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                <title>Census 2026 - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Census 2026 RSS Feed</description>
                
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                <title>जनगणना में घर–गाड़ी की डिटेल छिपाई तो सीधा जाएंगे जेल, जुर्माना भी लगेगा</title>
                                    <description><![CDATA[जनगणना में घर, संपत्ति या गाड़ी की जानकारी छिपाने पर 3 साल की जेल और जुर्माने का प्रावधान। अधिकारियों ने प्रक्रिया में सख्ती बढ़ाई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/if-you-hide-the-details-of-house-and-vehicle-in/article-53193"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ---2026-05-12t143838.600.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जनगणना की प्रक्रिया के बीच देशभर में लोगों में जागरूकता और थोड़ी चिंता दोनों देखने को मिल रही है। इसके तहत तय किया गया है कि अगर कोई अपने घर</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">गाड़ी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">संपत्ति</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अन्य जानकारियाँ छिपाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे कड़ी सजा का सामना करना पड़ेगा। जनगणना अधिनियम 1948 की धारा 11 के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर कोई जानबूझकर तथ्य छिपाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसे एक हजार रुपये तक का जुर्माना या तीन साल तक की जेल हो सकती है। खास बात यह है कि यह नियम सिर्फ आम लोगों पर ही नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि जनगणना करने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होता है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">गोरखपुर में जनगणना के पांचवे दिन भी स्वगणना का काम जारी रहा। इस दौरान कई स्थानों पर लोगों द्वारा जानकारी छिपाने या कम बताने की खबरें आई हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रगणक और पर्यवेक्षक अब ज्यादा सतर्क हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अगर हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में कोई अनियमितता पाई जाती है</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसकी जिम्मेदारी प्रगणक पर भी होगी। और अगर किसी क्षेत्र में जनसंख्या या घरों की संख्या सामान्य से कम दिखाई देती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो पुनरीक्षण कराया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि पूरा फील्ड वर्क अब भौतिक सत्यापन के आधार पर किया जा रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि किसी भी गलती या जानबूझकर छिपाई गई जानकारी को पकड़ा जा सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जिला प्रशासन के अनुसार</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनगणना के दौरान टीमें हर घर जाकर सभी विवरणों की जांच कर रही हैं। अगर किसी के पास बड़ा मकान है और वह कम कमरे बता रहा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">या अगर परिवार में दो-तीन गाड़ियां हैं लेकिन सिर्फ एक गाड़ी दर्ज करवाई जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो इसकी अलग-अलग तरीकों से जांच की जाएगी। इसमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट और अन्य रिकॉर्ड भी देखे जाएंगे ताकि सही जानकारी सामने आ सके। जिला जनगणना अधिकारी का कहना है कि लोगों को किसी जानकारी को छिपाने की जरूरत नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि जनगणना का डेटा आयकर या किसी वित्तीय कार्रवाई से नहीं जुड़ा होता। यह सिर्फ सांख्यिकीय जानकारी के लिए है। फिर भी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अगर कोई जानबूझकर गलत जानकारी देता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">इस बीच</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जनगणना फॉर्म में पूछे जा रहे कुछ सवालों को लेकर भी चर्चा चल रही है। 34 सवालों की सूची में परिवार की संरचना</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सदस्यों की संख्या</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और दंपति से जुड़े सवाल शामिल हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो कई लोगों को अजीब लग रहे हैं। उदाहरण के लिए</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह भी पूछा जा रहा है कि परिवार में कितनी पत्नियां हैं और इस आधार पर परिवार की संरचना तय की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल सामाजिक और सांख्यिकीय डेटा को सही तरीके से रिकॉर्ड करना है। साथ ही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह स्पष्ट किया गया है कि परिवार का मुखिया किसी भी उम्र का व्यक्ति या महिला हो सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">यह परिवार की सहमति और स्थिति पर निर्भर करेगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">जनगणना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। जमीनी स्तर पर टीमें हर जानकारी की जाँच कर ही फीडिंग कर रही हैं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि भविष्य में किसी भी गड़बड़ी या विवाद की स्थिति न बने।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 May 2026 15:05:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनगणना 2026 में ठगी का खतरा, अधिकारियों की चेतावनी- क्यूआर कोड स्कैन करने से करें परहेज</title>
                                    <description><![CDATA[जनगणना 2026 में फर्जीवाड़े से बचने अलर्ट जारी। क्यूआर कोड स्कैन न करें, 1 मई से घर-घर सर्वे शुरू होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/census-2026-alert-issued-to-avoid-fraud-never-scan-any/article-51669"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-04/census-2026-india,-census-fraud-alert.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">छत्तीसगढ़ में चल रही जनगणना प्रक्रिया के बीच प्रशासन ने संभावित फर्जीवाड़े को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनधिकृत क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें और जानकारी साझा करने से पहले गणनाकर्मी की पहचान अवश्य जांचें। राज्य में 30 अप्रैल तक ऑनलाइन स्व-जनगणना का विकल्प खुला है, जबकि 1 मई से 30 मई के बीच गणनाकर्मी घर-घर जाकर परिवार और संपत्ति से जुड़ी जानकारी एकत्र करेंगे। इस दौरान साइबर ठगी या फर्जी पहचान के जरिए डेटा जुटाने की आशंका को देखते हुए यह चेतावनी जारी की गई है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">अधिकारियों के अनुसार, इस बार सभी गणनाकर्मियों को विशेष पहचान पत्र (आईडी) दिए गए हैं, जिन्हें दिखाना अनिवार्य होगा। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी व्यक्ति को जानकारी देने से पहले उसकी आधिकारिक पहचान की पुष्टि करें। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि जनगणना प्रक्रिया के दौरान किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्व-जनगणना प्रक्रिया</span></strong></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">स्व-जनगणना को इस बार एक वैकल्पिक सुविधा के रूप में पेश किया गया है। नागरिक चाहें तो स्वयं पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह वैकल्पिक है और इसमें भाग लेना अनिवार्य नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">यदि कोई व्यक्ति स्व-जनगणना नहीं करता है, तो भी उसे किसी तरह की परेशानी या दंड का सामना नहीं करना पड़ेगा। ऐसे मामलों में गणनाकर्मी घर जाकर आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डेटा सुरक्षा भरोसा</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">डेटा सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन ने भरोसा दिलाया है। अधिकारियों का कहना है कि जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सभी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। यह डेटा एन्क्रिप्टेड सर्वर पर सुरक्षित रहता है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय और विकास कार्यों के लिए किया जाता है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-जनगणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ हो सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं भी इस सुविधा के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज की है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाह या फर्जी संदेश से सावधान रहना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के नाम पर किसी प्रकार का क्यूआर कोड स्कैन करने या भुगतान करने की जरूरत नहीं है।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सटीक आंकड़े जुटाना है, जिससे सरकारी योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके। विशेषज्ञ मानते हैं कि सही डेटा के आधार पर ही शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को मजबूत किया जा सकता है।</span></p>
<p><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">आने वाले दिनों में जब घर-घर सर्वे शुरू होगा, तब प्रशासन की सबसे बड़ी चुनौती प्रक्रिया को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाए रखना होगी। नागरिकों की सतर्कता और सहयोग से ही यह लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।</span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                            <category>रायपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Apr 2026 14:55:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनगणना 2026: पहला चरण अप्रैल से, 33 सवाल और डिजिटल पोर्टल के साथ लाइव-इन कपल को शादीशुदा दर्जा</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए; घरों की सूची, बुनियादी सुविधाओं और जाति डेटा डिजिटल माध्यम से जुटाया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/census-2026-first-phase-33-questions-from-april-and-married/article-49562"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/census-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत में जनगणना 2026 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और यह सितंबर तक चलेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने इस चरण के लिए कुल 33 सवाल तय किए हैं, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि स्थिर संबंध में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को उनकी सहमति पर शादीशुदा माना जाएगा।</p>
<p>सरकार ने इस चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया है, जहां नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। पोर्टल में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) और सहायता विकल्प भी उपलब्ध होंगे। इस चरण को ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहा गया है, जिसका उद्देश्य घरों, बुनियादी सुविधाओं और उनकी स्थिति का विस्तृत आंकलन करना है।</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 30 दिनों में यह कार्य पूरा करेगा। इसके पहले नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प मिलेगा, जिससे घरों की जानकारी घर बैठे भर सकेंगे। 2021 की जनगणना महामारी के कारण स्थगित हुई थी और अब इसे 2027 में पूरा किया जाएगा।</p>
<p>इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। लगभग 30 लाख कर्मी मोबाइल ऐप और पोर्टल के माध्यम से डेटा संग्रह करेंगे। यह एप्लिकेशन एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। डिजिटल प्रक्रिया के अंतर्गत जाति आधारित डेटा भी शामिल किया जाएगा। यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा, जब जाति का विस्तृत आंकलन किया जाएगा।</p>
<p>सरकार ने हर घर पर ‘डिजी डॉट’ बनाने की योजना भी बनाई है, जिससे पांच प्रमुख लाभ होंगे:</p>
<p>आपदा प्रबंधन: डिजिटल लेआउट से बाढ़, भूकंप या बादल फटने जैसी आपदाओं में तुरंत राहत एवं बचाव की सुविधा मिलेगी।</p>
<p>परिसीमन और चुनावी सीमांकन: राजनीतिक सीमाओं का संतुलित और यथार्थ आधारित निर्धारण संभव होगा।</p>
<p>शहरी योजना: सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और पार्कों की योजना अधिक सटीक ढंग से बनाई जा सकेगी।</p>
<p>शहरीकरण और पलायन डेटा: समय के साथ प्रवास और शहरीकरण की दर का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा।</p>
<p>मतदाता सूची सुधार: आधार लिंक और जियो-टैगिंग से डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकेंगे।</p>
<p>2011 की पिछली जनगणना के अनुसार भारत की आबादी लगभग 121 करोड़ थी, जिसमें पुरुष 51.5% और महिलाएं 48.5% थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने जातिगत डेटा संग्रह को मंजूरी दी थी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से न केवल डेटा की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि सरकारी योजनाओं और संसाधनों के वितरण में भी पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:22:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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