाम संबंधित राज्यों की राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ स्थानीय समीकरणों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार मध्य प्रदेश की 22-दतिया विधानसभा सीट, गुजरात की 145-मंजलपुर विधानसभा सीट और बिहार की 182-बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव कराए जाएंगे। इन तीनों सीटों के लिए 6 जुलाई 2026 से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। आयोग ने चुनाव कार्यक्रम जारी करते हुए सभी संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उम्मीदवार 13 जुलाई 2026 तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद 14 जुलाई को सभी नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। यदि कोई उम्मीदवार चुनाव मैदान से हटना चाहता है तो वह 16 जुलाई तक अपना नाम वापस ले सकता है। नाम वापसी की अंतिम तिथि के बाद चुनाव मैदान में अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी और इसके बाद चुनाव प्रचार पूरी तरह गति पकड़ लेगा। निर्वाचन आयोग ने बताया है कि यदि आवश्यक हुआ तो इन तीनों विधानसभा क्षेत्रों में 30 जुलाई 2026 को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान संपन्न होने के बाद सभी मतों की गणना 3 अगस्त 2026 को सुबह 8 बजे से शुरू होगी। आयोग का लक्ष्य है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया 4 अगस्त 2026 तक हर हाल में पूरी कर ली जाए।</p>
<p class="isSelectedEnd">चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावी हो गई है। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान निर्वाचन आयोग के सभी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता या नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने चुनाव वाले क्षेत्रों में मतदान प्रतिशत बढ़ाने और मतदाताओं को सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष निर्देश भी जारी किए हैं। आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों को कहा है कि मतदान के दिन सभी पात्र कर्मचारियों को सवैतनिक अवकाश दिया जाए ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। यह व्यवस्था जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135बी के तहत लागू होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी व्यवसाय, औद्योगिक इकाई, व्यापारिक प्रतिष्ठान या अन्य संस्थान में कार्यरत ऐसे कर्मचारी, जो संबंधित विधानसभा क्षेत्र के मतदाता हैं, उन्हें मतदान के दिन वेतन सहित अवकाश दिया जाएगा। यदि कोई नियोक्ता इस प्रावधान का पालन नहीं करता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है। यह सुविधा केवल नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि दैनिक वेतनभोगी और आकस्मिक श्रमिक भी इसके दायरे में आएंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">निर्वाचन आयोग ने उन मतदाताओं के लिए भी विशेष व्यवस्था का उल्लेख किया है जो अपने निर्वाचन क्षेत्र से बाहर किसी अन्य शहर या जिले में कार्यरत हैं। यदि उनका नाम संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज है तो वे भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश पाने के अधिकारी होंगे, जिससे वे अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र में जाकर मतदान कर सकें। आयोग का मानना है कि इससे अधिक से अधिक मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। मतदान प्रक्रिया को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण बनाए रखने के लिए आयोग ने शराबबंदी को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135सी के तहत मतदान समाप्त होने से 48 घंटे पहले संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में शराब की बिक्री, वितरण और सेवन पर प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में होटल, बार, रेस्तरां, शराब की दुकानों और अन्य सार्वजनिक या निजी स्थानों पर मादक पेय पदार्थों की बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी। आयोग ने संबंधित राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि मतदान से पहले निर्धारित अवधि के लिए 'ड्राई डे' घोषित किया जाए। इसके अलावा मतगणना वाले दिन यानी 3 अगस्त 2026 को भी संबंधित क्षेत्रों में शराबबंदी लागू रहेगी। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि इस दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर कड़ी निगरानी रखी जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:47:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>रायपुर में लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, CM विष्णुदेव साय बोले- नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है उनका संघर्ष और त्याग</title>
                                    <description><![CDATA['आपातकाल के योद्धा' स्मारिका का हुआ विमोचन, इंद्रेश कुमार ने कहा- संस्कृति, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्र प्रथम की भावना से मजबूत बनेगा भारत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/raipur/honoring-democracy-fighters-in-raipur-cm-vishnudev-sai-said/article-57669"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/raipur-democracy-fighters1.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">राजधानी रायपुर में आयोजित लोकतंत्र सेनानी सम्मान समारोह में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान किया गया। डीडीयू ऑडिटोरियम में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने लोकतंत्र सेनानियों के योगदान को देश की लोकतांत्रिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि उनका संघर्ष और त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 का आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का ऐसा अध्याय है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उस दौर में जिन लोगों ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए कठिनाइयों का सामना किया, उनका योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष पर आधारित स्मारिका 'आपातकाल के योद्धा' का विमोचन किया। इसके साथ ही आपातकाल स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। समारोह में लोकतंत्र सेनानी, उनके परिजन, जनप्रतिनिधि, विद्यार्थी और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान की व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के नागरिकों की स्वतंत्रता, अधिकारों और जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ विषय है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है ताकि युवा यह समझ सकें कि लोकतांत्रिक अधिकार कितने महत्वपूर्ण हैं और उनकी रक्षा के लिए कई लोगों ने कठिन परिस्थितियों का सामना किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने अपने परिवार से जुड़ी एक पुरानी स्मृति भी साझा की। उन्होंने बताया कि आपातकाल के दौरान उनके बड़े पिताजी स्वर्गीय नरहरि साय करीब 19 महीने तक जेल में रहे थे। उस समय परिवार को आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उस दौर में कई स्वयंसेवक भेष बदलकर लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों तक राशन और अन्य आवश्यक सामान पहुंचाते थे, ताकि कोई परिवार भूखा न रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभव लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिए गए त्याग की गवाही देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इतिहास के इन महत्वपूर्ण अध्यायों को शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को देश के लोकतांत्रिक संघर्ष और उसके मूल्यों की जानकारी मिल सके। उन्होंने इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी में लोकतंत्र के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह के मुख्य वक्ता इंद्रेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि भारतीय समाज के जीवन मूल्यों का आधार है। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर गंभीर असर पड़ा था। ऐसे समय में लोकतंत्र सेनानियों ने जेल, यातनाएं और अनेक कठिनाइयां सहते हुए लोकतांत्रिक आदर्शों की रक्षा की। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र प्रथम की भावना अपनाने, सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने तथा नशामुक्त और स्वच्छ समाज के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों से और अधिक मजबूत होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने भी आपातकाल के दौर को भारतीय लोकतंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि उस समय प्रेस सेंसरशिप लागू की गई, मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाए गए और संविधान में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। उन्होंने कहा कि इतिहास की इन घटनाओं से सीख लेते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों के प्रति हमेशा सजग रहने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि लोकतंत्र की मजबूती तभी संभव है जब नागरिक अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहें।</p>
<p style="text-align:justify;">समारोह में आयोजित राज्य स्तरीय निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। इस प्रतियोगिता में प्रदेशभर से 540 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। विद्यालय वर्ग में रायपुर की जागृति जांगड़े ने प्रथम, कोरबा के सूरज तांडिया ने द्वितीय और दुर्ग के अंश देशमुख ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। वहीं महाविद्यालय वर्ग में रायपुर की कल्याणी पटले प्रथम, रायगढ़ की सीमा साव द्वितीय और दुर्ग की खुशबू तृतीय स्थान पर रहीं। मुख्यमंत्री ने सभी विजेताओं को स्मृति चिन्ह और प्रोत्साहन राशि प्रदान कर सम्मानित किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, लोकतंत्र सेनानी संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कैलाश सोनी, विधायक मोतीलाल साहू, विधायक गोमती साय सहित अनेक जनप्रतिनिधि और लोकतंत्र सेनानी मौजूद रहे। सभी वक्ताओं ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 17:22:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>केइको फुजीमोरी बनीं पेरू की पहली महिला राष्ट्रपति, संघर्षों से भरा जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[19 साल की उम्र में फर्स्ट लेडी बनीं केइको, जेल और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बाद मिली ऐतिहासिक जीत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/keiko-fujimori-becomes-perus-first-female-president-life-full-of/article-57063"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/keiko-fujimori.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">पेरू ने इतिहास रच दिया है, जहां दक्षिणपंथी नेता केइको फुजीमोरी देश की पहली महिला राष्ट्रपति चुनी गई हैं। 51 वर्षीय केइको ने बेहद करीबी मुकाबले में जीत दर्ज की, जिसमें उन्हें लगभग 50.1% वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रोबर्टो सांचेज को 49.9% वोट हासिल हुए। 28 जुलाई को केइको राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगी। अब उनके सामने देश में बढ़ते अपराध, भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता जैसी गंभीर चुनौतियां होंगी।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>संघर्षों से भरा बचपन</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको फुजीमोरी का जीवन शुरुआत से ही संघर्षों से भरा रहा है। 1990 के दशक में जब उनके पिता अल्बर्टो फुजीमोरी पेरू के राष्ट्रपति थे, तब देश उग्रवादी संगठन “सेंडेरो लुमिनोसो” के हमलों से जूझ रहा था। उस दौरान राष्ट्रपति भवन और सरकारी संस्थान लगातार निशाने पर थे। सुरक्षा कारणों से केइको और उनके भाई-बहनों को लंबे समय तक बंकरों में रहना पड़ा। धमाकों और हमलों की आवाजें उनके बचपन का हिस्सा बन गई थीं। हालांकि इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनके पिता का सख्त नियम था कि किसी भी हालत में पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। यही अनुशासन केइको के जीवन की नींव बना।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>19 साल की उम्र में फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको ने अमेरिका की स्टोनी ब्रूक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान 1994 में बड़ा बदलाव देखा। उनके माता-पिता के बीच विवाद बढ़ गया और परिवार टूटने की कगार पर पहुंच गया। उनकी मां सुजाना हिगुची ने पिता अल्बर्टो फुजीमोरी के सहयोगियों पर भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए। इस विवाद के कारण केइको को पढ़ाई बीच में छोड़कर पेरू लौटना पड़ा। सिर्फ 19 साल की उम्र में उन्हें देश की फर्स्ट लेडी की जिम्मेदारी सौंपी गई, क्योंकि उनके पिता ने उनकी मां को इस पद से हटा दिया था। इस फैसले ने उन्हें दुनिया की सबसे कम उम्र की फर्स्ट लेडी में शामिल कर दिया।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>आलोचना और शुरुआती राजनीतिक अनुभव</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">फर्स्ट लेडी बनने के बाद केइको को लगातार आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। अनुभवहीन होने के कारण उन्हें “किशोरी फर्स्ट लेडी” कहा गया। उन्होंने राष्ट्रपति भवन के कुछ हिस्सों को अपने पसंदीदा गुलाबी रंग से सजवाया, जो चर्चा का विषय बना। हालांकि केइको ने इन आलोचनाओं को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया और अपने काम पर ध्यान केंद्रित किया। यही शुरुआती अनुभव आगे चलकर उनकी राजनीतिक समझ और नेतृत्व क्षमता के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>जेल से लेकर राजनीतिक वापसी तक का सफर</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">केइको फुजीमोरी का जीवन सिर्फ सत्ता और सफलता का नहीं बल्कि विवादों और संघर्षों का भी रहा है। वर्ष 2018 में उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग और चुनावी फंडिंग से जुड़े मामलों में जेल जाना पड़ा। वे लगभग 13 महीने तक जेल में रहीं। इस दौरान उन्होंने अपनी दो बेटियों को पत्र लिखे, जिनमें उन्हें पढ़ाई, हिम्मत और परिवार के महत्व की सीख दी गई। इन पत्रों ने न केवल उनकी बेटियों को भावनात्मक सहारा दिया, बल्कि खुद केइको को भी कठिन समय में मानसिक शक्ति प्रदान की। रिहाई के बाद उन्होंने राजनीति में दोबारा सक्रिय भूमिका निभाई और लगातार जनता का समर्थन जुटाने में सफल रहीं।</p>
<h5 style="text-align:justify;"><span><strong>राजनीतिक जीत और नई जिम्मेदारी</strong></span></h5>
<p style="text-align:justify;">चुनाव में बेहद करीबी मुकाबले के बाद केइको फुजीमोरी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। यह उनकी चौथी कोशिश थी, जिसमें आखिरकार उन्हें सफलता मिली। अब राष्ट्रपति के रूप में उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना, भ्रष्टाचार पर नियंत्रण पाना और राजनीतिक स्थिरता स्थापित करना होगा। उनकी जीत न केवल व्यक्तिगत संघर्षों की कहानी है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि लगातार प्रयास और दृढ़ संकल्प से कठिन से कठिन लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। केइको फुजीमोरी का जीवन एक ऐसे सफर की कहानी है जिसमें बचपन का डर, पारिवारिक विवाद, राजनीतिक दबाव, जेल की सजा और अंततः ऐतिहासिक जीत शामिल है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 17:08:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>राहुल गांधी के बयान पर भड़के CM साय, कहा- लोकतांत्रिक मर्यादा टूटी</title>
                                    <description><![CDATA[CM विष्णुदेव साय ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के लिए अपमानजनक भाषा दुर्भाग्यपूर्ण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%AD%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%95%E0%A5%87-cm-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%AF--%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%95%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%9F%E0%A5%82%E0%A4%9F%E0%A5%80/article-53861"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/cm-vishnudeo-sai-rahul-gandhi&#039;s-statement.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर दिए गए बयान के बाद सियासी बहस और भी तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसा बयान देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जैसे उच्च संवैधानिक पदों के लिए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">‘<span lang="hi" xml:lang="hi">गद्दार</span>’ <span lang="hi" xml:lang="hi">जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना कांग्रेस की हताशा को दर्शाता है। इस मुद्दे पर राजनीतिक गलियारों में दिनभर चर्चा होती रही। भाजपा के नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ बताया है और कांग्रेस की ओर से भी जवाबी हमले जारी हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">मुख्यमंत्री साय ने ये भी कहा कि कांग्रेस अब सत्ता से दूर रहने के कारण मानसिक संतुलन खोती नजर आ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब लोकतंत्र की सीमाएं पार कर चुकी है और सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति पर उतर आई है। रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जिस नेतृत्व ने देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिलाई</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">आतंकवाद और नक्सलवाद के खिलाफ कड़े फैसले लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उसी नेतृत्व के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना निंदनीय है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जानकारी के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा संगठन भी इस बयान पर आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। प्रदेश के कई नेताओं ने सोशल मीडिया पर भी कांग्रेस पर निशाना साधा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सीएम साय ने आगे कहा कि लोकतंत्र में विरोध का पूरा स्थान है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियाँ और अपमानजनक भाषा किसी भी राजनीतिक दल के लिए उचित नहीं हैं। उनके अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रधानमंत्री और गृह मंत्री केवल व्यक्ति नहीं हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि वे देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में उनके खिलाफ इस तरह की बयानबाजी राजनीतिक परिपक्वता पर सवाल खड़े करती है। सूत्रों के मुताबिक</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">भाजपा इस मुद्दे को जल्दी ही और जोर-शोर से उठाने की योजना बना रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 21 May 2026 12:15:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा ने TMC पर चुनाव हाईजैक का आरोप, असम में कांग्रेस-AIDUF झड़पें; बंगाल में वोटर्स को धमकाने की शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[पांच राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज; राहुल गांधी केरल पहुंचे, तमिलनाडु में DMK घोषणापत्र चर्चा में]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/election/bjp-accuses-tmc-of-election-hijacking-congress-aiduf-clashes-in-assam/article-49558"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/tmc,-bjp,-assam,-.jpg" alt=""></a><br /><p>पश्चिम बंगाल में भाजपा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी TMC चुनाव को हाईजैक कर रही है। भाजपा प्रतिनिधि मंडल ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त से मिलकर शिकायत की कि राज्य में टीएमसी घर-घर जाकर मतदाताओं को डराकर धमका रही है। केंद्रीय मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि प्रशासनिक ढांचा, वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर निचले स्तर तक, TMC के नियंत्रण में काम कर रहा है। उन्होंने चुनाव आयोग से पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने की मांग की।</p>
<p>उधर, असम के श्रीभूमि में कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIDUF) के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई। यह घटना स्थानीय चुनाव प्रचार के दौरान हुई। AIDUF असम में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है और इसके समर्थकों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच टकराव से इलाके में तनाव बढ़ गया।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) के बाद चौथी सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट जारी की। हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने नाम जोड़े या हटाए गए। पहले प्रकाशित अंतिम सूची में लगभग 60 लाख नाम “निर्णयाधीन” के रूप में चिह्नित किए गए थे।</p>
<p>तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने चेन्नई के कोलाथुर सीट से नामांकन दाखिल किया। DMK का घोषणापत्र महिलाओं और छात्रों पर केंद्रित है। इसके तहत इनकम टैक्स दायरे से बाहर परिवारों की महिला मुखिया को ₹8,000 का कूपन मिलेगा, जिससे वे घरेलू उपकरण खरीद सकेंगी। DMK सांसद कनिमोझी ने कहा कि यह फ्रीबीज नहीं बल्कि सामाजिक निवेश है, जो आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा।</p>
<p>कांग्रेस नेता राहुल गांधी सोमवार को दिल्ली से केरल के लिए रवाना हुए। वे चुनाव प्रचार के तहत मीटिंग करेंगे और जनसभाओं को संबोधित करेंगे। वहीं, केरल में 85 वर्ष से अधिक उम्र और दिव्यांग मतदाताओं के लिए होम वोटिंग आज से शुरू हो गई। कुल 2.07 लाख से अधिक मतदाताओं ने इस सुविधा का लाभ लेने का विकल्प चुना।</p>
<p>युवा मतदाता वोटिंग को लेकर असमंजस में हैं। कई युवा NOTA विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जबकि कुछ सोचते हैं कि वोट देने से बदलाव नहीं आएगा। चुनाव आयोग ने ‘My Vote, My Strength’ अभियान शुरू किया है, ताकि युवाओं को मतदान के लिए जागरूक किया जा सके।</p>
<p>पश्चिम बंगाल में BJP और कांग्रेस उम्मीदवारों ने भी आरोप लगाए कि राज्य में योजनाओं का लाभ जनता तक नहीं पहुँच रहा और सरकार भत्तों पर निर्भर रही है। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने रोड शो के दौरान जनता का आशीर्वाद मिलने की जानकारी दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>चुनाव</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:11:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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