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                <title>Disaster Management - दैनिक जागरण</title>
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                <description>Disaster Management RSS Feed</description>
                
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                <title>मानसून तैयारियों पर सख्त हुए कलेक्टर, सभी पीएचसी में एंटीवेनम वैक्सीन उपलब्ध रखने के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[बलौदाबाजार में स्वास्थ्य सेवाओं, बाढ़ प्रबंधन, पेयजल व्यवस्था और खरीफ सीजन की तैयारियों की समीक्षा; अस्पतालों, क्विक रिस्पॉन्स टीम और कंट्रोल रूम को अलर्ट रहने के आदेश।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/state/chhattisgarh/collector-becomes-strict-on-monsoon-preparations-instructions-to-keep-antivenom/article-58200"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-07/balodabazar-news-(2).jpg" alt=""></a><br /><p class="PDq2pG_selectionAnchorContainer">मानसून के दौरान संभावित स्वास्थ्य और आपदा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए बलौदाबाजार जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में पर्याप्त मात्रा में एंटीवेनम वैक्सीन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ जाती हैं, इसलिए किसी भी मरीज को इलाज के लिए इंतजार नहीं करना पड़े। सभी स्वास्थ्य केंद्रों में दवाइयों, जरूरी उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए ताकि आपात स्थिति में तुरंत उपचार शुरू किया जा सके। बैठक में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ राजस्व, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि और आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने भी भाग लिया।</p>
<p>कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि मानसून के दौरान मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पूरे स्वास्थ्य अमले को अलर्ट मोड पर रखा जाए और किसी भी क्षेत्र से बीमारी फैलने की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए। विकासखंड स्तर पर गठित क्विक रिस्पॉन्स टीमों को सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि किसी गांव या मोहल्ले में अचानक बुखार, डायरिया, उल्टी या अन्य संक्रामक बीमारी के मामले सामने आते हैं तो टीम तुरंत मौके पर पहुंचे और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए। अधिकारियों के अनुसार समय रहते कार्रवाई होने से बीमारी के फैलाव को रोका जा सकता है।</p>
<p>बैठक में मितानिनों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी मितानिनें अपनी दवा पेटी में आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखें और नियमित रूप से घर-घर जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जानकारी लें। यदि किसी परिवार में कोई व्यक्ति बीमार मिले या संक्रामक बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दी जाए। साथ ही लोगों को साफ-सफाई, हाथ धोने, उबला या स्वच्छ पानी पीने और खुले में रखे भोजन से बचने के बारे में जागरूक करने को भी कहा गया। प्रशासन का मानना है कि गांव स्तर पर सक्रिय निगरानी से कई बीमारियों को शुरुआती चरण में ही नियंत्रित किया जा सकता है।</p>
<p>बरसात के मौसम में पेयजल की शुद्धता भी प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल रही। बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देश दिए गए कि जिले के सभी पेयजल स्रोतों की जांच समय पर पूरी की जाए और जहां जरूरत हो वहां क्लोरीनीकरण कराया जाए। कलेक्टर ने कहा कि दूषित पानी के कारण डायरिया और अन्य जलजनित बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लोगों को स्वच्छ पेयजल लगातार उपलब्ध हो।</p>
<p>बैठक के दौरान संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रशासन ने नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए राजस्व विभाग, पुलिस और आपदा राहत दलों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। जिले के पांच चिन्हित पुलों पर विशेष निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर आवागमन अस्थायी रूप से रोकने की तैयारी रखने को कहा गया। जिला कंट्रोल रूम को चौबीसों घंटे सक्रिय रखने और किसी भी आपात सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>कृषि क्षेत्र की तैयारियों की भी बैठक में समीक्षा की गई। खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी समिति में उर्वरक या बीज की कमी नहीं होनी चाहिए। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ऋण वितरण की स्थिति की भी समीक्षा की गई और पात्र किसानों को समय पर लाभ दिलाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा एग्रीस्टेक पंजीयन की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा में कार्य पूरा करने के निर्देश दिए गए।</p>
<p>समय-सीमा बैठक में जिले में चल रही विभिन्न सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। राजस्व प्रकरणों के निराकरण, स्वामित्व योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री जनदर्शन, सीएम हेल्पलाइन, सीपी ग्राम्स और सड़क तथा पुल-पुलिया निर्माण से जुड़े मामलों की प्रगति पर चर्चा हुई। कलेक्टर ने सभी विभागों को लंबित मामलों का जल्द समाधान करने और आम नागरिकों की शिकायतों का समय पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचना चाहिए और विकास कार्यों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।</p>
<p>बैठक में अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने की भी सलाह दी गई। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि मानसून के दौरान छोटी लापरवाही भी बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। इसलिए स्वास्थ्य, पेयजल, राहत एवं बचाव, कृषि और राजस्व विभाग लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहें और किसी भी स्थिति में तत्काल संयुक्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल आपदा आने के बाद राहत पहुंचाना नहीं बल्कि पहले से ऐसी तैयारी करना है जिससे लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>छत्तीसगढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 15:53:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का भूकंप, 19 लोगों की मौत, 134 घायल</title>
                                    <description><![CDATA[मिंदानाओ द्वीप के पास आए शक्तिशाली भूकंप से कई इमारतें ढहीं, सुनामी की लहरें भी दर्ज; राहत और बचाव अभियान जारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/78-magnitude-earthquake-hits-philippines-19-dead-134-injured/article-55306"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-06/philippines-earthquake.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">फिलीपींस में सोमवार सुबह आए शक्तिशाली भूकंप ने व्यापक तबाही मचाई है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार 7.8 तीव्रता के इस भूकंप में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि 134 से अधिक लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा है और कुछ भवन पूरी तरह धराशायी हो गए हैं। भूकंप के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मृतकों और घायलों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि कई प्रभावित क्षेत्रों में अभी भी खोज अभियान जारी है। सात लोगों के लापता होने की भी जानकारी सामने आई है, जिनकी तलाश की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार भूकंप भारतीय समयानुसार सुबह करीब 5 बजकर 7 मिनट पर आया। इसका केंद्र फिलीपींस के मिंदानाओ द्वीप के निकट जमीन से लगभग 35 किलोमीटर नीचे स्थित था। झटके इतने तेज थे कि लोगों की नींद खुल गई और हजारों लोग घबराकर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कई शहरों और कस्बों में लोगों ने खुले मैदानों और सड़कों पर शरण ली। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ स्थानों पर इमारतें कई सेकंड तक हिलती रहीं और लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।</p>
<p style="text-align:justify;">भूकंप का सबसे ज्यादा असर व्यावसायिक क्षेत्रों में देखने को मिला है। प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक कई दुकानें, कार्यालय और व्यावसायिक भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ जगहों पर दीवारें गिर गईं, जबकि कई इमारतों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित भवनों को खाली कराकर सुरक्षा घेरा बना दिया है। इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीमें संरचनात्मक नुकसान का आकलन कर रही हैं ताकि यह तय किया जा सके कि कौन सी इमारतें उपयोग के लिए सुरक्षित हैं और किन्हें बंद करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस ज्वालामुखी और भूकंप विज्ञान संस्थान ने बताया कि सोमवार सुबह 11 बजे तक कुल 138 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए। इन झटकों की तीव्रता 1.3 से लेकर 6.7 तक रही। लगातार आ रहे झटकों के कारण लोगों में डर का माहौल बना हुआ है। कई परिवार अब भी घरों में लौटने से बच रहे हैं और खुले स्थानों पर ही समय बिता रहे हैं। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।</p>
<p style="text-align:justify;">भूकंप के बाद सुनामी की आशंका भी पैदा हो गई थी। मिंदानाओ द्वीप के छह अलग-अलग इलाकों में समुद्र के जलस्तर में असामान्य बढ़ोतरी दर्ज की गई। अधिकारियों के अनुसार सबसे ऊंची लहर लगभग 1.4 मीटर यानी करीब 4.6 फीट तक पहुंची। हालांकि यह लहरें बड़े पैमाने पर विनाशकारी साबित नहीं हुईं, फिर भी तटीय क्षेत्रों में एहतियात के तौर पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई। सुनामी की आशंका को देखते हुए इंडोनेशिया और मलेशिया ने भी चेतावनी जारी की थी। बाद में स्थिति सामान्य होने पर इन चेतावनियों को वापस ले लिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">राहत एजेंसियां और आपदा प्रबंधन दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। कई स्थानों पर मलबे में फंसे लोगों को निकालने का प्रयास जारी है। अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है और अतिरिक्त चिकित्सा दल भी तैनात किए गए हैं। फिलीपींस की नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी जुटाई जा रही है और मौतों के आंकड़ों का आधिकारिक सत्यापन किया जा रहा है। दूरदराज के कुछ इलाकों में संचार और बिजली सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं, जिससे राहत कार्यों में चुनौतियां सामने आ रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलीपींस प्रशांत महासागर के उस क्षेत्र में स्थित है जिसे "रिंग ऑफ फायर" कहा जाता है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय क्षेत्रों में गिना जाता है। इसी वजह से यहां अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां देखने को मिलती हैं। हालांकि इस बार आए भूकंप की तीव्रता काफी अधिक थी, जिसके कारण इसका प्रभाव व्यापक क्षेत्र में महसूस किया गया। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में भी सुरक्षा जांच शुरू कर दी गई है। प्रभावित परिवारों के लिए अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 17:59:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Vaishnavi.J]]></dc:creator>
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                <title>जनगणना 2026: पहला चरण अप्रैल से, 33 सवाल और डिजिटल पोर्टल के साथ लाइव-इन कपल को शादीशुदा दर्जा</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने 2026 की जनगणना के पहले चरण के लिए 33 सवाल जारी किए; घरों की सूची, बुनियादी सुविधाओं और जाति डेटा डिजिटल माध्यम से जुटाया जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.dainikjagranmpcg.com/national-international/census-2026-first-phase-33-questions-from-april-and-married/article-49562"><img src="https://www.dainikjagranmpcg.com/media/400/2026-03/census-2026.jpg" alt=""></a><br /><p>भारत में जनगणना 2026 का पहला चरण 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा और यह सितंबर तक चलेगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने इस चरण के लिए कुल 33 सवाल तय किए हैं, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि स्थिर संबंध में रहने वाले लाइव-इन कपल्स को उनकी सहमति पर शादीशुदा माना जाएगा।</p>
<p>सरकार ने इस चरण के लिए ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया है, जहां नागरिक स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। पोर्टल में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) और सहायता विकल्प भी उपलब्ध होंगे। इस चरण को ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ कहा गया है, जिसका उद्देश्य घरों, बुनियादी सुविधाओं और उनकी स्थिति का विस्तृत आंकलन करना है।</p>
<p>केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश 30 दिनों में यह कार्य पूरा करेगा। इसके पहले नागरिकों को सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प मिलेगा, जिससे घरों की जानकारी घर बैठे भर सकेंगे। 2021 की जनगणना महामारी के कारण स्थगित हुई थी और अब इसे 2027 में पूरा किया जाएगा।</p>
<p>इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। लगभग 30 लाख कर्मी मोबाइल ऐप और पोर्टल के माध्यम से डेटा संग्रह करेंगे। यह एप्लिकेशन एंड्रॉइड और iOS दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगे। डिजिटल प्रक्रिया के अंतर्गत जाति आधारित डेटा भी शामिल किया जाएगा। यह स्वतंत्र भारत में पहली बार होगा, जब जाति का विस्तृत आंकलन किया जाएगा।</p>
<p>सरकार ने हर घर पर ‘डिजी डॉट’ बनाने की योजना भी बनाई है, जिससे पांच प्रमुख लाभ होंगे:</p>
<p>आपदा प्रबंधन: डिजिटल लेआउट से बाढ़, भूकंप या बादल फटने जैसी आपदाओं में तुरंत राहत एवं बचाव की सुविधा मिलेगी।</p>
<p>परिसीमन और चुनावी सीमांकन: राजनीतिक सीमाओं का संतुलित और यथार्थ आधारित निर्धारण संभव होगा।</p>
<p>शहरी योजना: सड़कों, स्कूलों, अस्पतालों और पार्कों की योजना अधिक सटीक ढंग से बनाई जा सकेगी।</p>
<p>शहरीकरण और पलायन डेटा: समय के साथ प्रवास और शहरीकरण की दर का सटीक विश्लेषण किया जा सकेगा।</p>
<p>मतदाता सूची सुधार: आधार लिंक और जियो-टैगिंग से डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकेंगे।</p>
<p>2011 की पिछली जनगणना के अनुसार भारत की आबादी लगभग 121 करोड़ थी, जिसमें पुरुष 51.5% और महिलाएं 48.5% थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ने जातिगत डेटा संग्रह को मंजूरी दी थी।</p>
<p>विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना से न केवल डेटा की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि सरकारी योजनाओं और संसाधनों के वितरण में भी पारदर्शिता और प्रभावशीलता बढ़ेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Mar 2026 13:22:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Nitin Trivedi]]></dc:creator>
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