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                <title>Government Scheme - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Government Scheme RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई को लहार दौरे पर, लाड़ली बहना योजना की 38वीं किस्त करेंगे जारी</title>
                                    <description><![CDATA[भिण्ड जिले के लहार में आयोजित कार्यक्रम से मुख्यमंत्री लाभार्थियों के खातों में राशि हस्तांतरित करेंगे। साथ ही भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा की माताजी के निधन पर उनके निवास पहुंचकर श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/chief-minister-dr-mohan-yadav-will-release-the-38th-installment/article-58452"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/mohan-yadav-(3).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 12 जुलाई को भिण्ड जिले के लहार के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे प्रदेश की महत्वाकांक्षी <strong>लाड़ली बहना योजना</strong> की 38वीं किस्त की राशि प्रदेशभर की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सिंगल क्लिक के माध्यम से हस्तांतरित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और लाभार्थी महिलाओं के शामिल होने की संभावना है। मुख्यमंत्री लहार पहुंचने के बाद भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा (गुड्डू) के निवास भी जाएंगे, जहां वे उनकी माताजी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा पहले मेहगांव में प्रस्तावित था, लेकिन अंतिम समय में कार्यक्रम में बदलाव कर इसे लहार स्थानांतरित कर दिया गया। गुरुवार देर रात इस बदलाव की आधिकारिक जानकारी सामने आई, जिसके बाद प्रशासन ने नई व्यवस्थाओं के अनुसार तैयारियां तेज कर दीं।</p>
<p>मुख्यमंत्री का कार्यक्रम दोपहर करीब 1 बजे शुरू होगा और वे लगभग दो घंटे तक लहार में रहेंगे। इस दौरान उनका सार्वजनिक कार्यक्रम दोपहर 3 बजे तक प्रस्तावित है। गुरुवार शाम तक कार्यक्रम स्थल को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। प्रशासन की ओर से बारिश की संभावना को देखते हुए ऐसे स्थान की तलाश की जा रही थी, जहां बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के बावजूद आयोजन सुचारु रूप से कराया जा सके। अधिकारियों के अनुसार कार्यक्रम के लिए पक्के और सुरक्षित स्थल को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, मंच व्यवस्था, पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो। इससे पहले जब कार्यक्रम मेहगांव में प्रस्तावित था, तब भी संबंधित अधिकारियों ने मंडी परिसर का निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश दिए थे। अब कार्यक्रम स्थल बदलने के बाद पूरी तैयारियों को नए सिरे से व्यवस्थित किया जा रहा है।</p>
<p>लाड़ली बहना योजना मध्यप्रदेश सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में शामिल है। इस योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है, जिससे उन्हें घरेलू जरूरतों को पूरा करने और आर्थिक रूप से सशक्त बनने में मदद मिलती है। योजना की प्रत्येक किस्त का लाभ प्रदेश की लाखों महिलाओं को मिलता है और लाभार्थी हर माह निर्धारित तिथि का इंतजार करती हैं। 12 जुलाई को जारी होने वाली 38वीं किस्त भी सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ऑनलाइन हस्तांतरित की जाएगी। सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और परिवार में उनकी भागीदारी को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान योजना से जुड़ी अन्य जानकारियां भी साझा की जा सकती हैं। वहीं, मुख्यमंत्री का भाजपा विधायक अम्बरीश शर्मा के निवास पहुंचकर उनकी माताजी को श्रद्धांजलि देना भी कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा रहेगा। हाल ही में विधायक की माताजी का निधन हुआ था, जिसके बाद मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से शोक व्यक्त करने के लिए उनके निवास जाने वाले हैं। मुख्यमंत्री के लहार आगमन की सूचना मिलते ही विधायक अम्बरीश शर्मा ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कार्यकर्ताओं को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंपते हुए कार्यक्रम को व्यवस्थित और सफल बनाने के निर्देश दिए। दूसरी ओर प्रशासन भी मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर स्थानीय स्तर पर भी उत्साह देखा जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं। लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त का इंतजार कर रहीं लाभार्थी महिलाओं के लिए भी यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसी दौरान उनके खातों में नई किस्त की राशि हस्तांतरित की जाएगी। ऐसे में 12 जुलाई का यह दौरा भिण्ड जिले के साथ-साथ प्रदेशभर की लाखों महिलाओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 00:01:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ओबीसी छात्रों के लिए सुनहरा अवसर, गोगांव खेल परिसर में प्रवेश प्रक्रिया शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[6 जुलाई तक निशुल्क आवेदन, 7 जुलाई को होगी शारीरिक दक्षता परीक्षा; चयनित विद्यार्थियों को आवास, भोजन, छात्रवृत्ति समेत सभी सुविधाएं मिलेंगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/golden-opportunity-for-obc-students-admission-process-started-in-gogaon/article-57784"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/gogawan-sports-complex.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रतिभाशाली और खेलों में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। खरगोन जिले के शासकीय बालक खेल परिसर (अन्य पिछड़ा वर्ग), गोगांव में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस खेल परिसर में प्रवेश केवल ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए होगा। इच्छुक अभ्यर्थी 6 जुलाई 2026 की शाम 4 बजे तक निशुल्क आवेदन जमा कर सकते हैं। चयन प्रक्रिया 7 जुलाई को आयोजित होने वाली शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर पूरी की जाएगी।</p>
<p>खेल एवं युवा कल्याण विभाग तथा संबंधित प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार इस खेल परिसर का उद्देश्य ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, शिक्षा और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश एवं देश का नाम रोशन कर सकें। खेल परिसर में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ विभिन्न खेलों का नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।</p>
<p>प्रवेश प्रक्रिया के तहत कक्षा 6वीं, 7वीं और 8वीं में अध्ययनरत अथवा प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। पात्रता के अनुसार कक्षा 6वीं के लिए न्यूनतम आयु 11 वर्ष, कक्षा 7वीं के लिए 12 वर्ष और कक्षा 8वीं के लिए 13 वर्ष निर्धारित की गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खेल प्रतिभा रखने वाले विद्यार्थियों के साथ-साथ अच्छे शारीरिक गठन और फिटनेस वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी।</p>
<p>आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह निशुल्क रखी गई है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्र भी बिना किसी शुल्क के आवेदन कर सकें। आवेदन पत्र कार्यालयीन दिवसों में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला, बाजार चौक, गोगांव स्थित खेल परिसर कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। निर्धारित तिथि तक आवेदन जमा करना अनिवार्य होगा। समय सीमा समाप्त होने के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।</p>
<p>चयन प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण चरण 7 जुलाई को आयोजित होने वाली शारीरिक दक्षता परीक्षा होगी। यह परीक्षा सुबह 9 बजे से खेल परिसर में आयोजित की जाएगी। इसमें अभ्यर्थियों की शारीरिक क्षमता, दौड़, फुर्ती, संतुलन, सहनशक्ति और खेल प्रतिभा का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन सूची तैयार की जाएगी। विभाग का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का चयन करना है, जिनमें भविष्य में उत्कृष्ट खिलाड़ी बनने की क्षमता हो।</p>
<p>शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने वाले सभी विद्यार्थियों को आवश्यक दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य होगा। अभ्यर्थियों को अपनी पिछली कक्षा की अंकसूची, वैध जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक खाते की छायाप्रति, दो पासपोर्ट आकार के रंगीन फोटो और स्पोर्ट्स किट साथ लानी होगी। स्पोर्ट्स किट में टी-शर्ट, निकर तथा खेल जूते पहनकर आना अनिवार्य किया गया है ताकि परीक्षा निष्पक्ष और सुविधाजनक ढंग से आयोजित की जा सके।</p>
<p>चयनित विद्यार्थियों को शासन की ओर से कई महत्वपूर्ण सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएंगी। इनमें छात्रावास में आवास, पौष्टिक भोजन, नाश्ता, स्कूल गणवेश, ट्रैकसूट, खेल जूते, मोजे, छात्रवृत्ति और अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है। इसके अलावा विद्यार्थियों को नियमित खेल प्रशिक्षण, फिटनेस कार्यक्रम और अनुभवी प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन भी मिलेगा।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के खेल परिसर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के खिलाड़ियों के लिए बड़े अवसर साबित हो रहे हैं। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण बेहतर प्रशिक्षण नहीं ले पाते, लेकिन सरकारी खेल परिसरों के माध्यम से उन्हें आधुनिक सुविधाएं, प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एक ही स्थान पर उपलब्ध हो जाती है। इससे खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर मंच मिलता है।</p>
<p>खेल परिसर में विद्यार्थियों की पढ़ाई और खेल गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है। नियमित शैक्षणिक कक्षाओं के साथ-साथ सुबह और शाम खेल प्रशिक्षण कराया जाता है। प्रशिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी कौशल और मानसिक मजबूती पर भी लगातार काम किया जाता है। इससे छात्र भविष्य में राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो पाते हैं।</p>
<p>राज्य सरकार लगातार खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। खेल परिसरों के माध्यम से खिलाड़ियों को आधुनिक प्रशिक्षण, पोषण और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। गोगांव खेल परिसर में शुरू हुई प्रवेश प्रक्रिया भी इसी पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य ओबीसी वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर खेल वातावरण उपलब्ध कराना है।</p>
<p>खेल विभाग ने पात्र विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से समय रहते आवेदन करने की अपील की है। विभाग का कहना है कि निर्धारित तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसलिए इच्छुक अभ्यर्थी सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ समय पर आवेदन जमा करें और शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होकर इस अवसर का लाभ उठाएं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 18:25:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>आज से लागू हुआ VB-G RAM G कानून, अब 125 दिन रोजगार की गारंटी और बढ़ी मजदूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मनरेगा की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) लागू, दिहाड़ी बढ़कर ₹327.40 प्रतिदिन हुई, नए रोजगार गारंटी कार्ड भी जारी होंगे]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/vb-gram-g-law-came-into-effect-from-today-now/article-57523"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/vb-g-ram-g.jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer" style="text-align:justify;">देशभर के ग्रामीण श्रमिकों और जरूरतमंद परिवारों के लिए बुधवार से एक बड़ा बदलाव लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की जगह विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 यानी VB-G RAM G को लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। इसके साथ ही मजदूरी की औसत दर में भी वृद्धि की गई है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों की आय बढ़ने की उम्मीद है। नई योजना लागू होने के साथ ही देशभर में औसत दैनिक मजदूरी लगभग 299 रुपये से बढ़ाकर 327.40 रुपये कर दी गई है। यानी प्रत्येक कार्य दिवस पर औसतन करीब 28 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, आजीविका को मजबूत करना और गांवों में विकास कार्यों को गति देना है। इससे लाखों परिवारों को सीधे तौर पर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार नई योजना के सफल संचालन के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को लगभग 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई गई है। इस धनराशि का उपयोग मजदूरी भुगतान, विकास कार्यों और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में किया जाएगा ताकि श्रमिकों को समय पर भुगतान मिल सके और किसी भी स्तर पर काम प्रभावित न हो।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन लाभार्थियों के पुराने जॉब कार्ड का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, वे नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड मिलने तक पुराने कार्ड के आधार पर ही काम कर सकेंगे। इससे योजना के लागू होने के दौरान किसी भी श्रमिक को रोजगार से वंचित नहीं होना पड़ेगा। नए कार्ड चरणबद्ध तरीके से वितरित किए जाएंगे और सभी पात्र परिवारों को इसमें शामिल किया जाएगा। नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भूमिका पहले की तरह महत्वपूर्ण रहेगी। गांवों में कौन-कौन से विकास कार्य किए जाएंगे, उनकी प्राथमिकता तय करना, श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराना और कार्यों की निगरानी करना पंचायतों की जिम्मेदारी होगी। सरकार ने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, खेत तालाब निर्माण, ग्रामीण सड़कें, कृषि विकास, महिला सशक्तीकरण और सामुदायिक परिसंपत्तियों के निर्माण जैसे कार्यों को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">रोजगार के दिनों में 25 दिन की बढ़ोतरी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। जिन परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत मजदूरी है, उनके लिए अतिरिक्त रोजगार का अवसर आर्थिक स्थिरता लाने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से कृषि क्षेत्र को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है। योजना के वित्तीय प्रावधानों में भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। सामान्य राज्यों में योजना का 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकारें वहन करेंगी। वहीं हिमालयी राज्यों, पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी। इससे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी योजना के प्रभावी संचालन का रास्ता आसान होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">नई व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी रखा गया है कि बुवाई और कटाई जैसे कृषि के व्यस्त मौसम में राज्य सरकारें अधिकतम 60 दिनों तक योजना के अंतर्गत दिए जाने वाले कार्यों को सीमित कर सकेंगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि खेती के महत्वपूर्ण समय में किसानों को मजदूरों की उपलब्धता बनी रहे और कृषि कार्य प्रभावित न हों। हालांकि अन्य समय में रोजगार की कानूनी गारंटी पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार लागू रहेगी। ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया तो इसका लाभ केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे ग्रामीण बुनियादी ढांचे में सुधार, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला भागीदारी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के स्थायी अवसर भी बढ़ सकते हैं। मजदूरी में वृद्धि से ग्रामीण बाजारों में मांग बढ़ने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार के अनुसार देश के अधिकांश राज्यों ने नई योजना के लिए आवश्यक बजटीय प्रावधान कर दिए हैं और बड़ी संख्या में राज्यों ने अपनी राज्य स्तरीय कार्ययोजना भी तैयार कर ली है। राष्ट्रीय स्तर पर इसका औपचारिक शुभारंभ आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले से किया जा रहा है, जहां लाभार्थियों को नए रोजगार गारंटी कार्ड वितरित किए जाएंगे और योजना की विस्तृत जानकारी भी दी जाएगी। VB-G RAM G कानून का उद्देश्य ग्रामीण भारत में रोजगार सुरक्षा को मजबूत करना, मजदूरी बढ़ाना और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है। 125 दिन की रोजगार गारंटी और बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहारा मिलने की उम्मीद है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 15:14:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के तहत झाबुआ से हरिद्वार-ऋषिकेश के लिए 191 श्रद्धालु रवाना</title>
                                    <description><![CDATA[मेघनगर रेलवे स्टेशन से भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन को मंत्री निर्मला भूरिया ने दिखाई हरी झंडी, चार दिन की यात्रा में वरिष्ठ नागरिकों के लिए भोजन, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की विशेष व्यवस्था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/191-devotees-leave-from-jhabua-for-haridwar-rishikesh-under-chief-minister/article-56997"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/mukhyamantri-teerth-darshan-yojana.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के तहत झाबुआ जिले के 191 वरिष्ठ नागरिकों का दल शुक्रवार को हरिद्वार और ऋषिकेश की चार दिवसीय धार्मिक यात्रा पर रवाना हुआ। मेघनगर रेलवे स्टेशन पर आयोजित कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने भारत गौरव टूरिस्ट ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर यात्रा की शुरुआत कराई। स्टेशन परिसर में सुबह से ही श्रद्धालुओं और उनके परिजनों की भीड़ जुटी रही। कई बुजुर्ग पहली बार हरिद्वार और ऋषिकेश की यात्रा पर जा रहे थे, इसलिए उनके चेहरों पर उत्साह और भावुकता दोनों साफ दिखाई दे रहे थे। यात्रा शुरू होने से पहले सभी तीर्थयात्रियों का पुष्पमालाओं से स्वागत किया गया और उन्हें प्रतीकात्मक यात्रा टिकट भी सौंपे गए। अधिकारियों ने यात्रियों को यात्रा के दौरान पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देशों की जानकारी दी और सुरक्षित यात्रा की शुभकामनाएं दीं। इस तीर्थयात्रा दल में 191 श्रद्धालुओं के अलावा चार अनुरक्षक और पांच सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं, जिनकी जिम्मेदारी पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और अन्य व्यवस्थाओं का ध्यान रखना है। शासन की ओर से भोजन, आवास, चिकित्सा सुविधा और आवागमन सहित सभी आवश्यक इंतजाम पहले से सुनिश्चित किए गए हैं ताकि किसी भी यात्री को असुविधा का सामना न करना पड़े।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और उनकी धार्मिक आस्था को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना का सफल संचालन कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज और परिवार के लिए पूरी जिंदगी समर्पित करने वाले बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक तीर्थ यात्रा का अवसर देना सरकार की जिम्मेदारी है। कई ऐसे वरिष्ठ नागरिक होते हैं जो आर्थिक या अन्य कारणों से वर्षों तक अपने मन की धार्मिक यात्रा पूरी नहीं कर पाते। इस योजना के माध्यम से उनकी वर्षों पुरानी इच्छा पूरी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास केवल यात्रा कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि बुजुर्ग सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण में अपनी यात्रा पूरी करें। इसी उद्देश्य से यात्रा के हर चरण के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की गई हैं। भोजन की गुणवत्ता, रहने की सुविधा, चिकित्सकीय सहायता और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया है। यात्रा के दौरान किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या से निपटने के लिए आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध रहेगी। अधिकारियों के अनुसार पूरी यात्रा की लगातार निगरानी की जाएगी ताकि किसी भी स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. योगेश तुकाराम भरसट ने भी वरिष्ठ नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं और उन्होंने अपने जीवन में परिवार, समाज तथा देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शासन की यह योजना उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक प्रयास है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि यात्रा के दौरान स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी आवश्यकता की स्थिति में साथ मौजूद अधिकारियों और अनुरक्षकों से तुरंत संपर्क करें। उन्होंने विश्वास जताया कि सभी श्रद्धालु सुरक्षित यात्रा पूरी कर सुखद अनुभवों के साथ वापस लौटेंगे। कार्यक्रम में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जितेंद्र सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष भानु भूरिया, एसडीएम मेघनगर अवंधती प्रधान सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी अपने परिजनों को विदा करने स्टेशन पहुंचे थे। ट्रेन रवाना होने के दौरान श्रद्धालुओं ने हाथ हिलाकर परिजनों का अभिवादन किया, वहीं परिजनों ने भी उनकी सुखद और सुरक्षित यात्रा की कामना की। मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश सरकार लगातार विभिन्न धार्मिक स्थलों के लिए वरिष्ठ नागरिकों की यात्राएं संचालित कर रही है। योजना का उद्देश्य केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं बल्कि उन लोगों की वर्षों पुरानी आस्था को सम्मान देना भी है, जो अपने जीवन की जिम्मेदारियों के कारण तीर्थ यात्रा नहीं कर सके। प्रशासन का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह की यात्राओं का सिलसिला जारी रहेगा ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक पात्र वरिष्ठ नागरिक इस योजना का लाभ उठा सकें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 13:24:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर का भूमिपूजन आज, 48 KM फोरलेन से बदलेगा सफर</title>
                                    <description><![CDATA[2935 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला ग्रीन फील्ड कॉरिडोर इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा को तेज और सुगम बनाएगा, 28 गांव होंगे सीधे कनेक्ट]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/bhoomi-pujan-of-indore-ujjain-green-field-corridor-today-journey-will/article-56450"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/indore-ujjain-green-field-corridor.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना का भूमिपूजन आज शनिवार को किया जा रहा है। चंद्रावतीगंज, सांवेर विधानसभा क्षेत्र में सुबह 11 बजे इस महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शहरी विकास एवं आवास मंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा की जाएगी। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। यह परियोजना मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जो आने वाले समय में इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा को पूरी तरह बदल सकती है। करीब 48 किलोमीटर लंबा यह फोरलेन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर लगभग 2935 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। यह मार्ग इंदौर के पितृ पर्वत क्षेत्र से शुरू होकर उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर के पास सिंहस्थ बायपास तक पहुंचेगा। इस सड़क के बनने से दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगा। खासकर धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह मार्ग बड़ी सुविधा साबित होगा।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस परियोजना को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को देखते हुए सरकार इस कॉरिडोर को एक प्रमुख वैकल्पिक मार्ग के रूप में विकसित कर रही है, ताकि भीड़भाड़ और ट्रैफिक दबाव को नियंत्रित किया जा सके। इंदौर एयरपोर्ट से सीधे उज्जैन तक तेज कनेक्टिविटी मिलने से बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। यह मार्ग धार्मिक पर्यटन को भी नई गति देने वाला माना जा रहा है। ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना के तहत कुल 917 किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसकी कुल प्रभावित भूमि लगभग 242.939 हेक्टेयर है। इसके बदले सरकार ने किसानों को 816 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा वितरित किया है। प्रशासन के अनुसार यह पहली बार है जब किसानों को कलेक्टर गाइडलाइन की बजाय बाजार और बिक्री दरों के आधार पर 4 से 8 गुना अधिक मुआवजा दिया गया है। इस निर्णय से किसानों में संतोष और सहमति का माहौल देखा जा रहा है। परियोजना से इंदौर जिले के 20 गांव और उज्जैन जिले के 8 गांव सीधे तौर पर जुड़ेंगे। इसके अलावा आसपास के लगभग 40 से 50 गांवों के करीब 15 लाख लोगों को भी इस सड़क का अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने से व्यापार, कृषि उत्पादों की आवाजाही और स्थानीय रोजगार के अवसरों में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। यह मार्ग क्षेत्रीय विकास का एक नया केंद्र बन सकता है।</p>
<p class="isSelectedEnd" style="text-align:justify;">इस कॉरिडोर के निर्माण से इंदौर और उज्जैन के बीच औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है। माल परिवहन तेज होगा और लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आएगी, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की आर्थिक संरचना को मजबूत करने वाली योजना है। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि परियोजना का निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा और इसमें आधुनिक तकनीक और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। सड़क की गुणवत्ता, जल निकासी व्यवस्था और यातायात सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। निर्माण के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी विशेष उपाय किए जाएंगे। इंदौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड कॉरिडोर परियोजना मध्यप्रदेश के लिए एक गेमचेंजर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साबित हो सकती है। यह न केवल यात्रा को तेज और आसान बनाएगी, बल्कि क्षेत्रीय विकास, धार्मिक पर्यटन और आर्थिक प्रगति को भी नई दिशा देगी। आने वाले वर्षों में यह कॉरिडोर राज्य की सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी परियोजनाओं में गिना जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jun 2026 12:48:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एथेनॉल मिक्स पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी खत्म, सरकार का बड़ा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[22% से 30% एथेनॉल ब्लेंडिंग वाले पेट्रोल को टैक्स फ्री कर क्रूड ऑयल इम्पोर्ट घटाने और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने की तैयारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/top-news/governments-big-decision-to-end-excise-duty-on-ethanol-mix/article-55588"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ethanol-blended-petrol-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने देश में ऊर्जा नीति को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल में अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी को खत्म कर दिया है। नए नियमों के अनुसार 22% से लेकर 30% तक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर अब कोई एक्साइज ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार का मकसद देश में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के आयात को कम करना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना बताया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक इस टैक्स छूट के दायरे में E22, E25, E27 और E30 जैसे नए फ्यूल वेरिएंट शामिल होंगे। हालांकि पहले से लागू E20 यानी 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर इस फैसले का कोई सीधा लाभ नहीं दिया गया है। यह पहली बार है जब सरकार ने हाई लेवल एथेनॉल ब्लेंडिंग को वित्तीय प्रोत्साहन देकर बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। एथेनॉल एक प्रकार का अल्कोहल है, जिसे जैविक स्रोतों से तैयार किया जाता है। यह मुख्य रूप से गन्ने के रस, मक्का और अन्य स्टार्च आधारित फसलों से बनाया जाता है। इसे पेट्रोल में मिलाकर ईंधन को अधिक पर्यावरण अनुकूल बनाया जाता है, जिससे प्रदूषण में कमी और आयात पर निर्भरता घटाने में मदद मिलती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 87% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जो देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाकर विदेशी मुद्रा की बचत की जा सकती है और किसानों को भी उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिल सकता है। एथेनॉल उत्पादन को लेकर देश में तीन प्रमुख श्रेणियां मानी जाती हैं। फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ना, मक्का और मीठे फसलों से बनाया जाता है। सेकेंड जनरेशन एथेनॉल कृषि अवशेषों जैसे भूसी, बांस और वेस्ट मटेरियल से तैयार होता है। वहीं थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल अभी विकास के चरण में है, जो मुख्य रूप से एल्गी (शैवाल) पर आधारित होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने इस नीति को लागू करने से पहले तकनीकी तैयारियों पर भी काम किया है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने E22 से E30 तक के फ्यूल ब्लेंड्स के लिए गुणवत्ता मानक तय कर दिए हैं। इन मानकों में ऑक्टेन रेटिंग, सल्फर लेवल, सुरक्षा मानक और टेस्टिंग प्रोसेस शामिल हैं। ये नियम मई 2026 से प्रभावी हो चुके हैं, जिससे इस ईंधन को व्यावसायिक रूप से अपनाने का रास्ता साफ हो गया है। भारत का एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ा है। पहले जहां 2030 तक E20 लक्ष्य रखा गया था, उसे बाद में संशोधित कर 2025-26 तक कर दिया गया। सरकारी तेल कंपनियों ने 10% ब्लेंडिंग का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया था, जिससे इस नीति की गति का अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कुछ उपभोक्ताओं ने चिंता भी जताई है। खासकर पुरानी गाड़ियों में माइलेज कम होने और इंजन पर असर पड़ने की आशंका को लेकर सवाल उठे थे। यह मामला न्यायालय तक भी पहुंचा था, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने E20 फ्यूल के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि यह बदलाव पूरी तरह तकनीकी जांच के बाद लागू किया गया है और इससे किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। साथ ही, ऑटोमोबाइल कंपनियों ने भी स्पष्ट किया है कि E20 या उससे कम ब्लेंड वाले ईंधन से वाहन की सुरक्षा पर कोई बड़ा खतरा नहीं है, हालांकि माइलेज में मामूली अंतर संभव है। वर्तमान में एक चुनौती यह भी है कि एथेनॉल की लागत कई बार पेट्रोल से अधिक पड़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार ट्रांसपोर्ट और GST मिलाकर एथेनॉल की औसत लागत लगभग 71 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है, जिससे रिटेल फ्यूल प्राइस को कम करना आसान नहीं हो पा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>टॉप न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 11:04:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>उज्ज्वला योजना में बड़ा बदलाव: अब सिर्फ 4 सिलेंडर पर मिलेगी ₹300 सब्सिडी</title>
                                    <description><![CDATA[अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बीच सरकार का फैसला, उज्ज्वला लाभार्थियों को साल में केवल चार रिफिल पर अतिरिक्त राहत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-ujjwala-scheme-now-only-4-cylinders-will/article-55370"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/ujjwala-scheme.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की करोड़ों महिलाओं से जुड़ी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) में बड़ा बदलाव किया गया है। अब योजना के लाभार्थियों को सालभर में केवल पहले चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही 300 रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी। इससे पहले यह लाभ नौ सिलेंडरों तक उपलब्ध था। पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है। सरकार का कहना है कि बढ़ती लागत के बावजूद भारत में घरेलू उपभोक्ताओं को दुनिया का सबसे सस्ता रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सोमवार को हुई एक आधिकारिक ब्रीफिंग में पेट्रोलियम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खनूजा ने कहा कि अमेरिका-ईरान संघर्ष और पश्चिम एशिया में बने हालात का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। खास तौर पर एलपीजी की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में करीब 46 फीसदी तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर भारत पर भी पड़ा क्योंकि देश अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है, जबकि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सब्सिडी के बाद यह सिलेंडर 642 रुपये में मिल रहा है। हालांकि अब यह अतिरिक्त राहत केवल चार सिलेंडरों तक सीमित रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार का कहना है कि घरेलू गैस सिलेंडर की वास्तविक लागत अब 1600 रुपये से भी अधिक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद उपभोक्ताओं से कम कीमत वसूली जा रही है, जिससे सरकारी तेल कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार हर घरेलू सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये की अंडर-रिकवरी हो रही है। पिछले वित्त वर्ष के अंत तक घरेलू एलपीजी पर कुल अंडर-रिकवरी बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा करीब 41 हजार करोड़ रुपये था। इस स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की सहायता देने की मंजूरी दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने यह भी बताया कि सिर्फ एलपीजी ही नहीं बल्कि पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भी कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। मौजूदा हालात में डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 6 रुपये प्रति लीटर तक का घाटा बताया जा रहा है। इससे तेल विपणन कंपनियों को प्रतिदिन 600 से 700 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा है। हालांकि सरकार ने अभी तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई पूरी बढ़ोतरी का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई। फरवरी में एलपीजी का सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस लगभग 543 डॉलर प्रति टन था, जो जून तक बढ़कर 790 डॉलर प्रति टन पहुंच गया। इससे प्रोपेन और ब्यूटेन दोनों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई। यही वजह है कि भारत सहित कई देशों में गैस की लागत बढ़ी है। फिर भी सरकार दावा कर रही है कि अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई पड़ोसी देशों की तुलना में भारतीय उपभोक्ताओं को काफी कम कीमत पर रसोई गैस उपलब्ध कराई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिलचस्प बात यह है कि जहां घरेलू उपभोक्ता लगभग 66 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गैस प्राप्त कर रहे हैं, वहीं होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक संस्थानों को 19 किलोग्राम का कमर्शियल सिलेंडर दिल्ली में 3113.50 रुपये में मिल रहा है। यानी उनकी लागत करीब 164 रुपये प्रति किलोग्राम बैठ रही है। कमर्शियल गैस की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुसार हर महीने स्वतः तय होती हैं और हाल के महीनों में इनमें लगातार बढ़ोतरी देखी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखने के लिए भारत ने कई कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनाव के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही जारी रखी गई और देश में किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं होने दी गई। साथ ही घरेलू एलपीजी उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी की गई। गैस की खरीद अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से भी शुरू की गई ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। उपलब्ध गैस आपूर्ति में घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर गैस की चोरी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए भी निगरानी बढ़ाई गई है। सरकार ने ओटीपी आधारित डिलीवरी सत्यापन को 90 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसके अलावा लोगों को पाइप्ड नेचुरल गैस यानी पीएनजी के उपयोग के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होने तक ऊर्जा कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। ऐसे में सरकार और तेल कंपनियों के सामने उपभोक्ताओं को राहत देने और बढ़ती लागत के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती बनी रहेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 11:29:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>छत्तीसगढ़ में 9 जून से शुरू होगी CM हेल्पलाइन 1076, एक कॉल पर दर्ज होगी शिकायत</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय करेंगे शुभारंभ, कॉल, व्हाट्सएप, मोबाइल ऐप और पोर्टल के जरिए नागरिक दर्ज करा सकेंगे शिकायत]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/cm-helpline-1076-will-start-in-chhattisgarh-from-june-9/article-54827"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/cm-helpline-1076.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ की जनता के लिए प्रशासनिक सेवाओं और शिकायत निवारण को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। राज्य सरकार 9 जून से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 शुरू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के जरिए आम नागरिक अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकेंगे और उनके समाधान की प्रक्रिया की निगरानी भी की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय इस हेल्पलाइन सेवा का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। सरकार का दावा है कि यह व्यवस्था जनता और प्रशासन के बीच की दूरी को कम करेगी तथा शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निराकरण में मदद करेगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">राज्य शासन के अधिकारियों के अनुसार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 को सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से नागरिकों को विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार शिकायतों के निपटारे में देरी होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। नई हेल्पलाइन व्यवस्था का उद्देश्य इसी प्रक्रिया को सरल और प्रभावी बनाना है। हेल्पलाइन के संचालन को लेकर मंत्रालय स्थित महानदी भवन में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के नोडल और सहायक नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। अधिकारियों को शिकायतों के पंजीकरण, निगरानी और समाधान की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। साथ ही तकनीकी प्लेटफॉर्म के संचालन और जवाबदेही से जुड़े पहलुओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई।</p>
<p class="isSelectedEnd">प्रशिक्षण कार्यक्रम की अध्यक्षता सुशासन एवं अभिसरण विभाग के सचिव राहुल भगत ने की। उन्होंने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन केवल एक शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूत करने का माध्यम भी बनेगी। उन्होंने कहा कि नागरिकों की समस्याओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करना सभी विभागों की जिम्मेदारी होगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सरकार द्वारा विकसित नई शिकायत प्रबंधन प्रणाली को इस तरह तैयार किया गया है कि यदि किसी अधिकारी या विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है तो वह स्वतः अगले स्तर पर पहुंच जाएगी। यह प्रक्रिया एल-1 से एल-4 स्तर तक लागू होगी। इससे शिकायतों की लगातार निगरानी संभव होगी और अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से शिकायतों के लंबित रहने की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई प्रणाली की एक और महत्वपूर्ण विशेषता शिकायतकर्ता का फीडबैक है। शिकायत के निराकरण के बाद संबंधित व्यक्ति से प्रतिक्रिया ली जाएगी। इससे यह पता चल सकेगा कि शिकायत का समाधान वास्तव में हुआ है या नहीं। यदि शिकायतकर्ता समाधान से संतुष्ट नहीं होता है तो मामले की पुनः समीक्षा की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल शिकायत बंद करना नहीं बल्कि वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है। संयुक्त सचिव मयंक अग्रवाल ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बताया कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू होने के बाद नागरिक टोल-फ्री नंबर 1076 पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा आधुनिक तकनीक को ध्यान में रखते हुए वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोगों को आसानी होगी और वे अपनी सुविधा के अनुसार माध्यम का चयन कर सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">सरकार का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग से शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। नागरिक अपनी शिकायत की स्थिति को भी ट्रैक कर सकेंगे। इससे उन्हें बार-बार कार्यालयों में जाकर जानकारी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। प्रशासनिक स्तर पर भी शिकायतों के डेटा का विश्लेषण कर उन क्षेत्रों की पहचान की जा सकेगी जहां सबसे अधिक समस्याएं सामने आ रही हैं। यदि इस हेल्पलाइन का प्रभावी संचालन किया गया तो यह शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है। कई राज्यों में इसी तरह की हेल्पलाइन सेवाओं ने नागरिकों को त्वरित राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी मॉडल को अपनाकर प्रशासनिक सेवाओं को और अधिक जनहितैषी बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।</p>
<p class="isSelectedEnd">ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल विशेष रूप से लाभकारी साबित हो सकती है। अक्सर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले नागरिकों को अपनी समस्याएं संबंधित विभागों तक पहुंचाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अब वे एक फोन कॉल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उसके समाधान की जानकारी भी प्राप्त कर सकेंगे। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के शुभारंभ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। राज्य सरकार को उम्मीद है कि यह व्यवस्था जनता और प्रशासन के बीच बेहतर संवाद स्थापित करेगी। साथ ही नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के जरिए सुशासन की अवधारणा को और मजबूत करेगी। 9 जून से शुरू होने वाली यह सेवा आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:47:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला, मीसाबंदियों को हर माह 25 हजार रुपये सम्मान राशि</title>
                                    <description><![CDATA[लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन, चिकित्सा सुविधाओं का भी मिलेगा लाभ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/big-decision-of-chhattisgarh-government-to-give-honorarium-of-rs/article-54732"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/chhattisgarh-misa-detainees.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">छत्तीसगढ़ सरकार ने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और लोकतंत्र सेनानियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने लोकतंत्र सेनानी सम्मान अधिनियम में संशोधन करते हुए पात्र लोगों को मिलने वाली सम्मान राशि और सुविधाओं का दायरा बढ़ा दिया है। इस फैसले के तहत अब पात्र मीसाबंदियों को हर महीने 25 हजार रुपये तक की सम्मान राशि दी जाएगी। इसके साथ ही उन्हें स्वतंत्रता सेनानियों के समान चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार के इस निर्णय को लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार संशोधित अधिनियम का उद्देश्य उन लोगों को सम्मान और आर्थिक सहायता प्रदान करना है, जिन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। आपातकाल के समय अनेक लोगों को मीसा (मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत गिरफ्तार किया गया था और कई लोगों ने जेलों में लंबा समय बिताया था। ऐसे लोगों को लोकतंत्र सेनानी के रूप में सम्मानित करने के लिए राज्य सरकार पहले से योजना चला रही थी, लेकिन अब इसमें महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई व्यवस्था के अनुसार योजना के दायरे से बाहर रह गए पात्र लोकतंत्र सेनानियों को भी लाभ लेने का अवसर मिलेगा। हालांकि इसके लिए उन्हें निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र व्यक्तियों को अधिसूचना जारी होने के 90 दिनों के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सम्मान राशि प्राप्त करने के लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन देना अनिवार्य होगा। आवेदन के साथ जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रमाण पत्र भी संलग्न करना होगा, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित व्यक्ति आपातकाल के दौरान निरुद्ध या कारावास में रहा था। सरकार ने आवेदन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन का प्रावधान भी किया है। यह समिति प्राप्त आवेदनों की जांच करेगी और पात्रता का निर्धारण करेगी। समिति की अध्यक्षता जिले के प्रभारी मंत्री करेंगे। इसके अलावा अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी समिति का हिस्सा होंगे। जांच और सत्यापन के बाद पात्र लोगों को सम्मान राशि और अन्य सुविधाओं का लाभ दिया जाएगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">संशोधित अधिनियम के तहत विभिन्न श्रेणियों के मीसाबंदियों के लिए अलग-अलग राशि निर्धारित की गई है। जिन लोगों को आपातकाल के दौरान एक महीने तक जेल या थाने में निरुद्ध रखा गया था, उन्हें प्रति माह 8 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। वहीं एक माह से अधिक और पांच माह तक जेल या थाने में निरुद्ध रहने वाले लोगों को हर महीने 15 हजार रुपये की राशि मिलेगी। लंबे समय तक कारावास झेलने वाले पात्र मीसाबंदियों को अधिक राशि दिए जाने का भी प्रावधान किया गया है। सरकार के फैसले के अनुसार कुछ श्रेणियों में यह सम्मान राशि बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह तक दी जाएगी। सरकार ने केवल आर्थिक सहायता तक ही इस योजना को सीमित नहीं रखा है। संशोधन के बाद पात्र लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान चिकित्सा सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी। इससे उन्हें सरकारी अस्पतालों और निर्धारित स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। माना जा रहा है कि इस कदम से बुजुर्ग लोकतंत्र सेनानियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें भी बढ़ जाती हैं।</p>
<p class="isSelectedEnd">राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कई वर्षों से लोकतंत्र सेनानी संगठनों की ओर से सम्मान राशि बढ़ाने और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोगों को उचित सम्मान और सहायता मिलनी चाहिए। अब सरकार के इस फैसले के बाद इन मांगों को काफी हद तक पूरा माना जा रहा है। यह निर्णय केवल आर्थिक सहायता का विषय नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देने का प्रयास भी है। आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है और उस दौर में संघर्ष करने वाले लोगों की भूमिका को विभिन्न स्तरों पर याद किया जाता रहा है। ऐसे में राज्य सरकार का यह कदम उन लोगों के योगदान को औपचारिक रूप से मान्यता देने की दिशा में भी देखा जा रहा है।</p>
<p>अधिसूचना जारी होने के बाद पात्र लोगों के बीच आवेदन प्रक्रिया को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। आने वाले दिनों में जिला स्तर पर आवेदन प्राप्त किए जाएंगे और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद पात्र लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान राशि और चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिलना प्रारंभ होगा। सरकार का मानना है कि इससे उन लोगों को सम्मान और सुरक्षा दोनों मिलेंगे जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 13:34:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एमपी पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत, गंभीर बीमारियों पर मिलेगा 14 लाख तक इलाज खर्च</title>
                                    <description><![CDATA[हार्ट अटैक, कैंसर और पैरालिसिस जैसी बीमारियों के लिए बढ़ाया गया स्वास्थ्य कवर]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/madhya-pradesh/big-relief-to-mp-policemen-for-serious-diseases-treatment-expenses/article-54402"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/mp-police-health-scheme.jpg" alt=""></a><br /><p class="isSelectedEnd">मध्य प्रदेश पुलिस विभाग ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों को बड़ी राहत देते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे को बढ़ा दिया है। अब पुलिसकर्मियों और उनके आश्रितों को हार्ट अटैक, पैरालिसिस, कैंसर, कोमा और ऑर्गन ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अधिकतम 14 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता मिल सकेगी। विभाग की ओर से यह सुविधा पूर्ण प्रतिपूर्ति यानी फुल रीइम्बर्समेंट के रूप में दी जाएगी। इस फैसले को पुलिस कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण कल्याणकारी कदम माना जा रहा है।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी नई व्यवस्था के तहत पहले जहां इलाज के खर्च का केवल एक हिस्सा या अंतर राशि ही दी जाती थी, वहीं अब गंभीर बीमारियों में पूरा खर्च कवर करने का प्रस्ताव लागू किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान लगातार तनाव, लंबे कार्य घंटे और जोखिम भरे हालातों के कारण पुलिसकर्मियों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में यह योजना कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">नई स्वास्थ्य सहायता योजना में हार्ट अटैक, लकवा यानी पैरालिसिस, कैंसर, कोमा, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और ओपन हार्ट सर्जरी जैसी गंभीर बीमारियों को शामिल किया गया है। इसके अलावा ड्यूटी के दौरान घायल होने या सड़क दुर्घटनाओं जैसी आपात स्थितियों में भी कर्मचारियों को इलाज का लाभ मिलेगा। विभाग का मानना है कि गंभीर बीमारी के समय आर्थिक चिंता कम होने से कर्मचारी और उनके परिवार बेहतर तरीके से इलाज करा सकेंगे।</p>
<p class="isSelectedEnd">योजना के तहत सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कैशलेस इलाज सुविधा को लेकर किया गया है। अब हार्ट अटैक या गंभीर सड़क दुर्घटना जैसी जीवन रक्षक स्थितियों में मरीज को निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी। मरीज की स्थिति स्थिर होने तक इलाज का खर्च विभाग की ओर से वहन किया जाएगा। इससे आपात स्थिति में पुलिसकर्मियों को तत्काल इलाज मिल सकेगा और उन्हें अस्पतालों में आर्थिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस विभाग के अधिकारियों के अनुसार पहले कई मामलों में कर्मचारियों को इलाज के लिए निजी स्तर पर बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती थी। बाद में प्रतिपूर्ति प्रक्रिया में समय लगने से आर्थिक दबाव बढ़ जाता था। नई व्यवस्था लागू होने के बाद गंभीर बीमारियों में अधिकतम 14 लाख रुपये तक का पूरा खर्च देने का प्रावधान किया गया है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।</p>
<p class="isSelectedEnd">इस योजना का लाभ केवल पुलिसकर्मियों को ही नहीं बल्कि उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी मिलेगा। विभाग का कहना है कि कई बार गंभीर बीमारी के कारण परिवार आर्थिक संकट में आ जाता है। ऐसे मामलों में यह स्वास्थ्य कवर बड़ी सहायता साबित होगा। पुलिस परिवारों ने भी इस फैसले का स्वागत किया है और इसे कर्मचारी हित में बड़ा कदम बताया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस विभाग जैसे तनावपूर्ण कार्यक्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों में हार्ट संबंधी बीमारियां, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक तनाव के मामले सामान्य लोगों की तुलना में अधिक देखे जाते हैं। लगातार ड्यूटी, अनियमित दिनचर्या और जोखिम भरे माहौल का असर स्वास्थ्य पर पड़ता है। ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा योजना बेहद जरूरी मानी जा रही थी।</p>
<p class="isSelectedEnd">पुलिस विभाग के भीतर लंबे समय से स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत करने की मांग उठ रही थी। कई कर्मचारी संगठनों ने गंभीर बीमारियों के इलाज में आने वाले भारी खर्च को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया था। अब नई योजना लागू होने के बाद माना जा रहा है कि कर्मचारियों में सुरक्षा और भरोसे की भावना मजबूत होगी।</p>
<p class="isSelectedEnd">योजना के संचालन और आवेदन प्रक्रिया को लेकर जल्द विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। कर्मचारियों को आवश्यक दस्तावेज, अस्पताल संबंधी प्रक्रिया और प्रतिपूर्ति के नियमों की जानकारी दी जाएगी। पुलिस मुख्यालय और कल्याण शाखा को इस संबंध में नोडल एजेंसी बनाया गया है।</p>
<p class="isSelectedEnd">अधिकारियों ने बताया कि योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक मदद देना नहीं, बल्कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को मानसिक सुरक्षा भी प्रदान करना है। गंभीर बीमारी की स्थिति में परिवारों को अक्सर इलाज और खर्च दोनों की चिंता रहती है। ऐसे समय में विभाग की यह सहायता महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>
<p>मध्य प्रदेश पुलिस की इस नई पहल को राज्य सरकार की कर्मचारी कल्याण नीतियों के तहत बड़ा कदम माना जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के दायरे को और भी बढ़ाया जा सकता है। फिलहाल पुलिस विभाग के हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों को इस फैसले से बड़ी राहत मिलने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>मध्य प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 12:47:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बैंक मित्र गायब, पेंशन रुकी… छत्तीसगढ़ में 500 रुपये पेंशन के लिए 5 किमी सास को पीठ पर ढोकर बैंक पहुंची बहू</title>
                                    <description><![CDATA[छत्तीसगढ़ के सरगुजा में बहू 90 साल की सास को 5 किमी पीठ पर ढोकर बैंक ले गई। 500 रुपये पेंशन के लिए संघर्ष और सिस्टम की खामियां उजागर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/bank-mitra-missing-pension-stopped%E2%80%A6-in-chhattisgarh-daughter-in-law-carried-her/article-54076"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/daughter-in-law-carries-mother-in-law-on-her-back-to-the-bank.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक तस्वीर सामने आई है जिसने सिस्टम और वास्तविकता के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को मैनपाट ब्लॉक के कुनिया गांव में जंगलपारा में एक बहू ने अपनी 90 साल की सास को पीठ पर उठाकर लगभग 5 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक तक पहुंचाया। ये सब उसने इसलिए किया क्योंकि उसे वृद्धावस्था पेंशन का 500 रुपए निकालना था</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जो पिछले कुछ महीनों से रुकी हुई थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इसे देखकर लोग एक तरफ भावुक हो रहे हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो दूसरी तरफ नाराज भी हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सूत्रों के मुताबिक</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब है और गांव में पक्की सड़क तक की सुविधा नहीं है। घर से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर एक नाला है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जहां से आगे कोई वाहन नहीं जा सकता। इसके बाद फिर से करीब साढ़े तीन किलोमीटर कठिन पैदल रास्ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे पार करना आसान नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">खासकर जब आपको 90 साल की बुजुर्ग महिला को अपने साथ ले जाना हो। इस मुश्किल समय में बहू सुखमनिया ने अपनी सास सोनवारी को पीठ पर लादकर बैंक की दिशा में चलना शुरू किया। ग्रामीण बताते हैं कि ये पहली बार नहीं है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जब उन्होंने अपनी सास को इस तरह से बैंक ले जाया है। रास्ते में नाला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कच्चा रास्ता और गर्मी</span>—<span lang="hi" xml:lang="hi">इन सब से हालात बहुत मुश्किल होते हैं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन परिवार के पास कोई और चारा नहीं था।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले बैंक मित्र घर पर पेंशन पहुंचा देते थे</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे बुजुर्गों को राहत मिलती थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से ये सुविधा बंद कर दी गई है। इसके साथ ही </span>KYC <span lang="hi" xml:lang="hi">प्रक्रिया पूरी ना होने के कारण भी पेंशन अटकती रही</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे तीन महीने तक कोई भुगतान नहीं हुआ। इसी बीच शुक्रवार को मजबूरी में बहू को ये कदम उठाना पड़ा। गांव में लोग इस बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं कि अगर समय पर बैंक मित्र या सिस्टम सक्रिय होते</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">तो शायद ये स्थिति नहीं बनती। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि इसे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही कहा जा सकता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जबकि कुछ इसे भौगोलिक कठिनाइयों से भी जोड़कर देख रहे हैं।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">बैंक पहुंचने के बाद बहू को तीन महीने की रुकी हुई पेंशन के 1500 रुपए दिए गए। हालांकि</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">खाते में कुल चार महीने के लिए करीब 2000 रुपए जमा थे। बैंक मैनेजर मिर्जा अल्ताफ बेग ने बताया कि इलाके में वृद्धावस्था पेंशन को घर-घर पहुंचाने की व्यवस्था पहले से मौजूद है और इसके लिए बैंक के कई मित्र काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि लाभार्थियों या उनके परिजनों को सूचना देने पर बैंक मित्र को घर भेजा जा सकता है। लेकिन जमीन पर ये व्यवस्था कितनी प्रभावी है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">ये घटना फिर से दिखा गई है। वहीं</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">बहू सुखमनिया ने कहा कि वह सिर्फ अपनी सास की पेंशन के लिए कई दिनों से परेशान थी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">लेकिन उसे कोई समाधान नहीं मिला</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके बाद उसे ये कठिन रास्ता अपनाना पड़ा। गांव लौटने के बाद भी ये घटना लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 17:58:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>EPFO में बड़ा बदलाव: UPI से मिलेगा PF का पैसा, WhatsApp पर भी सुविधा शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[EPFO जल्द UPI आधारित PF निकासी, WhatsApp सेवा और 5 लाख तक ऑटो सेटलमेंट सुविधा शुरू करने जा रहा है। जानिए पूरी डिटेल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/business/big-change-in-epfo-pf-money-will-be-available-from/article-54000"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-05/epfo-update.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">देशभर के लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">से एक अच्छी खबर आई है। आने वाले समय में प्रोविडेंट फंड (</span>PF) <span lang="hi" xml:lang="hi">निकालना पहले से कहीं ज्यादा आसान होने वाला है। सरकार </span>EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">सिस्टम में बड़े डिजिटल बदलाव करने जा रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके तहत अब </span>UPI <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए </span>PF <span lang="hi" xml:lang="hi">का पैसा सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसके साथ ही </span>WhatsApp <span lang="hi" xml:lang="hi">पर 24 घंटे सेवा और 5 लाख रुपये तक ऑटो सेटलमेंट जैसी सुविधाएं भी शुरू की जा रही हैं।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">केंद्रीय श्रम मंत्री </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">Mansukh Mandaviya <span lang="hi" xml:lang="hi">ने बताया कि </span>UPI <span lang="hi" xml:lang="hi">आधारित </span>PF <span lang="hi" xml:lang="hi">निकासी सुविधा की टेस्टिंग सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है। इसके जल्द ही लागू होने की संभावना है। इस बदलाव का लाभ देश के 7 करोड़ से ज्यादा </span>EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">सदस्यों को मिलेगा। वर्तमान में</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">कर्मचारियों को </span>PF <span lang="hi" xml:lang="hi">निकालने के लिए </span>EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">पोर्टल पर क्लेम करना पड़ता है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसके लिए कभी-कभी पैसे आने में काफी समय लग सकता है। लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह प्रक्रिया काफी तेज हो सकती है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">नई सुविधा के तहत सदस्य अपने खाते में उपलब्ध निकासी योग्य राशि को सीधे देख सकेंगे। इसके बाद लिंक्ड </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">UPI <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए पैसे का ट्रांसफर किया जा सकेगा। रकम सीधे बैंक खाते में पहुंच जाएगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">और कर्मचारी उसे </span>ATM, UPI <span lang="hi" xml:lang="hi">या ऑनलाइन पेमेंट के लिए इस्तेमाल कर सकेंगे। अधिकारियों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">इससे कर्मचारियों को इमरजेंसी में तुरंत मदद मिलेगी और दफ्तर के चक्कर भी कम लगाने होंगे।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार ने ऑटो सेटलमेंट सुविधा की सीमा भी बढ़ा दी है। अब यह सुविधा पहले 1 लाख रुपये तक के क्लेम्स पर लागू थी</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। बीमारी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">शादी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पढ़ाई या घर बनाने जैसे जरूरी कामों के लिए किए गए क्लेम अब बिना मैनुअल प्रक्रिया के तेजी से निपटाए जा सकेंगे। बताया जा रहा है कि ऐसे मामलों में सिर्फ तीन दिन के भीतर पैसा ट्रांसफर करने की योजना है।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">अब </span>WhatsApp <span lang="hi" xml:lang="hi">पर एक नई सेवा भी शुरू करने जा रहा है। सदस्य सिर्फ "</span>Hello" <span lang="hi" xml:lang="hi">लिखकर </span>EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">की वेरिफाइड </span>WhatsApp <span lang="hi" xml:lang="hi">सेवा से जुड़ सकेंगे। इससे उन्हें </span>PF <span lang="hi" xml:lang="hi">बैलेंस</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछली ट्रांजैक्शन</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">क्लेम स्टेटस और अन्य जरूरी जानकारियाँ अपने मोबाइल पर ही मिल जाएंगी। खास बात यह है कि ये सुविधाएं हिंदी समेत कई स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएंगी</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के लोगों को भी सहूलियत मिलेगी।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार आधार और </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">DBT <span lang="hi" xml:lang="hi">से जुड़ी समस्याओं को भी कम करने की कोशिश में है। जिन सदस्यों का आधार ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं हुआ है या </span>DBT <span lang="hi" xml:lang="hi">में दिक्कत आ रही है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">उन्हें </span>WhatsApp <span lang="hi" xml:lang="hi">के जरिए सहायता और गाइडेंस मिलेगी। अधिकारियों का कहना है कि इसका मकसद यह है कि लोगों को छोटी समस्याओं के लिए </span>EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">कार्यालय नहीं जाना पड़े।</span></span></p>
<p class="MsoNormal" style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">साथ ही</span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">, EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">पुराने मामलों और शिकायतों को तेजी से निपटाने में भी जुटा हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">पिछले एक साल में उपभोक्ता अदालतों और लंबित मामलों की संख्या में कमी आई है। 10 साल से ज्यादा पुराने मामलों में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। </span>'<span lang="hi" xml:lang="hi">निधि आपके निकट</span>' <span lang="hi" xml:lang="hi">अभियान के जरिए लोगों की शिकायतों का समाधान तेजी से किया जा रहा है।</span></span></p>
<p style="text-align:justify;"><span lang="hi" style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;" xml:lang="hi">सरकार इसे डिजिटल </span><span style="font-size:12pt;line-height:115%;font-family:Mangal, serif;">EPFO <span lang="hi" xml:lang="hi">की दिशा में एक बड़ा कदम मानती है। आने वाले समय में </span>PF <span lang="hi" xml:lang="hi">से जुड़ी अधिकांश सेवाएं मोबाइल और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने की उम्मीद है</span>, <span lang="hi" xml:lang="hi">जिससे कर्मचारियों का समय भी बचेगा और प्रक्रियाएं और भी सरल हो जाएंगी।</span></span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 May 2026 00:00:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rohit.P]]></dc:creator>
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