<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.dainikjagranmpcg.com/digital-census/tag-6368" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>दैनिक जागरण RSS Feed Generator</generator>
                <title>Digital Census - दैनिक जागरण</title>
                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/tag/6368/rss</link>
                <description>Digital Census RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>डिजिटल जनगणना से बदलेगा पता सिस्टम, हर घर को मिलेगी यूनिक लोकेशन आईडी</title>
                                    <description><![CDATA[बिलासपुर में डिजिटल जनगणना के तहत हर घर को यूनिक लोकेशन आईडी मिलेगी। इससे एंबुलेंस, डिलीवरी और ड्रोन सेवाएं तेज और आसान होंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/address-system-will-change-due-to-digital-census-every-house/article-52774"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/आज-का-राशिफल-5-मई-2026-कर्क,-सिंह,-कुंभ-को-लाभ-(70).jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बिलासपुर में इस बार होने वाली डिजिटल जनगणना सिर्फ आबादी गिनने तक सीमित नहीं रहने वाली। इस प्रक्रिया के साथ शहर के एड्रेस सिस्टम में बड़ा बदलाव शुरू हो रहा है। पहली बार हर घर को यूनिक लोकेशन आईडी दी जाएगी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे हर मकान की अलग डिजिटल पहचान बनेगी। अधिकारियों के मुताबिक जनगणना के दौरान प्रगणक विशेष मोबाइल एप के जरिए घर-घर पहुंचकर मकानों की लोकेशन अक्षांश और देशांतर के आधार पर दर्ज कर रहे हैं। यानी अब सिर्फ मोहल्ला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">गली और मकान नंबर के भरोसे पता नहीं चलेगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि हर घर का सटीक डिजिटल एड्रेस तैयार होगा। नगर निगम क्षेत्र के हजारों मकान और संपत्तियां इस दायरे में लाई जा रही हैं। बताया जा रहा है कि यह पूरा लोकेशन डेटा ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जाएगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ताकि जरूरत पड़ने पर किसी भी पते की सटीक पहचान तुरंत हो सके।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">डिजिटल जनगणना का सबसे सीधा असर इमरजेंसी सेवाओं पर दिखेगा। अभी एंबुलेंस</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">फायर ब्रिगेड या पुलिस को कई बार सही पता ढूंढने में वक्त लग जाता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर नई कॉलोनियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">अपार्टमेंट और बिना स्पष्ट पते वाले इलाकों में। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कंट्रोल रूम से सीधे सटीक लोकेशन भेजी जा सकेगी और टीम बिना भटके मौके तक पहुंच सकेगी। इससे रिस्पॉन्स टाइम कम होगा</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो इमरजेंसी हालात में सबसे अहम माना जाता है। यही सिस्टम ऑनलाइन डिलीवरी नेटवर्क के लिए भी राहत देगा। अभी डिलीवरी एजेंट को कई बार ग्राहक को फोन कर रास्ता पूछना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन यूनिक लोकेशन आईडी और अपडेटेड जीपीएस मैपिंग के बाद यह झंझट काफी हद तक खत्म हो सकता है। भविष्य में ड्रोन डिलीवरी जैसी सेवाओं के लिए भी यही डिजिटल एड्रेस बेस काम करेगा। माना जा रहा है कि शहरों में लॉजिस्टिक नेटवर्क को इससे सीधा फायदा मिलेगा।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">प्रशासनिक स्तर पर भी इस डिजिटल जनगणना को काफी अहम माना जा रहा है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इससे सिर्फ जनसंख्या का आंकड़ा नहीं</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">बल्कि संपत्तियों</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किरायेदारों और शहरी ढांचे का व्यवस्थित रिकॉर्ड भी तैयार होगा। किस वार्ड में कितने मकान हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कहां किरायेदार ज्यादा हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">किन इलाकों में सड़क</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पानी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">सीवरेज या दूसरी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत ज्यादा है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इसका डेटा पहले से ज्यादा साफ तरीके से सामने आएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे शहरी प्लानिंग और संसाधनों के वितरण में आसानी होगी। साथ ही संपत्ति रिकॉर्ड व्यवस्थित होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और कई छोटे विवाद भी कम हो सकते हैं। बिलासपुर में शुरू हो रही यह व्यवस्था आने वाले समय में दूसरे शहरों के लिए भी मॉडल बन सकती है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्योंकि डिजिटल जनगणना अब सिर्फ लोगों की गिनती नहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शहर की डिजिटल मैपिंग का आधार बनती दिख रही है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/address-system-will-change-due-to-digital-census-every-house/article-52774</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/address-system-will-change-due-to-digital-census-every-house/article-52774</guid>
                <pubDate>Wed, 06 May 2026 15:54:13 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-05/%E0%A4%86%E0%A4%9C-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%AB%E0%A4%B2-5-%E0%A4%AE%E0%A4%88-2026-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%95%2C-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%2C-%E0%A4%95%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%AD-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AD-%2870%29.jpg"                         length="226892"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जनगणना 2026: पहला चरण अप्रैल से, 33 सवाल और डिजिटल पोर्टल के साथ लाइव-इन कपल को शादीशुदा दर्जा</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए; घरों की सूची, बुनियादी सुविधाओं और जाति डेटा डिजिटल माध्यम से जुटाया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/census-2026-first-phase-33-questions-from-april-and-married/article-49562"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/census-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत में जनगणना 2026 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और यह सितंबर तक चलेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने इस चरण के लिए कुल 33 सवाल तय किए हैं, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि स्थिर संबंध में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को उनकी सहमति पर शादीशुदा माना जाएगा।</p>
<p>सरकार ने इस चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया है, जहां नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। पोर्टल में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) और सहायता विकल्प भी उपलब्ध होंगे। इस चरण को ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहा गया है, जिसका उद्देश्य घरों, बुनियादी सुविधाओं और उनकी स्थिति का विस्तृत आंकलन करना है।</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 30 दिनों में यह कार्य पूरा करेगा। इसके पहले नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प मिलेगा, जिससे घरों की जानकारी घर बैठे भर सकेंगे। 2021 की जनगणना महामारी के कारण स्थगित हुई थी और अब इसे 2027 में पूरा किया जाएगा।</p>
<p>इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। लगभग 30 लाख कर्मी मोबाइल ऐप और पोर्टल के माध्यम से डेटा संग्रह करेंगे। यह एप्लिकेशन एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। डिजिटल प्रक्रिया के अंतर्गत जाति आधारित डेटा भी शामिल किया जाएगा। यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा, जब जाति का विस्तृत आंकलन किया जाएगा।</p>
<p>सरकार ने हर घर पर ‘डिजी डॉट’ बनाने की योजना भी बनाई है, जिससे पांच प्रमुख लाभ होंगे:</p>
<p>आपदा प्रबंधन: डिजिटल लेआउट से बाढ़, भूकंप या बादल फटने जैसी आपदाओं में तुरंत राहत एवं बचाव की सुविधा मिलेगी।</p>
<p>परिसीमन और चुनावी सीमांकन: राजनीतिक सीमाओं का संतुलित और यथार्थ आधारित निर्धारण संभव होगा।</p>
<p>शहरी योजना: सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और पार्कों की योजना अधिक सटीक ढंग से बनाई जा सकेगी।</p>
<p>शहरीकरण और पलायन डेटा: समय के साथ प्रवास और शहरीकरण की दर का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा।</p>
<p>मतदाता सूची सुधार: आधार लिंक और जियो-टैगिंग से डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकेंगे।</p>
<p>2011 की पिछली जनगणना के अनुसार भारत की आबादी लगभग 121 करोड़ थी, जिसमें पुरुष 51.5% और महिलाएं 48.5% थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने जातिगत डेटा संग्रह को मंजूरी दी थी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से न केवल डेटा की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि सरकारी योजनाओं और संसाधनों के वितरण में भी पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

                <link>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/census-2026-first-phase-33-questions-from-april-and-married/article-49562</link>
                <guid>https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/census-2026-first-phase-33-questions-from-april-and-married/article-49562</guid>
                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:22:10 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/2026-03/census-2026.jpg"                         length="179847"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        